बेडू सिर्फ फल नहीं! पहाड़ों में इसे मानते हैं देसी दवा, मस्सों से लेकर पेट तक की परेशानी में करता है असर

Last Updated:May 01, 2026, 15:08 IST Wild Fig Health Benefits: उत्तराखंड के पहाड़ों में पाया जाने वाला बेडू सिर्फ एक जंगली फल नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक चलती-फिरती औषधालय है. सदियों से पहाड़ी गांवों में लोग छोटी-मोटी बीमारियों और त्वचा की समस्याओं के लिए इसी पेड़ के ‘चोप’ (दूधिया रस) और फलों पर भरोसा करते आए हैं. चाहे जिद्दी मस्से हटाना हो या शरीर में चुभा बारीक कांटा बाहर निकालना, बेडू का यह रस हर मुश्किल का देसी समाधान माना जाता है. बेडू के चोप का सबसे ज्यादा यूज मस्सों को हटाने के लिए किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे सावधानी से मस्से पर लगाते हैं, मान्यता है कि लगातार कुछ दिनों तक लगाने पर मस्सा सूखने लगता है, धीरे-धीरे गिर सकता है. हालांकि इसे त्वचा के सामान्य हिस्से पर लगाने से जलन हो सकती है, इसलिए बहुत सावधानी जरूरी है. डॉ ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि यदि मस्सा बड़ा हो, दर्द करे या रंग बदल रहा हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए. फिर भी पहाड़ के गांवों में यह तरीका वर्षों से अपनाया जाता रहा है. यही कारण है कि बेडू को घरेलू देसी दवा के रूप में खास पहचान मिली हुई है. स्थानीय जानकार किशन मलड़ा बताते हैं कि बेडू का चोप छोटे कट, छिलने या हल्की चोट पर भी लगाया जाता है. इससे घाव जल्दी सूखता है, भरने में मदद मिलती है. कई बुजुर्ग कहते हैं कि यह दर्द कम करने में भी सहायक महसूस होता है. हालांकि खुले और गहरे घाव पर इसका प्रयोग बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. यदि घाव में सूजन, पस या ज्यादा दर्द हो तो तुरंत चिकित्सा लेनी चाहिए. गांवों में पुराने समय से जब अस्पताल दूर होते थे, तब ऐसे घरेलू उपायों का सहारा लिया जाता था. आज भी कई लोग प्राथमिक उपचार के रूप में इसे जानते हैं. बेडू के चोप को कुछ लोग फोड़े-फुंसी, दाद, खुजली और हल्के त्वचा संक्रमण में भी उपयोगी मानते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे बहुत कम मात्रा में प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है. इससे त्वचा सूखती है, आराम मिल सकता है. लेकिन हर त्वचा अलग होती है, इसलिए कई लोगों को जलन या एलर्जी भी हो सकती है. ऐसे में पहले थोड़ी मात्रा में जांच करना बेहतर माना जाता है. यदि त्वचा लाल हो जाए या तेज जलन हो तो तुरंत बंद करना चाहिए. त्वचा रोग बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google बेडू फल में कई प्राकृतिक पोषक तत्व पाए जाने की बात कही जाती है. इसमें फाइबर, प्राकृतिक शर्करा, सूक्ष्म पोषक तत्व और ऊर्जा देने वाले तत्व मौजूद होते हैं. पहाड़ों में मेहनत करने वाले लोग इसे मौसमी फल के रूप में खाते रहे हैं. यह शरीर को ताकत देने और कमजोरी दूर करने में सहायक माना जाता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी पका हुआ बेडू अच्छा विकल्प माना जाता है. स्थानीय लोग इसे प्रकृति का तोहफा बताते हैं. यदि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए तो मौसमी फल के रूप में लाभ मिल सकता है. बेडू का पका फल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसके सेवन से कब्ज, गैस और पेट भारी होने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. इसमें प्राकृतिक रेशा पाया जाता है, जो पेट साफ रखने में मदद करता है. पहाड़ों में लोग इसे सीजन के दौरान ताजा खाते हैं. कुछ लोग इसे सुखाकर भी उपयोग करते हैं. यदि सीमित मात्रा में खाया जाए तो यह शरीर को ऊर्जा भी देता है. हालांकि अधिक मात्रा में खाने से कुछ लोगों को पेट ढीला होने की परेशानी हो सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी है. हालांकि बेडू फल और उसके चोप के कई पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति पर असर अलग हो सकता है. चोप त्वचा पर तेज हो सकता है, इसलिए आंख, चेहरे या संवेदनशील हिस्सों से दूर रखना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों पर उपयोग से पहले सावधानी जरूरी है. यदि जलन, सूजन या एलर्जी हो तो तुरंत बंद कर देना चाहिए. किसी गंभीर बीमारी, बड़े घाव या लंबे समय की त्वचा समस्या में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. सही जानकारी और सावधानी से ही लाभ लिया जा सकता है. बेडू सिर्फ फल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और लोकजीवन से भी जुड़ा है. कई लोकगीतों और कहावतों में इसका जिक्र मिलता है. गांवों में बच्चे पेड़ों से बेडू तोड़कर खाते थे, बुजुर्ग इसके गुण बताते थे. पहाड़ के पारंपरिक खानपान में यह फल खास स्थान रखता है. आज आधुनिक जीवनशैली के बीच कई लोग पुराने पौष्टिक फलों की ओर लौट रहे हैं. बेडू भी उन्हीं फलों में शामिल है, जिसकी पहचान अब फिर बढ़ रही है. बागेश्वर समेत कई क्षेत्रों में लोग इसे प्राकृतिक और देसी स्वास्थ्य विकल्प मानते हैं. पहाड़ के गांवों में बेडू के चोप का उपयोग शरीर में चुभे छोटे कांटे को बाहर निकालने के लिए भी किया जाता है. कांटा चुभने वाली जगह पर थोड़ा चोप लगाया जाता है, जिससे त्वचा नरम होती है, कांटा निकालना आसान हो जाता है. यह पारंपरिक तरीका आज भी कुछ गांवों में अपनाया जाता है. हालांकि यदि कांटा गहरा चला जाए, सूजन बढ़े या संक्रमण हो जाए तो डॉक्टर के पास जाना जरूरी है. बच्चों पर इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए. पुराने समय में घरेलू उपचारों में बेडू का यह उपयोग काफी लोकप्रिय माना जाता था. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया शुरू:4 मई से ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे बच्चे, 30-31 मई को पंजीयन सुधार करा पाएंगे

वर्ष 2026-27 के लिए सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रथम चरण के तहत ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया 4 मई से शुरू होगी जो 29 मई तक चलेगी। इच्छुक विद्यार्थी इस अवधि में पंजीयन कर अपनी पसंद की संस्थाओं और पाठ्यक्रमों का चयन कर सकते हैं। पंजीयन में सुधार की सुविधा 30 से 31 मई तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद मेरिट सूची जारी होने और सीट आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित तिथियों के अनुसार की जाएगी। महाविद्यालय प्रशासन ने बताया कि संस्थान में आधुनिक लैब, अनुभवी संकाय और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यार्थियों के लिए समय-सीमा के अंदर आवेदन कर अपने प्रवेश लेने का मौका है। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dte.mponline.gov.in पर जाकर विवरण प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही महाविद्यालय में आकर संपर्क कर सकते हैं। 9 से 18 जून तक चलेगा दूसरा चरण कॉलेज में फैशन टेक्नोलॉजी, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस व आर्किटेक्चर एवं इंटीरियर डिजाइनिंग में विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे। दूसरे चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया 9 जून से 18 जून तक आयोजित की जाएगी। जिसमें पुनः पंजीयन, संशोधन और चॉइस फिलिंग का अवसर दिया जाएगा। संस्थागत स्तर की काउंसलिंग के माध्यम से रिक्त सीटों पर प्रवेश 4 जुलाई से 12 अगस्त तक किया जाएगा।
छतरपुर में करंट से चार जानवरों की मौत:11 केवी लाइन टूटी, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

छतरपुर के सागर रोड स्थित गणेश कॉलोनी में करंट लगने से चार जानवरों की मौत हो गई। मृतकों में तीन गाय और एक कुत्ता शामिल हैं। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, कॉलोनी में बुलेट एजेंसी के पीछे देर रात 11 केवी बिजली लाइन टूटकर सड़क पर गिर गई थी। तार टूटने के बाद पूरे इलाके में करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आकर ये जानवर मौके पर ही दम तोड़ गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि तार काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा। घटना के बाद आसपास के रहवासियों ने तत्काल बिजली विभाग (MPEB) और नगर पालिका को फोन कर सूचना दी। हालांकि, लोगों का आरोप है कि कई बार कॉल करने के बावजूद कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद भी काफी देर तक इलाके में करंट का खतरा बना रहा, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। रहवासी घरों से बाहर निकलने से बचते रहे। घटना की सूचना मिलते ही गौ सेवा परिवार के सदस्य धर्मेंद्र गोस्वामी और रविराज सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने तथा मृत जानवरों के उचित निस्तारण की मांग की।इस घटना ने बिजली विभाग और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो इन जानवरों की जान बचाई जा सकती थी। अब लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दही के शोले रेसिपी: 500 रुपये नहीं सिर्फ 50 रुपये में मांगी गई ब्रेड से लेकर दही के शोले जैसे होटल, जानें आसान रेसिपी

1 मई 2026 को 14:48 IST पर अद्यतन किया गया दही के शोले रेसिपी: दही के शोले एक विशेष श्रेणी के आधार हैं, जिनका नाम ही मुंह में पानी आ जाता है। आम तौर पर इस डिश पर बड़े रेस्तरां या प्लास्टिक में काफी टुकड़े होते हैं, जहां एक प्लेट की कीमत 500 रुपये तक पहुंचती है। लेकिन अब आप इस शाही स्वाद को घर पर ही बेहद कम खर्च में तैयार कर सकते हैं। यह है कि यह रेसिपी घर में बनी हुई नीवे से भी बड़ी आसानी से बन जाती है। अनुसरण करना : ब्रेडफ्रूट, हैंग कार्ड यानी कबाड़ी में कसा हुआ पनीर, आलू कटी का टुकड़ा काली मिर्च, गाजर और प्याज, काली मिर्च, हरा धनिया और मसाले में नमक, काली मिर्च, लाल मिर्च और चाट मसाला की जरूरत होगी। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बाउल में हैंग कार्ड, चीज़ और साड़ी के रोल को महान से मिक्स करें। इसमें सभी तरह के कच्चे माल और ध्यान रखे जाते हैं कि दही में बिल्कुल भी पानी न हो, फिर भी शोले का टेक्सचर प्रभाव आ जाता है। छवि: फ्रीपिक अब बेरोजगारों के बच्चों को काट लें। एक फ़्राईल को फ़्लैक पानी की मदद से प्लास्टर करें और पत्थरों से बने अतिरिक्त पानी को हटा दें ताकि बेड नरम हो जाए और आसानी से रोल बन जाए। छवि: फ्रीपिक बेडरे के बीच में एक मैमोरी फिलिंग स्थान। अब एक प्लास्टिक शीट या क्लीन रैप की मदद से बेड को टॉफी की तरह दोनों तरफ से घुमाते हुए टाइट रोल बना लें। इससे शोले खुलेंगे नहीं और उनके दर्शन भी अच्छे बनेंगे। छवि: फ्रीपिक कच्चे में तेल गरम करें और डिमोशनल पर इन रोल्स को सोना और कुरकुरा होने तक तल लें। तलने के बाद बिच से तिरछा प्वॉइंट ताकि अंदर की क्रीमी फिलिंग नजर आए। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : कीर्ति सोनी प्रकाशित 1 मई 2026 14:48 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)दही के शोले रेसिपी(टी)दही के शोले कैसे बनाएं(टी)आसान स्नैक रेसिपी(टी)भारतीय स्नैक्स(टी)बजट रेसिपी(टी)घर पर कुरकुरा स्नैक्स(टी)पनीर स्नैक्स(टी)ब्रेड स्नैक्स रेसिपी(टी)घर का बना ऐपेटाइज़र(टी)त्वरित शाकाहारी स्नैक्स
दूसरी प्रेग्नेंसी के बीच शूटिंग करती दिखीं दीपिका पादुकोण:केपटाउन में दीपिका का हाथ पकड़े नजर आए शाहरुख; फिल्म 'किंग' के फोटो लीक

दीपिका पादुकोण अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के बीच किंग फिल्म की शूटिंग करती दिखाई दी हैं। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की आने वाली फिल्म ‘किंग’ कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर लीक हो गई हैं। ये तस्वीरें साउथ अफ्रीका के केपटाउन शेड्यूल की बताई जा रही हैं। इसमें शाहरुख और दीपिका एक म्यूजिक सीक्वेंस के लिए शूटिंग करते नजर आ रहे हैं। म्यूजिक सीक्वेंस शूट करते दिखे स्टार्स तस्वीरों में शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण का लुक काफी कूल लग रहा है। दीपिका ने फ्लोरल प्रिंट का गाउन पहना हुआ है और वे सेट पर टहलती नजर आ रही हैं। वहीं, शाहरुख खान प्रिंटेड शर्ट में दिख रहे हैं, जिसके बटन उन्होंने खुले रखे हैं। बैकग्राउंड को देखकर लग रहा है कि यह किसी गाने की शूटिंग का हिस्सा है। इन तस्वीरों में सेट के बाकी क्रू मेंबर्स भी आसपास काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रेग्नेंसी के ऐलान के बाद सामने आई तस्वीरें ये तस्वीरें ऐसे समय में सामने आई हैं जब दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी फैंस के साथ शेयर की है। दीपिका ने 19 अप्रैल को इंस्टाग्राम पर एक फोटो पोस्ट की थी, जिसमें उनकी बेटी दुआ उनकी गोद में बैठी है और हाथ में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट पकड़े हुए है। फिल्म ‘किंग’ से जुड़ी खास बातें ‘किंग’ फिल्म को सुजॉय घोष डायरेक्ट कर रहे हैं, जबकि सिद्धार्थ आनंद इसके प्रोड्यूसर हैं। इस फिल्म की सबसे खास बात यह बताई जा रही है कि इसमें शाहरुख खान के साथ उनकी बेटी सुहाना खान भी नजर आएंगी। केपटाउन के खूबसूरत लोकेशन्स पर फिल्म का एक बड़ा हिस्सा शूट किया गया है। शाहरुख और दीपिका की जोड़ी इससे पहले ‘पठान’, ‘जवान’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘ओम शांति ओम’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुकी है। पिछली फिल्मों की सफलता शाहरुख खान ने साल 2023 में ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी फिल्मों के जरिए बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त वापसी की थी। ‘पठान’ में उनके साथ दीपिका पादुकोण लीड रोल में थीं और इस फिल्म ने दुनियाभर में 1000 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी। दीपिका भी हाल ही में ऋतिक रोशन के साथ फिल्म ‘फाइटर’ में नजर आई थीं।
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‘उन्हें कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है’: सुवेंदु का दावा है कि चुनाव नतीजों से पहले ममता पर नजर रखी जा रही है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 14:44 IST सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि भबनीपुर में ईवीएम से छेड़छाड़ को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते ममता बनर्जी पर निगरानी रखी जा रही है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कड़ी निगरानी में हैं। (स्रोत: पीटीआई) भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों से पहले कोई अनियमितता न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को “निगरानी में रखा गया है”। उनकी टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख द्वारा भबनीपुर में एक ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम में लगभग चार घंटे बिताने और 12:07 बजे वहां से निकलने के एक दिन बाद आई है। अधिकारी, जो भवानीपुर में बनर्जी के खिलाफ लड़ रहे हैं, ने कहा कि वे मतपत्रों से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और स्ट्रांगरूम की सख्ती से निगरानी कर रहे हैं। स्ट्रॉन्गरूम के अंदर बनर्जी की एक तस्वीर साझा करते हुए, अधिकारी ने लिखा, “मैं भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र सहित पूरे पश्चिम बंगाल राज्य के मतदाताओं के सम्मानित समुदाय को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस केंद्र से तृणमूल उम्मीदवार, अर्थात् निवर्तमान मुख्यमंत्री… को किसी भी अनुचित लाभ का लाभ उठाने से परहेज करने का सख्त निर्देश दिया गया है।” एक और अधिक पढ़ें एक और विकल्प चुनें एक और विकल्प चुनें एक और विकल्प चुनें, एक और अधिक पढ़ें मेरे पास एक अच्छा विकल्प है मेरे पास एक अच्छा विकल्प है, मुझे एक नया विकल्प चाहिए… pic.twitter.com/9hxyr3A97x– सुवेंदु अधिकारी (@SuvenduWB) 30 अप्रैल 2026 अधिकारी, जो ममता के पूर्व सहयोगी हैं, अब उनके खिलाफ भबनीपुर सीट पर भाजपा पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “चाहे वह कितना भी प्रयास कर ले, वह नियमों के बाहर किसी भी गतिविधि में शामिल होने में असमर्थ है।” भाजपा नेता ने यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद की, जब बनर्जी ने कोलकाता के भबनीपुर के स्ट्रांग रूम में धावा बोल दिया था और आरोप लगाया था कि भाजपा और चुनाव आयोग ने मिलकर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की ईवीएम अनियमितताएं, जैसे वोटिंग मशीनों या मतगणना प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़, का सामना “जीवन और मृत्यु” की लड़ाई से किया जाएगा। ममता बनर्जी ने भवानीपुर के स्ट्रांगरूम का दौरा किया एक वायरल वीडियो में मध्य कोलकाता में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के अंदर संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने के बाद मुख्यमंत्री ने स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया, जहां सभी सात उत्तरी कोलकाता विधानसभा सीटों के ईवीएम रखे गए हैं। यह भी पढ़ें: ममता ने लगाया ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप, दी ‘जिंदगी और मौत’ की लड़ाई की चेतावनी, बीजेपी ने इसे ‘नाटकबाजी’ बताया यह कहते हुए कि उनकी पार्टी को राज्य के विभिन्न हिस्सों में ईवीएम से छेड़छाड़ की खबरें मिली हैं, बनर्जी ने कहा, “यहां ईवीएम के लिए एक स्ट्रॉन्ग रूम है। हमने पाया कि कई जगहों पर हेरफेर हो रहा है। जब मैंने टीवी पर सीसीटीवी देखा, तो मैंने सोचा कि मुझे भी जाकर देखना चाहिए। शुरुआत में, केंद्रीय बलों ने मुझे प्रवेश नहीं करने दिया। लेकिन हमारे चुनाव नियमों के अनुसार, किसी भी पार्टी के उम्मीदवार और चुनाव एजेंट को सीलबंद कमरे तक जाने की अनुमति है।” उन्होंने कहा, “इसके बाद भी अगर कोई ईवीएम मशीन चुराने की कोशिश करता है, अगर कोई काउंटिंग चुराने की कोशिश करता है, तो हम जिंदगी और मौत से एक साथ लड़ेंगे।” इस बीच, टीएमसी ने तीखे शब्दों में एक पोस्ट में कहा कि फुटेज में अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना लोगों द्वारा मतपेटियां खोली जा रही हैं और कहा गया है कि यह एक गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग दोनों चुनावी कदाचार में शामिल हैं। EC ने टीएमसी के आरोपों का खंडन किया भारत के चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और स्ट्रांगरूम सुरक्षित रहे। यह भी पढ़ें: ममता बनाम चुनाव आयोग: ‘ईवीएम हेरफेर’ विवाद पर भवानीपुर युद्धक्षेत्र में बदल गया, टकराव चरमोत्कर्ष पर समाप्त हुआ इसमें कहा गया है कि मतदान के बाद उम्मीदवारों, उनके एजेंटों और सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी सात स्ट्रांगरूम को सील कर दिया गया, और अंतिम कमरे को सुबह लगभग 5:15 बजे सुरक्षित कर दिया गया। ईवीएम स्ट्रांगरूम के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: भाजपा बीजेपी नेता तापस रॉय ने कहा कि उन्होंने सभी ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम के पास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है और टीएमसी पर अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा, “हम स्ट्रॉन्ग रूम की देखभाल के लिए दो लोगों को तैनात करेंगे… वे (टीएमसी) सिर्फ अफवाहें फैला रहे हैं क्योंकि वे अपनी हार के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं… यहां तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘उन्हें कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है’: सुवेंदु ने दावा किया कि चुनाव नतीजों से पहले ममता पर नजर रखी जा रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी निगरानी(टी)सुवेंदु अधिकारी भबानीपुर(टी)ईवीएम छेड़छाड़ के आरोप(टी)भबानीपुर स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी पश्चिम बंगाल(टी)भारत चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया(टी)कोलकाता ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम
जबलपुर में क्रूज डूबने से पहले के 2 VIDEO:म्यूजिक-मस्ती में डूबे थे लोग, लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी; अंदर आ रही थीं ऊंची लहरें

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम क्रूज डूबने से ठीक पहले के दो वीडियो सामने आए हैं। पहले वीडियो में क्रूज के अंदर का नजारा दिख रहा है, जिसमें टूरिस्ट म्यूजिक और मस्ती में डूबे नजर आ रहे हैं। इसमें दिख रहा है कि क्रूज में मौजूद ज्यादातर लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी है। दूसरे वीडियो में मौसम का खतरनाक रूप दिखाई दे रहा है। तेज हवा, आंधी और ऊंची उठती लहरें क्रूज के अंदर तक घुस रही थीं। साफ तौर पर हालात बिगड़ते नजर आ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद क्रूज को किनारे लाने की कोशिश नहीं की गई। हादसे में बचकर लौटे लोगों ने खुलासा किया है कि मौसम खराब होने के बावजूद कैप्टन ने क्रूज को किनारे लगाने का फैसला नहीं लिया। हवा और लहरें लगातार तेज होती जा रही थीं, लेकिन क्रूज आगे बढ़ता रहा। कुछ ही सेकंड्स में क्रूज अनियंत्रित हुआ और देखते ही देखते बरगी डैम के गहरे पानी में समा गया। देखिए, 4 तस्वीरें… हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… MP के जबलपुर में क्रूज डूबा, 9 शव मिले मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम करीब 5 बजे पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं। 28 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन के मुताबिक, तीन बच्चों सहित 4 लोग लापता हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त क्रूज में लगभग 43 से 47 पर्यटक थे। टिकट सिर्फ 29 लोगों की कटी थी। पढ़ें पूरी खबर…
06 वारंटी गिरफ्तार, 3 इनामी आरोपी पकड़े गए:मंदसौर में रातभर सर्च ऑपरेशन, अवैध शराब भी जब्त

मंदसौर जिले में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात पुलिस ने कॉम्बिंग गश्त चलाकर कुल 106 वारंटियों को गिरफ्तार किया। इनमें 56 स्थायी वारंटी और 44 गिरफ्तारी वारंटी शामिल हैं। इसके साथ ही 5-5 हजार रुपये के तीन इनामी आरोपियों को भी पकड़ा गया। तीन इनामी आरोपी भी गिरफ्तार कॉम्बिंग गश्त के दौरान दलौदा थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 107/16 में 5 हजार रुपये के इनामी स्थायी वारंटी जाबीर मुल्तानी को गिरफ्तार किया। वहीं शामगढ़ थाना पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत फरार चल रहे 5 हजार रुपये के इनामी वारंटी सुल्तान सिंह (निवासी हरनावदा, थाना डग, जिला झालावाड़) को पकड़ा। भानपुरा थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 46/26 में 5 हजार रुपये के इनामी आरोपी जे.के. भील को गिरफ्तार किया। जिलेभर में वारंटियों की धरपकड़ की इस कार्रवाई में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 56 स्थायी वारंटी गिरफ्तार किए गए, जबकि 44 गिरफ्तारी वारंटियों की तामील कराई गई। कोतवाली, वायडी नगर, नई आबादी, नाहरगढ़, पिपलियामंडी, शामगढ़, गरोठ, भानपुरा सहित अन्य थाना क्षेत्रों में यह कार्रवाई की गई। कॉम्बिंग गश्त के दौरान 47 निगरानीशुदा बदमाशों और 48 अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की गई। इस तरह कुल 95 लोगों की सघन चेकिंग की गई। अवैध शराब पर भी कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 19 प्रकरण दर्ज किए गए और 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से 105.34 लीटर अवैध शराब जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब 31,200 रुपये आंकी गई है। शांति भंग की आशंका के मामलों में धारा 151 के तहत 10 प्रकरण दर्ज कर 10 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह अभियान 31 अप्रैल और 1 मई 2026 की दरमियानी रात जिलेभर में चलाया गया, जिसमें 450 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। सभी थाना और चौकी स्तर पर कार्रवाई की गई। देखें तस्वीरें
शराब पीने के बाद क्या कफ सिरप लेने से मौत हो जाती है? 42 वर्षीय युवक की सांसें थमने के बाद कार्डियोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी

Last Updated:May 01, 2026, 14:28 IST Alcohol and cough syrup lethal combination: क्या शराब पीने के बाद कफ सिरप लेने से किसी की मौत हो सकती है. यही सवाल हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और मशहूर इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से जानना चाहा. उन्होंने कहा कि शराब पीने के बाद हार्ट में एरीदिमिया होता है यानी धड़कनें तेज होती है. शराब में पहले से नशा रहती है और कफ सिरप भी सेडेटिव होता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बेहोशी की हालत में है और उसे मुंह में कुछ भी पिला दिया जाय तो इससे सांस की नली पूरी तरह से बंद हो सकता है. 42 वर्षीय युवक की मौत के बाद उठे सवाल. बिहार के दरभंगा जिले में एक 42 साल के युवक सतन जी पाठक की शराब पीने के बाद कफ सिरप लेने से मौत हो गई. हुआ दरअसल ये कि सतन जी पहले से शराब पीने के आदी थे. वह अक्सर शराब पीने के बाद बेहोश हो जाया करते थे, फिर घंटों बाद सुध-बुध लौटता था और फिर सामान्य दिनचर्या में वापस आ जाता था. गुरुवार दोपहर अपनी आदत के अनुसार उसने शराब पी और फिर बेहोश हो गया. बेहोशी के आलम में उसे काफी खांसी होने लगी और सांस की नली से घरघराहट होने लगी. घर वालों को लगा कि हमेशा की तरह का ही वाकया है. इसलिए यूं ही छोड़ दिया. जब देर तक होश नहीं आया तो घर वालों ने 3-4 ढक्कन कप सिरप पिला दिया ताकि खांसी कम हो जाए. लेकिन यही बहुत बड़ी भूल साबित हो गई. कुछ देर बाद मरीज को सीवर हार्ट अटैक आया और सांसें थम गई. अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही दम तोड़ दिया. हमने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और मशहूर इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से जानना चाहा कि आखिर मौत के वाजिब कारण क्या-क्या हो सकते हैं. कई कंडीशन एक साथ हुई होंगीडॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि शराब पीने के बाद आमतौर पर लोगों का हार्ट बीट बढ़ जाता है यानी धड़कनें बहुत तेज हो जाती है. इसे एरीदिमिया कहा जाता है. ऐसे लोग शराब पीने के दौरान हमेशा खतरे में रहते हैं. लेकिन मुश्किल तब और ज्यादा हो जाती है जब कोई व्यक्ति अल्कोहल लेने के बाद बेहोश हो जाता है और उसे मुंह से कुछ पिला दिया जाता है. जैसा कि इस व्यक्ति के साथ हुआ. इस केस में कई चीजें एक साथ हुई होगी. शराब पीने के बाद जब धड़कन बहुत तेज होती है तो उसे मेडिकल टर्म में एरीदिमिया (arrhythmia) कहा जाता है. एरीदिमिया से वेंट्रिकुलर ट्रैकियोकार्डिया ( Ventricular Tachycardia (VT) और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन Ventricular Fibrillation (VF) हो सकता है. चूंकि मरीज पहले से बेहोश था और उसी हालत में उसे कफ सिरप दिया गया. यह कफ सिरप सांस की नली में अटक गया होगा जिसकी वजह से सांस की नली जाम हो गई होगी. इससे ऑक्सीजन हार्ट तक नहीं पहुंची होगी. जब सांस की नली बंद हो जाए और हार्ट में ऑक्सीजन नहीं पहुंचे तो मरीज में हार्ट के निचले चैंबर में धड़कनें बहुत तेज हो जाती है. यानी हार्ट इतनी तेजी से धड़कता है कि उसे खून को भरने के लिए समय ही नहीं मिलता. जब शरीर में खून की सप्लाई कम हो जाती है तो मरीज को हार्ट अटैक आ जाता है. तत्काल मौत की वजह यही हो सकती है. दूसरी स्थिति में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन हुआ होगा. इसमें धड़कन के बजाय कपकपी होने लगती है. इसमें हार्ट में बिजली के संकेत पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाते हैं. हार्ट को कोई स्पष्ट कमांड नहीं मिलता. इसमें दिल के निचले हिस्से की मांसपेशियां सिर्फ फड़फड़ाने लगती हैं. हार्ट में पंपिंग पूरी तरह से रूक जाती है. इसकी वजह से खून दिमाग में बिल्कुल नहीं पहुंचता. व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है और सांसें रूक जाती है. क्या कफ सिरप बना खतरनाक कॉकटेल डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि मरीज पहले से अल्कोहल के नशे में था और कुछ बेहोशी भी थी. ऐसे में उसे कफ सिरप दिया गया. कफ सिरप सेडेटिव होता है. यानी इसमें नींद आती है और एक्सट्रीम कंडीशन में शरीर एकदम शांत हो जाता है. दिमाग सुसुप्तावस्था में चला जाता है. अत्यधिक नींद आने के कारण एक तरह से वह व्यक्ति और बेहोशी की स्थिति में जा सकता है.यानी मरीज पहले से ही बेहोश था, कफ सिरप ने इसे और अधिक बेहोशी की हालत में ला दिया गया होगा. दूसरी स्थिति में जब सांस की नली बंद हो गई होगी तो हार्ट अटैक आया होगा लेकिन चूंकि मरीज बेहोश था, इसलिए वह अपनी तकलीफ को नहीं बता सका और सांस की नली में फंसे कफ सिरप को आगे-पीछे नहीं कर सका. इस तरह एक साथ कई तरह की परेशानियां आई होगी और अंतिम वजह हार्ट अटैक बनी होगी. बेहोशी में मुंह से कुछ भी देना जानलेवा आमतौर पर जब लोग बेहोशी में रहते हैं तो उसे लोग मुंह में पानी या कुछ और चीजें पिला देते हैं. ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसा होता है. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी इसकी सख्त चेतावनी देते हुए कहते हैं कि बेहोशी की हालत में कभी भी किसी को भी मुंह में लिक्विड नहीं देना चाहिए. क्योंकि यह सांस की नली को जाम कर सकता है जिसकी वजह से सांस की नली से ऑक्सीजन फेफड़े तक नहीं पहुंचती है. जब ऑक्सीजन फेफड़े तक नहीं पहुंचेगी तो अंजाम सबको पता होगा. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि कभी-कभी खाते समय या पानी पीते समय लोगों को खांसी होने लगती है इससे ऐसा लगता है कि सांसें अटक गई है क्योंकि पानी अचानक सांस की नली ट्रैकिया में फंस जाता है लेकिन चूंकि तब इंसान जगा रहता है इसलिए वह उस अटके हुए पानी को निकाल देता है लेकिन जो व्यक्ति बेहोश है उसका दिमाग पूरी तरह से सुसुप्तावस्था में रहता है इसलिए दिमाग से कोई सिग्नल नहीं निकलता है और सांसें रूक जाती है. ऐसे में अगर आदमी बेहोश है तो उसे किसी भी तरह से मुंह में कुछ नहीं दिया जाना चाहिए. यही कारण है कि जब किसी का ऑपरेशन होता है और उसके लिए उसे बेहोश किया जाता







