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‘राहुल गांधी नेतृत्व नहीं कर सकते’: तेज प्रताप यादव ने इंडिया ब्लॉक फेस के रूप में प्रियंका गांधी का समर्थन किया | राजनीति समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Sthree Sakthi SS-516 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 15:58 IST तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए प्रियंका गांधी का समर्थन किया, राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए, जबकि पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद जैसे अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि उनके अधीन कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव. (छवि X/@TejYadav14 के माध्यम से) तेज प्रताप यादव ने मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के चेहरे के रूप में प्रियंका गांधी का समर्थन किया, जिससे कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व पर ताजा संदेह पैदा हो गया। जनशक्ति जनता दल के संस्थापक ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से तुलना करते हुए कहा कि पार्टी का नेतृत्व करने के लिए प्रियंका गांधी बेहतर उपयुक्त हैं। उन्होंने राहुल के सार्वजनिक पहुंच प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा, “केवल प्रियंका गांधी ही इसे चला सकती हैं; वह इंदिरा गांधी की तरह हैं।” उन्होंने कहा, ”राहुल गांधी यात्रा करके, बुलेट पर बैठकर चलने वाला नहीं है।” #घड़ी | पटना, बिहार: “प्रियंका गांधी ही चल सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जी की तरह हैं। राहुल गांधी जी से चलने वाला नहीं है। यात्रा निकलने से, बुलेट पर बैठ जाने से…” कांग्रेस की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव कहते हैं… pic.twitter.com/hz2ZgjdK56– एएनआई (@ANI) 21 अप्रैल 2026 यादव ने बिहार की राजनीति में हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए राहुल गांधी के राजनीतिक दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने नीतीश कुमार के जाने और उसके बाद भाजपा के सम्राट चौधरी की मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति की ओर इशारा करते हुए पूछा कि राहुल गांधी की बड़ी रणनीति क्या थी। उनकी टिप्पणी राहुल गांधी के इस आरोप के जवाब में आई है कि सक्रिय राज्य की राजनीति से हटने के बाद नीतीश कुमार से “समझौता” किया गया है। यह भी पढ़ें: राहुल गांधी के खिलाफ नागरिकता का मामला दायर करने वाले भाजपा कार्यकर्ता ने मांगी Z+ सुरक्षा: ‘गुप्त जानकारी का खुलासा करेंगे’ यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाया गया है। इस साल की शुरुआत में, पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए दावा किया था कि आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। अहमद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लंबे समय तक राजनीतिक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करने में असहज थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन में आने से काफी पहले से राजनीति में थे और उन्होंने सुझाव दिया कि इससे पार्टी के भीतर मतभेद पैदा हुआ। ”कांग्रेस में ऐसे कई नेता हैं जो राहुल गांधी के बनने से बहुत पहले से राजनेता हैं। जिस दिन राहुल गांधी जी ने अपना पहला चुनाव जीता, उसी दिन मैंने अपना पांचवां चुनाव जीता। मेरा मानना ​​है कि उन्हें उन लोगों के साथ बैठने में असहजता होती है जो उन्हें अपना बॉस नहीं मानते। अहमद ने कहा था, ”मैंने इसे लंबे समय से महसूस किया है, लेकिन जब आप पार्टी में रहते हैं तो आप ऐसी बातें नहीं कहते हैं।” उन्होंने आगे दावा किया कि कांग्रेस में निर्णय लेना केंद्रीकृत हो गया है। उनके अनुसार, राहुल गांधी के शब्द अंतिम अधिकार रखते हैं, जिससे व्यापक परामर्श के लिए बहुत कम जगह बचती है। अहमद ने राहुल गांधी पर पार्टी के नेतृत्व ढांचे को नया आकार देने के लिए भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई जैसी युवा शाखाओं पर बहुत अधिक भरोसा करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने इस दृष्टिकोण का सुझाव दिया जिसका उद्देश्य वरिष्ठ नेताओं को किनारे करना और उनकी जगह राहुल गांधी के प्रति वफादार माने जाने वाले युवा नेताओं को लाना था। (एएनआई से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : बिहार, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 15:54 IST समाचार राजनीति ‘राहुल गांधी नेतृत्व नहीं कर सकते’: तेज प्रताप यादव ने इंडिया ब्लॉक फेस के रूप में प्रियंका गांधी का समर्थन किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी नेतृत्व(टी)प्रियंका गांधी नेतृत्व(टी)तेज प्रताप यादव टिप्पणी(टी)कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र(टी)नीतीश कुमार बाहर निकलें(टी)बिहार की राजनीति बीजेपी(टी)सम्राट चौधरी बिहार के सीएम(टी)नेहरू-गांधी परिवार

मैहर में भीषण गर्मी ने नहीं लगेंगे स्कूल:प्राइमरी क्लास तक की छुट्टी घोषित, 6वीं से 12वीं की कक्षाएं लगेंगी

मैहर में भीषण गर्मी ने नहीं लगेंगे स्कूल:प्राइमरी क्लास तक की छुट्टी घोषित, 6वीं से 12वीं की कक्षाएं लगेंगी

मैहर जिले में भीषण गर्मी के कारण कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट बिदिशा मुखर्जी ने प्री-प्राइमरी से कक्षा 5वीं तक के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवकाश में शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय और सीबीएसई सहित सभी मान्यता प्राप्त स्कूल शामिल हैं। प्रशासन ने यह निर्णय छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भीषण गर्मी के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए लिया है। 12.30 तक लगेंगी कक्षाएं हालांकि, कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ही संचालित होती रहेंगी। इस दौरान, विद्यालयों के शैक्षणिक स्टाफ को दोपहर 1:30 बजे तक उपस्थित रहकर आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य आवश्यक कार्यक्रम अपने तय समय पर ही संचालित किए जाएंगे। मैहर जिले में मंगलवार को तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

Went to Russia for studies and job, made soldiers and threw them into war

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Hindi News National Went To Russia For Studies And Job, Made Soldiers And Threw Them Into War रविंद्र शांडिल्य.नई दिल्ली/कैथल20 मिनट पहले कॉपी लिंक एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा। हरियाणा के रेवाड़ी का अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था। वहां उसे सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया। वार जोन में उसकी मौत हो गई। करीब 6 महीने बाद 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा। परिवार पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसा ही दर्द हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे देश के कई राज्यों के कई परिवारों का है। जवान बेटों को रूस भेजने के लिए किसी ने जमीन बेची तो किसी ने कर्ज लिया। अब वहां किसी की मौत हो गई तो कोई लापता है। डेढ़ साल में 4 राज्यों के 13 युवाओं के शव घर आ चुके हैं। देशभर के सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं। दैनिक भास्कर ने ऐसे युवाओं के परिवारों से बात की। पता चला कि एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा। वहां पैसों का लालच देकर या डरा-धमकाकर जबरन आर्मी में भर्ती का कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया। फिर 10-15 दिन की ट्रेनिंग देकर युद्ध में फ्रंट लाइन पर भेज दिया। अब कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटकर घर पहुंच रहे हैं। किसी का शव घर आया तो किसी की कोई खबर नहीं… ये वे युवा हैं, जिनके परिवारों से भास्कर ने बात की है। इसके अलावा कई राज्यों के युवक महीनों से लापता हैं, कोई पता नहीं चल रहा। हरियाणा- विकास, अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित(फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत) पंजाब – समरजीत (लुधियाना), मनदीप (जालंधर) राजस्थान – अजय (बीकानेर) जम्मू-कश्मीर – सचिन, खाऊर पालनवाला (जम्मू) 4 राज्यों के 26 परिवारों की सुप्रीम कोर्ट से गुहार इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 युवाओं के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर 24 अप्रैल को सुनवाई है। रोहतक के श्रीभगवान व हिसार के विकास ने बताया कि उन परिवारों से संपर्क किया गया, जिनके बच्चे रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हैं या मौत हो गई। याचिका में मांग की गई है कि जबरन युद्ध में धकेले गए युवाओं की स्थिति बताई जाए। मरने वाले के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। झांसा देकर सेना में भेजने वाले एजेंटों पर कार्रवाई की जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News National Went To Russia For Studies And Job, Made Soldiers And Threw Them Into War रविंद्र शांडिल्य.नई दिल्ली/कैथल52 मिनट पहले कॉपी लिंक एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा। हरियाणा के रेवाड़ी का अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था। वहां उसे सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया। वार जोन में उसकी मौत हो गई। करीब 6 महीने बाद 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा। परिवार पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ा है। ऐसा ही दर्द हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे देश के कई राज्यों के कई परिवारों का है। जवान बेटों को रूस भेजने के लिए किसी ने जमीन बेची तो किसी ने कर्ज लिया। अब वहां किसी की मौत हो गई तो कोई लापता है। डेढ़ साल में 4 राज्यों के 13 युवाओं के शव घर आ चुके हैं। देशभर के सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं। दैनिक भास्कर ने ऐसे युवाओं के परिवारों से बात की। पता चला कि एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा। वहां पैसों का लालच देकर या डरा-धमकाकर जबरन आर्मी में भर्ती का कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया। फिर 10-15 दिन की ट्रेनिंग देकर युद्ध में फ्रंट लाइन पर भेज दिया। अब कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटकर घर पहुंच रहे हैं। किसी का शव घर आया तो किसी की कोई खबर नहीं… ये वे युवा हैं, जिनके परिवारों से भास्कर ने बात की है। इसके अलावा कई राज्यों के युवक महीनों से लापता हैं, कोई पता नहीं चल रहा। हरियाणा- विकास, अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित(फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत) पंजाब – समरजीत (लुधियाना), मनदीप (जालंधर) राजस्थान – अजय (बीकानेर) जम्मू-कश्मीर – सचिन, खाऊर पालनवाला (जम्मू) 4 राज्यों के 26 परिवारों की सुप्रीम कोर्ट से गुहार इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 युवाओं के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर 24 अप्रैल को सुनवाई है। रोहतक के श्रीभगवान व हिसार के विकास ने बताया कि उन परिवारों से संपर्क किया गया, जिनके बच्चे रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हैं या मौत हो गई। याचिका में मांग की गई है कि जबरन युद्ध में धकेले गए युवाओं की स्थिति बताई जाए। मरने वाले के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। झांसा देकर सेना में भेजने वाले एजेंटों पर कार्रवाई की जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सिर्फ गर्मियों में मिलती है यह गोल-मटोल सब्जी, इसमें कूट-कूटकर भरे विटामिन और मिनरल्स, फायदे अनगिनत

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Last Updated:April 21, 2026, 15:12 IST Tinda Health Benefits: टिंडा एक पौष्टिक और हल्की सब्जी है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक देने, हाइड्रेट रखने और पाचन सुधारने में मदद करती है. इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और वजन कंट्रोल करने में मदद करते हैं. टिंडा एक गोल-मटोल सब्जी है, जिसका स्वाद भी लाजवाब होता है. यह सब्जी फरवरी से जुलाई के बीच उगाई जाती है. टिंडा की सब्जी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. (Image- AI) Health Benefits of Tinda: गर्मियों में खानपान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि सेहत ठीक बनी रहे. इस मौसम में कई ऐसी सब्जियां मिलती हैं, जिनका सेवन शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इन्हीं में से एक सब्जी टिंडा है, जिसे अंग्रेजी में एप्पल गार्ड कहा जाता है. यह गोल-मटोल सब्जी पोषण का खजाना है और खासतौर पर गर्मियों में शरीर को फिट और हाइड्रेट रखने में बेहद फायदेमंद होती है. इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए यह तेज गर्मी में शरीर को संतुलित रखने में मदद करती है. गर्मियों की इस सब्जी का सेवन करेंगे, तो गजब के फायदे मिल सकते हैं. गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह के मुताबिक टिंडा में पानी की अच्छी मात्रा होती है. गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए काफी पानी निकल जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में टिंडा का सेवन शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और आपको दिनभर तरोताजा बनाए रखता है. यह शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में भी मदद करता है, जिससे लू लगने का खतरा कम हो जाता है. पोषक तत्वों की बात करें तो टिंडा विटामिन C, विटामिन A, आयरन, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होती है. विटामिन C इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है, जबकि विटामिन A आंखों की रोशनी और त्वचा के लिए फायदेमंद है. पोटैशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक होता है और फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट की मानें तो पाचन तंत्र के लिए टिंडा किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई करता है और कब्ज, गैस व अपच जैसी समस्याओं को दूर रखने में मदद करता है. यह हल्की और जल्दी पचने वाली सब्जी है, इसलिए जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए यह बेहद लाभकारी मानी जाती है. बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी यह एक सुरक्षित विकल्प है. वजन कम करने की चाह रखने वालों के लिए भी टिंडा एक बेहतरीन विकल्प है. इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. इससे ओवरईटिंग की समस्या कम होती है और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. डाइटिशियन रंजना के मुताबिक दिल की सेहत और स्किन के लिए भी यह सब्जी काफी फायदेमंद है. टिंडा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है. टिंडा में पाए जाने वाले पोटैशियम और अन्य मिनरल्स दिल को स्वस्थ रखते हैं और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करते हैं. टिंडा एक साधारण दिखने वाली लेकिन बेहद गुणकारी सब्जी है. गर्मियों में इसका नियमित सेवन शरीर को ठंडक, ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है. अगर हल्की, पौष्टिक और फायदेमंद सब्जी ढूंढ रहे हैं, तो टिंडा एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 15:12 IST

हाइकिंग के बाद पाना है थकान से राहत? रिकवरी तेज करने के ये 5 आसान तरीके जो हर ट्रेकर को जानने चाहिए

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Last Updated:April 21, 2026, 15:09 IST Trekking Tips: हाइकिंग खत्म होते ही अक्सर लगता है कि शरीर ने जवाब दे दिया है-पैर भारी, कंधे झुके हुए और दिमाग बस आराम मांगता है, अगर आपने कभी लंबी ट्रेकिंग के बाद ये महसूस किया है, तो आप अकेले नहीं हैं. पहाड़ों की खूबसूरती जितनी सुकून देती है, उतनी ही शरीर से मेहनत भी लेती है. यही वजह है कि कई लोग अगली सुबह उठते ही फिर से ट्रेल पर जाने की बजाय बिस्तर पकड़ लेते हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि थोड़ी समझदारी और कुछ आसान आदतों से आप इस थकान को जल्दी दूर कर सकते हैं और अगली हाइक के लिए खुद को तैयार रख सकते हैं. हाइकिंग के बाद थकान क्यों होती है? हाइकिंग के दौरान शरीर लगातार काम करता है. चढ़ाई, उतराई, असमान रास्ते-सब मिलकर मांसपेशियों पर दबाव डालते हैं, अगर आपने सही खाना नहीं खाया, पानी कम पिया या शरीर को आराम नहीं दिया, तो थकान ज्यादा महसूस होगी. कई बार लोग बिना वार्मअप के सीधे ट्रेक शुरू कर देते हैं, जिससे मसल्स जल्दी थक जाती हैं. इसके अलावा, गलत जूते या भारी बैग भी इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं. थकान के आम संकेत शरीर क्या बताता है? जब शरीर थक जाता है, तो कुछ साफ संकेत देता है. जैसे- -मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन -बहुत ज्यादा थकावट महसूस होना -सिरदर्द या हल्का चक्कर -सांस जल्दी फूलना -पैरों में भारीपन अगर ये लक्षण बार-बार दिख रहे हैं, तो समझ लीजिए कि शरीर को बेहतर रिकवरी की जरूरत है. हाइकिंग के बाद थकान दूर करने के 5 तरीके 1. सही गियर का चुनाव करें हाइकिंग का मजा तभी आता है जब आपका गियर सही हो. फिटिंग वाले जूते, हल्का और बैलेंस्ड बैग और मौसम के हिसाब से कपड़े-ये छोटी चीजें थकान को काफी कम कर देती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google 3. बैग हल्का रखें अक्सर लोग जरूरत से ज्यादा सामान भर लेते हैं. भारी बैग आपके कंधों और पीठ पर बोझ डालता है. कोशिश करें कि सिर्फ जरूरी चीजें ही साथ रखें. 4. पानी की कमी न होने दें डिहाइड्रेशन थकान की सबसे बड़ी वजह है. ट्रेक से पहले, दौरान और बाद में पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है. हल्के-हल्के अंतराल में पानी पीते रहें. 5. सही समय पर खाना खाएं खाली पेट हाइकिंग करने से ऊर्जा जल्दी खत्म होती है. प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना खाएं और बीच-बीच में हल्के स्नैक्स लेते रहें. छोटे बदलाव, बड़ा फर्क हाइकिंग सिर्फ एक एडवेंचर नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों की परीक्षा है, अगर आप हर ट्रेक के बाद खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको अपनी तैयारी और रिकवरी पर ध्यान देना चाहिए. छोटे-छोटे बदलाव-जैसे सही खाना, पानी और आराम-आपके पूरे अनुभव को बदल सकते हैं. First Published : April 21, 2026, 15:09 IST

इंदौर में अज्ञात वाहन की टक्कर से व्यक्ति की मौत:सड़क पार करते वक्त हादसा, राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया; परिजनों की तलाश जारी

इंदौर में अज्ञात वाहन की टक्कर से व्यक्ति की मौत:सड़क पार करते वक्त हादसा, राहगीरों ने अस्पताल पहुंचाया; परिजनों की तलाश जारी

इंदौर के नेमावर रोड पर हुए सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। सोमवार रात करीब 11 बजे सड़क पार करते समय अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। राहगीरों ने घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। भंवरकुआ थाना पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान दिलीप (42) पुत्र बनेसिंह ठाकुर निवासी पालदा के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि उसे एक आयशर वाहन ने टक्कर मारी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उसकी जेब से एक डायरी निकाली और उसमें दर्ज नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी पहचान की पुष्टि नहीं की। उसके पास एक मोबाइल फोन भी मिला, जो हादसे में टूट गया था। मोबाइल को एमवाय चौकी पुलिस को सौंप दिया गया है। फिलहाल पुलिस मृतक के परिजनों की तलाश कर रही है और टक्कर मारकर फरार हुए वाहन की पहचान के लिए जांच जारी है।

UP के मुस्लिम परिवार ने उत्तराखंड में अपनाया हिंदू धर्म:गंगा में डुबकी लगाई-जनेऊ पहना, घाट किनारे खड़े संत के पैर चूमे

UP के मुस्लिम परिवार ने उत्तराखंड में अपनाया हिंदू धर्म:गंगा में डुबकी लगाई-जनेऊ पहना, घाट किनारे खड़े संत के पैर चूमे

उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार ने आज हरिद्वार में हिंदू धर्म अपना लिया। नमामि गंगे घाट पर कई संतों की मौजूदगी में परिवार के पांचों सदस्यों का शुद्धिकरण किया गया, गंगा में डुबकी लगवाई गई और फिर मंत्रो उच्चारण के बीच हवन में उन्हें जनेऊ पहनाया गया। हिंदू धर्म में शामिल कराने बाद उन सभी के नाम भी बदल दिए गए, परिवार के मुखिया मोहम्मद शहजाद अब ‘शंकर’ बन गए हैं और उनकी पत्नी रजिया से ‘सावित्री’ बन गई है। इसी दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें शहजाद घाट किनारे खड़े अपने गुरू अरुण किशन महाराज के पैर चूमते हुए दिख रहा है। इस पूरे कार्यक्रम में मौजूद संतों ने इसे घर वापसी बताया है। स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने दावा किया है कि भारत का हर मुस्लिम पहले हिंदू ही था और सभी को हिंदू धर्म में आकर घर वापसी करनी चाहिए। वहीं शहजाद से शंकर बने युवक ने कहा कि वह बचपन से ही सनातन धर्म में विश्वास रखता था। हालांकि उसने कहा- मुझे अब उन लोगों से खतरा है जो पहले मेरे अपने थे, हालांकि अब मुझे उन लोगों से कोई मतलब नहीं है। सहारनपुर का परिवार, गुरु के संपर्क में था; बच्चों के नाम भी बदले ये पूरा परिवार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रहता है। चंडीघाट पर हुए इस पूरे कार्यक्रम में मौजूद अरुण किशन महाराज ने बताया कि शहजाद लंबे समय से उनके संपर्क में था और लगातार सनातन धर्म अपनाने की इच्छा जता रहा था। उनके अनुसार, पूरा परिवार जब सहमत हुआ तो फिर आज सभी को हिंदू धर्म में शामिल कर लिया गया। रजिया और शहजाद की दो बेटियों और एक बेटे का भी नाम बदल दिया गया है। बेटे का नाम रूद्र’ और बेटियों के नाम ‘रुक्मिणी’ व ‘दिशा’ रखे गए हैं। ‘नमाज नहीं पढ़ता था, वो गलत रास्ता लगा’ शहजाद ने कहा कि वह रोज नियमित रूप से नमाज नहीं पढ़ता था और समय के साथ उसे महसूस हुआ कि यह रास्ता उसके लिए सही नहीं है। इसी वजह से उसने इसे छोड़कर सनातन धर्म अपनाने का फैसला लिया। उसने यह भी बताया कि बचपन से ही उसका झुकाव सनातन धर्म की ओर था और वह पहले से पूजा-पाठ करता था, इसलिए उसने परिवार के साथ मिलकर यह कदम उठाया। प्रोबोधानंद बोले- बिना दबाव का फैसला, यह घर वापसी है कार्यक्रम में मौजूद स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने कहा कि यह निर्णय किसी दबाव या प्रलोभन में नहीं लिया गया, बल्कि परिवार की व्यक्तिगत आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा, हम आह्वान करते हैं कि भारत में रहने वाला हर मुसलमान हिंदू है और उसे पुन: हिंदू धर्म में वापस आना चाहिए। जब वे हज के लिए जाते हैं तो वहां उन्हें हीन दृष्टि से देखा जाता है, उन्हें पूरी तरह मुसलमान तक नहीं माना जाता, इसलिए उन्हें घर वापसी करनी चाहिए। स्वामी प्रबोधानंद ने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि अपने मूल धर्म में लौटने की प्रक्रिया है। उनके अनुसार, “हम किसी ईसाई या मुस्लिम को हिंदू नहीं बना रहे हैं, बल्कि उन लोगों की घर वापसी करवा रहे हैं जो किसी कारणवश पहले अपने मूल धर्म से अलग हो गए थे।” ‘इनकी जान को खतरा, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी’ स्वामी राम विशाल दास भी इस पूरे धर्म परिवर्तन कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने कहा- “शहजाद जानता था कि इस्लाम अत्याचार, दुराचार, अनाचार के दम पर फैला हुआ मजहब है और उनके पूर्वजों पर बहुत अत्याचार हुए। उसकी जिज्ञासा थी कि ऐसा क्यों हुआ। बहुत दिन से वह हमारे संपर्क में था। ये पूरा कार्यक्रम हमने पहले गोपनीय रखा था, लेकिन आज पूरे विधि-विधान से हमने उसके परिवार की घर वापसी करवाई है। अच्छी बात ये है कि हमने उन्हें ब्रह्म कुंड में आस्था की डुबकी लगवाई है। पूरे वैदिक विधि-विधान से ये पूरा कार्यक्रम हुआ है। हरिद्वार शुद्धि आंदोलन का बहुत बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। कई माताएं, बहनें, बेटियां और परिवार हमारे संपर्क में हैं जो हिंदू धर्म अपनाना चाहते हैं। बहुत जल्द अगला शुद्धि कार्यक्रम होगा।” पहले भी ब्रह्मकुंड पर पहुंची थी ‘एक्स मुस्लिम यात्रा’ इससे पहले हरिद्वार के हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड पर कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर से पैदल निकली ‘एक्स मुस्लिम पदयात्रा’ भी पहुंची थी, जिसमें संत राम विशाल दास समेत अन्य संत शामिल रहे थे। इस दौरान संत राम विशाल दास ने कहा था कि यात्रा का उद्देश्य उन लोगों के भीतर का डर खत्म करना है, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं लेकिन भय और दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे। उन्होंने बताया था कि ऐसे लोगों को यह संदेश देना जरूरी है कि वे अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकते हैं और उन्हें सुरक्षा व स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। —————- ये खबर भी पढ़ें… हरिद्वार में ‘एक्स मुस्लिम यात्रा’ पर FIR करेगी गंगा सभा:कहा- मुस्लिम टोपी पहनकर हरकी पैड़ी में आए, ये सनातन का अपमान, बख्शेंगे नहीं उत्तरप्रदेश के बिजनौर से निकल रविवार को हरिद्वार में खत्म हुई ‘एक्स मुस्लिम यात्रा’ पर गंगा सभा FIR करने की तैयारी में है। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस पूरी यात्रा में शामिल लोगों पर धार्मिक आस्थाओं के अपमान का आरोप लगाते इसे प्रोपेगेंडा बताया है। (पढ़ें पूरी खबर)

LSG Prince Yadav Success Story; IPL 2026 Wickets Record

LSG Prince Yadav Success Story; IPL 2026 Wickets Record

स्पोर्ट्स डेस्क12 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच में फिल एलन के विकेट की खुशी मनाते प्रिंस यादव। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के तेज गेंदबाज प्रिंस यादव आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। लेकिन एक वक्त था जब उनके पिता राम निवास यादव पत्नी से कहते थे, तुम प्रिंस को बिगाड़ रही हो। आज उसी बेटे ने IPL में दिग्गज खिलाड़ियों के विकेट लेकर पिता के डर को गर्व में बदल दिया है। इस IPL सीजन में प्रिंस लखनऊ के टॉप विकेट टेकर हैं। उन्होंने 6 मैचों में 11 विकेट लिए हैं। वे फ्रेंचाइजी की विकेट लिस्ट में मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाजों से आगे निकल गए हैं। प्रिंस को हाल ही में इंडिया-ए टीम के लिए बुलावा आया था, लेकिन घुटने की चोट के कारण वे खेल नहीं सके। लखनऊ के स्क्वॉड को देख डर गए थे पिता इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जब प्रिंस का लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट हुआ, तो पिता राम निवास नामों की लिस्ट देखकर घबरा गए थे। उन्होंने प्रिंस से कहा था, मयंक यादव, आवेश खान, मोहसिन खान और सचिन तेंदुलकर का बेटा अर्जुन भी उस टीम में हैं, तेरा नंबर कैसे पड़ेगा? उन्हें डर था कि इतने बड़े खिलाड़ियों के बीच बेटे को मौका नहीं मिलेगा। सरकारी नौकरी छोड़ क्रिकेट को चुना रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) से रिटायर्ड ASI राम निवास चाहते थे कि प्रिंस पुलिस या फौज में नौकरी करें। प्रिंस ने दिल्ली पुलिस की फिजिकल परीक्षा पास की थी, लेकिन लिखित परीक्षा देने नहीं गए। 18 साल की उम्र में प्रिंस ने पिता से साफ कहा था, अगर मैं 145-150 की रफ्तार से बॉल डालता हूं, तो मुझे कौन रोकेगा। गांव से IPL तक का संघर्ष और सफर प्रिंस दिल्ली के दरियापुर खुर्द गांव से आते हैं, जहां न क्रिकेट एकेडमी थी और न परिवार में किसी ने स्पोर्ट्स को करियर बनाया था। वे रोजाना 3 घंटे का सफर तय कर ट्रेनिंग के लिए उत्तर-पश्चिम दिल्ली जाते थे। मां संतोष ने इस संघर्ष में साथ दिया और पिता की नाराजगी के बावजूद हौसला बढ़ाती रहीं। 2 साल का बैन और करियर खत्म होने का डर साल 2019 में प्रिंस का करियर तब थम गया जब दिल्ली अंडर-19 के लिए उम्र छिपाने के आरोप में BCCI ने उन पर 2 साल का बैन लगाया। पिता को लगा कि अब खेल खत्म हो गया है, लेकिन लॉकडाउन के बाद 2023 में प्रिंस ने नेट बॉलर के तौर पर वापसी की।। DPL ने बदली किस्मत, 30 लाख में खरीदे गए प्रिंस के करियर का टर्निंग पॉइंट दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2024 बना। उन्होंने पुरानी दिल्ली-6 के लिए खेलते हुए टूर्नामेंट की पहली हैट्रिक ली और 13 विकेट चटकाए। इसी प्रदर्शन के दम पर नवंबर के ऑक्शन में लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 30 लाख रुपए में खरीदा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

सोनम बाजवा की फिल्म ‘पिट्ट सियापा’ पर संकट:चंडीगढ़ कोर्ट ने रिलीज पर लगाई फिलहाल रोक; कॉपीराइट विवाद के चलते हुई कार्रवाई

सोनम बाजवा की फिल्म ‘पिट्ट सियापा’ पर संकट:चंडीगढ़ कोर्ट ने रिलीज पर लगाई फिलहाल रोक; कॉपीराइट विवाद के चलते हुई कार्रवाई

चंडीगढ़ में अभिनेत्री सोनम बाजवा की आगामी फिल्म ‘पिट सियापा’ को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है। कॉपीराइट विवाद के चलते चंडीगढ़ कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले के अनुसार, लेखक राजन नंदन का दावा है कि फिल्म की कहानी उनकी लिखी हुई स्क्रिप्ट पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस स्क्रिप्ट को वर्ष 2021 में रजिस्टर कराया गया था। लेखक के अनुसार, 27 मार्च 2026 को जब फिल्म ‘पिट्ट सियापा’ का प्रोमो रिलीज हुआ, तब उन्हें पता चला कि फिल्म की कहानी उनकी स्क्रिप्ट से मिलती-जुलती है। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 को उन्होंने फिल्म से जुड़े पक्षों को लीगल नोटिस भेजा। अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी मामला बढ़ने पर लेखक ने चंडीगढ़ कोर्ट में कॉपीराइट को लेकर याचिका दायर की। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी, जहां कोर्ट आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा। -यह खबर अपडेट की जा रही है।