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Indian Idol Winner Vaibhav Guptas Dhurandar 2 Song Break

Indian Idol Winner Vaibhav Guptas Dhurandar 2 Song Break

32 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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कानपुर के रहने वाले सिंगर वैभव गुप्ता ने अपनी मेहनत और जुनून से बड़ा मुकाम हासिल किया है। इंडियन आइडल सीजन 14 के विनर रहे वैभव अब फिल्म धुरंधर 2 में अपने गाने “मन अटकेया बेपरवाह दे नाल” से सुर्खियों में हैं। छह साल तक लगातार रिजेक्शन झेलने के बाद मिली इस सफलता की कहानी प्रेरणादायक है।

दैनिक भास्कर से बातचीत में वैभव गुप्ता ने बताया कि यह मौका उन्हें मैनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के दम पर मिला। छोटे शहर से निकली उनकी आवाज आज बड़े पर्दे तक पहुंच चुकी है, और उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

सवाल: सिंगिंग का सपना कब और कैसे शुरू हुआ?

जवाब: सबसे पहले ये सपना मेरे पापा ने देखा। हमारे परिवार में कोई म्यूजिक से नहीं था, हम बिजनेस फैमिली से हैं। लोग कहते थे कि मैं भी दुकान ही संभालूंगा, लेकिन पापा ने मुझे उस सोच से बाहर निकाला।

जब मैं 3 साल का था, बाथरूम में गाना गा रहा था—“तेरे मस्त-मस्त दो नैन…”। पापा ने सुना और मुझे गाने के लिए कहा। वहीं से शुरुआत हुई।

सवाल: म्यूजिक की ट्रेनिंग कैसे शुरू हुई?

जवाब: स्कूल में मेरे म्यूजिक टीचर आनंद गुप्ता जी ने मुझे पहली बार सुना और पापा को कॉल करके कहा कि “इस बच्चे में कुछ खास है।” उन्होंने मुझे फ्री पीरियड और जीरो पीरियड में सिखाया। आज भी मैं उन्हें हर उपलब्धि की खबर सबसे पहले देता हूं।

सवाल: बचपन में कोई खास मोमेंट जो टर्निंग पॉइंट बना?

जवाब: स्कूल के एक कंपटीशन में मैंने “तुझे सब है पता है ना मां” गाया और जीत गया। वहीं से पापा को लगा कि अब इस सफर को रोकना नहीं है।

सवाल: इंडियन आइडल तक का सफर कितना मुश्किल रहा?

जवाब: बहुत मुश्किल। मैं 11-12 साल की उम्र से ऑडिशन दे रहा था। लगातार 6 साल तक रिजेक्ट हुआ। पापा मुझे कानपुर से मुंबई या दिल्ली लेकर आते थे, 1100-1200 किलोमीटर का सफर। कई बार मैं गाड़ी में सोता था और चाचा लाइन में लगते थे। जब मैं इंडियन आइडल सीजन 14 का विनर बना, तो वो सारे पल याद आते हैं।

सवाल: प्राइज मनी का क्या किया?

जवाब: मैंने म्यूजिक में इन्वेस्ट किया। माइक, लैपटॉप, ऑडियो इंटरफेस, गिटार लेकर अपना छोटा स्टूडियो बनाया, ताकि खुद की आवाज और काम पर बेहतर काम कर सकूं।

सवाल: ‘धुरंधर 2’ का मौका आपको कैसे मिला?

जवाब: जब धुरंधर 1 रिलीज हुई, मैं अपने दोस्त आदित्य प्रताप के साथ फिल्म देखने गया था। इंटरवल में उसने कहा—“काश तुम्हारा भी इस फिल्म में गाना होता।” हमने उस बात को बहुत दिल से चाहा। फिर 9 फरवरी को रात 2 बजे अचानक मुझे कॉल आया कि मुझे म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव और डायरेक्टर आदित्य धर के पास जाना है। उसी दिन मैंने काफी प्रैक्टिस की थी, तो मैं पूरी तरह तैयार था।

सवाल: पहली मुलाकात और ऑडिशन का अनुभव कैसा रहा?

जवाब: मैं उनके घर के स्टूडियो पहुंचा। वहां दोनों को सामने देखकर मैं थोड़ा नर्वस था। शाश्वत सर ने मुझे गाने के लिए कहा। जब मैंने गाया, तो आदित्य सर ने कहा—“तुम्हारी आवाज में कुछ खास है, तुम बहुत आगे जाओगे।” यह सुनकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और मैंने पूरी ईमानदारी से गाना गाया।

सवाल: ‘मन अटकेया’ गाना कैसे तैयार हुआ?

जवाब: शुरुआत में मैंने कई स्क्रैच वर्जन गाए। इस गाने के करीब 6 वर्जन बने। जो फाइनल वर्जन आज लोग सुनते हैं, वह मैंने एल्बम लॉन्च वाले दिन सुबह 6 बजे सिर्फ 15 मिनट में रिकॉर्ड किया। यह गाना बाबा बुल्ले शाह के कलाम पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी भावना और सम्मान के साथ गाया।

सवाल: रणवीर सिंह से मुलाकात कैसी रही?

जवाब: म्यूजिक लॉन्च पर उनसे मिला। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा—“बहुत कमाल गाया है।” सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने मुझे नाम से याद रखा और बाद में भी “वैभू” कहकर बुलाया। वो बहुत अच्छे इंसान हैं।

सवाल: गाने के बाद कैसा रिस्पॉन्स मिला?

जवाब: बहुत अच्छा। इंस्टाग्राम पर रील्स बन रही हैं।एक दिन मैंने अपने ही गाने को जूस की दुकान पर बजते सुना—वो मेरे लिए बहुत बड़ा मोमेंट था।

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दैनिक भास्कर से बातचीत में वैभव गुप्ता ने बताया कि यह मौका उन्हें मैनिफेस्टेशन और कड़ी मेहनत के दम पर मिला। छोटे शहर से निकली उनकी आवाज आज बड़े पर्दे तक पहुंच चुकी है, और उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

सवाल: सिंगिंग का सपना कब और कैसे शुरू हुआ?

जवाब: सबसे पहले ये सपना मेरे पापा ने देखा। हमारे परिवार में कोई म्यूजिक से नहीं था, हम बिजनेस फैमिली से हैं। लोग कहते थे कि मैं भी दुकान ही संभालूंगा, लेकिन पापा ने मुझे उस सोच से बाहर निकाला।

जब मैं 3 साल का था, बाथरूम में गाना गा रहा था—“तेरे मस्त-मस्त दो नैन…”। पापा ने सुना और मुझे गाने के लिए कहा। वहीं से शुरुआत हुई।

सवाल: म्यूजिक की ट्रेनिंग कैसे शुरू हुई?

जवाब: स्कूल में मेरे म्यूजिक टीचर आनंद गुप्ता जी ने मुझे पहली बार सुना और पापा को कॉल करके कहा कि “इस बच्चे में कुछ खास है।” उन्होंने मुझे फ्री पीरियड और जीरो पीरियड में सिखाया। आज भी मैं उन्हें हर उपलब्धि की खबर सबसे पहले देता हूं।

सवाल: बचपन में कोई खास मोमेंट जो टर्निंग पॉइंट बना?

जवाब: स्कूल के एक कंपटीशन में मैंने “तुझे सब है पता है ना मां” गाया और जीत गया। वहीं से पापा को लगा कि अब इस सफर को रोकना नहीं है।

सवाल: इंडियन आइडल तक का सफर कितना मुश्किल रहा?

जवाब: बहुत मुश्किल। मैं 11-12 साल की उम्र से ऑडिशन दे रहा था। लगातार 6 साल तक रिजेक्ट हुआ। पापा मुझे कानपुर से मुंबई या दिल्ली लेकर आते थे, 1100-1200 किलोमीटर का सफर। कई बार मैं गाड़ी में सोता था और चाचा लाइन में लगते थे। जब मैं इंडियन आइडल सीजन 14 का विनर बना, तो वो सारे पल याद आते हैं।

सवाल: प्राइज मनी का क्या किया?

जवाब: मैंने म्यूजिक में इन्वेस्ट किया। माइक, लैपटॉप, ऑडियो इंटरफेस, गिटार लेकर अपना छोटा स्टूडियो बनाया, ताकि खुद की आवाज और काम पर बेहतर काम कर सकूं।

सवाल: ‘धुरंधर 2’ का मौका आपको कैसे मिला?

जवाब: जब धुरंधर 1 रिलीज हुई, मैं अपने दोस्त आदित्य प्रताप के साथ फिल्म देखने गया था। इंटरवल में उसने कहा—“काश तुम्हारा भी इस फिल्म में गाना होता।” हमने उस बात को बहुत दिल से चाहा। फिर 9 फरवरी को रात 2 बजे अचानक मुझे कॉल आया कि मुझे म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव और डायरेक्टर आदित्य धर के पास जाना है। उसी दिन मैंने काफी प्रैक्टिस की थी, तो मैं पूरी तरह तैयार था।

सवाल: पहली मुलाकात और ऑडिशन का अनुभव कैसा रहा?

जवाब: मैं उनके घर के स्टूडियो पहुंचा। वहां दोनों को सामने देखकर मैं थोड़ा नर्वस था। शाश्वत सर ने मुझे गाने के लिए कहा। जब मैंने गाया, तो आदित्य सर ने कहा—“तुम्हारी आवाज में कुछ खास है, तुम बहुत आगे जाओगे।” यह सुनकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और मैंने पूरी ईमानदारी से गाना गाया।

सवाल: ‘मन अटकेया’ गाना कैसे तैयार हुआ?

जवाब: शुरुआत में मैंने कई स्क्रैच वर्जन गाए। इस गाने के करीब 6 वर्जन बने। जो फाइनल वर्जन आज लोग सुनते हैं, वह मैंने एल्बम लॉन्च वाले दिन सुबह 6 बजे सिर्फ 15 मिनट में रिकॉर्ड किया। यह गाना बाबा बुल्ले शाह के कलाम पर आधारित है, इसलिए इसे पूरी भावना और सम्मान के साथ गाया।

सवाल: रणवीर सिंह से मुलाकात कैसी रही?

जवाब: म्यूजिक लॉन्च पर उनसे मिला। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा—“बहुत कमाल गाया है।” सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने मुझे नाम से याद रखा और बाद में भी “वैभू” कहकर बुलाया। वो बहुत अच्छे इंसान हैं।

सवाल: गाने के बाद कैसा रिस्पॉन्स मिला?

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