सुप्रीम कोर्ट ने कटनी के हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने की इजाजत दे दी है। यह पूरा मामला बीजेपी विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का हाईकोर्ट के एक जज से संपर्क करने की कोशिश से जुड़ा है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि दीक्षित अब हाईकोर्ट में चल रही अवमानना की कार्यवाही में मदद के लिए आवेदन दे सकते हैं। विधायक पर जज को प्रभावित करने का आरोप मामले की शुरुआत तब हुई जब आशुतोष दीक्षित ने विधायक की कंपनियों पर अवैध खनन का आरोप लगाते हुए एक याचिका लगाई थी। इस केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को मामले से अलग कर लिया। उन्होंने आदेश में साफ लिखा कि विधायक की तरफ से उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई थी। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने विधायक के खिलाफ अवमानना का केस शुरू किया, लेकिन दीक्षित की पुरानी याचिका को बंद कर दिया था। इसी के खिलाफ दीक्षित सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। जांच की मांग और कोर्ट की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट में दीक्षित के वकील ने दलील दी कि एक विधायक के जज को प्रभावित करना न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है। उन्होंने मांग की कि सिर्फ अवमानना की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। वकील ने डर जताया कि विधायक सिर्फ माफी मांगकर इस गंभीर मामले से बच सकते हैं। हाईकोर्ट में फिर शुरू होगी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि अगर जज से संपर्क करने की बात सच है, तो कानून अपना काम करेगा और दोषियों पर कार्रवाई होगी। अब आशुतोष दीक्षित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रहे अवमानना के मामले में एक पक्ष के रूप में शामिल होंगे और अपना पक्ष रखेंगे।










































