विंध्य विकास प्राधिकरण में संजय तीर्थवानी उपाध्यक्ष नियुक्त:बोले- विंध्य का विकास मेरा सपना था

सतना के युवा उद्यमी संजय तीर्थवानी को विंध्य विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मध्यप्रदेश शासन के योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। प्राधिकरण में रीवा जिले के मनगवां से पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, रीवा से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय सिंह पटेल को भी उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। संजय तीर्थवानी ने वर्ष 2008 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता के रूप में छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन के लिए काम किया है और जिला भाजपा में उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे सिंधी समाज से आते हैं और एक युवा उद्यमी भी हैं। कहा- यह पद एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अपनी नियुक्ति पर संजय तीर्थवानी ने कहा कि यह उनके लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसे वह हर कीमत पर निभाएंगे। उन्होंने बताया कि आम लोगों का विकास हमेशा से उनका उद्देश्य रहा है। तीर्थवानी के अनुसार, विंध्य का विकास उनका सपना था और अब यह उनकी जिम्मेदारी बन गया है। विंध्य विकास प्राधिकरण एक वैधानिक सरकारी निकाय है, जिसका मुख्य कार्य किसी शहर या क्षेत्र के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करना है। यह आवास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और मास्टर प्लान को लागू करने के लिए जिम्मेदार होता है। प्राधिकरण आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं को विनियमित करके अनियंत्रित विकास को रोकता है और क्षेत्र के सही विकास की दिशा में काम करता है।
राजगढ़ खरीदी केंद्रों पर सैंपल के नाम पर ज्यादा कटौती:500 ग्राम नियम के बावजूद 800 ग्राम तक गेहूं निकाल रहे, बिना तौल प्रक्रिया पर सवाल

राजगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं खरीदी के बीच अब सैंपल लेने की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। कागजों में जहां सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं लेने का नियम बताया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई खरीदी केंद्रों पर किसानों की उपज से तय सीमा से अधिक गेहूं निकाले जाने की बात सामने आई है। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए खिलचीपुर से करीब 6 किलोमीटर दूर बड़वेली गांव स्थित मां यशोदा वेयरहाउस का दौरा किया। यहां सुबह से ही किसान ट्राली में अपनी उपज लेकर बेचने पहुंचे थे और सात कांटों पर तुलाई का काम चल रहा था। पहली नजर में व्यवस्था सामान्य दिखी, लेकिन जैसे ही टीम ने सैंपल लेने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया, कई अनियमितताएं सामने आने लगीं। तुलाई के दौरान किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर गेहूं निकाला जा रहा था, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। न तो सैंपल का वजन मौके पर किया जा रहा था और न ही किसानों को यह बताया जा रहा था कि उनकी उपज से कितना गेहूं लिया जा रहा है। प्लास्टिक की पन्नियों में हाथ से गेहूं भरकर अलग किया जा रहा था। अतिरिक्त गेंहू को बेच दिया जाता है टीम ने मौके पर मौजूद सर्वेयर गिरिराज दांगी से जब पूछा कि सैंपल के लिए कितना गेहूं लिया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि आमतौर पर 600 से 750 ग्राम तक सैंपल लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी माना कि सैंपल लेने की प्रक्रिया में तौल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। स्थिति की सच्चाई जानने के लिए टीम ने मौके पर ही सैंपल का वजन कराने का निर्णय लिया। सर्वेयर द्वारा लाई गई दो अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों का कांटे पर वजन किया गया। पहली थैली में 750 ग्राम गेहूं निकला, जबकि दूसरी में 810 ग्राम। यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि तय सीमा से ज्यादा गेहूं किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर निकाला जा रहा है। वेयरहाउस के आसपास मौजूद एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैंपल के नाम पर जो अतिरिक्त गेहूं लिया जाता है, उसे बाद में इकट्ठा कर बेच दिया जाता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। जब इस मामले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक महेश चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस 500 ग्राम में से भी केवल 50 ग्राम गेहूं जांच के लिए उपयोग किया जाता है और शेष मात्रा किसान को वापस करना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि कहीं 800 ग्राम तक गेहूं लिया जा रहा है, तो यह नियमों के खिलाफ है और मैं इसका पता करता हूं। सर्वेयर इंचार्ज बोले- एक किलो तक सैंपल ले सकते हैं वहीं दूसरी तरफ सर्वेयर इंचार्ज मुकेश दांगी का बयान अधिकारियों के दावों से अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक सैंपल लिया जा सकता है। उनका तर्क था कि सैंपल “राउंड फिगर” में लिया जाता है, इसलिए यह 500, 700 या 800 ग्राम तक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियम पुस्तिका में 2 किलो तक सैंपल निकालने का प्रावधान है, जिसमें से 500 ग्राम से 700 ग्राम तक हिस्सा हमें रखना है और बाकी वापस किया जाता है।
सतना फ्लाईओवर पर बाइक को टक्कर मारी, मौत:रीवा रोड पर लगा जाम; जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

सतना के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत फ्लाईओवर पर मंगलवार शाम एक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई। उसे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जानकारी के अनुसार, युवक अपनी बाइक से फ्लाईओवर से गुजर रहा था, तभी अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद रीवा रोड पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बन गई थी। सूचना मिलते ही कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना कर जांच शुरू की। पुलिस को मृतक के पास से करीब 10 हजार रुपए नकद बरामद हुए हैं। आरोपी की तलाश के लिए सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, युवक यह रकम किसी व्यक्ति को देने जा रहा था। हादसे के बाद मृतक के मोबाइल फोन पर एक कॉल आया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी पहचान देवेंद्रनगर, जिला पन्ना निवासी प्रकाश बागरी के रूप में की। पुलिस अब फ्लाईओवर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि अज्ञात वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर वाहन चालक की तलाश तेज कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।
मैहर में 'आपकी पुलिस आपके द्वार' जन चौपाल:ग्रामीणों को कानून, सुरक्षा और साइबर अपराधों की जानकारी दी गई

मैहर जिले के ग्राम जीतनगर में मंगलवार शाम करीब 5 बजे पुलिस द्वारा ‘जन चौपाल आपकी पुलिस आपके द्वार’ कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करना तथा ग्रामीणों को कानून, सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. चंचल नागर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ मैहर थाना प्रभारी अनिमेष द्विवेदी, महिला डेस्क प्रभारी वंदना गर्ग, यातायात प्रभारी विक्रम पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता रज्जन महाराज और ग्राम सरपंच मुन्नीलाल कोल भी मंच पर मौजूद थे। इस अवसर पर एएसपी डॉ. चंचल नागर ने बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। थाना प्रभारी अनिमेष द्विवेदी ने पुलिस की कार्यप्रणाली और आमजन की सहायता में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, यातायात प्रभारी विक्रम पाठक ने सड़क सुरक्षा के महत्व को समझाते हुए हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील की। महिला डेस्क प्रभारी वंदना गर्ग ने महिलाओं से जुड़े अपराधों, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध और लैंगिक उत्पीड़न जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और पुलिस सहायता प्राप्त करने के तरीकों से भी अवगत कराया। साथ ही दहेज प्रथा और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी जागरूकता फैलाई गई। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी समस्या या अपराध की स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करें। इस जन चौपाल के माध्यम से पुलिस ने जनता के बीच विश्वास, सहयोग और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया। इसी क्रम में ताला थाने में भी ‘आपकी पुलिस आपके द्वार’ जन चौपाल का आयोजन किया गया। इस चौपाल में गांजा, कोरेक्स के दुष्प्रभाव और उनकी सूचना, साइबर अपराध, महिला अपराध एवं यातायात जागरूकता के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एसडीओपी ख्याति मिश्रा, ताला टीआई महेंद्र मिश्रा सहित अन्य गणमान्य नागरिक, महिलाएं, छात्र और बच्चे उपस्थित रहे।
Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। ये खबर भी पढ़ें… इंडिगो-एअर इंडिया ने कहा- फ्लाइट्स बंद होने की कगार पर:फ्यूल महंगा होने से ऑपरेशन मुश्किल, एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाए सरकार मिडिल ईस्ट जंग के चलते देश की एयरलाइंस मुश्किल में हैं। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने कहा- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से उनका ऑपरेशन कॉस्ट 20% तक बढ़ गया है। FIA ने इस बारे में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है। इसके मुताबिक घरेलू एयरलाइंस का कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कंपनियां ऑपरेशंस रोकने या अपने विमानों को खड़ा करने की कगार पर पहुंच गई हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
टीकमगढ़ में 33/11 उप केंद्र का मेंटेनेंस:कृषि उपज मंडी, नूतन विहार सहित कई इलाकों में सुबह 8 से 11 बजे तक आपूर्ति बंद

टीकमगढ़ में विद्युत विभाग ने बुधवार को 33/11 ढोंगा उप केंद्र में आवश्यक रखरखाव कार्य की घोषणा की है। इस कार्य के कारण शहर के कई इलाकों में सुबह 8 बजे से 11 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में सूचना जारी की। रखरखाव कार्य के तहत 3.15 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर पर लोड शिफ्टिंग का काम किया जाएगा। इन मेंटेनेंस गतिविधियों के कारण संबंधित सब स्टेशन अस्थायी रूप से बंद रहेगा, जिससे निर्धारित समय अवधि में बिजली आपूर्ति ठप रहेगी। इस दौरान 11 केवी के नूतन विहार, ढोंगा, राजमहल और कलेक्ट्रेट (डिवीजन) फीडर से जुड़े क्षेत्र प्रभावित होंगे। प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में नूतन विहार कॉलोनी, खुशीपुरा, सुंदर पटेल के खेत तक का इलाका, हरियाली वेयर हाउस, माइक्रोवेव, बीएसएनएल, ढोंगा, पॉलिटेक्निक कॉलेज, लोटा फैक्ट्री, प्रेरणा फूड, बुंदेलखंड, राजपल्सेस, केयामगाह, विजय कड़ा, नरैया मोहल्ला, राजमहल, ढोंगा बड़ी मंडी, मंडी कॉलोनी, कुंवरपुरा, डिवीजन, शिव शक्ति कॉलोनी, विनोद कुंज, संगम गार्डन, रेलवे स्टेशन और इसके आसपास के सभी संबंधित क्षेत्र शामिल हैं। उपभोक्ता किसी भी शिकायत या जानकारी के लिए 1912 या 9425424872 पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्य की प्रगति के अनुसार शटडाउन की समयावधि घटाई या बढ़ाई जा सकती है।
Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
MSP का पैसा खाते में, नकद नहीं:धार में गेहूं बेच चुके किसान बैंक के चक्कर लगाने को मजबूर

धार जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को नई समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उनके बैंक खातों में गेहूं बिक्री की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन वे इसे नकद नहीं निकाल पा रहे हैं। कृषि उपज मंडी स्थित जिला सहकारी बैंक शाखा में पिछले दो दिनों से किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें हर बार ‘नकद नहीं आया, कल आ जाएगा’ का जवाब मिलता है। इस लगातार मिल रहे आश्वासन से किसानों की परेशानी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि खाते में पैसा होने के बावजूद वे अपनी दैनिक जरूरतों के लिए नकदी नहीं निकाल पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लेनदेन अभी भी नकद में होते हैं, जिससे डिजिटल या ऑनलाइन भुगतान हर जगह संभव नहीं है। कई किसानों ने बताया कि उनके घरों में शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रम हैं, जिनके लिए तत्काल नकदी की आवश्यकता है। कुछ किसानों को सोसायटी का ऋण भी जमा करना है, लेकिन नकदी न मिलने के कारण वे समय पर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। एक किसान ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि खाते में पैसा होने के बावजूद जरूरत के समय नकदी न मिलना व्यर्थ है। वे दो दिनों से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। बैंक शाखा पर रोजाना भीड़ बढ़ती जा रही है और किसानों की उम्मीदें टूट रही हैं। यदि जल्द ही नकदी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई, तो किसानों की आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है। किसानों ने बैंक प्रबंधन से तत्काल पर्याप्त नकद राशि उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि उन्हें राहत मिल सके।
‘जनादेश सुशासन में विश्वास को दर्शाता है’: बीजेपी की गुजरात स्थानीय निकाय में जीत के बाद पीएम मोदी | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:28 अप्रैल, 2026, 20:14 IST पीएम मोदी ने कहा कि मतदाताओं ने एक बार फिर राज्य सरकार के “जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख कार्यों” का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी में एक सभा को संबोधित किया। (पीटीआई फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे “सुशासन” और विकास-केंद्रित राजनीति में लोगों के विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत जनादेश ने गुजरात के लोगों और भारतीय जनता पार्टी के बीच संबंध को और गहरा कर दिया है। नगर निगम, नगर पालिका, तालुका पंचायत और जिला पंचायत चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद एक्स पर साझा किए गए एक बयान में, पीएम मोदी ने कहा कि मतदाताओं ने एक बार फिर राज्य सरकार के “जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख कार्यों” का समर्थन किया है। प्रधान मंत्री ने लिखा, “राज्य सरकार के जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख कार्यों को पहचानकर, गुजरात के लोगों ने एक बार फिर सुशासन की राजनीति में अपना भरोसा जताया है। ये परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि जनता ने भाजपा द्वारा वर्षों से किए गए अथक प्रयासों को अपना हार्दिक आशीर्वाद दिया है।” एक नया उत्पाद डाउनलोड करें एक अच्छा विचार प्राप्त करने के लिए ठीक है! ठीक है, एक और विकल्प चुनें मोबाइल फोन की मरम्मत के लिए आवेदन पत्र एक और विकल्प चुनें एक नया व्यवसाय शुरू करें. और भी बहुत कुछ… -नरेंद्र मोदी (@नरेंद्रमोदी) 28 अप्रैल 2026 पीएम मोदी ने यह भी कहा कि पार्टी आने वाले वर्षों में राज्य में विकास को आगे बढ़ाने के लिए “अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण” के साथ काम करना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, ”मैं गुजरात के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि आने वाले समय में हम और भी अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ काम करेंगे और राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत रहेंगे।” सुबह नौ बजे शुरू हुई मतगणना के बाद से नगर निगमों, नगर पालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों के लिए हुए चुनावों के अब तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार, भाजपा ने 9,900 से अधिक सीटों में से 6,472 सीटें जीत ली हैं, जबकि कांग्रेस ने 1,412 सीटें हासिल की हैं। आम आदमी पार्टी (आप) और एआईएमआईएम समेत निर्दलीय और अन्य पार्टियों ने 597 सीटें हासिल की हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के संशोधित मानदंडों के तहत रविवार को 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के लिए मतदान हुआ, जिसके लिए कई जिलों में व्यापक परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन की आवश्यकता थी। 4.18 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र थे। नागरिक निकायों में नौ नव निर्मित नगर निगम शामिल हैं, अर्थात् नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नडियाद, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : गुजरात, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 28 अप्रैल, 2026, 20:14 IST समाचार चुनाव ‘जनादेश सुशासन में विश्वास को दर्शाता है’: बीजेपी की गुजरात स्थानीय निकाय में जीत के बाद पीएम मोदी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव(टी)बीजेपी की जीत गुजरात(टी)नरेंद्र मोदी गुजरात(टी)गुजरात नगरपालिका चुनाव(टी)भाजपा सुशासन(टी)गुजरात चुनाव परिणाम(टी)कांग्रेस का प्रदर्शन गुजरात(टी)राज्य चुनाव आयोग गुजरात
धामनोद में युवक पर चाकू हमला:बीच-बचाव करने पर वार, परिवार का आरोप- पुलिस ने आरोपियों को बनाया फरियादी

धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के ग्राम सेमल्दा में 19 अप्रैल की रात एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया। घायल युवक का इलाज इंदौर के एक अस्पताल में चल रहा है, जहां वह आईसीयू में भर्ती है। पीड़ित परिवार ने आज (मंगलवार) को पुलिस पर शिकायत दर्ज न करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार, सुरेंद्र कुशवाह अपने घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान पास ही रहने वाले कुछ लोगों के घर से विवाद की आवाजें आने लगीं। बताया जा रहा है कि जब सुरेंद्र बीच-बचाव करने के लिए वहां पहुंचे, तो आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। चाकू से पेट में वार किया परिजनों के मुताबिक, इसी दौरान दुर्गेश पिता शांतिलाल कुशवाहा ने सुरेंद्र पर चाकू से हमला कर दिया और उनके पेट में वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि हमले के बाद युवक को एक कमरे में बंद कर दिया गया था। किसी तरह युवक ने फोन कर परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और उसे तत्काल धामनोद अस्पताल ले जाया गया। घायल की हालत गंभीर होने पर उसे पहले धार और फिर इंदौर रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है। 5-6 लोगों ने मिलकर मारपीट की पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस घटना में 5-6 लोगों ने मिलकर मारपीट की, लेकिन कई बार थाने के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। युवक की बहन अर्चना कुशवाहा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपी पक्ष को ही फरियादी बना दिया है, जबकि वास्तविक पीड़ित उनका भाई है। उनका कहना है कि इस तरह मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। घटना से आक्रोशित परिजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।








