सुभाषचंद्र बोस को 'राष्ट्रपुत्र' घोषित करने की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई PIL मंजूर न की जाए। याचिकाकर्ता की 3 मांगें 2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था।
सुभाषचंद्र बोस को 'राष्ट्रपुत्र' घोषित करने की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई PIL मंजूर न की जाए। याचिकाकर्ता की 3 मांगें 2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था।
झाबुआ में NSUI ने पीएम-गृहमंत्री का पुतला जलाया:दिल्ली दूरदर्शन कार्यालय पर कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया

झाबुआ में NSUI ने दिल्ली में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने शहीद चंद्रशेखर आजाद पीजी कॉलेज के मुख्य द्वार पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का पुतला जलाया। छात्र नेता दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और दूरदर्शन के एंकर की टिप्पणी का विरोध कर रहे थे। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को बताया लोकतंत्र की हत्या NSUI जिलाध्यक्ष नरवेश अमलियार ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने दूरदर्शन के एंकर अशोक श्रीवास्तव द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी को अपमानजनक बताया। अमलियार ने कहा कि सार्वजनिक प्रसारक होने के बावजूद दूरदर्शन विशेष विचारधारा के प्रचार का माध्यम बन गया है। रिहाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली में गिरफ्तार किए गए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि छात्र संगठन के लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बंद की जाए। कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बड़ी संख्या में छात्र नेता रहे मौजूद इस विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई नेता निलेश गणावा, जिला महामंत्री विनोद गणावा और मॉडल कॉलेज अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया सहित दर्जनों पदाधिकारी शामिल हुए। संगठन मंत्री अनिल भाबोर और सतीश मेड़ा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन कर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पुलिस ने एहतियात के तौर पर मौके पर सुरक्षा बल तैनात किया था।
अर्चना सिंह बोलीं- मुझे कोई काम नहीं दे रहा:कपिल शर्मा शो की वजह से छोड़ीं फिल्में; अब फिल्म मेकर्स ने अप्रोच करना बंद किया

फिल्म ‘निकाह’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली अर्चना पूरन सिंह आज ‘कपिल शर्मा शो’ की जज के तौर पर पहचानी जाती हैं। हालांकि, इसी शोहरत ने उनके एक्टिंग करियर पर ब्रेक लगा दिया है। एक इंटरव्यू में अर्चना ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कपिल के शो की व्यस्तता के कारण उन्होंने इतने प्रोजेक्ट्स को मना किया कि अब मेकर्स ने उन्हें काम ऑफर करना ही बंद कर दिया है। स्कॉटलैंड में 25 दिन की शूटिंग छोड़नी पड़ी शोशा को दिए इंटरव्यू में अर्चना ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें एक फिल्म के लिए स्कॉटलैंड में 25 दिनों के शूट का ऑफर मिला था। उस वक्त ‘द कपिल शर्मा शो’ टीवी पर आता था और साल में करीब 100 एपिसोड शूट होते थे। शो की टाइट डेट्स के कारण उनके पास किसी और फिल्म के लिए समय नहीं बचता था। अर्चना ने कहा, मैंने इतनी बार फिल्मों को मना किया कि फिल्ममेकर्स ने मुझे एक्टिंग के लिए बुलाना ही छोड़ दिया। मेकर्स को लगता है मैं सिर्फ हंसती हूं एक्ट्रेस को इस बात का भी दुख है कि इंडस्ट्री अब उन्हें केवल एक जज के तौर पर देखती है। उन्होंने कहा, मैं कितनी भी कोशिश कर लूं, फिल्ममेकर्स को यकीन नहीं दिला पा रही हूं कि मैं एक एक्टर हूं। उन्हें अब भी लगता है कि मैं कोई ऐसी इंसान हूं जो बस कुर्सी पर बैठकर हंसती रहती है। इसी छवि की वजह से उन्हें अब संजीदा या अलग तरह के रोल ऑफर नहीं हो रहे हैं और उन्हें अब भी अपनी एक्टिंग स्किल साबित करनी पड़ रही है। 42 साल का करियर और 100 से ज्यादा फिल्में अर्चना पूरन सिंह के करियर की शुरुआत 1982 में महज 20 साल की उम्र में फिल्म ‘निकाह’ से हुई थी। 1987 में वह नसीरुद्दीन शाह के साथ फिल्म ‘जलवा’ में लीड रोल में नजर आईं। 90 के दशक में उन्होंने कई आइटम नंबर किए और फिर ‘कुछ कुछ होता है’, ‘इंसान’, ‘दे दना दन’ और ‘बोल बच्चन’ जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी से पहचान बनाई। OTT से जगी करियर की नई उम्मीद अर्चना अब राजकुमार राव के साथ फिल्म ‘टोस्टर’ में नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि अब कपिल का शो नेटफ्लिक्स पर सीजन के आधार पर शूट होता है, इसलिए उनके पास अब दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए वक्त है। राजकुमार राव के साथ यह उनका दूसरा काम है। इससे पहले वे ‘विकी विद्या का वो वाला वीडियो’ में साथ दिखे थे। आगे वे वेब सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ में केके मेनन के साथ नजर आएंगी।
अर्चना सिंह बोलीं- मुझे कोई काम नहीं दे रहा:कपिल शर्मा शो की वजह से छोड़ीं फिल्में; अब फिल्म मेकर्स ने अप्रोच करना बंद किया

फिल्म ‘निकाह’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली अर्चना पूरन सिंह आज ‘कपिल शर्मा शो’ की जज के तौर पर पहचानी जाती हैं। हालांकि, इसी शोहरत ने उनके एक्टिंग करियर पर ब्रेक लगा दिया है। एक इंटरव्यू में अर्चना ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कपिल के शो की व्यस्तता के कारण उन्होंने इतने प्रोजेक्ट्स को मना किया कि अब मेकर्स ने उन्हें काम ऑफर करना ही बंद कर दिया है। स्कॉटलैंड में 25 दिन की शूटिंग छोड़नी पड़ी शोशा को दिए इंटरव्यू में अर्चना ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें एक फिल्म के लिए स्कॉटलैंड में 25 दिनों के शूट का ऑफर मिला था। उस वक्त ‘द कपिल शर्मा शो’ टीवी पर आता था और साल में करीब 100 एपिसोड शूट होते थे। शो की टाइट डेट्स के कारण उनके पास किसी और फिल्म के लिए समय नहीं बचता था। अर्चना ने कहा, मैंने इतनी बार फिल्मों को मना किया कि फिल्ममेकर्स ने मुझे एक्टिंग के लिए बुलाना ही छोड़ दिया। मेकर्स को लगता है मैं सिर्फ हंसती हूं एक्ट्रेस को इस बात का भी दुख है कि इंडस्ट्री अब उन्हें केवल एक जज के तौर पर देखती है। उन्होंने कहा, मैं कितनी भी कोशिश कर लूं, फिल्ममेकर्स को यकीन नहीं दिला पा रही हूं कि मैं एक एक्टर हूं। उन्हें अब भी लगता है कि मैं कोई ऐसी इंसान हूं जो बस कुर्सी पर बैठकर हंसती रहती है। इसी छवि की वजह से उन्हें अब संजीदा या अलग तरह के रोल ऑफर नहीं हो रहे हैं और उन्हें अब भी अपनी एक्टिंग स्किल साबित करनी पड़ रही है। 42 साल का करियर और 100 से ज्यादा फिल्में अर्चना पूरन सिंह के करियर की शुरुआत 1982 में महज 20 साल की उम्र में फिल्म ‘निकाह’ से हुई थी। 1987 में वह नसीरुद्दीन शाह के साथ फिल्म ‘जलवा’ में लीड रोल में नजर आईं। 90 के दशक में उन्होंने कई आइटम नंबर किए और फिर ‘कुछ कुछ होता है’, ‘इंसान’, ‘दे दना दन’ और ‘बोल बच्चन’ जैसी फिल्मों में अपनी कॉमेडी से पहचान बनाई। OTT से जगी करियर की नई उम्मीद अर्चना अब राजकुमार राव के साथ फिल्म ‘टोस्टर’ में नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि अब कपिल का शो नेटफ्लिक्स पर सीजन के आधार पर शूट होता है, इसलिए उनके पास अब दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए वक्त है। राजकुमार राव के साथ यह उनका दूसरा काम है। इससे पहले वे ‘विकी विद्या का वो वाला वीडियो’ में साथ दिखे थे। आगे वे वेब सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ में केके मेनन के साथ नजर आएंगी।
Cabbage Cleaning tips: पत्तागोभी में मिला सांप का बच्चा, FSSAI की चेतावनी- बंदगोभी खा रहे तो न करें ये गलती

सब्जी से लेकर नूडल्स, मोमोज जैसे चायनीज डिशेज में पत्तागोभी का इस्तेमाल आंख बंद करके किया जाता है. यही आदत आपको खतरे में डाल सकती है. इसमें कोई दोराय नहीं कि पत्ता गोभी या बंदगोभी एक पौष्टिक सब्जी है. इसमें विटामिन C, विटामिन K, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन, इम्यूनिटी और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. लेकिन इसे साफ करते समय थोड़ी सी लापरवाही आपकी सेहत को बिगाड़ सकती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक महिला को पत्तागोभी के अंदर एक रेंगता लंबा जीव मिला, जिसके बारे में लोगों का अंदाजा है कि ये छोटा सांप या कीड़ा हो सकता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सिर्फ इत्तफाक की बात नहीं है. पत्तागोभी में इस तरह के कीड़े होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में यदि आप पत्तागोभी खाते हैं, तो खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा सब्जियों और फलों को साफ करने से संबंधित जारी किए गए गाइडलाइन्स को अच्छी तरह से जानें और रोजाना फॉलो करें. (फोटो सांकेतिक है) पत्तागोभी में कीड़े कैसे होते हैं.पत्तागोभी जमीन से बहुत सटकर उगती है. साथ ही इसकी परत दर परत बनावट इसे छोटे रेंगने वाले जीवों को छिपने के लिए आसान जगह बनाती है. ऐसे में इन परतों के अंदर कीड़ों और उनके अंडों के छिपने और बढ़ने की संभावना अधिक होती है. इसके अलावा, पत्ता गोभी में ऐसे प्राकृतिक तत्व भी होते हैं जो कुछ कीड़ों को आकर्षित करते हैं, जैसे कि कैबेज वर्म. सब्जियों को धोने का सही तरीका – फलों, सब्जियों और पैक्ड सामान को छूने से पहले और बाद में हाथों को अच्छे से धोएं.– सभी फलों और सब्जियों को साफ पानी से अच्छे से धोएं या रगड़ें. अगर कोई चीज पहले से “Pre-Washed” लिखी हो, तो भी सावधानी रखें.– कटे हुए, छीले हुए या पके हुए खाने को 2 घंटे के अंदर फ्रिज में रखें. इस दौरान फ्रिज का तापमान 40°F (लगभग 4°C) या उससे कम होना चाहिए.– कटिंग बोर्ड, किचन स्लैब और बर्तनों को इस्तेमाल से पहले और बाद में गर्म साबुन वाले पानी से साफ करें.– फलों और सब्जियों को कच्चे मांस, मछली और चिकन से अलग रखें, क्योंकि इनसे बैक्टीरिया फैल सकते हैं. फलों और सब्जियों के लिए अलग कटिंग बोर्ड का इस्तेमाल करना बेहतर होता है.– पत्तेदार सब्जियों को काटने से पहले इन्हें नमक, विनेगर या बेकिंग सोडा मिले पानी में कुछ मिनटों तक भिगोंकर रखना इनसे छिपके सूक्ष्म जीवों को निकालने का काम करता है. FAQ कैबेज वर्म क्या होता है?कैबेज वर्म एक छोटा हरा कीड़ा होता है, जो तितली के लार्वा का रूप होता है और पत्तागोभी जैसी सब्जियों को खाता है. इसके अलावा भी मिट्टी में रहने वाले कीड़े पत्तागोभी में छिपे हो सकते हैं. क्या पत्तागोभी के कीड़े इंसानों के लिए हानिकारक हैं?ये आमतौर पर जहरीले नहीं होते. लेकिन कई बार जब सब्जी को अच्छी तरह से पकाया न गया हो तो इनके अंडे शरीर में पहुंच सकते हैं और ब्रेन में सूजन कर सकते हैं. ऐसा होने पर व्यक्ति को मिर्गी के दौरे आते हैं. पत्तागोभी में कीड़े क्यों हो जाते हैं?तितलियां पत्तों पर अंडे देती हैं और उनसे निकले कीड़े पत्तागोभी की परतों के अंदर छिपकर बढ़ते हैं. पत्तागोभी में छिपे कीड़ों को कैसे साफ करें?पत्तागोभी के एक-एक पत्ते को अलग करके इन्हें नमक वाले पानी में भिगोकर, फिर बहते पानी से अच्छी तरह धोकर साफ करना सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है.
इंदौर में शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म:उज्जैन और खाटू श्याम ले जाकर होटल में किया शोषण; आरोपी पर केस दर्ज

इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र की 19 वर्षीय युवती की शिकायत पर पुलिस ने रविवार को एक युवक के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने दोस्ती कर शादी का झांसा दिया और करीब तीन महीने तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। इस दौरान वह उसे उज्जैन और खाटू श्याम जी मंदिर भी लेकर गया, जहां होटल में उसके साथ दुष्कर्म किया। आजाद नगर पुलिस के अनुसार पीड़िता की शिकायत पर बाला प्रसाद पुत्र कैलाश प्रसाद निवासी इंदिरा एकता नगर मूसाखेड़ी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी मूल रूप से गुना का रहने वाला है और इंदौर में युवती के घर के पास किराए से रहता था, जिससे दोनों के बीच पहचान हुई। पहचान हुई तो दोनों ने मोबाइल नंबर ले लिए युवती ने बताया कि कुछ समय पहले दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और उन्होंने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर ले लिए। 12 जनवरी की अलसुबह आरोपी ने उसे कॉल कर घर मिलने पहुंचा, जहां उसने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए। इसके बाद भी वह लगातार शादी का आश्वासन देता रहा, लेकिन बात टालता रहा। आरोप है कि 15 मार्च को आरोपी ने फिर युवती को कॉल कर सुबह घर के बाहर बुलाया और अपने साथ उज्जैन ले गया। वहां दर्शन कराने के बाद होटल में उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह उसे खाटू श्याम लेकर गया, वहां भी होटल में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। परिजनों से शादी की बात कहकर छोड़ गया 17 मार्च को आरोपी युवती को इंदौर के भंवरकुआ क्षेत्र में छोड़कर यह कहकर चला गया कि वह गुना जाकर परिवार से शादी की बात करेगा और वापस आएगा। इसके बाद उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया और संपर्क खत्म कर दिया। घटना से आहत पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी जानकारी दी। इसके बाद रविवार को पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दूसरी शादी की, बेटी होने पर पत्नी को किया प्रताड़ित हीरानगर थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ रविवार को दहेज प्रताड़ना, मारपीट और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। पुलिस के अनुसार 24 वर्षीय प्राची जाधव निवासी ग्राम छापरा तहसील सनावद ने बताया कि वह अभी मेघदूत नगर इंदौर में रह रही है। उनकी शादी अखिलेश जाधव से हुई थी। प्राची ने शिकायत में बताया कि शादी के 3-4 महीने बाद रिश्तेदारों से उन्हें पता चला कि अखिलेश पहले से ही शादीशुदा है। जब उन्होंने इस बारे में पति से सवाल किया तो वह विवाद करने लगा। पीड़िता के अनुसार लॉकडाउन में शादी होने के कारण मायके पक्ष से दहेज नहीं दिया गया था। इसी बात को लेकर पति अखिलेश शराब पीकर अक्सर मारपीट करता था। पीड़िता के पिता ने एक्टिवा गाड़ी दिलवाई, लेकिन उसने उसे भी बेच दिया। प्राची ने बताया कि 19 जुलाई 2022 को उसने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से पति और अधिक नाराज रहने लगा और उसे बेटी होने के ताने देता था। आरोपी का कहना था कि उसे बेटा चाहिए था। परेशान होकर उसने मामले में पुलिस को शिकायत की है।
किस उम्र से बच्चों की आंखें करवानी चाहिए टेस्ट? सही एज में आई चेकअप क्यों है जरूरी, डॉक्टर से जानिए

Last Updated:April 20, 2026, 15:16 IST When To Go for Kids Eye Test: बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे नजर से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचाना जा सकता है. नियमित आई चेकअप बच्चों के बेहतर विकास और पढ़ाई में भी मदद करता है. डॉक्टर की मानें तो 3 साल के बाद साल में एक बार बच्चे की आंखें जरूर चेक करानी चाहिए. 3 साल की उम्र से बच्चों की आंखें चेक करवानी चाहिए. Child Eye Check-Up Guide: आज के जमाने में बच्चों को भी आंखों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. 3 से 4 साल की उम्र में ही कई बच्चों की आंखों पर चश्मा लग जाता है और इससे बच्चे परेशान होने लगते हैं. कई बार पैरेंट्स को पता ही नहीं चलता है कि उनके बच्चे की नजर कमजोर हो गई है. इसका असर उनकी पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरी तरह पड़ता है. आजकल मोबाइल, टीवी और स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों पर असर डाल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों की आंखों का टेस्ट किस उम्र से कराना चाहिए और यह क्यों जरूरी है. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया नवजात शिशु की आंखों की पहली जांच जन्म के तुरंत बाद ही कर ली जाती है, ताकि किसी जन्मजात समस्या का पता लगाया जा सके. इसके बाद 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बच्चों की आंखों का एक बेसिक चेकअप करवाना चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर यह देखते हैं कि बच्चा चीजों को सही तरीके से देख और पहचान पा रहा है या नहीं. अगर इस चरण में कोई समस्या मिलती है, तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है. कई बच्चों में आंखों से जुड़ी जन्मजात समस्याएं भी होती हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि 3 से 5 साल की उम्र को बच्चों की आंखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान उनकी विजन डेवलपमेंट तेजी से होती है. इसलिए इस उम्र में नियमित रूप से आई टेस्ट कराना जरूरी है. अगर इस समय नजर की कमजोरी, भेंगापन या अन्य समस्या पकड़ में आ जाए, तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है. 5 साल के बाद हर 1 से 2 साल में बच्चों की आंखों की जांच करानी चाहिए. अगर बच्चा बार-बार आंखें मलता है, टीवी के पास बैठता है, सिरदर्द की शिकायत करता है या पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाता, तो ये संकेत हैं कि उसकी नजर कमजोर हो रही है और तुरंत जांच की जरूरत है. एक्सपर्ट के मुताबिक समय पर आंखों की जांच न कराने से मायोपिया या एंब्लायोपिया जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इनका इलाज शुरुआती उम्र में आसान होता है, लेकिन देर होने पर यह स्थायी भी हो सकती हैं. बच्चों की आंखों की जांच सही उम्र में कराना उनकी अच्छी दृष्टि और बेहतर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. नियमित आई चेकअप से न सिर्फ आंखों की समस्याओं को रोका जा सकता है, बल्कि बच्चे की पढ़ाई और विकास पर भी सकारात्मक असर पड़ता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 20, 2026, 15:09 IST
निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प:युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो

युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।
शराब नीति केस में केजरीवाल की याचिका पर आज फैसला:जज बदलने की मांग; पिछली सुनवाई में कहा था- जज के परिवार का केंद्र से जुड़ाव

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आज शाम 5:30 बजे शराब नीति मामले में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य आरोपियों की रीक्यूजल याचिका पर फैसला सुनाएंगी। फैसला सुनाने का समय दो बार बढ़ाया गया है। पहले दोपहर 2:30 बजे समय तय था। इसके बाद 4:30 बजे और फिर शाम 5:30 बजे का समय तय हुआ है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जज पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाकर उनसे खुद को मामले से अलग करने की मांग की है। फैसले से पहले सुनवाई के दौरान केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। केजरीवाल ने कहा कि उनकी ‘रिजॉइंडर’ (जवाबी दलील) को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया है, जो न्याय का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में लिखित दलीलों पर ‘रिजॉइंडर’ का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे लिखित सबमिशन के तौर पर स्वीकार किया गया। वहीं, CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आदेश सुरक्षित होने के बाद नई दलील स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। केजरीवाल बोले- जज के बच्चे SG मेहता के साथ काम करते हैं केजरीवाल ने 15 अप्रैल को कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इसमें केजरीवाल ने दावा किया था कि जज का परिवार केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है। हलफनामे के अनुसार, जस्टिस कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल ने कहा- 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। तब मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। जज को हटाने की अर्जी क्यों, 5 पॉइंट्स में समझिए ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर समेत अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की। जस्टिस कांता ने पूर्व AAP विधायक की याचिका से खुद को अलग किया केजरीवाल की याचिका पर फैसले से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता ने पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने मामले से खुद को अलग करते समय कोई कारण नहीं बताया। यह मामला MCOCA से जुड़ा है। नरेश बाल्यान ने इस केस में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है, तो केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे सुनवाई करती है। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी किया था ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…






