Wednesday, 15 Apr 2026 | 11:09 AM

Trending :

KKR के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर 12 लाख का जुर्माना:चेन्नई के खिलाफ मैच में स्लो ओवर रेट के चलते कार्रवाई; सीजन की पहली गलती शिवपुरी में 1 महीने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन:पोहरी बस स्टैंड से ब्रिज तक का रास्ता बंद; जानिए नए रूट्स जेल में तेज बुखार में तड़पते रहे विक्रम भट्ट:भगवान से कहते थे- मैं यहां नहीं मरना चाहता, 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में हुई थी जेल जेल में तेज बुखार में तड़पते रहे विक्रम भट्ट:भगवान से कहते थे- मैं यहां नहीं मरना चाहता, 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में हुई थी जेल चाय के साथ बिस्किट खाने से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं? ऐसे लोग भूलकर भी न करें सेवन केमिकल मैंगो की पहचान: बाजार से आम की पहचान से पहले हो जाएं सावधान, असली और केमिकल वाले आम की पहचान करने के ये आसान तरीके
EXCLUSIVE

एक्टर राम चरण बोले- मैं सख्त पिता हूं:बच्चों को रिस्क लेना और मिट्टी में खेलना सिखाता हूं, पत्नी उपासना घर में केयरिंग रोल निभाती हैं

एक्टर राम चरण बोले- मैं सख्त पिता हूं:बच्चों को रिस्क लेना और मिट्टी में खेलना सिखाता हूं, पत्नी उपासना घर में केयरिंग रोल निभाती हैं

साउथ एक्टर राम चरण इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी पेरेंटिंग स्टाइल यानी बच्चों को पालने के तरीके पर खुलकर बात की। तीन बच्चों के पिता राम चरण ने खुद को एक ‘रफ’ (एक तरह से सख्त) पिता बताया है। उनका मानना है कि बच्चों को बचपन से ही चुनौतियों का सामना करना और जोखिम लेना सीखना चाहिए। बच्चों को जोखिम लेना सिखाते हैं एक्टर एस्क्वायर इंडिया के साथ बातचीत में राम चरण ने बताया कि वे अपने बच्चों के लिए किस तरह के पिता हैं। उन्होंने कहा, “मैं वह पिता हूं जो बच्चों को कूदने, गंदा होने और रिस्क लेने के लिए मोटिवेट करता है। मैं चाहता हूं कि वे बेझिझक बाहर खेलें और मिट्टी में गंदे होने से न डरें।” एक्टर के मुताबिक, जब उनके बच्चों को हिम्मत की जरूरत होती है, तो वे उनके पास आते हैं। उपासना और राम चरण के बीच पेरेंटिंग बैलेंस राम चरण ने अपनी पत्नी उपासना कामिनेनी के रोल के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उनके घर में पेरेंटिंग का एक सही बैलेंस है। उपासना बच्चों के लिए ममता और केयर का सेंटर हैं। जब बच्चों को आराम और सुकून चाहिए होता है, तो वे अपनी मां के पास जाते हैं, लेकिन किसी भी मुश्किल चुनौती का सामना करने के लिए वे अपने पिता की ओर देखते हैं। कहा- बच्चों के लिए ‘प्रेजेंट’ रहना जरूरी एक्टर ने पेरेंटिंग को लेकर एक जरूरी सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि बच्चे सलाह सुनने से ज्यादा अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। राम चरण ने कहा, “मैं सबसे पहले एक ऐसा पिता बनना चाहता हूं जो हर पल अपने बच्चों के साथ मौजूद रहे।” 2012 में हुई थी शादी, तीन बच्चों के पिता राम चरण और उपासना की निजी जिंदगी की बात करें तो दोनों ने 2012 में शादी की थी। कपल ने 2023 में अपनी पहली बेटी ‘क्लिन कारा’ का स्वागत किया। इसके बाद जनवरी 2026 में उनके घर जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) का जन्म हुआ। अब राम चरण दो बेटियों और एक बेटे के पिता हैं। अपकमिंग फिल्म ‘पेद्दी’ में आएंगे नजर राम चरण इन दिनों अपनी फिल्म ‘पेद्दी’ की तैयारी में बिजी हैं। यह एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन बुच्ची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ जान्हवी कपूर, शिवराजकुमार और जगपति बाबू जैसे कलाकार अहम रोल में नजर आएंगे।

नर्मदापुरम में अंबेडकर जयंती पर निकाली वाहन रैली:यूपीएससी में चयनितग हुए श्रेयांश बड़ोदिया का कलेक्टर ने किया सम्मान

नर्मदापुरम में अंबेडकर जयंती पर निकाली वाहन रैली:यूपीएससी में चयनितग हुए श्रेयांश बड़ोदिया का कलेक्टर ने किया सम्मान

भारत रत्न, संविधान निर्माता श्रद्धेय बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135 वीं जयंती मंगलवार को जिलेभर में मनाई गई। अजाक्स (AJAKS – अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) ने भाजपा कार्यालय के सामने आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर कार्यक्रम किया। कलेक्टर सोमेश मिश्रा, कार्यवाहक जिला अध्यक्ष एनआर हरियाले, जिला अध्यक्ष रविशंकर वाल्मीकि ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्प माला अर्पित कर उन्हें नमन किया। एनआर हरियाले, रविशंकर वाल्मीकि ने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, प्रारंभिक शिक्षा, संविधान निर्माण समिति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का संपूर्ण जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उनका जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम में सभी ने खड़े होकर बाबा साहब की प्रार्थना की। यूपीएससी में चयनित होने वाले श्रेयांश बड़ोदिया का कलेक्टर सोमेश मिश्रा के हाथों स्वागत, सम्मान हुआ। इस अवसर पर अतिथि कलेक्टर सोमेश मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, नर्मदापुरम के पूर्व जिला कोषालय अधिकारी जीडी बड़ोदिया, उनके बेटे यूपीएसी पासआउट श्रेयांश बड़ोदिया, ललित डेहरिया, सुमित्रा अहिरवार समेत अन्य मौजूद रहे। जय भीम सेना ने निकाली वाहन रैली जयंती के अवसर पर जय भीम आर्मी सेना ने वाहन रैली का आयोजन किया। डीजे के साथ वाहन रैली शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए पुराने बस स्टैंड स्थित आंबेडकर प्रतिमा स्थल पहुंची।

घर पर रेशमी बाल: किचन में मौजूद हैं मेथी के दानों को खास ये पेस्ट, बालों जैसे बाल भी हो जाएंगे शाइनी, अपनाएं 5 देसी नुस्खे

घर पर रेशमी बाल: किचन में मौजूद हैं मेथी के दानों को खास ये पेस्ट, बालों जैसे बाल भी हो जाएंगे शाइनी, अपनाएं 5 देसी नुस्खे

घर पर रेशमी बाल: टाइट लाइफस्टाइल, प्रदूषण और केमिकल उत्पादों के कारण बालों का रूखा और बेजान होना आम समस्या बन गई है। ऐसे बाल न सिर्फ देखने में बुरे निकले हैं बल्कि जल्दी खराब होने और उलझने भी लगे हैं। हालाँकि, अच्छी बात यह है कि अब आपको पिरामिड शोरूम की ज़रूरत नहीं है। कुछ आसान घरेलू उपाय जिन्हें अपनाकर आप घर पर ही अपने बालों को शानदार, चमकदार और दमदार बना सकते हैं। आइये आपको बताते हैं पांच देसी नुस्खे। बालों को रखने के लिए नारियल का तेल बेहद प्रभावशाली माना जाता है। सप्ताह में दो से तीन बार गुनगुने तेल से मसाज करने से स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और रिश्तों को गहराई से पोषण मिलता है। इससे ड्राईनेस कम होती है और बालों में नैचुरल शाइन आ जाती है। प्रोटीन से भरपूर अंडा और मॉश्चर लेज़र वाले दही समूह बल को डीप कंडीशन करते हैं। इस मास्क को बाल बनाने से लेकर हेयर स्टाइलिस्ट और शाइनी बने हुए हैं। नियमित रूप से इस्तेमाल किये जाने वाले बालों में असली साफा लुक दिखाई देता है। एलोवेरा बाले को कंपनी ने सील कर दिया है, जबकि हायर उन्हें सॉफ्ट बनाती है। इन दोनों का मिश्रण बालों का रूलापन दूर करने में मदद करता है और बालों को क्लासिक लुक देता है। दूध एक असैनिक की तरह काम करता है। बालों पर इसे लगाने से तुरंत मुलायमपन का एहसास होता है और बाल सबसे ज्यादा नजर आते हैं। बालों को ड्राय करने का यह उपाय बहुत बढ़िया है। मेथी दाना बले की फ़ेरीनेस कम करने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद करती है। इसके पेस्ट बालों में लगाने से बालों की चमक बहुत ज्यादा होती है और टूटना भी कम होता है। अगर इन घरेलू उपायों को नियमित रूप से जोड़ा जाए तो कुछ ही समय में बालों में झाग साफ नजर आता है। सही देखभाल से रूखे और बेजान बाल भी स्कीमी और ज़ामिरी बन सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)घर पर रेशमी बाल(टी)प्राकृतिक बालों की देखभाल(टी)सूखे बालों के लिए घरेलू उपचार(टी)चिकने चमकदार बालों के टिप्स(टी)नारियल तेल बालों के फायदे(टी)अंडे का हेयर मास्क(टी)बालों के लिए एलोवेरा(टी)मेथी हेयर मास्क(टी)घर का बना हेयर कंडीशनर(टी)घुंघराले बालों का समाधान

ग्वालियर केंद्रीय जेल में नशा और वेश्यावृत्ति के आरोप:तय दरों से ज्यादा वसूली, वायरल वीडियो के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के आदेश

ग्वालियर केंद्रीय जेल में नशा और वेश्यावृत्ति के आरोप:तय दरों से ज्यादा वसूली, वायरल वीडियो के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के आदेश

ग्वालियर केंद्रीय जेल में अवैध गतिविधियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह वीडियो जेल के एक प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया था। इसमें जेल के भीतर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और वेश्यावृत्ति तक के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खाने के लिए तय दरों से ज्यादा वसूली वीडियो में खाने की सामग्री के लिए तय दरों से ज्यादा वसूली और पैसों का गलत हिसाब-किताब का भी जिक्र किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि प्रहरी की बयानबाजी से जेल की छवि धूमिल हुई है। हालांकि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल जेल प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था दोनों की नजर इस जांच पर टिकी है। पैसे देकर मिल रही नशा और वेश्यावृत्ति की सुविधाएं कैदी और जेल प्रहरी ने अपने बयान में पूरे गोरखधंधे का खुलासा किया। आरोपों के मुताबिक 5 रुपये का बिस्किट 10 रुपये में, राजश्री 250 रुपये में और 50 रुपये की नमकीन 150 रुपये में दी जाती है। यह भी आरोप है कि जेल के अंदर नशा जैसे गांजे की पुड़िया 1000 रुपए में, 100 रुपये में चार बीड़ी, जबकि 600 रुपये में ” बीड़ी के बंडल” मिलता है। ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति तक की सुविधा मिलने की बात कही गई है। नए कैदियों से वसूली के लिए प्रताड़ना, आत्महत्या के भी आरोप आरोप यह भी है कि जेल में आने वाले नए कैदियों को काफी प्रताड़ित किया जाता है, जब तक उनके घर से पैसे नहीं आ जाते। जेल के अंदर दो-तीन कैदियों द्वारा आत्महत्या करने की बात भी सामने आई है। एक सिपाही ने जेल के अंदर गांजा पकड़ा था, जिसे तुरंत हटा दिया गया। बैरक बदलने के लिए लाखों रुपए की मांग नए कैदियों की हवालात अलग होती है। वहां से बैरक बदलने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की मांग की जाती है। अगर पैसा नहीं दिया तो कैदियों से काम कराया जाता है, गोबर डलवाया जाता है और मारपीट भी कराई जाती है। जिसनें पैसे दे दिए, उसे कोई हाथ नहीं लगाता, लेकिन जिसने पैसे नहीं दिए, उसे मारपीट का सामना करना पड़ता है। एक कैदी ने बताया कि वह 18 नंबर बैरक में था और 50 हजार रुपये देकर उसे 49-50 नंबर बैरक में शिफ्ट कराया गया। वीडियो पर संज्ञान लेकर न्यायिक जांच के आदेश इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए गए हैं। जो भी आरोप लगे हैं, उनकी जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट करेंगे।

why is it necessary to close the lid when flushing toilet | क्या आप फ्लश करते समय ढक्कन बंद करते हैं या नहीं? जरूर ध्यान दें इस पर

ask search icon

Last Updated:April 14, 2026, 13:41 IST How To Use The Toilet: क्या आप टॉयलेट फ्लश करते समय ढक्कन बंद करते हैं या खुला छोड़ देते हैं? यह मामूली लगने वाली आदत आपकी सेहत पर बड़ा असर डाल सकती है. हालिया शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय के मुताबिक, यह आदत आपके घर की स्वच्छता से सीधा जुड़ी है. खासकर छोटे बाथरूम में इसका असर ज्यादा होता है. इस तरह की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर आप अपनी लाइफस्टाइल को और सुरक्षित और स्वच्छ बना सकते हैं… How To Use The Toilet: अगर आपसे पूछा जाए कि टॉयलेट का इस्तेमाल कैसे करते हैं तो शायद आप हंस पड़ें. क्या आप फ्लश करते समय ढक्कन बंद करते हैं? यह सवाल सुनने में भले ही बेवकूफी भरा लगे, लेकिन आपका जवाब ही आपकी सेहत तय करेगा! बहुत से लोग पहले टॉयलेट के ढक्कन को बंद करते हैं, फिर फ्लश करते हैं, वहीं कुछ लोगों में ढक्कर खुला रखकर फ्लश करके चले जाते हैं. लेकिन अगर आप ढक्कन को खुला रखकर फ्लश करके चले जाते हैं तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है. आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य… क्या आप फ्लश करने से पहले ढक्कन बंद करते हैं? – टॉयलेट फ्लश करने से पहले ढक्कन बंद करने की सलाह दी जाती है. क्योंकि टॉयलेट फ्लश करने से बैक्टीरिया का एक छोटा समूह निकलता है, जिसे टॉयलेट प्लूम कहा जाता है. इस समूह में ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं और यह बेहद खतरनाक होता है. खासकर जब आपका टूथब्रश या तौलिया पास में हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है. क्या यह सूक्ष्मजीवों को दूर रखता है? – यह रोगाणु ना केवल छह घंटे तक हवा में रह सकते हैं, बल्कि पूरे बाथरूम में फैलकर सतहों पर चिपक भी सकते हैं. फ्लश करने से पहले ढक्कन बंद करना इन रोगाणुओं को दूर रखने और इनके प्रसार को रोकने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. हालांकि, नए रिसर्च से पता चलता है कि ढक्कन बंद रखना उतना प्रभावी नहीं हो सकता जितना हमने सोचा था. Add News18 as Preferred Source on Google क्या कहती है रिसर्च? – जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक नई रिसर्च में यह जांच की गई कि क्या बंद टॉयलेट सीट, खुली टॉयलेट सीट की तुलना में बाथरूम में वायरल एरोसोल और क्रॉस-कंटैमिनेशन को रोकने में अधिक प्रभावी हैं. इसके लिए, फ्लश करने से पहले टॉयलेट बाउल में एक प्रकार का आरएनए वायरस डाला गया. टॉयलेट में पाए गए वायरल संक्रमण को दर्ज किया गया. परिणामों से पता चला कि बाथरूम की सतहों पर वायरल संक्रमण के मामले में, फ्लश करते समय टॉयलेट का ढक्कन ऊपर हो या नीचे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. रिसर्च से पता चला है कि हर बार फ्लश करने के बाद कीटाणुनाशक का उपयोग करने से टॉयलेट को जीवाणु मुक्त रखने में मदद मिलती है. इसलिए, यह रिसर्ट स्पष्ट करता है कि हर बार फ्लश करने के बाद टॉयलेट को साफ करना, चाहे ढक्कन खुला हो या बंद, आपके बाथरूम को रोगाणु मुक्त रखने के लिए आवश्यक है. टॉयलेट को कितनी बार साफ करना चाहिए? – तो सवाल उठता है कि आपको सप्ताह में कितनी बार टॉयलेट साफ करना चाहिए? टॉयलेट की स्वच्छता की शुरुआत नियमित रूप से टॉयलेट कमोड को साफ करने से होती है. अध्ययनों से पता चलता है कि हर बार फ्लश करने के बाद सफाई करने से अधिकांश कीटाणु नष्ट हो जाते हैं. अगर यह संभव ना हो, तो टॉयलेट को कम से कम सप्ताह में एक बार साफ करना चाहिए. अगर आप या घर में कोई बीमार है, तो सफाई और भी अधिक आवश्यक हो जाती है. टॉयलेट को साफ करने का सही तरीका क्या है? टॉयलेट सीट को साफ करने के लिए ब्लीच युक्त क्लीनर आमतौर पर अच्छा विकल्प होते हैं. इसके अलावा, टॉयलेट के किनारों और अंदरूनी हिस्से को साफ करने के लिए लंबे हैंडल वाले ब्रिसल ब्रश का इस्तेमाल करें. टॉयलेट के बाहरी हिस्से को बाथरूम क्लीनर से साफ करें और फिर वाइप्स या स्प्रे से कीटाणुरहित करें. First Published : April 14, 2026, 13:41 IST

राजस्थान के स्कूलों में बच्चों के अजीब-अटपटे नाम बदले जाएंगे:प्रिंसिपल 2950 नामों की पेरेंट्स को लिस्ट दिखाएंगे, इच्छा से बदल सकेंगे

राजस्थान के स्कूलों में बच्चों के अजीब-अटपटे नाम बदले जाएंगे:प्रिंसिपल 2950 नामों की पेरेंट्स को लिस्ट दिखाएंगे, इच्छा से बदल सकेंगे

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने एक संवेदनशील और सकारात्मक पहल शुरू की है। अब ‘अटपटे’ और ‘अर्थहीन’ नामों के कारण शर्मिंदगी झेलने वाले विद्यार्थियों को नया और सार्थक नाम मिल सकेगा। संयुक्त शासन सचिव ने माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों को ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने ऐसे 2950 नामों की लिस्ट तैयार की है, जिसे पेरेंट्स को दिखाया जाएगा। इसमें 1541 छात्राओं के और 1409 छात्रों के नाम शामिल हैं। इन नामों के साथ इनके अर्थ भी बताए गए हैं। आत्मविश्वास बढ़ाना मुख्य लक्ष्य विभाग का मानना है कि व्यक्ति का नाम उसकी सामाजिक छवि और संस्कारों का प्रतीक होता है। नकारात्मक या त्रुटिपूर्ण नाम होने से बच्चों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास पर बुरा असर पड़ता है। सकारात्मक नामों से बच्चों में आत्मसम्मान जगेगा, जो उनके व्यक्तिगत विकास में सहायक सिद्ध होगा। अभियान की 5 बड़ी बातें… PTM और SMC बैठकों में मिलेगी जानकारी स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि वे अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के माध्यम से पेरेंट्स को इस मुहिम के प्रति जागरूक करें। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ उन बच्चों की पहचान करें, जिनके नाम अर्थहीन हैं और उनके माता-पिता को सकारात्मक नाम रखने के फायदे बताएं। शिक्षा विभाग के आदेश के प्रमुख अंश…. नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का हिस्सा है। कई बार ग्रामीण इलाकों या जागरूकता की कमी के कारण बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं, जिससे उन्हें आगे चलकर हीन भावना महसूस होती है। यह अभियान इसी अंतर को पाटने की कोशिश है। रिकॉर्ड में कैसे होगा बदलाव? पहली क्लास में एडमिशन के समय ही पेरेंट्स को लिस्ट दिखाकर नाम चुनने का विकल्प दिया जाएगा। जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं, उनके लिए निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करना होगा। विभाग के आला अधिकारी इस अभियान की प्रगति की नियमित रूप से निगरानी करेंगे और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे। यहां देखें लड़कों के नामों की लिस्ट… यहां देखें लड़कियों के नामों की लिस्ट…

फ्रेंच फुटबॉल की बदलती रवायत:खदानों के शहर से निकली ‘अंडरडॉग’ टीम आरसी लेन्स, सबसे अमीर क्लब पीएसजी को दे रही टक्कर

फ्रेंच फुटबॉल की बदलती रवायत:खदानों के शहर से निकली ‘अंडरडॉग’ टीम आरसी लेन्स, सबसे अमीर क्लब पीएसजी को दे रही टक्कर

यूरोपियन फुटबॉल में जब भी ताकत और पैसे की बात होती है, तो पीएसजी का नाम सबसे ऊपर आता है। कतर के सुल्तानों की दौलत और दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ियों से सजी यह टीम फ्रांस की लीग-1 पर राज करती है। लेकिन इस साल पीएसजी को चुनौती वह टीम दे रही है जिसे ‘मजदूरों का क्लब’ कहा जाता है। उत्तर फ्रांस के पूर्व खनन क्षेत्र से आने वाला आरसी लेन्स क्लब फुटबॉल की दुनिया में अंडरडॉग की नई परिभाषा लिख रहा है। लेन्स शहर कभी फ्रांस का प्रमुख खनन केंद्र हुआ करता था। क्लब का स्टेडियम दो पुरानी कोयला खदानों के ऊपर बना है। जब खदानें बंद हुईं, तो शहर ने भारी आर्थिक मंदी देखी, लेकिन फुटबॉल ने लोगों को जोड़े रखा। क्लब की परंपराएं अब भी उन मजदूरों को समर्पित हैं। जब भी कोई नया खिलाड़ी क्लब से जुड़ता है, उसे अनुबंध के साथ एक ‘माइनर्स लैंप’ (खदान में इस्तेमाल होने वाली लालटेन) दी जाती है। क्लब के जनरल डायरेक्टर बेंजामिन पैरट बताते हैं, ‘यह एक प्रतीक है। हम खिलाड़ियों को समझाते हैं कि यह लालटेन कभी मजदूरों का रास्ता रोशन करती थी और अब यही रोशनी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करेगी।’ हर मैच के दौरान स्टेडियम में ‘लेस कोरन्स’ गाना गूंजता है, जो खनन विरासत को श्रद्धांजलि देने वाला एक लोकप्रिय पॉप गीत है। लेन्स ने स्थानीय प्रशासन से अपना स्टेडियम खरीदा है ताकि आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकें। क्लब का मॉडल अपनी एकेडमी से युवा प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें बड़े क्लबों को बेचकर राजस्व जुटाने पर टिका है। पैरट कहते हैं, ‘जिस इलाके में बेरोजगारी की दर देश में सबसे ज्यादा है, वहां हम चाहते हैं कि आर्थिक रूप से जिम्मेदार बनें।’ लेन्स का उदय साबित करता है कि फुटबॉल केवल पैसों का खेल नहीं है। जहां एक ओर पीएसजी जैसे क्लब बड़े खिलाड़ियों को खरीदकर सफलता पाना चाहते हैं, वहीं लेन्स ने अपनी पहचान, वित्तीय अनुशासन, खदानों से मिली जुझारू मानसिकता को सबसे बड़ी शक्ति बनाया है। 30 हजार की आबादी वाले शहर का यह क्लब जब 38 हजार की क्षमता वाले स्टेडियम में खेलता है, तो वह केवल एक टीम नहीं, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की उम्मीद बनकर उतरता है। मैदान पर प्रदर्शन – अनुभवी खिलाड़ियों और युवा जोश का मेल लेन्स की इस सफलता के पीछे उनके कोच पियरे सेज और अनुभवी खिलाड़ियों का बड़ा हाथ है। इस सीजन में फ्लोरियन थौविन क्लब के मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं। 33 साल के थौविन ने अब तक 10 गोल और 7 असिस्ट के साथ क्लब को वह आक्रामकता दी है, जिसकी उन्हें जरूरत थी। उनके साथ 28 वर्षीय ओडसन एडुआर्ड जैसे स्ट्राइकर ने टीम के आक्रमण को धार दी है। एडुआर्ड ने सीजन में सभी कॉम्पिटीशन में 13 गोल किए हैं और वे टीम के टॉप स्कोरर हैं।

पीएम मोदी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने अंबेडकर जयंती पर दुर्लभ मिलन समारोह में हल्के पल साझा किए | देखो | भारत समाचार

AP Inter Results 2026 Date And Time Live Updates: Check steps to download BIEAP 11th, 12th results.

आखरी अपडेट:14 अप्रैल, 2026, 13:29 IST पीएम मोदी और खड़गे और बिड़ला सहित नेताओं ने बीआर अंबेडकर को उनकी 135वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। अंबेडकर जयंती: संसद कार्यक्रम के दौरान हंसते नजर आए मोदी, खड़गे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई राजनीतिक नेताओं ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। उपस्थित लोगों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और उपाध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन शामिल थे। सभी नेताओं ने उनके सम्मान में पुष्पांजलि अर्पित की. एक दुर्लभ हल्का-फुल्का आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान, मोदी और खड़गे को संक्षिप्त और मैत्रीपूर्ण बातचीत करते देखा गया। दृश्यों में दोनों नेताओं को एक-दूसरे का अभिवादन करते, हाथ मिलाते और कुछ शब्दों का आदान-प्रदान करते दिखाया गया। उन्हें एक साथ मुस्कुराते और हंसते हुए भी देखा गया, एक पल जो खास था। इससे पहले मोदी ने ओम बिड़ला और सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और फिर बातचीत के लिए खड़गे से संपर्क किया. #घड़ी | दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक हल्के-फुल्के पल को साझा किया। पीएम मोदी और अन्य नेताओं ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर भारत रत्न डॉ. बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी।… https://t.co/JoquMq3m4d pic.twitter.com/vN3KkG63j1 – एएनआई (@ANI) 14 अप्रैल 2026 महिला आरक्षण बिल पर चर्चा बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष से महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए संसद में पेश किए जाने वाले संशोधन विधेयक पर समर्थन देने का आग्रह किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के कल्याण के उद्देश्य से उठाए गए कदमों को सभी पक्षों में साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। पीएम मोदी ने खड़गे से कहा कि यह बिल महिलाओं के हित में लाया जा रहा है और सामूहिक समर्थन का आह्वान किया. जवाब में, खड़गे ने कहा कि कांग्रेस कोई रुख अपनाने से पहले प्रस्ताव पर आंतरिक रूप से चर्चा करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी इस मामले पर गहन विचार-विमर्श के बाद अपना रुख बताएगी। पीएम मोदी ने खड़गे से कहा, “यह बिल महिलाओं के हित में पेश किया जा रहा है और इसका समर्थन करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” पीएम मोदी की हाल ही में राहुल गांधी से बातचीत ऐसा ही एक पल कुछ दिन पहले देखने को मिला था जब मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से कुछ देर बात की थी. दोनों नेताओं ने अपने कार्यक्रम को जारी रखने से पहले विनम्रतापूर्वक कुछ शब्दों का आदान-प्रदान किया। इस बीच, पीएम मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित करने में संसद सदस्यों का नेतृत्व किया और कहा कि अंबेडकर का काम लोगों को प्रेरित करता रहता है। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का जीवन एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के प्रयासों को प्रेरित करता है। खड़गे ने अंबेडकर को एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया जिन्होंने भारत को नैतिक और संवैधानिक आधार दिया। उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के मूल्यों की रक्षा करने का आग्रह किया। राहुल गांधी ने कहा कि अंबेडकर के आदर्शों और संविधान को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने कहा कि वह उनका बचाव करना जारी रखेंगे। डॉ. बीआर अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब के नाम से जाना जाता है, भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार थे और उन्होंने भारत के सामाजिक सुधार आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 14 अप्रैल, 2026, 12:30 IST न्यूज़ इंडिया पीएम मोदी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने अंबेडकर जयंती पर दुर्लभ मिलन समारोह में हल्के पल साझा किए | घड़ी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मोदी खड़गे(टी)पीएम मोदी खड़गे(टी)अंबेडकर जयंती श्रद्धांजलि(टी)नरेंद्र मोदी अंबेडकर(टी)बीआर अंबेडकर जयंती(टी)प्रेरणा स्थल संसद(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे मोदी बातचीत(टी)मोदी राहुल गांधी बैठक(टी)आंबेडकर संवैधानिक विरासत(टी)भारतीय सामाजिक सुधार नेता

देवास में 3 वाहनों की टक्कर:कार के पिछले हिस्से में घुसी बाइक, कांच से टकराने पर युवक को आए 10 टांके

देवास में 3 वाहनों की टक्कर:कार के पिछले हिस्से में घुसी बाइक, कांच से टकराने पर युवक को आए 10 टांके

देवास शहर में ट्रैफिक थाने के सामने मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे स्कूटर, कार और बाइक की आपस में टक्कर हो गई। क्रॉसिंग पर ब्रेक लगने से हुए इस हादसे में बाइक सवार उछलकर कार के पिछले कांच से टकरा गया, जिससे 40 वर्षीय गोपाल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को स्थानीय लोगों ने ई-रिक्शा की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया है, जहां प्राथमिक इलाज के दौरान चेहरे पर 10 से ज्यादा टांके लगाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है। क्रॉसिंग पर अचानक ब्रेक लगाने से हुई तीनों वाहनों की भिड़ंत जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे ट्रैफिक थाने के सामने क्रॉसिंग करते वक्त एक स्कूटर सवार ने अचानक ब्रेक लगा दिया। ब्रेक लगने के कारण स्कूटर के पीछे आ रही कार उससे टकरा गई। इसी दौरान कार के ठीक पीछे आ रही बाइक भी अनियंत्रित होकर कार के पिछले हिस्से में जा घुसी। कांच से टकराकर उछला बाइक सवार, चेहरे पर लगी गंभीर चोट पीछे से हुई यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक चला रहे 40 वर्षीय गोपाल सिंह उछलकर कार के पिछले कांच से टकरा गए। कांच से टकराने के कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में घायल को ई-रिक्शा से जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनके चेहरे पर करीब 10 से ज्यादा टांके आए हैं। दोस्त के साथ इंदौर के पास नुक्ते में जा रहे थे गोपाल हादसे के समय बाइक पर पीछे बैठे गोपाल सिंह के दोस्त राजेश मंडलोई (निवासी अमोना) ने बताया कि वे दोनों मंगलवार सुबह बाइक से इंदौर के पास स्थित एक गांव में जा रहे थे। दोनों को वहां परिवार के एक नुक्ते के कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन रास्ते में ही ट्रैफिक थाने के सामने यह सड़क हादसा हो गया।

गर्मियों की सुपरड्रिंक! एक गिलास में अंडे से ज्यादा प्रोटीन, शरीर को रखता कूल-कूल

authorimg

Last Updated:April 14, 2026, 12:59 IST Sattu Benefits: डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को बताया कि गर्मी के दिनों में चाय या कॉफी की जगह सत्तू का सेवन करना ज्यादा लाभकारी होता है. सत्तू में आधा नींबू मिलाकर पीने से यह शरीर को फौरन ठंडक देता है और एनर्जी लेवल को बनाए रखता है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पारंपरिक रूप से खाए जाने वाला सत्तू (सेतुआ) अब गांवों से निकलकर शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खासकर गर्मी के मौसम में लोग इसे देसी प्रोटीन ड्रिंक के रूप में अपना रहे हैं. यह न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि दिनभर ऊर्जा से भरपूर भी बनाए रखता है. बढ़ते तापमान के बीच सत्तू का शरबत लोगों के लिए एक प्राकृतिक और सस्ता हेल्थ ड्रिंक बनकर उभरा है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सत्तू शरबत बनाना बेहद आसान है. इसके लिए एक बर्तन में सत्तू लिया जाता है और उसमें घड़े का ठंडा पानी मिलाकर अच्छे से घोला जाता है. इसके बाद स्वादानुसार नमक डाला जाता है. एक गिलास में काला नमक, सेंधा नमक, नींबू का रस और घर में पिसे मसाले जैसे जीरा और गोलकी मिलाए जाते हैं. फिर इस मिश्रण में सत्तू का पानी डालकर तैयार किया जाता है. एक गिलास सत्तू पीने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती, इसलिए यह एक टाइम के भोजन का भी विकल्प बन सकता है. आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने बताया कि गर्मी के दिनों में चाय या कॉफी की जगह सत्तू का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. सत्तू में आधा नींबू मिलाकर पीने से यह शरीर को तुरंत ठंडक देता है और एनर्जी लेवल को बनाए रखता है. इसे प्रोटीन का पावर हाउस भी माना जाता है, जिससे शरीर को दिनभर ताकत मिलती है और थकान महसूस नहीं होती. पेट के लिए भी काफी लाभकारीडॉक्टर परौहा के अनुसार, सत्तू का शरबत पेट के लिए भी काफी लाभकारी है. यह पेट को ठंडा रखता है और एसिडिटी या जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. साथ ही यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखने में सहायक होता है. जिन लोगों को तेज धूप में चक्कर आने या बेहोशी की समस्या होती है, उनके लिए सत्तू बेहद उपयोगी साबित होता है. सत्तू से मिलेगा प्रोटीनपोषण की दृष्टि से भी सत्तू काफी समृद्ध है. एक गिलास सत्तू में लगभग 10 से 15 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है यानी इसके एक गिलास में अंडे से ज्यादा प्रोटीन होता है. साथ ही यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और दिमाग को भी तरोताजा बनाए रखता है. इसमें नींबू और पुदीना मिलाने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है, जिससे यह एक बेहतरीन रिफ्रेशिंग ड्रिंक बन जाता है. हालांकि डॉक्टर परौहा ने सलाह दी है कि सत्तू का सेवन रात के समय नहीं करना चाहिए. इसे सुबह खाली पेट या दोपहर में भोजन के बाद लेना अधिक फायदेमंद होता है. कुल मिलाकर सत्तू गर्मी में एक ऐसा देसी सुपरड्रिंक है, जो स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 14, 2026, 12:59 IST