Wednesday, 06 May 2026 | 11:16 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies

Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies

Hindi News Lifestyle Heat Rash Treatment; Summer Skin Problem (Miliaria) Home Remedies | Prevention Tips 53 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में तेज धूप, उमस और पसीने से स्किन पर खुजली, लाल दाने या रैशेज हो जाते हैं। लोग इसे हल्की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार ये हीट रैश यानी घमौरियां हो सकती हैं। स्किन पर स्वेट डक्ट्स होते हैं, जिनसे पसीना निकलता है। इनके ब्लॉक होने पर पसीना स्किन के अंदर ही फंस जाता है। इससे हीट रैश होता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हीट रैश की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- हीट रैश क्यों होता है? इसके क्या लक्षण हैं? हीट रैश के घरेलू उपाय क्या हैं? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हीट रैश क्या होता है? जवाब- हीट रैश एक कॉमन स्किन प्रॉब्लम है। यह ज्यादा गर्मी और पसीने की वजह से होता है। इसे ‘प्रिकली हीट’, ‘स्वेट रैश’ या ’मिलियारिया’ भी कहा जाता है। सवाल- हीट रैश क्यों होता है? जवाब- पसीने को स्किन की सरफेस तक पहुंचाने वाली डक्ट ब्लॉक होने पर हीट रैश होता है। इससे पसीना स्किन के अंदर जमा होने लगता है। यह दाने या रैशेज के रूप में बाहर निकलता है। ग्राफिक में इसके सभी कारण देखिए- सवाल- हीट रैश के क्या लक्षण हैं? जवाब- हीट रैश में स्किन पर छोटे-छोटे दाने निकलते हैं। ये गर्मी में असहजता बढ़ाते हैं। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- हीट रैश और एलर्जी या फंगल इन्फेक्शन में क्या फर्क होता है? जवाब- हीट रैश, एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन तीनों में स्किन पर दाने के साथ खुजली हो सकती है, लेकिन इनके कारण अलग होते हैं। तीनों को एक-एक करके समझते हैं- हीट रैश हीट रैश ज्यादा गर्मी और पसीने की वजह से होता है। स्किन डक्ट्स में पसीना फंसने पर छोटे लाल दाने हो जाते हैं या चुभन महसूस होती है। यह अक्सर गर्दन, पीठ, आर्म पिट (बगल) या जांघों पर होता है। एलर्जी एलर्जी आमतौर पर साबुन, कॉस्मेटिक, मेडिसिन या फूड के रिएक्शन से होती है। इसमें लाल चकत्ते, सूजन और तेज खुजली होती है। फंगल इन्फेक्शन ये फंगस के कारण होता है। आमतौर पर आर्म पिट (बगल), जांघों पर या पैरों की उंगलियों के बीच होता है। इसमें गोल दाने, लगातार खुजली होती है। स्किन छिल भी सकती है। सवाल- हीट रैश शरीर के किन हिस्सों में ज्यादा होता है? जवाब- यह उन हिस्सों में होता है, जहां हवा कम लगती है या स्किन आपस में रगड़ती है। खासकर वे हिस्से जो कपड़ों से ढके रहते हैं या जहां पसीना ज्यादा जमा होता है। ये बच्चों और वयस्कों में अलग अलग जगहों पर होता है- बच्चों में- आर्म पिट्स (बगल) कोहनी के अंदर की सिलवटें गर्दन ग्रोइन या डायपर वाला हिस्सा गर्दन का निचला हिस्सा और पीठ वयस्कों में- हाथ पीठ चेस्ट (महिलाओं में ब्रेस्ट के नीचे) जांघों के बीच इन हिस्सों में पसीना ज्यादा जमा होने से स्वेट डक्ट्स ब्लॉक हो जाते हैं। इससे हीट रैश होता है। सवाल- किन लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, टाइट कपड़ों से एयर फ्लो रुक जाता है। इससे स्किन तक हवा नहीं पहुंच पाती। इसके चलते पसीना ज्यादा होता है, देर से सूखता है। यही वजह है कि टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ जाता है। सवाल- क्या पर्सनल हाइजीन का ख्याल न रखने से भी हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, अगर रोज नहीं नहाते हैं, पसीने से भीगे कपड़े लंबे समय तक पहने हुए हैं, साफ सफाई नहीं रखते हैं तो हीट रैश बढ़ सकता है। सवाल- क्या ओबिसिटी या अन्य हेल्थ कंडीशंस भी हीट रैश के रिस्क को बढ़ा सकती हैं? जवाब- हां, कुछ हेल्थ कंडीशंस हीट रैश होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए- डायबिटीज डायबिटीज में ब्लड शुगर ज्यादा रहने से स्किन की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है। इससे स्किन में इन्फेक्शन और सूजन का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे रैश जल्दी हो सकते हैं। डायबिटिक लोगों को ज्यादा पसीना आता है, जिससे हीट रैश का रिस्क बढ़ सकता है। ओबिसिटी वजन ज्यादा होने पर स्किन की सिलवटें (स्किन फोल्ड्स) बढ़ जाती हैं। इसलिए जांघों, पेट या आर्म पिट्स (बगल) में हीट रैश के लक्षण ज्यादा दिखते हैं। मोटापे के कारण बॉडी को हीट कंट्रोल करने में समस्या होती है। इससे पसीना ज्यादा बनता है और हीट रैश का खतरा बढ़ जाता है। स्किन कंडीशन कुछ स्किन डिजीज में स्किन सेंसिटिव हो जाती या सूजन हो जाती है। इससे स्वेट डक्ट्स ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसी स्किन पर गर्मी और पसीना होने से रैश जल्दी बन सकते हैं। सवाल- हीट रैश का घरेलू इलाज क्या है? जवाब- कुछ आसान घरेलू उपाय जलन, खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं। जैसे- ठंडी पट्टी: प्रभावित हिस्से पर 5–10 मिनट तक ठंडे पानी में भीगे कपड़े की पट्‌टी रखें या बर्फ पर कपड़ा लपेटकर लगाएं। यह सूजन और खुजली कम करने में मदद कर सकता है। एलोवेरा: एलोवेरा जेल लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है। इससे जलन व सूजन कम हो सकती है। खीरा: फ्रिज में रखी खीरे की स्लाइस प्रभावित जगह पर लगाएं। इससे स्किन को ठंडक मिलती है और जलन कम हो सकती है। चंदन पाउडर: चंदन पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। इससे जलन और सूजन कम करने में मदद मिल सकती है। नीम: नीम के पत्तों का पेस्ट या नीम का तेल लगाएं। इससे स्किन को आराम मिलता है, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। सवाल- कितने दिनों तक हीट रैश ठीक न हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- आमतौर पर हीट रैश 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं। इन कंडीशंस में डॉक्टर से कंसल्ट करें- अगर दाने 3-4 दिनों से ज्यादा समय तक बने हुए हैं। बुखार, दर्द, पस और सूजन जैसे लक्षण दिख रहे हैं। सवाल- गर्मियों में हीट रैश से बचाव के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इन बातों का ध्यान रखकर हीट रैश से बचाव किया जा

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

Hindi News National India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry 1 मिनट पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट 1. महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। 2. भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। 3. ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। 4. पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। 5. नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। 6. सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

तेजपत्ता के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान, गैस से लेकर शुगर तक में मददगार

authorimg

Last Updated:May 05, 2026, 00:01 IST Bay Leaves Benefits: तेजपत्ता सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि एक औषधि है. खासकर पेट से जुड़ी दिक्कतों के लिए यह बहुत अच्छा माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या हो, तो तेजपत्ते का काढ़ा या इसे खाने में शामिल करने से राहत मिल सकती है. ख़बरें फटाफट Bay Leaves Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-छोटी परेशानियों के लिए भी तुरंत दवाओं का सहारा लेने लगे हैं, जबकि हमारी रसोई में मौजूद कई प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं जो हल्की समस्याओं में असरदार राहत दे सकती हैं. उन्हीं में से एक है तेजपत्ता, जो आमतौर पर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके फायदे सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं. सही तरीके और संतुलित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी साबित हो सकता है. तेजपत्ता को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे सिर्फ मसाले के रूप में नहीं, बल्कि एक घरेलू नुस्खे के तौर पर भी अपनाया जाता है. खासतौर पर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में इसका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच, पेट फूलना या भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं, तो तेजपत्ते को उबालकर उसका काढ़ा पीना या भोजन में इसका नियमित इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. यह पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है. सिर्फ पेट ही नहीं, सांस से जुड़ी समस्याओं में भी तेजपत्ता उपयोगी माना जाता है. मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी, खांसी या गले में खराश जैसी दिक्कतों में यह राहत पहुंचा सकता है. आयुर्वेद में इसे कफ कम करने वाला तत्व माना गया है, जो श्वसन तंत्र को साफ रखने में मदद करता है. कुछ लोग तेजपत्ते को पानी में उबालकर उसकी भाप लेते हैं या काढ़ा बनाकर पीते हैं, जिससे गले और नाक की तकलीफ में आराम मिल सकता है. आधुनिक विज्ञान ने भी तेजपत्ते के कुछ संभावित फायदों को स्वीकार किया है. कई शोधों में यह संकेत मिले हैं कि तेजपत्ता ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है. इस वजह से इसे डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए एक सपोर्टिव उपाय के रूप में देखा जाता है. हालांकि यह जरूरी है कि इसे किसी भी तरह से दवाओं का विकल्प न समझा जाए, बल्कि डॉक्टर की सलाह के साथ ही इसका सेवन किया जाए. इसके अलावा तेजपत्ता में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और जोड़ों के दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं. हल्के दर्द, सूजन या इंफेक्शन जैसी स्थितियों में कुछ लोग इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.