किचन में रखी ये चीज टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदी, जानलेवा बीमारी का खतरा, तुरंत सुधारें ये गलती

Last Updated:April 15, 2026, 23:39 IST Kitchen Sponges Cause Deadly Disease: रोजाना जिस स्पंज से आप खाने के बर्तनों को साफ करते हैं, वो आपके शरीर में जानलेवा बीमारी को पहुंचाने का जरिया बन सकता है. ऐसे में जरूरी है कि सेहत के लिए इसकी सफाई और एक्सपायरी डेट से जुड़ी बातों को यहां जानें. ख़बरें फटाफट रसोई की साफ-सफाई एक हेल्दी लाइफ के लिए बेहद जरूरी है. आमतौर पर हम किचन प्लेटफॉर्म, गैस चूल्हा, बर्तन, सब्जियां और चिमनी जैसी चीजों को साफ रखने पर ध्यान देते हैं, लेकिन कुछ छोटी चीजें अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं. इसमें सबसे पहले नंबर पर आता है- किचन स्पंज और ब्रश. इसका इस्तेमाल रसोई के बर्तनों को चमकाने के लिए रोज किया जाता है, लेकिन अक्सर इसकी सफाई के तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है. जबकि इसमें जमा गंदगी आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसके पीछे का कारण और बचाव के तरीके को चलिए आगे इस लेख में जानते हैं. स्पंज और ब्रश बन सकते हैं बैक्टीरिया का घरकिचन में इस्तेमाल होने वाले स्पंज और स्क्रबर में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं. कई बार इनमें टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदगी हो सकती है. इसका कारण है कि हम इन्हें लंबे समय तक बदलते नहीं हैं और ये अक्सर गीले रहते हैं. गीलेपन के कारण इनमें ई.कोलाई और अन्य हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो पेट और त्वचा से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. रिसर्च क्या कहती है एक अध्ययन में पाया गया कि किचन स्पंज में कई तरह के खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद होते हैं. इनमें ई.कोलाई और स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे बैक्टीरिया भी शामिल हैं, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं. ये बैक्टीरिया स्पंज के जरिए बर्तनों और किचन की अन्य सतहों पर फैल जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. गीला रखना क्यों है नुकसानदायकभारत में कई लोग स्पंज को डिशवॉश लिक्विड में भिगोकर रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन यह आदत नुकसानदायक हो सकती है. गीले स्पंज और ब्रश में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और बर्तनों या सतहों पर फैल जाते हैं. साथ ही, एक ही स्पंज का इस्तेमाल बर्तनों और प्लेटफॉर्म दोनों के लिए करना भी संक्रमण को बढ़ावा देता है. कितनी बार बदलें स्पंज और ब्रशकिचन स्पंज और ब्रश को समय-समय पर बदलना बहुत जरूरी है. स्पंज को हर 1–2 हफ्ते में बदल देना चाहिए. वहीं, ब्रश को 1–2 महीने के भीतर बदल लेना बेहतर होता है. साफ रखने के आसान तरीकेहर इस्तेमाल के बाद स्पंज और ब्रश को अच्छी तरह धोएं. गर्म पानी और साबुन से रोजाना साफ करें. इन्हें धूप में सुखाएं ताकि नमी खत्म हो जाए. हमेशा सूखी जगह पर रखें. स्पंज को एक मिनट के लिए माइक्रोवेव में रख सकते हैं या डिशवॉशर में साफ कर सकते हैं. बर्तनों और किचन प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग स्पंज रखें. स्पंज का कम उपयोग करना, समय-समय पर बदलना और इस्तेमाल से पहले व बाद में हाथ धोना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 15, 2026, 23:39 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
भोजशाला-केस;हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष ने दिया हदीस का हवाला:दलील- ब्रिटिश म्यूजियम की वाग्देवी प्रतिमा भी मंदिर होने का बड़ा प्रमाण

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में धार की ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर बुधवार को एक बार फिर नियमित सुनवाई शुरू हुई। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से एडवोकेट मनीष गुप्ता ने विस्तार से अपनी दलीलें पेश कीं। इस दौरान उन्होंने धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को पूर्णतः मंदिर सिद्ध करने का प्रयास किया। सुनवाई के दौरान एडवोकेट गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाते हुए इस्लामिक कानून (हदीस) का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर मस्जिद का निर्माण करना गलत है और इस्लाम में ऐसे उदाहरण भी मौजूद हैं जहाँ विवादित जमीन को उसके वास्तविक स्वरूप में लौटाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि कोई स्थान एक बार मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हो जाए, तो वह सदैव मंदिर ही रहता है। उन्होंने कहा कि ये दोनों कानूनी पक्ष इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से वाग्देवी का मंदिर ही है। अपनी बहस को आगे बढ़ाते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने वर्ष 1908 के राजपत्र (गजट) और राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथों का संदर्भ दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि भोजशाला के पत्थरों पर अंकित शिलालेख स्पष्ट करते हैं कि वहां राजा भोज द्वारा रचित नाटकों का मंचन वसंत पंचमी के अवसर पर किया जाता था। राजा भोज ने अपने ग्रंथों में हवन कुंड के क्षेत्रफल और देवी की मूर्ति की मुद्रा व आकार के जो मानक तय किए थे, वर्तमान भोजशाला में स्थित हवन कुंड और साक्ष्य ठीक उसी माप और स्वरूप के पाए गए हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों की कड़ी में ब्रिटिश संग्रहालय में रखी वाग्देवी की प्रतिमा का भी उल्लेख किया गया। वकील ने कहा कि उस मूर्ति पर स्पष्ट रूप से अंकित है कि इसकी स्थापना राजा भोज ने की थी और यह प्रतिमा भोजशाला से ही वहां पहुंची थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएसआई के अब तक के सर्वे में यहां से 150 से अधिक देवी-देवताओं की मूर्तियां और चित्र प्राप्त हुए हैं, जो किसी भी मस्जिद में नहीं हो सकते क्योंकि वहां ऐसी आकृतियों की अनुमति नहीं होती। इन तर्कों के आधार पर याचिकाकर्ता ने मांग की है कि उन्हें भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाना चाहिए। बुधवार को कुलदीप तिवारी की ओर से बहस पूरी हो गई है, जिसके बाद अब गुरुवार को अन्य याचिकाकर्ता अंतरसिंह की ओर से कोर्ट में दलीलें पेश की जाएंगी।
माचलपुर में बाइक साइड करने पर विवाद:शादी समारोह के लिए गंगा जल यात्रा निकालते टाइम झड़प, दो पक्षों में मारपीट, 9 गिरफ्तार

राजगढ़ जिले के माचलपुर नगर में बुधवार शाम एक शादी समारोह के दौरान गंगा जल यात्रा निकालते समय मामूली बात पर दो समुदायों के बीच विवाद हो गया। कहासुनी के बाद मामला बढ़ते-बढ़ते मारपीट में बदल गया, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार, माचलपुर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रामबाबू गुप्ता के पुत्र पीयूष गुप्ता का विवाह कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान घर की महिलाएं गंगा पूजन कर लौट रही थीं। तभी अल्फेज नाम का युवक बाइक से वहां से गुजर रहा था। साइड देने की बात को लेकर गुप्ता समाज के लोगों और युवक के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते बढ़ गई। दूसरे समारोह से पहुंचे लोग फिर मारपीट शुरू की बताया जा रहा है कि पास में ही दूसरे समुदाय का भी शादी समारोह चल रहा था। विवाद की सूचना मिलते ही वहां से करीब 25 से 30 लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे गाली-गलौज के साथ स्थिति और अधिक बिगड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही माचलपुर पुलिस और खिलचीपुर एसडीओपी धर्मराज सिंह नागर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए हुड़दंग करने वाले करीब 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल नगर में स्थिति सामान्य है, हालांकि एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
जमीन विवाद में युवक ने पुलिस से की बदसलूकी:वीडियो सामने आने के बाद FIR, SC/ST एक्ट में केस दर्ज

विदिशा जिले के पठारी थाना क्षेत्र के ग्राम कांकलखेड़ी में जमीन विवाद के दौरान एक युवक द्वारा पुलिस टीम से बदसलूकी का मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, गांव में जमीन को सालाना ठेके पर लेने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस की एफआरवी टीम मौके पर पहुंची और विवाद शांत कराने का प्रयास किया। विवाद के दौरान आकाश कुर्मी नामक युवक पुलिसकर्मियों से अभद्रता करने लगा। वायरल वीडियो में वह पुलिस जवानों को गाड़ी से नीचे उतरने की धमकी देते हुए गाली-गलौज करता दिख रहा है। स्थिति बिगड़ती देख जब पुलिस टीम वहां से निकलने लगी, तो आरोपी युवक गुस्से में ट्रैक्टर लेकर पुलिस वाहन के पीछे लग गया। एफआईआर दर्ज कर हिरासत में लिया बताया गया कि फरियादिया अंगूरी बाई पिता नाथूया सेहरिया और आरोपी आकाश कुर्मी के बीच जमीन को सालाना ठेके पर लेने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपी ने फरियादिया के साथ भी अभद्रता की। मामले का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फरियादी प्रकाश पिता मोहनलाल सेहरिया की रिपोर्ट पर थाना पठारी में आरोपी आकाश कुर्मी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 48/26 दर्ज किया गया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296(ए), 115(2), 351(3), 119(1) के साथ ही एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण कायम किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। यह घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केन-बेतवा परियोजना के प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमति:पारदर्शी सर्वे, मुआवजा बढ़ाने पर प्रशासन राजी; आंदोलनकारी बोले- भरोसा नहीं जारी रहेगा आंदोलन

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी और किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को “पंचतत्व सत्याग्रह” के तहत हुए भावनात्मक और आक्रामक प्रदर्शन ने प्रशासन को वार्ता के लिए मजबूर कर दिया। खासतौर पर सांकेतिक फांसी सत्याग्रह के बाद हालात ऐसे बने कि अधिकारियों को तत्काल बातचीत के लिए आगे आना पड़ा। पांच तत्वों में विरोध, नया तरीका अपना रहे प्रदर्शनकारी आंदोलनकारियों ने जल, मिट्टी, अग्नि (चिता), वायु (सांकेतिक फांसी) और उपवास के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। केन नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह, जमीन पर मिट्टी सत्याग्रह, चिता आंदोलन के जरिए विस्थापन को “मृत्यु” का प्रतीक बताया गया। वहीं पूरे गांव में चूल्हा बंद रखकर भूख हड़ताल की गई। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब 5 आंदोलनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर चेतावनी दी। इस घटनाक्रम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को हिला दिया और तुरंत बातचीत शुरू करनी पड़ी। प्रशासन ने मानी प्रमुख मांगें लगातार दबाव और बढ़ते जनसमर्थन के बीच छतरपुर और पन्ना जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ लंबी बैठक हुई। इसमें कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी— विस्थापन प्रभावित गांवों का पूरी तरह पारदर्शी सर्वे होगा। स्थानीय एसडीएम को हटाकर बाहरी अधिकारियों की तैनाती। हर गांव में एसडीएम/डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी सर्वे करेंगे। 7 दिनों में सर्वे पूरा करने का आश्वासन दिया। बिजावर एसडीएम का हस्तक्षेप समाप्त होगा। गांव के बदले सुविधायुक्त नया गांव बसाने पर सहमति। कट-ऑफ डेट अप्रैल 2026 करने पर विचार। मुआवजा राशि बढ़ाने पर चर्चा (12.30 लाख से 25 लाख तक) आदिवासी महिलाओं के लिए विशेष पैकेज पर सहमति। आंदोलन अब भी जारी रख रहे प्रदर्शनकारी हालांकि प्रशासन ने कई मांगों पर सहमति जताई है, लेकिन आंदोलनकारियों का भरोसा अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार लिखित आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हुआ। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा, “यह सिर्फ अधिकार की नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक फैसले जमीन पर लागू नहीं होंगे, आंदोलन जारी रहेगा।” आंदोलन में हजारों आदिवासी महिलाएं और किसान शामिल हो चुके हैं। लगातार बढ़ती भीड़ और समर्थन से यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। प्रशासनिक दबाव के बावजूद आंदोलन और तेज होता नजर आ रहा है। आंदोलनकारियों का साफ संदेश है-“मिट्टी हमारी, नदी हमारी, गांव हमारा… मनमानी अब नहीं चलेगी।” गुरूवार आगे की रणनीति तय होगी गुरुवार को आंदोलनकारियों की बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें तय किया जाएगा कि आंदोलन स्थगित किया जाए या और तेज किया जाए। देखें प्रदर्शन की तस्वीरें
इंदौर में मजदूर की संदिग्ध मौत, घर में मिला शव:लावारिस पड़ा था शव, चूहों ने आंखें कुतरी; गेंद लेने बच्चे पहुंचे तक पता चला

इंदौर के चंदन नगर इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह शराब पीने का आदी था और पेशे से मजदूरी करता था। उसकी आंखें और शव को चूहे कुतर रहे थे। बच्चे खेलने के दौरान गेंद लेने उसके घर पहुंचे, तब घटना की जानकारी लगी। चंदन नगर पुलिस के मुताबिक घटना नंदन नगर की है। यहां छगन नाम के मजदूर का शव उसके घर में लावारिस हालत में मिला। भांजे गज्जू ने बताया कि बुधवार शाम गली में बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। तभी गेंद छगन के घर में चली गई। जब वे अंदर गए तो छगन का शव पड़ा मिला और आसपास चूहे थे। इसके बाद छगन के परिवार के लोगों को सूचना दी गई, लेकिन वे नहीं पहुंचे। बाद में भांजा मौके पर पहुंचा और शव को जिला अस्पताल भिजवाया। परिवार के लोगों ने बताया कि छगन के तीन बेटे हैं, लेकिन तीनों उन्हें छोड़कर अलग रहते हैं। उन्हें भी सूचना दी गई थी, लेकिन मौके पर कोई नहीं आया। पुलिस के मुताबिक गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। छगन की आंखें चूहों ने कुतर दी थीं, जिससे शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।
विदिशा में दो बाइक चोर गिरफ्तार:पुलिस ने 5 चोरी की मोटरसाइकिलें जब्त कीं, कई वारदातों को दे चुके अंजाम

विदिशा में कोतवाली पुलिस ने बाइक चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 5 चोरी की मोटरसाइकिलें जब्त की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 5 लाख रुपये है। शहर के रामलीला क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में पिछले छह महीनों से लगातार बाइक चोरी की घटनाएं सामने आ रही थीं। इन वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक रोहित कासवानी के निर्देश पर कोतवाली थाना पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया। आरोपी कई वारदातों को अंजाम दे चुके गठित टीम ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्धों से पूछताछ की। इसी दौरान मिले अहम सुरागों के आधार पर चिरोल और बाकी माता मंदिर क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय राकेश अहिरवार और शरद उर्फ रितिक अहिरवार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने बाइक चोरी की कई वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से चोरी की गई पांच मोटरसाइकिलें बरामद कीं। कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी पहले से ही पुलिस की निगरानी में थे। पुलिस फिलहाल आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि अन्य चोरी के मामलों का भी खुलासा हो सके। शहर में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
जिन पटवारियों के क्षेत्र में जली नरवाई उनपर होगी कार्रवाई:कृषि उपसंचालक को नोटिस जारी, जिले में 1200 से ज्यादा घटनाएं सामने आईं

देवास में कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने समय-सीमा संबंधी लंबित पत्रों और अंतरविभागीय समन्वय की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने नरवाई जलाने की घटनाओं, ई-केवाईसी की धीमी गति और गेहूं उपार्जन के भुगतान में देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कलेक्टर ने नरवाई जलाने की घटनाओं को नहीं रोकने पर पटवारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पटवारियों के हल्के में सर्वाधिक नरवाई जलाने की घटनाएं हुई हैं, उन पर कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, उपसंचालक कृषि गोपेश पाठक और कृषि विभाग के आरईओ को भी नोटिस जारी किए जाएंगे। 1200 से ज्यादा घटनाएं आईं सामने बैठक में कलेक्टर ने पटवारियों को अपने-अपने हल्के में सक्रिय रहने और नरवाई जलाने वाले किसानों पर अर्थदंड व कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो भी नरवाई जलाते हुए पाया जाए, उस पर तत्काल कार्रवाई हो। जिले में सैटेलाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 1200 नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ सामान्य घटनाएं भी शामिल हैं। विभाग ने लगभग 25 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई है और 296 किसानों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया है। कलेक्टर ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण करने वालों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में ई-केवाईसी के कार्य की धीमी गति पर भी असंतोष व्यक्त किया। कलेक्टर सिंह ने रबी विपणन वर्ष 2025-26 में गेहूं उपार्जन की समीक्षा भी की। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि गेहूं का उपार्जन तो हो गया है, लेकिन किसानों को भुगतान नहीं किया गया है। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए डीएसओ और सहायक आपूर्ति अधिकारी को किसानों का भुगतान शीघ्र करने के सख्त निर्देश दिए।
गेहूं की रोटी से भी मिलेगा भरपूर प्रोटीन, तगड़ी बॉडी के लिए इस एक चीज को मिलाकर बनाएं चपाती

Last Updated:April 15, 2026, 22:46 IST Healthiest Chapati Recipe: प्रोटीन की कमी से बचने के लिए महंगे सप्लीमेंट नहीं बल्कि स्मार्ट कुकिंग हैक की जरूरत होती है. यहां आप रोटी को प्रोटीन रिच बनाने का आसान तरीका सीख सकते हैं. खासबात ये है कि आपको इसके लिए कुछ भी एक्स्ट्रा खर्च की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. ख़बरें फटाफट भारतीय रसोई में रोटी केवल एक साधारण भोजन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है. हालांकि, सिर्फ गेहूं के आटे से बनी रोटी शरीर की सभी पोषण जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती, खासकर प्रोटीन के मामले में यह थोड़ी कमी रह जाती है. ऐसे में अगर आटे में थोड़ा बदलाव किया जाए, तो यही रोटी अधिक पौष्टिक बन सकती है. इसका आसान तरीका है कि आटे में अलग-अलग पोषक तत्वों को शामिल किया जाए, जिससे स्वाद और पोषण दोनों बेहतर हो जाते हैं. सोयाबीन का आटा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है. ऐसे में जब इसे गेहूं के आटे में थोड़ी मात्रा में मिलाया जाता है, तो रोटी का पोषण स्तर बढ़ जाता है. इसी तरह, बेसन यानी चने का आटा भी प्रोटीन से भरपूर होता है और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है. रागी का आटा भी एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होते हैं, जो हड्डियों और खून के लिए जरूरी हैं. वहीं, किनुआ का आटा आजकल लोकप्रिय हो रहा है, क्योंकि इसमें आवश्यक अमीनो अम्ल पाए जाते हैं, जो शरीर के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. बीज- मेवे से भी रोटी बनती है हेल्दी बीज और मेवे भी रोटी को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं. ऐसे में आटे को गूंथते समय चिया बीज, अलसी और कद्दू के बीज मिलाएं. इसमें प्रोटीन, फाइबर और अच्छे वसा होते हैं. वहीं, बादाम और मूंगफली जैसे मेवे शरीर को ऊर्जा देने के साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं. इन्हें पीसकर आटे में मिलाने से रोटी हेल्दी बनती है और पाचन में भी मदद मिलती है. दाल भी मिला सकते हैंदालों का उपयोग भी रोटी को पौष्टिक बनाने का एक प्रभावी तरीका है. ऐसे में मूंग, चना या उड़द दाल को हल्का भूनकर उसका पाउडर बनाकर आटे में मिलाने से पोषण बढ़ जाता है. इसके अलावा, रोटी को अलग-अलग चीजों के साथ बनाकर भी प्रोटीन बढ़ाया जा सकता है, जैसे पनीर, दाल या अंकुरित अनाज से बने पराठे. ये न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 15, 2026, 22:46 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
रोज इस्तेमाल कर रहे हैं ये तकिया? बन सकता है दर्द और एलर्जी की बड़ी वजह, जानें कब चेंज करना सही

Last Updated:April 15, 2026, 22:44 IST When to change pillow: अच्छी नींद के लिए सही तकिया चुनना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत या पुराना तकिया आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है. समय रहते इसे बदलना कई समस्याओं से बचा सकता है. ख़बरें फटाफट तकिए की उम्र उसके मटेरियल पर निर्भर करती है. हम अच्छी नींद पाने के लिए अक्सर महंगे गद्दे, आरामदायक बिस्तर और शांत कमरे पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक अहम चीज को नजरअंदाज कर देते हैं और वह है तकिया. रिसर्च के मुताबिक गलत या पुराना तकिया सिर्फ नींद की क्वालिटी ही खराब नहीं करता, बल्कि शरीर के पोश्चर और सांस से जुड़ी कई समस्याओं को भी बढ़ा सकता है. यही कारण है कि तकिए का सही चुनाव और समय पर उसे बदलना उतना ही जरूरी है जितना एक अच्छे गद्दे का होना. अगर तकिया सही सपोर्ट नहीं देता, तो इसका असर सीधे आपकी सेहत पर पड़ सकता है. सबसे पहले बात करें पोश्चर की, तो हमारी रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक रूप से सीधी स्थिति में रहने के लिए बनी होती है, खासकर सोते समय. यदि तकिया बहुत ऊंचा या बहुत पतला होता है, तो यह गर्दन को सही सहारा नहीं दे पाता, जिससे रीढ़ का संतुलन बिगड़ जाता है. इसका सीधा असर गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर पड़ता है, जिससे सुबह उठते ही दर्द, अकड़न या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए ऐसा तकिया चुनना जरूरी है, जो आपकी गर्दन और सिर को सही पोजिशन में रखे, ताकि शरीर को पूरी तरह आराम मिल सके और नींद भी बेहतर हो. तकिया कब बदलें?तकिए को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से उसमें धूल, पसीना, मृत त्वचा के कण और सूक्ष्म जीव जमा होने लगते हैं, जिन्हें डस्ट माइट्स कहा जाता है. ये एलर्जी, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. भले ही आप तकिए का कवर नियमित रूप से बदलते हों या उसे साफ करते हों, लेकिन अंदर की गंदगी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती. यही वजह है कि विशेषज्ञ हर 2 से 3 साल में तकिया बदलने की सलाह देते हैं. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 15, 2026, 22:44 IST







