कुर्मासन योग से कमर दर्द, कब्ज और तनाव में कैसे मिलेगी राहत

Last Updated:April 26, 2026, 23:52 IST Turtle Pose Benefits: ज्यादा दवा खाना कुछ देर के लिए आपको समस्या से राहत दिला सकता है, लेकिन लंबे समय में शरीर को अंदर से खोखला करता है. ऐसे में योगासन बहुत कारगर साबित होते हैं. यदि आप तनाव,कब्ज, कमर दर्द से परेशान रहते हैं, तो कुर्मासन आपके लिए जादू का काम कर सकता है. ख़बरें फटाफट आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को तनाव, चिंता, कमर दर्द, कब्ज और थकान जैसी समस्याएं तेजी से घेर रही हैं. लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि इसका बड़ा कारण है. ऐसे में योग एक आसान और असरदार उपाय बनकर सामने आता है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है. योग के कई आसनों में कुर्मासन एक खास आसन है, जिसे अंग्रेजी में टॉरटॉइज पोज या कछुआ मुद्रा कहा जाता है. ‘कुर्म’ का मतलब कछुआ और ‘आसन’ का मतलब मुद्रा होता है. इस आसन में शरीर की स्थिति कछुए जैसी दिखाई देती है और यह मन को शांत करने में मदद करता है. कैसे करें कुर्मासनसबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाएं. अब पैरों को थोड़ा दूर करें और घुटनों को हल्का मोड़ लें. धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे झुकाएं और हाथों को घुटनों के नीचे से बाहर निकालें. फिर शरीर को और नीचे ले जाएं और छाती व ठुड्डी को जमीन के करीब लाने की कोशिश करें. कुछ देर इसी स्थिति में रहें और सामान्य सांस लेते रहें. इसके बाद धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं. कुर्मासन के फायदेयह आसन पीठ और रीढ़ की हड्डी को खींचता है, जिससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है. जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह खासतौर पर फायदेमंद है क्योंकि यह कमर और पीठ की जकड़न को कम करता है. नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. यह पाचन तंत्र के लिए भी अच्छा माना जाता है. पेट पर दबाव पड़ने से पाचन सुधरता है और गैस, कब्ज व अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. साथ ही यह पैंक्रियास को सक्रिय करता है, जिससे इंसुलिन संतुलन बेहतर हो सकता है और डायबिटीज के मरीजों को भी लाभ मिल सकता है. मानसिक लाभकुर्मासन मन को शांत करता है और तनाव कम करने में मदद करता है. यह एकाग्रता बढ़ाता है और मानसिक दबाव को कम करता है, जिससे व्यक्ति अधिक शांत और संतुलित महसूस करता है. सावधानियांअगर किसी को घुटनों, कमर, कंधे या रीढ़ में दर्द है, तो यह आसन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें. गर्भवती महिलाएं और गठिया या सायटिका के मरीज भी इसे करने से बचें. नियमित और सही तरीके से किया गया कुर्मासन शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 26, 2026, 23:52 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
मछली का 1 टुकड़ा भी साबित हो सकता है जहर, इन 6 लोगों को नहीं खानी चाहिए फिश से बनी कोई डिश

Last Updated:April 26, 2026, 23:31 IST Who Should Avoid Fish: इसमें कोई दोराय नहीं कि फिश कई मायनों में सेहत के लिए फायदेमंद साबित होती है. लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. यदि आप इन 6 कैटेगरी में आते हैं, तो फिश से बनी डिश खाना आपको अस्पताल भी पहुंचा सकता है. ख़बरें फटाफट Who Should Avoid Fish: मछली खाना बहुत सारे लोगों को पसंद होता है. ऐसे राज्य जो नदी किनारे बसे हुए हैं, वहां मछली खाने की थाली का अहम हिस्सा होती है. ऐसे में क्रिस्पी तंदूरी फिश, मसालेदार गोअन करी, बटर फिश फ्राई और हल्की बंगाली माछेर झोल तक भारत में मछली से बनने वाले कई तरह के डिश फेमस है. मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो दिल, दिमाग और त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन हर कोई इसे सुरक्षित तरीके से नहीं खा सकता. मछली में मौजूद पारा , गंदगी और एलर्जी जैसी चीजें इसे हेल्दी खाने से खतरे में बदल सकती हैं. इसलिए कुछ लोगों को विशेषतौर पर इसे खाने से बचना चाहिए. किन लोगों को मछली खाने में सावधानी रखनी चाहिए मां बनने वाली महिलाएंगर्भावस्था में मरकरी बच्चे के दिमाग के विकास पर असर डाल सकती है. इसलिए शार्क, स्वॉर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी मछलियों से बचना चाहिए. वहीं सैल्मन, झींगा और हल्की टूना जैसी कम मरकरी वाली मछलियां सुरक्षित होती हैं. स्तनपान कराने वाली मांएंमरकरी दूध के जरिए बच्चे तक पहुंच सकती है और उसके नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है. इसलिए सैल्मन, श्रिम्प और कैटफिश जैसी कम मरकरी वाली मछलियां बेहतर विकल्प हैं. छोटे बच्चे11 साल से कम उम्र के बच्चों पर मरकरी का असर ज्यादा होता है. इससे उनकी सोचने-समझने की क्षमता और मूवमेंट प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में टिलापिया, सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियां देना बेहतर है. एलर्जी वाले लोगजिन्हें सीफूड से एलर्जी है, उनके लिए मछली खतरनाक हो सकती है. इससे रैश, सूजन या गंभीर रिएक्शन हो सकता है. ऐसे लोग अलसी, चिया सीड्स और अखरोट जैसे विकल्प से ओमेगा-3 ले सकते हैं. कमजोर इम्युनिटी वाले लोगजिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें कच्ची या अधपकी मछली से इंफेक्शन का खतरा होता है. इसलिए मछली को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए. कुछ दवाइयां लेने वाले लोगखासकर ब्लड थिनर लेने वालों को मछली सीमित मात्रा में खानी चाहिए, क्योंकि ज्यादा ओमेगा-3 से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर की सलाह जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 26, 2026, 23:31 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
फर्श सफाई युक्तियाँ: गर्मी में चिपक गया है सामान? पोचे के पानी में एलोवेरा फैब्रिक से बनी ये चीजें, कीड-मैकोडर्स की भी होगी छुट्टी; आख़िर चमाचम

नमक का प्रयोग: पोचे के पानी में 1-2 मार्मिक नमक। इससे ई-कॉमर्स की बिक्री ख़त्म हो गई है। छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े दूर रहते हैं। छवि: फ्रीपिक टेम्पलेट का रस: एक बाल्टी पानी में 1 नींबू का रस स्टॉक। ग्रैजुएट से सुपरमार्केट हटती है। घर में ताजगी बनी रहती है। प्रभाव सा चमकदार लुक भी है। छवि: फ्रीपिक सफेद सिरका: 2-3 बड़े सफेद सिरका पानी में पूरे पोछा। कटियारिया और जम्स खत्म हो गए हैं। ई-कॉमर्स की सुविधा दूर है। टाइल्स और मार्बल शाइनिंग शामिल हैं। छवि: फ्रीपिक फिटकरी: डीएच सी फिटकरी पानी में नासा लें। यह कीटाणुनाशक का काम करता है। कीड़े-मकौड़ों को दूर रखने में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक नीम का पानी: नीमा की नाव को स्टॉक करके उसका पानी ठंडा कर लें और पोचे में पकड़ लें। मच्छर, चींटीयां और कीटभक्षी दूर रहते हैं। घर में साइंटिस्ट आती है। छवि: कैनवा फ्लोरेंटाइल + लिटिल सा बेस्ट सोडा: अपने रोज़ के फूलों की नावों में एक चुटकी सैंडविच स्टॉक्स। जिद्दी कपड़ा आसानी से साफ होता है। केमिस्ट्री ज्यादातर चमकदार दिखती है। छवि: फ्रीपिक पोछा हमेशा साफ पानी से धोकर ही इस्तेमाल करें। बहुत ज्यादा पानी का इस्तेमाल न करें, इससे चिपचिपाहट बढ़ सकती है। दिन में कम से कम एक बार पूछा जरूर। छवि: फ्रीपिक इन आसान घरेलू उपायों को अपनाकर आप गर्मियों में भी अपने घर के सामान को साफ, चमकीला और मोटा मुक्त रख सकते हैं। अब न चिपटहट की परेशानी होगी और न ही कीड़ों-मकौड़ों का झंझट। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)घरेलू उपचार(टी)गंदे फर्श की सफाई(टी)गंदे फर्श(टी)फर्श की सफाई के टिप्स(टी)कीडे मकोडे(टी)सफाई के टिप्स(टी)घर का बना फर्श क्लीनर(टी)गंदा की सफाई(टी)चिपचिपा फर्श
आम खाकर पानी पीना कितना घातक? 99% लोग करते हैं ये खतरनाक गलती – News18 हिंदी

X Health tips : आम खाकर पानी पीना कितना घातक? 99% लोग करते हैं ये गलती ऋषिकेश. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की खेप सजने लगेगी. आपने भी बचपन में एक बात जरूर सुनी होगी है कि आम खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ये सेहत के लिए ठीक नहीं. इसके पीछे एक वैज्ञानिक सोच छिपी हुई है. लोकल 18 से ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि आम को गरम तासीर वाला फल माना जाता है. जब हम आम खाते हैं, तो शरीर उसे पचाने के लिए काम करना शुरू कर देता है. ऐसे में अगर हम तुरंत ठंडा पानी पी लेते हैं, तो यह पाचन क्रिया पर असर डाल सकता है. हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम खाने के बाद पानी पीना पूरी तरह गलत है.
‘दंडनीय अपराध’: SC निकाय ने ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों पर ममता बनर्जी को नोटिस भेजा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 अप्रैल, 2026, 22:53 IST एनसीएससी ने टिप्पणियों को “न केवल आपत्तिजनक बल्कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(एस) के तहत दंडनीय अपराध भी बताया।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुरारी में। (आईएएनएस) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अंतिम चरण के मतदान से कुछ ही दिन पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) की जांच के दायरे में आ गई हैं। स्वत: संज्ञान लेते हुए एनसीएससी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट की मांग की। आयोग ने कहा कि अपमानजनक संदर्भ में जातिवादी गाली का कथित इस्तेमाल अनुसूचित जाति का अपमान है। टिप्पणी को “शर्मनाक” बताते हुए एनसीएससी ने चेतावनी दी कि इस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(एस) के तहत प्रावधान लागू हो सकते हैं। आयोग ने एक वीडियो प्रसारण का हवाला दिया “कोलकाता टीवीरविवार को, जिसमें कथित तौर पर बनर्जी को कोलकाता के चौरंगी इलाके में चल रहे विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार के लिए प्रचार करते हुए एक हालिया रैली के दौरान टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। यह भी पढ़ें: ‘हमें झाल नहीं मिली, लेकिन आपको मिलेगी’: झालमुड़ी वीडियो को लेकर ममता बनर्जी ने पीएम पर साधा निशाना अपने बयान में, एनसीएससी ने टिप्पणियों को “न केवल आपत्तिजनक, बल्कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(एस) के तहत दंडनीय अपराध भी बताया।” “23 अप्रैल, 2026 को, एक टीएमसी उम्मीदवार के समर्थन में कोलकाता के चौरंगी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, ममता बनर्जी ने अपनी सरकार द्वारा किए गए कार्यों को समझाते हुए, जनबाजार क्षेत्र में एससी समुदाय के प्रति अपमानजनक माने जाने वाले शब्द का इस्तेमाल किया।” यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में आया है, जहां अंतिम मतदान चरण से पहले प्रचार जोरों पर है। यह मुद्दा बढ़ने की संभावना है, विपक्षी दल, विशेष रूप से भाजपा, सत्तारूढ़ टीएमसी पर अपने हमले तेज करने के लिए तैयार है। इससे पहले मार्च में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक रूप से दो मुद्दों पर नाराजगी व्यक्त की थी: उनके कार्यक्रम के लिए अंतिम समय में स्थान में बदलाव और राष्ट्रपति की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान उनकी अगवानी के लिए ममता बनर्जी या उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति। बनर्जी ने तुरंत पलटवार करते हुए मुर्मू पर ”भाजपा की सलाह पर” बोलने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सचमुच सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।” उन्होंने कहा कि मुर्मू आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं, इस बात को उन्होंने बार-बार रेखांकित किया है। 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए पहले चरण का चुनाव गुरुवार को हुआ, दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 26 अप्रैल, 2026, 22:53 IST समाचार राजनीति ‘दंडनीय अपराध’: SC निकाय ने ‘अपमानजनक’ टिप्पणी पर ममता बनर्जी को नोटिस भेजा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी जातिवादी टिप्पणी(टी)एनसीएससी नोटिस पश्चिम बंगाल(टी)अनुसूचित जाति अपमान(टी)एससी एसटी अत्याचार अधिनियम(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)चौरंगी चुनाव रैली(टी)कोलकाता टीवी वीडियो विवाद(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी राजनीति
टिंडा चना सब्जी रेसिपी: घर में बनी टिंडे चना की टेस्टी सब्जी, बच्चों को भी आएगी पसंद; नोट बनाने की रेसिपी

सामग्री: 500 ग्राम टिंडा, 1 कप काले चने, 1 प्याज, 2 टमाटर, 2 हरी मिर्च, 1 अदरक-लहसुन पेस्ट, 2 अदरक तेल, 1 अदरक लहसुन पेस्ट, 2 अदरक लहसुन पेस्ट, 1 अदरक लहसुन पेस्ट, 1 धनिया हल्दी, 1 धनिया पाउडर, ½ धनिया पाउडर, ½ अदरक लहसुन पेस्ट, नमक, हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले चटनी में तेल गर्म करें और जीरा डालें। जीरा चटकने लगे तो समन्वित स्टोमन लोंबियाज होने तक। अब अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्ची 1 मिनट तक का समय। छवि: फ्रीपिक इसके बाद टमाटर और मसाले जैसे हल्दी, धनिया, लाल मिर्च, नमक बड़े पैमाने पर अच्छी तरह से भून लें। जब मसाला तेल छोड़ने लगे, तब कटे हुए टिंडे शामिल होंगे और 5-7 मिनट तक का समय लगेगा। छवि: फ्रीपिक अबे मसाले में चने डाले और थोड़ा पानी मिलाकर 10-15 मिनट तक मसाला तैयार कर लें। जब टिंडे नैयर हो जाएं, तो ऊपर से गर्म मसाला डालें और अच्छी तरह से डालें। फाइनल में हरा धनिया मोनोमॅला गैस बंद कर दिया। छवि: एआई गरमा-गरम टिंडा-चना की सब्जी को रोटी, पराठा या चावल के साथ गरमा गरम परोसें. इसका स्वाद म्यूजिक और बहुत ही लाजवाब होता है। छवि: एआई अगर बच्चे बना रहे हैं तो काली मिर्च कम रखें। आप इसमें थोड़ा सा घी का स्वाद और बढ़ा सकते हैं। पिरामिड तो इसमें थोड़ा सा अमचूर पाउडर स्टेकपेन भी दे सकते हैं। छवि: फ्रीपिक इस आसान रेसिपी से आप घर पर ही एक मसाले और टेस्टी डिश बना सकते हैं, जो सभी को पसंद आएगी। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)टिंडा चने की सब्जी(टी)टिंडा चना सब्जी(टी)टिंडे की सब्जी(टी)काले चने की रेसिपी(टी)गर्मी की रेसिपी(टी)टिंडा रेसिपी(टी)टिंडे काले चने की सब्जी रेसिपी(टी)काले चने खाने के फायदे
पन्ना भाजपा नेत्री ने सोशल मीडिया यूजर पर FIR कराई:बोलीं- पोस्ट में अमित शाह के लिए अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया था

पन्ना जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने एक युवक पर एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई भाजपा की जिला उपाध्यक्ष की शिकायत के बाद की गई है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष पूनम यादव ने रविवार, 26 अप्रैल को कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि ‘एक्स’ पर ‘सचिन मौर्य’ (@Sachinsamrat89) नाम के हैंडल से गृह मंत्री अमित शाह के लिए अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। शिकायत के मुताबिक, इस पोस्ट में एक महिला की तस्वीर का उपयोग कर छवि खराब करने की कोशिश भी की गई, जिससे कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। दर्ज की गई धाराएं पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सचिन मौर्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है- धारा 352: सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उकसाना। धारा 353(2): अफवाह फैलाना। धारा 356(1): मानहानि। धारा 196(1): विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना। जांच और पुलिस कार्रवाई कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की साइबर सेल टीम आरोपी की लोकेशन ट्रैक करने और उसकी पहचान पुख्ता करने में जुटी है, ताकि जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जा सके। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियों के जरिए समाज में वैमनस्य फैलाने की साजिश की जा रही है।
भोपाल के खेत में मिले गाय के अवशेष:किसान बोला- घर के पास खुले में बंधी थी, सुबह खाल और पैर मिला

भोपाल के सुखी सेवनिया इलाके में गाय के अवशेष मिले हैं। घटना के बाद पुलिस ने मौके का मुआयना कर जांच शुरू कर दी है और किसान की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। घटना से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है। पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए आसपास के क्षेत्रों में जांच तेज कर दी है और हर एंगल से पड़ताल की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ा जा सके। टीआई रामबाबू चौधरी के मुताबिक, फरियादी कालू राम मीना ग्राम मुगलिया कोट के निवासी हैं और खेती-किसानी करते हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार रात करीब 10 बजे वह अपनी गाय और बछिया को घर से लगभग 200 मीटर दूर बांधकर सो गए थे। रविवार सुबह उठने पर दोनों पशु वहां नहीं मिले। आसपास तलाश करने पर पास के खेत में उनकी सींग, खाल और अन्य अवशेष पड़े मिले। किसान ने तुरंत थाने पहुंचकर घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ गौकशी का प्रकरण दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी के अनुसार, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि जल्द आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
शादी का टेंट उड़कर फोरलेन पर पहुंचा:धार में तेज आंधी-बारिश से मौसम बदला, हाईवे पर गिरा टेंट

धार जिले के घटाबिल्लौद में रविवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। दिनभर की भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक शादी समारोह का टेंट उड़कर हाईवे पर आ गिरा। तेज आंधी के कारण शादी समारोह का एक हिस्सा उखड़कर सीधे हाईवे पर जा गिरा। घटना के समय वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में टेंट का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर पड़ा देखा जा सकता है। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं मिली है। यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि टेंट किस स्थान से उड़कर हाईवे तक पहुंचा था। लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद आए इस मौसम बदलाव से लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को भी प्रभावित किया है।
90% लोग Diet Coke और Coke Zero को समझते हैं एक जैसा, असली फर्क जानकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:April 26, 2026, 22:11 IST Diet coke vs Coke zero: डाइट कोक और कोक जीरो को कई लोग एक ही ड्रिंक समझते हैं, क्योंकि दोनों शुगर-फ्री हैं. लेकिन स्वाद से लेकर फॉर्मूला तक, इन दोनों के बीच कई बड़े फर्क हैं जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. शुगर-फ्री कोल्ड ड्रिंक. अगर आप बाजार में शुगर-फ्री कोल्ड ड्रिंक खरीदते हैं, तो आपने डाइट कोक और कोक ज़ीरो दोनों के नाम जरूर सुने होंगे. देखने में दोनों लगभग एक जैसे लगते हैं, क्योंकि दोनों में चीनी नहीं होती और कैलोरी भी बहुत कम या न के बराबर होती है. इसी वजह से कई लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं. लेकिन असल में इन दोनों ड्रिंक्स के स्वाद, फॉर्मूला, टारगेट ग्राहकों और इतिहास में बड़ा फर्क है. अगर आप सोचते हैं कि डाइट कोक और कोक जीरो सिर्फ पैकेजिंग में अलग हैं, तो यहां आप पूरी तरह गलत हैं, आइए जानते हैं कैसे… डाइट कोक और कोक जीरो के बीच सबसे बड़ा फर्क इनके स्वाद में माना जाता है. कोक ज़ीरो को इस तरह तैयार किया गया है कि उसका स्वाद नॉर्मल कोला की तरह लगे यानी अगर कोई व्यक्ति ओरिजिनल कोक का स्वाद पसंद करता है लेकिन चीनी नहीं चाहता, तो वह कोक जीरो खरीद सकता है. दूसरी तरफ डाइट कोक का स्वाद हल्का और अलग ब्लेंड वाला होता है. इसका टेस्ट पारंपरिक कोक जैसा नहीं, बल्कि थोड़ा अलग और कम भारी महसूस होता है. यही कारण है कि कई लोग इन दोनों में से सिर्फ एक को पसंद करते हैं. दोनों में चीनी नहीं, फिर भी अलग क्यों?दोनों ड्रिंक्स शुगर-फ्री और लो कैलोरी कैटेगरी में आती हैं, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले फ्लेवरिंग सिस्टम और स्वीटनर कॉम्बिनेशन अलग हो सकते हैं. यही वजह है कि बिना चीनी होने के बावजूद दोनों का स्वाद एक जैसा नहीं लगता. कंपनी ने इन्हें अलग-अलग पसंद रखने वाले ग्राहकों के लिए बनाया था, ताकि हर तरह के लोगों को विकल्प मिल सके. कौन पहले आया था बाजार में?डाइट कोक को कोका-कोला ने 1983 में लॉन्च किया था. यह कंपनी का पहला शुगर-फ्री कोला ड्रिंक था. उस समय हेल्थ कॉन्शियस लोगों और कम कैलोरी इनटेक वालों के लिए बेस्ट था. बाद में 2000 के दशक में कंपनी ने कोक जीरो को मार्केट में इंट्रोड्यूस किया, जिसे उन लोगों के लिए बनाया गया जो बिना कैलोरी के भी ओरिजिनल कोक जैसा स्वाद चाहते थे. बाद में इसका नया रूप कोक जीरो शुगर नाम से सामने आया. अलग ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाए गए प्रोडक्टडाइट कोक को शुरू में उन लोगों के लिए लोकप्रिय बनाया गया जो कैलोरी कम करना चाहते थे और हल्का स्वाद पसंद करते थे. वहीं कोक जीरो को ऐसे ग्राहकों के लिए डिजाइन किया गया जो शुगर नहीं चाहते, लेकिन टेस्ट में क्लासिक कोक जैसा अनुभव चाहते हैं. आसान भाषा में कहें तो डाइट कोक स्वाद में अलग पहचान रखती है, जबकि कोक जीरो पूराने कोक की तरह ही टेस्ट करता है. चूंकि, दोनों शुगर-फ्री ड्रिंक हैं, तो आपको फर्क साफ महसूस होगा. जो लोग डाइट कोक के आदी हैं, उन्हें कोक जीरो ज्यादा मीठा या भारी लग सकता है. वहीं ओरिजिनल कोक पसंद करने वालों को कोक जीरो ज्यादा बेहतर लग सकता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 26, 2026, 22:11 IST









