आपकी पेशाब में भी आ रहा स्पर्म? यह कौन सी बीमारी और कितनी खतरनाक, डॉक्टर से जानें वजह और ट्रीटमेंट

Last Updated:April 13, 2026, 10:43 IST Sperm Discharge in Urine: कई लोगों के पेशाब में स्पर्म आने लगता है. अक्सर लोग इसे गंभीर बीमारी मान लेते हैं और नीम-हकीम के चक्कर में फंस जाते हैं. गंगाराम हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक के मुताबिक पेशाब में स्पर्म आना कोई बीमारी नहीं है. जब युवा लड़कों के शरीर में स्पर्म जमा हो जाता है, तो यह पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगता है. कुछ मामलों में स्पर्म का डिस्चार्ज प्रोस्टेट इंफेक्शन की वजह से होता है. ऐसी कंडीशन में एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. पेशाब में स्पर्म आना अधिकतर मामलों में कोई बीमारी नहीं होती है. Sperm Leakage in Urine Causes: कई पुरुषों की पेशाब में स्पर्म आने लगता है. इससे वे परेशान हो जाते हैं और इसे गंभीर बीमारी मान लेते हैं. कई झोलाछाप इस मौके का फायदा उठाते हैं और इलाज के नाम पर हजारों रुपये ऐंठ लेते हैं. जब समस्या कंट्रोल नहीं होती है, तब जाकर डॉक्टर से मिलते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पेशाब में सफेद और चिपचिपा पदार्थ निकलना आमतौर पर किसी बीमारी का संकेत नहीं होता है. हालांकि यह समस्या लंबे समय तक रहे, तो इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है. डॉक्टर से जानते हैं कि पेशाब में स्पर्म क्यों आता है, यह कौन सी बीमारी है और इसका क्या ट्रीटमेंट होता है. नई दिल्ली के सर गंगाराम सिटी हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक ने News18 को बताया कि 20 से 30 साल के युवाओं की पेशाब में स्पर्म आना एक सामान्य बात है. अधिकतर लोगों को पता भी नहीं होता कि उनकी पेशाब में स्पर्म आ रहा है. कई टेस्ट के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है, लेकिन यह बीमारी नहीं होती है. मेडिकल की भाषा में इसे स्पर्मेटोरिया कहा जाता है. यह कई कारणों से हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह शरीर में वीर्य का जमा होना है. जब लंबे समय तक कोई युवा यौन संबंध न बनाए, तो इससे शरीर में जरूरत से ज्यादा स्पर्म जमा हो जाता है. धीरे-धीरे शरीर इसे पेशाब के जरिए नेचुरल तरीके से बाहर निकाल देता है. यह कोई बीमारी नहीं है और इससे डरने की जरूरत नहीं है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक कई बार पेशाब में स्पर्म आने की वजह प्रोस्टेट ग्लैंड में सूजन या इंफेक्शन हो सकती है. अगर कोई व्यक्ति प्रोफेशनल सेक्स वर्कर के साथ बिना कंडोम के संबंध बनाता है, तो इससे उसके यूरेथ्रा में खतरनाक बैक्टीरिया पहुंच जाते हैं. इससे प्रोस्टेट में सूजन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या अन्य संक्रमण पैदा हो सकते हैं. इससे भी सीमन लीक होने लगता है. ऐसे मामलों में जांच के बाद डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं. एक्सपर्ट का साफ कहना है कि इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए संबंध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल करें. इससे करीब 70 से 80% तक संक्रमण से बचाव हो सकता है. अगर इसके बाद किसी तरह की समस्या पैदा हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं और प्रॉपर ट्रीटमेंट लें. डॉक्टर पाठक की मानें तो 35-40 की उम्र के बाद शरीर में स्पर्म प्रोडक्शन कम हो जाता है और इसके बाद पेशाब में स्पर्म न के बराबर आता है. ऐसे में अगर आप युवा हैं और सेक्सुअली एक्टिव नहीं है, तब आपको स्पर्म आने की समस्या हो सकती है. इससे घबराने या डरने की बात नहीं है. यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि आपके हेल्दी होने का संकेत है. अगर समस्या बहुत ज्यादा हो रही है और इसके साथ अन्य लक्षण नजर आ रहे हैं, तब आपको इसकी जांच करानी चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि लोगों को झोलाछापों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. किसी भी परेशानी का इलाज क्वालिफाइड डॉक्टर से ही कराना चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 10:43 IST
5 रुपए किलो बिक रहा तरबूज-खरबूज:खरगोन में लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान; 15 हजार हेक्टेयर में लगी है फसल

खरगोन जिले में मौसम के उतार-चढ़ाव और बाजार में मांग से अधिक आवक होने के कारण तरबूज और खरबूज के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों को अपनी उपज 5 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर भी बेचना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते लागत न निकलने से परेशान किसान अब तरबूज का न्यूनतम भाव 10 रुपए प्रति किलोग्राम तय करने की मांग कर रहे हैं और फिलहाल माल केवल स्थानीय बाजारों में ही खप रहा है। 15 हजार हेक्टेयर में लगी फसल, इस बार दिल्ली नहीं जा रहा माल खरगोन जिले की नर्मदा पट्टी में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में तरबूज और खरबूज की फसल लगाई गई है। कसरावद, बड़वाह, महेश्वर, मंडलेश्वर, जामली, कुकडोल, सेल्दा, मांगरूल और नागझिरी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। आमतौर पर नर्मदा क्षेत्र का तरबूज दिल्ली तक पहुंचता है, लेकिन इस बार बाजार में मांग से अधिक तरबूज की आवक होने के कारण केवल स्थानीय कारोबारी ही खरीदारी कर रहे हैं। किसान बोले- बाहर ले जाना महंगा, इसलिए लोगों में बांटी फसल मांगरूल के किसान कृष्णलाल कुशवाह ने बताया कि तरबूज को बाहर ले जाकर बेचना महंगा पड़ रहा है। उन्होंने अपनी लागत भी नहीं निकाल पाने के कारण फसल लोगों में बांट दी। वहीं, किसान अशोक पाटीदार ने बताया कि प्रति एकड़ फसल पर 25 हजार रुपए का खर्च आया है। थोक में 5 से 6 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर लागत भी नहीं निकल पा रही है। उन्होंने मांग की कि तरबूज का न्यूनतम भाव 10 रुपए प्रति किलोग्राम तय किया जाना चाहिए। 15 अप्रैल के बाद तेज गर्मी पड़ने पर दाम बढ़ने की उम्मीद किसानों का मानना है कि जल्दी लगाई गई फसल अगले 15 दिनों में खेतों से निकल जाएगी। अभी तक ज्यादा गर्मी नहीं पड़ी है, लेकिन 15 अप्रैल से तेज गर्मी पड़ने की संभावना है। गर्मी बढ़ने से तरबूज की मांग बढ़ेगी, जिससे इसके दाम भी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update

Hindi News Sports Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update | Badminton News स्पोर्ट्स डेस्क27 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइनल मुकाबले में आयुष को चीन के शी यू की के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। भारतीय शटलर आयुष शेट्टी को बैडमिंटन एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। फाइनल मुकाबले में उन्हें चीन के शी यू की के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। 60 सालों के बाद किसी भारतीय ने चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाई थी। आयुष से पहले दिनेश खन्ना ने 1965 में मेंस सिंगल्स में गोल्ड जीता था। रविवार को चीन के झेजियांग में खेले गए फाइनल में आयुष का मुकाबला दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की से था। 20 साल के आयुष यह मैच 8-21, 10-21 से सीधे गेम में हार गए। फाइनल में आयुष को 8-21, 10-21 से सीधे गेम में हार मिली। सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय इस हार के बावजूद आयुष ने अपने करियर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वो बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय मेंस शटलर बन गए हैं। इससे पहले 1965 में दिनेश खन्ना ने इस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता था। खन्ना के बाद फाइनल तक का सफर तय करने वाले आयुष पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। टूर्नामेंट में भारत का 19वां मेडल बैडमिंटन एशियन चैंपियनशिप 1962 से खेली जा रही है। टूर्नामेंट में यह भारत का कुल 19वां मेडल है। भारत ने अब तक 2 गोल्ड, 1 सिल्वर (आयुष) और 16 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। 1965 में दिनेश खन्ना ने सिंगल्स में और 2023 में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने मेंस डबल्स में गोल्ड जीता था। सेमीफीइनल में डिफेंडिंग चैंपियन को हराया इस पूरे टूर्नामेंट में आयुष का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने वर्ल्ड नंबर 1, वर्ल्ड नंबर 4 और वर्ल्ड नंबर 7 जैसे टॉप रैंक वाले खिलाड़ियों को हराया था। शनिवार को हुए सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-25 आयुष ने डिफेंडिंग चैंपियन और नंबर-1 प्लेयर कुन्लावत वितिदसर्न को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। ———————– —————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… कोहली ने बाबर-गेल का रिकॉर्ड तोड़ा:रोहित ने मुंबई के लिए 6 हजार रन पूरे किए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL 2026 के 20वें मैच में मुंबई इंडियंस को 18 रन से हराया। वानखेड़े स्टेडियम में रविवार को विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारियां करने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update

Hindi News Sports Ayush Shetty Badminton Asia Championships 2026 Final Update | Badminton News स्पोर्ट्स डेस्क12 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइनल मुकाबले में आयुष को चीन के शी यू की के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। भारतीय शटलर आयुष शेट्टी को बैडमिंटन एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। फाइनल मुकाबले में उन्हें चीन के शी यू की के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। 60 सालों के बाद किसी भारतीय ने चैंपियनशिप के मेंस सिंगल्स कैटेगरी के फाइनल में जगह बनाई थी। आयुष से पहले दिनेश खन्ना ने 1965 में मेंस सिंगल्स में गोल्ड जीता था। रविवार को चीन के झेजियांग में खेले गए फाइनल में आयुष का मुकाबला दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की से था। 20 साल के आयुष यह मैच 8-21, 10-21 से सीधे गेम में हार गए। फाइनल में आयुष को 8-21, 10-21 से सीधे गेम में हार मिली। सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय इस हार के बावजूद आयुष ने अपने करियर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वो बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय मेंस शटलर बन गए हैं। इससे पहले 1965 में दिनेश खन्ना ने इस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता था। खन्ना के बाद फाइनल तक का सफर तय करने वाले आयुष पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। टूर्नामेंट में भारत का 19वां मेडल बैडमिंटन एशियन चैंपियनशिप 1962 से खेली जा रही है। टूर्नामेंट में यह भारत का कुल 19वां मेडल है। भारत ने अब तक 2 गोल्ड, 1 सिल्वर (आयुष) और 16 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। 1965 में दिनेश खन्ना ने सिंगल्स में और 2023 में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने मेंस डबल्स में गोल्ड जीता था। सेमीफीइनल में डिफेंडिंग चैंपियन को हराया इस पूरे टूर्नामेंट में आयुष का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने वर्ल्ड नंबर 1, वर्ल्ड नंबर 4 और वर्ल्ड नंबर 7 जैसे टॉप रैंक वाले खिलाड़ियों को हराया था। शनिवार को हुए सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर 25 आयुष ने डिफेंडिंग चैंपियन थाई प्लेयर कुन्लावत वितिदसर्न को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। ———————– —————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़िए… कोहली ने बाबर-गेल का रिकॉर्ड तोड़ा:रोहित ने मुंबई के लिए 6 हजार रन पूरे किए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL 2026 के 20वें मैच में मुंबई इंडियंस को 18 रन से हराया। वानखेड़े स्टेडियम में रविवार को विराट कोहली टी-20 में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारियां करने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
10 मिनट के लिए रुके, 5 जिंदगियां खत्म:डिंडौरी हादसे की चश्मदीद बोली- सभी के चीथड़े उड़ गए; कपड़े में समेटने पड़े शव

मैं अगर टॉयलेट करने नहीं जाता, तो शायद जिंदा नहीं बचता…ये कहना है डिंडौरी के जिला अस्पताल में भर्ती उदय प्रताप का। वे शनिवार और रविवार की दरमियानी रात जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाइवे 45 पर उस हादसे में घायल हुए हैं, जिसमें कैप्सूल टैंकर ने सड़क किनारे खड़े लोगों को कुचल दिया था। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई है। सभी मृतक आपस में रिश्तेदार हैं। इनमें पिता-पुत्र भी शामिल हैं। रविवार दोपहर को अंतिम संस्कार किया गया। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर घटनास्थल पर पहुंची। जिला अस्पताल में भर्ती घायल उदय प्रताप और प्रत्यक्षदर्शी श्रीबंती से बात भी की। सड़क पर बिखरा खून और मांस के लोथड़े डिंडौरी में गाड़ा सरई से तीन किलोमीटर पहले फॉरेस्ट डिपो है। यहां लोगों की भीड़ लगी थी। सड़क पर खून और मांस के लोथड़े पड़े थे। जूते-चप्पल समेत दूसरा सामान भी था। सड़क के एक तरफ पिकअप और कैप्सूल टैंकर खड़े थे। थोड़ी ही दूर बना बस स्टॉप और बिजली पोल क्षतिग्रस्त हालत में था। ग्रामीणों ने बताया कि किकरा तालाब गांव के पास तेज रफ्तार कैप्सूल वाहन MP19 ZO 9351 ने 5 लोगों को रौंद दिया था। परसवाह गांव के रहने वाले सभी लोग सिलयारी गांव से चौक कार्यक्रम से लौट रहे थे। इसी दौरान जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे पर उनका पिकअप वाहन MP65 ZD 1118 पंक्चर हो गया। रात करीब साढ़े 12 बजे गाड़ी को सड़क किनारे लगाकर ड्राइवर टायर बदल रहा था। पिकअप में बैठे लोग उतरकर सड़क किनारे बातचीत में लगे थे। तभी अमरकंटक की ओर से आ रहा तेज रफ्तार कैप्सूल 5 लोगों को रौंदते हुए गुजर गया। इस दौरान दो लोग करीब 10 फीट तक उछल गए। पांचों के शरीर सड़क से चिपक गए थे। पुलिस को कपड़े में समेटकर शवों को ले जाना पड़ा था। पहिया पंक्चर होने के बाद पिकअप से उतर गए लोग पिकअप वाहन में घायल उदय सिंह की बहन श्रीबंती भी सवार थीं। वे बताती हैं कि सूरजपुरा गांव के भर्रा टोला में हंसवती टेकाम के यहां पहला बेटा हुआ है। उसके चौक कार्यक्रम में शामिल होने शनिवार शाम करीब 6 बजे, 20-25 लोग पिकअप वाहन से पहुंचे थे। सभी लोग सामूहिक भोज के बाद रात करीब 11 बजे पिकअप से ही वापस लौट रहे थे। इसी दौरान गाड़ी का दाहिने साइड का पिछला पहिया पंक्चर हो गया। इसके बाद सभी लोग गाड़ी से उतरकर सड़क की दूसरी ओर बैठ गए। पिकअप ड्राइवर राजकरण वनवासी टायर बदलने लगा। किसी के पैर टूटे तो किसी का सिर कुचला श्रीबंती ने कहा- कुछ ही देर में अमरकंटक की तरफ से तेज रफ्तार टैंकर आया। सड़क किनारे खड़े लोगों को रौंदता हुआ आगे निकल गया। वह सड़क किनारे लगे बिजली के पोल और यात्री प्रतीक्षालय को तोड़ने के बाद ही रुका। चीख-पुकार मच गई। सड़क पर खून ही खून फैल गया। हमने तुरंत पुलिस को सूचना दी। एसडीओपी सतीश द्विवेदी ने बताया कि पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तो सड़क पर शव बिखरे पड़े थे। किसी के पैर टूटे, पेट फटा तो किसी का सिर कुचला था। उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। टैंकर और पिकअप को जेसीबी और क्रेन की मदद से अलग कराया। सड़क क्लियर करने में करीब तीन घंटे लगे। धक्का से दूर जाकर गिरा, बेहोश हो गया जिला अस्पताल में भर्ती घायल उदय प्रताप (20) पिता कन्हैया ने कहा- मैं टायर बदल रहे ड्राइवर की मदद कर रहा था। इसी दौरान मुझे पेशाब आ गया। मैं निबटने साइड में चला गया। अचानक जोरदार आवाज आई। मुझे धक्का लगा और मैं दूर जाकर गिरा। फिर बेहोश हो गया। जब लोगों ने पानी का छींटा मारा, तब जाकर होश आया। अगर टॉयलेट नहीं जाता, तो मैं भी जिंदा नहीं होता। हालांकि, गंभीर चोट नहीं आई है। पैर में दर्द जरूर है। जमीन के मुआवजे से खरीदी थी गाड़ी मृतकों में पिता पवर सिंह (50) और बेटा बिहारी (29) भी शामिल हैं। पवर सिंह पेशे से किसान था। बिहारी का छोटा भाई प्रेम सिंह ब्लॉक समन्वयक है। खेतीबाड़ी करके जीवन-यापन करते हैं। कुछ साल पहले नर्मदा में डूब में आई जमीन का मुआवजा मिला था। इन्हीं रुपयों से डेढ़ साल पहले बिहारी ने सेकंड हैंड पिकअप वाहन खरीदा था। राजकरण मरावी को ड्राइवर रख लिया था। टैंकर ड्राइवर बोला- झपकी लग गई थी पुलिस ने टैंकर के ड्राइवर रमेश पटेल निवासी मैहर को गिरफ्तार कर लिया है। रमेश का कहना है कि अल्ट्राटेक प्लांट से चार दिन पहले सीमेंट लेकर करंजिया के लिए निकला था। शुक्रवार को टैंकर खाली करके रात करीब 11 बजे खाना खाकर लौट रहा था। अचानक झपकी लगने से हादसा हो गया। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… हाईवे पर टैंकर ने 5 को कुचला, सभी की मौत डिंडौरी के गाड़ा सरई थाना इलाके के किकरा तालाब गांव के पास तेज रफ्तार कैप्सूल वाहन ने 5 लोगों को रौंद दिया। हादसे में पांचों की मौत हो गई। इनमें दो बाप-बेटे भी हैं। परसवाह गांव के रहने वाले सभी लोग सिलयारी गांव से चौक कार्यक्रम से लौट रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…
सैलरी बढ़ाने के लिए फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन:नोएडा में कई गाड़ियों में आग लगई, पुलिस की गाड़ी पलटी, जमकर पत्थरबाजी

नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों का चौथे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी है। लेकिन सोमवार सुबह मदरसन कंपनी के कर्मचारियों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बसों में आग लगा दी। पहले कर्मचारियों ने पुलिस की गाड़ी के साथ तोड़फोड़ की उसके बाद गाड़ी को पलट दिया। नाराज कर्मचारियों ने जमकर पत्थरबाजी भी की। हिंसक प्रदर्शन की तस्वीरें देखिए… खबर अपडेट की जा रही है…
सूरमा लगाएं, मछली खाएं या फोन छोड़ दें? आंखों के लिए क्या है सबसे सही, दिल्ली के टॉप डॉक्टर ने दिया चौंकाने वाला जवाब

Last Updated:April 13, 2026, 09:55 IST Eye Health Tips: दिल्ली में आंखों के मशहूर डॉ राहील चौधरी ने बताया कि 18 साल से कम उम्र में पास से फोन टीवी देखने से नंबर बढ़ सकता है. इससे आंखे नहीं खराब होती हैं. काजल से फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होता है. हालांकि मछली पोषक तत्वों से भरपूर होती है, लेकिन यह आंखों की बीमारी के लिए लाभदायक नहीं है. ख़बरें फटाफट दिल्ली: ईश्वर द्वारा मनुष्य को दी गई आंखें सबसे बड़ा वरदान मानी जाती हैं. वहीं, डॉक्टर भी आंखों के बारे में यह कहते हैं कि आंखें आत्मा की खिड़की होती हैं. इसलिए यह देखा गया है कि मनुष्य अपने शरीर के किसी अंग में होने वाली तकलीफ को तो झेल लेता है या फिर नजर अंदाज कर देता है, लेकिन आंखों में होने वाली किसी भी तरह की तकलीफ को ना तो मनुष्य झेल पता है और ना ही उसे नजर अंदाज कर पाता है. ऐसे में यह भी देखा गया है कि आंखों से जुड़े हुए कई मिथक भी आज भी हमारे समाज में कई सालों से चलते आ रहे हैं. इसी को लेकर लोकल 18 की टीम ने देश के इस समय के टॉप आंखों के विशेषज्ञ डॉ. राहील चौधरी से खास बातचीत की. आइये आपको बताते हैं कि उन्होंने इन मिथकों को लेकर क्या कुछ कहा. डॉ राहील ने सबसे पहले इस मिथक पर बात करते हुए लोकल 18 से बताया कि ज्यादातर लोगों को आपने यह कहते हुए सुना होगा कि पास से फोन चलाने या फिर टीवी देखने या फिर लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करने से आंखों पर चश्मा लग जाता है और आंखों की रोशनी पर भी उसका असर पड़ता है, लेकिन उनका कहना था कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं है. यह किस उम्र के व्यक्ति को होता है. उन्होंने कहा कि 18 साल से कम उम्र के लोग यदि लगातार फोन या कोई भी चीज़ अपनी आंखों के बेहद करीब रख कर चलाएं तो उन्हें चश्मा लग सकता है. वहीं, 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग यदि पास रखकर फोन या कोई भी ऐसी चीज चलाएं या देखें तो उन्हें चश्मा तो नहीं लगेगा. मगर उनकी आंखों पर अलग तरीके से असर पड़ता है. उन्हें सर दर्द होती है और आंखों पर स्ट्रेस फील होता है. इसलिए डॉ. राहील का कहना था कि सभी को यह कह देना कि आपकी आंखों पर चश्मा लग जाएगा. इतने पास से फोन या कोई भी चीज ना चलाएं या देखें तो यह कहना बिल्कुल गलत और एक मिथक है. जानें क्या सुरमा आंखों के लिए है फायदेमंद डॉ. राहील से जब लोकल 18 की टीम ने यह पूछा कि अक्सर भारतीय लोग बच्चों की आंखों में काजल लगाते हैं या फिर बड़े लोग और खासकर महिलाएं भी आंखों में काजल लगाती हैं तो क्या इससे कोई आंखों को फायदा होता है. क्योंकि इस चीज पर भी लोगों में काफी ज्यादा भ्रम है. इसे लेकर डॉ. राहील का साफ तौर पर यह कहना था कि साइंटिफिक तौर पर आंखों में काजल लगाने से किसी भी तरह का फायदा आंखों को नहीं होता है. उनका कहना था कि इसके उल्टे नुकसान हो सकते हैं. क्योंकि काजल के अंदर कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं. जो आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कई बार तो कई गंभीर इन्फेक्शन भी आपकी आंखों को हो नुकसान पहुंचा सकते हैं. जो कि कभी कभार दवाई से भी काबू में नहीं हो पाती है. जानें क्या मछली खाने से आंखें रहती हैं स्वस्थ डॉ. राहील से लोकल 18 की टीम ने पूछा कि क्या मछली खाने से आंखें स्वस्थ रहती हैं तो इसके ऊपर उन्होंने हंसते हुए कहा कि मछली के अंदर कई ऐसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं. जो आपकी आंखों के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं, लेकिन उनका कहना था कि मिथक यहां पर आ जाती है. जब लोगों की आंखों में कोई परेशानी होती है और किसी तरह से उन्हें आंखों में दिक्कत आ रही होती है और वह तब भी लगातार मछली का सेवन करते रहते हैं और उनका यह मानना होता है की मछली खाने से यह दिक्कत ठीक हो जाएगी. डॉ. राहील का कहना था कि यहीं पर गड़बड़ है. मछली खाने से आपकी आंखों में आई हुई दिक्कत ठीक नहीं हो सकती है. आपको उसके लिए डॉक्टर के पास जाकर ही इलाज करवाना होगा. मगर सिर्फ बात इतनी है कि मछली में कुछ ऐसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं. जो आपकी आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन यदि आंखों में कोई भी परेशानी हो गई है या हो चुकी है तो वह मछली खाने से ठीक नहीं होगी. उसका इलाज ही करवाना पड़ेगा. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 13, 2026, 09:42 IST
बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? पांच चेहरे जो नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी की दौड़ में हैं | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:13 अप्रैल, 2026, 09:54 IST नीतीश कुमार ने मंगलवार सुबह 11 बजे कैबिनेट बुलाई है और उम्मीद है कि वह जल्द ही राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार | फ़ाइल छवि बिहार एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन के मुहाने पर है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद पद छोड़ने वाले हैं। जैसे-जैसे समय उनके इस्तीफे की ओर बढ़ रहा है, अटकलें तेज हो गई हैं कि अगला राज्य की कमान कौन संभालेगा। नीतीश कुमार ने मंगलवार सुबह 11 बजे कैबिनेट बुलाई है और उम्मीद है कि वह जल्द ही राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। औपचारिक परिवर्तन की तैयारी पहले से ही चल रही है, जिसमें आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग की योजना भी शामिल है। अंतिमता की भावना को जोड़ते हुए, निवर्तमान मुख्यमंत्री ने पटना में सर्कुलर रोड पर अपना आधिकारिक आवास खाली करना शुरू कर दिया है। कुमार के बाहर निकलने के साथ, सुर्खियों का रुख एनडीए गठबंधन में प्रमुख भागीदार भारतीय जनता पार्टी पर केंद्रित हो गया है। सरकार में लंबे समय तक सहयोगी रहने के बावजूद, भाजपा ने कभी भी बिहार में मुख्यमंत्री का पद नहीं संभाला है, जो अब बदल सकता है। पार्टी 2025 के विधानसभा चुनावों में 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी, जबकि सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने 85 सीटें हासिल कीं। साथ में, एनडीए ने राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीत लीं, जिससे राजद-कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन को निर्णायक रूप से दरकिनार कर दिया गया। हालाँकि, वरिष्ठ भाजपा नेता सतर्क हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लेंगे, जिसकी घोषणा कुछ ही दिनों में होने की उम्मीद है। जद (यू) नेताओं ने भी सार्वजनिक अटकलों से परहेज करते हुए कहा कि 14 अप्रैल के बाद स्पष्टता सामने आएगी। पांच दावेदार संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भाजपा हलकों में कई नाम चर्चा में हैं: सम्राट चौधरी: व्यापक रूप से सबसे आगे माने जाने वाले, वर्तमान उपमुख्यमंत्री के पास गृह मामलों का विभाग है। एक प्रमुख कुशवाह नेता, उनके उत्थान से पार्टी की ओबीसी पहुंच मजबूत होगी। नित्यानंद राय: एक केंद्रीय मंत्री और पूर्व राज्य भाजपा अध्यक्ष, राय हाजीपुर से चार बार विधायक हैं और उनके पास संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक अनुभव दोनों हैं। दिलीप कुमार जयसवाल: तीन बार के एमएलसी और पूर्व बिहार भाजपा प्रमुख, जयसवाल को एक स्थिर संगठनात्मक हाथ माना जाता है। संजय जयसवाल: 2009 से पश्चिम चंपारण के सांसद और पूर्व राज्य भाजपा अध्यक्ष, उन्हें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ मजबूत संबंधों के साथ एक तेज राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। जनक राम: पार्टी का एक दलित चेहरा, पूर्व मंत्री और गोपालगंज के पूर्व सांसद एक जमीनी स्तर के संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं और रविदास समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा नेतृत्व विकल्पों में आश्चर्य पैदा करने के लिए भी जानी जाती है, जिसमें नए या कम-अपेक्षित चेहरे की संभावना को खुला रखा जाता है। राजवंशीय उपक्रम मंथन में एक और परत जोड़ते हुए, जद (यू) नेता कथित तौर पर नीतीश कुमार के बेटे, निशांत कुमार, जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुए हैं, को उप मुख्यमंत्री के रूप में समायोजित करने पर जोर दे रहे हैं, जो गठबंधन के भीतर कुमार की विरासत को संरक्षित करने का एक प्रयास है। राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के बीच भाजपा ने बिहार विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। भाजपा और जदयू दोनों ने अपने विधायकों को महत्वपूर्ण बैठकों से पहले पटना में इकट्ठा होने के लिए कहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : बिहार, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 13 अप्रैल, 2026, 09:54 IST समाचार राजनीति बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? पांच चेहरे जो नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी की दौड़ में हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
Sonia Gandhi Questions Womens Reservation Bill Timing

नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने सोमवार को महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने द हिन्दू (अखबार) में लिखा कि पीएम विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पास कराना चाहती है। उन्होंने लिखा कि यह सब तब हो रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। इस जल्दबाजी का सिर्फ एक ही मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। सरकार ने 2023 में ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में पास कर लिया था, लेकिन इसे अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू करने की शर्त रखी गई। उन्होंने कहा की दरअसल इस सत्र में सरकार का असली मुद्दा परिसीमन है और उसके बारे कोई जानकारी नहीं दी गई है। ये संविधान के लिए खतरनाक है। विपक्ष ने 2024 में महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी महिला आरक्षण पर सोनिया ने लिखा- राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि इसे 2024 के चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे नहीं माना। अब अनुच्छेद 334-A में बदलाव कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने की तैयारी है। ऐसे में प्रधानमंत्री को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे? उन्होंने सवाल किया कि 5 राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। इतनी हड़बड़ी की क्या जरूरत है, जबकि विपक्ष तीन बार चिट्ठी लिखकर कह चुका है कि पहले 29 अप्रैल को सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। पीछले 2 दो दिनों में महिला आरक्षण पर क्या-क्या हुआ विशेष सत्र पर पीएम ने चिट्ठी लिखकर सभी दलों का समर्थन मांगा। कांग्रेस अध्यक्ष का पीएम को पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को पत्र लिखकर कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना यह दिखाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। खड़गे ने यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और परिसीम से जुड़े मुद्दों पर भई विस्तार से चर्चा की जाए। BJP ने व्हिप जारी किया BJP ने रविवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई थी। पीएम ने सभी दलों से समर्थन मांगा इससे पहल रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा। पीएम ने लिखा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को पूरे देश में सही मायनों में लागू किया जा परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। ———————————————– ये खबर भी पढ़ें… कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। साथ ही महिला आरक्षण कानून में बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
गर्मियों में कुछ ही दिन मिलता है यह जंगली फल, सेहत के लिए है अमृत, फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप

Last Updated:April 13, 2026, 09:35 IST Timru Fruit Benefits: भीलवाड़ा और मेवाड़ क्षेत्र में गर्मी शुरू होते ही टिमरू नाम का जंगली फल बाजार में नजर आने लगता है. यह फल केवल 10 से 12 दिनों के लिए उपलब्ध रहता है, जिससे इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. खट्टा-मीठा स्वाद और औषधीय गुणों के कारण यह लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है. इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. डायबिटीज, पाचन और आंखों के लिए भी इसे फायदेमंद माना जाता है. गर्मी का सीजन शुरू हो गया है और इस मौसम में कई तरह के फल और सब्जियां बाजार में आने लगती हैं. भीलवाड़ा के लोग भी अपनी सेहत का खास ध्यान रखते हुए इन फलों का सेवन करते हैं, ताकि गर्मी में स्वास्थ्य बना रहे. गर्मी की शुरुआत होते ही मेवाड़ अंचल के पहाड़ी इलाकों से एक खास जंगली फल बाजार में दिखाई देने लगता है, जिसे टिमरू के नाम से जाना जाता है. यह फल अपनी सीमित उपलब्धता और औषधीय गुणों के कारण लोगों के बीच खास पहचान रखता है. टिमरू केवल 10 से 12 दिनों के लिए ही बाजार में बिकता है, जिससे इसकी मांग काफी ज्यादा रहती है. स्थानीय लोग सालभर इस फल का इंतजार करते हैं और जैसे ही यह बाजार में आता है, इसे खरीदने के लिए उमड़ पड़ते हैं. यह फल न केवल स्वाद में अनोखा होता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है, जो इसे अन्य फलों से अलग बनाता है. मेवाड़ के पहाड़ी और जंगलों वाले इलाकों, खासकर बेगूं क्षेत्र में टिमरू का पेड़ प्राकृतिक रूप से उगता है. इसे बाजार तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को जंगलों में जाकर इसे तोड़कर लाना पड़ता है. भीलवाड़ा सहित आसपास के शहरों में इसे बेचने वाले लोग बताते हैं कि यह फल बहुत सीमित समय के लिए ही मिलता है, इसलिए इसकी खास पहचान बनी हुई है. टिमरू का रंग पीला और नारंगी होता है और यह देखने में आकर्षक लगता है. प्राकृतिक रूप से मिलने के कारण यह फल लोगों के बीच एक खास आकर्षण का केंद्र बना रहता है. स्वाद की बात करें तो टिमरू खट्टा-मीठा होता है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ताजगी देता है. यह फल दो अलग-अलग प्रकारों में पाया जाता है और पकने के बाद इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. लोग इस फल को गर्मी से बचाव के लिए खास तौर पर खाते हैं. उनका मानना है कि घर से बाहर निकलने से पहले टिमरू खाने से शरीर को गर्म हवाओं के प्रभाव से राहत मिलती है. यही कारण है कि यह फल केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पारंपरिक जीवनशैली का भी एक अहम हिस्सा बन चुका है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर इसके पोषक तत्वों की बात करें तो टिमरू किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें कॉपर, पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैंगनीज, विटामिन E, विटामिन K और सेलेनियम जैसे कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं. ये सभी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं. नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे व्यक्ति कम बीमार पड़ता है. यही वजह है कि इसे प्राकृतिक औषधीय फल भी कहा जाता है. टिमरू खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है. इसके अलावा यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक होता है, जिससे नजर कमजोर होने की समस्या में राहत मिलती है. पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और कब्ज में भी यह फल बेहद लाभकारी है. साथ ही यह शरीर में सूजन को कम करने और वजन घटाने में भी मदद करता है. बाजार में इसकी कीमत लगभग 100 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है, लेकिन इसकी सीमित उपलब्धता के कारण लोग इसे बिना मोलभाव के खरीदना पसंद करते हैं. टिमरू केवल एक फल नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में मिलने वाला एक प्राकृतिक वरदान है, जो स्वाद और सेहत दोनों का अनोखा संगम पेश करता है. इसकी खासियत यही है कि यह सालभर नहीं मिलता, बल्कि कुछ ही दिनों के लिए बाजार में आता है और लोगों को अपने फायदे पहुंचाकर चला जाता है. यही वजह है कि टिमरू को मेवाड़ क्षेत्र में एक अनमोल फल माना जाता है. First Published : April 13, 2026, 09:35 IST








