Monday, 21 Sep 2026 | 11:49 PM

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बंगाल जीता, पंजाब के लिए BJP की क्या तैयारी:MLA-नेताओं की तोड़फोड़ कब, क्या हिंदू-सिख पोलराइजेशन होगा; 3 एक्सपर्ट्स से जानिए

बंगाल जीता, पंजाब के लिए BJP की क्या तैयारी:MLA-नेताओं की तोड़फोड़ कब, क्या हिंदू-सिख पोलराइजेशन होगा; 3 एक्सपर्ट्स से जानिए

‘बंगाल में जीत हमारी है, अब पंजाब की बारी है’ बंगाल में चुनाव जीतने के बाद ये नारे दिल्ली BJP हेडक्वार्टर में लगे, जिसके बाद PM नरेंद्र मोदी ने यहां से वर्करों को संबोधित किया। इस नारे से BJP की पंजाब को लेकर 2027 चुनाव की मंशा साफ जाहिर होती है। जो खेल बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी के साथ किया, अब वही पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ भी हो सकता है। मगर, क्या ये सब इतना आसान है, क्या पंजाब में भी हिंदू-सिख ध्रुवीकरण जैसी कोई बात होगी, आखिर BJP का पंजाब को लेकर क्या गेम प्लान होगा, इसको लेकर दैनिक भास्कर ने 3 एक्सपर्ट्स से बात की। जिन्होंने बताया कि पंजाब BJP के लिए मुश्किल जरूर है, लेकिन भाजपा कुछ अलग तरीके से यहां पॉलिटिक्स करेगी, जिससे पंजाब के इमोशन से कोई छेड़छाड़ न हो और वह सिखों को अपने साथ भी जोड़ सके। ऐसा इसलिए भी कि विरोधी दल भाजपा को सिर्फ हिंदुओं की पार्टी बताते हैं। 1. क्या भाजपा पंजाब में धर्म के आधार पर पोलराइजेशन करेगी? इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं- बंगाल की तर्ज पर पंजाब में धर्म के आधार पर पोलराइजेशन संभव नहीं है। भाजपा की खुद की भी नीति है कि वह हिंदुओं और सिखों को अलग-अलग करके नहीं देख सकती। वहीं पंजाब में सिखों की गिनती भी ज्यादा है, ऐसे में पोलराइजेशन से ज्यादा बेनिफिट नहीं होगा। इसके विकल्प के तौर पर भाजपा यहां धर्मांतरण को मुद्दा बनाएगी। इसका इशारा गृहमंत्री अमित शाह मोगा रैली में दे चुके हैं, जब उन्होंने कहा था कि पंजाब में BJP की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में धर्मांतरण के खिलाफ कानून आएगा। BJP की यही चालाकी होगी कि धर्मांतरण के मुद्दे पर ही भाजपा सिख-हिंदू वोटर्स का अपने हक में पोलराइजेशन की कोशिश कर सकती है। 2. धर्मातरण को मुद्दा बनाने से भाजपा को क्या फायदा होगा? प्रोफेसर केके रत्तू का कहना है कि पंजाब के गुरदासपुर जिले में ईसाई आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां दलित आबादी 7.68% यानी 1.77 लाख थी, जो अब बढ़कर अनुमानित तौर पर 4 लाख से ज्यादा हो गई है। यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस और दो पर AAP के विधायक हैं। वैसे धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बार्डर इलाकों में ज्यादा है। इनमें गुरदासपुर के साथ अमृतसर, पठानकोट, फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, लुधियाना, कपूरथला, बठिंडा और जालंधर जिले शामिल हैं। इस मुद्दे से ये इलाके जरूर प्रभावित हो सकते हैं। 3. भाजपा की 2027 के पंजाब चुनाव के लिए क्या स्ट्रेटजी हो सकती है? इंजीनियर पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब के चुनाव में डेरे अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसे में भाजपा डेरों को साधने की स्ट्रेटजी बना चुकी है। भाजपा की टॉप लीडरशिप डेरों के संपर्क में है। प्रधानमंत्री हाल ही में डेरा सचखंड बल्लां गए। उससे पहले राधा स्वामी डेरे में भी भाजपा के शीर्ष नेता जा चुके हैं। डेरों के जरिए भाजपा पंजाब के 38% दलित और OBC वोटर्स को भी साधने में जुटी है। इसका फायदा ये है कि डेरों से हिंदु और सिख, दोनों जुड़े हैं, यहां धर्म के आधार पर पोलराइजेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। 4. पंजाब में BJP के खिलाफ किसान विरोधी नेरेटिव अभी भी है, उसे कैसे सेट करेगी? PAU के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. किरपाल सिंह औलख कहते हैं- भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसान विरोधी नेरेटिव ही है। किसान आंदोलन में 700 किसानों की मौत हुई, यह मुद्दा बंगाल रिजल्ट के बाद सीएम भगवंत मान ने भी उठाया। इससे बाहर निकलना BJP की परेशानी है। हां, अगर भाजपा हरियाणा की तर्ज पर फसलों पर MSP और एग्रीकल्चर लोन में छूट दे तो किसान भाजपा का साथ दे सकते हैं। पंजाब के किसानों को अभी तक किसी भी सरकार ने कुछ खास नहीं दिया है। AAP भी MSP का वादा कर आई थी वो भी नहीं दे पाई। इससे पहले कांग्रेस व अकाली दल की सरकारें रही वो भी ऐसा नहीं कर पाई। 5. भाजपा को हिंदुओं की पार्टी माना जाता है, इसीलिए सिख सपोर्ट नहीं करते, यह नैरेटिव कैसे तोड़ेगी? डॉ किरपाल सिंह औलख का कहना है कि कट्‌टरपंथी सिख भाजपा के खिलाफ हैं और उन्होंने भाजपा के खिलाफ नेरेटिव सेट किया है। भाजपा बंदी सिखों को जेल से रिहा करके सिख विरोधी होने के नैरेटिव को खत्म कर सकती है। ज्यादातर सिख बंदी अपनी सजाएं पूरी कर चुके हैं और उन्हें रिहा करने में कोई कानूनी अड़चन भी नहीं आएगी। इससे सिखों के एक बड़े वर्ग को भाजपा के साथ आने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। 6. सिख डोमिनेंस वाली ग्रामीण सीटों के लिए भाजपा क्या गेमप्लान बना सकती है? DAU यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन प्रोफेसर डॉ. केके रत्तू कहते हैं- ये बात भाजपा भी जानती है। इसालिए फोकस शहरी सीटों पर रखती है। मगर, सिर्फ इससे सरकार बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसीलिए आपने देखा होगा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत जनाधार वाले सिख चेहरों को पार्टी में शामिल कर रही है। इसके जरिए वह रूरल वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। हालांकि जब तक किसानों का विरोध खत्म नहीं होता, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में जीत हासिल करना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है। 7. क्या भाजपा विरोधी दलों में तोड़फोड़ करेगी? डॉ. केके रत्तू कहते हैं- BJP के पास पंजाब में ऐसे नेताओं की कमी है, जिन्हें हम विनिंग फेस कह सकें। जीतने की क्षमता वाले नेताओं को लाने के लिए भाजपा जरूर विरोधी दलों में तोड़फोड़ करेगी। भाजपा का ज्यादा फोकस कांग्रेस और AAP को तोड़ना रहेगा क्योंकि इससे एक तरफ भाजपा मजबूत होगी और दूसरी तरफ ये दोनों प्रमुख दल कमजोर होंगे। भाजपा ने इसकी प्लानिंग शुरू भी कर दी होगी। 8. पंजाब में फिलहाल CM भगवंत मान AAP का सबसे बड़ा चेहरा होंगे, उनके लिए क्या प्लान हो सकता है? इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं- ये बिल्कुल सही है कि पंजाब के मौजूदा पॉलिटिकल माहौल में CM भगवंत मान ही वह चेहरा हैं, जिस पर पूरी AAP डिपेंड है। भाजपा पहले AAP में सेंधमारी करेगी। केंद्र की योजनाओं को लागू न करने को लेकर

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक सिख टैक्सी ड्राइवर की दो अश्वेत युवकों के साथ बहस और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। इस दौरान अश्वेत युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर को धक्का देकर सड़क पर गिरा देता है। बुजुर्ग धक्का लगने से करीब 15 फीट दूर सड़क पर गिरा। युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर पर आरोप लगा रहा था कि उसने उसकी दो महिला दोस्तों को अपनी गाड़ी से टक्कर मारी है। जबकि, बुजुर्ग इन आरोपों से इनकार कर रहा था। उल्टा वह कह रहा था कि ये युवतियां खुद उसकी गाड़ी की ओर आईं। हाथापाई के बाद बुजुर्ग सिख ड्राइवर ने मौके पर पुलिस बुलाई। इसके बाद पुलिस दोनों पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाकर वहां से चली जाती है। हालांकि, यह मामला कब का है और इसमें दिख रहा सिख ड्राइवर कौन है, यह जानकारी सामने नहीं आई है। 2 युवतियों की टक्कर के आरोप से विवाद हुआ जानकारी के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब एक युवक ने यह आरोप लगाया कि बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर ने सड़क पर 2 युवतियों को अपनी टैक्सी से टक्कर मार दी। इसके बाद वहां से भागने की कोशिश की। वहीं, सिख टैक्सी ड्राइवर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई दुर्घटना नहीं हुई। उल्टा युवतियां खुद उसकी गाड़ी के पास आई थीं, जिससे यह स्थिति बनी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है मौके पर मौजूद 2 युवक लगातार बुजुर्ग ड्राइवर को रोक रहे हैं और उसे अपनी गाड़ी तक जाने नहीं दे रहे। बहस इतनी बढ़ गई कि स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक अश्वेत युवक अचानक आक्रामक हो जाता है और बुजुर्ग ड्राइवर को जोर से धक्का दे देता है, जिससे बुजुर्ग सड़क पर गिर जाता है। इस दौरान वीडियो बनाने वाला युवक उसे लगातार अपराधी कहकर संबोधित करता है। पुलिस के आने पर युवकों का व्यवहार बदला कुछ समय बाद मौके पर न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD स्कूल सेफ्टी ऑफिसर्स) पहुंचती है। पुलिस के सामने सिख ड्राइवर अपनी बात रखने की कोशिश करता है। जबकि, युवक दावा करता है कि उसके पास पूरी घटना का वीडियो सबूत मौजूद है। पुलिस के पहुंचने के बाद युवक का व्यवहार अचानक बदल जाता है और वह शांत होकर अधिकारियों से बातचीत करता दिखाई देता है। वह युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश देने की भी बात करता है। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से जानकारी ली। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में क्या दिख रहा एक बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर (पगड़ी और चेक शर्ट पहने हुए) कुछ युवकों से बहस कर रहा है। वहां मौजूद युवक टैक्सी ड्राइवर पर चिल्ला रहे हैं कि उसने अपनी गाड़ी से लड़कियों को टक्कर मारी है। वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि ड्राइवर बिना रुके मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। इसके जवाब में बुजुर्ग ड्राइवर कहता है कि उसने कोई टक्कर नहीं मारी, बल्कि लड़कियां खुद उसकी गाड़ी से टकराई हैं। वह यह भी कहता है कि उसकी टैक्सी में सवारी बैठी हुई है और वह सिर्फ अपना काम कर रहा था। युवक ड्राइवर को वहां से जाने नहीं देते। जब ड्राइवर वहां से जाने की कोशिश करता है, तो एक युवक उसे धक्का देकर गिरा देता है। इसके बाद बुजुर्ग कहता है, तुमने मुझे धक्का क्यों मारा? इसके बाद बुजुर्ग पुलिस को फोन करता है। मौके पर पुलिस पहुंचती है और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहता है। ॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबियों के लिए न्यूजीलैंड जाना हुआ मुश्किल:42% स्टडी वीजा कैंसिल, एंट्री में दिक्कतें, सबको अंग्रेजी जरूरी, सरप्राइज इंटरव्यू में फेल तो डिपोर्ट न्यूजीलैंड सरकार ने इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव किए हैं, जिनका असर भारतीयों खासकर पंजाबियों पर दिखने लगा है। एक हफ्ते के भीतर पंजाब के दो लोगों को देश में एंट्री के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि 42 फीसदी स्टूडेंट वीजा रद्द होने की बात सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर…

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल की राजधानी शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में आंधी-तूफान के साथ आसमानी बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कल भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिला में यलो अलर्ट जारी किया गया है। 7 से 9 मई तक वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन इस दौरान अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रहने के आसार हैं। 10 मई और 11 मई को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होगी। वहीं, बीते 24 घंटे के दौरान भी अधिकांश भागों में बारिश और शिमला जिला के कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई। धर्मशाला में सबसे ज्यादा 30.6 मिमी, कांगड़ा 29.4 मिमी, चौपाल 18.0, शिलारू 15.8, सराहन 15.5, पालमपुर 15.4, रोहड़ू 14.0, मंडी 13.4, जोगेंद्रनगर 9.0, कल्पा 7.2 और बरठी में 5.2 मिमी बारिश हुई। बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के कई क्षेत्रों में रात का पारा जमाव बिंदू के आसपास पहुंच गया है। किन्नौर के कल्पा का पारा 2.6 डिग्री, लाहौल स्पीति के ताबो का 2.7, कुकुमसैरी 2.9 और केलांग का 4.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। नाहन का न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.1 डिग्री नीचे गिरा राज्य के अन्य शहरों का रात का पारा भी सामान्य से नीचे गिरा है। नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 8.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यहां का रात का पारा 14.6 डिग्री तक लुढ़क गया है। शिमला का पारा सामान्य से 3.0 डिग्री नीचे गिरने के बाद 11.0 डिग्री रह गया है। भुंतर का अधिकतम तापमान नॉर्मल से 9.6 डिग्री नीचे लुढ़का इसी तरह, अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। भुंतर का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 20.3 डिग्री, मंडी का 6.6 डिग्री गिरने के बाद 26.2 डिग्री, नाहन का 6.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 26.8 डिग्री, ऊना का 6.4 डिग्री कम होने के बाद 31.0 डिग्री और शिमला का पारा सामान्य से 4.9 डिग्री नीचे गिरने के बाद 18.8 डिग्री सेल्सियस रह गया है।

west bengal tamil nadu keralam assam puducherry election results

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कोलकाता/चेन्नई/गुवाहाटीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ 1 सीट जीत सकी और उसका स्ट्राइक रेट मात्र 3.4% रहा। सीएम स्टानिल 8795 वोट से हारे 59 साल बाद पहली बार गैर

Khabar Hatke- UP Twins Marry One Girl

Khabar Hatke- UP Twins Marry One Girl

उत्तर प्रदेश में जुड़वा भाइयों ने एक ही लड़की से शादी कर ली। वहीं, एक अरबपति की बेटी को प्यास लगी तो वो प्यास बुझाने हेलिकॉप्टर से ग्लेशियर पहुंच गई। उधर, अमेरिका में एक परिवार ने 12 साल की बेटी के प्रेग्नेंट होने पर पार्टी की। . मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति ने अपनी ही टीचर को बंधक बनाकर उससे ₹2 करोड़ लूट लिए। वहीं, तमिलनाडु में 3500 साल पुराने गड्ढों वाले घर मिले हैं। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

Kissing Disease What Is; Mononucleosis EBV Virus Symptoms

Kissing Disease What Is; Mononucleosis EBV Virus Symptoms

19 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक दोस्त के कप से सिप या प्लेट से बाइट लेना बहुत कॉमन है। लेकिन यह छोटी-सी आदत एक वायरल इन्फेक्शन की वजह बन सकती है। इससे ‘किसिंग डिजीज’ हो सकती है। यह ‘एप्सटीन बार वायरस’ (EBV) के कारण होती है। यह वायरस किस करने, छींकने, खांसने या खाना-पीना शेयर करने से फैल सकता है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, दुनिया की 90% से ज्यादा आबादी कभी-न-कभी EBV से संक्रमित हो चुकी है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि- किसिंग डिजीज क्या है? यह क्यों होती है? इसके क्या लक्षण होते हैं? एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- हाल ही में हुई एक स्टडी बताती है कि किस (चुंबन) करने से मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम बढ़ता है। इस स्टडी को डिटेल में समझाएं। जवाब- हां, मोटे तौर पर ये बात ठीक है। लेकिन इसे थोड़ा विस्तार से समझें– इस स्टडी में पाया गया है कि जिन लोगों को जीवन में कभी ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ (mono) बीमारी हुई थी, उनमें MS का जोखिम 3 गुना ज्यादा पाया गया। Mono एक ऐसी बीमारी है, जो EBV वायरस से फैलती है। ये वायरस हमारे मुंह के सलाइवा में होता है और किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति को किस करने यानी चूमने से फैल सकता है। mono को ‘किसिंग डिजीज’ भी कहते हैं। स्टडी की डिटेल साल- 2026 संस्थान- मायो क्लिनिक, अमेरिका सैंपल साइज- 19,000 कहां पब्लिश हुई- न्यूरोलॉजी ओपेन एक्सेस स्टडी की फाइंडिंग- जिन लोगों को इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस (mono) हुआ था, उनमें आगे चलकर मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) का जोखिम लगभग 3 गुना ज्यादा पाया गया। mono से कभी इन्फेक्ट हुए लोगों में MS का रिस्क- 0.17% mono न हुए लोगों में रिस्क- 0.07% सवाल- किसिंग डिजीज क्या है? जवाब- किसिंग डिजीज एक वायरल इन्फेक्शन है, जिसे मेडिसिन लैंग्वेज में ‘इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस’ कहा जाता है। यह वायरस आमतौर पर इन्फेक्टेड व्यक्ति की लार (सलाइवा) से फैलता है। यह बॉडी फ्लूइड से भी फैल सकता है। सभी वजह देखिए- किस करने से ब्लड ट्रांसफ्यूजन से ऑर्गन ट्रांसप्लांट से सेक्सुअल कॉन्टैक्ट से ग्लास या बोतल शेयर करने से छींक-खांसी के ड्रॉपलेट्स से एक बार इन्फेक्शन होने के बाद यह वायरस शरीर में लाइफटाइम ‘डॉर्मेंट’ (छिपकर) रह सकता है। सवाल- किसिंग डिजीज कैसे होती है? जवाब- किसिंग डिजीज 90% से ज्यादा मामलों में ‘एप्सटीन बार वायरस’ की वजह से होती है। हालांकि इसके अलावा भी कुछ दूसरे वायरस और इन्फेक्शन इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं। जैसे- हेपेटाइटिस A- गंदे पानी या दूषित खाने से होने वाला लिवर का इन्फेक्शन। हेपेटाइटिस B- ब्लड या बॉडी फ्लूइड से फैलने वाला गंभीर लिवर इन्फेक्शन। हेपेटाइटिस C- धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाने वाला इन्फेक्शन, जो मुख्य रूप से ब्लड से फैलता है। HIV- यह वायरस इम्यूनिटी कमजोर करता है, एड्स की वजह बन सकता है। रूबेला- जर्मन खसरा, इसमें हल्का बुखार और लाल चकत्ते होते हैं। एडेनोवायरस- सर्दी, खांसी वाला कॉमन वायरस है। सवाल- किस करने से मोनो के अलावा और किन बीमारियों का रिस्क बढ़ता है? जवाब- किसिंग से कई अन्य इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ सकता है, जैसे- ओरल हर्पीज इसमें होठों पर छाले पड़ते हैं। अगर छाले हैं, तो ज्यादा रिस्क है। स्ट्रैप थ्रोट (गले का बैक्टीरियल इन्फेक्शन) गले में दर्द, बुखार हाेता है। बैक्टीरिया सलाइवा से ट्रांसफर हो सकता है। इन्फ्लुएंजा (फ्लू) सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखते हैं। ड्रॉपलेट्स और लार से आसानी से फैलता है। सवाल- किन लोगों को किसिंग डिजीज का ज्यादा खतरा रहता है? जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- किसिंग डिजीज के लक्षण क्या होते हैं? जवाब- इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के करीब 4 से 6 हफ्ते बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। ये 4 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। ग्राफिक में इसके लक्षण देखिए- सवाल- किसिंग डिजीज की पहचान कैसे होती है? जवाब- डॉक्टर लक्षणों को देखकर बीमारी डायग्नोज करते हैं। पॉइंटर्स में देखिए- खासतौर पर डॉक्टर ये चेक करते हैं- गर्दन में सूजन लिम्फ नोड्स (गांठें) तिल्ली (स्पलीन) इसके बाद करते हैं ये टेस्ट शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट करते हैं, ताकि ये पता चल सके कि शरीर एप्सटीन बार वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बना रहा है या नहीं। डॉक्टर ब्लड में व्हाइट ब्लड सेल्स, खासकर लिम्फोसाइट्स की संख्या भी देखते हैं। अगर ये ज्यादा हैं तो किसी इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। सवाल- किसिंग डिजीज का इलाज क्या है? जवाब- इसमें आमतौर पर कोई दवा नहीं दी जाती है। आराम करने, पर्याप्त पानी पीने और सही देखभाल से ही आराम मिल जाता है। इसके लिए अलग से कोई दवा नहीं बनी है। समस्या होने पर डॉक्टर ये सजेशन दे सकते हैं- गले में दर्द होने पर नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें और थ्रोट लोजेंज (चूसने वाली गोली) लें। तिल्ली बढ़ने पर ऐसे में ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से इसके फटने (रप्चर) का रिस्क बढ़ जाता है। बीमारी के दौरान और ठीक होने के बाद करीब 4 हफ्ते तक भारी एक्सरसाइज और खेलकूद से बचना चाहिए। सवाल- किसिंग डिजीज से कैसे बचें? जवाब- यह वायरस आमतौर पर लार (सलाइवा) के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। इसलिए साफ-सफाई बरतें और खाने-पीने की चीजें शेयर न करें। ग्राफिक में बचाव के सभी तरीके देखिए- सवाल- क्या किसिंग डिजीज जानलेवा हो सकती है? जवाब- यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होती, लेकिन लापरवाही बरतने पर कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं। रेयर केस में खतरनाक हो सकती है गले और टॉन्सिल्स की ज्यादा सूजन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें कॉम्पिलिकेशंस का रिस्क ज्यादा होता है। ………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- ये 4 चीजें हार्ट को कर रहीं बीमार:इन 5 चीजों से हार्ट रहता हेल्दी, डॉक्टर से समझें हेल्दी हार्ट का साइंस हाल ही में वडोदरा में 29 साल के स्टेट रिजर्व पुलिस (SRP) जवान की ट्रेनिंग के बाद अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। परेड के बाद उसने सीने में दर्द की शिकायत की थी। अस्पताल ले जाते समय हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर

India-Cambodia Military Exercise Begins | May 5 Current Affairs

India-Cambodia Military Exercise Begins | May 5 Current Affairs

33 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन किया 4 मई को प्रयागराज में उत्तर प्रौद्योगिकी संगोष्ठी यानी नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 की शुरूआत हो गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 का उद्घाटन किया। ये सिम्पोजियम भारतीय सेना (विशेषकर उत्तरी और मध्य कमान) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) की संयुक्त रूप से आयोजित एक डिफेंस एग्जीबिशन है। इसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों के ऑपरेशनल चैलेंज को दूर करने के लिए स्वदेशी तकनीकी इनोवेशन को प्रदर्शित करना है। इसमें कुल 284 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं, जिसमें सेना, उद्योग (MSME और स्टार्टअप्स) एवं शिक्षाविद और रिसर्चर शामिल होंगे। इस प्रदर्शनी से भारतीय सेना की मारक क्षमता को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना है। सिम्पोजियम की थीम ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ है। 2. भारत ने सबसे बड़ी प्राइवेट सैटेलाइट ‘दृष्टि’ लॉन्च की 4 मई को भारतीय स्टार्टअप गैलेक्सआई (GalaxEye) ने अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से अपनी सबसे बड़ी सैटेलाइट ‘दृष्टि’ लॉन्च की। दृष्टि 190 किलो वजन के साथ भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सैटेलाइट है। दृष्टि सैटेलाइट एक साथ ऑप्टिकल और रडार (SAR) दोनों से फोटो ले सकता है। SAR यानी सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक बादलों, बारिश या रात में भी ये तस्वीर ले सकता है। गैलेक्सआई ने इस टेक्नॉलजी को Opto-SAR नाम दिया है। बाकी सैटेलाइट या तो मल्टी-स्पेक्ट्रल/हाइपर-स्पेक्ट्रल (ऑप्टिकल) इमेज लेते थे या SAR तकनीक का इस्तेमाल करते थे। दृष्टि सैटेलाइट रक्षा, खेती, डिजास्टर मैनेजमेंट, समुद्री निगरानी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग जैसे कामों में मदद करेगी। दृष्टि खराब मौसम में ऑप्टिकल इमेज नहीं मिलने पर AI से SAR डेटा को ऑप्टिकल जैसी तस्वीरों में बदल सकती है। इससे हर मौसम और हर समय इमेजिंग हो पाएगी। भारत में बादलों की समस्या ज्यादा होती है, इसलिए ये हर मौसम में तस्वीर ले सकता है। ये सैटेलाइट ISRO के 29 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स का साथ देगा। 29 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स भारत के पास रिमोट सेंसिंग उपग्रहों का सबसे बड़ा समूह है। IIT मद्रास के पूर्व छात्रों ने 2021 में गैलेक्सआई बनाया था। निधन (DEATH) 3. मणिपुर के पूर्व मंत्री ए एस आर्थर का निधन 4 मई को मणिपुर के पूर्व मंत्री ए एस आर्थर का निधन हो गया। वे 99 साल के थे। आर्थर ने पूर्व मुख्यमंत्री रिशांग कीशिंग के कार्यकाल के दौरान 1994 से 1997 तक वन और सामान्य प्रशासन मंत्री रहे। राजनीति में एक्टिव होने से पहले आर्थर ने नागालैंड विधानसभा में स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया। आर्थर मणिपुर की तंगकुल नागा कम्युनिटी के थे। आर्थर 1984 में उखरुल (मणिपुर) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर जीते, बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। 1990 के दशक तक एक राजनीतिक व्यक्ति रहे। उनके परिवार में उनके बेटे अल्फ्रेड कन्नगम आर्थर हैं, जो बाहरी मणिपुर संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद हैं। ए एस आर्थर मणिपुर विधानसभा से दो बार जीते। 4. असम की पहली रेडियो जर्नलिस्ट लिली दास का निधन 3 मई को असम की पहली रेडियो जर्नलिस्ट लिली दास का निधन हो गया। वे 90 साल की थीं लिली ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की पहली असमिया महिला न्यूज रीडर थीं। लिली ने 1955 में अपने करियर की शुरुआत की थी। असमिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उनका बड़ा नाम रहा। लिली अपने स्पष्ट उच्चारण, प्रभावशाली प्रस्तुति और सार्वजनिक प्रसारण में योगदान के लिए श्रोताओं के बीच वे काफी पसंद की जाती थीं। रेडियो पर अपनी लोकप्रियता के बावजूद, मलिक काफी हद तक टेलीविजन प्रस्तुतियों से दूर रहीं। लिली दास की विशिष्ट आवाज असमिया रेडियो प्रसारण में ‘गोल्डन इरा’ मानी जाती थी। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 5. भारत-कंबोडिया ने सैन्य अभ्यास शुरू हुआ 4 मई को भारत-कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास CINBAX-II के दूसरे संस्करण के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी कंबोडिया के लिए रवाना हो गई है। ये अभ्यास इस महीने की 4 से 17 तारीख तक टेको सेन नोम थॉम मिरास प्रोव रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर (कैंप बेसिल) में शुरू हुआ है। भारत और कंबोडिया के बीच जॉइंट ट्रेनिंग का उद्देश्य कॉर्डिनेशन और ऑपरेशनल एक्सरसाइज को बढ़ाना है। भारत-कंबोडिया के बीच ये जॉइंट एक्सरसाइज काउंटर टेरेरिज्म, ऑपरेशनल एनकाउंटर के लिए ट्रेनिंग होगी। भारतीय सेना की टुकड़ी में 120 कर्मी शामिल हैं, जबकि कंबोडियाई टुकड़ी में 160 कर्मी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास वैश्विक शांति बनाए रखने की दिशा में दोनों देशों की क्षमता को बढ़ाएगा। भारत-कंबोडिया के बीच ट्रेनिंग में स्किल्स और मॉडर्न मिलिट्री प्रैक्टिस भी होंगी। 6. प्रणय कुमार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की 4 मई को बांग्लादेश में भारत के निवर्तमान उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा ने ढाका में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर बात की और भारत-बांग्लादेश संबंधों में चल रहे विकास की समीक्षा की। दोनों प्रमुखों ने जन-केंद्रित सहयोग को मजबूत करने, आपसी हित और लाभ के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर चर्चा की। ये बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और बांग्लादेश ढाका में हालिया राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देश आपसी संबंधों पर काम कर रहे हैं। प्रणय कुमार वर्तमान में बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत हैं। इससे पहले वो बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त थे और वियतनाम में राजदूत भी रह चुके हैं। आज का इतिहास 1818 में मार्क्सवाद के जनक जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स का जन्म हुआ। 1919 में पेरिस में रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना हुई। 2010 में ISRO ने एयर-ब्रीथिंग टेक्नोलॉजी से युक्त सबसे भारी साउंडिंग रॉकेट का सफल परीक्षण किया। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रोहित जैन RBI के डिप्टी गवर्नर अपॉइंट हुए:नियाशी ट्राइब की पहली PhD होल्डर डॉ जोरम नीति आयोग की मेंबर बनीं, 4 मई के करेंट अफेयर्स जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं…पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies

Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies

Hindi News Lifestyle Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies | Prevention Tips 53 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में तेज धूप, उमस और पसीने से स्किन पर खुजली, लाल दाने या रैशेज हो जाते हैं। लोग इसे हल्की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार ये हीट रैश यानी घमौरियां हो सकती हैं। स्किन पर स्वेट डक्ट्स होते हैं, जिनसे पसीना निकलता है। इनके ब्लॉक होने पर पसीना स्किन के अंदर ही फंस जाता है। इससे हीट रैश होता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हीट रैश की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- हीट रैश क्यों होता है? इसके क्या लक्षण हैं? हीट रैश के घरेलू उपाय क्या हैं? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हीट रैश क्या होता है? जवाब- हीट रैश एक कॉमन स्किन प्रॉब्लम है। यह ज्यादा गर्मी और पसीने की वजह से होता है। इसे ‘प्रिकली हीट’, ‘स्वेट रैश’ या ’मिलियारिया’ भी कहा जाता है। सवाल- हीट रैश क्यों होता है? जवाब- पसीने को स्किन की सरफेस तक पहुंचाने वाली डक्ट ब्लॉक होने पर हीट रैश होता है। इससे पसीना स्किन के अंदर जमा होने लगता है। यह दाने या रैशेज के रूप में बाहर निकलता है। ग्राफिक में इसके सभी कारण देखिए- सवाल- हीट रैश के क्या लक्षण हैं? जवाब- हीट रैश में स्किन पर छोटे-छोटे दाने निकलते हैं। ये गर्मी में असहजता बढ़ाते हैं। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- हीट रैश और एलर्जी या फंगल इन्फेक्शन में क्या फर्क होता है? जवाब- हीट रैश, एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन तीनों में स्किन पर दाने के साथ खुजली हो सकती है, लेकिन इनके कारण अलग होते हैं। तीनों को एक-एक करके समझते हैं- हीट रैश हीट रैश ज्यादा गर्मी और पसीने की वजह से होता है। स्किन डक्ट्स में पसीना फंसने पर छोटे लाल दाने हो जाते हैं या चुभन महसूस होती है। यह अक्सर गर्दन, पीठ, आर्म पिट (बगल) या जांघों पर होता है। एलर्जी एलर्जी आमतौर पर साबुन, कॉस्मेटिक, मेडिसिन या फूड के रिएक्शन से होती है। इसमें लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होती है। फंगल इन्फेक्शन ये फंगस के कारण होता है। आमतौर पर आर्म पिट (बगल), जांघों पर या पैरों की उंगलियों के बीच होता है। इसमें गोल दाने, लगातार खुजली होती है। स्किन छिल भी सकती है। सवाल- हीट रैश शरीर के किन हिस्सों में ज्यादा होता है? जवाब- यह उन हिस्सों में होता है, जहां हवा कम लगती है या स्किन आपस में रगड़ती है। खासकर वे हिस्से जो कपड़ों से ढके रहते हैं या जहां पसीना ज्यादा जमा होता है। ये बच्चों और वयस्कों में अलग अलग जगहों पर होता है- बच्चों में- आर्म पिट्स (बगल) कोहनी के अंदर की सिलवटें गर्दन ग्रोइन या डायपर वाला हिस्सा गर्दन का निचला हिस्सा और पीठ वयस्कों में- हाथ पीठ चेस्ट (महिलाओं में ब्रेस्ट के नीचे) जांघों के बीच इन हिस्सों में पसीना ज्यादा जमा होने से स्वेट डक्ट्स ब्लॉक हो जाते हैं। इससे हीट रैश होता है। सवाल- किन लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, टाइट कपड़ों से एयर फ्लो रुक जाता है। इससे स्किन तक हवा नहीं पहुंच पाती। इसके चलते पसीना ज्यादा होता है, देर से सूखता है। यही वजह है कि टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ जाता है। सवाल- क्या पर्सनल हाइजीन का ख्याल न रखने से भी हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, अगर रोज नहीं नहाते हैं, पसीने से भीगे कपड़े लंबे समय तक पहने हुए हैं, साफ सफाई नहीं रखते हैं तो हीट रैश बढ़ सकता है। सवाल- क्या ओबिसिटी या अन्य हेल्थ कंडीशंस भी हीट रैश के रिस्क को बढ़ा सकती हैं? जवाब- हां, कुछ हेल्थ कंडीशंस हीट रैश होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए- डायबिटीज डायबिटीज में ब्लड शुगर ज्यादा रहने से स्किन की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। इससे स्किन में इन्फेक्शन और सूजन का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे रैश जल्दी हो सकते हैं। डायबिटिक लोगों को ज्यादा पसीना आता है, जिससे हीट रैश का रिस्क बढ़ सकता है। ओबिसिटी वजन ज्यादा होने पर स्किन की सिलवटें (स्किन फोल्ड्स) बढ़ जाती हैं। इसलिए जांघों, पेट या आर्म पिट्स (बगल) में हीट रैश के लक्षण ज्यादा दिखते हैं। मोटापे के कारण बॉडी को हीट कंट्रोल करने में समस्या होती है। इससे पसीना ज्यादा बनता है और हीट रैश का खतरा बढ़ जाता है। स्किन कंडीशन कुछ स्किन डिजीज में स्किन सेंसिटिव हो जाती या सूजन हो जाती है। इससे स्वेट डक्ट्स ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसी स्किन पर गर्मी और पसीना होने से रैश जल्दी बन सकते हैं। सवाल- हीट रैश का घरेलू इलाज क्या है? जवाब- कुछ आसान घरेलू उपाय जलन, खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं। जैसे- ठंडी पट्टी: प्रभावित हिस्से पर 5–10 मिनट तक ठंडे पानी में भीगे कपड़े की पट्‌टी रखें या बर्फ पर कपड़ा लपेटकर लगाएं। यह सूजन और खुजली कम करने में मदद कर सकता है। एलोवेरा: एलोवेरा जेल लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है। इससे जलन व सूजन कम हो सकती है। खीरा: फ्रिज में रखी खीरे की स्लाइस प्रभावित जगह पर लगाएं। इससे स्किन को ठंडक मिलती है और जलन कम हो सकती है। चंदन पाउडर: चंदन पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। इससे जलन और सूजन कम करने में मदद मिल सकती है। नीम: नीम के पत्तों का पेस्ट या नीम का तेल लगाएं। इससे स्किन को आराम मिलता है, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। सवाल- कितने दिनों तक हीट रैश ठीक न हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- आमतौर पर हीट रैश 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं। इन कंडीशंस में डॉक्टर से कंसल्ट करें- अगर दाने 3-4 दिनों से ज्यादा समय तक बने हुए हैं। बुखार, दर्द, पस और सूजन जैसे लक्षण दिख रहे हैं। सवाल- गर्मियों में हीट रैश से बचाव के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इन बातों का ध्यान रखकर हीट रैश से बचाव किया जा

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

Hindi News National India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry 1 मिनट पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट 1. महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। 2. भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। 3. ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। 4. पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। 5. नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। 6. सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…