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थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। संसद में 16 अप्रैल से होने वाले विशेष सत्र से पहले थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार 3 दिन के सत्र का इस्तेमाल राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की तैयारी के लिए कर रही है। थरूर ने X पर लिखा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की समर्थक रही है। 2013 में कांग्रेस ने ही यह बिल पेश कर राज्यसभा से पास कराया था, लेकिन मौजूदा सरकार का रवैया चिंताजनक है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें सरकार के प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई गई। थरूर ने दक्षिण के राज्यों का मुद्दा क्यों उठाया 2023 के कानून में साफ लिखा है कि महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन यानी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर एक आयोग सीटों का बंटवारा तय करता है। आखिरी बार परिसीमन 2002-2008 के बीच हुआ था, जो 1971 की जनगणना के आधार पर था। सरकार लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों (UP, बिहार, मध्य प्रदेश) की सीटें बढ़ेंगी। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) को डर है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो जाएगा। अगर कुछ राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ती हैं, तो संसद में उनका प्रभाव भी बढ़ेगा। इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। यही विपक्ष की बड़ी चिंता है। बिल पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई कांग्रेस ने शुक्रवार को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई। इस दौरान पार्टी ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़ा प्रस्तावित परिसीमन संवैधानिक नहीं है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। इस पर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। CWC की बैठक के दौरान, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि वे अब सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे, जो 15 अप्रैल को हो सकती है, ताकि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए चर्चा की जा सके और एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके। महिला आरक्षण संशोधन बिल पर विशेष सत्र क्यों केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 816 किया जाना है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सीटें भी तय की जाएंगी, यानी लगभग 273 सीटें (करीब 33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन करके लागू किया जाएगा। इस कानून का मकसद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, जिसमें SC/ST महिलाओं का हिस्सा भी शामिल रहेगा। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो जाए, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सके। —————————- ये खबर भी पढ़ें… खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा: सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। पढ़ें पूरी खबर…

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