AC के पानी का उपयोग: बड़ा ही काम का है AC का टपकने वाला पानी, घर के इन 5 टिप्स के लिए ये है कोई ‘वरदान’ से कम नहीं, पड़ोसी भी होंगे मशहूर

एसी जल का उपयोग: एयर सानिध्य से आख़री वाला पानी, जिसे कंडेन्सेशन पानी कहा जाता है, अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। जबकि यह पानी कई घरेलू सामग्रियों में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। हालाँकि यह पीने योग्य नहीं होता है, लेकिन स्वच्छता, प्रमाणित की सील और अन्य गैर-खाद्य नौकरियों में इसका उपयोग पानी की बचत की जा सकता है। आज जब पानी की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, ऐसे में एसी के पानी का सही उपयोग स्मार्ट और पर्यावरण के लिए एक जादुई कदम है। आइए जानें आपको नौकरी कैसे मिलती है… एसी से बचा हुआ पानी काफी हद तक साफ होता है, इसलिए इसे घर के इंटीरियर और गार्डन के नारियल में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे प्रमाणित की अच्छी बिक्री होती है और पानी की बचत भी होती है। यह एक आसान तरीका है जिससे प्राकृतिक तत्वों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इस पानी का उपयोग मशीनरी, स्केल और प्लास्टर की सफाई के लिए किया जा सकता है। इससे जुड़ी सलाह में साफ पानी की विलासिता कम होती है और घर में भी साफ रहता है। यह प्राकृतिक पर्यावरण के लिए भी उपयोगी है। एसी का पानी वाहन धोने के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। इससे कार और बाइक को आसानी से साफ किया जा सकता है और साफ पानी की बचत होती है। यह एक आम और उपयोगी औषधि है। प्रोडक्ट की प्री-वॉश के उपयोग के लिए सबसे पहले इस पानी में कपड़े धोने से पहले उनकी लकड़ी के कपड़े निकल जाते हैं। इसके बाद में कम नमी की जरूरत होती है और कपड़े आसानी से साफ हो जाते हैं। यह उपाय पानी और साबुन दोनों की बचत है। लैपटॉप की सफाई में उपयोग कुत्ते या बिल्ली के खाने-पीने के पोश्चर और उनके आस-पास की जगह को साफ करने के लिए भी इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे साफ-सफाई बनी रहती है और पीने योग्य पानी की बचत होती है। (टैग्सटूट्रांसलेट)एसी जल का उपयोग(टी)संघनन जल का पुन: उपयोग(टी)घर पर पानी बचाएं(टी)पर्यावरण अनुकूल युक्तियाँ भारत(टी)एसी जल लाभ(टी)घरेलू जल बचत विचार(टी)एसी पानी का पुन: उपयोग(टी)टिकाऊ जीवन युक्तियाँ(टी)जल संरक्षण गृह(टी)स्मार्ट होम हैक्स
बुरहानपुर में सड़क हादसे रोकने उतरी पुलिस:पंपलेट बांटकर समझाइश, हेलमेट-सीट बेल्ट पर जोर; नाबालिग ड्राइविंग और नशे पर चेतावनी

बुरहानपुर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस ने एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत, वाहन चालकों को रोककर यातायात नियमों का पालन करने के लिए पंपलेट वितरित किए जा रहे हैं और उन्हें समझाइश दी जा रही है। अभियान के दौरान बाइक चालकों से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने की अपील की जा रही है, जबकि चार पहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। यह अभियान जिले में 26 अप्रैल से शुरू हुआ था और 10 मई तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों, विशेषकर युवाओं और महिला चालकों को हेलमेट के प्रति जागरूक करना और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना है। पुलिस आमजन से सीधा संवाद कर रही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और आमजन में जिम्मेदार यातायात व्यवहार विकसित करने के लक्ष्य के साथ, बुरहानपुर पुलिस द्वारा जिलेभर में व्यापक सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिले के सभी थाना और चौकी स्तर पर पुलिस टीमें आमजन से सीधा संवाद स्थापित कर रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट के अनिवार्य उपयोग के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं में सिर पर लगने वाली चोटें अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। हेलमेट न केवल चोट की गंभीरता को कम करता है, बल्कि जीवन बचाने का सबसे प्रभावी साधन भी है। गुरुवार को यातायात थाना के सहायक उप निरीक्षक अजीतसिंह जाट और उनके स्टाफ ने मुख्य चौराहे पर यातायात संबंधी कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान वाहन चालकों को अभियान से संबंधित पंपलेट बांटे गए और उनसे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का आग्रह किया गया, जो न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। यह बता रहे सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक सिग्नल का महत्व। हेलमेट, सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग, नशे की हालत में वाहन चलाने के खतरे, नाबालिगों को वाहन न देने की जिम्मेदारी, राहवीर योजना, हिट एंड रन पीड़ित प्रतिकर योजना और कैशलेस ट्रीटमेंट योजना की जानकारी बताई गई। बुरहानपुर पुलिस की आमजन से अपील खुद और अपने परिजनों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करें। हमेशा सीट बेल्ट और हेलमेट का प्रयोग करें। तेज गति व लापरवाही से बचें। नाबालिगों को वाहन न दें। नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
Rishi Kapoor 6th Death Anniversary: Daughter Riddhimas Emotional Tribute

कुछ ही क्षण पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि पर उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में उनके जज्बे और जिम्मेदारी को याद किया। रिद्धिमा ने कहा कि पापा ने कभी हालात के आगे घुटने नहीं टेके। वो बीमारी में भी काम करते रहे, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि किसी प्रोड्यूसर को नुकसान हो। यह एक जिम्मेदार इंसान की पहचान थी। उन्होंने उनके परिवार के प्रति प्यार, ईमानदारी और काम के प्रति जुनून को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी पूरा परिवार उन्हें हर दिन याद करता है और उनकी सीख, मेहनत, विनम्रता और सच्चाई को जीवन में निभाने की कोशिश करता है। सवाल: ऋषि सर की सबसे पहली याद जो आपके मन में आती है, क्या है? जवाब: बहुत सारी यादें हैं, एक-दो में उन्हें समेटना मुश्किल है। हमारे जीवन में उनका प्रेजेंस ही सबसे बड़ी याद है। वो हमारी लाइफ में इतना पॉजिटिव इन्फ्लुएंस रखते थे कि आज भी हम उन्हें हर दिन महसूस करते हैं। हम रोज उनकी बातें करते हैं और फैमिली के साथ उनका जिक्र होता है। सच कहूं तो हम उन्हें हर दिन सेलिब्रेट करते हैं। उनकी पर्सनैलिटी लार्जर दैन लाइफ थी- काम के प्रति जुनून और परिवार के लिए गहरा प्यार। यही चीजें आज भी सबसे ज्यादा याद आती हैं। सवाल: पापा को एक इंसान के तौर पर कैसे याद करती हैं? जवाब: वो बहुत सच्चे इंसान थे। दिल के साफ थे। जो भी उनके दिल में होता था, वो बिना झिझक ज़ुबान पर ले आते थे। चीजों को घुमाते-फिराते नहीं थे। थोड़े मुंहफट थे, लेकिन वो उनकी ईमानदारी का हिस्सा था। उनकी सच्चाई और साफ दिल ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। सवाल: बचपन की सबसे खास यादें कौन-सी हैं? जवाब: बचपन की कई यादें उनसे जुड़ी हैं। हम हर हॉलिडे और वेकेशन में साथ घूमने जाते थे। पापा शूटिंग ऐसे प्लान करते थे कि छुट्टियां साथ हों और हम साथ रह सकें। वो हर काम में हमें ध्यान में रखते थे और बच्चों को प्राथमिकता देते थे। हर वीकेंड, खासकर सैटरडे नाइट या संडे को, वो हमें लंच पर ले जाते, दिन साथ बिताते और मूवी दिखाते थे। वो हमारे साथ रैपिड फायर गेम खेलते थे। गाड़ी या ट्रैफिक में वो जनरल नॉलेज के सवाल पूछते थे। सही जवाब पर चॉकलेट मिलती थी। ये छोटे पल हमारे लिए बहुत खास हैं। सवाल: उनके जाने के बाद परिवार में सबसे बड़ा बदलाव क्या था? जवाब: बहुत बड़ा खालीपन आ गया था। ऐसा लगा जैसे सब कुछ रुक गया हो। उस समय हम अपने इमोशन्स से जूझ रहे थे, लेकिन फोकस मम्मी को संभालने पर था। हम उन्हें बिजी रखने की कोशिश करते थे- कभी बाहर ले जाकर, कभी बातों में उलझाकर। वो समय बहुत कठिन था, क्योंकि सब कुछ अचानक हुआ। आज भी हम उन्हें पास्ट टेंस में नहीं याद करते। हम कहते हैं कि वो “हैं”- वो आज भी हमें गाइड कर रहे हैं, प्यार कर रहे हैं और आशीर्वाद बनकर साथ हैं। सवाल: उनकी कौन-सी बात आज भी सबसे ज्यादा प्रेरित करती है? जवाब: वो हमेशा कहते थे कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जीवन में कुछ हासिल करना है, तो मेहनत करनी पड़ेगी। किसी भी फील्ड में हों- एक्टिंग, डिजाइन, फैशन- हर जगह हार्ड वर्क जरूरी है। साथ ही, वो सिखाते थे कि जितना ऊपर जाओ, उतना ही जमीन से जुड़े और विनम्र रहो। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुभव से आपने क्या सीखा? जवाब: उनका काम के प्रति जुनून सबसे बड़ा सबक है। वो बीमार होने के बावजूद काम करते रहे। उन्हें बीमारी का पता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगर उन्होंने कोई फिल्म साइन की होती थी, तो उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके कारण किसी प्रोड्यूसर को नुकसान नहीं होना चाहिए। मुझे याद है, तबीयत खराब होने के बावजूद वो दिल्ली में ठंड में शूटिंग कर रहे थे। उन्हें काम से सच्चा प्यार था और वो आखिरी समय तक एक्टिंग करना चाहते थे। सवाल: क्या कोई ऐसा पल था जब आपने उन्हें पिता नहीं, बल्कि दोस्त की तरह महसूस किया? जवाब: हां, बिल्कुल। शादी के बाद हम और करीब हो गए थे। वो मुझे रोज कॉल और फेसटाइम करते थे। अगर मैं फोन नहीं उठाती थी, तो दो-तीन बार कॉल करके पूछते थे। मेरी बेटी समारा से भी उनका खास रिश्ता था। वो उससे वीडियो कॉल पर बात करते थे और उसे अलग-अलग नामों से बुलाते थे- जैसे “तेलू राम”, “बंदरी”। उनके लिए परिवार ही सब कुछ था। सवाल: कोई ऐसा किस्सा जो हमेशा याद रहेगा? जवाब: जब मैं फिल्म Kapoor & Sons के सेट पर गई थी, तब मैंने पहली बार उनके काम करने का तरीका करीब से देखा। वो शॉट से पहले कुछ देर अकेले बैठते थे और अपने कैरेक्टर में ढलते थे। फिर तैयार होकर शॉट देते थे। उस दिन मैंने उनके डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को करीब से महसूस किया। सवाल: आपको कब एहसास हुआ कि पापा इतने बड़े स्टार हैं? जवाब: स्कूल में, जब टीचर्स और दोस्त उनके बारे में बात करते थे। जब हम बाहर जाते थे और लोग उनसे ऑटोग्राफ मांगते थे, तब समझ आया कि वो बड़े स्टार हैं। तब हमें समझाया गया कि लोग उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो फिल्मों में काम करते हैं और उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। सवाल: क्या आप आज भी उनकी किसी सलाह या सीख को याद करती हैं? जवाब: हार्ड वर्क, ईमानदारी और विनम्रता। वो कहते थे कि जो भी काम करो, पूरी ईमानदारी से करो और जितनी सफलता मिले, उतना विनम्र रहो। सवाल: आपके लिए उनकी सबसे बड़ी विरासत क्या है? जवाब: उनका प्यार और परिवार के प्रति समर्पण। दुनिया के लिए वो महान अभिनेता थे, लेकिन मेरे लिए वो हमेशा बेहतरीन पिता और सच्चे फैमिली मैन रहेंगे। सवाल: आज अगर पापा से कुछ कहना हो, तो क्या कहेंगी? जवाब: हम आपको हर दिन याद करते हैं, आपकी बातें करते हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब आपका ज़िक्र न हो। हमें लगता है कि आप आज भी हमारे साथ हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स
Rishi Kapoor 6th Death Anniversary: Daughter Riddhimas Emotional Tribute

37 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि पर उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में उनके जज्बे और जिम्मेदारी को याद किया। रिद्धिमा ने कहा कि पापा ने कभी हालात के आगे घुटने नहीं टेके। वो बीमारी में भी काम करते रहे, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि किसी प्रोड्यूसर को नुकसान हो। यह एक जिम्मेदार इंसान की पहचान थी। उन्होंने उनके परिवार के प्रति प्यार, ईमानदारी और काम के प्रति जुनून को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी पूरा परिवार उन्हें हर दिन याद करता है और उनकी सीख, मेहनत, विनम्रता और सच्चाई को जीवन में निभाने की कोशिश करता है। सवाल: ऋषि सर की सबसे पहली याद जो आपके मन में आती है, क्या है? जवाब: बहुत सारी यादें हैं, एक-दो में उन्हें समेटना मुश्किल है। हमारे जीवन में उनका प्रेजेंस ही सबसे बड़ी याद है। वो हमारी लाइफ में इतना पॉजिटिव इन्फ्लुएंस रखते थे कि आज भी हम उन्हें हर दिन महसूस करते हैं। हम रोज उनकी बातें करते हैं और फैमिली के साथ उनका जिक्र होता है। सच कहूं तो हम उन्हें हर दिन सेलिब्रेट करते हैं। उनकी पर्सनैलिटी लार्जर दैन लाइफ थी- काम के प्रति जुनून और परिवार के लिए गहरा प्यार। यही चीजें आज भी सबसे ज्यादा याद आती हैं। सवाल: पापा को एक इंसान के तौर पर कैसे याद करती हैं? जवाब: वो बहुत सच्चे इंसान थे। दिल के साफ थे। जो भी उनके दिल में होता था, वो बिना झिझक ज़ुबान पर ले आते थे। चीजों को घुमाते-फिराते नहीं थे। थोड़े मुंहफट थे, लेकिन वो उनकी ईमानदारी का हिस्सा था। उनकी सच्चाई और साफ दिल ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। सवाल: बचपन की सबसे खास यादें कौन-सी हैं? जवाब: बचपन की कई यादें उनसे जुड़ी हैं। हम हर हॉलिडे और वेकेशन में साथ घूमने जाते थे। पापा शूटिंग ऐसे प्लान करते थे कि छुट्टियां साथ हों और हम साथ रह सकें। वो हर काम में हमें ध्यान में रखते थे और बच्चों को प्राथमिकता देते थे। हर वीकेंड, खासकर सैटरडे नाइट या संडे को, वो हमें लंच पर ले जाते, दिन साथ बिताते और मूवी दिखाते थे। वो हमारे साथ रैपिड फायर गेम खेलते थे। गाड़ी या ट्रैफिक में वो जनरल नॉलेज के सवाल पूछते थे। सही जवाब पर चॉकलेट मिलती थी। ये छोटे पल हमारे लिए बहुत खास हैं। सवाल: उनके जाने के बाद परिवार में सबसे बड़ा बदलाव क्या था? जवाब: बहुत बड़ा खालीपन आ गया था। ऐसा लगा जैसे सब कुछ रुक गया हो। उस समय हम अपने इमोशन्स से जूझ रहे थे, लेकिन फोकस मम्मी को संभालने पर था। हम उन्हें बिजी रखने की कोशिश करते थे- कभी बाहर ले जाकर, कभी बातों में उलझाकर। वो समय बहुत कठिन था, क्योंकि सब कुछ अचानक हुआ। आज भी हम उन्हें पास्ट टेंस में नहीं याद करते। हम कहते हैं कि वो “हैं”- वो आज भी हमें गाइड कर रहे हैं, प्यार कर रहे हैं और आशीर्वाद बनकर साथ हैं। सवाल: उनकी कौन-सी बात आज भी सबसे ज्यादा प्रेरित करती है? जवाब: वो हमेशा कहते थे कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जीवन में कुछ हासिल करना है, तो मेहनत करनी पड़ेगी। किसी भी फील्ड में हों- एक्टिंग, डिजाइन, फैशन- हर जगह हार्ड वर्क जरूरी है। साथ ही, वो सिखाते थे कि जितना ऊपर जाओ, उतना ही जमीन से जुड़े और विनम्र रहो। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुभव से आपने क्या सीखा? जवाब: उनका काम के प्रति जुनून सबसे बड़ा सबक है। वो बीमार होने के बावजूद काम करते रहे। उन्हें बीमारी का पता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगर उन्होंने कोई फिल्म साइन की होती थी, तो उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके कारण किसी प्रोड्यूसर को नुकसान नहीं होना चाहिए। मुझे याद है, तबीयत खराब होने के बावजूद वो दिल्ली में ठंड में शूटिंग कर रहे थे। उन्हें काम से सच्चा प्यार था और वो आखिरी समय तक एक्टिंग करना चाहते थे। सवाल: क्या कोई ऐसा पल था जब आपने उन्हें पिता नहीं, बल्कि दोस्त की तरह महसूस किया? जवाब: हां, बिल्कुल। शादी के बाद हम और करीब हो गए थे। वो मुझे रोज कॉल और फेसटाइम करते थे। अगर मैं फोन नहीं उठाती थी, तो दो-तीन बार कॉल करके पूछते थे। मेरी बेटी समारा से भी उनका खास रिश्ता था। वो उससे वीडियो कॉल पर बात करते थे और उसे अलग-अलग नामों से बुलाते थे- जैसे “तेलू राम”, “बंदरी”। उनके लिए परिवार ही सब कुछ था। सवाल: कोई ऐसा किस्सा जो हमेशा याद रहेगा? जवाब: जब मैं फिल्म Kapoor & Sons के सेट पर गई थी, तब मैंने पहली बार उनके काम करने का तरीका करीब से देखा। वो शॉट से पहले कुछ देर अकेले बैठते थे और अपने कैरेक्टर में ढलते थे। फिर तैयार होकर शॉट देते थे। उस दिन मैंने उनके डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को करीब से महसूस किया। सवाल: आपको कब एहसास हुआ कि पापा इतने बड़े स्टार हैं? जवाब: स्कूल में, जब टीचर्स और दोस्त उनके बारे में बात करते थे। जब हम बाहर जाते थे और लोग उनसे ऑटोग्राफ मांगते थे, तब समझ आया कि वो बड़े स्टार हैं। तब हमें समझाया गया कि लोग उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो फिल्मों में काम करते हैं और उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। सवाल: क्या आप आज भी उनकी किसी सलाह या सीख को याद करती हैं? जवाब: हार्ड वर्क, ईमानदारी और विनम्रता। वो कहते थे कि जो भी काम करो, पूरी ईमानदारी से करो और जितनी सफलता मिले, उतना विनम्र रहो। सवाल: आपके लिए उनकी सबसे बड़ी विरासत क्या है? जवाब: उनका प्यार और परिवार के प्रति समर्पण। दुनिया के लिए वो महान अभिनेता थे, लेकिन मेरे लिए वो हमेशा बेहतरीन पिता और सच्चे फैमिली मैन रहेंगे। सवाल: आज अगर पापा से कुछ कहना हो, तो क्या कहेंगी? जवाब: हम आपको हर दिन याद करते हैं, आपकी बातें करते हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब आपका ज़िक्र न हो। हमें लगता है कि आप आज भी हमारे साथ हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं
सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थीं। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा। एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) डालने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 में उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह का आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उसी समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। । एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था, दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है, और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था। किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में
सऊदी क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन:प्राइवेट आइलैंड पर ‘मस्जिद’ बनवाई, सोने का गुंबद, मक्का से कपड़े और उजबेकिस्तान से टाइल्स मंगवाए

सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में कई साल तक अपने संबंध बनाए। वह एक तरफ बिजनेस के मौके ढूंढ रहा था, और दूसरी तरफ इस्लाम से जुड़ी दुर्लभ और धार्मिक चीजें भी इकट्ठा कर रहा था। उसने इन चीजों को अपने कैरेबियन द्वीप पर बनी एक विवादित इमारत को सजाने में इस्तेमाल किया, जिसे वह ‘मस्जिद’ कहता था। उसने मक्का की काबा से किस्वा मंगवाई। किस्वा वह कपड़ा होता है जिस पर सोने से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है। इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से बनी टाइल्स लाई गईं। सोने का गुंबद भी बनाया गया, जिसकी डिजाइन पुराने सीरिया की इमारतों जैसी थी। नार्वे राजदूत के जरिए खास लोगों से संपर्क बनाया एपस्टीन का मकसद सिर्फ इस्लामी चीजें जुटाना नहीं था, बल्कि ताकतवर और अमीर लोगों से अपने रिश्ते भी मजबूत करना था। नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन के जरिए एपस्टीन को सऊदी अरब के खास लोगों तक पहुंच मिली। इनमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी शामिल थे। इसी नेटवर्क की मदद से उसे काबा से जुड़े खास कपड़े भी मिले थे। 2014 की एक फोटो में एपस्टीन न्यूयॉर्क में अपने घर के अंदर फर्श पर फैले ऐसे ही एक कपड़े को देख रहा है। उसके साथ अमीरात के बड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम भी मौजूद थे। बाद में एपस्टीन से जुड़े होने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें दुबई की बंदरगाह कंपनी डीपी वर्ल्ड के प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा। एपस्टीन की इस्लामिक डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी दस्तावेजों से उसके प्राइवलेंट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स पर बनी एक रहस्यमयी इमारत का सच भी सामने आया। पहले इसे म्यूजिक रूम, मंडप, चैपल या कोई रहस्यमयी मंदिर कहा जाता था, लेकिन उसके ईमेल और साथ काम करने वाले कलाकार की बातों से पता चला कि वह इसे ‘मस्जिद’ कहता था, हालांकि इसका इस्तेमाल कभी धार्मिक इबादत के लिए हुआ हो, इसका कोई सबूत नहीं है। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इसे मस्जिद ही कहता था। यह भी पता चला कि इस मस्जिद की दीवारों या हिस्सों पर अरबी लिखावट (जैसे अल्लाह) लिखने का प्लान था। एक ईमेल में एपस्टीन ने यहां तक सुझाव दिया कि ‘अल्लाह’ लिखे अरबी शब्दों की जगह उसके अपने नाम के अक्षर J और E लिख दिए जाएं। रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन को इस्लामी डिजाइन में काफी दिलचस्पी थी। 2003- उसने कहा था कि उसके पास बहुत बड़ा फारसी कालीन है जो शायद किसी मस्जिद से आया होगा। 2008- जब वह जेल में था, तब भी उसने अपने द्वीप पर एक हमाम (तुर्की स्नानघर) और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना बनाई थी। 2009- जेल से बाहर आने से पहले उसने आर्किटेक्ट्स को ये डिजाइन तैयार करने के लिए कहा। 2011- उसने उजबेकिस्तान के एक संपर्क को लिखा कि उसे असली टाइल्स चाहिए जो मस्जिद की अंदरूनी दीवारों जैसी हों। 2013- उसने सीरिया के अलेप्पो में बने 15वीं सदी के यालबुगा हमाम की फोटो भेजकर कहा कि उसी तरह की डिजाइन बनाई जाए, जिसमें सुनहरी गुंबद, मेहराब और खास तरह की दीवारें हों। एपस्टीन खुद को ईमेल करके डिजाइन आइडिया भेजता था, जिनमें पुराने मिडिल ईस्ट की मस्जिदों की तस्वीरें शामिल होती थीं। क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन करीब 2010 के आसपास, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई। दोनों के बीच बिजनेस और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लगातार बातचीत होती रहती थी। 2016 के दौरान उनकी बातचीत में सऊदी अरब ज्यादा आने लगा, क्योंकि उस समय मोहम्मद बिन सलमान देश की तेल कंपनी अरामको को शेयर बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। एपस्टीन चाहता था कि वह उनका फाइनेंशियल सलाहकार बने। रोड-लार्सन ने उसकी मुलाकात राफत अल सब्बाग (शाही सलाहकार) और अजीजा अल अहमदी (शाही सहयोगी) से करवाई। इनके जरिए एपस्टीन ने क्राउन प्रिंस तक पहुंच बनाने की कोशिश की। उसने न्यूयॉर्क में इनसे मुलाकात की और प्रिंस से सीधे मिलकर अपने अलग तरह के आइडिया पेश करना चाहा, जैसे मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ नाम की नई करेंसी बनाना। फिर उसे सऊदी अरब आने का न्योता मिला। अजीजा अल अहमदी ने एपस्टीन से कहा कि जब वह सऊदी अरब के दूतावास जाए, तो वहां के अधिकारियों से यह बोले कि उसे खुद मोहम्मद बिन सलमान ने बुलाया है। सऊदी पहुंचने के बाद एपस्टीन ने रोड-लार्सन को अपनी और प्रिंस की दो तस्वीरें भेजीं, जिन्हें बाद में उसने अपने घर में भी लगाया। 2017 की शुरुआत में अजीजा अल अहमदी और एपस्टीन न्यूयॉर्क में मिले। उस समय उनके नीचे काम करने वाले लोग आपस में ईमेल या मैसेज के जरिए बात कर रहे थे। वे यह तय कर रहे थे कि सऊदी अरब से कुछ सामान जैसे एक तंबू और दूसरी चीजें एपस्टीन के प्राइवेट आइलैंड पर भेजी जाएं। एपस्टीन के स्टाफ ने एक कस्टम एजेंट से कहा कि उन्हें काबा से 3 कपड़ें मिल रहे हैं। एक जो काबा के अंदर इस्तेमाल हुआ था दूसरा किस्वा जो बाहर ढका रहता है और तीसरा उसी खास फैक्ट्री का बना हुआ था किस्वा का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व होता है। इसे हर साल सैकड़ों कारीगर बनाते हैं। इसमें करीब 700 किलो रेशम और 115 किलो सोने-चांदी के धागे का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर होती है। जब इसे बदला जाता है, तो इसके टुकड़े खास संस्थाओं या सम्मानित लोगों को दे दिए जाते हैं। अजीजा अल अहमदी ने एक ईमेल में लिखा कि जो काला कपड़ा भेजा गया है, उसे कम से कम 1 करोड़ मुसलमान छू चुके हैं। लोग काबा के सात चक्कर लगाते हैं और इस कपड़े को छूकर अपनी दुआएं और उम्मीदें जोड़ते हैं। यह साफ नहीं है कि ये चीजें उन्हें कैसे मिलीं। इस बारे में न तो उन्होंने और न ही सऊदी सरकार ने कोई जवाब दिया। सलाहकार नहीं बन पाने पर नाराज हुआ था एपस्टीन 2017 में हरिकेन मारिया तूफान आया, जिससे एपस्टीन के आइलैंड पर काफी नुकसान हुआ और उसकी मस्जिद में
Riyan Parag Vaping Video Controversy; BCCI Penalty

स्पोर्ट्स डेस्क2 मिनट पहले कॉपी लिंक पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग को IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। IPL 2026 के 40वें मैच में राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच मुकाबला चल रहा था। दूसरी पारी के दौरान रियान पराग ड्रेसिंग रूम के अंदर वेप (ई-सिगरेट) का इस्तेमाल करते हुए देखे गए। रियान पराग ने इस सीजन 9 मैचों में 306 रन बनाए हैं। कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.21 के तहत कार्रवाई रियान को IPL आचार संहिता के लेवल-1 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। उन्होंने आर्टिकल 2.21 का उल्लंघन किया, जो खेल को बदनाम करने वाले आचरण से संबंधित है। मैच रेफरी अमित शर्मा ने इस मामले में उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया और उनके खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया। रियान ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और सजा को मंजूर कर लिया है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है रियान पराग का ई-सिगरेट पीना गलत माना गया। भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट और टीम कप्तान का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। राजस्थान रॉयल्स के साथ इस सीजन का दूसरा विवाद राजस्थान रॉयल्स इस IPL सीजन में दूसरी बार प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चर्चा में है। इससे पहले टीम के मैनेजर रोमी भिंडर डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े गए थे, जो प्लेयर मैच ऑपरेशंस एरिया (PMOA ) प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। उस मामले में BCCI ने जांच के बाद मैनेजर पर जुर्माना लगाया था और चेतावनी दी थी। ——————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL सीजन में 200+ रनचेज का रिकॉर्ड टूटा:हैदराबाद ने इतिहास का चौथा सबसे बड़ा चेज किया सनराजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को मुंबई इंडियंस पर 6 विकेट की जीत दर्ज की। टीम ने 244 रन का टारगेट 18.4 ओवर में चेज कर लिया। यह IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज है। मौजूदा सीजन में 10वीं बार 200 या इससे ज्यादा का टारगेट चेज हुआ है। यह IPL के एक सीजन में 200+ रनचेज का रिकॉर्ड है। पिछले सीजन में 9 बार 200 या इससे ज्यादा का टारगेट चेज हुआ था। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Riyan Parag Vaping Video Controversy; BCCI Penalty

स्पोर्ट्स डेस्क19 मिनट पहले कॉपी लिंक पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग को IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। IPL 2026 के 40वें मैच में राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच मुकाबला चल रहा था। दूसरी पारी के दौरान रियान पराग ड्रेसिंग रूम के अंदर वेप (ई-सिगरेट) का इस्तेमाल करते हुए देखे गए। रियान पराग ने इस सीजन 9 मैचों में 306 रन बनाए हैं। कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.21 के तहत कार्रवाई रियान को IPL आचार संहिता के लेवल-1 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। उन्होंने आर्टिकल 2.21 का उल्लंघन किया, जो खेल को बदनाम करने वाले आचरण से संबंधित है। मैच रेफरी अमित शर्मा ने इस मामले में उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया और उनके खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ दिया। रियान ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और सजा को मंजूर कर लिया है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है रियान पराग का ई-सिगरेट पीना गलत माना गया। भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट और टीम कप्तान का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। राजस्थान रॉयल्स के साथ इस सीजन का दूसरा विवाद राजस्थान रॉयल्स इस IPL सीजन में दूसरी बार प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चर्चा में है। इससे पहले टीम के मैनेजर रोमी भिंडर डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े गए थे, जो प्लेयर मैच ऑपरेशंस एरिया (PMOA ) प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। उस मामले में BCCI ने जांच के बाद मैनेजर पर जुर्माना लगाया था और चेतावनी दी थी। ——————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL सीजन में 200+ रनचेज का रिकॉर्ड टूटा:हैदराबाद ने इतिहास का चौथा सबसे बड़ा चेज किया सनराजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को मुंबई इंडियंस पर 6 विकेट की जीत दर्ज की। टीम ने 244 रन का टारगेट 18.4 ओवर में चेज कर लिया। यह IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज है। मौजूदा सीजन में 10वीं बार 200 या इससे ज्यादा का टारगेट चेज हुआ है। यह IPL के एक सीजन में 200+ रनचेज का रिकॉर्ड है। पिछले सीजन में 9 बार 200 या इससे ज्यादा का टारगेट चेज हुआ था। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SC ने केंद्र से कहा:रेप विक्टिम के अबॉर्शन पर टाइम लिमिट हटाइए, समय के साथ कानून बदलना चाहिए; अभी 6 महीने तक गर्भपात का नियम

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 15 साल की रेप विक्टिम की 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को जबरन मां बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में फैसला पीड़िता का ही होना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से कहा कि ऐसे मामलों में अबॉर्शन के लिए टाइम लिमिट से जुड़े कानून में बदलाव किया जाए। कोर्ट ने कहा- कानून ऐसा होना चाहिए जो समय के साथ बदलता रहे और वर्तमान हालात के अनुसार चले। AIIMS की ओर से कहा गया था कि 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में भ्रूण एक ‘वायबल लाइफ’ है और इस स्टेज पर अबॉर्शन सफल नहीं हो सकता। AIIMS डॉक्टरों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि विक्टिम के माता-पिता से बात कर यह तय किया जाए कि गर्भ जारी रखना है या नहीं।
Indore PWD Officers Bribe Scam

इंदौर8 मिनट पहले कॉपी लिंक इंदौर में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन अधिकारियों को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। इस संबंध में मुख्यालय से आदेश जारी कर दिए गए हैं। निलंबित अधिकारियों में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जयदेव गौतम, एसडीओ टीके जैन और सब इंजीनियर अंशु दुबे शामिल हैं। तीनों के खिलाफ यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस इंदौर की ट्रैप कार्रवाई के बाद की गई है। रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए थे अधिकारी लोकायुक्त टीम ने 21 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए जयदेव गौतम को पलासिया स्थित शासकीय आवास पर 1.5 लाख रुपए रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं एसडीओ टीके जैन को विभागीय कार्यालय परिसर में 1 लाख रुपए लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। सब इंजीनियर अंशु दुबे ने भी 1 लाख रुपए की मांग की थी, लेकिन तय रकम से कम मिलने पर उसने रिश्वत नहीं ली। बिल पास करने के बदले मांगी गई थी रिश्वत यह मामला धार के ठेकेदार राजपाल सिंह पवार (संचालक, पटेल श्री इंटरप्राइजेस) की शिकायत पर सामने आया। पवार की फर्म ने वर्ष 2023 में करीब 4.73 करोड़ रुपए का सड़क निर्माण कार्य किया था। कार्य पूर्ण होने के बाद अंतिम बिल भुगतान के एवज में अधिकारियों ने 3.5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने योजना बनाकर ट्रैप किया और दो अधिकारियों को रिश्वत लेते पकड़ लिया। लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय द्वारा विभाग को भेजे गए प्रतिवेदन के आधार पर राज्य शासन ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इस खबर को भी पढ़िए… इंदौर में PWD के 3 अफसर रिश्वत लेते पकड़ाए इंदौर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन अधिकारी मंगलवार को रिश्वत लेते हुए पकड़ाए हैं। पकड़े गए अधिकारियों के नाम जयदेव गौतम (कार्यपालन यंत्री, संभाग-1, इंदौर), टीके जैन (अनुविभागीय अधिकारी, पीडब्ल्यूडी संभाग-1) और अंशु दुबे (उपयंत्री, संभाग-1, इंदौर) हैं। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









