Old Vs New Regime; Income Tax Saving Options & Schemes

Hindi News Lifestyle Old Vs New Regime; Income Tax Saving Options & Schemes | PPF ELSS NPS Sukanya Samriddhi 35 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक क्या आपको भी लगता है कि आप ज्यादा टैक्स दे रहे हैं? ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) फाइल करते समय ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल आता है। इसकी वजह है सही और पर्याप्त जानकारी न होना। कुछ लोग सही टैक्स रिजिम नहीं चुनते, तो कुछ उपलब्ध छूट और डिडक्शन का पूरा फायदा नहीं उठा पाते। इसलिए वे अनजाने में ज्यादा टैक्स भरते रहते हैं। सही जानकारी और थोड़ी सी प्लानिंग से काफी हद तक टैक्स बचाया जा सकता है। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में हम ‘टैक्स प्लानिंग’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- कौन-सी गलतियां आपको महंगी पड़ती हैं? टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके क्या हैं? सवाल- ये कैसे जानें कि हम जरूरत से ज्यादा टैक्स तो नहीं भर रहे हैं? जवाब- इसके लिए आपको अपने टैक्स कैलकुलेशन और प्लानिंग को थोड़ा ध्यान से समझना होगा। सबसे पहले अपनी इनकम और टैक्स स्लैब समझें। सभी डिडक्शन और एक्सेप्शंस चेक करें। इसके लिए करें ये काम- सही टैक्स रिजिम चुना है या नहीं? क्या आपने सभी डिडक्शंस क्लेम किए हैं? फॉर्म 16 और AIS/26AS (इनकम और टैक्स समझने के लिए ऑफिशियल स्टेटमेंट) का मिलान किया है नहीं? आपकी इनकम सही रिपोर्ट हुई है या नहीं? इन्वेस्टमेंट प्लानिंग की है या नहीं? टैक्स कैलकुलेटर से तुलना की है या नहीं? अगर आपने सभी डिडक्शन क्लेम नहीं किए, सही रिजिम नहीं चुनी और सही इनकम रिपोर्ट नहीं की है तो इसका मतलब है कि आप जरूरत से ज्यादा टैक्स भर रहे हैं। सवाल- किन गलतियों के कारण हमारी टैक्स लायबिलिटी बढ़ जाती है? जवाब- टैक्स ज्यादा लगने की सबसे बड़ी वजह गलत प्लानिंग या लापरवाही होती है। लोग अक्सर ये गलतियां करते हैं- साल के आखिर में हड़बड़ी में निवेश करना या बिल्कुल न करना। 80C जैसी टैक्स सेविंग डिडक्शन का पूरा फायदा न उठाना। HRA, LTA जैसे अलाउंस क्लेम न करना। गलत टैक्स रिजिम चुन लेना। सभी इनकम (जैसे FD ब्याज) डिक्लेयर न करना, जिससे बाद में पेनल्टी लगती है। बिना प्लान के सिर्फ FD या सेविंग अकाउंट में पैसा रखना। सवाल- अगर टैक्स बचाना है तो इसके क्या बेसिक्स समझना जरूरी है? जवाब- अगर टैक्स बेसिक्स क्लियर हैं तो आप आसानी से टैक्स लायबिलिटी कम कर सकते हैं। चलिए इसके बेसिक्स समझते हैं- टैक्सेबल इनकम क्या है? आपकी कुल कमाई में से छूट घटाने के बाद जो बचता है, उसी पर टैक्स लगता है। डिडक्शन और एग्जेम्प्शन में क्या फर्क है? डिडक्शन में कुल इनकम से कुछ रकम घटाई जाती है (जैसे सेक्शन 80C से मिला डिडक्शन)। एग्जेम्प्शन में इनकम का कुछ हिस्सा (जैसे HRA) सीधे टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया जाता है। ओल्ड और न्यू टैक्स रिजिम में क्या फर्क है? ओल्ड में छूट मिलती है, नॉन टैक्सेबल इनकम का दायरा कम है। न्यू में कम स्लैब रेट होते हैं, लेकिन छूट नहीं है। नॉन टैक्सेबल इनकम का दायरा बड़ा है। टैक्स स्लैब कैसे काम करते हैं? इनकम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग रेट से टैक्स लगाया जाता है। क्या टाइम पर प्लानिंग जरूरी है? साल के अंत में नहीं, बल्कि साल की शुरुआत से ही टैक्स प्लान करना चाहिए। सवाल- कैसे समझें कि आपके लिए न्यू रिजिम बेहतर है या ओल्ड? जवाब- अगर आप निवेश और टैक्स सेविंग करते हैं तो ओल्ड रिजिम बेहतर है। अगर नहीं करते तो न्यू रिजिम चुनना बेहतर है। इनकम के हिसाब से रिजिम चुनना मुश्किल काम है, लेकिन हम इसे थोड़ा और आसान करके बता रहे हैं। सवाल- टैक्स भरने में लोग क्या कॉमन गलतियां करते हैं? जवाब- टैक्स फाइल करते समय छोटी-छोटी गलतियां भी ज्यादा टैक्स या पेनल्टी तक पहुंचा सकती हैं। आमतौर पर लोग ये गलतियां करते हैं- सवाल- किन टैक्स सेविंग स्कीम्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं? जवाब- टैक्स बचाने के लिए कई ऐसी स्कीम्स हैं, जहां निवेश करने पर डिडक्शन भी मिलता है और ब्याज भी मिलता रहता है। आप अपने गोल और रिस्क के हिसाब से इन्हें चुन सकते हैं- सवाल- 80C के तहत क्या-क्या क्लेम किया जा सकता है? जवाब- सेक्शन 80C के तहत आप सालाना 1.5 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं। इसके लिए कई निवेश और खर्च शामिल होते हैं। सवाल- क्या हेल्थ इंश्योरेंस से भी टैक्स बचा सकते हैं? जवाब- हां, हेल्थ इंश्योरेंस लेकर आप टैक्स बचा सकते हैं और मेडिकल खर्च से सुरक्षा भी पा सकते हैं। सेक्शन 80D के तहत टैक्स छूट मिलती है। खुद, पार्टनर और बच्चों के लिए प्रीमियम पर 25,000 रुपए तक का डिडक्शन मिलता है। अगर पेरेंट्स के लिए पॉलिसी लेते हैं तो अतिरिक्त 25,000 रुपए (सीनियर सिटिजन के लिए 50,000 रुपए तक) का डिडक्शन मिलता है। इस तरह कुल मिलाकर 50,000 से 75,000+ रुपए तक की टैक्स बचत हो सकती है। सवाल- HRA और रेंट से टैक्स कैसे बचाया जा सकता है? जवाब- अगर आप किराए के घर में रहते हैं और आपकी सैलरी में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) मिलता है, तो वह पूरा हिस्सा टैक्सेबल नहीं होता। यानी आप इस पर टैक्स बचा सकते हैं। कैसे तय होती है HRA टैक्स छूट? HRA पर मिलने वाली छूट नीचे दिए 3 पॉइंट्स में से जो सबसे कम हो, उतनी छूट मिलती है- आपको कंपनी से मिला कुल HRA आपकी बेसिक सैलरी का- 50% (अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं।) 40% (अगर नॉन-मेट्रो में रहते हैं।) आपने जो किराया दिया, उसमें से सैलरी का 10% घटाकर जो हिस्सा बचा है। सवाल- क्या NPS और होम लोन से ज्यादा टैक्स बेनिफिट मिलता है? जवाब- हां, NPS और होम लोन ऐसे ऑप्शन हैं, जिनसे आप 80C के अलावा भी अतिरिक्त टैक्स छूट ले सकते हैं। पहले 80C समझें- इसमें आपको कुल 1.5 लाख तक की छूट मिलती है। इसमें PF, LIC, ELSS, होम लोन का प्रिंसिपल आदि शामिल होते हैं। अब NPS समझें- NPS में निवेश करने पर 80C के ऊपर 50,000 रुपए एक्स्ट्रा छूट मिलती है। यानी अगर आपने 80C की लिमिट पूरी कर ली है, तब भी NPS से अलग फायदा मिलेगा। कुल फायदा 1.5 लाख (80C) + 50,000 (NPS)
सोनम के बाद अब आकाश-आनंद-विशाल ने लगाई बेल याचिका:राज कुशवाहा की जमानत याचिका टेक्निकल ग्राउंड पर हुई कैंसल; राज की सोमवार को फिर लगेगी याचिका

शुक्रवार को सोनम के प्रेमी राज कुशवाहा की जमानत याचिका को शिलॉन्ग कोर्ट ने खारिज कर दिया है। वहीं सोनम की जमानत को आधार बनाकर शिलांग जेल में बंद विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी जमानत मांग ली है। शुक्रवार को उनके वकील ने कोर्ट में अर्जी लगा दी है। बता दें की राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम मंगलवार रात को जेल से रिहा हो चुकी है और फिलहाल शिलांग के एक होटल में ठहरी हुई है। राज के वकील फुयोसा योबिन बताया की राज की बेल एप्लिकेशन को सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को निरस्त कर दिया। राज कुशवाहा की ज़मानत अर्जी ‘तकनीकी आधारों’ पर खारिज की गई, न कि मामले की मेरिट (गुण-दोष) के आधार पर, अर्जी में पिछले जमानत आवेदन का उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने आदेश में उसका उल्लेख किया है। सोमवार को राज कुशवाहा के लिए ज़मानत मांगने हेतु अदालत में एक नई अर्जी दायर की जाएगी। इधर राज की गिरफ्तारी के बाद उसकी मां बहनों को लेकर इंदौर से अपने गांव (उप्र) चली गई है। वकील योबिन के अनुसार परिवार का कोई सदस्य राज से मिलने नहीं आता है। कोर्ट के दस्तावेज साइन करवाने के लिए वकील ही शिलांग जेल जाते है। अंडर ट्रायल और कानूनी आधारों की दलीलें रहीं बेअसर राज कुशवाहा के बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि अंडर ट्रायल मामलों में आरोपितों को लंबे समय तक जेल में रखना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। आमतौर पर एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के आधार पर आरोपित जमानत का प्रयास करते हैं, लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और मामले के तथ्यों को देखते हुए राज को राहत देना उचित नहीं समझा। राज कुशवाहा की याचिका खारिज होने के बाद अब अन्य आरोपितों की राह भी मुश्किल नजर आ रही है। सोनम की जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट जाएगी शिलॉन्ग पुलिस शिलॉन्ग पुलिस सोनम की जमानत को चुनौती देने के लिए मेघालय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि सोनम इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड है और उसकी रिहाई से केस के गवाहों को प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। जमानत मिलने से वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि हम जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और कानून के मुताबिक इस मामले को आगे बढ़ाते रहेंगे। कोर्ट ने अपने अधिकारों का उपयोग किया है। हमारी जांच नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। एक और अर्जी दायर करने की तैयारी में सोनम रघुवंशी शिलॉन्ग पुलिस सूत्रों ने बताया कि जमानत के बाद सोनम को वकील की मदद से शिलॉन्ग में किसी सुरक्षित जगह पर रखा है। कारण यह है कि सोनम कोर्ट की अनुमति के बगैर शिलॉन्ग नहीं छोड़ सकती है। वहीं, सूत्रों के अनुसार सोनम खुद शिलॉन्ग से बाहर जाने के लिए कोर्ट में अर्जी दायर कर सकती है। इसके लिए वह स्वयं पर हमले का खतरा होने का तर्क दे सकती है। बताया जा रहा है कि उसके वकील की तरफ से इस मामले में तैयारी की जा रही है। 10 माह से जांच कर रही एसआईटी इंदौर शहर के सहकार नगर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में उसकी पत्नी सोनम को सशर्त जमानत मिली है। सत्र न्यायालय ने जमानत देते समय शिलांग की ईस्ट खासी हिल्स थाना पुलिस की जांच प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए थे। दरअसल, न्यायालय ने पाया गया कि सोनम की गिरफ्तारी के अभिलेख में हत्या की वास्तविक धारा के बजाय असंगत धारा लगा दी गई। इसके साथ ही सोनम को गिरफ्तारी के समय आरोपी के रूप में उसके अपराध के बारे में भी नहीं बताया गया। इसे सत्र न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया की गंभीर खामी और संविधान में आरोपी को प्राप्त मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना। यह भी पाया कि एसआईटी 10 माह में भी मामले की जांच पूरी नहीं कर सकी है। सारे गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए हैं।
Accused Arrested, Farmers Cheated of Rs 1.80 Cr

उज्जैन में किसानों के ट्रैक्टर हड़पकर बेचने वाले शातिर आरोपी को भाटपचलाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी किसानों को ज्यादा किराए का लालच देकर ट्रैक्टर लेता था और बाद में उन्हें बेच देता था। पुलिस ने कार्रवाई कर ट्रैक्टर बरामद किए हैं। . एएसपी आकांक्षा खलोटे ने बताया कि रतलाम निवासी कन्हैयालाल पाटीदार और उनके तीन साथियों ने ग्राम माधोपुरा निवासी रफीक पिता गनी मोहम्मद को चार ट्रैक्टर किराए पर दिए थे। आरोपी ने एक माह तक किराया दिया, लेकिन बाद में ट्रैक्टर लौटाने के बजाय बेच दिए। जब ट्रैक्टर मालिकों को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने 29 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद भाटपचलाना थाना प्रभारी सत्येंद्र चौधरी और उनकी टीम ने आरोपी रफीक को पकड़ लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अब तक किसानों के करीब 20 ट्रैक्टर किराए पर लेकर 1.80 करोड़ रुपए में बेच चुका है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कई ट्रैक्टर जब्त कर लिए हैं। AI जनरेटेड इमेज। ऐसे फंसाता था किसानों को पुलिस के अनुसार आरोपी काफी शातिर तरीके से वारदात करता था। वह किसानों को सामान्य से अधिक किराया देने का लालच देता, एक-दो माह तक भुगतान करता और भरोसा जीत लेता। इसके बाद ट्रैक्टर दूर-दराज क्षेत्रों में बेच देता था। बाद में मोबाइल बंद कर देता या पता बदल लेता था। रिमांड पर पूछताछ जारी पुलिस का कहना है कि आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिससे और भी खुलासे होने की संभावना है। ट्रैक्टर बरामद होने के बाद किसानों ने पुलिस टीम का स्वागत किया।
MP Jal Nigam Officer Saves Tourists From Bargi Dam Cruise Accident

अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते रहे। जैसे ही मेरा पास आया काल आया कि एक क्रूज बरगी बांध में थम गया है, शायद उसका इंजन भी बंद हो गया है। उसमें बहुत सारे लोग सवार हैं। उस दौरान मैं 100 से 150 किलोमीटर दूर था। जानकारी लगते ही फौरन मौके के लिए रवाना हुआ, जब तक पहुंचा तो क्रूज पानी में समा च . 2 घंटे के भीतर जब पहुंचा तो पानी में हाहाकार मचा हुआ था,आसपास कोई नहीं था, टीम के साथ पानी में कूद पड़े और क्रूज में मौजूद लोगों को बचाया। हम हर स्तर से काम कर रहे हैं, इसके लिए भले ही जल निगम का काम प्रभावित हो, लेकिन पहले लोगों की जान बचाना प्राथमिकता है। ये कहना है जल निगम के अधिकारी अलोक तिवारी का, जिन्होंने लगातार 10 घंटे तक अपनी टीम के साथ क्रूज में फंसे लोगों को बचाने का काम किया था। सीएम ने उनकी टीम को इस कार्य के लिए इनाम देने की घोषणा भी की है। सील पैक थी लाइफ जैकेट बताया जाता है कि क्रूज के अंदर रखी हुई लाइफ जैकेट सील पैक थी। मतलब अभी तक खुली ही नहीं थी। वहीं रेस्क्यू टीम भी दो घंटे लेट हुई थी। टीम की गाड़ी खराब हो गई थी तो दूसरी गाड़ी से गए जिससे दो घंटे लेट हुए। वहीं हादसे में बचकर लौटे लोगों ने खुलासा किया है कि मौसम खराब होने के बावजूद कैप्टन ने क्रूज को किनारे लगाने का फैसला नहीं लिया। मामले की जांच अब हाई लेवल कमेटी करेगी। आलोक तिवारी ने लगातार लोगों को बचाने में मदद की। हमने लगा दी मशीन-मेन पवार जल निगम में कार्यरत अलोक तिवारी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि गुरुवार को हुआ हादसा बहुत ही खतरनाक था। कर्मचारियों की नजरों के सामने क्रू पानी में समा गया था। उन्होंने बताया कि हमारा काम चल रहा था, इसलिए जैसे ही पता चला तो जेसीबी, पोकलेन मशीन के साथ-साथ हमारे कर्मचारियों ने दौड़ लगा दी और लोगों को बचाने में जुट गए। गुरुवार की रात से पूरी टीम मौके पर मौजूद है। जिस दौरान यह घटना हुई, तब क्रू करीब 90 मीटर दूर था। सबसे पहले लोगों की जान बचाना टास्क था, जिसे कि हमने स्थानीय पुलिस की मदद से मिलकर पूरा किया। रेस्क्यू टीम लगातार ऑपरेशन चलाती रही। 15 घंटे में 90 मीटर लाया अलोक तिवारी ने बताया कि खमरिया टापू से करीब 90 मीटर लौटते समय क्रू पानी में डूबा था। ऐसे में रात भर से हमारी टीम लगी रही। रात को 50 मीटर तक जैसे-तैसे मशीनों के द्रारा क्रू को खींचकर लाया गया थाष तब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी थी। बहुत सारे लोग क्रू में चीख-चिल्ला रहे थे। उन्होंने बताया कि रात को ही मशीनों के जरिए मोटे तार की मदद से क्रू को बाहर लाने की कोशिश की जा रही थी, पर अंधेरा के साथ-साथ भार होने के कारण तार टूट रही थी, जिसके चलते शुक्रवार की सुबह फिर से रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहा था। रेस्क्यू के समय लोग परेशान कर रहे थे आलोक तिवारी ने बताया कि रेस्क्यू के समय बहुत सारे लोग परेशान कर रहे थे। हमारा कुछ काम नहीं था, इसके बाद भी मशीनों के साथ रेस्क्यू किया। जब हम लोग क्रू को निकाल रहे थे, उस दौरान परेशानी भी आ रही थी, जिसके चलते गुस्सा भी आया। उनका कहना था कि हम रात से ही लगे हुए थे, पर बीच-बीच में कुछ अधिकारी आकर परेशान कर रहे थे, कोई कुछ डायरेक्शन देता, तो कोई कुछ बोलता। ऐसे में लाजमी है, गुस्सा आ जाता है। हम लोग भूखे,प्यासे थे, पर अधिकारी आकर यहां पर रौब जमाते, जिसके कारण गुस्सा आ गया था। उनका कहना था, कि जितने लोग आते, वह अपना-अपना मत देते, इस वजह से गुस्सा आ गई थी। हादसे के बाद रोते बिलखते लोग। जिम्मेदार आंधी नहीं, अंधा-बहरा सिस्टम है लाइफ जैकेट…जिसमें जिंदगी ही नहीं बची थी। उसमें था मां के साथ लिपटे एक मासूम का शव। जबलपुर के बरगी डैम हादसे के बाद किसी चमत्कार की आस लगाए बैठे बचाव दल और परिवार के लिए वो पल झकझोर देने वाला था…जब मां-बेटे का शव बाहर निकाला गया। बेटे को बचा लेने की चिंता और जिद दिखाती वो तस्वीर रुला देने वाली थी। पढ़ें पूरी खबर…
ग्वालियर में सरकारी अस्पताल का कमाल:जटिल ऑपरेशन कर महिला की बच्चेदानी बचाई, डॉक्टरों ने बड़ी फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

ग्वालियर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर भरोसा मजबूत किया है। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के मार्गदर्शन में जिले के चिकित्सक लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में सिविल अस्पताल हजीरा के डॉक्टरों ने शुक्रवार को एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 28 वर्षीय महिला की बच्चेदानी सुरक्षित बचा ली। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव के अनुसार, इटावा निवासी ज्योति सिंह लंबे समय से बच्चेदानी में बड़ी गांठ (फाइब्रॉइड) की समस्या से जूझ रही थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और असहनीय पेट दर्द के कारण उनका जीवन प्रभावित हो रहा था। कई निजी अस्पतालों में परामर्श के दौरान उन्हें बच्चेदानी निकालने की सलाह दी गई, लेकिन महंगे इलाज के कारण वे परेशान थीं। आखिरकार उन्होंने हजीरा सिविल अस्पताल में संपर्क किया, जहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत नायक के मार्गदर्शन में डॉ. राहुल श्रीवास्तव (जनरल सर्जन) और उनकी टीम ने विस्तृत जांच कर ऑपरेशन की योजना बनाई। गुरुवार को हुई सर्जरी में डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक बड़ी गांठ निकाल दी और बच्चेदानी को सुरक्षित रखा। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. अनुपम कुलश्रेष्ठ की भी अहम भूमिका रही। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में सावधानीपूर्वक पूरी की गई। मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में इतनी बेहतर सुविधा और समर्पित सेवाएं मिलना सराहनीय है। अस्पताल प्रबंधन ने आमजन से अपील की है कि यहां आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा जटिल ऑपरेशन एवं उपचार उपलब्ध हैं, जिनका लाभ उठाया जा सकता है।
भोपाल में टाॅवर पर चढ़ा युवक,रात में कांग्रेस का धरना:सुबह मानस भवन के पीछे से हटेंगी 27 झुग्गी; 8 SDM-तहसीलदार समेत 95 की ड्यूटी लगाई

भोपाल में पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन की बस्ती हटाने के विरोध में एक युवक पॉलिटेक्निक चौराहे पर टावर पर चढ़ गया। वहीं, झुग्गियों को हटाने के विरोध में कांग्रेस मैदान में उतर गई है। रात में ही लोगों के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, नगर निगम ने नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी समेत कई कांग्रेसी धरने पर बैठे हैं। जकी ने बताया कि झुग्गियां हटाए जाने को लेकर हम प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, यहां बसे 27 झुग्गी परिवारों को शनिवार सुबह हटाया जा सकता है। इसके लिए एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने 4-4 एसडीएम, तहसीलदार समेत कुल 95 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। एक बार कार्रवाई कैंसिल हो चुकी है। कांग्रेस के विरोध के चलते यहां भारी-भरकम पुलिस अमला भी तैनात होगा। करीब चार महीने भी इन झुग्गियों को हटाने की कवायद हुई थी, लेकिन कांग्रेस हाईकोर्ट से स्टे ले आई थी। इसके बाद यहां जश्न मना था। इनकी ड्यूटी लगी बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय, एमपी नगर एसडीएम एलके खरे, शहर वृत्त एसडीएम दीपक पांडे और टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा तहसीलदार यशवर्धन सिंह, करुणा दंडोतिया, सौरभ वर्मा, अनुराग त्रिपाठी समेत 9 नायब तहसीलदार, 10 राजस्व निरीक्षक और 68 पटवारियों को भी तैनात किया गया है। जीतू पटवारी भी जा चुके बस्ती में बता दें कि पूर्व में जिला प्रशासन का परिवारों को मालीखेड़ी में शिफ्ट करने का प्लान था। 25 दिसंबर 2025 को इन्हें एसडीएम ने बेदखली के आदेश जारी किए थे। इस मुद्दे पर कांग्रेस भी मैदान में उतर गई थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बस्ती में पहुंचे और उन्हें कार्रवाई का विरोध जताया था। यहां होना है कार्रवाई यहां पर खसरा नंबर-1413/1 रकबा 31.5130 हेक्टेयर नोईयत वन अंशभाग 5613 वर्ग फीट के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई होना है। यह इस साल की बड़ी कार्रवाई होगी। पूर्व सीएम, प्रदेश अध्यक्ष तक उतर चुके मैदान में मानस भवन के पीछे झुग्गी में रहने वाले परिवारों की शिफ्टिंग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कांग्रेस सवाल खड़े कर चुकी हैं। कांग्रेस ने कार्रवाई का विरोध जताया था। प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने एडीएम को खरी-खोटी सुनाई थी। तीन जगहों पर शिफ्टिंग का अनुमान इन परिवारों को भौंरी, कलखेड़ा, और मालीखेड़ी में बने आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां पर लोगों को निशुल्क, यानी बिना राशि लिए, ये आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। आवास की राशि 2 लाख प्रति परिवार मानस भवन प्रबंधन उठाएगा। राशि पूर्व में ही जमा की जा चुकी है। 70 साल पुरानी है ये बस्ती यह बस्ती लगभग 70 साल पुरानी है। यहां 27 से अधिक आदिवासी और कुछ गैर-आदिवासी परिवार रहते हैं। शासन ने 25 अगस्त-25 को नोटिस जारी किया और कहा गया कि सात दिन में जगह खाली करें। यहां 27 परिवारों के 200 से ज्यादा लोग रहते हैं। दीवाली के दौरान शिफ्टिंग का विरोध भी हुआ था। कार्याध्यक्ष शर्मा ने कहा-हमने राशि भी जमा करवा दी पूर्व में जब कार्रवाई स्थगित हुई थी, तब मानस भवन के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा भास्कर से चर्चा में कहा था कि 27 परिवार में से आधे भी आदिवासी नहीं है। भार्गव, साहू, दांगी जैसे गोत्र वाले आदिवासी कैसे हो गए? हमने तो बस्ती वालों की मदद और उन्हें मकान का मालिकाना हक दिलाने के लिए प्रशासन को 54 लाख रुपए जमा करा दिए। हमारी जमीन पर अनाधिकृत कब्जा है। वो हमें दी जाए। झुग्गियां हटे या नहीं, इसे लेकर हमें कोई लेना-देना नहीं है। जिस बिल्डिंग में मानस भवन, उसका लोकार्पण दिग्विजय ने किया तुलसी मानस प्रतिष्ठान का लोकार्पण 30 मार्च 2003 को हुआ था। महामंडलेश्वर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, राज्यपाल डॉ. भाई महावीर मुख्य अतिथि थे, जबकि अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने की थी। विशिष्ठ अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, तत्कालीन संस्कृति मंत्री अजय सिंह थे। अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि मानस भवन संस्था गरीबों के हितों में काम करती है।









