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मछली का 1 टुकड़ा भी साबित हो सकता है जहर, इन 6 लोगों को नहीं खानी चाहिए फिश से बनी कोई डिश

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Who Should Avoid Fish: इसमें कोई दोराय नहीं कि फिश कई मायनों में सेहत के लिए फायदेमंद साबित होती है. लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. यदि आप इन 6 कैटेगरी में आते हैं, तो फिश से बनी डिश खाना आपको अस्पताल भी पहुंचा सकता है.

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Who Should Avoid Fish: मछली खाना बहुत सारे लोगों को पसंद होता है. ऐसे राज्य जो नदी किनारे बसे हुए हैं, वहां मछली खाने की थाली का अहम हिस्सा होती है. ऐसे में क्रिस्पी तंदूरी फिश, मसालेदार गोअन करी, बटर फिश फ्राई और हल्की बंगाली माछेर झोल तक भारत में मछली से बनने वाले कई तरह के डिश फेमस है.

मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो दिल, दिमाग और त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन हर कोई इसे सुरक्षित तरीके से नहीं खा सकता. मछली में मौजूद पारा , गंदगी और एलर्जी जैसी चीजें इसे हेल्दी खाने से खतरे में बदल सकती हैं. इसलिए कुछ लोगों को विशेषतौर पर इसे खाने से बचना चाहिए.

किन लोगों को मछली खाने में सावधानी रखनी चाहिए

मां बनने वाली महिलाएं
गर्भावस्था में मरकरी बच्चे के दिमाग के विकास पर असर डाल सकती है. इसलिए शार्क, स्वॉर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी मछलियों से बचना चाहिए. वहीं सैल्मन, झींगा और हल्की टूना जैसी कम मरकरी वाली मछलियां सुरक्षित होती हैं.

स्तनपान कराने वाली मांएं
मरकरी दूध के जरिए बच्चे तक पहुंच सकती है और उसके नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है. इसलिए सैल्मन, श्रिम्प और कैटफिश जैसी कम मरकरी वाली मछलियां बेहतर विकल्प हैं.

छोटे बच्चे
11 साल से कम उम्र के बच्चों पर मरकरी का असर ज्यादा होता है. इससे उनकी सोचने-समझने की क्षमता और मूवमेंट प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में टिलापिया, सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियां देना बेहतर है.

एलर्जी वाले लोग
जिन्हें सीफूड से एलर्जी है, उनके लिए मछली खतरनाक हो सकती है. इससे रैश, सूजन या गंभीर रिएक्शन हो सकता है. ऐसे लोग अलसी, चिया सीड्स और अखरोट जैसे विकल्प से ओमेगा-3 ले सकते हैं.

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें कच्ची या अधपकी मछली से इंफेक्शन का खतरा होता है. इसलिए मछली को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए.

कुछ दवाइयां लेने वाले लोग
खासकर ब्लड थिनर लेने वालों को मछली सीमित मात्रा में खानी चाहिए, क्योंकि ज्यादा ओमेगा-3 से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो दिल, दिमाग और त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन हर कोई इसे सुरक्षित तरीके से नहीं खा सकता. मछली में मौजूद पारा , गंदगी और एलर्जी जैसी चीजें इसे हेल्दी खाने से खतरे में बदल सकती हैं. इसलिए कुछ लोगों को विशेषतौर पर इसे खाने से बचना चाहिए.

किन लोगों को मछली खाने में सावधानी रखनी चाहिए

मां बनने वाली महिलाएं
गर्भावस्था में मरकरी बच्चे के दिमाग के विकास पर असर डाल सकती है. इसलिए शार्क, स्वॉर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी मछलियों से बचना चाहिए. वहीं सैल्मन, झींगा और हल्की टूना जैसी कम मरकरी वाली मछलियां सुरक्षित होती हैं.

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एलर्जी वाले लोग
जिन्हें सीफूड से एलर्जी है, उनके लिए मछली खतरनाक हो सकती है. इससे रैश, सूजन या गंभीर रिएक्शन हो सकता है. ऐसे लोग अलसी, चिया सीड्स और अखरोट जैसे विकल्प से ओमेगा-3 ले सकते हैं.

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें कच्ची या अधपकी मछली से इंफेक्शन का खतरा होता है. इसलिए मछली को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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