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Anil Ambani Bank Account Fraud

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नई दिल्ली42 मिनट पहले

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रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है।

अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं।

अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड

पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं।

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रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो)

सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है।

अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?

अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं।

अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड

पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं।

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