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अगर ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाए, तो क्या होगा? इमरजेंसी के डॉक्टर से जान लीजिए सबसे बड़े खतरे

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Last Updated:April 16, 2026, 11:58 IST Low Blood Pressure Dangers: ब्लड प्रेशर बहुत कम होने पर शरीर के ऑर्गन्स तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता, जिससे चक्कर, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह कंडीशन ब्रेन, हार्ट और किडनी फेलियर की वजह बन सकती है. सही समय पर ट्रीटमेंट से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है. गर्मी में लो बीपी का ज्यादा ज्यादा होता है. बीपी बहुत कम हो जाए, तो इससे कई ऑर्गन्स तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है. Can Low BP Be Dangerous: ब्लड प्रेशर सामान्य रहना चाहिए और अगर यह बढ़ जाए या घट जाए, तो इससे कई गंभीर कंडीशन पैदा हो सकती है. ब्लड प्रेशर जब नॉर्मल रहता है, तो शरीर के सभी ऑर्गन्स में पर्याप्त मात्रा में खून की सप्लाई होती रहती है. जब यह सामान्य से बहुत कम हो जाता है, तो शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में लो ब्लड प्रेशर या हाइपोटेंशन कहा जाता है. कई लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन यह गंभीर और जानलेवा स्थिति भी बन सकती है. अगर बीपी में अचानक गिरावट को कभी भी नजरअंदान न करें और तुरंत अस्पताल भागें. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया जब ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाता है, तो सबसे पहले दिमाग पर असर पड़ता है. व्यक्ति को चक्कर आना, सिर हल्का महसूस होना, धुंधला दिखना या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है. अगर यह स्थिति बार-बार हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो जानलेवा हो सकती है. हमारे शरीर के तमाम ऑर्गन्स को हर वक्त सही मात्रा में ब्लड की जरूरत होती है. अगर इसकी सप्लाई में जरा सी दिक्कत होती है, तो इससे ब्रेन की सेल्स मरने लगती हैं. इससे व्यक्ति कोमा में जा सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि लो ब्लड प्रेशर का असर दिल पर भी बुरी तरह पड़ता है. दिल को शरीर में खून पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. कुछ गंभीर मामलों में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक की कंडीशन पैदा हो सकती है. अगर मरीज पहले से किसी दिल की बीमारी से जूझ रहा हो, तो यह स्थिति घातक हो सकती है. इसके अलावा किडनी और अन्य ऑर्गन्स पर भी इसका असर पड़ता है. जब ब्लड फ्लो कम होता है, तो किडनी सही तरीके से काम नहीं कर पाती और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते. इससे शरीर में कमजोरी, पेशाब की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है. अब सवाल है कि ब्लड प्रेशर लो कब हो सकता है? डॉक्टर गुप्ता के अनुसार लो ब्लड प्रेशर के कारण कई हो सकते हैं. शरीर में पानी की कमी, ज्यादा खून बहना, लंबे समय तक भूखे रहना, दवाइयों का असर या किसी गंभीर बीमारी के कारण ब्लड प्रेशर काफी कम हो सकता है. कई बार अचानक खड़े होने पर भी यह समस्या हो सकती है, जिसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है. अगर किसी का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम हो जाए, तो तुरंत उसे लिटाकर पैरों को थोड़ा ऊपर उठाना चाहिए, ताकि दिमाग तक खून की सप्लाई बेहतर हो सके. मरीज को पानी या इलेक्ट्रोलाइट देना भी मदद कर सकता है, लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 16, 2026, 11:58 IST

आम खाने का सही तरीका क्या है? सिर्फ 1 गलती की और शरीर में भर सकता है जहर, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए सही नियम

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Last Updated:April 16, 2026, 11:57 IST Aam Khane Ka Sahi Tarika : गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में ‘फलों के राजा’ आम की खुशबू महकने लगी है. रसीले आम का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाना लाजमी है. स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ आम विटामिन्स और मिनरल्स का खजाना भी है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस मीठे फल को आपकी सेहत के लिए ‘जहर’ समान बना सकती है? न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक ने हाल ही में आम खाने के उन सही नियमों के बारे में बताया है, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं. Mango Eating Tips : ज्यादातर लोग बाजार से आम खरीदकर लाते हैं, उन्हें नल के नीचे धोते हैं और तुरंत काटकर खाना शुरू कर देते हैं. पहली नजर में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से यह बहुत बड़ी गलती है. बिना सही प्रक्रिया के आम खाने से न केवल पेट खराब हो सकता है, बल्कि यह स्किन और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डालता है. अगर आप आम के शौकीन हैं, तो आपको इसे खाने का सही तरीका और एक्सपर्ट की सलाह जरूर जाननी चाहिए. भिगोना क्यों है जरूरी? (Why Soaking is Essential) न्यूट्रिशनिस्ट निराली टांक के अनुसार, आम को खाने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले पानी में भिगोकर रखना अनिवार्य है. यह प्रक्रिया केवल ऊपरी धूल-मिट्टी साफ करने के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है. आम की तासीर प्राकृतिक रूप से गर्म होती है. अगर इसे सीधे खाया जाए, तो यह शरीर के ‘थर्मोजेनेसिस’ (आंतरिक गर्मी) को बढ़ा देता है. यही कारण है कि कई लोगों को आम खाने के बाद चेहरे पर फुंसियां या मुंहासे निकलने की शिकायत होती है. शरीर की गर्मी पर नियंत्रण (Controlling Body Heat)- पानी में भिगोने से आम की यह अतिरिक्त गर्मी (Heat Content) काफी हद तक कम हो जाती है. जब आम ठंडा हो जाता है, तो यह शरीर में गर्मी पैदा करने के बजाय ठंडक पहुंचाता है. जो लोग आम खाने के बाद पेट में जलन या मुंह में छालों से परेशान रहते हैं, उनके लिए यह तरीका रामबाण है. यह छोटा सा काम आम को शरीर के लिए सुरक्षित और पचाने में बेहद आसान बना देता है. Add News18 as Preferred Source on Google फाइटिक एसिड से सुरक्षा (Neutralizing Phytic Acid)- एक और गंभीर कारण है आम में मौजूद ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid). फाइटिक एसिड एक ऐसा तत्व है जिसे ‘एंटी-पोषक तत्व’ माना जाता है. यह शरीर को कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स को सोखने से रोकता है. जब हम आम को कुछ देर पानी में भिगोते हैं, तो यह एसिड पानी में निकल जाता है. ऐसा करने से आम में मौजूद भरपूर पोषण आपके शरीर को पूरी तरह मिल पाता है और आप एनीमिया जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं. रसायनों और टॉक्सिन्स से बचाव (Safety from Chemicals)- आजकल फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और तेजी से पकाने के लिए कीटनाशकों (Pesticides) और केमिकल्स का भारी इस्तेमाल होता है. ये रसायनिक तत्व छिलके की ऊपरी परत पर चिपके रहते हैं. केवल सादे पानी से धोने भर से ये साफ नहीं होते. जब आम को एक घंटे तक पानी के बर्तन में डुबोकर रखा जाता है, तो ये हानिकारक रसायन पानी में घुलकर निकल जाते हैं, जिससे शरीर के अंदर ‘टॉक्सिन्स’ या जहर पहुंचने का खतरा खत्म हो जाता है. पाचन तंत्र पर असर (Impact on Digestion)- गलत तरीके से आम खाने का सबसे पहला असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. बिना भिगोए आम खाने से कब्ज, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी संवेदनशील हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप आम को सही विधि से खाते हैं, तो इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन को दुरुस्त रखता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है. खाने का सही समय (The Ideal Time to Eat)- न्यूट्रिशनिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आम को कभी भी मुख्य भोजन (Heavy Meal) के तुरंत बाद नहीं खाना चाहिए. इसे या तो सुबह के नाश्ते के समय लें या फिर दोपहर के स्नैक के रूप में. खाने के तुरंत बाद आम खाने से शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदेह है. इसलिए समय और तरीके का तालमेल ही आपको आम के असली फायदों से रूबरू कराएगा. अंत में, यह ध्यान रखें कि आम केवल एक फल नहीं बल्कि सेहत का खजाना है, बशर्ते आप इसे प्रकृति के नियमों के अनुसार खाएं. तो अगली बार जब आप घर में आम लाएं, तो उसे सीधे थाली में सजाने के बजाय एक घंटे के लिए ठंडे पानी की बाल्टी में जरूर डालें. अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें और न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा बताए गए इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर गर्मियों के इस सुनहरे तोहफे का सुरक्षित आनंद लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) First Published : April 16, 2026, 11:57 IST

गर्मी में पपीता आपकी सेहत के लिये कैसे है फायदेमंद, इसको खाने का सही समय क्या है?

भिवाड़ी में सब्जियों के दाम आसमान पर, गर्मी बढ़ी तो घर का बजट भी बिगड़ा

गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक, ऊर्जा और सही पोषण की आवश्यकता होती है. ऐसे में पपीता एक ऐसा फल है जो न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह विटामिन‑मिनरल्स से भरपूर होता है, इसलिए इसे गर्मियों के लिए एक आदर्श फल माना जाता है. 1. शरीर को रखता है हाइड्रेटपपीता लगभग 85–88% पानी से बना होता है, जो गर्मी में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है. पसीने के कारण निकलने वाले तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई में यह सहायक है, जिससे थकान और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. 2. पाचन को करता है दुरुस्तपपीते में पपेन (Papain) नामक प्राकृतिक एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है. नियमित रूप से पपीता खाने से कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. इसमें मौजूद फाइबर भी आंतों की सफाई में सहायक है. 3. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायकपपीता विटामिन C और विटामिन A का अच्छा स्रोत है. गर्मियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में पपीता शरीर की रोग‑प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है. 4. त्वचा के लिए फायदेमंदतेज धूप और पसीने की वजह से त्वचा पर टैनिंग और मुंहासे हो सकते हैं. पपीते में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन C त्वचा को भीतर से पोषण देते हैं, झुर्रियों को कम करने और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं. 5. वजन नियंत्रण में मददगारपपीता कैलोरी में कम और फाइबर में अधिक होता है. इसे खाने से पेट देर तक भरा रहता है, जिससे बार‑बार भूख नहीं लगती और वजन को संतुलित रखने में मदद मिलती है. पपीता खाने का सही समय सुबह खाली पेट पपीता खाना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय इसका पपेन एंजाइम बेहतर तरीके से काम करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय भी करता है.दोपहर में भोजन से 30 मिनट पहले या बीच में भी पपीता खाया जा सकता है, इससे भूख नियंत्रित रहती है.रात में देर से पपीता खाने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ लोगों को इससे गैस या भारीपन महसूस हो सकता है. इन बातों पर जरूर ध्यान दें विशेष रूप से ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएं कच्चा या अधपका पपीता न खाएं.इस तरह, सही समय पर पपीता खाने से गर्मी में शरीर को ठंडक, ऊर्जा और संपूर्ण पोषण मिलता है.

जेन-जी ​के बीच विंटेज वॉच का ट्रेंड; खरीदारी 44% बढ़ी:ग्लोबल सेकेंड-हैंड घड़ी बाजार 27 लाख करोड़ का, 2030 तक 42 लाख करोड़ का अनुमान

जेन-जी ​के बीच विंटेज वॉच का ट्रेंड; खरीदारी 44% बढ़ी:ग्लोबल सेकेंड-हैंड घड़ी बाजार 27 लाख करोड़ का, 2030 तक 42 लाख करोड़ का अनुमान

ब्रिटेन के जेन-जी युवा इवान फ्राई का जन्म तब हुआ, जब लोग जेब में नोकिया 1100 फोन रखते थे। उस समय मोबाइल भी स्क्रीन पर समय दिखाने लगे थे। लोगों को चिंता थी कि कहीं माेबाइल पारंपरिक कलाई घड़ियों की जगह न ले लें। पूरी जिंदगी फ्राई ने आईफोन, लैपटॉप, टीवी और यहां तक कि बाथरूम के शीशों पर भी समय देखा। इसके बावजूद उन्होंने 50 साल पुरानी 35 से ज्यादा विंटेज घड़ियां इकट्ठा कीं। इनकी कीमत 90 हजार से 3 लाख रुपए तक है। फ्राई के पास सबसे कीमती घड़ी टैग ह्यूअर कैरेरा है, जिसे उन्होंने लगभग 3 लाख रुपए में खरीदा है। फ्राई का सपना ‘एच मौसेर’ की घड़ी पहनने का है, जिसकी कीमत 50 लाख रुपए है। केवल फ्राई ही नहीं ज्यादातर जेनी-जी (29 साल तक के युवा) में विंटेज घड़ियों का क्रेज बढ़ा है। पुरानी लग्जरी घड़ियां बेचने वाली कंपनी बेजल के मुताबिक, जेन जी ग्राहक कंपनी की लगभग एक-तिहाई घड़ियां खरीदते हैं। कंपनी के सीईओ क्वैड वॉकर बताते हैं ‘अब घड़ी कंपनियां युवाओं पर फोकस कर रही हैं। आज जेन-जी ग्राहक ही घड़ी खरीदने पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं।’ क्रोनो-24 की रिपोर्ट के मुताबिक, सेकेंडरी (विंटेज /प्री-ओन्ड) वॉच मार्केट में जेन-जी की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2018 के बाद जेन-जी के बीच ड्रेस/विंटेज स्टाइल घड़ियों की खरीदारी 44% बढ़ी है। ग्लोबल विंटेज/सेकेंड-हैंड घड़ियों का बाजार 26-27 लाख करोड़ रुपए का है। यह बाजार सालाना लगभग 9% बढ़ रहा है और 2030 तक 42 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। ऑनलाइन विंटेज घड़ी बेचने वाली दाहयन ली बताती हैं कि उनके इंस्टाग्राम पर 10,000 फॉलोअर्स हैं। इनमें 45% से ज्यादा जेन-जी हैं। वे कहती है, ‘ये लोग डिजिटल माहौल में पले-बढ़े हैं, लिहाजा उनके अंदर पुरानी चीजों की चाहत ज्यादा है।’ बदला ट्रेंड, घड़ियों में जेंडर की दीवार टूटी दाहयन कहती हैं कि कई पुरुष ग्राहक छोटी और महिलाओं की घड़ियों के शौकीन हैं। मैंने पुरुषों को भी ऐसी कई घड़ियां बेची हैं, जिन्हें आमतौर पर महिलाओं की घड़ी माना जाता है। वे कहती है ‘कुछ लड़कियां भी पुरुषों की घड़ियां पसंद करती हैं।’ फ्राई के पास ऐसी कई घड़ियां हैं, जो महिलाओं के लिए डिजाइन हुई थीं।

मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल-सीएनजी:प्रभारी कलेक्टर बोले- क्राइम रोकने लिया फैसला, फ्यूल देने पर संचालक पर होगी कार्रवाई

मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल-सीएनजी:प्रभारी कलेक्टर बोले- क्राइम रोकने लिया फैसला, फ्यूल देने पर संचालक पर होगी कार्रवाई

अब मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को पेट्रोल,डीजल,सीएनजी नहीं मिलेगा। ऐसा करना पेट्रोल पंप संचालकों के लिए अपराध होगा। इस तरह का आदेश बुधवार देर शाम जिले भर के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों बाइक, ट्रैक्टर, डंपर, कार सहित अन्य वाहनों से हो रहे क्राइम को रोकने के लिए यह पहल जिला प्रशासन की ओर से उठाई गई है। जिला प्रशासन का मानना है कि गाड़ी पर रजिस्ट्रेशन ना होने से क्राइम के बाद जांच प्रभावित होती है। बिना रजिस्ट्रेशन फ्यूल नहीं मुरैना के प्रभारी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के द्वारा जिले के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया है कि वह अब बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी नहीं देंगे।अगर ऐसा करेंगे तो वह जिला प्रशासन के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। उस पंप संचालक पर धारा 223 व अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी रहेगा। बढ़ते अपराधों पर लगाम की कोशिश जिला प्रशासन का मानना है कि जिले में बड़ रहे अपराधों के वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नहीं पाए जाते जैसे ट्रैक्टर, बाइक, डंपर, कार आदि जिससे क्राइम केस की जांच प्रभावित होती है। ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉलियां और लोडिंग वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं डाले जाते, जिससे हादसे के बाद उस तक पहुंचा मुश्किल होता है। इस कारण जिला प्रशासन ने यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 163 के अंतर्गत एक पक्षीय रूप से पारित किया गया है।

महिलाओं में भी बढ़ रहा पुरुषों की तरह गंजापन, डॉक्टर ने बताई ये है सबसे बड़ी वजह, जानें उपाय

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Last Updated:April 16, 2026, 11:27 IST Hair Fall Reasons: अब पुरुषों ही नहीं, महिलाओं में भी गंजापन की समस्या बढ़ती जा रही है. पुरुषों और महिलाओं में बालों के झड़ने के कुछ अंतरों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसे में दिल्ली के डॉ. विनय सिंह के अनुसार आजकल युवा महिलाओं में गंजापन तेजी से बढ़ रहा है. इसका मुख्य कारण जल्दी शुरू होने वाले पीरियड्स, कम उम्र में मेनोपॉज़, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओडी, थायरॉयड की समस्या और बढ़ता तनाव है. आइये जानते हैं इसकी मुख्य वजह क्या है. ख़बरें फटाफट नई दिल्ली: पुरुषों में गंजापन होना आम बात है, लेकिन कम उम्र में लड़कों या पुरुषों के बाल झड़ जाना बहुत गंभीर नहीं माना जाता है. क्योंकि पुरुषों में जेनेटिक कारण होने के साथ ही तमाम फैक्टर होते हैं. अब कम उम्र की लड़कियों और महिलाओं में भी गंजापन बढ़ रहा है. ठीक वैसे ही, जैसे पुरुषों में होता आया है. बीते 10 सालों में ऐसे मामलों में इजाफा हुआ है. महिलाओं के बाल जो खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं. वो अब कम उम्र में सिर से गायब हो रहे हैं. आलम यह है कि डॉक्टर के पास ऐसी महिलाओं और लड़कियों की भीड़ बढ़ने लगी है. इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) के प्रेसिडेंट यानि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह इस पर कई प्रमुख कारण मानते हैं. कम उम्र में पीरियड्स है बड़ी वजह डॉ. विनय सिंह ने बताया कि महिलाओं और लड़कियों में गंजेपन की बड़ी वजह हार्मोन्स का असंतुलित होना है. महिलाओं में गंजेपन को फीमेल पैटर्न बाल्डनेस कहते हैं. बीते 10 सालों में ऐसे मामलों में लगातार इजाफा हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि लड़कियों को अब कम उम्र में पीरियड से शुरू हो जाते हैं. अब 8 साल से लेकर 12 साल के बीच लड़कियों में पीरियड्स होने लगे हैं या पीरियड्स रेगुलर नहीं होते हैं. इस वजह से हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका असर उनकी बॉडी में दिखने लग जाता है. इसका असर DHT यानी डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन पर पड़ता है. इसका असर बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिस वजह से बाल पतले हो जाते हैं या बाल झड़ जाते हैं, जिस वजह से सिर की स्किन यानी स्कैल्प दिखने लग जाता है और खालीपन बन जाता है. महिलाओं में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का प्रभाव बढ़ने पर फॉलिकल सिकुड़ते हैं. कम उम्र में मेनोपॉज है कारण इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) के प्रेसिडेंट यानि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह ने बताया कि महिलाओं में गंजेपन के और भी कई कारण होते हैं. जैसे बढ़ती उम्र 30-40 के बाद यह समस्या अधिक दिखने लगती है. इसके अलावा एक और सबसे प्रमुख कारण वह यह है कि कम उम्र में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) का होना. अब यह 45 साल की उम्र में भी होने लगा है, जिस वजह से महिलाओं में एस्ट्रोजन घटता है. एंड्रोजन का असर बढ़ जाता है. इस वजह से भी गंजापन आता है और थायरॉयड, पीसीओडी, एनीमिया या पोषण की कमी और अत्यधिक तनाव भी इसकी वजह है. जानें कैसे पहाचानें लक्षण 1- मांग चौड़ी दिखने लगना2– सिर के बीच से स्कैल्प दिखना3- पोनीटेल पतली होना4- कंघी करते समय ज्यादा बाल गिरना5- बालों का पतला और बेजान होना इस तरह करवाएं इलाज डॉ. विनय सिंह ने बताया कि जब भी महिलाओं या लड़कियों में पीरियड्स रेगुलर ना हो तो इस बात को गंभीरता से लेते हुए सबसे पहले एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें. इन दोनों से इलाज करवाने के बाद ही अपने बाल, नाखून या स्क्रीन से जुड़ी कोई भी बीमारी हो तो उसके लिए हमेशा रजिस्टर्ड डर्मेटोलॉजिस्ट से ही मिलें. यही लोग सही इलाज कर सकते हैं. घर पर कोई घरेलू नुस्खा अपनाने से बेहतर है कि अगर आपने समय रहते डॉक्टर को दिखा लिया तो आपके बाल बच सकते हैं और आपकी पीरियड्स की जो दिक्कत है. वह भी दूर हो जाएगी. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 16, 2026, 11:27 IST

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence

Hindi News Career Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence | Minimum Wage Act 2026 16 मिनट पहले कॉपी लिंक नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन 8वें दिन भी जारी है। 8 दिन पहले, 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग 42 हजार कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। 13 अप्रैल को सैलरी बढ़ाने और बेहतर वर्किंग कंडीशन की मांग को लेकर हो रहा ये प्रदर्शन उग्र हो गया था। नोएडा सेक्टर 60, 62, 84 और फेज-2 सहित कई इलाकों में भड़की भीड़ ने फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प हुई। पुलिस के मुताबिक, हिंसा सबसे पहले नोएडा का फेज-2 से भड़की थी। यहां मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव कंपनियां हैं। इन कंपनियों के 1000 से ज्यादा वर्कर्स सैलरी बढ़ाने को लेकर पिछले 6 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। करीब 500 कर्मचारी मदरसन कंपनी के बाहर जुटे थे। 16 अप्रैल को भी प्रदर्शन की तैयारी हरियाणा में हालिया सैलरी रिवीजन के बावजूद वर्कर नाखुश हैं। उनका कहना है कि बढ़ी हुई सैलरी महंगाई के मुकाबले बहुत कम है। गुरुग्राम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इंप्लॉयज यूनियन के लीडर वसंत कुमार ने कहा कि इतनी सैलरी में गुरुग्राम जैसी सिटी में कोई कैसे जी सकता है? उन्होंने कहा, ‘नए लेबर कोड, LPG संकट और खराब वर्किंग कंडिशंस वर्कर्स के हित में नहीं है। इसलिए हम इन सबके खिलाफ प्रोटेस्ट जारी रखेंगे।’ यहां के वर्कर्स केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ये कोड्स बिना ओवरटाइम मुआवजे के 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति देते हैं। इससे फैक्ट्री मालिकों को वर्कर्स के शोषण का मौका मिलेगा। नए नियमों में ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस (OSH) कोड-2020 के मुताबिक, एंप्लॉयर्स और वर्कर्स को फ्लेसिबल शिफ्ट पैटर्न का मौका देती है। इसके तहत वर्कर्स से 12 घंटे तक काम करवाया जा सकता है, बशर्ते हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी भी मिलनी चाहिए। यानी हफ्ते में सिर्फ 48 घंटे ही काम करेंगे। अगर ओवरटाइम करते हैं तो उसका कम से कम डबल वेज मिलना चाहिए। लेकिन यूनियन और वर्कर्स को डर है कि फैक्ट्री मालिक 8 घंटे के पैसे में ही 12 घंटे काम करवाएंगे। ऐसे में म्युनिसिपल और स्टेट वर्कर्स ने 16 अप्रैल को तीन घंटे तक सारा काम बंद कर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। नोएडा में प्रोटेस्टर्स ने कहा- ‘200 रुपए बढ़े, इसमें क्या होगा?’ प्रोटेस्टर्स में से रागिनी बताती हैं, ‘हम अपनी मांगों को लेकर लगभग महीने भर से प्रोटेस्ट कर रहे हैं। 200 रुपए बढ़े हैं, इसमें क्या होगा? सरकार 20 हजार सैलरी करे, वो भी तुरंत। जब तक ये नहीं होगा, हम लोग प्रोटेस्ट जारी रखेंगे!’ कई लोगों की शिकायत थी कि 8 घंटे से ज्यादा काम करवाते हैं। ओवरटाइम के हिसाब से पैसे नहीं मिलते। सैलरी कभी टाइम पर नहीं आती। सैलरी स्लिप में 20 हजार लिखते हैं पर देते 11 हजार हैं। कंपनी में सारे कर्मचारियों के लिए एक ही टॉयलेट है। कोई बीमार पड़े तो भी उसे जल्दी छुट्टी नहीं मिलती। प्रोटेस्टर्स का कहना है कि अभी के हालात तो और खराब हैं। किराया और खाना तो महंगा है ही, सिलेंडर ही 4-5 हजार का आ रहा है। इतनी सैलरी में खाएं, बच्चे पालें या बच्चों को पढ़ाएं? एक दूसरे प्रोटेस्टर ने कहा कि, ‘किस हिसाब से 341 रुपए बढ़े हैं? हम ज्यादा नहीं मांग रहें। हमें बस सरकारी आदेश के हिसाब से बढ़ी हुई सैलरी चाहिए।’ एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आखिरी बार साल 2012 में मिनिमम वेज रिवाइज हुए थे। मिनिमम वेजेस एक्ट के मुताबिक, हर सेक्टर के हिसाब से मिनिमम वेजेस तय किए गए हैं। इनमें भी रीजन के हिसाब से, यानी टियर 1, 2 और 3 सिटीज के हिसाब से अलग वेजेस तय किया गया है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि यूपी गवर्नमेंट के बढ़ाए रुपयों में तो रीजन और केटेगरी वाइज वैरिएशंस दिखते हैं। पर इससे पहले वाली सैलरी में ये वैरिएशंस नहीं है। हरियाणा में प्रोटेस्ट के बाद सरकार ने 35% सैलरी बढ़ाई नोएडा के वर्कर्स जैसी ही मांगों को लेकर अप्रैल के पहले हफ्ते में हरियाणा के फैक्ट्री वर्कर्स ने भी प्रोटेस्ट किया था। पिछले हफ्ते ही मानेसर के इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) में भी झड़पें हुई थीं। तब भी हजारों कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स सड़कों पर उतर आए थे। इसके पहले फरवरी में पानीपत में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के लगभग 30 हजार कर्मचारी कंपनी के बाहर धरने पर बैठे थे। इसके बाद हरियाणा सरकार ने 35 फीसदी सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया। जिसके बाद मजदूरों को रोजाना की बेगारी 580-750 मिलेगी। जबकि, नोएडा में अभी यही 350 से 400 के बीच है। वर्कर्स के मुताबिक, उनकी मंथली सैलरी 11000 है, जिसमें से 1000 कॉन्ट्रैक्टर काम देने के लेता है। इसमें से उनके पास सिर्फ 10 हजार बचते हैं जो इस महंगाई के दौर में गुजारे के लिए नाकाफी है। अगर हरियाणा की बात करें, तो आखिरी बार मिनिमम वेज अक्टूबर 2015 में रिवाइज हुए थे। मिनिमम वेज एक्ट क्या कहता है? मिनिमम वेज (Minimum Wage) एक्ट के तहत केंद्र सरकार एक फ्लोर वेज (floor wage) तय करती है, जिसके तहत राज्य सरकारों और उद्योगों को उतना या उससे ज्यादा सैलरी तय करने का प्रावधान है। राज्य सरकारें इससे कम वेतन तय नहीं कर सकतीं। वेतन को अब हर 3 साल में रिवाइज करना जरूरी है। पहले ये सीमा 5 साल तक थी। पहले इसके लिए Minimum Wages Act-1948 था, जिसे अब Code on Wages-2019 में शामिल कर दिया गया है। इसमें 4 लेबर लॉ को मिला दिया गया है, जिनमें Minimum Wages Act, 1948 Payment of Wages Act, 1936 Payment of Bonus Act, 1965 Equal Remuneration Act, 1976 मिनिमम वेज तय कैसे होता है? मिनिमम वेज व्यक्ति की स्किल और उसकी लोकेशन से तय होती है। स्किल के लिए सरकार ने 4 केटेगरीज तैयार की है- 1. अकुशल (अनस्किल्ड) 2. अर्ध-कुशल या अकुशल पर्यवेक्षक (सेमी-स्किल्ड/ अनस्किल्ड सुपरवाइजर) 3. कुशल या /लिपिकीय (स्किल्ड/ क्लेरिकल) 4. अत्यधिक कुशल (हाइली स्किल्ड) वहीं लोकेशन के हिसाब से जीने की लागत

‘राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं बदलेगा’: किरण रिजिजू ने परिसीमन पर दी सफाई | भारत समाचार

Stock Market Live Updates: Sensex, Nifty Rally Over Hopes Of Fresh Peace Talks

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 11:19 IST रिजिजू ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की आनुपातिक ताकत अपरिवर्तित रहेगी। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू. (पीटीआई/फ़ाइल छवि) परिसीमन प्रक्रिया पर चिंताओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण पर सरकार के विधेयक संसद में पारित होने के बाद भी सभी राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व समान रहेगा। तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र में, केंद्र महिला आरक्षण विधेयक को क्रियान्वित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिससे 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। यह संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित करना चाहता है, जो लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है, और परिसीमन विधेयक, 2026जो केंद्र को नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने के लिए एक आयोग बनाने की अनुमति देगा। हालाँकि, दक्षिणी राज्यों ने इस आशंका के बीच परिसीमन के कदम का विरोध किया है कि कम जनसंख्या के कारण उनकी सीट हिस्सेदारी काफी कम हो सकती है, जबकि उत्तरी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। दक्षिणी नेताओं को डर है कि अगर कुछ उत्तरी राज्य अपने दम पर बहुमत बना लेते हैं तो प्रधानमंत्री चुनने या राष्ट्रीय कानून पारित करने में उनकी भूमिका कम हो जाएगी। यह भी पढ़ें: परिसीमन विवाद: केंद्र आज संसद में लोकसभा सीटों का राज्यवार आवंटन बता सकता है परिसीमन पर किरण रिजिजू के साथ एक साक्षात्कार में हिंदुस्तान टाइम्सरिजिजू ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि महिला आरक्षण को किसी भी प्रकार के राजनीतिक एजेंडे के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है या राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “आनुपातिक रूप से, राज्यों का प्रतिनिधित्व वही रहेगा। विधेयक पेश होने पर यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा। आनुपातिक बात राज्य के भीतर जनसंख्या पर आधारित है।” “एक बार जब संसद द्वारा यह निर्णय लिया जाता है कि प्रतिनिधित्व मौजूदा अनुपात और प्रतिशत के समानुपाती होगा और वृद्धि 50% है, तो यह लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए लागू होती है।” विधेयक पर विपक्ष की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर रिजिजू ने कहा, “वे इसका विरोध नहीं कर पाएंगे, अन्यथा उन्हें आरक्षण को अवरुद्ध करने के काले धब्बे के साथ रहना होगा। यह विश्वास का सवाल नहीं है। यह प्रतिबद्धता का सवाल है। यह एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” यह भी पढ़ें: 33% महिलाएं, 850 सीटें और 100% लाभ: कैसे 50% परिसीमन फॉर्मूला वास्तव में दक्षिण को अधिक सीटें दे सकता है उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी राज्यों को खुश होना चाहिए क्योंकि वे कोई सीट नहीं खो रहे हैं. “जनसंख्या कम करने के लिए उन्हें दंडित नहीं किया गया है, बल्कि इसे बरकरार रखा गया है. कुल सीटों में बढ़ोतरी का अनुपात और उनकी हिस्सेदारी का प्रतिशत वही रहेगा.” सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। शीर्षक संख्या 50% बढ़कर 850 हो जाएगी और प्रत्येक राज्य के लिए यह संख्या भी 50% बढ़ जाएगी। हालाँकि, इंडिया ब्लॉक ने तर्क दिया है कि यह प्रक्रिया लोकसभा में दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 11:19 IST न्यूज़ इंडिया ‘राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं बदलेगा’: किरण रिजिजू ने परिसीमन पर दी सफाई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।

अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

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एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।