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Raghu Rai Bhopal Gas Tragedy Photojournalist Passes Away

Raghu Rai Bhopal Gas Tragedy Photojournalist Passes Away

Hindi News Career Raghu Rai Bhopal Gas Tragedy Photojournalist Passes Away | Current Affairs 5 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. भारत- न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार डील होगी 27 अप्रैल को न्यूजीलैंड और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर साइन करेंगे। आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत-न्यूजीलैंड बिजनेस फोरम की बैठक में इस डील पर साइन होंगे। न्यूजीलैंड के बिजनेस एंड इंवेस्टमेंट मिनिस्टर टॉड मैक्ले के भारत दौरे के दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच ये सहमति बनी है। इस डील के मुताबिक, भारत अपने 100% एक्सपोर्ट को बगैर किसी ड्यूटी के बेच सकेगा। वहीं भारत में न्यूजीलैंड के 95% निर्यात पर टैरिफ कम या खत्म कर दिया जाएगा। भारत और न्यूजीलैंड ने अगले पांच सालों के लिए इस द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा है। इस डील में न्यूजीलैंड भारतीय प्रोफेशनल्स को हर साल 5,000 वीजा का कोटा भी उपलब्ध कराएगा। इस डील का उद्देश्य अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश लाना और व्यापार को दोगुना करना है। इस डील के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध मजबूत होंगे और इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। भारत और न्यूजीलैंड का द्विपक्षीय व्यापारिक व्यापार 2024-25 में लगभग 1.3 बिलियन डॉलर था। 2024 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग $2.4 बिलियन तक पहुंचा था। इस डील के बाद स्टार्टअप, MSME और प्रोफेशनल्स को मौके मिलेंगे। भारत- न्यूजीलैंड के बीच निर्यात में ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन से लेकर एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसी वस्तुएं शामिल हैं। न्यूजीलैंड को भेड़ के मांस, ऊन, कोयला और 95% से ज्यादा वानिकी और लकड़ी के सामान पर कोई ड्यूटी नहीं देनी होगी। हालांकि भारत ने किसानों की सिक्योरिटी के लिए डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों कि इसमें शामिल नहीं किया है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा के दौरान 16 मार्च 2025 को बातचीत शुरू करने की घोषणा की गई थी। 2. पीएम मोदी आज दो दिवसीय दौरे पर सिक्किम जाएंगे 27 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी सिक्किम के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे। इस दौर में वे चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। इस यात्रा के दूसरे दिन पीएम गंगटोक में अलग-अलग तरह के फूल और उनकी प्रजातियों के लिए जाने जाने वाले ऑर्किडेरियम सेंटर का दौरा करेंगे। पीएम पलजोर स्टेडियम में सिक्किम के के 50वें वर्ष समारोह के समापन समारोह में भी भाग लेंगे। इस यात्रा के दौरान पीएम 4 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, और शिलान्यास करेंगे। ये परियोजनाएं कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, शहरी विकास, पर्यावरण, पर्यटन से जुड़ी हैं। पीएम नामची जिले के यांगांग में 100 बिस्तरों वाले आयुर्वेद अस्पताल और NIT देवराली में 30 बिस्तरों वाले एकीकृत सोवा रिग्पा अस्पताल की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी नामची और गंगटोक जिलों को जोड़ने वाले सिरवानी और लोअर सैमडोंग में तीस्ता नदी पर दो हिंग वाले डबल-लेन स्टील आर्क पुलों की आधारशिला भी रखेंगे। पीएम मोदी 2018 में सिक्किम के पाक्योंग में राज्य के पहले हवाई अड्डे का उद्घाटन किया था। निधन (DEATH) 3. सीनियर फोटोग्राफर रघु राय का निधन 26 अप्रैल को सीनियर फोटोग्राफर रघु राय का निधन हो गया। वे 83 साल के थे। रघु को भारतीय पत्रकारिता का जनक कहा जाता है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी की भयावह तस्वीरों को पूरी दुनिया में पहुंचाया था। रघु राय का जन्म 18 दिसंबर, 1942 को झांग (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। बांग्लादेश युद्ध के दौरान उनकी सशक्त फोटोग्राफी के लिए उन्हें भारत सरकार ने 1972 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। रघु ने मशहूर फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन के मार्गदर्शन में काम किया था। हेनरी ने 1972 में पेरिस में उनके एग्जीबिशन प्रभावित होकर उन्हें मैग्नम फोटोज में शामिल होने के लिए नॉमिनेट किया था। रघु 1977 में मैग्नम फोटोज में शामिल हुए। मैग्नम दुनिया के सबसे बड़े फोटोग्राफी ऑर्गेनाइजेशन में से एक है, और इस ऑर्गेनाइजेशन में सिर्फ टॉप फोटोग्राफर ही शामिल हो सकते हैं। 1982 से 1992 तक वह इंडिया टुडे में डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी रहे। 1990 से 1997 के बीच रघु ने वर्ल्ड प्रेस फोटो की जूरी में तीन बार और यूनेस्को की अंतर्राष्ट्रीय फोटो प्रतियोगिता की जूरी में दो बार शामिल रहे। 1992 में रघु को अमेरिका में फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड दिया गया था। 2017 में रघु को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी दिया था। 2019 में रघु को एकेडेमी डेस बीक्स-आर्ट्स फोटोग्राफी अवार्ड मिला, जो फोटोग्राफी में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। भोपाल गैस त्रासदी समेत मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी जैसी प्रसिद्ध हस्तियों की करीबी और निजी तस्वीरें भी लीं। रघु की कुछ फोटोग्राफी किताबें भी हैं, जिनमें सबसे मशहूर किताबों में रघु राय का इंडिया: रिफ्लेक्शन्स इन कलर और रिफ्लेक्शंस इन ब्लैक एंड व्हाइट शामिल हैं। रघु राय की फोटोग्राफी को आधुनिक भारत का ‘दृश्य रिकॉर्ड’ भी कहा जाता है। 4.अशोक लाहिड़ी नीति आयोग के नए वाइस चेयरमैन बने 25 अप्रैल को नीति आयोग के नए वाइस- चेयरमैन अशोक लाहिड़ी ने पीएम मोदी से मुलाकात की। पीएम मोदी नीति आयोग के अध्यक्ष हैं। 24 अप्रैल को अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग के नए वाइस चेयरमैन अपॉइंट किया गया है। अशोक पश्चिम बंगाल से भाजपा विधायक हैं और 15वें वित्त आयोग के सदस्य के तौर पर भी काम कर चुके हैं। वे सुमन बेरी की जगह लेंगे। 2002-2007 तक अशोक भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) रह चुके हैं। 2001 में अशोक इंडियन मॉनेटरी फंड (IMF) के यूरोपीय डिपार्टमेंट में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे। आशोक 15वें वित्त आयोग के मेम्बर और बंधन बैंक के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। पीएम नरेंद्र मोदी नीति आयोग के अध्यक्ष हैं। नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 में हुई थी। नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत ‘थिंक टैंक’ है। 1987 से 2003 तक अशोक लाहिड़ी ने वर्ल्ड बैंक के साथ काम किया। 5. नीतू समरा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की CEO बनीं 25 अप्रैल को नीतू समरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की इंटरिम चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अपॉइंट हुईं। नीतू अक्टूबर 2021

फिजिकल हेल्थ- नेतन्याहू को प्रोस्टेट कैंसर:देर से दिखते संकेत, इसलिए 50 के बाद स्क्रीनिंग जरूरी, बचाव के लिए जरूरी 7 सावधानियां

फिजिकल हेल्थ- नेतन्याहू को प्रोस्टेट कैंसर:देर से दिखते संकेत, इसलिए 50 के बाद स्क्रीनिंग जरूरी, बचाव के लिए जरूरी 7 सावधानियां

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जुड़ी एक स्वास्थ्य खबर ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें प्रोस्टेट कैंसर डायग्नोज हुआ है। दुनिया के एक प्रमुख नेता का इस बीमारी से जूझना यह याद दिलाता है कि प्रोस्टेट कैंसर उम्र, लाइफस्टाइल और जेनेटिक फैक्टर्स से जुड़ा एक साइलेंट खतरा है। ये किसी को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में समय पर स्क्रीनिंग और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। ‘इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर’ के मुताबिक, भारत में हर साल प्रोस्टेट कैंसर के 33,000 से 42,000 नए मामले सामने आते हैं। साल 2040 तक इसके नए मामलों की संख्या दोगुनी होकर हर साल करीब 71,000 तक पहुंच सकती है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज प्रोस्टेट कैंसर की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- प्रोस्टेट कैंसर क्या है? जवाब- प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बना लेती हैं। सवाल- प्रोस्टेट ग्रंथि क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझें- सवाल- प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण क्या हैं? जवाब- प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ संकेत दिखने लगते हैं: शुरुआती लक्षण 1. बार-बार पेशाब आना (खासकर रात में) 2. पेशाब शुरू करने में दिक्कत 3. पेशाब का फ्लो कमजोर होना 4. जलन या दर्द 5. पूरा खाली न होने का एहसास पेशाब करने के बाद भी ऐसा लगता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ। एडवांस स्टेज के लक्षण 1. पेशाब या वीर्य में खून आना 2. हड्डियों में दर्द (कमर, कूल्हे, जांघ) प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों में फैल सकता है। इससे लगातार, गहरा और रात में बढ़ने वाला दर्द होता है। 3. अचानक वजन कम होना बिना डाइट या एक्सरसाइज के वजन गिरना शरीर में गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। 4. लगातार थकान और कमजोरी शरीर में खून की कमी (एनीमिया) या कैंसर के फैलाव से ऐसा होता है। 5. पैरों में सूजन या सुन्नता अगर कैंसर स्पाइन (रीढ़) या नसों पर असर डालता है, तो पैरों में कमजोरी, झनझनाहट या सूजन हो सकती है। सवाल- प्रोस्टेट कैंसर क्यों होता है? जवाब- प्रोस्टेट कैंसर की वजह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्र, जेनेटिक्स, हॉर्मोनल असंतुलन, खराब डाइट, लाइफस्टाइल और एनवायर्नमेंटल फैक्टर्स इसकी वजह बन सकते हैं। ये सभी चीजें मिलकर प्रोस्टेट कैंसर का रिस्क बढ़ा सकती हैं। सवाल- प्रोस्टेट कैंसर का पता कैसे चलता है? जवाब- प्रोस्टेट कैंसर के डायग्नोसिस के लिए दो मुख्य स्क्रीनिंग टेस्ट होते हैं- डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE): इस टेस्ट में डॉक्टर एक ग्लव और लुब्रिकेटेड उंगली को रेक्टम (पाइप) में डालते हैं और प्रोस्टेट ग्लैंड को महसूस करते हैं। अगर प्रोस्टेट में कुछ कठोर या गड्ढा जैसा महसूस होता है तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। PSA ब्लड टेस्ट: यह एक ब्लड टेस्ट है, जिसमें प्रोस्टेट ग्लैंड द्वारा बनाए जाने वाले प्रोटीन PSA का लेवल मापा जाता है। अगर PSA लेवल ज्यादा होता है तो यह कैंसर या किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है। सवाल- प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है? जवाब- ‘यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस’ में पेश एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग प्रोस्टेट कैंसर के लिए स्क्रीनिंग नहीं कराते हैं तो उनकी जान जाने का जोखिम 45% ज्यादा होता है। प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग इसलिए भी जरूरी होती है क्योंकि यह साइलेंट बीमारी है। शुरुआत में कोई दर्द, दिक्कत या साफ लक्षण नहीं दिखते। स्क्रीनिंग के फायदे डिटेल में समझिए- 1. बीमारी जल्दी पता चलती है स्पष्ट लक्षण लक्षण सामने आने तक कैंसर बढ़ चुका होता है। स्क्रीनिंग की मदद से इसे पहले ही डायग्नोज किया जा सकता है। 2. इलाज आसान हो जाता है अगर शुरुआती स्टेज में ही इसका पता चल जाए तो इलाज ज्यादा आसान और प्रभावी होता है। देर होने पर इलाज मुश्किल हो सकता है। 3. फैलने से पहले रोक सकते हैं अगर समय पर इसका पता न चले तो कैंसर शरीर के दूसरे ऑर्गन्स में भी फैल सकता है। स्क्रीनिंग की मदद से इसे पहले ही रोकने में मदद मिलती है। 4. जिन्हें ज्यादा खतरा, उन्हें और जरूरी 50 साल से ऊपर के लोगों को और जिनकी प्रोस्टेट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें इसका ज्यादा रिस्क होता है। इसलिए इन्हें नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए, ताकि समय पर इलाज हो सके। सवाल- प्रोस्टेट कैंसर से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- इससे पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ उपायों से रिस्क कम किया जा सकता है- प्रोस्टेट कैंसर से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब सवाल: क्या प्रोस्टेट कैंसर का इलाज संभव है? जवाब: हां, अगर प्रोस्टेट कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है। इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कभी-कभी हॉर्मोनल थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। सवाल: क्या प्रोस्टेट कैंसर को रोका जा सकता है? जवाब: इसे पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, लेकिन हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और वजन कंट्रोल से जोखिम कम किया जा सकता है। स्क्रीनिंग भी मददगार हो सकती है। सवाल: क्या प्रोस्टेट कैंसर के सभी मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है? जवाब: नहीं, अधिकांश मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। इलाज का डिसीजन कैंसर के प्रकार, स्टेज और व्यक्ति की ओवरऑल हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में रेडिएशन भी प्रभावी हो सकते हैं। सवाल: क्या प्रोस्टेट कैंसर सिर्फ बूढ़े लोगों को होता है? जवाब: प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता जाता है। खासकर 50 साल की उम्र के बाद यह खतरा ज्यादा होता है, लेकिन कुछ मामलों में युवाओं में भी इसका खतरा हो सकता है। खासतौर पर अगर फैमिली हिस्ट्री या कोई जेनेटिक समस्या है। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- गर्मियों में बढ़ता हार्ट अटैक का रिस्क: कार्डियोलॉजिस्ट से समझें इसका साइंस, हार्ट को करें प्रोटेक्ट, 6 बातें ध्यान रखें गर्मियों में पसीने और थकान की समस्या कॉमन है। इस दौरान हार्ट बीट में बदलाव भी होता है। अमूमन लोग इसे मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इसके

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना

लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। हर बार की तरह उस पार्टी में भी विनोद ने सबका ध्यान खींच लिया। सुनील दत्त की नजरें भी बार-बार विनोद पर पड़ीं। उस समय सुनील अपने भाई सोम दत्त को लॉन्च करने वाले थे। अगले दिन सुनील दत्त ने विनोद को दफ्तर में बुलाया और फिल्म ऑफर कर दी। कोई भी ये सुनकर बेहद खुश होता, लेकिन विनोद घबराए हुए थे। वो जानते थे पिता कभी राजी नहीं होंगे। उस शाम वो घर पहुंचे और हिम्मत जुटाकर पिता से कहा, ‘मुझे फिल्म में काम मिला है।’ पिता ने आव देखा न ताव सीधे बंदूक तान दी और कहा- ‘अगर फिल्मों में गए तो गोली मार दूंगा।’ मां ने किसी तरह पिता को खूब समझाया। आखिरकार पिता का दिल पिघला और उन्होंने शर्त रखी, ‘2 साल का वक्त दे रहा हूं, फिल्मों में कुछ हुआ तो ठीक वर्ना बिजनेस संभालना।’ इस तरह 1968 में विनोद खन्ना का फिल्मों से रिश्ता जुड़ा, जो उनके निधन तक कायम रहा। 27 अप्रैल 2017 में विनोद खन्ना का 70 साल की उम्र में निधन हुआ था। आज उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके करियर, अमिताभ बच्चन से राइवलरी और स्टारडम छोड़ संन्यासी बनने से जुड़े चुनिंदा किस्से- किस्सा-1 जब अमिताभ ने फेंककर मारा ग्लास, लगाने पड़े टांके विनोद खन्ना की पहली फिल्म मन का मीत (1968) फ्लॉप रही, लेकिन विनोद खन्ना को इसकी बदौलत कई बड़ी फिल्मों में काम मिलने लगे। 1970 में विनोद राजेश खन्ना के साथ सच्चा झूठा, आन मिलो सजना में और मनोज कुमार के साथ पूरब पश्चिम में नजर आए। तीनों फिल्में सुपरहिट रहीं और विनोद खन्ना को स्टारडम हासिल हो गया। आगे बतौर लीड हीरो मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, दो यार, हाथ की सफाई, इम्तिहान जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में शुमार किया। 1977 में विनोद खन्ना को मल्टीस्टारर फिल्म अमर अकबर एंथोनी में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के साथ कास्ट किया गया। ये उस दौर की अपनी तरह की इकलौती फिल्म थी, जिसमें अमिताभ-विनोद जैसे फिल्म इंडस्ट्री के दो ऐसे स्टार्स थे, जिनके बीच टॉप एक्टर की होड़ मची थी। दोनों में राइवलरी थी। ये फिल्म हिट रही, तो दोनों को फिर मुकद्दर का सिकंदर में साथ कास्ट किया गया। फिल्म के एक सीन के लिए अमिताभ बच्चन को बार में खड़े होकर विनोद पर कांच का ग्लास फेंकना था और विनोद को बचना था। जैसे ही एक्शन बोला गया, अमिताभ ने ग्लास फेंक दिया, लेकिन वो विनोद खन्ना के चेहरे पर लगा। खूब खून बहा और एक्टर का टांके लगवाने पड़े। अमिताभ बच्चन ही उन्हें अस्पताल लेकर गए और बाद में घर छोड़ा। घर छोड़ते हुए भी उन्होंने विनोद और पत्नी से माफी मांगी। लेकिन लोगों का मानना था कि इस हादसे से उनकी गहरी दोस्ती टूट गई और दोनों में कुछ समय के लिए बातचीत बंद हो गई। ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने गलाटा इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि ओशो को लगता था कि विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन से चिढ़ते हैं। उन्होंने विनोद को अमिताभ के खिलाफ चुनाव में खड़े होने का भी सुझाव दिया था। किस्सा-2 परिवार में हो रहीं मौतों से डरे, दोस्त महेश भट्ट के कहने पर ओशो के आश्रम गए एक दौर में महेश भट्ट और विनोद खन्ना की दोस्ती चर्चा में थी। महेश भट्ट के स्ट्रगल के दिनों में विनोद खन्ना कई बार उनका खर्चा भी उठाते थे। 1971 में विनोद ने गीतांजलि से शादी की थी। 1975 में पत्नी ने बेटे अक्षय खन्ना को जन्म दिया। उसी समय 6 महीनों के अंतराल में ही एक-एक कर परिवार में 4 मौतें हो गईं। जिसमें उनकी मां कमला खन्ना और एक बहन भी शामिल थीं। ये देखउन्हें मौत का आभास होने लगा। वो डरने लगे कि कहीं उनकी भी मौत न हो जाए। इस समय उन्हें दोस्त महेश भट्ट ने ओशो के आश्रम जाने का सुझाव दिया। कुछ समय के लिए वो पुणे स्थित आश्रम जाकर रहे। 1977 में एक दिन विनोद खन्ना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंडस्ट्री छोड़ संन्यासी बनने की घोषणा की। इससे उन्हें फिल्ममेकर्स की आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके पास कई फिल्में थीं। विनोद ने वादा किया कि वो सभी फिल्में पूरी करेंगे। फिल्में पूरी होते ही वो 1981 में यूएसए के ओरेगन स्थित ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में जाकर रहने लगे। किस्सा-3 महेश भट्ट ने माला कमोड में फेंकी, तो दी धमकी विनोद खन्ना के साथ महेश भट्ट भी ओशो के आश्रम गए थे। वहां उन्हें माला पहनाई गई थी, जिसमें ओशो की तस्वीर थी। कुछ दिनों बाद जब महेश भट्ट लौटे, तो उन्होंने वो माला तोड़कर टॉयलेट में फेंक दी। जैसे ही ये बात विनोद को पता चली, वो बहुत गुस्सा हुए। उन्हें एक दिन महेश भट्ट को फिल्मिस्तान स्टूडियो बुलाया और कहा- भगवान तुमसे बहुत नाराज हैं। महेश ने पूछा क्यों?, तो जवाब मिला- क्योंकि तुमने माला तोड़ दी और कमोड में फेंक दी। महेश ने फिर कहा- मुझे वो कुत्ते के पट्टे की तरह लगती थी। विनोद ने ये सुनकर कहा- उन्होंने (कथित तौर पर ओशो ने) कहा है कि महेश से कहो कि वो खुद मुझे वो माला लाकर दे। आगे विनोद ने खुसफुसाते हुए कहा- उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया, तो वो तुम्हें बर्बाद कर देंगे। ये किस्सा खुद महेश भट्ट ने अरबाज खान के चैट शो द इन्विन्सिबल विद अरबाज खान में सुनाया था। किस्सा- 4 ओशो के आश्रम में टॉयलेट साफ किए, तंग कमरे में गुजारे कई दिन विनोद खन्ना आश्रम में

KL Rahul; DC vs RCB IPL 2026 LIVE Score Update

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स्पोर्ट्स डेस्ककुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक 9-दिल्ली कैपिटल्स (DC) के लिए IPL 2026 का सीजन मुश्किल होता जा रहा है। 264 रन बनाने के बावजूद पंजाब किंग्स से मिली हार से टीम उबर नहीं पाई है। सोमवार को दिल्ली का सामना डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से होगा। मैच अरुण जेटली स्टेडियम में शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। यह दोनों के बीच सीजन का दूसरा मैच है। पहले मैच में दिल्ली ने चिन्नास्वामी स्टेडियम में 6 विकेट से जीत दर्ज की थी। पॉइंट्स टेबल में छठे स्थान पर मौजूद दिल्ली के लिए यह मैच अहम है। एक और हार प्लेऑफ की उम्मीदों को बड़ा झटका दे सकती है। बेंगलुरु का पलड़ा भारी IPL में अब तक दोनों टीमों के बीच 34 मैच खेले गए हैं। RCB ने 19 और दिल्ली ने 13 जीते हैं। एक मैच टाई रहा और एक बेनतीजा रहा। 2013 में बेंगलुरु में एक मैच का फैसला सुपर ओवर में हुआ था, जिसे RCB ने जीता था। पिछले सीजन में दोनों के बीच दो मैच हुए थे। एक दिल्ली ने बेंगलुरु में जीता, जबकि दूसरा RCB ने दिल्ली में जीता। दिल्ली की बल्लेबाजी मजबूत गेंदबाजी कमजोर दिल्ली इस सीजन बल्लेबाजी के भरोसे टिकी है। केएल राहुल की कप्तानी में टॉप ऑर्डर ने लगभग हर मैच में तेज शुरुआत दी है। नीतीश राणा और डेविड मिलर मिडिल ओवर्स में रन गति बनाए रख रहे हैं। समस्या गेंदबाजी में है। टीम बड़े स्कोर भी डिफेंड नहीं कर पाई है। डेथ ओवर्स में रन लुटाना सबसे बड़ी चिंता है, जिसका फायदा विपक्षी टीमें उठा रही हैं। दिल्ली इस सीजन बल्लेबाजी के भरोसे टिकी है। केएल राहुल की कप्तानी में टॉप ऑर्डर ने लगभग हर मैच में तेज शुरुआत दी है। नीतीश राणा और डेविड मिलर मिडिल ओवर्स में रन गति बनाए रख रहे हैं। समस्या गेंदबाजी में है। टीम बड़े स्कोर भी डिफेंड नहीं कर पाई है। डेथ ओवर्स में रन लुटाना सबसे बड़ी चिंता है, जिसका फायदा विपक्षी टीमें उठा रही हैं। संतुलित नजर आ रही बेंगलुरु, कोहली और पडिक्कल फॉर्म में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु प्वॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है और संतुलित नजर आ रही है। विराट कोहली टीम को मजबूती देते हैं। देवदत्त पडिक्कल की फॉर्म में वापसी से बल्लेबाजी की गहराई बढ़ी है। गुजरात टाइटंस के खिलाफ पिछले मैच में गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया था। सुयश शर्मा, भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड ने डेथ ओवर्स में कसी गेंदबाजी कर जीत पक्की की थी। विराट कोहली 328 रन के साथ टॉप रन स्कोरर हैं। भुवनेश्वर कुमार 11 विकेट लेकर टॉप विकेट टेकर हैं। पिच रिपोर्ट अरुण जेटली स्टेडियम की पिच IPL में बल्लेबाजी के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां की सपाट पिच और छोटी बाउंड्री (60-66 मीटर) के कारण हाई-स्कोरिंग मैच होते हैं। इस पिच पर IPL के 99 मैच खेले गए हैं। इनमें 48 बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती है, जबकि 50 बार चेज करने वाली टीम जीती है। एक मैच रद्द हुआ। मौसम दिल्ली में सोमवार, 27 अप्रैल को मौसम अत्यधिक गर्म और शुष्क रहने की संभावना है। आसमान साफ रहेगा। तापमान तक जा सकता है और तेज हवाएं चलेंगी। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 दिल्ली कैपिटल्स: पथुम निसांका, केएल राहुल (विकेटकीपर), समीर रिजवी, अक्षर पटेल (कप्तान), नीतीश राणा, डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स, लुंगी एनगिडी, कुलदीप यादव, टी नटराजन और मुकेश कुमार। इम्पैक्ट प्लेयर्स- विप्रज निगम । रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB): रजत पाटीदार (कप्तान), विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, टिम डेविड, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), क्रुणाल पंड्या, रोमारियो शेफर्ड, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, रसिख सलाम और सुयश शर्मा। इम्पैक्ट प्लेयर्स- जैकब बेथेल। —————————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… अंगकृष रघुवंशी का विवादित रन-आउट:शमी के सिक्स से मैच टाई हुआ; रिंकू के लगातार 4 सिक्स, लखनऊ घर पर आठवां मैच हारी; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स कोलकाता नाइट राइडर्स ने IPL 2026 के 38वें मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स को सुपर ओवर में हराया। रविवार को अंगकृष रघवुंशी फील्डिंग में रुकावट डालने पर रनआउट दिए गए। रिंकू सिंह ने आखिरी ओवर में लगातार 4 सिक्स लगाए। उन्होंने 5 कैच भी लपके। मोहम्मद शमी ने आखिरी गेंद पर सिक्स लगाकर मैच टाई कराया। पूरी खबर कोलकाता ने जीता IPL 2026 का पहला सुपर ओवर:नरेन ने लखनऊ को एक रन ही बनाने दिया; रिंकू ने 83 रन बनाने के साथ 5 कैच लपके कोलकाता नाइट राइडर्स ने IPL 2026 के पहले सुपर ओवर मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स को हराकर जीत दर्ज की। इकाना स्टेडियम में पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 155 रन बनाए। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Dhirendra Shastri apologises for his remarks on Chhatrapati Shivaji Maharaj

Dhirendra Shastri apologises for his remarks on Chhatrapati Shivaji Maharaj

Hindi News National Dhirendra Shastri Apologises For His Remarks On Chhatrapati Shivaji Maharaj नागपुर12 मिनट पहले कॉपी लिंक छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बारे में अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने माफी मांग ली। रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला। मैं जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का सम्मान करता हूं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सर्वोच्च है। उनके बारे में नकारात्मक बोलना तो दूर, मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकता। उन्होंने आगे कहा- संदर्भ बिल्कुल अलग था। छत्रपति शिवाजी महाराज की संतों और अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा कि वह अपने ही लोगों से युद्ध नहीं करेंगे, तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। हमारा उद्देश्य केवल छत्रपति शिवाजी महाराज महानता को उजागर करना था कि वे संतों के प्रति कितने गहरे रूप से समर्पित थे, लेकिन एक छोटा सा अंश संदर्भ से काटकर फैला दिया गया। धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में हुए थे शामिल। क्या था विवादित बयान? नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे। शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है। मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था: धीरेंद्र शास्त्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। हम उन लोगों की आलोचना कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनके स्वराज्य ने हमें ‘हिंदू राष्ट्र’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा- छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। अगर हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे, तो इससे केवल दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था। नागपुर के कार्यक्रम में संतों के साथ-साथ RSS चीफ मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस भी मौजूद रहे। राजनीतिक घमासान भी मचा पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने कहा-जिस मध्यप्रदेश से शास्त्री आते हैं, वहां के महान योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से ही प्रेरित होकर मुगलों के खिलाफ जंग जीती थी। संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जाए। महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास बदलने की साजिश बताया। उन्होंने नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस से भी माफी की मांग की। फडणवीस ने इस पर कहा कि इतिहास की किताबों में ऐसा कोई प्रसंग नहीं मिलता। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और हर्षवर्धन सपकाल ने इसे ‘इतिहास का विकृत रूप’ बताया है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु शासक थे और यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी और को सौंप दिया था, एक ऐतिहासिक पाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे बयानों के लिए मंच मुहैया करा रही है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया जा रहा था, तब राज्य के सत्ताधारी नेता मंच पर मौजूद थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी। धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बयानों पर स्पष्टीकरण दिया। चारों बच्चों वाले बयान पर भी दिया स्पष्टीकरण नागपुर में उसी कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि हर किसी को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देना चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी विवाद में रहा। धीरेंद्र शास्त्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा- संघ को पुत्र देने का अर्थ है उसे राष्ट्रवादी बनाना। चाहे वह कलेक्टर हो, शिक्षक हो या कुछ और, मेरा इरादा यही था कि बच्चे सनातनी विचारधारा के हों। शास्त्री ने यह भी कहा की कि वे भविष्य में विवाह करेंगे। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे। —————– धीरेंद्र शास्त्री के बयान से जु़ड़ी ये खबर भी पढ़ें… धीरेंद्र शास्त्री बोले-नक्कटा तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले:लेंसकार्ट के तिलक-मंगलसूत्र पाबंदी पर भड़के प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमंत कथा के दौरान लेंसकार्ट कंपनी को चेतावनी दी। उन्होंने कहा- “एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है, उसने बोला है अपनी कंपनी के वर्करों को कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Dhirendra Shastri Chatrapati Shivaji Maharaj Controversy

Dhirendra Shastri apologises for his remarks on Chhatrapati Shivaji Maharaj

Hindi News National Dhirendra Shastri Chatrapati Shivaji Maharaj Controversy | Bageshwar Baba नागपुर8 घंटे पहले कॉपी लिंक रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला। छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बारे में अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने माफी मांग ली। रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला। मैं जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का सम्मान करता हूं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सर्वोच्च है। उनके बारे में नकारात्मक बोलना तो दूर, मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकता। उन्होंने आगे कहा- संदर्भ बिल्कुल अलग था। छत्रपति शिवाजी महाराज की संतों और अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी निष्ठा थी। हम एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति के बारे में बात कर रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा कि वह अपने ही लोगों से युद्ध नहीं करेंगे, तब कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। हमारा उद्देश्य केवल छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता को उजागर करना था कि वे संतों के प्रति कितने गहरे रूप से समर्पित थे, लेकिन एक छोटा सा अंश संदर्भ से काटकर फैला दिया गया। धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले ‘भारतदुर्गा मंदिर’ के शिलान्यास समारोह में शामिल हुए थे। क्या था विवादित बयान? नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे। शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है। मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था: धीरेंद्र शास्त्री प्रेस कॉन्फ्रेंस में धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा- कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया। हम उन लोगों की आलोचना कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनके स्वराज्य ने हमें ‘हिंदू राष्ट्र’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा- छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। अगर हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे, तो इससे केवल दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। नागपुर के कार्यक्रम में संतों के साथ-साथ RSS चीफ मोहन भागवत, केंद्रीय मंत्री गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस भी मौजूद रहे। राजनीतिक घमासान भी मचा पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने कहा-जिस मध्यप्रदेश से शास्त्री आते हैं, वहां के महान योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से ही प्रेरित होकर मुगलों के खिलाफ जंग जीती थी। संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जाए। महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास बदलने की साजिश बताया। उन्होंने नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस से भी माफी की मांग की। फडणवीस ने इस पर कहा कि इतिहास की किताबों में ऐसा कोई प्रसंग नहीं मिलता। उन्होंने लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील की। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और हर्षवर्धन सपकाल ने इसे ‘इतिहास का विकृत रूप’ बताया है। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु शासक थे और यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी और को सौंप दिया था, एक ऐतिहासिक पाप है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे बयानों के लिए मंच मुहैया करा रही है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने बाबा के महाराष्ट्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब यह बयान दिया जा रहा था, तब राज्य के सत्ताधारी नेता मंच पर मौजूद थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी। धीरेंद्र शास्त्री ने रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बयानों पर स्पष्टीकरण दिया। चार बच्चों वाले बयान पर भी दिया स्पष्टीकरण नागपुर में उसी कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि हर किसी को चार बच्चे पैदा करने चाहिए और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देना चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी विवाद रहा। धीरेंद्र शास्त्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा- संघ को पुत्र देने का अर्थ है उसे राष्ट्रवादी बनाना। चाहे वह कलेक्टर हो, शिक्षक हो या कुछ और, मेरा इरादा यही था कि बच्चे सनातनी विचारधारा के हों। शास्त्री ने यह भी कहा कि वे भविष्य में विवाह करेंगे। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी हिंदू आबादी बढ़ाने में योगदान देंगे। —————– धीरेंद्र शास्त्री के बयान से जु़ड़ी ये खबर भी पढ़ें… धीरेंद्र शास्त्री बोले-नक्कटा तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले:लेंसकार्ट के तिलक-मंगलसूत्र पाबंदी पर भड़के प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमंत कथा के दौरान लेंसकार्ट कंपनी को चेतावनी दी। उन्होंने कहा- “एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है, उसने बोला है अपनी कंपनी के वर्करों को कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मोहन यादव सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ रुपए का कर्ज:नए वित्त वर्ष के पहले ही महीने में हो जाएगा 4600 करोड़ का कर्ज

मोहन यादव सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ रुपए का कर्ज:नए वित्त वर्ष के पहले ही महीने में हो जाएगा 4600 करोड़ का कर्ज

मध्य प्रदेश सरकार नए वित्त वर्ष के पहले महीने में एक बार फिर मंगलवार को 2800 करोड़ रुपए का कर्ज उठाने जा रही है। यह कर्ज दो किस्तों में 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के रूप में लिया जाएगा। पहला कर्ज 8 साल और दूसरा 22 साल के लिए होगा जिसके ब्याज की अदायगी छमाही की जाएगी। सरकार ने अभी 31 मार्च 2026 की स्थिति में कर्ज का खुलासा नहीं किया है। मंगलवार को लिए जाने वाले दोनों ही कर्ज 31 मार्च 2025 की स्थिति में 4 लाख 14 हजार करोड़ रुपए के कर्ज के आंकड़े के आधार पर लिए जा रहे हैं। नया वित्त वर्ष शुरू होने के बाद 15 दिन के भीतर मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर 1800 करोड़ रुपए का कर्ज आरबीआई के जरिए लिया है। सरकार को इस ऋण राशि का भुगतान 15 अप्रैल को किया गया। यह लोन दो अलग-अलग किस्त 1200 करोड़ और 600 करोड़ के रूप में लिया गया है। इसके पहले 31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष खत्म होने के पहले एक माह में सरकार द्वारा 18700 करोड़ का लोन लिया गया था। इसके पहले 28 मार्च को राज्य सरकार ने रामनवमी पर 2500 करोड़ का लोन 14 साल के लिए लिया था। वित्त विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में सरकार पर 31 मार्च 2025 को कर्ज 4 लाख 14 हजार 611 करोड़ रुपए बताए गए हैं, जबकि इसके पहले लिए गए सभी ऋण में 31 मार्च 2025 की स्थिति में कर्ज 4 लाख 21 हजार 740 करोड़ रुपए बताया गया था। इसके पहले 17 मार्च को दो अलग-अलग कर्ज 4100 करोड़ रुपए के लिए गए हैं। 10 मार्च को 1900 करोड़ रुपए 10 साल के ब्याज पर तो 1700 करोड़ रुपए 14 साल और 2200 करोड़ रुपए 21 साल की अवधि के लिए कर्ज लिया। तीन मार्च को होली पर 6300 करोड़ रुपए के चार अलग-अलग कर्ज लिए गए थे। वित्त विभाग द्वारा किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, तीन मार्च को पहला लोन 1800 करोड़ का लिया गया। इसी तरह दूसरा कर्ज 13 साल के लिए 1600 करोड़ रुपए का, तीसरा कर्ज 1300 करोड़ का 15 साल के लिए और चौथा कर्ज 1600 करोड़ रुपए का 23 साल के लिए लिया गया है। इस तरह कुल 6300 करोड़ का कर्ज लिया गया, जो गत वित्त वर्ष में लिए गए एक दिन के कर्ज में सर्वाधिक रहा है।

इंदौर में ACP से बजरंग दल कार्यकर्ता की बहस:बारात के चलते गाड़ी को नहीं मिला रास्ता; विवाद बढ़ा तो टीआई ने खुलवाया जाम

इंदौर में ACP से बजरंग दल कार्यकर्ता की बहस:बारात के चलते गाड़ी को नहीं मिला रास्ता; विवाद बढ़ा तो टीआई ने खुलवाया जाम

इंदौर के हीरानगर में शनिवार रात बजरंग दल के जिला संयोजक के भतीजे की बारात में जमकर हंगामा हो गया। एसीपी की गाड़ी को रास्ता नहीं देने पर वह बिफर गईं। सड़क पर ही बहस करने लगीं। इसके चलते वहां ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई। बाद में टीआई मौके पर पहुंचे और मामले को शांत किया। मामला गौरी नगर के पास एक्सिस बैंक के पास का है। यहां बजरंग दल के जिला संयोजक जयेश मौर्य की बारात निकल रही थी। इस दौरान व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए बाउंसर भी लगाए गए थे। तभी वहां से महिला एसीपी रूबिना मिजवानी अपनी जीप से गुजर रही थीं। सड़क पर जाम से नाराज हो गईं सड़क पर जाम की स्थिति होने के चलते महिला एसीपी गुस्सा हो गईं। उन्होंने कुछ युवकों को धक्का दे दिया। इस दौरान कुछ हिंदूवादियों ने महिला एसीपी से कह दिया कि वह पाकिस्तान जाकर बारात निकालें। महिला एसीपी का कहना था कि बारात के चलते सड़क पर जाम लग रहा है। उन्होंने यहां करीब आधे घंटे तक बारात को नहीं निकलने दिया। टीआई ने खुलवाया जाम जानकारी मिलने के बाद टीआई सुशील पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने युवकों को समझाया और बारात को मौके से रवाना किया। बताया जा रहा है कि हिंदूवादियों ने साफ तौर पर कहा कि अगर शादी नहीं होती तो वे बताते। हालांकि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों तक एसीपी के व्यवहार को लेकर शिकायत करने की बात कही। बाणगंगा में भी हो चुका है विवाद इससे पहले भी महिला एसीपी से चेकिंग के दौरान एक कार में सवार महिला ने भी बदतमीजी की थी। तब भी महिला एसीपी ने मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। हालांकि सोशल मीडिया पर इसका मैसेज वायरल हुआ था। ऑफिस शिफ्ट होने के बाद होती है दिक्कत हीरानगर एसीपी रूबिना मिजवानी का ऑफिस पहले गौरी नगर सब्जी मंडी में था, लेकिन 6 माह से वह हीरानगर थाने के ऊपर बैठने लगी हैं। इसके चलते अफसरों ने उन्हें कुछ दिन पहले नया ऑफिस ढूंढने के लिए कहा था, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उन्हें इस ऑफिस में आने-जाने के दौरान कई बार जाम में फंसना पड़ता है।

CM का 4 मई को ग्वालियर में प्रस्तावित कार्यक्रम:कलेक्टर-SP ने लिया जायजा, ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन में होंगे शामिल

CM का 4 मई को ग्वालियर में प्रस्तावित कार्यक्रम:कलेक्टर-SP ने लिया जायजा, ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन में होंगे शामिल

ग्वालियर शहर में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तावित ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। 4 मई को शीतला माता मंदिर, शिवपुरी लिंक रोड पर आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए रविवार को कलेक्टर रुचिका चौहान एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रशासन द्वारा आयोजन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं, मंच व्यवस्था, वीआईपी प्रोटोकॉल, पेयजल, स्वच्छता, पार्किंग और आमजन की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं पुलिस प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर, एसडीएम अतुल सिंह, एसडीएम नरेन्द्र बाबू यादव, अपर आयुक्त नगर निगम मुनीष सिकरवार, अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. रत्नम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विश्वविद्यालय से जुड़े पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

जल गंगा संवर्धन अभियान: देश में नंबर वन बना एमपी:नेशनल रैंकिंग में डिंडौरी पहले और खंडवा दूसरे स्थान पर

जल गंगा संवर्धन अभियान: देश में नंबर वन बना एमपी:नेशनल रैंकिंग में डिंडौरी पहले और खंडवा दूसरे स्थान पर

मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के ‘जल संचय भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तहत मध्यप्रदेश अब पूरे देश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। बीते 5 मार्च तक मध्यप्रदेश इस सूची में छठे स्थान पर था, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की निरंतर समीक्षा और जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने के परिणामस्वरूप प्रदेश ने रैंकिंग में यह लंबी छलांग लगाई है। डिंडौरी नेशनल रैंकिंग में पहले नंबर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल प्रबंधन के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश के सामने एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है । इस अभियान की सफलता में जिलों का योगदान भी सराहनीय रहा है, जहां राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में डिंडौरी जिला पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में इस महाअभियान के तहत 16 सरकारी विभागों की 82 प्रमुख गतिविधियों को चिन्हित किया गया है, जिसके माध्यम से जल संरचनाओं के पुनर्जीवन और नए जल स्रोतों के निर्माण पर युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। अभियान के तहत न केवल ग्रामीण बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी बडे़ स्तर पर काम किए जा रहे हैं। वन भूमि पर होने वाले जल संरक्षण कार्यों को गति देने के लिए एक विशेष ‘ऑनलाइन ऐप’ भी विकसित किया गया है, जिससे अनुमति की प्रक्रिया सुगम और पारदर्शी हो गई है। अभियान से जुड़े आंकड़े फॉर्म पॉन्ड, अमृत सरोवर बनाए जा रहे पूरे अभियान के लिए 6,630 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत खंडवा जिला प्रदेश में पहले, खरगोन दूसरे और डिंडौरी तीसरे स्थान पर है।अभियान में फार्म पॉन्ड, अमृत सरोवर और पुराने मनरेगा कार्यों को पूर्ण करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।