दमोह-जबलपुर हाईवे पर पिकअप ने बाइक को मारी टक्कर:चार घायलों में से तीन की हालत गंभीर, बलखंड माता मंदिर के पास हुआ हादसा

दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर शनिवार शाम करीब 6 बजे एक सड़क हादसा हो गया। नोहटा थाना क्षेत्र के बलखंड माता मंदिर के पास एक पिकअप वाहन ने दो बाइक सवारों को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में चार लोग घायल हो गए, जिनमें से तीन को गंभीर चोटें आई हैं। टक्कर के बाद पिकअप चालक मौके से फरार हो गया, जिससे हाईवे पर कुछ देर के लिए जाम लग गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने पिकअप वाहन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घायलों की पहचान भन्नू चक्रवर्ती, कीर्ति चक्रवर्ती और रानी चक्रवर्ती के रूप में हुई है। एक अन्य घायल का भी इलाज जारी है, जिसकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार, पिकअप दमोह से जबलपुर की ओर जा रही थी। वहीं, जलहरी ग्राम से चार लोग एक बाइक पर सवार होकर नोहटा साप्ताहिक बाजार जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वे शादी की खरीदारी के लिए निकले थे। बलखंड माता मंदिर के समीप पिकअप चालक ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक बाइक पिकअप के पहियों के नीचे आ गई, जबकि दूसरी बाइक उछलकर सड़क किनारे जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और नोहटा पुलिस टीम मौके पर पहुंची। नोहटा थाना प्रभारी ने तत्परता दिखाते हुए अपने वाहन और निजी साधनों से सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और फरार पिकअप चालक की तलाश की जा रही है।
4 दिन में 1.24 लाख लोग पहुंचे केदारनाथ:भैरवनाथ के कपाट खुलने के बाद धाम में सांयकालीन आरती शुरू, बद्रीनाथ में अब तक 37,884 श्रद्धालुओं पहुंचे

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने रफ्तार पकड़ ली है। धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब तक करीब 1 लाख 24 हजार 782 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं, जिससे यात्रा को लेकर उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दर्शन को सुचारू बनाने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को बिना लंबी प्रतीक्षा के आसानी से दर्शन हो पा रहे हैं। धाम में ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की गई है। साथ ही, श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें और निश्चिंत होकर यात्रा करें। केदारनाथ धाम में सांयकालीन आरती का शुभारंभ रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि पिछले 4 दिनों से यात्रा सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है और सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह व्यवस्थित हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी टीमें मुस्तैदी से कार्य कर रही हैं। साथ ही भैरवनाथ जी के कपाट खुलने के साथ ही आज से केदारनाथ धाम में सांयकालीन आरती का शुभारंभ हो गया है। जिससे श्रद्धालुओं को एक और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। धाम को बदनाम किया जाना बेहद निंदनीय केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि केदारनाथ के कपाट खुले हुए आज चौथा दिन है और आज भगवान भैरवनाथ के कपाट भी खुल गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं बिल्कुल ठीक हैं। प्रत्येक श्रद्धालु को दर्शन का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा- कुछ अराजक तत्वों की ओर से धाम को बदनाम किया जाना बेहद निंदनीय है। आज 31160 श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन यात्रियों के लिए टोकन व्यवस्था केदार सभा के वरिष्ठ सदस्य उमेश चंद्र पोस्ती ने कहा कि बीकेटीसी और जिला प्रशासन के नेतृत्व में अब तक करीब 1 लाख 24 हजार 782 लोगों ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से कई लोग असत्य और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से निश्चिंत होकर केदारनाथ धाम आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर दिन रात व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है। केदारनाथ में किसी तरह की अव्यवस्थाएं नहीं है। मंदिर में दर्शन के लिए यात्रियों के लिए टोकन व्यवस्था की गई है। जिससे जल्दी दर्शन हो रहे हैं। यात्रियों के लिए की गई है बेहतर व्यवस्था केदार सभा के सदस्य संजय तिवारी ने सभी श्रद्धालुओं का केदारनाथ में स्वागत करते हुए कहा कि अब बाबा भैरवनाथ के कपाट भी खुल गए हैं। उन्होंने कहा कि शासन, प्रशासन, केदार सभा और स्थानीय लोगों की ओर से केदारनाथ आने वाले यात्रियों के ठहरने, दर्शन और खाने के लिए बेहतर व्यवस्था की गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में केदारनाथ धाम के बारे में चल रही भ्रामक खबरों का खंडन करते हुए कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं की गई है। बद्रीनाथ धाम में अब तक 37,884 श्रद्धालुओं पहुंचे बद्रीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अप्रैल को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के साथ ही धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। जिला सूचना अधिकारी चमोली ने बताया कि कपाट खुलने के पहले तीन दिनों में कुल 37,884 श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए। पहले दिन 14,091 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि दूसरे दिन यह संख्या 10,686 रही। वहीं तीसरे दिन 13,107 श्रद्धालु दर्शन के लिए धाम पहुंचे।
किस विटामिन की कमी से हाथ-पैर में झुनझुनाहट होती है? हो सकता है नर्वस डैमेज

Last Updated:April 25, 2026, 19:36 IST What Causes Tingling In Hands: शरीर में होने वाली हर छोटी-बड़ी समस्या अंदर चल रही गड़बड़ी का नतीजा होती है. ऐसे में यदि आप अक्सर हाथ-पैर में झुनझुनाहट महसूस करते हैं तो इसे मामूली समझने की गलती न करें. ये विटामिन की कमी के कारण हो सकता है, जो नर्वस सिस्टम को भी डैमेज कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट लोग अक्सर अपने शरीर को एक हाई परफॉर्मेंस मशीन की तरह मानते हैं. सच भी है कि इंसानी शरीर बहुत कुछ कर सकता है, जैसे- ऊंचे पहाड़ चढ़ना, गहरे समुद्र में तैरना, या कठिन खेलों में हिस्सा लेना. लेकिन हर मशीन की तरह शरीर भी थक सकता है और खराब हो सकता है. इसलिए इसकी देखभाल जरूरी है. अगर इसे इसकी सीमा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, तो यह काम करना बंद कर सकता है या गंभीर समस्या हो सकती है. आजकल कई लोग हाथों और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और जलन जैसी समस्या महसूस कर रहे हैं. यह शरीर का संकेत है कि उसे मदद की जरूरत है. डॉक्टरों के अनुसार, इसे सिर्फ थकान या दिनभर की परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह विटामिन B12 की कमी का संकेत हो सकता है, जो नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. छिपे हुए संकेत को पहचानेंअक्सर लोग गलत तरीके से बैठने के कारण होने वाली झनझनाहट को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. यह इस बात का संकेत है कि आपकी नसों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है. नसों की सेहत के लिए सही पोषण जरूरी है. इसमें मेथाइलकोबालामिन खास भूमिका निभाता है, जो विटामिन B12 का सक्रिय रूप है. यह नसों के ऊपर मौजूद मायेलिन शीथ (सुरक्षात्मक परत) को मजबूत रखने में मदद करता है, जिससे नसों के सिग्नल सही तरीके से काम करते हैं. सिर्फ सामान्य भोजन से इस परत की पूरी मरम्मत नहीं हो पाती, इसलिए डॉक्टर की सलाह से विटामिन B-कॉम्प्लेक्स सप्लीमेंट लेने की जरूरत पड़ सकती है. इलाज और सुधारजो लोग रोज लंबी यात्रा करते हैं या ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं, उन्हें इन समस्याओं से ज्यादा परेशानी होती है. यह सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान करता है और रोजमर्रा के कामों में बाधा डालता है. ऐसे मामलों में सही इलाज जरूरी है, जिसमें कारण को ठीक करने के साथ-साथ लक्षणों से राहत भी दी जाती है. विटामिन बी क्यों जरूरी है?विटामिन B-कॉम्प्लेक्स की गोलियां शरीर के अंदर से नसों को मजबूत करने में मदद करती हैं. इसमें B12 के साथ B6, B3, B1, B2 और B5 जैसे विटामिन होते हैं, जो झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी को कम करने में सहायक हैं. इसके अलावा, हाथ-पैरों में दर्द या जलन से राहत के लिए खास क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसी क्रीम में कैप्साइसिन, मेंथॉल, यूकेलिप्टस और कपूर जैसे तत्व होते हैं, जो सीधे प्रभावित जगह पर असर डालकर राहत देते हैं। ध्यान रखेंहमारा शरीर छोटे-छोटे संकेतों के जरिए हमें लगातार कुछ बताता रहता है. अगर इन संकेतों पर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है. सही पोषण और लक्षणों का सही इलाज मिलकर नसों को मजबूत रखते हैं और आपको एक्टिव व आरामदायक जीवन जीने में मदद करते हैं.अगर झनझनाहट या सुन्नपन लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से जरूर जांच करानी चाहिए. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 25, 2026, 19:36 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
विपक्ष के वीटो का अंत? कैसे AAP के पलायन ने राज्यसभा का गणित बीजेपी और एनडीए के पक्ष में फिर से लिख दिया | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 19:31 IST इससे पहले, आप का 10 सदस्यीय गुट उच्च सदन में विधेयकों को रोकने की विपक्ष की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक था। चड्ढा, पाठक और मित्तल शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय गए और सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए। फ़ाइल छवि/एक्स शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्यों के सामूहिक दलबदल ने अरविंद केजरीवाल की विधायी उपस्थिति को कमजोर करने के अलावा और भी बहुत कुछ किया है; इसने उच्च सदन के शक्ति मानचित्र को मौलिक रूप से फिर से तैयार किया है। राघव चड्ढा और संदीप पाठक के नेतृत्व में, समूह ने अयोग्यता का सामना किए बिना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ विलय के लिए आवश्यक “जादुई” दो-तिहाई सीमा हासिल कर ली। संख्याएँ बताती हैं कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अंततः वह मायावी “संपूर्ण नियंत्रण” हासिल कर लिया है जो वह एक दशक से अधिक समय से चाह रहा था। AAP के पलायन के बाद बीजेपी/एनडीए कहां खड़ी है? शुक्रवार के पलायन से पहले, राज्यसभा में भाजपा की ताकत लगभग 106 सदस्यों की थी, जबकि व्यापक एनडीए लगभग 121 पर बैठी थी। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता को मिलाकर “आप सेवन” के स्पष्ट रूप से शामिल होने से भाजपा की व्यक्तिगत ताकत 113 हो गई है। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीए की सामूहिक संख्या बढ़कर 128 हो गई है। 243 सदस्यों की कार्यात्मक शक्ति वाले सदन में, बहुमत का निशान 122 है। 128 सीटों के साथ, एनडीए साधारण बहुमत के निशान से आसानी से दूर हो जाएगा। यह एक ऐतिहासिक बदलाव है; एकल-दलीय कांग्रेस के प्रभुत्व के युग के बाद पहली बार, सत्तारूढ़ गठबंधन को अब विवादास्पद सामान्य कानून पारित करने के लिए “तटस्थ” क्षेत्रीय दलों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है एनडीए? जबकि साधारण बहुमत दिन-प्रतिदिन के शासन के लिए एक बड़ी जीत है, भारतीय संसदीय शक्ति का “पवित्र ग्रेल” संवैधानिक संशोधनों के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत बना हुआ है। 245 के पूर्ण सदन के लिए, यह “सुपर-बहुमत” 164 वोटों पर है। आप के पलायन से मिले अप्रत्याशित लाभ के बावजूद भी एनडीए इस लक्ष्य से 36 सीटें पीछे रह जाएगी। इस अंतर का मतलब यह है कि हालांकि सरकार अब सामान्य विधेयकों को आसानी से पारित कर सकती है, लेकिन बड़े संरचनात्मक बदलावों – जैसे “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की रूपरेखा या परिसीमन प्रक्रिया का औपचारिक ओवरहाल – के लिए अभी भी भाजपा को गुटनिरपेक्ष दलों के साथ पुल बनाने या भविष्य के द्विवार्षिक चक्रों की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता होगी। यह विधायी परिदृश्य को कैसे बदलता है? इस 128 सीटों के प्रभुत्व का तत्काल प्रभाव विपक्षी भारत गुट के लिए “वीटो की मृत्यु” है। इससे पहले, आप का 10 सदस्यीय गुट उच्च सदन में विधेयकों को रोकने की विपक्ष की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक था। उस गुट के केवल तीन वफादारों तक सिमट जाने से, किसी विधेयक को चयन समिति में भेजने या करीबी विभाजन मत को ट्रिगर करने की विपक्ष की क्षमता लुप्त हो गई है। नरेंद्र मोदी सरकार के लिए, इस स्पष्ट बहुमत का मतलब उच्च-स्तरीय विधायी प्राथमिकताओं के लिए “हरी झंडी” होगा जो सामान्य कानून के अंतर्गत आती हैं। चाहे वह समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कार्यान्वयन हो या आयकर अधिनियम 2025 में और सुधार हो, सरकार अब अपने एजेंडे को “बुजुर्गों के घर” के माध्यम से उसी गति से आगे बढ़ा सकती है, जिसका वह लोकसभा में आनंद उठाती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 25 अप्रैल, 2026, 19:31 IST समाचार समझाने वाले विपक्ष के वीटो का अंत? कैसे आप के पलायन ने राज्यसभा के गणित को भाजपा और एनडीए के पक्ष में फिर से बना दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा समाचार(टी)आप(टी)राघव चड्ढा(टी)बीजेपी(टी)राज्यसभा(टी)आम आदमी पार्टी(टी)अरविंद केजरीवाल(टी)पंजाब(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)संदीप पाठक(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)अशोक मित्तल(टी)राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी(टी)राघव चड्ढा ट्विटर(टी)राघव चड्ढा किस पार्टी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा समाचार आज(टी)राघव चड्ढा(टी)आप राज्य सभा सदस्य(टी)राघव चड्ढा उम्र(टी)राघव चड्ढा फिल्में(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)हरभजन सिंह(टी)राघव चड्ढा(टी)क्या राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा बीजेपी(टी)राघव चड्ढा समाचार(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में(टी)राघव चड्ढा पार्टी(टी)राघव चड्ढा ताजा खबर(टी)राघव चड्ढा कौन सी पार्टी(टी)राघव चड्ढा की पत्नी(टी)परिणीति चोपड़ा
चावल से मोटापा नहीं, अब होगा वेट लॉस! ठंडे चावल का ये राज कर देगा हैरान, तेजी से हो रहा वायरल

Rice For Weight Loss: आजकल वजन कम करना हर दूसरे इंसान की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है. कोई डाइटिंग करता है, कोई जिम जाता है, तो कोई नए-नए घरेलू नुस्खे अपनाता रहता है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है-फ्रिज में रखे चावल खाकर वजन कम करने का दावा. सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, क्योंकि आमतौर पर लोग मानते हैं कि चावल खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन अब कहा जा रहा है कि अगर चावल को सही तरीके से पकाकर ठंडा किया जाए, तो वही चावल वजन घटाने में मदद कर सकते हैं. लोगों के मन में कई सवाल हैं-क्या ये सच में काम करता है? क्या ठंडे चावल खाने से कैलोरी कम हो जाती है? और सबसे जरूरी बात, इसे खाने का सही तरीका क्या है? अगर आप भी इन सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है. यहां हम आसान भाषा में समझेंगे कि फ्रिज में रखे चावल का वजन पर क्या असर पड़ता है और इसे कैसे खाना चाहिए ताकि आपको सही फायदा मिल सके. तेजी से वायरल हो रहा है ये तरीकाआजकल सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि बासी या ठंडे चावल खाने से वजन तेजी से कम हो सकता है. कई लोग अपने अनुभव भी शेयर कर रहे हैं, जिससे ये ट्रेंड और ज्यादा लोकप्रिय हो गया है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें कुछ सच्चाई जरूर है, लेकिन इसे चमत्कारिक उपाय मानना गलत होगा. फ्रिज में रखे चावल में ऐसा क्या बदलता है?जब आप ताजे चावल खाते हैं, तो उसमें मौजूद स्टार्च जल्दी पच जाता है और शरीर में शुगर तेजी से बढ़ाता है, लेकिन जब इन्हीं चावलों को पकाने के बाद ठंडा करके 12-24 घंटे के लिए फ्रिज में रखा जाता है, तो इसमें मौजूद स्टार्च का एक हिस्सा “रेसिस्टेंट स्टार्च” में बदल जाता है. ये रेसिस्टेंट स्टार्च शरीर में जल्दी पचता नहीं, जिससे कैलोरी का असर कम हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कम भूख लगने का राजरेसिस्टेंट स्टार्च फाइबर की तरह काम करता है. ये पेट में धीरे-धीरे पचता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. इसका सीधा फायदा ये होता है कि आपको बार-बार भूख नहीं लगती और आप कम खाते हैं. यही वजह है कि वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है. वजन घटाने में कैसे करता है मदद?ठंडे चावल खाने से शरीर में शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, जिससे इंसुलिन कम रिलीज होता है. इससे शरीर में फैट जमा होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इसके अलावा, ये गट हेल्थ को भी बेहतर बनाता है क्योंकि ये अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है. कुछ रिसर्च में भी पाया गया है कि रेसिस्टेंट स्टार्च लेने से लोगों का वजन धीरे-धीरे कम हुआ. फ्रिज वाले चावल खाने का सही तरीकाअगर आप सच में इसका फायदा लेना चाहते हैं, तो इसे सही तरीके से खाना जरूरी है. चावल सामान्य तरीके से पकाएं, पकने के बाद थोड़ा ठंडा होने दें, फिर 12-24 घंटे के लिए फ्रिज में रखें, अगले दिन हल्का गर्म करके खाएं, चाहें तो पकाते समय थोड़ा नारियल तेल भी मिला सकते हैं. ध्यान रखें कि इसे बहुत ज्यादा गर्म न करें, नहीं तो इसका फायदा कम हो सकता है. क्या सिर्फ इससे ही वजन घटेगा?साफ बात ये है कि सिर्फ ठंडे चावल खाने से वजन कम नहीं होगा. इसके साथ संतुलित डाइट और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी जरूरी है. अगर आप डायबिटीज या किसी और बीमारी से परेशान हैं, तो इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
पपीते का रायता रेसिपी: गरमा गरम तैयार करें पपीते का रायता, खाने में भी लागू और पेट को भी बेकार सा; नोट करें रेसिपी

25 अप्रैल 2026 को 19:10 IST पर अद्यतन किया गया पपीता रायता रेसिपी: गर्मी के मौसम में बार-बार कुछ टुकड़े, ठंडा और पचने में आसान खाने का मन होता है। ऐसे में पपीते का रायता एक बेहतरीन विकल्प है। पपीता न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह पेट को साफ रखने और पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। आइये जानते हैं इसे घर पर बनाने की आसान रेसिपी। अनुसरण करना : सामग्री: 1 पपीता, 1 कप ताजा दही, 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक, 1/4 छोटा चम्मच काला नमक, थोड़ा सा हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले दही को एक बाउल में अच्छी तरह से फेंट लें ताकि वह सफल हो जाए। अब कटे हुए पपीते के टुकड़े। छवि: फ्रीपिक फिर इसमें नमक, काला नमक, जीरा पाउडर और चीनी नोबेल महानुभाव से मिला लें। ऊपर से हरा धनिए की सजा। फ़्रिज़ में ठंडा होने के लिए 10-15 मिनट में रायते तैयार कर लीजिये. छवि: एआई पपीता पाचन को बेहतर बनाता है और पाचन से राहत देता है। दही शरीर को ठंडक देता है और पेट को शांत रखता है। यह रायता प्रभाव होता है, इसलिए गर्मी में भारीपन महसूस नहीं होता है। छवि: फ्रीपिक हमेशा पका हुआ और मीठा पपीता ही इस्तेमाल करें। अगर आपको स्वाद पसंद है, तो चीनी न दें। इसे पराठे, पुलाव या साधारण दाल-चावल के साथ खरीदा जा सकता है। छवि: फ्रीपिक पपीते का रायता स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का सबसे अच्छा मेल है। इसे बनाना बहुत ही आसान है, यह शरीर के लिए बहुत ही स्वादिष्ट है। इस हीट को जरूर खरीदें और अपने ग्राहकों को वैगन-अपार्टमेंट के लिए भेजें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित : समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 25 अप्रैल 2026 19:10 IST पर
खरगोन में दूल्हे ने बारात से पहले की स्व गणना:कुकडोल में शादी वाले घर पहुंची टीम, 30 अप्रैल तक चलेगा पहला चरण

भारत सरकार की जनगणना 2027 के पहले चरण में खरगोन जिले में स्व-गणना अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, शनिवार को गोगावा तहसील के कुकडोल गांव में एक अनोखा मामला सामने आया, जहाँ एक दूल्हे ने अपनी बारात निकलने से ठीक पहले स्व-गणना फॉर्म भरा। प्रगणक भुरला सोलंकी शादी वाले घर पहुंचे और दूल्हे रोहित धनगर से संपर्क किया। अपनी व्यस्तता के बावजूद, रोहित ने जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लिया और अपना स्व-गणना फॉर्म पूरा किया। टीम ने काम पूरा होने पर दूल्हे को उनके दाम्पत्य जीवन में प्रवेश की बधाई दी। रोहित की बारात रविवार को टोकलाय बड़वाह जाएगी। स्वगणना की दो अलग-अलग तस्वीरें 100 परिवारों की स्व-गणना की सुपरवाइजर बाजूसिंह मंडलोई और रूमसिंह खरते के नेतृत्व में इस क्षेत्र में 100 से अधिक परिवारों की स्व-गणना की गई है। प्रगणक टीम में हेमराज पाटीदार, माधुरी पांचाल, बबलू सोलंकी और अशोक पाटीदार सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। प्रगणक टीम मजदूरों और अन्य वंचित समूहों से भी संपर्क कर रही है। गोगावा में एक साधु को भी स्व-गणना के महत्व के बारे में समझाया गया। जनगणना के पहले चरण में यह स्व-गणना अभियान 30 अप्रैल तक जारी रहेगा।
भारत में दुनिया के तीसरे सबसे अधिक अरबपति हैं:रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक अरबपतियों की संख्या बढ़कर 313 हो जाएगी।

दुनियाभर में हर 24 घंटे में 89 नए लोग ‘सुपर-रिच’ क्लब में शामिल हो रहे हैं। ये सुपर-रिच लोग वे हैं जिनकी संपत्ति 3 करोड़ डॉलर (करीब 282 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। बीते पांच साल में ऐसे सुपर रिच की संख्या 162,191 बढ़ी है। नाइट फ्रैंक की वेल्थ रिपोर्ट 2026 के मुताबिक यह 2021 में 5.51.435 थी. जो 2026 तक बढ़कर 7,13,626 हो गई। भारत में भी यह तस्वीर उत्साहजनक है। यहां ऐसे बड़े अमीरों की संख्या 2021 में करीब 12,000 से बढ़कर 2026 में 19,877 हो गई, जो 63% की बढ़त है। 2031 तक यह संख्या 27% और बढ़कर 25,217 तक पहुंचने का अनुमान है। 207 अरबपतियों के साथ भारत फिलहाल तीसरे स्थान पर है। अनुमान है कि 2031 तक देश में अरबपति 51% बढ़कर 313 हो जाएंगे। हालांकि ग्लोबल अल्ट्रा-वेल्थ में भारत की हिस्सेदारी अभी मात्र 2.8% है, लेकिन इसकी रफ्तार लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच साल में इंडोनेशिया में अमीरों की संख्या सबसे ज्यादा 82% बढ़ेगी। सऊदी अरब और पोलैंड में यह वृद्धि 63% रहने का अनुमान है। वियतनाम में भी 59% की बढ़त के साथ नए वेल्थ हब उभर रहे हैं। दबदबा – 4 साल में बने नए सुरपरिच 41% अमेरिका में दुनिया के सुपर रिच लोगों में अमेरिका की हिस्सेदारी 2021 में 33% थी, जो बीते पांच साल में बढ़कर 2026 में 35% हो गई है। साल 2031 तक इनकी हिस्सेदारी 41% तक पहुंचने का अनुमान है। बीते 4 साल में बने सभी नए सुपर रिच में से 41% अकेले अमेरिका से हैं। अरबपति – एशिया-प्रशांत में 1,116; अमेरिका को पछाड़ा दुनिया में 3,110 अरबपति हैं। इसमें एशिया-प्रशांत 1,116 के साथ पहले स्थान पर है। इसने 965 अरबपतियों वाले उत्तरी अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। पांच साल में सऊदी अरब में अरबपतियों की संख्या सबसे तेजी से 183% बढ़ेगी। इसके बाद पोलैंड में 123%. स्वीडन में 81% बढेगी।
मासूम बच्चों से मां छिनी, ₹5.65 करोड़ मुआवजे का दावा:इंदौर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर को कार से कुचलने के मामले में अब दोहरी कानूनी लड़ाई

इंदौर के लसूडिया क्षेत्र में इंफोसिस की इंजीनियर शंपा पाठक (पांडे) को कार से कुचलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने आरोपी मोहित चौधरी और उसके पिता कुलदीप चौधरी के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। अब पीड़ित परिवार ने 5.65 करोड़ रुपए का मुआवजा दावा पेश किया है। यह घटना 26 मार्च की रात शिव वाटिका टाउनशिप स्थित सागरश्री एन्क्लेव में हुई थी। पेंटहाउस को किराए पर दिए जाने को लेकर रहवासियों में पहले से असंतोष था। घटना वाली रात फ्लैट की लाइट बंद करने को लेकर विवाद बढ़ गया। इसी दौरान कुलदीप चौधरी का बेटा मोहित चौधरी कार लेकर पहुंचा और पहले एक महिला कर्मचारी को टक्कर मारी, इसके बाद शंपा पाठक को कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल शंपा पाठक को तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पूरी घटना बिल्डिंग के सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई, जिसके बाद पुलिस ने डीवीआर जब्त कर जांच शुरू की। इसमें सामने आए सीसीटीवी कैमरों के फुटेज रोंगटे खड़े करने वाले थे। हिट एंड रन नहीं, जानबूझकर टक्कर के आरोप पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। शुरुआत में यह घटना हिट एंड रन के रूप में सामने आई थी, लेकिन जांच में जानबूझकर टक्कर मारने के आरोप भी सामने आए हैं। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ शंपा पाठक हाल ही में परिवार के साथ यहां शिफ्ट हुई थीं। उनके परिवार में दो छोटे बच्चे और माता-पिता हैं। 7 वर्षीय बेटा श्रेयांश (कक्षा तीसरी) और 10 वर्षीय बेटा श्रेष्ठ (कक्षा पांचवीं) हैं। हादसे के बाद से पति सौरभ भी गहरे सदमे में हैं। बीमा कंपनी मुआवजा देने से बच नहीं सकती पीड़ित परिवार की ओर से अब आरोपी मोहित चौधरी, वाहन मालिक और बीमा कंपनी के खिलाफ जिला कोर्ट में 5.65 करोड़ रुपए का दावा प्रस्तुत किया गया है। सीनियर एडवोकेट अरुण त्रिपाठी ने बताया कि भले ही यह मामला हत्या का हो, लेकिन यदि वाहन के उपयोग के दौरान दुर्घटना हुई है और वाहन बीमित है, तो बीमा कंपनी मुआवजा देने से बच नहीं सकती। यह आपराधिक मामला अलग चलेगा, जबकि मुआवजा सिविल दायित्व के तहत तय होगा। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दरअसल इस केस में दो अलग-अलग पहलू हो गए हैं। इसमें एक आपराधिक मामला है। जिसमें आरोपी के खिलाफ सजा दिलाने जाने का केस चलेगा। दूसरा मुआवजा दावा, जिसमें बीमा कंपनी व वाहन मालिक, कार चालक की जिम्मेदार ठहराते हुए 5.68 करोड़ दिलाने की मांग की गई है। कानूनविदों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि वाहन के उपयोग से हुई मृत्यु के मामलों में बीमा कंपनी की जवाबदेही तय होती है। यह मामला केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक और कानूनी सवालों से जुड़ा है। एक ओर जहां न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपियों की सजा तय होगी, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की लड़ाई भी अहम बन गई है।
साउथ अफ्रीकी बॉलर एनगिडी के सिर में चोट:IPL मैच में कैच लेते वक्त गिरे, एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया; 15 मिनट खेल रुका

दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच शनिवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे मुकाबले के दौरान एक गंभीर हादसा हो गया। दिल्ली के तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी कैच लेने की कोशिश में पीछे की ओर गिर पड़े और उनका सिर जोर से जमीन से टकराया। चोट इतनी गंभीर थी कि खेल करीब 15 मिनट तक रुका रहा। उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। यह घटना पंजाब की पारी के तीसरे ओवर में हुई। अक्षर पटेल की फुल लेंथ गेंद पर बल्लेबाज प्रियांश आर्या ने हवा में शॉट खेला। गेंद मिड-ऑफ के ऊपर गई, जहां से एनगिडी तेजी से पीछे भागे। कैच जज करने में हल्की सी चूक हुई और उनका बैलेंस बिगड़ गया। वे पीछे की ओर गिरते हुए सीधे सिर के बल जमीन पर गिरे। टकराव काफी तेज था। गिरते ही उन्होंने सिर पकड़ लिया और मैदान पर ही लेटे रहे। एनगिडी की चोट, 5 PHOTOS पहले स्ट्रेचर, फिर डॉक्टर और एंबुलेंस घटना के तुरंत बाद मैदान पर पहले स्ट्रेचर लाया गया। इसके बाद मेडिकल टीम दौड़कर पहुंची। डॉक्टरों ने एनगिडी से बात की। शुरुआती कुछ क्षणों में वे रिस्पॉन्ड करते हुए नजर आए, जिससे थोड़ी राहत की स्थिति बनी। हालांकि, कुछ ही देर में स्थिति बदलती दिखी। एनगिडी की हालत को लेकर चिंता बढ़ने लगी। मेडिकल स्टाफ ने अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उन्हें स्थिर रखने की कोशिश की। करीब 15 मिनट तक खेल रुका पूरे घटनाक्रम के दौरान मैच करीब 15 मिनट तक रुका रहा। खिलाड़ी, अंपायर और सपोर्ट स्टाफ सभी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। स्थिति गंभीर लगने पर मैदान पर एंबुलेंस बुलाई गई। इसके बाद एनगिडी को स्ट्रेचर पर ले जाकर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया और तुरंत अस्पताल रवाना किया गया। जेंटल जायंट के नाम से जाने जाते हैं एनगिडी लुंगी एनगिडी का पूरा नाम लुंगिसानी ट्रू-मैन एंगिडी है। उनका जन्म 29 मार्च 1996 को साउथ अफ्रीका के डरबन में हुआ था। वह अपनी लंबी कद-काठी और शांत स्वभाव के कारण ‘जेंटल जायंट’ के नाम से जाने जाते हैं। एनगिडी का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। उनकी मां घरेलू कामगार थीं और पिता मेंटेनेंस वर्कर थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने रग्बी में भी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने हिल्टन कॉलेज से स्कॉलरशिप पर पढ़ाई की और आगे चलकर प्रिटोरिया यूनिवर्सिटी में इंडस्ट्रियल सोशियोलॉजी में बैचलर डिग्री की पढ़ाई भी की। भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया एनगिडी दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं, जो 140 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी स्लोअर बॉल खास पहचान है, जो डेथ ओवर्स में बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल पैदा करती है। उन्होंने 2018 में भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और पहली ही पारी में 6 विकेट लेकर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर तेजी से आगे बढ़ा। 2020 में उन्हें साउथ अफ्रीका का बेस्ट वनडे और टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेटर चुना गया। वे 2025 में ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतने वाली साउथ अफ्रीकी टीम का हिस्सा भी रहे। IPL में डेथ ओवर बॉलिंग के लिए पहचान एनगिडी IPL में अपनी डेथ ओवर बॉलिंग और नियंत्रण के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी स्लोअर गेंदों को हिट करना बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल होता है। वे पहले भी लीग में कई अहम स्पेल डाल चुके हैं और दिल्ली कैपिटल्स के पेस अटैक का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। क्रिकेट में सिर की चोट को लेकर सख्त नियम क्रिकेट में सिर पर लगने वाली चोट को बेहद गंभीर माना जाता है। ऐसे मामलों में कंशन का खतरा रहता है, जो खिलाड़ी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ICC ने इसको लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय कर रखे हैं। किसी भी खिलाड़ी को सिर पर चोट लगने पर तुरंत मेडिकल जांच और जरूरत पड़ने पर मैदान से बाहर किया जाता है। एनगिडी की मौजूदा स्थिति फिलहाल एनगिडी की स्थिति को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। शुरुआती तौर पर उनका डॉक्टरों को रिस्पॉन्ड करना सकारात्मक संकेत था, लेकिन बाद में एंबुलेंस बुलाना स्थिति की गंभीरता की ओर इशारा करता है। दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह घटना खेल से बड़ा झटका हो सकती है, क्योंकि एनगिडी टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल हैं। दिल्ली ने बनाया सीजन का सबसे बड़ा स्कोर इससे पहले मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 2 विकेट पर 264 रन बनाए। यह इस सीजन का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है। दिल्ली के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पंजाब के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। लक्ष्य का पीछा कर रही पंजाब टीम की पारी की शुरुआत ही थी, जब यह हादसा हुआ।








