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राजगढ़ खरीदी केंद्रों पर सैंपल के नाम पर ज्यादा कटौती:500 ग्राम नियम के बावजूद 800 ग्राम तक गेहूं निकाल रहे, बिना तौल प्रक्रिया पर सवाल

राजगढ़ खरीदी केंद्रों पर सैंपल के नाम पर ज्यादा कटौती:500 ग्राम नियम के बावजूद 800 ग्राम तक गेहूं निकाल रहे, बिना तौल प्रक्रिया पर सवाल

राजगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं खरीदी के बीच अब सैंपल लेने की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। कागजों में जहां सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं लेने का नियम बताया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई खरीदी केंद्रों पर किसानों की उपज से तय सीमा से अधिक गेहूं निकाले जाने की बात सामने आई है। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए खिलचीपुर से करीब 6 किलोमीटर दूर बड़वेली गांव स्थित मां यशोदा वेयरहाउस का दौरा किया। यहां सुबह से ही किसान ट्राली में अपनी उपज लेकर बेचने पहुंचे थे और सात कांटों पर तुलाई का काम चल रहा था। पहली नजर में व्यवस्था सामान्य दिखी, लेकिन जैसे ही टीम ने सैंपल लेने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया, कई अनियमितताएं सामने आने लगीं। तुलाई के दौरान किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर गेहूं निकाला जा रहा था, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। न तो सैंपल का वजन मौके पर किया जा रहा था और न ही किसानों को यह बताया जा रहा था कि उनकी उपज से कितना गेहूं लिया जा रहा है। प्लास्टिक की पन्नियों में हाथ से गेहूं भरकर अलग किया जा रहा था। अतिरिक्त गेंहू को बेच दिया जाता है
टीम ने मौके पर मौजूद सर्वेयर गिरिराज दांगी से जब पूछा कि सैंपल के लिए कितना गेहूं लिया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि आमतौर पर 600 से 750 ग्राम तक सैंपल लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी माना कि सैंपल लेने की प्रक्रिया में तौल का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

स्थिति की सच्चाई जानने के लिए टीम ने मौके पर ही सैंपल का वजन कराने का निर्णय लिया। सर्वेयर द्वारा लाई गई दो अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों का कांटे पर वजन किया गया। पहली थैली में 750 ग्राम गेहूं निकला, जबकि दूसरी में 810 ग्राम। यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि तय सीमा से ज्यादा गेहूं किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर निकाला जा रहा है।

वेयरहाउस के आसपास मौजूद एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैंपल के नाम पर जो अतिरिक्त गेहूं लिया जाता है, उसे बाद में इकट्ठा कर बेच दिया जाता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। जब इस मामले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक महेश चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस 500 ग्राम में से भी केवल 50 ग्राम गेहूं जांच के लिए उपयोग किया जाता है और शेष मात्रा किसान को वापस करना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि कहीं 800 ग्राम तक गेहूं लिया जा रहा है, तो यह नियमों के खिलाफ है और मैं इसका पता करता हूं। सर्वेयर इंचार्ज बोले- एक किलो तक सैंपल ले सकते हैं
वहीं दूसरी तरफ सर्वेयर इंचार्ज मुकेश दांगी का बयान अधिकारियों के दावों से अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक सैंपल लिया जा सकता है। उनका तर्क था कि सैंपल “राउंड फिगर” में लिया जाता है, इसलिए यह 500, 700 या 800 ग्राम तक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियम पुस्तिका में 2 किलो तक सैंपल निकालने का प्रावधान है, जिसमें से 500 ग्राम से 700 ग्राम तक हिस्सा हमें रखना है और बाकी वापस किया जाता है।

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राजगढ़ खरीदी केंद्रों पर सैंपल के नाम पर ज्यादा कटौती:500 ग्राम नियम के बावजूद 800 ग्राम तक गेहूं निकाल रहे, बिना तौल प्रक्रिया पर सवाल

राजगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर चल रही गेहूं खरीदी के बीच अब सैंपल लेने की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। कागजों में जहां सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं लेने का नियम बताया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई खरीदी केंद्रों पर किसानों की उपज से तय सीमा से अधिक गेहूं निकाले जाने की बात सामने आई है। मंगलवार को दैनिक भास्कर की टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए खिलचीपुर से करीब 6 किलोमीटर दूर बड़वेली गांव स्थित मां यशोदा वेयरहाउस का दौरा किया। यहां सुबह से ही किसान ट्राली में अपनी उपज लेकर बेचने पहुंचे थे और सात कांटों पर तुलाई का काम चल रहा था। पहली नजर में व्यवस्था सामान्य दिखी, लेकिन जैसे ही टीम ने सैंपल लेने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया, कई अनियमितताएं सामने आने लगीं। तुलाई के दौरान किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर गेहूं निकाला जा रहा था, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। न तो सैंपल का वजन मौके पर किया जा रहा था और न ही किसानों को यह बताया जा रहा था कि उनकी उपज से कितना गेहूं लिया जा रहा है। प्लास्टिक की पन्नियों में हाथ से गेहूं भरकर अलग किया जा रहा था। अतिरिक्त गेंहू को बेच दिया जाता है
टीम ने मौके पर मौजूद सर्वेयर गिरिराज दांगी से जब पूछा कि सैंपल के लिए कितना गेहूं लिया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि आमतौर पर 600 से 750 ग्राम तक सैंपल लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी माना कि सैंपल लेने की प्रक्रिया में तौल का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

स्थिति की सच्चाई जानने के लिए टीम ने मौके पर ही सैंपल का वजन कराने का निर्णय लिया। सर्वेयर द्वारा लाई गई दो अलग-अलग प्लास्टिक की थैलियों का कांटे पर वजन किया गया। पहली थैली में 750 ग्राम गेहूं निकला, जबकि दूसरी में 810 ग्राम। यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि तय सीमा से ज्यादा गेहूं किसानों की ट्रॉलियों से सैंपल के नाम पर निकाला जा रहा है।

वेयरहाउस के आसपास मौजूद एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैंपल के नाम पर जो अतिरिक्त गेहूं लिया जाता है, उसे बाद में इकट्ठा कर बेच दिया जाता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। जब इस मामले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक महेश चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सैंपल के लिए अधिकतम 500 ग्राम गेहूं ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस 500 ग्राम में से भी केवल 50 ग्राम गेहूं जांच के लिए उपयोग किया जाता है और शेष मात्रा किसान को वापस करना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि कहीं 800 ग्राम तक गेहूं लिया जा रहा है, तो यह नियमों के खिलाफ है और मैं इसका पता करता हूं। सर्वेयर इंचार्ज बोले- एक किलो तक सैंपल ले सकते हैं
वहीं दूसरी तरफ सर्वेयर इंचार्ज मुकेश दांगी का बयान अधिकारियों के दावों से अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक सैंपल लिया जा सकता है। उनका तर्क था कि सैंपल “राउंड फिगर” में लिया जाता है, इसलिए यह 500, 700 या 800 ग्राम तक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियम पुस्तिका में 2 किलो तक सैंपल निकालने का प्रावधान है, जिसमें से 500 ग्राम से 700 ग्राम तक हिस्सा हमें रखना है और बाकी वापस किया जाता है।

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