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SC Hearing CEC EC Appointment Law

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25 मिनट पहले

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क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल किया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है।

दरअसल, 2023 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने कहा था कि CEC और EC की नियुक्ति तय करने वाली 3 लोगों की कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस को शामिल किया जाए। सरकार ने इसके बाद कानून बनाकर कमेटी में चीफ जस्टिस की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया।

इस कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) सहित कई याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है। उनका कहना है कि चयन समिति से CJI को हटाना नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करता है।

सरकार की दलील खारिज की

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सबरीमाला जैसे धार्मिक मुद्दों वाली नौ-जजों की बेंच में व्यस्त होने का हवाला देते हुए समय मांगा। कोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी। जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की बेंच ने कहा कि यह मामला अन्य लंबित विषयों की तुलना में ज्यादा जरूरी है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

2 मार्च 2023: सुप्रीम कोर्ट का फैसला- सिलेक्शन पैनल में CJI को शामिल करना जरूरी

2 मार्च 2023 को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल करेगा। जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI शामिल होंगे। इससे पहले सिर्फ केंद्र सरकार इनका चयन करती थी।

5 सदस्यीय बेंच ने कहा कि ये कमेटी नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती।

21 दिसंबर 2023: संसद के दोनों सदनों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया बिल पास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार पिछले साल मानसून सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति, सेवा, शर्तें और अवधि से जुड़ा बिल, 2023 लेकर आई। इस बिल के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा।

इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। पैनल से CJI को बाहर रखा गया था। दिसंबर में शीतकालीन सत्र के दौरान यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया।

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ये खबर भी पढ़ें…

सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पूरी खबर पढ़ें…

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है।

दरअसल, 2023 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने कहा था कि CEC और EC की नियुक्ति तय करने वाली 3 लोगों की कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस को शामिल किया जाए। सरकार ने इसके बाद कानून बनाकर कमेटी में चीफ जस्टिस की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया।

इस कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) सहित कई याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है। उनका कहना है कि चयन समिति से CJI को हटाना नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करता है।

सरकार की दलील खारिज की

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सबरीमाला जैसे धार्मिक मुद्दों वाली नौ-जजों की बेंच में व्यस्त होने का हवाला देते हुए समय मांगा। कोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी। जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा की बेंच ने कहा कि यह मामला अन्य लंबित विषयों की तुलना में ज्यादा जरूरी है और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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5 सदस्यीय बेंच ने कहा कि ये कमेटी नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगा, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती।

21 दिसंबर 2023: संसद के दोनों सदनों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया बिल पास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार पिछले साल मानसून सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति, सेवा, शर्तें और अवधि से जुड़ा बिल, 2023 लेकर आई। इस बिल के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यों का पैनल करेगा।

इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। पैनल से CJI को बाहर रखा गया था। दिसंबर में शीतकालीन सत्र के दौरान यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया।

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पूरी खबर पढ़ें…

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