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शराब नीति केस में केजरीवाल की याचिका पर आज फैसला:जज बदलने की मांग; पिछली सुनवाई में कहा था- जज के परिवार का केंद्र से जुड़ाव

शराब नीति केस में केजरीवाल की याचिका पर आज फैसला:जज बदलने की मांग; पिछली सुनवाई में कहा था- जज के परिवार का केंद्र से जुड़ाव

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आज शाम 5:30 बजे शराब नीति मामले में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल समेत 23 अन्य आरोपियों की रीक्यूजल याचिका पर फैसला सुनाएंगी। फैसला सुनाने का समय दो बार बढ़ाया गया है। पहले दोपहर 2:30 बजे समय तय था। इसके बाद 4:30 बजे और फिर शाम 5:30 बजे का समय तय हुआ है। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जज पर पक्षपात और हितों के टकराव के आरोप लगाकर उनसे खुद को मामले से अलग करने की मांग की है। फैसले से पहले सुनवाई के दौरान केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। केजरीवाल ने कहा कि उनकी ‘रिजॉइंडर’ (जवाबी दलील) को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया है, जो न्याय का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में लिखित दलीलों पर ‘रिजॉइंडर’ का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे लिखित सबमिशन के तौर पर स्वीकार किया गया। वहीं, CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आदेश सुरक्षित होने के बाद नई दलील स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। केजरीवाल बोले- जज के बच्चे SG मेहता के साथ काम करते हैं केजरीवाल ने 15 अप्रैल को कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इसमें केजरीवाल ने दावा किया था कि जज का परिवार केंद्र सरकार से जुड़ा हुआ है। हलफनामे के अनुसार, जस्टिस कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल ने कहा- 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। तब मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। जज को हटाने की अर्जी क्यों, 5 पॉइंट्स में समझिए ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस आदेश को CBI ने चुनौती दी, जिसकी सुनवाई वर्तमान में जस्टिस शर्मा कर रही हैं। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने नोटिस जारी किया और उस आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी, जिसमें जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत थीं और ट्रायल कोर्ट को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर समेत अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा को हटाने की अर्जी दाखिल की। जस्टिस कांता ने पूर्व AAP विधायक की याचिका से खुद को अलग किया केजरीवाल की याचिका पर फैसले से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता ने पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने मामले से खुद को अलग करते समय कोई कारण नहीं बताया। यह मामला MCOCA से जुड़ा है। नरेश बाल्यान ने इस केस में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है, तो केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे सुनवाई करती है। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी किया था ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…

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