Sunday, 31 May 2026 | 09:32 AM

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विटामिन D और B12 की कमी के लक्षण और आसान उपाय

ये सरकारी स्कूल है या इनोवेशन लैब? टीचर की क्रिएटिविटी देख हो जाएंगे हैरान

आजकल की बदलती जीवनशैली, धूप से दूर रहना और असंतुलित आहार के कारण विटामिन D और विटामिन B12 की कमी होना एक बहुत ही आम सी बात हो गई है. दोनों ही विटामिन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी होती हैं, और इनकी कमी से कई शारीरिक व मानसिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं. तो आइए जानते हैं, इसके लिये कौन सी बातों को ध्यान में रखना चाहिये. विटामिन D की कमी के लक्षणविटामिन D हड्डियों, मांसपेशियों और इम्यून सिस्टम के लिए बहुत ही जरूरी है. इसकी कमी से ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं: बार‑बार थकान और कमजोरीहड्डियों और जोड़ों में दर्दमांसपेशियों में खिंचाव या कमजोरीबार‑बार सर्दी‑जुकाम या संक्रमणमूड खराब रहना, चिड़चिड़ापन या डिप्रेशनगंभीर मामलों में हड्डियों का कमजोर होना विटामिन D की कमी कैसे दूर करें? रोज़ 20–30 मिनट सुबह की धूप लेंभोजन में अंडा, फैटी फिश, फोर्टिफाइड दूध/दही शामिल करेंडॉक्टर की सलाह पर विटामिन D3 सप्लीमेंट लें विटामिन B12 की कमी के लक्षणविटामिन B12 नर्व्स और खून के लिए बहुत जरूरी होती है. इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर आपके शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है. लगातार थकान और कमजोरीहाथ‑पैरों में झनझनाहट या सुन्नपनयाददाश्त कमजोर होना, ब्रेन फॉगचक्कर आना, सांस फूलनाजीभ का लाल‑सूजा होना, मुंह में छालेएनीमिया (खून की कमी)गंभीर स्थिति में नर्व डैमेज विटामिन B12 की कमी कैसे दूर करें? आहार में दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली, मांस शामिल करेंशाकाहारी लोग B12‑फोर्टिफाइड फूड लेंजरूरत पड़ने पर B12 टैबलेट या इंजेक्शन डॉक्टर की सलाह से लें जरूरी सलाह सही स्थिति जानने के लिए ब्लड टेस्ट कराना जरूरी हैखुद से दवा न लें, डॉक्टर की सलाह जरूर लें विटामिन D और B12 दोनों की कमी धीरे‑धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती है. इसकी सही समय पर पहचान, सही आहार, धूप और चिकित्सकीय मार्गदर्शन से इनकी कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

Anil Ambani Bank Account Fraud

Anil Ambani Bank Account Fraud

नई दिल्ली42 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा। क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है। अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल? अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं। अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Anil Ambani Bank Account Fraud

Anil Ambani Bank Account Fraud

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा। क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है। अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल? अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं। अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रतलाम में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप:जमीन सीमांकन के लिए मांगे थे 30 हजार; तहसील ऑफिस में लोकायुक्त ने पकड़ा

रतलाम में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप:जमीन सीमांकन के लिए मांगे थे 30 हजार; तहसील ऑफिस में लोकायुक्त ने पकड़ा

रतलाम जिले के सैलाना में गुरुवार दोपहर उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने पटवारी कैलाश वरख्या को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी ने किसान से 5 हेक्टेयर कृषि भूमि के सीमांकन (नपती) के एवज में यह राशि मांगी थी। वर्तमान में लोकायुक्त की टीम सैलाना तहसील कार्यालय के नायब नाजिर कक्ष में आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है। लोकायुक्त निरीक्षक राजेंद्र वर्मा के अनुसार, ग्राम अडवानिया (तहसील सैलाना) निवासी जितेंद्र पाटीदार ने 10 अप्रैल को उज्जैन कार्यालय में एसपी आनन्द कुमार यादव को लिखित आवेदन दिया था। जितेंद्र ने शिकायत में बताया था कि उसके पिता ईश्वर लाल पाटीदार के नाम पर सैलाना और बागरियों की खेड़ी में करीब 5 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस भूमि की वास्तविक स्थिति और सीमा जानने के लिए 22 जनवरी 2026 को लोकसेवा केंद्र के माध्यम से सीमांकन के लिए आवेदन किया गया था। घर आकर मांगे 30 हजार, 10 अप्रैल को लिए थे 3 हजार रुपए आवेदन के काफी दिन बाद भी सीमांकन नहीं होने पर जितेंद्र 9 मार्च 2026 को तहसील कार्यालय गया। वहां हल्का पटवारी कैलाश वरख्या से पूछताछ की, तो उसने कहा कि फीस जमा करा दोगे तो नपती हो जाएगी। इसके बाद 9 अप्रैल को पटवारी शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और सीमांकन के लिए 30 हजार रुपए की मांग की। शिकायतकर्ता के निवेदन पर 10 अप्रैल को पटवारी ने 7 हजार रुपए कम कर दिए और उसी दिन 3 हजार रुपए नकद ले लिए। तहसील कार्यालय के नाजिर कक्ष में रंगे हाथों पकड़ाया उज्जैन लोकायुक्त एसपी ने शिकायत का सत्यापन कराया, जो सही पाई गई। इसके बाद गुरुवार 16 अप्रैल को लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। दोपहर में जैसे ही जितेंद्र ने सैलाना तहसील कार्यालय के नायब नाजिर कक्ष में पटवारी कैलाश को रिश्वत के शेष 20 हजार रुपए दिए, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।

Pakistan LeT Amir Hamza Lahore Attack Firing Update

Pakistan LeT Amir Hamza Lahore Attack Firing Update

लाहौर12 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका ने आमिर हमजा को साल 2012 में वैश्विक आतंकी घोषित किया था। (फाइल फोटो) पाकिस्तान के लाहौर में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के संस्थापक सदस्य आमिर हमजा पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चला दी। हमले के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने लाहौर में एक न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर उन पर फायरिंग की। हमला किसने और क्यों किया, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। यह एक साल से भी कम समय में दूसरा मौका है, जब हमजा पर हमला हुआ है। इससे पहले पिछले साल मई में भी उनके घर के बाहर अज्ञात लोगों ने उन्हें गोली मारी थी। पिछले हमले के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी थी, हालांकि उस घटना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। लश्कर की पत्रिकाओं का संपादक था आतंकी आमिर हमजा 1987 में लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना में शामिल 17 लोगों में से एक है। वह आतंकी गतिविधियों, प्रचार, फंड जुटाने और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई अखबारों और पत्रिकाओं का संपादन करता था। वह लश्कर की सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी का सदस्य भी रहा है और अन्य आतंकी समूहों के साथ संबंध स्थापित करने में एक्टिव रहा है। हमजा ने हाफिज सईद के नेतृत्व में लश्कर-ए-तैयबा को दूसरे आतंकी समूहों से जोड़ने का काम किया। वह लश्कर से जुड़े एक चैरिटी संगठन का नेतृत्व करता था और लश्कर के यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के बोर्ड में शामिल था, जिसे पहले हाफिज सईद संभालता था। हमजा ने सोवियत के खिलाफ जंग लड़ी थी हमजा ने 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था। इसके बाद वह हाफिज सईद और अन्य आतंकियों के साथ जुड़ गया। वह हाफिज सईद और अब्दुल रहमान मक्की का करीबी है। अमेरिका ने साल 2012 में हमजा को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। हमजा को भारत के खिलाफ कई आतंकी हमलों से जोड़ा गया है। उसे जम्मू के सुंजवां में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। 8 साल पहले संगठन से अलग हुआ था कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2018 में फंड की कमी की समस्या की वजह से लश्कर-ए-तैयबा में फूट पड़ गई थी। इसके बाद आमिर हमजा ने खुद को संगठन से अलग कर लिया था। उसने अपना नया संगठन बनाया था। इसका नाम जैश-ए-मनक्फा रखा गया था। —————————————— पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में गाय-भैंस पालने पर गोबर टैक्स लगाने की तैयारी:हर पशु पर रोजाना 30 रुपए वसूलेगी सरकार, विपक्ष बोला- यह रेवेन्यू जुटाने का तरीका पाकिस्तान के पंजाब राज्य में गाय और भैंस पालने पर अब ‘टैक्स’ लगाने की तैयारी हो रही है। पाकिस्तानी अखबार डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मरियम नवाज की सरकार हर गाय और भैंस पर रोजाना 30 पाकिस्तानी रुपए फीस देने का नियम बना सकती है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

CDS Anil Chauhan Uttarakhand Char Dham Yatra Prep Meeting

CDS Anil Chauhan Uttarakhand Char Dham Yatra Prep Meeting

बद्रीनाथ पहुंचे CDS अनिल चौहान ने चारधाम यात्रा की तैयारियां जांची। चारधाम यात्रा के शुरू होने से तीन दिन पहले सीडीएस अनिल चौहान आज चमोली स्थित बद्रीनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद हाई लेवल मीटिंग की। मीटिंग में CDS ने कहा . यात्रा में आने वाले किसी भी श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं आनी चाहिए। सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। CDS ने कल से शुरू हो रही सूर्य देवभूमि चैलेंज 2026 अल्ट्रा ट्रेल रनिंग की तैयारियां देखी। इसके बाद उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए जोश भरा। इस समय केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी ITBP के पास है। नीरज चोपड़ा बोले- अल्ट्रा ट्रेल रनिंग में हिस्सा लें ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने कहा कि 17 से 19 अप्रैल तक सेना और उत्तराखंड सरकार सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 शुरू कर रही है। यह 113km अल्ट्रा ट्रेल रनिंग है, जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर होगी। नीरज चोपड़ा ने देशभर से युवा इसमें हिस्सा लेने की अपील की है। अल्ट्रा ट्रेल रनिंग को सीडीएस अनिल चौहान ने भी प्रमोट किया। ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा सूर्य देवभूमि चैलेंज 2026 अल्ट्रा ट्रेल रनिंग में हिस्सा लेने की अपील करते हुए। ‘सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए’ जनरल चौहान ने ITBP, सेना और उत्तराखंड पुलिस के साथ हाई लेवल मीटिंग की। मीटिंग में आपदा प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और यात्रा मार्ग की स्थिति पर डिटेल जानकारी शेयर की गई। सीडीएस अनिल चौहान लोगों के साथ फोटो खिंचवाते हुए। CDS को संबंधित अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन के जरिए सुरक्षा इंतजामों और आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों का ब्योरा दिखाया। CDS ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगमता और सुविधा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। कौन हैं नीरज चोपड़ा हरियाणा के पानीपत (खंडरा गांव) के रहने वाले नीरज चोपड़ा दुनिया के नंबर-2 जेवलिन थ्रोअर हैं। वे भारत की ओर से लगातार दो ओलिंपिक गेम्स में मेडल जीत चुके हैं। नीरज ने पेरिस ओलिंपिक में सिल्वर और टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे वर्ल्ड क्लास टूर्नामेंट में भारत को गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। 2018 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, 2021 में खेल रत्न पुरस्कार और 2022 में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। नीरज चोपड़ा 26 अगस्त 2016 को सेना में नायब सूबेदार के पद पर भर्ती हुए थे। 2021 में उन्हें सूबेदार बनाया गया। टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्हें सेना द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया गया। 2022 में नीरज को सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नति मिली। इसके बाद सेना ने 14 मई को नीरज चोपड़ा को टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि दी थी। 2025 के मुकाबले 11 दिन पहले खुलेंगे बद्रीनाथ के कपाट बद्रीनाथ धाम के कपाट इस बार पिछले साल के मुकाबले 11 दिन पहले खुल रहे हैं। तय हुआ है कि बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। 2025 के यात्रा सीजन में रिपोर्ट के मुताबिक, बद्रीनाथ धाम में 16.52 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। 22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… केदारनाथ धाम में बर्फ की चादर के बीच खुलेंगे कपाट: ग्लेशियर्स काटकर बना स्नो कॉरिडोर, अब तक 5.96 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे वे बर्फ की ऊंची दीवारों के बीच से होकर बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। (पढ़ें पूरी खबर)

भारतीय गठबंधन पार्टियों ने ‘हरिवंश 3.0’ का विरोध किया, राज्यसभा उपसभापति चुनाव का बहिष्कार किया: रिपोर्ट | भारत समाचार

Stock Market Live Updates: Sensex, Nifty Rally Over Hopes Of Fresh Peace Talks

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 13:16 IST INDI गठबंधन के दलों ने कहा कि भाजपा ने विपक्षी दलों के साथ महत्वपूर्ण परामर्श को नजरअंदाज कर दिया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सदन में बोलते हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश भी दिखे. (छवि: पीटीआई फ़ाइल) INDI गठबंधन के दलों ने बुधवार को शुक्रवार को होने वाले राज्यसभा उपसभापति चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया। समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा पहली बार रिपोर्ट किया गया यह घटनाक्रम कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विपक्ष के साथ “सार्थक परामर्श” को नजरअंदाज करने का आरोप लगाने के बाद आया। दिग्गज कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि यह पहली बार है कि राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किसी व्यक्ति के नाम पर उपसभापति पद के लिए विचार किया जा रहा है। राज्यसभा शुक्रवार, 17 अप्रैल को उच्च सदन की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 7 के तहत अपने नए उपसभापति का चुनाव करने के लिए तैयार है। सदन के पटल पर कागजात और रिपोर्ट रखे जाने के बाद कार्यवाही सुबह 11:00 बजे शुरू होने वाली है। एक विस्तृत पोस्ट में, जयराम रमेश ने कहा: “सबसे पहले, मोदी सरकार ने सात वर्षों से लोकसभा में एक उपसभापति की नियुक्ति नहीं की है, जो पहले कभी नहीं हुआ। दूसरा, राज्यसभा में उपसभापति का समकक्ष उपसभापति होता है। हरिवंश का दूसरा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया। एक दिन बाद, उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के सदस्य के रूप में नामित किया गया था, और अब वह तीसरे कार्यकाल के लिए उपसभापति के लिए एनडीए के उम्मीदवार हैं।” उन्होंने कहा, “इससे पहले कभी भी राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किसी व्यक्ति को इसके उपसभापति पद के लिए विचार नहीं किया गया है। तीसरा, यह सब विपक्ष के साथ किसी सार्थक परामर्श के बिना किया जा रहा है।” हल्की टिप्पणी में उन्होंने कहा कि विपक्ष को उम्मीद है कि “हरिवंश 3.0” अधिक ग्रहणशील होगा। उन्होंने कहा, “इन तीन कारणों से, और विरोध के प्रतीक के रूप में – लेकिन बहुत विद्वान श्री हरिवंश का अनादर किए बिना – विपक्ष ने अफसोस के साथ 17 अप्रैल को होने वाले चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। विपक्ष को उम्मीद है कि हरिवंश 3.0 उसके अनुरोधों के प्रति अधिक मिलनसार और ग्रहणशील होगा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 13:16 IST न्यूज़ इंडिया भारतीय गठबंधन पार्टियों ने ‘हरिवंश 3.0’ का विरोध किया, राज्यसभा उपसभापति चुनाव का बहिष्कार किया: रिपोर्ट अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा उपसभापति चुनाव(टी)भारत गठबंधन का बहिष्कार(टी)हरिवंश उपसभापति(टी)जयराम रमेश कांग्रेस(टी)मोदी सरकार विरोध(टी)लोकसभा उपसभापति रिक्ति(टी)एनडीए उम्मीदवार राज्यसभा(टी)राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राज्यसभा

गाजियाबाद में 200 झोपड़ियों में भीषण आग, सिलेंडर फट रहे:10 किमी दूर से दिख रहा धुआं, 8 गाड़ियां बुझाने में लगीं

गाजियाबाद में 200 झोपड़ियों में भीषण आग, सिलेंडर फट रहे:10 किमी दूर से दिख रहा धुआं, 8 गाड़ियां बुझाने में लगीं

गाजियाबाद में गुरुवार दोपहर 12 बजे करीब 200 झुग्गी-झोपड़ियों में भीषण आग लग गई। सिलेंडरों में लगातार ब्लास्ट हो रहे हैं। धुएं का गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा है। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है। लोग अपने घरों का सामान और गैस सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। फिलहाल, फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने नोएडा से भी दमकल की गाड़ियां मंगाई हैं। आसपास के घरों को खाली कराया जा रहा है। आग इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनवानी गांव में लगी है। घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- जहां आग लगी, वहां कम से कम 500 झुग्गी-झोपड़ियां थीं। इस वक्त सिर्फ आग और धुआं ही नजर आ रहा है। हालांकि, डीएम रविन्द्र कुमार ने बताया- 150 से ज्यादा झुग्गियों में आग लगी है। यहां पर कबाड़ का काम होता था। काम करने वाले ही यहां झुग्गियां बनाकर रहते थे। अगर किसी से लापता होने की खबर आती है, तो सर्वे भी कराया जाएगा। आग की 4 तस्वीरें… गाजियाबाद में आग की घटना से जुड़े पल-पल की अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

बड़वानी में बजरंग दल ने 13 गोवंश को मुक्त कराया:तीन लोडिंग वाहनों से हो रही थी तस्करी, जुलवानिया थाने में केस दर्ज

बड़वानी में बजरंग दल ने 13 गोवंश को मुक्त कराया:तीन लोडिंग वाहनों से हो रही थी तस्करी, जुलवानिया थाने में केस दर्ज

बड़वानी जिले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से ले जाए जा रहे 13 गोवंश को मुक्त कराया। गुरुवार को यह कार्रवाई तीन लोडिंग वाहनों को रोककर की गई। सभी वाहनों को जुलवानिया पुलिस थाने में खड़ा कराया गया है, जहां पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम ठाकुर ने बताया कि गुरुवार दोपहर वे खलघाट से सेंधवा की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने तीन पिकअप वाहनों में गोवंश को भरा हुआ देखा। कार्यकर्ताओं ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक तेजी से गाड़ी भगाने लगे। शुभम ठाकुर के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने पीछा कर तीनों वाहनों को जुलवानिया के पास रोका। जांच के दौरान वाहनों में 13 गोवंश पाए गए। इस दौरान चार आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि एक वाहन चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। पकड़े गए आरोपियों और वाहनों को जुलवानिया थाने लाया गया। बड़वानी जिले के एबी रोड पर गोवंश का अवैध परिवहन लगातार जारी है। मध्य प्रदेश शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद तस्कर सक्रिय हैं। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार ज्ञापन और चेतावनी भी दी जा चुकी है, लेकिन गोवंश की तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जुलवानिया पुलिस ने बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा सौंपे गए गोवंश और वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग:याचिका खारिज; CJI बोले- जरूरत जागरूकता की है, हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश में वोटिंग अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश नीतिगत दायरे में आता है और न्यायपालिका इसे जारी नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि जान-बूझकर वोट न डालने वालों के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग और वोटिंग अनिवार्य बनाने वाली याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता। बेंच ने PIL याचिकाकर्ता अजय गोयल से कहा कि वे अपनी शिकायतों को लेकर संबंधित पक्षों से संपर्क करें।याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जो लोग जान-बूझकर वोट डालने से दूर रहते हैं, उनके लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। CJI ने कहा- लोकतंत्र कानूनी दबाव के बजाय जन जागरूकता से फलता-फूलता है। एक ऐसे देश में जो कानून के शासन से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है। जहां हमने 75 सालों में हमने दिखाया है कि हम इस पर कितना भरोसा और विश्वास करते हैं, वहां हर किसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह वोट डालने जाए। अगर वे नहीं जाते, तो नहीं जाते। जरूरत जागरूकता की है, लेकिन हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते। CJI ने चुनाव के दौरान होने वाले परेशानिायं भी बताईं सुनवाई केदौरान बेंच ने अनिवार्य वोटिंग कानून की व्यावहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया और कहा कि चुनाव के दिनों में, जजों समेत कई नागरिकों को काम करना पड़ता है। दरअसल, याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देना चाहिए कि वह वोट न डालने वालों के लिए सरकारी सुविधाओं पर रोक लगाए। इस पर CJI ने घर पर रहने के काम को अपराध बनाने के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हम आपका सुझाव मान लेते हैं, तो मेरे साथी जस्टिस बागची को वोट डालने के लिए पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा, भले ही उस दिन काम का दिन हो।” बेंच ने समाज के वंचित वर्गों के लिए भी चिंता जताई। बेंच ने पूछा, “अगर कोई गरीब व्यक्ति कहता है कि मुझे अपनी दिहाड़ी कमानी है, तो मैं वोट कैसे डालूं, हम उनसे क्या कहें।” याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह एक समिति बनाए, जो उन लोगों पर रोक लगाने के प्रस्ताव दे, जो अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में नाकाम रहते हैं। हालांकि CJI ने कहा, ‘हमें आशंका है कि ये मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं।’