Friday, 19 Jun 2026 | 05:34 PM

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मंदसौर में तूफान-कार भिड़ी, दो गंभीर:छह घायल, टक्कर के बाद वाहन पलटा, कार सवार फरार

मंदसौर में तूफान-कार भिड़ी, दो गंभीर:छह घायल, टक्कर के बाद वाहन पलटा, कार सवार फरार

मंदसौर जिले के अचेरी के पास शुक्रवार दोपहर सड़क हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि छह अन्य को मामूली चोटें आईं। यह दुर्घटना प्रतापगढ़ से मंदसौर आ रहे एक तूफान वाहन और सामने से आ रही एक कार के बीच टक्कर से हुई। जानकारी के अनुसार, राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी 65 वर्षीय लक्ष्मण कुमावत अपनी 60 वर्षीय पत्नी मांगी बाई के साथ तूफान वाहन (MP44 TA 0399) में सवार होकर इलाज के लिए मंदसौर आ रहे थे। अचेरी के समीप उनकी गाड़ी की सामने से आ रही एक कार से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि तूफान वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। वहीं, फोर्ड फ्रीस्टाइल कार (MP09 WB 7830) सड़क से नीचे उतर गई। दुर्घटना के तुरंत बाद कार सवार मौके से फरार हो गए। हादसे में लक्ष्मण कुमावत को हाथ, पैर और कमर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जबकि उनकी पत्नी मांगी बाई की पसलियों और हाथ में चोट लगी। दोनों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद लक्ष्मण की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया गया है। तुफान में आठ लोग सवार थे तूफान वाहन में कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें से छह लोगों को मामूली चोटें आई हैं। इनमें कमलाबाई (60 वर्ष), पेपा बाई (70 वर्ष), नरबादी बाई (30 वर्ष), कशिश (14 वर्ष, पिता कन्हैया लाल), सौम्या (6 वर्ष, पिता राकेश) और मानव (11 वर्ष, पिता मुनेश) शामिल हैं। सभी मामूली रूप से घायल लोगों का उपचार जिला अस्पताल में जारी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल रिजल्ट से पहले फुल एक्शन में ये बीजेपी, चुनावी पोल में जीत का अनुमान के बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल रिजल्ट से पहले फुल एक्शन में ये बीजेपी, चुनावी पोल में जीत का अनुमान के बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

पश्चिम बंगाल में मातृभाषा से पहले बीजेपी पूरी तरह से एक्शन मूड में आ गई है। 4 मई को वाली पार्टी से पहले, 2 मई को कोलकाता में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उन प्रवासी नेताओं को भी बुलाया गया था, जिनमें पश्चिम बंगाल चुनाव विधानसभा और जोन में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी. इन सभी नेताओं को मातृभाषा के दिन अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इस उच्चस्तरीय विधानसभा में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बैसाही और चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल होंगे. पश्चिम बंगाल में वोटिंग के बाद ज्यादातर एक्जिट पोल बीजेपी की सरकार बनी हुई हैं। अब बीजेपी का पूरा फोकस फोकस पर है। प्रतिपक्षी भाजपा में लगातार बैठकों का दौर जारी है। बंगाल के प्रभारी सुनील बैसाखी और भूपेन्द्र यादव को पश्चिम बंगाल में ही रखा गया है। पहली वोटिंग के बाद 30 अप्रैल को सुनील बैसाखी और भूपेंद्र यादव ने कोलकाता में पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर वोटिंग करके ग्राउंड रिपोर्ट ली। इसके बाद 1 मई को दोनों ही नेताओं ने सिलीगुड़ी में पार्टी के स्थानीय नेताओं और काउंटी एजेंटों के साथ बैठक कर काउंटी केंद्र पर एसोसिएशन के वरिष्ठों की जानकारी दी। उसके बाद 2 मई को पार्टी की ओर से इन्वेस्टमेंट डॉक्युमेंट पर प्रवासी नेताओं को कोलकाता बुलाया गया है। उनके साथ भी बैठक की जाएगी और अपने-अपने विभाग वाले क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई को बनाए रखने के लिए पार्टी की ओर से निर्देश दिए जाएंगे। यह भी पढ़ें:- एग्जिट पोल 2026: बीजेपी का तूफान, सर्वे में ममता बनर्जी के साथ हो ‘खेला’ इस बैठक का फोकस बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी स्तर पर कोई गलती न हो। बूथ स्तर से लेकर बैंकिंग सेंटर तक, हर व्यवस्था की शुरुआत से समीक्षा की जाएगी। किस केंद्र पर कौन सा एजेंट रहेगा, एजेंटों की भूमिका क्या होगी और हर राउंड की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इस बैठक में इस पर अंतिम रणनीति तय होगी। ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र की जमीनी रिपोर्ट और आंकड़े भी साझा करेंगे, ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके। यह भी पढ़ें:- ‘बंगाल में बीजेपी सत्ता में आई तो…’ बांग्लादेश की संसद में विधानसभा चुनाव को लेकर क्या बोला बांग्लादेशी अल्पसंख्यक, मचा हंगामा बिहार, बंगाल के कई क्वार्टर फाइनल मुकाबले बेहद करीबी माने जा रहे हैं। एक ओर ओर बिल्डर अपनी इंजीनियरिंग की दम वापसी पर दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा अपनी ग्राउंड रिपोर्ट और एलेक्टिट पोल्स के उत्साह से उत्साहित होकर अपनी जीत का दावा कर रही है। ऐसे में मातृभाषा के दिन हर राउंड, हर टेबल और हर आंकड़े पर बिजनेस की पैनी नजर रहेगी। 2 मई की इस बैठक में सिर्फ बातचीत की समीक्षा नहीं की गई, बल्कि 4 मई की अंतिम जंग के लिए बीजेपी की अंतिम नींव बाजार में बनी हुई है। (टैग्सटूट्रांसलेट)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव हिंसा(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम

शुगर कंट्रोल, खून की कमी दूर…बागेश्वर का लाल चावल सेहत के लिए वरदान, बना देगा जिम वाली बॉडी

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Last Updated:May 01, 2026, 15:42 IST Red Rice Benefits : बागेश्वर का लाल चावल कपकोट, शामा, रीमा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में उगता है. इसे स्थानीय भाषा में जुमरिया धान कहते हैं. स्वाद, सुगंध और पोषण से भरपूर है. लोकल 18 से बागेश्वर के आयुष चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि लाल चावल सफेद वाले की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर को ताकत देने, खून की कमी दूर करने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने में रामबाण है. बागेश्वर. उत्तराखंड के बागेश्वर में उगने वाला पारंपरिक लाल चावल अपनी खास खूबियों के लिए जाना जाता है. ये जिले के कपकोट, शामा, रीमा और आसपास के पहाड़ी इलाकों में उगता है. इस चावल को स्थानीय भाषा में ‘जुमरिया’ धान के नाम से जाना जाता है. स्वाद, सुगंध और पोषण से भरपूर यह चावल अब जिले की खास पहचान बनता जा रहा है. पहले यह चावल केवल स्थानीय घरों और पर्व-त्योहारों तक सीमित था, लेकिन अब इसकी मांग बाजारों तक पहुंच गई है. लोकल 18 से बागेश्वर के आयुष चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि लाल चावल सामान्य सफेद चावल की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर को ताकत देने, खून की कमी दूर करने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने में मददगार है. डॉ. पटेल बताते हैं कि इस चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम माना जाता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए भी सफेद चावल की तुलना में अच्छा विकल्प बन रहा है. इसके नियमित सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है, लंबे समय तक पेट भरा रहने का अहसास होता है. यही वजह है कि फिटनेस पसंद करने वाले लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं. शादी और पूजा के लिए स्पेशल बागेश्वर की व्यापारी संतोषी देवी बताती हैं कि लाल चावल की खेती पारंपरिक तरीके से की जाती है. पहाड़ों के सीढ़ीदार खेतों में वर्षा जल और प्राकृतिक संसाधनों के सहारे इसकी खेती होती है. कई किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करते, जिससे यह चावल काफी हद तक जैविक माना जाता है. प्राकृतिक खेती से इसकी गुणवत्ता और स्वाद दोनों बेहतर बने रहते हैं. लाल चावल पकने के बाद हल्की सुगंध देता है, खाने में स्वादिष्ट होता है. इससे खीर, मीठे चावल, भात, पुलाव और कई पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन तैयार किए जाते हैं. शादी-विवाह, पूजा-पाठ और शुभ अवसरों पर भी इस चावल का उपयोग किया जाता है. ऑनलाइन बाजार ने बढ़ाई कीमत अब यह लाल चावल स्थानीय मंडियों के साथ ऑनलाइन बाजारों में भी जगह बना रहा है. बाहर से आने वाले पर्यटक भी इसे खरीदकर ले जा रहे हैं. इससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने लगी है, उनकी आय बढ़ने की उम्मीद जगी है. यदि इस पारंपरिक धान को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सरकारी प्रोत्साहन मिले तो बागेश्वर का लाल चावल राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बना सकता है. स्वाद, सेहत और परंपरा का अनोखा मेल होने के कारण यह चावल भविष्य में जिले की आर्थिक ताकत भी बन सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bageshwar,Uttarakhand

पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

पॉवेल की विदाई, कहा था-ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती:लेबल चिपकाने वाले युवक से वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बनने तक की कहानी

आठ साल…तीन अमेरिकी राष्ट्रपति… 66 रेट सेटिंग मीटिंग…महामारी, महंगाई, राजनीतिक हमले आपराधिक जांच। इन सबके बीच जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की कमान संभाली। 29 अप्रैल को उन्होंने फेड चेयर के तौर पर आखिरी पॉलिसी मीटिंग ली। उनकी कहानी भरोसे, दबाव और ईमानदारी की मिसाल बन गई। 15 मई को चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पॉवेल फेड के गवर्नर और रेट-सेटिंग कमेटी के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय विभाग की जांच पूरी पारदर्शिता और अंतिम नतीजे पर पहुंचने तक उनका बने रहना जरूरी है। यह फैसला असामान्य जरूर है, लेकिन शायद पॉवेल हमेशा से ऐसे ही रहे- नियमों से ज्यादा संस्थान की साख को अहमियत देने वाले। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में दुनिया की अर्थव्यवस्था जैसे अचानक थम गई थी। बाजार टूट रहे थे, सप्लाई चेन बिखर रही थी और करोड़ों लोग भविष्य को लेकर डरे हुए थे। मार्च 2020 में पॉवेल ने आपात बैठक बुलाकर ब्याज दरों में कटौती की। कुछ ही दिनों बाद रविवार को दूसरी इमरजेंसी बैठक बुलाई और दरें लगभग शून्य कर दी गईं। महामारी के बाद जब महंगाई 40 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंची, तब भी पॉवेल आलोचनाओं के घेरे में रहे। फेड ने आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाईं। पॉवेल ने चेतावनी दी थी कि लोगों और कॉरपोरेट्स को कुछ दर्द झेलना पड़ेगा, लेकिन कीमतों को काबू में लाना जरूरी है। लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी लड़ाई राजनीति से रही। डोनाल्ड ट्रंप ने कभी उन्हें ‘स्मार्ट’ और मजबूत कहा था, लेकिन बाद में वही ट्रंप उन्हें ‘फूल’, ‘नंबस्कल’ और ‘मेजर लूजर’ जैसे शब्दों से निशाना बनाने लगे। इसके बावजूद पॉवेल ने शायद ही कभी सार्वजनिक जवाब दिया। जब फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठे, तब उन्होंने खुलकर कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि इस बात की है कि अमेरिका में ब्याज दरें आंकड़ों से तय होंगी या राजनीतिक दबाव से। पॉवेल की निजी कहानी भी उतनी ही मानवीय है। वह शुरुआत में गोदाम में सामान पर लेबल लगाने का काम करते थे। उन्होंने कभी अर्थशास्त्र को उबाऊ समझकर छोड़ दिया था, पर वही व्यक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे अहम चेहरा बन गया। सिर्फ एक पद का अंत नहीं, संस्थागत भरोसे की पूरी दास्तान है पावेल का करिअर जेरोम पॉवेल ने 2024 में एक इंटरव्यू में कहा था, ‘ईमानदारी की कोई कीमत नहीं होती। आखिर में आपके पास सिर्फ वही बचती है।’ यही उनके पूरे कार्यकाल का सार बन गया। महामारी हो, महंगाई या राजनीतिक दबाव- पॉवेल ने कई फैसलों पर आलोचना झेली, पर फेड की स्वतंत्रता और अपनी साख से समझौता नहीं किया। उनकी विदाई सिर्फ एक पद का अंत नहीं, बल्कि संस्थागत भरोसे की कहानी बन गई।

ममता बनर्जी के ईवीएम स्ट्रांगरूम के औचक दौरे के बाद कोलकाता पुलिस ने सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया | भारत समाचार

US President Donald Trump said negotiations with Iran are progressing behind closed doors and insisted that only a small circle inside his administration knows the true status of the talks. (Reuters)

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 15:37 IST इससे एक दिन पहले सीएम ममता बनर्जी ने भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया था और आरोप लगाया था कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी गुरुवार को भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम में। (पीटीआई) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने कम से कम सात क्षेत्रों में सभी सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है, जहां हाई-वोल्टेज विधानसभा चुनाव के बाद वोटों की गिनती शुरू होने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शहीद खुदीराम बोस रोड, जज कोर्ट रोड, जादवपुर, डायमंड हार्बर रोड, लॉर्ड सिन्हा हॉल, नरेश मित्रा सारणी (बेलताला रोड) और प्रमथेश बरुआ सारणी में निषेधाज्ञा आदेश जारी किए हैं। इससे पहले, ममता बनर्जी ने कोलकाता के भबनीपुर स्ट्रांगरूम का दौरा किया और वहां लगभग चार घंटे बिताए, उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग ने मिलकर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की ईवीएम अनियमितताएं, जैसे वोटिंग मशीनों या मतगणना प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़, का सामना “जीवन और मृत्यु” की लड़ाई से किया जाएगा। यह भी पढ़ें: ममता ने लगाया ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप, दी ‘जिंदगी और मौत’ की लड़ाई की चेतावनी, बीजेपी ने इसे ‘नाटकबाजी’ बताया एक वायरल वीडियो में मध्य कोलकाता में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के अंदर संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया, जहां सभी सात उत्तरी कोलकाता विधानसभा सीटों की ईवीएम रखी गई हैं। इस बीच, भाजपा ने ममता बनर्जी के भबनीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम के दौरे की आलोचना की और उनकी “आज शाम की नाटकीयता शायद पश्चिम बंगाल के लिए सबसे स्पष्ट एग्जिट पोल है”। 4 मई को मतदान के नतीजों से पहले राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी ने एक वीडियो प्रसारित किया जिसमें चुनाव सामग्री के प्रबंधन में बड़ी खामियों का आरोप लगाया गया। चुनाव आयोग ने मतदान में छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया इस बीच, भारत के चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और स्ट्रांगरूम सुरक्षित रहे। इसमें कहा गया है कि मतदान के बाद उम्मीदवारों, उनके एजेंटों और सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी सात स्ट्रांगरूम को सील कर दिया गया। यह भी पढ़ें: मोदी या ममता, बंगाल ने किसे वोट दिया? एग्जिट पोल, अमेरिकी सट्टेबाजी बोर्ड और गुलाल की बिक्री क्या संकेत दे रही है? पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भी टीएमसी के दावों को खारिज करते हुए कहा, “बुधवार को मतदान समाप्त होने के बाद, सभी स्ट्रॉन्ग-रूम को संबंधित उम्मीदवारों/चुनाव एजेंटों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में उचित रूप से बंद कर दिया गया और सील कर दिया गया। आखिरी स्ट्रॉन्ग रूम गुरुवार सुबह 5.15 बजे बंद कर दिया गया।” पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि भबनीपुर में स्ट्रॉन्ग रूम पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि किसी भी अनियमित गतिविधि को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को “निगरानी में रखा गया है”। यह भी पढ़ें: ‘कड़ी निगरानी में’: सुवेंदु ने दावा किया कि चुनाव नतीजों से पहले सीएम ममता पर नजर रखी जा रही है चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ममता बनर्जी के ईवीएम स्ट्रांगरूम के औचक दौरे के बाद कोलकाता पुलिस ने सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कोलकाता पुलिस(टी)ममता बनर्जी ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप(टी)कोलकाता वोट काउंटिंग(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)ईवीएम हेरफेर के दावे(टी)भबानीपुर स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा(टी)खुदीराम अनुशीलन केंद्र(टी)ममता बनर्जी भवानीपुर

Indore Vijayanagar Stabbing | Youth Attacked After Asking Friends Address; CCTV Footage Viral

Indore Vijayanagar Stabbing | Youth Attacked After Asking Friends Address; CCTV Footage Viral

Hindi News Local Mp Indore Indore Vijayanagar Stabbing | Youth Attacked After Asking Friends Address; CCTV Footage Viral इंदौर7 मिनट पहले कॉपी लिंक इंदौर में चाकूबाजी की दो घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजयनगर में एक युवक को सिर्फ दोस्त का पता न बताने पर चाकू मार दिया गया, वहीं राजेंद्र नगर में बाइक टक्कर के बाद बदला लेने के लिए दो युवकों पर हमला किया गया। विजयनगर थाना क्षेत्र में कुलदीप लश्करी (निवासी बड़ी भमोरी) पर गुरुवार को चाकू से हमला कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक कुलदीप एक जूते की दुकान पर काम करता है। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले कुलदीप के दोस्त शिव से सार्थक की कहासुनी हुई थी। इसके बाद सार्थक अपने साथियों के साथ शिव को तलाशते हुए पहुंचा। जब कुलदीप दुकान की ओर जा रहा था, तब आरोपियों ने उसे रोका और दोस्त की जानकारी मांगी। जानकारी न देने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। पुलिस ने सार्थक और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV देखकर दी धमकी ‘पुलिस कुछ नहीं कर सकती’ हमले के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने आरोपियों को कैमरे की ओर इशारा कर चेताया, लेकिन आरोपियों ने बेखौफ होकर कहा कि पुलिस उनका कुछ नहीं कर सकती। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, हालांकि उनका भागते हुए CCTV फुटेज सामने आया है। राजेंद्र नगर में भी चाकूबाजी, दो घायल राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में भी इसी तरह की वारदात सामने आई। यहां बाइक टक्कर के बाद बदला लेने की नीयत से बदमाशों ने सुनील चौहान और उसके दोस्त विशाल पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में सुनील पर 5 से ज्यादा वार किए गए, जबकि विशाल के हाथ में चोट आई है। दोनों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने इस मामले में दीपक, हनी प्रधान और राज प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। तीनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

2025 में 4.4 करोड़ भारतीयों ने पहली बार लोन लिया:दक्षिण की महिलाएं गोल्ड तो उत्तर भारत की बिजनेस लोन ले रहीं

भारतीय लोन मार्केट का चेहरा बदल रहा है। पहली बार लोन लेने वालों (न्यू टू क्रेडिट) की दौड़ में महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की ‘ब्रिजिंग द गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। खास बात यह है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन बढ़ने के बीच यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन का दबदबा है। पहले लोन में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का दबदबा पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यही एंट्री पॉइंट बनता है। और एक बार जो रिश्ता बनता है, वह आगे भी बना रहता है। गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। पहली बार लोन लेन वाले लोगों की प्राथमिकता ? कंज्यूमर लोन – 31.6% गोल्ड लोन – 20.2% दो पहिया – 16.9% पर्सनल लोन -11.0% बिजनेस लोन – 9.5% एनबीएफसी नए लोगों को लोन का बड़ा सहारा आमतौर पर माना जाता है कि वित्तीय समावेशन का बोझ सरकारी बैंकों पर होता है, लेकिन डेटा इसके विपरीत कहानी कह रहा है। बैंक पहली बार कर्ज लेने वालों को लोन देने से बचते हैं। – एनबीएफसी का हिस्सा 50% से बढ़कर 61% हो गया – सरकारी बैंकों का हिस्सा 16% से घटकर 13.6% – निजी बैंकों का 22% से घटकर 15% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा महिलाओं की पसंद अब बदल रही है। वे केवल गहने गिरवी रखकर लोन नहीं ले रहीं, बल्कि अपना काम शुरू करने के लिए बिजनेस लोन भी ले रही हैं। शीर्ष 10 में से 5 राज्यों में महिलाओं के बीच बिजनेस लोन प्रमुख प्रोडक्ट बन गया है। महिलाओं की पहली पसंद 1. कंज्यूमर ड्यूरेबल 25.2% 2. गोल्ड लोन 21.8% 3. बिजनेस लोन 17.9% 4. पर्सनल लोन 8.3% यूपी, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में महिला कर्जदारों की संख्या सबसे ज्यादा है। दक्षिण भारत की महिलाएं गोल्ड लोन ज्यादा ले रही हैं, तो उत्तर और पूर्वी भारत (यूपी, बंगाल, बिहार) की महिलाएं बिजनेस लोन में आगे हैं। नए कर्जदार उम्मीद से ज्यादा सुरक्षित साबित हो रहे। इनकी सफलता दर बेहतर है। 67% ग्राहक एक साल में सुरक्षित रिस्क कैटेगरी में शामिल हुए। युवा – दोपहिया और पर्सनल लोन से शुरुआत 25 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए ‘मोबिलिटी’ और ‘लिक्विडिटी’ सबसे अहम है, यही वजह है कि टू-व्हीलर और पर्सनल लोन सेगमेंट में इनका दबदबा है। वहीं, 26 से 35 साल के युवा कंज्यूमर ड्यूरेबल, गोल्ड लोन और बिजनेस लोन में दबदबा रखते हैं। 25 साल से कम के युवा दो पहिया लोग-33.1% पर्सनल लोन 50.3% 26-35 साल के युवा सीडी 35.4% गोल्ड लोन 29.4% बिजनेस लोन 30.7% कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, उस प्रोडक्ट में उस आयु वर्ग (12 माह, फरवरी 26 को खत्म) – कंज्यूमर ड्यूरेबल: 80.4% ग्राहकों का रिस्क प्रोफाइल बेहतर हुआ। – टू-व्हीलर: 75.3% ग्राहकों ने दिखाया बेहतरीन अनुशासन। – दो पहिया लोन में छोटे-मझोले शहरों की हिस्सेदारी 71 फीसदी और कंज्यूमेर ड्यूरेबल लोन में करीब 67 फीसदी है।

डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर:धार में दीनदयाल रसोई में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया

डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर:धार में दीनदयाल रसोई में जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया

धार में स्वर्गीय डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर की पुण्यतिथि और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सेवा और समर्पण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया और दीनदयाल रसोई योजना के तहत जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया गया। डॉ. मनोहर सिंह ठाकुर सेवालय ट्रस्ट द्वारा हटवाड़ा स्थित सेवालय क्लीनिक में नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। ट्रस्ट के चिकित्सक डॉ. मुकेश चौहान ने 55 मरीजों का परीक्षण कर उपचार दिया। शिविर में मरीजों की बीपी और शुगर की जांच भी नि:शुल्क की गई। एडवोकेट सुहेल निसार के सहयोग से दीनदयाल रसोई योजना में तिथि भोज आयोजित किया गया। ट्रस्ट सदस्यों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित कर जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत में ट्रस्ट संरक्षक डॉ. शरद विजयवर्गीय, एडवोकेट सुहेल निसार और अन्य अतिथियों ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने उनके सेवा कार्यों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जीवनभर गरीब और जरूरतमंदों की सेवा की। कोरोना काल में भी उन्होंने निस्वार्थ भाव से उपचार किया और इसी दौरान संक्रमित होकर प्राण त्याग दिए। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता, ट्रस्ट सदस्य और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने स्वर्गीय डॉ. ठाकुर के सेवा भाव को याद किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन ईश्वर सिंह ठाकुर ने किया, जबकि आभार अजय सिंह ठाकुर ने व्यक्त किया। आयोजकों ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा भविष्य में भी ऐसे जनहित कार्य जारी रखे जाएंगे।

कुनिका सदानंद ने दरगाह वाले वीडियो पर रिएक्ट किया:भागवत कथा में जाने का वीडियो शेयर कर कहा- मजार, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह जाती हूं

कुनिका सदानंद ने दरगाह वाले वीडियो पर रिएक्ट किया:भागवत कथा में जाने का वीडियो शेयर कर कहा- मजार, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे सभी जगह जाती हूं

टीवी शो बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस कुनिका सदानंद ने हाल ही में वायरल हुए उनके दरगाह पर चादर चढ़ाने वाले एक वीडियो पर रिएक्शन दिया। दरअसल, कुनिका सदानंद की एक पोस्ट में एक यूजर ने X पर कमेंट करते हुए एक्ट्रेस का मजार में चादर चढ़ाने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मजार जाने वालों को मंदिर जाने वालों से दिक्कत होगी… तुम बस एक गुलाम हो… हम तुम्हारा दर्द समझ सकते हैं… दूसरा दर्द ये है कि कुमार सानू बीजेपी में शामिल हो गए। जवाब में कुनिका ने वीडियो शेयर किया इसके जवाब में कुनिका सदानंद ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में वह भागवत कथा में शामिल होती और लोगों को खाना परोसती नजर आईं। साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं मजार भी जाती हूं, मंदिर भी जाती हूं, चर्च और गुरुद्वारे भी जाती हूं और हां, भागवत कथा भी सुनती हूं।। इससे पहले कुनिका सदानंद ने पीएम मोदी के वीडियो पर रिएक्ट करते हुए कहा, यह बहुत ही बेकार बात है। मुझे शर्म आती है कि मेरे प्रधानमंत्री इन सब फालतू चीजों में व्यस्त हैं। मणिपुर के आसपास फुटबॉल खेलने का समय है, लेकिन मणिपुर जाने का समय नहीं है। उन्होंने आगे लिखा था, आप क्यों डर रहे हैं, प्रधानमंत्री जी? अब आपके पास अपना मुख्यमंत्री है, वो आपकी सुरक्षा कर सकता है। ओह, मैं भूल गई… अगर आप जाएंगे तो आपसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछे जाएंगे, जिनका शायद आपके पास जवाब नहीं होगा। शर्म की बात है सर… क्या यही बदलाव का वादा आपने 12 साल पहले किया था?