26 Students Score 100 Percentile; 5 Each From Andhra & Telangana

Hindi News National JEE Main 2026 Results: 26 Students Score 100 Percentile; 5 Each From Andhra & Telangana 14 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सोमवार को JEE Main 2026 के दूसरे सेशन के नतीजे घोषित कर दिए। इस बार 26 स्टूडेंट्स ने 100 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल किया है। पिछले साल 2025 में यह संख्या 24 थी। 10 लाख स्टूडेंट्स ने 2 से 8 अप्रैल को परीक्षा दी थी। 100 पर्सेंटाइल स्कोर पाने वालों में सबसे ज्यादा 5-5 स्टूडेंट्स आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं। इसके बाद राजस्थान से 4, दिल्ली से 3 और महाराष्ट्र व हरियाणा से 2-2 स्टूडेंट्स शामिल हैं। वहीं चंडीगढ़, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात से एक-एक छात्र ने यह उपलब्धि हासिल की है। NTA ने बताया कि यह स्कोर प्रतिशत अंकों के समान नहीं होता, बल्कि यह नॉर्मलाइज्ड स्कोर होता है। यह स्कोर अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया जाता है। पहले सेशन में भी 13 लाख ने परीक्षा दी एनटीए ने JEE Main सेशन 1 एग्जाम का आयोजन 21 से लेकर 29 जनवरी तक किया था। इसमें 13 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने भाग लिया था।स्टूडेंट्स ऑफिशियल वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड दर्ज करके स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… सैलरी मांगों तो इंवेस्टिगेशन का हवाला:नौकरी छोड़ने पर बड़ी कंपनियां नकार रहीं FNF; क्या हैं कर्मचारियों के अधिकार दिल्ली की एक कंपनी में काम करने वाले अर्नव पटेल नौकरी से इस्तीफा देने के लगभग 3 महीने बाद भी अपनी बाकी सैलरी के इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार उन्हें लास्ट वर्किंग डे के 2 दिन के भीतर कंपनी से फुल एंड फाइनल सेटेलमेंट मिल जाना चाहिए था, मगर कंपनी आखिरी महीने की सैलरी देने को भी राजी नहीं है। पूरी खबर पढे़ं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
बाल पतले होने लगे हैं तो संभल जाएं, शरीर दे रहा है ये बड़ा इशारा, जान लें तुरंत

Last Updated:April 20, 2026, 23:31 IST अगर बाल तेजी से झड़ रहे हैं या पहले से ज्यादा पतले नजर आने लगे हैं, तो वजह सिर्फ प्रदूषण या हेयर प्रोडक्ट्स नहीं हो सकती. कई बार शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी बालों की जड़ों को कमजोर कर देती है. ख़बरें फटाफट विटामिन बी12 की कमी बन सकती है कारण. आजकल महिलाओं में बालों का झड़ना, पतला होना और घनापन कम होना एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है. कई लोग इसका कारण सिर्फ प्रदूषण, तनाव, केमिकल प्रोडक्ट्स या गलत हेयर केयर को मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार बालों की असली मजबूती शरीर के अंदर मौजूद पोषण पर भी निर्भर करती है. जब शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते, तो इसका असर सबसे पहले बालों की जड़ों पर दिखने लगता है. धीरे-धीरे बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं और उनकी ग्रोथ भी धीमी पड़ सकती है. अगर समय रहते पोषण की कमी को पहचान लिया जाए, तो इसे सुधारा जा सकता है. महिलाओं में खासतौर पर मासिक धर्म, गर्भावस्था, अनियमित खानपान, डाइटिंग और तनाव जैसी स्थितियों में पोषण की कमी ज्यादा देखने को मिलती है. यही वजह है कि इन समयों में बालों की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. आयरन की कमी से बढ़ सकता है हेयर फॉलबालों की सेहत के लिए आयरन बेहद जरूरी माना जाता है. शरीर में आयरन कम होने पर बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती. इससे बालों की ग्रोथ प्रभावित होती है और झड़ना बढ़ सकता है. कई बार हीमोग्लोबिन सामान्य होने पर भी शरीर में आयरन स्टोर यानी फेरिटिन कम हो सकता है, जो बालों की गुणवत्ता पर असर डालता है. विटामिन डी भी है जरूरीविटामिन डी बालों के ग्रोथ साइकिल को संतुलित रखने में मदद करता है. जो लोग धूप में कम जाते हैं, उनमें इसकी कमी ज्यादा पाई जाती है. इसकी कमी होने पर बालों का दोबारा उगना धीमा पड़ सकता है और घनापन कम हो सकता है. सही स्तर तक पहुंचने में समय लगता है, लेकिन यह बालों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है. विटामिन बी12 की कमी भी बन सकती है कारणविटामिन बी12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं बनाने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इसकी कमी से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे बाल कमजोर, बेजान और टूटने वाले हो सकते हैं. जिंक की कमी से स्कैल्प पर असरजिंक बालों की जड़ों की मरम्मत और स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यह प्रोटीन बनने की प्रक्रिया में भी जरूरी होता है. इसकी कमी से बालों का झड़ना बढ़ सकता है, साथ ही स्कैल्प में रूखापन, जलन या खुजली महसूस हो सकती है. प्रोटीन की कमी से कमजोर होते हैं बालबाल मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं. अगर डाइट में पर्याप्त प्रोटीन नहीं है, तो बालों की ग्रोथ धीमी हो सकती है और वे कमजोर होकर टूटने लगते हैं. कई महिलाएं व्यस्त दिनचर्या या डाइटिंग के कारण पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पातीं, जिसका असर बालों पर साफ नजर आता है. अगर बाल लगातार झड़ रहे हैं, पतले हो रहे हैं या चमक कम हो गई है, तो सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट्स बदलने से फायदा नहीं होगा. शरीर के अंदर पोषण स्तर की जांच और संतुलित खानपान पर ध्यान देना जरूरी है. सही पोषण मिलने पर बालों की सेहत में सुधार देखा जा सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 20, 2026, 23:31 IST
अप्रैल से जून तक ही मिलता ये अनोखा फल, बस इसी 2 महीने तक बाजार में ढूंढते हैं लोग, जान लें कौन सा…

Last Updated:April 20, 2026, 23:11 IST Khirni Rare fruit in market available only for 2 month: गर्मियों में मिलने वाला मौसमी फल खिरनी दांतों हड्डियों के लिए फायदेमंद, फाइबर विटामिन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, ऊर्जा और त्वचा की सेहत में भी मददगार माना जाता है. ख़बरें फटाफट खिरनी को पकने के बाद सीधे खाया जाता है. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम, लीची, तरबूज और खरबूजे जैसे फल नजर आने लगते हैं, लेकिन इन्हीं के बीच एक ऐसा फल भी मिलता है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. यह है खिरनी, जिसे कई जगहों पर रायण नाम से भी जाना जाता है. यह फल आमतौर पर अप्रैल से जून के बीच ही बाजार में दिखाई देता है, इसलिए इसका सीजन काफी छोटा माना जाता है. यही वजह है कि जो लोग इसके स्वाद और फायदे जानते हैं, वे इसके मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं. खिरनी छोटा, गोल और पीले या हल्के नारंगी रंग का फल होता है. पकने पर इसका स्वाद बेहद मीठा और सुगंधित हो जाता है. इसका गूदा नरम होता है और खाने में बहुत स्वादिष्ट लगता है. ग्रामीण इलाकों और कुछ राज्यों में यह फल काफी लोकप्रिय है, लेकिन शहरों में यह कम मात्रा में देखने को मिलता है. इसकी सीमित उपलब्धता ही इसे खास और अनोखा बनाती है. अप्रैल से जून तक ही क्यों मिलता है? खिरनी एक मौसमी फल है, जो गर्मियों की शुरुआत से लेकर जून तक पककर तैयार होता है. इसका पेड़ सालभर रहता है, लेकिन फल सिर्फ खास मौसम में ही आता है. इसलिए बाजार में यह बहुत कम समय के लिए नजर आता है. कई जगहों पर यह मई महीने में सबसे ज्यादा मिलता है. दांतों के लिए क्यों माना जाता है अमृतखिरनी को दांतों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और अन्य मिनरल्स पाए जाते हैं, जो दांतों और हड्डियों की मजबूती में मदद कर सकते हैं. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इसके सेवन से मसूड़ों को भी फायदा मिलता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे दांतों की सेहत के लिए अच्छा फल माना जाता रहा है. ऊर्जा देने वाला फलगर्मी के मौसम में शरीर जल्दी थक जाता है. ऐसे में खिरनी प्राकृतिक शुगर और पोषक तत्वों की वजह से शरीर को ऊर्जा देने में मदद कर सकती है. इसे खाने से ताजगी महसूस हो सकती है. खिरनी में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर रखने में मदद करता है. इसे सीमित मात्रा में खाने से पेट हल्का रखने और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. इस फल में विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं. गर्मियों में मौसमी फलों का सेवन शरीर को जरूरी पोषण देता है. त्वचा के लिए भी फायदेमंदखिरनी में मौजूद पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देने में मदद कर सकते हैं. पानी और विटामिन से भरपूर फल गर्मियों में स्किन को ताजा रखने में सहायक माने जाते हैं. कैसे खाएं खिरनीखिरनी को पकने के बाद सीधे खाया जाता है. इसका स्वाद मीठा और हल्का मलाईदार होता है. कुछ लोग इसे ठंडा करके खाना पसंद करते हैं. इसका शेक या देसी मिठाइयों में भी उपयोग किया जाता है. खिरनी पूरे साल आसानी से उपलब्ध नहीं होती, इसलिए इसका मौसम आते ही लोग इसे बाजार में ढूंढते हैं. स्वाद, सीमित उपलब्धता और सेहतमंद गुणों की वजह से यह फल खास माना जाता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 20, 2026, 23:11 IST
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: चुनावी गलत सूचना को खारिज करने वाला ‘मिथक बनाम वास्तविकता’ पोर्टल क्या है? | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:20 अप्रैल, 2026, 23:06 IST उच्च राजनीतिक दांव और लाखों मतदाताओं के भाग लेने की उम्मीद के साथ, गलत सूचना का प्रसार एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। रजिस्टर को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उभरती अफवाहों पर तुरंत ध्यान दिया जाए। (छवि: पीटीआई) जैसा कि पश्चिम बंगाल 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है, भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने अपने “मिथक बनाम वास्तविकता” पोर्टल के माध्यम से गलत सूचना से निपटने पर एक मजबूत ध्यान केंद्रित किया है – एक ऑनलाइन टूल जिसे चुनावी मौसम के दौरान दावों को सत्यापित करने और नकली समाचारों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। राज्य में दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें सभी 294 सीटों पर मतदान होगा और मतगणना 4 मई को होगी। उच्च राजनीतिक दांव और लाखों मतदाताओं के भाग लेने की उम्मीद के साथ, गलत सूचना का प्रसार एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। ‘मिथक बनाम वास्तविकता’ पोर्टल क्या है? “मिथक बनाम वास्तविकता” पोर्टल चुनाव से संबंधित झूठी और भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए ईसीआई द्वारा शुरू किया गया एक ऑनलाइन रजिस्टर है। यह एक सार्वजनिक भंडार के रूप में कार्य करता है जहां आम तौर पर प्रसारित होने वाले दावों – विशेष रूप से सोशल मीडिया पर – तथ्य की जांच की जाती है और स्पष्ट किया जाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म चुनाव से संबंधित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल्स (वीवीपीएटी), मतदाता सूची, मतदाता सेवाएँ और मतदान प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इसमें मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और संदर्भ सामग्री भी शामिल है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि मतदाताओं के पास सत्यापित जानकारी तक पहुंच हो, खासकर संवेदनशील चुनाव अवधि के दौरान जब गलत सूचना तेजी से फैल सकती है। यह भी पढ़ें: लालू राज बनाम ममता शासन: पश्चिम बंगाल 90 के दशक के बिहार से अधिक चिंताजनक क्यों है? यह किस प्रकार के दावों को खारिज करता है? पोर्टल नियमित रूप से कथित धांधली, फर्जी चुनाव आयोग के आदेश और ईवीएम सुरक्षा पर चिंताओं जैसे वायरल दावों को संबोधित करता है। उदाहरण के लिए, पिछले चुनावों में वोट में हेरफेर दिखाने का दावा करने वाले वीडियो को भ्रामक या गलत के रूप में चिह्नित किया गया है। यह प्रक्रियात्मक शंकाओं को भी स्पष्ट करता है। एक आम मिथक यह बताता है कि राजनीतिक दल के एजेंट घरेलू मतदान के दौरान मतदान टीमों के साथ नहीं जा सकते – ईसीआई का कहना है कि यह गलत है, और उम्मीदवार उचित सूचना के बाद प्रतिनिधियों को भेज सकते हैं। इसी तरह, मतदान केंद्रों पर सुविधाओं की कमी के बारे में अफवाहों का मुकाबला रैंप, पीने के पानी, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य करने वाले आधिकारिक दिशानिर्देशों से किया जाता है। आयोग वरिष्ठ नागरिकों और विकलांग व्यक्तियों के लिए व्हीलचेयर, परिवहन सहायता और अलग कतारों सहित प्रावधानों पर भी प्रकाश डालता है। पश्चिम बंगाल चुनाव में यह क्यों मायने रखता है? पश्चिम बंगाल चुनाव में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे उच्च जोखिम वाले माहौल में, गलत सूचना मतदाता धारणा और मतदान को प्रभावित कर सकती है। ईसीआई के पोर्टल का उद्देश्य मतदाताओं और मीडिया संगठनों दोनों के लिए एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में कार्य करना है, जिससे उन्हें जानकारी साझा करने से पहले दावों को सत्यापित करने में मदद मिलेगी। रजिस्टर को नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उभरती अफवाहों पर तुरंत ध्यान दिया जाए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 20 अप्रैल, 2026, 23:06 IST समाचार चुनाव पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: चुनावी गलत सूचना को खारिज करने वाला ‘मिथक बनाम वास्तविकता’ पोर्टल क्या है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)फर्जी मतदान मिथक डब्ल्यूबी(टी)चुनाव धोखाधड़ी मिथक(टी)ईवीएम मिथक भारत(टी)मतदान वास्तविकता डब्ल्यूबी(टी)चुनाव तथ्य बंगाल
कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी की FIR:18 करोड़ रुपए की तीन बीघा से ज्यादा जमीन का एग्रीमेंट किसी से, बेची किसी को

ग्वालियर में अनुबंधित जमीन को किसी अन्य को बेचने का मामला सामने आया है। गिरवाई थाना पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर इस मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फरियादी पक्ष का आरोप है कि किसान ने उनसे अनुबंध कर राशि लेने के बाद भी जमीन किसी और को बेच दी, जबकि आरोपी पक्ष एग्रीमेंट की समय-सीमा समाप्त होने का दावा कर रहा है। गिरवाई थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव के अनुसार, इस मामले में फरियादी सांई बाबा कंपनी के डायरेक्टर पृथ्वी बाघवानी हैं, जबकि आरोपी किसान बाबूलाल है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में तीन बीघा 11 विस्वा जमीन का एग्रीमेंट दोनों पक्षों के बीच हुआ था। जमीन की कीमत पांच करोड़ रुपए प्रति बीघा तय की गई थी और दो माह के भीतर रजिस्ट्री कराने की शर्त रखी गई थी। फरियादी का कहना है कि उन्होंने तय राशि का भुगतान कर दिया था, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इसके बाद करीब एक साल बाद आरोपी किसान ने उक्त जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी। जब इस बात की जानकारी फरियादी को लगी तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पुलिस को प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए, जिसके आधार पर गिरवाई थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। वहीं, आरोपी पक्ष का कहना है कि एग्रीमेंट केवल दो माह के लिए था और तय समय सीमा में पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिससे अनुबंध स्वतः निरस्त हो गया। उनका दावा है कि इसके बाद उन्होंने जमीन का सौदा दूसरी पार्टी से किया। आरोपी ने यह भी कहा है कि यदि फरियादी ने भुगतान किया है, तो उसके प्रमाण प्रस्तुत करें। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के दस्तावेजों और दावों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कैंसर सेल खत्म करने में कारगर?, पटना की लैब में हल्दी पर बड़ी रिसर्च

Last Updated:April 20, 2026, 22:56 IST Nanoparticle Grinding Machine Patna: पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में वैज्ञानिकों ने एक अनोखी खोज की है, जहां सामान्य हल्दी को खास मशीन से पीसकर नैनो पार्टिकल में बदलने पर उसका रंग पीले से लाल हो गया. इस बदलाव के साथ उसके मॉलिक्यूल स्तर में भी परिवर्तन देखने को मिला, जो कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की रोकथाम में उपयोगी हो सकता है. शुरुआती परीक्षणों में यह पाया गया कि यह नैनो पाउडर कैंसर सेल को नष्ट करने में प्रभावी है, वहीं इसी तकनीक से तैयार किए गए करेले के नैनोपार्टिकल भी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं दिखा रहे हैं. रिपोर्ट- सच्चिदानंद अमूमन हल्दी को पीसने पर वह पीले रंग का पाउडर बन जाता है. पटना के वैज्ञानिकों ने हल्दी को स्पेशल चक्की में पीस कर नैनो पार्टिकल में तोड़ा तो उसका कलर लाल हो गया है. इस लाल रंग वाले हल्दी का ऐसा मॉलिक्यूल तैयार हुआ जो कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के रोकथाम के लिए उपयोग किया जा सकता है. आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में यह खास चक्की मौजूद है. इसका उपयोग नॉर्मल चीजों को नैनो पार्टिकल में तोड़ने के लिए किया जाता है. इस बारे में जानकारी देते हुए नैनो साइंस विभाग के एचओडी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने लोकल 18 को बताया कि यह सामान्य चक्की का ही एडवांस्ड वर्जन है. चीजों को नैनो पार्टिकल में बदलने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इसका उपयोग रिसर्च के लिए किया जाता है. नैनो साइंस विभाग की एमटेक की छात्रा श्वेता सिन्हा ने बताया कि इस मशीन के जरिए नैनो पार्टिकल तैयार किया जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google नॉर्मल हल्दी के टुकड़े को जब इस मशीन में डालकर अलग अलग टाइम के लिए पिसा गया तो इसका रंग पीला की जगह लाल हो गया. इस सुपर फाइन पाउडर यानी नैनो पाउडर का जब अध्ययन किया गया तो यह पाया गया कि मॉलिक्यूल लेवल बदलने से इसका रंग बदला है. नैनो साइज की वजह से हल्दी का रंग पीला से लाल हो गया. इसके सैंपल को महावीर कैंसर संस्थान और पीजीआई लखनऊ में भेजा गया. इसकी टेस्टिंग चूहों के कैंसर सेल पर की गई. इसमें यह पता चला कि यह कैंसर सेल नष्ट करने में कारगर है. एमटेक स्टूडेंट श्वेता सिन्हा ने आगे बताया कि इसी मशीन से करेले को टुकड़ों में काटकर ऊपर मौजूद क्लॉज्ड चैंबर में डालकर थोड़ी देर तक मशीन चालू रखा तो करेले का सुपर फाइन पाउडर यानी नैनोपार्टिकल डेवलप हुआ. यह सामान्य करेले के मॉलीक्यूल स्ट्रक्चर से बिल्कुल अलग पाया गया. इसके नैनी पार्टिकल कैंसर के सेल की ग्रोथ रोकने में सहायक हैं. इसके अलावा मधुमेह सहित अन्य बीमारियों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है. रिसर्च के दौरान जैसे-जैसे इसका पार्टिकल छोटा किया गया तो पता चला कि इसकी चुम्बकीय शक्ति बढ़ती गई. हालांकि, नॉर्मल करेले में कोई चुम्बकीय शक्ति नहीं होती है. चुंबकीय गुण की वजह से शरीर इस पाउडर को तुरंत अवशोषित कर लेगा. यह कई बीमारियों पर कारगर साबित होगा. First Published : April 20, 2026, 22:56 IST
Cancer: पैरों में दिख रहे ये 4 बदलाव हो सकते हैं खतरनाक कैंसर का संकेत, तुरंत हो जाएं सतर्क

Last Updated:April 20, 2026, 22:48 IST Cancer: पैरों में दिखाई देने वाले इन बदलावों को सिर्फ सामान्य दर्द या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और जरूरी जांच जरूर करवाएं. यह कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर बिना बड़े लक्षणों के बढ़ता रहता है. इसी वजह से कई मामलों में इसका पता देर से चलता है और इलाज मुश्किल हो सकता है. अगर बिना चोट या किसी स्पष्ट कारण के एक या दोनों पैरों में सूजन आ जाए, तो यह सामान्य बात नहीं हो सकती. यह रक्त प्रवाह में रुकावट या खून के थक्के का संकेत हो सकता है. पैरों की मांसपेशियों में लगातार या असहनीय दर्द महसूस हो, खासकर चलते या खड़े होने पर, तो इसे सिर्फ थकान न समझें. यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर पैर अचानक लाल, नीला या असामान्य रंग का दिखने लगे, तो यह खून के थक्के या रक्त संचार में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. ऐसे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है. अगर सूजे हुए हिस्से को छूने पर वह शरीर के बाकी हिस्सों से ज्यादा गर्म लगे, तो यह अंदरूनी सूजन या ब्लड क्लॉट की ओर इशारा कर सकता है. कुछ सामान्य दिखने वाले लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं. आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, भूख कम लगना, तेजी से वजन घटना, पेट दर्द या मल त्याग में बदलाव जैसे संकेत भी अग्नाशय कैंसर से जुड़े हो सकते हैं. पैरों में दर्द, सूजन या ऊपर बताए गए बदलाव बार-बार नजर आएं, तो देरी न करें. विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर सही समय पर जांच करवाना सबसे बेहतर कदम है. अगर पर्याप्त आराम करने के बाद भी लगातार कमजोरी, सुस्ती या थकान महसूस हो रही है, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षणों पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. First Published : April 20, 2026, 22:48 IST
गंजबासौदा में नरवाई में लगी आग:दूसरे खेतों तक फैली, किसान भूसा बनाने की तैयारी कर रहे थे

बरेठ रेलवे स्टेशन से भटनी जाने वाले रास्ते पर रविवार रात करीब 9 बजे एक खेत में भीषण आग लग गई। खेत में पड़ी नरवाई की वजह से आग तेजी से फैली और लपटों के साथ धुएं का गुबार आसमान में छा गया। किसान गजेंद्र रघुवंशी ने बताया कि आग उनके खेत से काफी दूर लगी थी, लेकिन तेज हवा के कारण वह उनके खेत तक आ पहुंची। गनीमत रही कि गांव वालों ने समय पर खबर दे दी, जिससे उन्होंने खेत में रखे सिंचाई के पाइपों को फौरन हटा लिया, वरना वे जलकर खाक हो जाते। भूसा नहीं बनने से हजारों का नुकसान किसान ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद वे नरवाई से भूसा बनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आग लगने के कारण अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है। इससे उन्हें हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। मूंग की फसल पर भी मंडराया खतरा एक अन्य किसान राजकुमार सिंह ने बताया कि कई लोगों ने खेतों में मूंग की फसल बो रखी है। आसपास के खेतों में आग लगने से मूंग की फसल को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है। किसानों ने की कार्रवाई की मांग इलाके के किसानों का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर अपने खेतों में आग लगा रहे हैं, जो बाद में फैलकर दूसरों का नुकसान कर रही है। किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि खेतों में आग लगाने वालों की जांच की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
30 हजार की फड के साथ 4 जुआरी धराए:हरसूद पुलिस ने रेवापुर के जंगल में दबिश दी, दो बाइक भी बरामद

खंडवा जिले में अवैध जुआ-सट्टा पर कार्रवाई के तहत हरसूद पुलिस ने रेवापुर जंगल में दबिश देकर चार आरोपियों को जुआ खेलते रंगे हाथों पकड़ा है। पुलिस ने मौके से 30 हजार 800 रुपए नकद, 52 ताश के पत्ते और दो बाइक जब्त की हैं। थाना प्रभारी हरसूद को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रेवापुर जंगल में कुछ लोग हार-जीत का दांव लगाकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने सोमवार रात 8 बजे के करीब मौके पर पहुंचकर घेराबंदी कर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों नरसिंह पटेल (निवासी खिरकिया), मुकेश भारद्वाज (निवासी छिपाबड़, जिला हरदा), आजाद खान (निवासी चैनपुर सरकार) और विनोद देवड़ा (निवासी मुगल) को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से नकद राशि, ताश के पत्ते और दो मोटरसाइकिल जब्त की गईं। टीआई राजकुमार राठौर के अनुसार, सभी आरोपियों के खिलाफ थाना हरसूद में जुआ एक्ट की धारा 13 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपी फिलहाल पुलिस गिरफ्त में हैं।
संजय पाठक का हाईकोर्ट के जज से संपर्क का मामला:सुप्रीम कोर्ट बोला- याचिकाकर्ता HC में कार्यवाही में मदद के लिए आवेदन दे सकते

सुप्रीम कोर्ट ने कटनी के हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने की इजाजत दे दी है। यह पूरा मामला बीजेपी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का हाईकोर्ट के एक जज से संपर्क करने की कोशिश से जुड़ा है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि दीक्षित अब हाईकोर्ट में चल रही अवमानना की कार्यवाही में मदद के लिए आवेदन दे सकते हैं। विधायक पर जज को प्रभावित करने का आरोप मामले की शुरुआत तब हुई जब आशुतोष दीक्षित ने विधायक की कंपनियों पर अवैध खनन का आरोप लगाते हुए एक याचिका लगाई थी। इस केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को मामले से अलग कर लिया। उन्होंने आदेश में साफ लिखा कि विधायक की तरफ से उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई थी। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने विधायक के खिलाफ अवमानना का केस शुरू किया, लेकिन दीक्षित की पुरानी याचिका को बंद कर दिया था। इसी के खिलाफ दीक्षित सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। जांच की मांग और कोर्ट की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में दीक्षित के वकील ने दलील दी कि एक विधायक के जज को प्रभावित करना न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है। उन्होंने मांग की कि सिर्फ अवमानना की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। वकील ने डर जताया कि विधायक सिर्फ माफी मांगकर इस गंभीर मामले से बच सकते हैं। हाईकोर्ट में फिर शुरू होगी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि अगर जज से संपर्क करने की बात सच है, तो कानून अपना काम करेगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी। अब आशुतोष दीक्षित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रहे अवमानना के मामले में एक पक्ष के रूप में शामिल होंगे और अपना पक्ष रखेंगे।









