सड़क के गड्ढ़ों में ई-रिक्शा से सफर, तय मानिए चोरी:ग्वालियर में दिल्ली-यूपी का गैंग सक्रिय, स्टेशन-बस स्टैंड से एक किलोमीटर का एरिया डेंजर जोन

यदि आप ग्वालियर में स्टेशन या रोडवेज व प्राइवेट बस स्टैंड के आसपास से ई-रिक्शा (टमटम) में सवार हो रहे हैं। आगे रास्ता खराब है और आपके बैग में गहने या नकदी है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। ग्वालियर की खुदी सड़कों पर ई-रिक्शा में झटके लगने के बीच उसमें सवार चोर महिलाएं आपके बैग से कब गहने-नकदी निकाल ले जाएंगी यह पता भी नहीं चलेगा। जब तक गहने-नकदी चोरी का पता चलेगा काफी देर हो चुकी होगी। ग्वालियर में पिछले दो महीने में 29 इस तरह की वारदात हुई हैं। जिसमें कुछ न कुछ सामान चोरी हुआ है। वारदात के बाद पुलिस के हाथ में CCTV कैमरे की फुटेज रह जाती है। लगातार वारदात के बाद पुलिस ने ई-रिक्शा में सवार गैंग का पता लगाने क्राइम ब्रांच की टीम भी लगा रखी हैं। एक किलोमीटर के एरिया में वारदात ग्वालियर में ई-रिक्शा में चोरी करने वाला यह यूपी के आगरा, इटावा का गिरोह है। यह स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड, गोला का मंदिर बस स्टैंड, झांसी रोड बस स्टैंड के आसपास सक्रिय रहता है। एक किलोमीटर का एरिया इस गिरोह का रोड मैप होता है। बाहर से आने वाले मुसाफिरों के लिए यही डेंजर जोन रहता है। यह गैंग बाहर से आने वाले मुसाफिरों को टारगेट कर उनके साथ ई-रिक्शा में सवार होते हैं। जब सड़क के गड्ढों के बीच से ई-रिक्शा गुजर रहा होता है और उसमें सवार लोग झटके खा रहे होते हैं। गैंग के सदस्य मुसाफिर के बैग पर हाथ मारकर गहने-नकदी पार कर देते हैं। गैंग में दो महिलाएं व पुरुष शामिल ग्वालियर में पिछले दो महीने में ई-रिक्शा में 29 चोरी की वारदात हुई हैं। सभी वारदातों में चोरी का संदेह ई-रिक्शा में फरियादी के साथ सवार एक या दो महिलाएं रहीं हैं। गैंग में एक पुरुष साथी भी होता है, जो वारदात के बाद इनको स्पॉट से निकाल ले जाने में एक्सपर्ट होता है। खुदी सड़कें कर रहीं चोरों का काम आसान वैसे ई-रिक्शा में बैठकर किसी के बैग पर हाथ साफ करना आसान नहीं होता है, लेकिन ग्वालियर शहर की खुदी व जर्जर सड़क चोर गिरोह के काम को आसान बना देती हैं। ई-रिक्शा में सॉकर नहीं होते हैं। ऐसे में जब वह खुद सड़क पर आता है तो उसमें आम वाहनों की अपेक्षा ज्यादा तेज झटके लगते हैं। इसी बीच आसपास बैठी महिलां चोर टारगेट के बैग पर हाथ साफ कर जाती हैं। यही कारण है कि सबसे ज्यादा वारदात जर्जर सड़क पर हुई हैं। थानों की सीमा का विवाद बचाता है चोर इस तरह की वारदातों में फरियादी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एफआईआर कराना होता है। ई-रिक्शा में सफर के दौरान वारदात में कई थानों की सीमा बदल जाती है। इसके बाद फरियादी वारदात के बाद कई थानों के चक्कर काटता है। वारदात के चार से पांच दिन बाद पुलिस अफसरों के हस्तक्षेप के बाद घटना को दर्ज करती है। वारदात करने वालों को भागने के लिए पूरा मौका मिल जाता है। यह है ई-रिक्शा में चोरी के बड़े मामले केस-1 – थाटीपुर निवासी 28 वर्षीय रीना जाटव अपने पिता लोकेन्द्र सिंह जाटव के साथ 16 अप्रैल को पुरानी छावनी में एक रिश्तेदार के घर शादी समारोह में जा रही थीं पहले वह थाटीपुर से टेंपो में गोला का मंदिर चौराहे तक पहुंचीं, जहां से दोनों नीले रंग के ई-रिक्शा में सवार हुए। कुछ दूरी बाद एक अन्य महिला भी ई-रिक्शा में बैठी, जो रीना के पास आकर बैठ गई। रास्ते में जब-जब ई-रिक्शा गड्ढों से गुजरा, संदेही महिला पर्स से पांच लाख के गहने चोरी कर यादव धर्मकांटा के पास उतर गई। पुरानी छावनी पहुंचकर महिला ने बैग देखा तो घटना का पता लगा। 16 अप्रैल की घटना के बाद पीड़िता गोला का मंदिर, हजीरा व पुरानी छावनी तीन थानों के चक्कर काटती रही। केस-2 – मुरैना निवासी 32 वर्षीय भारत सिंह राठौर, पिता रमेश सिंह राठौर, दिल्ली में ज्वेलरी का कारोबार करते हैं। वह बहन के ससुर के निधन पर मुरैना आए थे और कार्यक्रम के बाद पत्नी के साथ आदित्यपुरम स्थित ससुराल जा रहे थे। गोला का मंदिर पर बस से उतरने के बाद उन्होंने ई-रिक्शा (MP 07 ZJ 0250) लिया। कुछ दूरी पर दो महिलाएं भी उसमें बैठ गईं। डीडी नगर गेट के पास उतरने के बाद किराया देकर वे आगे बढ़े। तभी बैग की चेन खुली दिखी। बैग चेक करने पर दो लाख के गहने गायब मिले। उन्होंने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची जब तक महिलाएं भाग चुकी थीं। केस-3 – ग्वालियर के करगंवा गांव निवासी 35 वर्षीय संजय सिंह जाटव पत्नी सपना जाटव और बच्चों के साथ भिंड में शादी समारोह में गए थे। 5 अप्रैल को लौटते समय वे बस से गोला का मंदिर चौराहा पर उतरे और वहां से मुरार 6 नंबर चौराहा के लिए एक लाल रंग का ई-रिक्शा किराए पर लिया। कुछ ही दूरी तय करने के बाद गोला का मंदिर स्थित शराब दुकान के पास ई-रिक्शा चालक ने दो महिलाओं को और बैठा लिया। ई-रिक्शा 6 नंबर चौराहा पहुंचा और दंपति उतरा, तब बैग चेक करने पर उसकी चेन खुली मिली। डीएसपी क्राइम मनीष यादव ने बताया ई-रिक्शा में चोरी की वारदात लगातार हो रही हैं। ग्वालियर में बाहर की कुछ गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। पुलिस की टीम स्टेशन-बस स्टैंड के आसपास सक्रिय है। साथ ही घटना के बाद मिले CCTV फुटेज से भी गैंग की तलाश की जा रही है।
सड़क के गड्ढ़ों में ई-रिक्शा से सफर, तय मानिए चोरी:ग्वालियर में दिल्ली-यूपी का गैंग सक्रिय, स्टेशन-बस स्टैंड से एक किलोमीटर का एरिया डेंजर जोन

यदि आप ग्वालियर में स्टेशन या रोडवेज व प्राइवेट बस स्टैंड के आसपास से ई-रिक्शा (टमटम) में सवार हो रहे हैं। आगे रास्ता खराब है और आपके बैग में गहने या नकदी है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। ग्वालियर की खुदी सड़कों पर ई-रिक्शा में झटके लगने के बीच उसमें सवार चोर महिलाएं आपके बैग से कब गहने-नकदी निकाल ले जाएंगी यह पता भी नहीं चलेगा। जब तक गहने-नकदी चोरी का पता चलेगा काफी देर हो चुकी होगी। ग्वालियर में पिछले दो महीने में 29 इस तरह की वारदात हुई हैं। जिसमें कुछ न कुछ सामान चोरी हुआ है। वारदात के बाद पुलिस के हाथ में CCTV कैमरे की फुटेज रह जाती है। लगातार वारदात के बाद पुलिस ने ई-रिक्शा में सवार गैंग का पता लगाने क्राइम ब्रांच की टीम भी लगा रखी हैं। एक किलोमीटर के एरिया में वारदात ग्वालियर में ई-रिक्शा में चोरी करने वाला यह यूपी के आगरा, इटावा का गिरोह है। यह स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड, गोला का मंदिर बस स्टैंड, झांसी रोड बस स्टैंड के आसपास सक्रिय रहता है। एक किलोमीटर का एरिया इस गिरोह का रोड मैप होता है। बाहर से आने वाले मुसाफिरों के लिए यही डेंजर जोन रहता है। यह गैंग बाहर से आने वाले मुसाफिरों को टारगेट कर उनके साथ ई-रिक्शा में सवार होते हैं। जब सड़क के गड्ढों के बीच से ई-रिक्शा गुजर रहा होता है और उसमें सवार लोग झटके खा रहे होते हैं। गैंग के सदस्य मुसाफिर के बैग पर हाथ मारकर गहने-नकदी पार कर देते हैं। गैंग में दो महिलाएं व पुरुष शामिल ग्वालियर में पिछले दो महीने में ई-रिक्शा में 29 चोरी की वारदात हुई हैं। सभी वारदातों में चोरी का संदेह ई-रिक्शा में फरियादी के साथ सवार एक या दो महिलाएं रहीं हैं। गैंग में एक पुरुष साथी भी होता है, जो वारदात के बाद इनको स्पॉट से निकाल ले जाने में एक्सपर्ट होता है। खुदी सड़कें कर रहीं चोरों का काम आसान वैसे ई-रिक्शा में बैठकर किसी के बैग पर हाथ साफ करना आसान नहीं होता है, लेकिन ग्वालियर शहर की खुदी व जर्जर सड़क चोर गिरोह के काम को आसान बना देती हैं। ई-रिक्शा में सॉकर नहीं होते हैं। ऐसे में जब वह खुद सड़क पर आता है तो उसमें आम वाहनों की अपेक्षा ज्यादा तेज झटके लगते हैं। इसी बीच आसपास बैठी महिलां चोर टारगेट के बैग पर हाथ साफ कर जाती हैं। यही कारण है कि सबसे ज्यादा वारदात जर्जर सड़क पर हुई हैं। थानों की सीमा का विवाद बचाता है चोर इस तरह की वारदातों में फरियादी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एफआईआर कराना होता है। ई-रिक्शा में सफर के दौरान वारदात में कई थानों की सीमा बदल जाती है। इसके बाद फरियादी वारदात के बाद कई थानों के चक्कर काटता है। वारदात के चार से पांच दिन बाद पुलिस अफसरों के हस्तक्षेप के बाद घटना को दर्ज करती है। वारदात करने वालों को भागने के लिए पूरा मौका मिल जाता है। यह है ई-रिक्शा में चोरी के बड़े मामले केस-1 – थाटीपुर निवासी 28 वर्षीय रीना जाटव अपने पिता लोकेन्द्र सिंह जाटव के साथ 16 अप्रैल को पुरानी छावनी में एक रिश्तेदार के घर शादी समारोह में जा रही थीं पहले वह थाटीपुर से टेंपो में गोला का मंदिर चौराहे तक पहुंचीं, जहां से दोनों नीले रंग के ई-रिक्शा में सवार हुए। कुछ दूरी बाद एक अन्य महिला भी ई-रिक्शा में बैठी, जो रीना के पास आकर बैठ गई। रास्ते में जब-जब ई-रिक्शा गड्ढों से गुजरा, संदेही महिला पर्स से पांच लाख के गहने चोरी कर यादव धर्मकांटा के पास उतर गई। पुरानी छावनी पहुंचकर महिला ने बैग देखा तो घटना का पता लगा। 16 अप्रैल की घटना के बाद पीड़िता गोला का मंदिर, हजीरा व पुरानी छावनी तीन थानों के चक्कर काटती रही। केस-2 – मुरैना निवासी 32 वर्षीय भारत सिंह राठौर, पिता रमेश सिंह राठौर, दिल्ली में ज्वेलरी का कारोबार करते हैं। वह बहन के ससुर के निधन पर मुरैना आए थे और कार्यक्रम के बाद पत्नी के साथ आदित्यपुरम स्थित ससुराल जा रहे थे। गोला का मंदिर पर बस से उतरने के बाद उन्होंने ई-रिक्शा (MP 07 ZJ 0250) लिया। कुछ दूरी पर दो महिलाएं भी उसमें बैठ गईं। डीडी नगर गेट के पास उतरने के बाद किराया देकर वे आगे बढ़े। तभी बैग की चेन खुली दिखी। बैग चेक करने पर दो लाख के गहने गायब मिले। उन्होंने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची जब तक महिलाएं भाग चुकी थीं। केस-3 – ग्वालियर के करगंवा गांव निवासी 35 वर्षीय संजय सिंह जाटव पत्नी सपना जाटव और बच्चों के साथ भिंड में शादी समारोह में गए थे। 5 अप्रैल को लौटते समय वे बस से गोला का मंदिर चौराहा पर उतरे और वहां से मुरार 6 नंबर चौराहा के लिए एक लाल रंग का ई-रिक्शा किराए पर लिया। कुछ ही दूरी तय करने के बाद गोला का मंदिर स्थित शराब दुकान के पास ई-रिक्शा चालक ने दो महिलाओं को और बैठा लिया। ई-रिक्शा 6 नंबर चौराहा पहुंचा और दंपति उतरा, तब बैग चेक करने पर उसकी चेन खुली मिली। डीएसपी क्राइम मनीष यादव ने बताया ई-रिक्शा में चोरी की वारदात लगातार हो रही हैं। ग्वालियर में बाहर की कुछ गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। पुलिस की टीम स्टेशन-बस स्टैंड के आसपास सक्रिय है। साथ ही घटना के बाद मिले CCTV फुटेज से भी गैंग की तलाश की जा रही है।
Karnal Youth Sukhminder Dies; Family Pleads to Bring Body Home

अमेरिका के स्टोर में जिंदा जले सुखविंद्र (बाएं) और पंजाब निवासी स्टोर मालिक (दाएं) की फाइल फोटो। हरियाणा के युवक की अमेरिका के टेक्सास शहर में फूड स्टोर में लगी आग में जिंदा जलकर मौत हो गई। इस घटना में पंजाब के रहने वाले स्टोर मालिक की भी मौत हो गई। जिस वक्त आग लगी, उस समय युवक और उसका मालिक स्टोर के अंदर ही सो रहे थे। . टेक्सास पुलिस के मुताबिक, आग इतनी तेजी से लगी कि दोनों को स्टोर से बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जब तक आग बुझाई जाती, दोनों की मौत हो चुकी थी और पूरा स्टोर भी जल गया था। हालांकि, आग कैसे लगी, इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। युवक की पहचान करनाल जिले के गांव गंगाटेहड़ी निवासी सुखविंद्र सिंह (22) पुत्र शीशपाल के रूप में हुई। वह परिवार को इकलौता बेटा था। परिवार ने 50 लाख रुपए खर्च कर उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजा था। अमेरिका के टेक्सास शहर के इसी स्टोर में काम करता था करनाल का सुखविंद्र सिंह। युवक सुखविंद्र के करनाल से अमेरिका तक के सफर की कहानी… 50 लाख खर्च कर चार साल पहले अमेरिका गया : गांव गंगाटेहड़ी निवासी शीशपाल ने बताया कि उसका बेटा सुखविंद्र करीब चार साल पहले डंकी रूट के जरिए अमेरिका गया था। सुखविंद्र ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। परिवार ने उसे विदेश भेजने के लिए करीब 50 लाख रुपए खर्च किए थे। कई महीनों की मशक्कत के बाद वह अमेरिका पहुंचा था और टेक्सास शहर के फूड स्टोर में काम करने लगा था। स्टोर में ही करता था काम और वहीं सोता था : सुखविंद्र सिंह जिस स्टोर में काम करता था, वह स्टोर पंजाब के रहने वाले एक व्यक्ति का था। काम खत्म करने के बाद वह वहीं सो जाता था। भारतीय समय के अनुसार 26 अप्रैल की सुबह सुखविंद्र और स्टोर मालिक दोनों काम के बाद स्टोर में सोए हुए थे। इसी दौरान अचानक आग लग गई और दोनों अंदर ही फंस गए। फायर ब्रिगेड ने आग पर पाया काबू, लेकिन नहीं बच सकी जान आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी और दोनों की जिंदा जलकर मौत हो चुकी थी। स्टोर और उसके अंदर रखा सामान भी पूरी तरह जल गया था। इसके बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर मोर्च्युरी भेज दिया। तीसरा कर्मचारी उस दिन नहीं था मौजूद : स्टोर में एक और युवक भी काम करता था, लेकिन घटना वाले दिन वह बाहर गया हुआ था। आग लगने के बाद जब उसे इस घटना की जानकारी मिली तो वह तुरंत वापस लौटा और उसने ही सुखविंद्र के परिवार को इस हादसे की सूचना दी। सुखविंद्र की मौत के बाद सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट… इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ उधर, इस घटना की खबर मिलते ही गांव और परिवार में मातम छा गया। हर कोई परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहा है। सुखविंद्र सिंह अपने परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। उसके पिता शीशपाल खेतीबाड़ी करते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में पसरा सन्नाटा, सरपंच ने लगाई मदद की गुहार गांव गंगाटेहड़ी के सरपंच कुलदीप ने बताया कि सुखविंद्र बहुत ही मेहनती और अच्छा लड़का था। वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अमेरिका गया था और वहां काम भी करने लगा था। उन्होंने सरकार से मांग की है कि परिवार की आर्थिक मदद की जाए और सुखविंद्र का शव जल्द से जल्द भारत लाने में सहायता की जाए। ——————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका से भारत पहुंचा करनाल के युवक का शव:पिता ने नम आखों से दी मुखाग्नि, सड़क हादसे में हुई थी मौत, जमीन गिरवी रखकर गया डेढ़ साल पहले हरियाणा में करनाल के घोघड़ीपुर गांव के एक 20 वर्षीय युवक की अमेरिका सड़क हादसे में मौत के बाद उसका शव वीरवार देर रात को अमेरिका से भारत लाया गया। आज सुबह उसका शव को दिल्ली एयरपोर्ट से एंबुलेंस के जरिए उनके पैतृक गांव लाया गया। आर्यन का शव जब घर पर पहुंचा तो उसकी मां व उसकी बड़ी बहन दोनों ही बेहोश हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)
ग्वालियर में PTS परिसर की दीवारें बन गई कैनवास:25 आरक्षक कर रहे दीवारों पर चित्रकारी; राजस्थान से ट्रेनिंग लेने आया है 1020 नवआरक्षकों का बैच

ग्वालियर के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) तिघरा में एक अनूठी पहल शुरू की गई है। राजस्थान पुलिस से आए 1020 नवआरक्षकों के बैच में से 25 प्रशिक्षुओं को चुना गया है, जिन्हें पेंटिंग का शौक है। ये नवआरक्षक पीटीएस परिसर की 350 से अधिक दीवारों पर चित्रकारी कर रहे हैं। यह रचनात्मक कार्य प्रशिक्षण के साथ-साथ परिसर को आकर्षक बना रहा है और नवाचार का उदाहरण पेश कर रहा है। पीटीएस परिसर की दीवारें अब कैनवास बन गई हैं, जिन पर रंगों के माध्यम से संस्कृति, परंपरा और सामाजिक संदेश उकेरे जा रहे हैं। प्रशिक्षु आरक्षक कड़ी धूप में भी दिन-रात वॉल पेंटिंग का काम कर रहे हैं। अब तक 50 से अधिक दीवारों पर चित्रकारी पूरी हो चुकी है। इन चित्रों में राजस्थान की लोक कला और मध्यप्रदेश की पारंपरिक गोंड कला का संगम देखा जा सकता है। पिछवाई कला, कच्ची घोड़ी जैसी कलाओं को उकेरा दीवारों पर नाथद्वारा की पिछवाई कला, शेखावाटी क्षेत्र की कच्ची घोड़ी और बीकानेर की उस्ता कला को बारीकी से दर्शाया है। मध्यप्रदेश की गोंड कला भी इन चित्रों में प्रमुखता से शामिल है। कलाकार नवआरक्षक पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर भी चित्रों के माध्यम से संदेश दे रहे हैं। प्रशिक्षु आरक्षकों ने बताया कि उन्हें पीटीएस की इंस्ट्रक्टर निरीक्षक नीलम तंवर ने इस कार्य के लिए प्रेरित किया। एसपी के मार्गदर्शन से उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिला। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि वे अपनी कला के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्र को सुंदर बना रहे हैं। एमपी-राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन प्रशिक्षु अजीत ने जानकारी दी कि उनकी टीम पिछले 15-20 दिनों से लगातार वॉल पेंटिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रयास का उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ प्रदर्शित करना भी है। सभी साथी इस कार्य को टीमवर्क के रूप में पूरा कर रहे हैं।
PM की सिक्किम में जनसभा आज:राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे; ₹4000 करोड़ की योजनाएं शुरु करेंगे

पीएम मोदी दो दिवसीय सिक्किम दौरे पर हैं। आज वो राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे और ₹4000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद सुबह 10ः30 बजे राजधानी गंगटोक में जनसभा भी करेंगे। मोदी सोमवार को सिक्किम पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने लिबिंग हेलिपैड से गवर्नर हाउस (लोक भवन) तक उन्होंने रोड शो किया। 16 मई 2025 को सिक्किम को राज्य बने 50 साल पूरे हुए थे। तब पीएम वर्चुअली 50वें स्थापना दिवस समारोह से जुड़े थे। मंगलवार को एक साल से चल रहे समारोह का समापन होगा। पीएम के रोड शो की 3 तस्वीरें… 4 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास पीएम अपने दो दिवसीय दौरे पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, पर्यावरण और कृषि से जुड़ी लगभग ₹4 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इनमें नामची में 100 बेड का अस्पताल, देओराली में 30 बेड का अस्पताल, तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील पुल और गंगटोक में सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट शामिल हैं। 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का हिस्सा बना 1947- भारत की आजादी के समय नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना। अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। 1967- 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन भारत को समझ आ गया था कि उत्तर पूर्वी भारत में घुसने के लिए चीन, सिक्किम के रूट पर नजर गड़ाए बैठा है। सिक्किम के राजा चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। 1973- इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ आर. एन. काओ से मदद मांगी। इसके बाद काओ ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन का नाम था- ‘जनमत’ और ‘ट्विलाइट’। 1974- विधाससभा चुनाव के बदा काजी मुख्यमंत्री बने। उन्होंने विधानसभा में ‘द गवर्नमेंट ऑफ सिक्किम एक्ट, 1974’ पास कराया, जिससे सिक्किम को भारत के एसोसिएट स्टेट का दर्जा मिला। 25 जून 1974 को चोग्याल सिक्किम का भारत से अलग राज्य का दर्जा बनाए रखने की बात करने भारत आए, लेकिन इस बातचीत से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। 1975- 9 अप्रैल 1975 को भारतीय सेना की 64 माउंटेन ब्रिगेड सिक्किम के राजमहल पहुंची। एक सैनिक ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसे गोली मार दी गई। नितिन ए. गोखले अपनी किताब, ‘आर. एन. काओ- जेंटलमैन स्पायमास्टर’ में बताते हैं, ’20 मिनट से भी कम समय में भारतीय सेना ने सिक्किम गार्ड्स को निशस्त्र कर दिया।’ चोग्याल को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसके बाद 14 अप्रैल 1975 को सिक्किम में एक रेफरेंडम कराया गया, इसमें सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने या न होने के लिए वोटिंग की। 97.5% यानी 59,637 लोगों ने भारत में शामिल होने के पक्ष में वोट किए जबकि सिर्फ 1,496 लोगों ने इसका विरोध किया। 26 अप्रैल को सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने के लिए संसद में 36वां संविधान संशोधन बिल पास किया गया। ———————————————————- ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर भी लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। पूरी खबर पढ़ें…
Indian Idol Winner Vaibhav Guptas Dhurandar 2 Song Break

16 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक कानपुर के रहने वाले सिंगर वैभव गुप्ता ने अपनी मेहनत और जुनून से बड़ा मुकाम हासिल किया है। इंडियन आइडल सीजन 14 के विनर रहे वैभव अब फिल्म धुरंधर 2 में अपने गाने “मन अटकेया बेपरवाह दे नाल” से सुर्खियों में हैं। छह साल तक लगातार रिजेक्शन झेलने के बाद मिली इस सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में वैभव गुप्ता ने बताया कि यह मौका उन्हें मैनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के दम पर मिला। छोटे शहर से निकली उनकी आवाज आज बड़े पर्दे तक पहुंच चुकी है, और उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। सवाल: सिंगिंग का सपना कब और कैसे शुरू हुआ? जवाब: सबसे पहले ये सपना मेरे पापा ने देखा। हमारे परिवार में कोई म्यूजिक से नहीं था, हम बिजनेस फैमिली से हैं। लोग कहते थे कि मैं भी दुकान ही संभालूंगा, लेकिन पापा ने मुझे उस सोच से बाहर निकाला। जब मैं 3 साल का था, बाथरूम में गाना गा रहा था—“तेरे मस्त-मस्त दो नैन…”। पापा ने सुना और मुझे गाने के लिए कहा। वहीं से शुरुआत हुई। सवाल: म्यूजिक की ट्रेनिंग कैसे शुरू हुई? जवाब: स्कूल में मेरे म्यूजिक टीचर आनंद गुप्ता जी ने मुझे पहली बार सुना और पापा को कॉल करके कहा कि “इस बच्चे में कुछ खास है।” उन्होंने मुझे फ्री पीरियड और जीरो पीरियड में सिखाया। आज भी मैं उन्हें हर उपलब्धि की खबर सबसे पहले देता हूं। सवाल: बचपन में कोई खास मोमेंट जो टर्निंग पॉइंट बना? जवाब: स्कूल के एक कंपटीशन में मैंने “तुझे सब है पता है ना मां” गाया और जीत गया। वहीं से पापा को लगा कि अब इस सफर को रोकना नहीं है। सवाल: इंडियन आइडल तक का सफर कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल। मैं 11-12 साल की उम्र से ऑडिशन दे रहा था। लगातार 6 साल तक रिजेक्ट हुआ। पापा मुझे कानपुर से मुंबई या दिल्ली लेकर आते थे, 1100-1200 किलोमीटर का सफर। कई बार मैं गाड़ी में सोता था और चाचा लाइन में लगते थे। जब मैं इंडियन आइडल सीजन 14 का विनर बना, तो वो सारे पल याद आते हैं। सवाल: प्राइज मनी का क्या किया? जवाब: मैंने म्यूजिक में इन्वेस्ट किया। माइक, लैपटॉप, ऑडियो इंटरफेस, गिटार लेकर अपना छोटा स्टूडियो बनाया, ताकि खुद की आवाज और काम पर बेहतर काम कर सकूं। सवाल: ‘धुरंधर 2’ का मौका आपको कैसे मिला? जवाब: जब धुरंधर 1 रिलीज हुई, मैं अपने दोस्त आदित्य प्रताप के साथ फिल्म देखने गया था। इंटरवल में उसने कहा—“काश तुम्हारा भी इस फिल्म में गाना होता।” हमने उस बात को बहुत दिल से चाहा। फिर 9 फरवरी को रात 2 बजे अचानक मुझे कॉल आया कि मुझे म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव और डायरेक्टर आदित्य धर के पास जाना है। उसी दिन मैंने काफी प्रैक्टिस की थी, तो मैं पूरी तरह तैयार था। सवाल: पहली मुलाकात और ऑडिशन का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैं उनके घर के स्टूडियो पहुंचा। वहां दोनों को सामने देखकर मैं थोड़ा नर्वस था। शाश्वत सर ने मुझे गाने के लिए कहा। जब मैंने गाया, तो आदित्य सर ने कहा—“तुम्हारी आवाज में कुछ खास है, तुम बहुत आगे जाओगे।” यह सुनकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और मैंने पूरी ईमानदारी से गाना गाया। सवाल: ‘मन अटकेया’ गाना कैसे तैयार हुआ? जवाब: शुरुआत में मैंने कई स्क्रैच वर्जन गाए। इस गाने के करीब 6 वर्जन बने। जो फाइनल वर्जन आज लोग सुनते हैं, वह मैंने एल्बम लॉन्च वाले दिन सुबह 6 बजे सिर्फ 15 मिनट में रिकॉर्ड किया। यह गाना बाबा बुल्ले शाह के कलाम पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी भावना और सम्मान के साथ गाया। सवाल: रणवीर सिंह से मुलाकात कैसी रही? जवाब: म्यूजिक लॉन्च पर उनसे मिला। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा—“बहुत कमाल गाया है।” सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने मुझे नाम से याद रखा और बाद में भी “वैभू” कहकर बुलाया। वो बहुत अच्छे इंसान हैं। सवाल: गाने के बाद कैसा रिस्पॉन्स मिला? जवाब: बहुत अच्छा। इंस्टाग्राम पर रील्स बन रही हैं।एक दिन मैंने अपने ही गाने को जूस की दुकान पर बजते सुना—वो मेरे लिए बहुत बड़ा मोमेंट था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Indian Idol Winner Vaibhav Guptas Dhurandar 2 Song Break

32 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक कानपुर के रहने वाले सिंगर वैभव गुप्ता ने अपनी मेहनत और जुनून से बड़ा मुकाम हासिल किया है। इंडियन आइडल सीजन 14 के विनर रहे वैभव अब फिल्म धुरंधर 2 में अपने गाने “मन अटकेया बेपरवाह दे नाल” से सुर्खियों में हैं। छह साल तक लगातार रिजेक्शन झेलने के बाद मिली इस सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में वैभव गुप्ता ने बताया कि यह मौका उन्हें मैनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के दम पर मिला। छोटे शहर से निकली उनकी आवाज आज बड़े पर्दे तक पहुंच चुकी है, और उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। सवाल: सिंगिंग का सपना कब और कैसे शुरू हुआ? जवाब: सबसे पहले ये सपना मेरे पापा ने देखा। हमारे परिवार में कोई म्यूजिक से नहीं था, हम बिजनेस फैमिली से हैं। लोग कहते थे कि मैं भी दुकान ही संभालूंगा, लेकिन पापा ने मुझे उस सोच से बाहर निकाला। जब मैं 3 साल का था, बाथरूम में गाना गा रहा था—“तेरे मस्त-मस्त दो नैन…”। पापा ने सुना और मुझे गाने के लिए कहा। वहीं से शुरुआत हुई। सवाल: म्यूजिक की ट्रेनिंग कैसे शुरू हुई? जवाब: स्कूल में मेरे म्यूजिक टीचर आनंद गुप्ता जी ने मुझे पहली बार सुना और पापा को कॉल करके कहा कि “इस बच्चे में कुछ खास है।” उन्होंने मुझे फ्री पीरियड और जीरो पीरियड में सिखाया। आज भी मैं उन्हें हर उपलब्धि की खबर सबसे पहले देता हूं। सवाल: बचपन में कोई खास मोमेंट जो टर्निंग पॉइंट बना? जवाब: स्कूल के एक कंपटीशन में मैंने “तुझे सब है पता है ना मां” गाया और जीत गया। वहीं से पापा को लगा कि अब इस सफर को रोकना नहीं है। सवाल: इंडियन आइडल तक का सफर कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल। मैं 11-12 साल की उम्र से ऑडिशन दे रहा था। लगातार 6 साल तक रिजेक्ट हुआ। पापा मुझे कानपुर से मुंबई या दिल्ली लेकर आते थे, 1100-1200 किलोमीटर का सफर। कई बार मैं गाड़ी में सोता था और चाचा लाइन में लगते थे। जब मैं इंडियन आइडल सीजन 14 का विनर बना, तो वो सारे पल याद आते हैं। सवाल: प्राइज मनी का क्या किया? जवाब: मैंने म्यूजिक में इन्वेस्ट किया। माइक, लैपटॉप, ऑडियो इंटरफेस, गिटार लेकर अपना छोटा स्टूडियो बनाया, ताकि खुद की आवाज और काम पर बेहतर काम कर सकूं। सवाल: ‘धुरंधर 2’ का मौका आपको कैसे मिला? जवाब: जब धुरंधर 1 रिलीज हुई, मैं अपने दोस्त आदित्य प्रताप के साथ फिल्म देखने गया था। इंटरवल में उसने कहा—“काश तुम्हारा भी इस फिल्म में गाना होता।” हमने उस बात को बहुत दिल से चाहा। फिर 9 फरवरी को रात 2 बजे अचानक मुझे कॉल आया कि मुझे म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव और डायरेक्टर आदित्य धर के पास जाना है। उसी दिन मैंने काफी प्रैक्टिस की थी, तो मैं पूरी तरह तैयार था। सवाल: पहली मुलाकात और ऑडिशन का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैं उनके घर के स्टूडियो पहुंचा। वहां दोनों को सामने देखकर मैं थोड़ा नर्वस था। शाश्वत सर ने मुझे गाने के लिए कहा। जब मैंने गाया, तो आदित्य सर ने कहा—“तुम्हारी आवाज में कुछ खास है, तुम बहुत आगे जाओगे।” यह सुनकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और मैंने पूरी ईमानदारी से गाना गाया। सवाल: ‘मन अटकेया’ गाना कैसे तैयार हुआ? जवाब: शुरुआत में मैंने कई स्क्रैच वर्जन गाए। इस गाने के करीब 6 वर्जन बने। जो फाइनल वर्जन आज लोग सुनते हैं, वह मैंने एल्बम लॉन्च वाले दिन सुबह 6 बजे सिर्फ 15 मिनट में रिकॉर्ड किया। यह गाना बाबा बुल्ले शाह के कलाम पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी भावना और सम्मान के साथ गाया। सवाल: रणवीर सिंह से मुलाकात कैसी रही? जवाब: म्यूजिक लॉन्च पर उनसे मिला। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा—“बहुत कमाल गाया है।” सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने मुझे नाम से याद रखा और बाद में भी “वैभू” कहकर बुलाया। वो बहुत अच्छे इंसान हैं। सवाल: गाने के बाद कैसा रिस्पॉन्स मिला? जवाब: बहुत अच्छा। इंस्टाग्राम पर रील्स बन रही हैं।एक दिन मैंने अपने ही गाने को जूस की दुकान पर बजते सुना—वो मेरे लिए बहुत बड़ा मोमेंट था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
PM की सिक्किम में जनसभा आज:राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे; ₹4000 करोड़ की योजनाएं शुरु करेंगे

पीएम मोदी दो दिवसीय सिक्किम दौरे पर हैं। आज वो राज्य के 50वें स्थापना दिवस समारोह के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे और ₹4000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इसके बाद सुबह 10ः30 बजे राजधानी गंगटोक में जनसभा भी करेंगे। मोदी सोमवार को सिक्किम पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने लिबिंग हेलिपैड से गवर्नर हाउस (लोक भवन) तक उन्होंने रोड शो किया। 16 मई 2025 को सिक्किम को राज्य बने 50 साल पूरे हुए थे। तब पीएम वर्चुअली 50वें स्थापना दिवस समारोह से जुड़े थे। मंगलवार को एक साल से चल रहे समारोह का समापन होगा। पीएम के रोड शो की 3 तस्वीरें… 4 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास पीएम अपने दो दिवसीय दौरे पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, पर्यावरण और कृषि से जुड़ी लगभग ₹4 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इनमें नामची में 100 बेड का अस्पताल, देओराली में 30 बेड का अस्पताल, तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील पुल और गंगटोक में सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट शामिल हैं। 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का हिस्सा बना 1947- भारत की आजादी के समय नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना। अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। 1967- 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन भारत को समझ आ गया था कि उत्तर पूर्वी भारत में घुसने के लिए चीन, सिक्किम के रूट पर नजर गड़ाए बैठा है। सिक्किम के राजा चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। 1973- इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ आर. एन. काओ से मदद मांगी। इसके बाद काओ ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन का नाम था- ‘जनमत’ और ‘ट्विलाइट’। 1974- विधाससभा चुनाव के बदा काजी मुख्यमंत्री बने। उन्होंने विधानसभा में ‘द गवर्नमेंट ऑफ सिक्किम एक्ट, 1974’ पास कराया, जिससे सिक्किम को भारत के एसोसिएट स्टेट का दर्जा मिला। 25 जून 1974 को चोग्याल सिक्किम का भारत से अलग राज्य का दर्जा बनाए रखने की बात करने भारत आए, लेकिन इस बातचीत से स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। 1975- 9 अप्रैल 1975 को भारतीय सेना की 64 माउंटेन ब्रिगेड सिक्किम के राजमहल पहुंची। एक सैनिक ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसे गोली मार दी गई। नितिन ए. गोखले अपनी किताब, ‘आर. एन. काओ- जेंटलमैन स्पायमास्टर’ में बताते हैं, ’20 मिनट से भी कम समय में भारतीय सेना ने सिक्किम गार्ड्स को निशस्त्र कर दिया।’ चोग्याल को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसके बाद 14 अप्रैल 1975 को सिक्किम में एक रेफरेंडम कराया गया, इसमें सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने या न होने के लिए वोटिंग की। 97.5% यानी 59,637 लोगों ने भारत में शामिल होने के पक्ष में वोट किए जबकि सिर्फ 1,496 लोगों ने इसका विरोध किया। 26 अप्रैल को सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने के लिए संसद में 36वां संविधान संशोधन बिल पास किया गया। ———————————————————- ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर भी लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। पूरी खबर पढ़ें…
लेडी प्रिंसिपल बोली- लुधियाना मेयर पति ने फिगर फोटो मांगी:हॉट-सेक्सी के मैसेज भेजे, AAP नेताओं ने मदद नहीं की; अश्लील चैटिंग पढ़िए

लुधियाना की मेयर इंद्रजीत कौर के पति रवि आनंद लक्की पर अश्लील मैसेज भेजने के आरोप लगाने वाली प्रिंसिपल खुलकर सामने आई है। प्रिंसिपल ने कहा कि मेयर का पति मैसेज में उसे हॉट-सेक्सी लिखता था। उसकी फिगर फोटो मांगता था। लॉन्ग ड्राइव पर मनाली चलने का ऑफर देता था। प्राइवेट पार्ट को लेकर कई तरह की बातें कहता था। प्रिंसिपल ने कहा कि पति की मौत के बाद मेयर के पति ने हमदर्दी के बहाने चैटिंग शुरू की। उन्होंने इग्नोर किए और डिमांड नहीं मानी तो उन्हें निगम अफसर भेजकर तंग किया गया। उन्होंने CM भगवंत मान, पंजाब AAP इंचार्ज मनीष सिसोदिया, वुमन कमीशन तक को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक मेयर के पति लक्की का कोई पक्ष नहीं आया है। मेयर इंद्रजीत कौर का कहना है कि महिला को पुलिस कंप्लेंट करनी चाहिए, वहीं से इसकी जांच होगी। मेयर के पति पर लगाए आरोपों को लेकर दैनिक भास्कर ने प्रिंसिपल से बात की, जिसमें उन्होंने मेयर पति को ऑटो ड्राइवर रहते स्कूल से निकालने से लेकर अश्लील चैटिंग तक के बारे में पूरी कहानी बताई… ऑटो ड्राइवर था मेयर का पति, ब्याज पर पैसे लिए इसको लेकर लुधियाना के एक प्ले-वे स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि करीब 7 साल पहले मेयर इंद्रजीत कौर का पति रवि आनंद उर्फ लक्की उनके स्कूल में ऑटो ड्राइवर था। वह ऑटो पर बच्चों को स्कूल लेकर आता था और घर लेकर जाता था। प्रिंसिपल ने बताया कि रवि आनंद की पत्नी इंद्रजीत कौर ने अपनी किसी जानकार महिला को ब्याज पर डेढ़ लाख रुपए उधार दिलाए। 2 महीने बाद महिला ने फिर उनसे 1 लाख रुपए उधार लिए। रुपए नहीं लौटाए, विवाद के बाद मेयर के पति को निकाल दिया 2 महीने बीत गए और लेकिन उसने किस्त नहीं दी तो मेरे पति ने उससे पैसे मांगे। उसने 50 हजार रुपए वापस दिए और कहा कि बाकी के पैसे इंद्रजीत मैडम देंगे क्योंकि वो उन्होंने ही लिए थे। जिसको लेकर विवाद हुआ। इनकी स्थिति अच्छी नहीं थी हमने पैसे नहीं मांगे। इसी विवाद में लक्की को भी स्कूल से निकाल दिया। बाद में पता चला कि उसने भी पैरेंट्स से 2-2 महीने के पैसे एडवांस लिए थे। इंद्रजीत कौर व लक्की ने उनके पैसे अभी तक वापस नहीं दिए। इंद्रजीत मेयर बनीं तो बधाई देने गए प्रिंसिपल ने बताया कि वो आम आदमी पार्टी में महिला विंग की ब्लॉक प्रधान बनी। उसके बाद जब इंद्रजीत कौर मेयर बनी तो वो उन्हें बधाई देने अपने स्टाफ के साथ गई। बधाई दी तो उस दौरान मेयर व लक्की के साथ पूरे स्टाफ ने फोटो खिंचवाई। पति बीमार हुए तो मेयर का पति मैसेज करने लगा प्रिंसिपल ने बताया कि अक्तूबर 2025 में उसके पति बीमार हुए और चंडीगढ़ सेक्टर 32 के अस्पताल में दाखिल थे। मैंने फेसबुक पर पोस्ट डाली कि मेरे पति बीमार हैं उनके लिए दुआ करें। जिस पर मेयर पति लक्की ने उन्हें मैसेज करके कहा कि वो उनके साथ है। जो जरूरत होगी तो बताना। प्रिंसिपल ने बताया कि पति की मौत के बाद दोनों संस्कार पर आए और फिर अफसोस करने भी आए। फिर उसने सांत्वना दी कि वो हमेशा उनके साथ हैं अगर कोई समस्या आएगी तो बताना। निगम से एक्टिवा छुड़वाईं, फिर मैसेज करने लगा प्रिंसिपल ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी उनके स्कूल के बाहर से 2 एक्टिवा उठाकर ले गए। उसके लिए लक्की को कहा था और उसने छुड़वा दिए। उसके बाद उसने मैसेज करने शुरू किए। पहले नॉर्मल मैसेज करता रहा तो मैं भी जवाब देती रही। महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद मैंने पार्टी की गतिविधियों में भी जाना कम कर दिया था। मैं फ्री थी तो घर पर क्लाउड किचन का बिजनेस शुरू किया। फेसबुक पर प्रचार के लिए मैं अच्छी ड्रेसेज पहनकर वीडियो डालती थी। उसके बाद इसने अश्लील मैसेज करने शुरू कर दिए। फिगर फोटो मांगे, नहीं दिए तो निगम अफसर भेजे प्रिंसिपल ने बताया कि लक्की लगातार उससे फिगर फोटो मांगता रहा, लेकिन उसने कभी फोटो नहीं भेजी। लक्की बार-बार कहता था कि फिगर की फोटो दे, जब मैंने फोटो नहीं भेजी तो उसने नगर निगम के अफसरों को उनके यहां तंग करने के लिए भेजा। नगर निगम वाले कभी नक्शे की बात करते तो कभी कुछ। फिर मैंने लक्की को कहा कि ये क्यों आ रहे हैं, जिस पर उसने फिर कहा कि मेरा कहना मान लो नहीं आएंगे। बेटे के कहने पर सबूत जुटाने लगी प्रिंसिपल ने बताया कि जब नगर निगम के अफसर रोज आने लगे तो बेटे ने पूछा कि आखिर ये लोग क्यों आ रहे हैं? उन्होंने बताया कि वो बेटे काे नहीं बताना नहीं चाहती थी लेकिन जब ज्यादा हो गया तो उसने बेटे को सबकुछ बता दिया। फिर बेटे ने कहा कि तुम उसके खिलाफ सबूत जुटाओ और उसके कुछ मैसेज का जवाब दो और स्क्रीनशॉट व स्क्रीन रिकार्डिंग करो। उसने बेटे के कहे मुताबिक उसके मैसेज का रिप्लाई करना शुरू किया। मैसेज में कहता- मैडम घर नहीं है, लॉन्ग ड्राइव पर चलो उसके बाद वो ज्यादा अश्लील मैसेज भेजने लगा। वो तब भी फिगर की फोटो की डिमांड करने लगा। बड़ी जिद की लेकिन फोटो नहीं भेजी। उसने यहां तक मैसेज भेजे कि लॉन्ग ड्राइव पर चलो। मेरी मैडम घर पर नहीं है, अकेला हूं। प्रिंसिपल का कहना है कि उसने इस तरह के किसी मैसेज का रिप्लाई नहीं किया। मैसेज भेजकर तुरंत डिलीट कर देता कुलदीप कौर ने बताया कि लक्की इतना शातिर रहा कि वो जो भी मैसेज भेजता था वो साथ के साथ डिलीट कर देता था। फिर भी उसने कुछ मैसेज का स्क्रीनशॉट ले लिया और एक वीडियो कॉल को स्क्रीन रिकार्डिंग कर दी। प्रिंसिपल ने जिन्हें शिकायत दी, उन्होंने क्या किया मेयर को बताया तो कैंप ऑफिस बुलाया प्रिंसिपल ने कहा कि जब उसने सबूत जुटा लिए तो सबसे पहले उसने मेयर इंद्रजीत कौर को लक्की के मैसेज भेजे। उन्होंने दावा किया कि ये मैसेज 11, 15 व 20 अप्रैल को भेजे और उनसे इंसाफ की मांग की। मगर, मेयर की तरफ से कुछ नहीं किया गया। 22 अप्रैल को मेयर
पंजाब में टूट रोकने में जुटी AAP:प्रदेश प्रभारी सिसोदिया ने सभी विधायक जालंधर तलब किए; 7 सांसद पार्टी छोड़ BJP जॉइन कर चुके

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब में टूट रोकने में जुट गई है। AAP के प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कल (29 अप्रैल) को सभी विधायक जालंधर तलब कर लिए हैं। इसमें ब्लॉक ऑब्जर्वर्स और फ्रंटल संगठनों के प्रमुखों को भी बुलाया गया है। मीटिंग में CM भगवंत मान भी शामिल रहेंगे। हालांकि मीटिंग का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। फिर भी माना जा रहा है कि इसमें 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद विधायकों का मन टटोला जाएगा। जालंधर में इससे पहले हुई मीटिंग को लेकर मीडिया ने दावा किया गया था कि उसमें CM ने 5-5 हजार रुपए तक रिश्वत लेने को लेकर विधायकों को फटकार लगाई थी। पंजाब में AAP में टूट की चर्चा क्यों? क्या वाकई विधायक AAP छोड़ सकते हैं? सिटिंग MLA को टिकट कटने का डर: पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. कृपाल सिंह औलख के अनुसार, आम आदमी पार्टी के कई विधायकों के इस समय विवाद चल रहे हैं या फिर वो पार्टी हाईकमान से नाराज हैं। राज्य में कई विधायक ऐसे हैं, जो एंटी इंकमबेंसी की वजह से पार्टी से किनारा कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी हलकों में अपने लेवल पर सर्वे करवा रही है। विधायाकों को डर है कि उनके टिकट न कट जाएं। अमृतसर से कुंवर विजय प्रताप कर चुके बगावत: अमृतसर से AAP विधायक व पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रहे हैं। बरगाड़ी कांड को लेकर वो लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। यही नहीं उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी खुलकर मोर्चा खोला है। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें निकाला नहीं है। अनमोल गगन मान ने भी पार्टी छोड़ दी थी: खरड़ से विधायक व पूर्व मंत्री गगन अनमोल मान ने भी पिछले साल राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान किया था। वो भी मंत्री पद से हटाए जाने के कारण पार्टी से नाराज चल रही थी। हालांकि बाद में पार्टी के पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा के मनाने पर वह फिर से एक्टिव हो गईं। 9 मंत्रियों की हो चुकी कैबिनेट से छुट्टी, वह नाराज: पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. औलख के अनुसार आम आदमी पार्टी की सरकार से 9 मंत्रियों की छुट्टी हो चुकी है। कैबिनेट से छुट्टी होने से कहीं न कहीं उनके मन में भी टीस है। जिनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी हुई है उनमें- अनमोल गगन मान, चेतन सिंह जौड़ामजरा, कुलदीप सिंह धालीवाल, ब्रह्म शंकर जिम्पा, बलकार सिंह, इंद्रबीर सिंह निज्जर, फौजा सिंह सरारी, विजय सिंगला के अलावा लालजीत भुल्लर के नाम शामिल हैं। लालजीत भुल्लर डीएम रंधावा सुसाइड केस में जेल में हैं। AAP ने राज्यसभा से पूछा- सांसदों के आगे से नाम कैसे हटाया इसी बीच AAP सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को चिट्ठी लिखकर राज्यसभा के रिकॉर्ड में AAP सांसदों के नाम के आगे से बिना इजाजत पार्टी का नाम हटाने पर जवाब मांगा। उन्होंने इस मामले की तुरंत जांच और जल्द लिखित जवाब देने का अनुरोध किया है। साथ ही उन सभी जरूरी आदेश की कॉपी भी मांगी है, जिनके आधार पर AAP का सांसदों के नाम के आगे से नाम हटाया गया है। 27 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सातों सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी दी थी, जिससे राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई, जबकि BJP की संख्या 113 हो गई है। BJP में शामिल होने वालों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी इन सांसदों को BJP के सदस्यों के रूप में दिखाया गया है। राघव चड्ढा ने कहा- AAP चंद करप्टों की पार्टी कल ही राघव चड्ढा ने खुद सामने आकर पार्टी छोड़ने की वजह बताई थी। उन्होंने कहा कि 15 साल देने के बाद AAP अब पहले जैसी नहीं रही और पार्टी का माहौल टॉक्सिक हो चुका है, जहां काम करने और बोलने तक की आजादी नहीं है। उनके मुताबिक, यह फैसला अकेले का नहीं, बल्कि 7 सांसदों का सामूहिक निर्णय है। AAP अब चंद करप्टों और कॉम्प्रोमाइज्ड लोगों की पार्टी बनकर रह गई है। जो अब देश के लिए नहीं, अपने पर्सनल फायदे के लिए काम करते हैं। राघव ने कहा- राजनीति में आने से पहले मैं प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेरे सामने एक बेहतरीन करियर था, लेकिन मैं उस करियर को छोड़कर राजनीति में आया। अपना करियर बनाने यहां नहीं आया। एक राजनीतिक पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना। उस पार्टी को अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज यह पार्टी वह पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। जानिए, 7 सांसदों के AAP छोड़ने के मामले में अब तक क्या हुआ.. 24 अप्रैल- शाम 4 बजे राघव चड्ढा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इसी दिन शाम को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा जॉइन कर ली। हालांकि बाकी 4 सांसद सामने नहीं आए। 25 अप्रैल- सुबह भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए 7 सांसदों पर टिप्पणी की, जिससे सियासी माहौल और गरम हो गया। उन्होंने लिखा- अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया, ये 7 चीजें मिलकर सब्जियां स्वादिष्ट बनाती हैं, लेकिन इनकी सब्जी नहीं बन सकती। 25 अप्रैल- AAP के हरपाल चीमा ने कहा कि सिर्फ 3 सांसद ही BJP में गए हैं और बाकी के साइन फर्जी हैं। 7 मेंबर एक साथ जाने चाहिए थे, तब कानून से बच सकते थे। इनके पास 18 महीने का ही टाइम बचा है। 25 अप्रैल- CM भगवंत मान ने 7 AAP सांसदों के पार्टी छोड़ने को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का टाइम मांगा। पंजाब सीएम ऑफिस से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक सीएम मान पंजाब के सभी विधायकों को लेकर दिल्ली जाकर राष्ट्रपति से मिलना चाहते हैं। वह पार्टी बदलने वाले 7 सांसदों के राइट टू रिकॉल की मांग करेंगे और इस पर अपना पक्ष रखेंगे। इसके अलावा AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उपराष्ट्रपति से मिलने की बात कही थी। 25 अप्रैल-








