Sunday, 21 Jun 2026 | 08:36 AM

Trending :

40 साल की उम्र के बाद नियमित आई टेस्ट क्यों जरूरी? आंखों को सुरक्षित रखने का आसान तरीका

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 23:50 IST Eyes Health Tips: आंखों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नियमित आई टेस्ट, सही खानपान और अच्छी आदतें अपनाकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.समय पर जांच ही आंखों की रोशनी बचाने का सबसे अच्छा तरीका है. ख़बरें फटाफट आंखें हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. लेकिन आजकल मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी जैसे गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल और लापरवाही आंखों पर बुरा असर डालते हैं. खासकर 40 साल की उम्र के बाद आंखों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट इस उम्र के बाद नियमित आई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. आई टेस्ट क्यों जरूरी? नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है समय-समय पर नेत्र जांच कराना. इस उम्र के बाद अगर नजर थोड़ी धुंधली हो या पास की चीजें साफ न दिखें, तो लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो सही नहीं है. समय पर जांच कराने से कई गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में ही लग सकता है और उनका इलाज आसान हो जाता है. 40 के बाद आंखों में होने वाले बदलाव40 साल के बाद आंखों में कई बदलाव आना स्वाभाविक है. इस उम्र में पास की चीजें धुंधली दिखना आम समस्या बन जाती है. इसके अलावा ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ये बीमारियां शुरुआत में धीरे-धीरे बढ़ती हैं और इनके स्पष्ट लक्षण तुरंत नजर नहीं आते, इसलिए नियमित जांच बहुत जरूरी हो जाती है. कितनी बार कराएं आई टेस्टविशेषज्ञों के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कम से कम साल में एक बार पूरा नेत्र परीक्षण जरूर कराना चाहिए.अगर किसी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर है या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास है, तो हर छह महीने में एक बार जांच कराना बेहतर होता है. समय पर जांच से बीमारी का पता जल्दी चल जाता है और इलाज आसान हो जाता है. आंखों की देखभाल कैसे करेंआंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आदतें बहुत जरूरी हैं. स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए और मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग सीमित करना चाहिए. हमेशा अच्छी रोशनी में पढ़ना चाहिए और आंखों को आराम देना जरूरी है. इसके साथ ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है. गाजर, पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, बादाम और ब्लूबेरी जैसे फल और सब्जियां आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन ए, सी, ई, ल्यूटिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो आंखों की रोशनी को मजबूत बनाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

ऊपर से सख्त दिखने वाला ये फल गर्मियों में पेट को दे ठंडक, त्वचा के लिए वरदान, जानें इस फ्रूट की अन्य खूबियां

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 23:41 IST Wood apple health benefits in summer: अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है. जानिए किस तरह से बेल सेहत के लिए है फायदेमंद और गर्मियों में इसे क्यों खाना चाहिए. गर्मियों में बेल के सेवन के फायदे. पुराने समय से बेल यानी बिल्व को घरेलू उपचार का अहम हिस्सा माना जाता रहा है. दादी-नानी के नुस्खों में इसका इस्तेमाल आम था और आज भी यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है. आधुनिक लाइफस्टाइल में जहां लोग पाचन, त्वचा और ऊर्जा से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में गर्मियों का सुपर फल बेल इन सभी समस्याओं से बचे रहने के लिए एक नेचुरल विकल्प साबित हो सकता है. पेट और त्वचा के लिए रामबाण है बेल. जानिए इसके अन्य क्या फायदे होते हैं शरीर पर… बेल के सेवन के फायदे (Bael fruit benefits) पाचन तंत्र रखे दुरुस्त अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है और डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है. कब्ज की समस्या में भी इसे उपयोगी माना जाता है. वात और कफ करे संतुलित आयुर्वेद में बेल को ऐसा फल माना गया है जो शरीर में बढ़े हुए वात और कफ दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है. इन दोषों के असंतुलन से शरीर में भारीपन, सुस्ती और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. बेल शरीर को हल्का और संतुलित बनाए रखने में सहायक माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. शुगर और मेटाबॉलिज्म के लिए फायदेमंद आजकल डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. बेल का नियमित सेवन शरीर के शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है. साथ ही यह मेटाबॉलिक एक्टिविटी को बेहतर बनाकर शरीर में ऊर्जा के सही उपयोग में सहायक होता है, जिससे थकान कम महसूस होती है. त्वचा को दे ठंडक और पोषण स्किन केयर में भी बेल काफी उपयोगी माना जाता है. हल्की जलन, इंफ्लेमेशन या रैशेज की समस्या होने पर बेल का गूदा या रस आराम पहुंचा सकता है. यह त्वचा को ठंडक देने के साथ अंदर से पोषण भी देता है, जिससे स्किन हेल्दी और साफ नजर आती है. इम्यूनिटी करे बूस्ट खांसी-जुकाम जैसी मौसमी समस्याओं में भी बेल लाभकारी माना जाता है. इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव आसान हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

लौकी का पुलाव रेसिपी: गर्मी में पेट का मजा चाहता है लौकी का पुलाव, स्वाद और सेहत दोनों पर पड़ता है असर; बच्चों को भी आती है पसंद

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप बासमती चावल, 1 छोटी लौकी (कद्दूकस हुई), 1 प्याज स्ट्रॉबेरी कटा, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा सा जीरा, 1 तेजपत्ता, 2 लौंग छवि: फ्रीपिक 1 छोटी इलायची, आधा छोटा हल्दी, स्वाद नमक, 2 बड़ा चम्मच घी या तेल, 2 कप पानी, थोड़ा हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले चावल को धोकर करीब 20 मिनट के लिए विलंबित करें। अब कुकर या पैन में घी गरम करें. इसमें जीरा, तेजपत्ता, लौंग और इलायची के टुकड़े टुकड़े भून लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद कटा हुआ प्याज और हरी मिर्च स्टोमनॉल होने तक। अब लोकी इसमें शामिल हो गए और 2-3 मिनट तक महानुभाव से भूल गए। फिर हल्दी और नमक मिश्रण करें। छवि: एआई अब भीगे हुए चावल और बने हुए हाथ से बने मसाले। इसके बाद पानी के उपकरण कुकर का समुद्र तट बंद कर दिया गया। 1-2 शहर आने तक। छवि: एआई जब कुकर का खिलौना निकल जाए, तो पुलाव को पतले हाथों से फुलाएं और ऊपर से हरा धनिया बांधें। छवि: एआई लॉकी बॉडी को ठंडक क्लिनिक में मदद मिलती है। यह पेट को चित्रित करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। गर्मी में डायहाइड्रेशन की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। छवि: सोशल मीडिया कम क्वालिटी में बनने की वजह से यह माना जाता है। लोकी का पुलाव आप दही, रायता, पुदीने की चटनी या पापड़ के साथ सर्व कर सकते हैं। फ़्लोरिडा तो ऊपर से छोटी-छोटी घी-मसाले का स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)लौकी का पुलाव रेसिपी(टी)लौकी का पुलाव(टी)पुलाव रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)लौकी पुलाव कैसे बनाएं(टी)घर का बना लौकी पुलाव

क्या पोहा अनहेल्दी फूड है? शेफ संजीव कपूर के बयान पर छिड़ी बहस, डाइटिशियन से जानें हकीकत

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 23:02 IST Poha Healthy or Unhealthy Breakfast: पोहा को आमतौर पर हेल्दी ब्रेकफास्ट माना जाता है, लेकिन मशहूर शेफ संजीव कपूर ने एक हालिया पॉडकास्ट में पोहा को अनहेल्दी बताया है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह के अनुसार पोहा आसानी से पचने वाला फूड है, जो चावल से बनाया जाता है. पोहा को अनहेल्दी नहीं मान सकते. अधिकतर लोगों के लिए पोहा फायदेमंद है. डायबिटीज के मरीजों को पोहा खाने में सावधानी बरतनी चाहिए. शेफ संजीव कपूर ने पोहा को अनहेल्दी बताया है, जिसके बाद इसे लेकर बहस छिड़ गई है. Is Poha Healthy Breakfast or Overrated: देश भर में पोहा को सबसे पसंदीदा ब्रेकफास्ट माना जाता है. इंदौर का पोहा पूरी दुनिया में मशहूर है. पोहा चावल से बनाया जाता है और यह झटपट तैयार होने वाला नाश्ता है. इसे एक हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शन भी समझा जाता है. हाल ही में एक पॉडकास्ट में मशहूर शेफ संजीव कपूर ने कहा “पोहा ओवररेटेड है और यह हेल्दी नहीं है. लोगों को लगता है कि पोहा हेल्दी है, लेकिन यह हेल्दी नहीं है. राइस अगर खराब था, तो पोहा उससे भी ज्यादा खराब हो गया. अगर आपको शुगर स्पाइक्स देखना है, तो नाश्ते में पोहा खा लीजिए. इससे आपका शुगर लेवल सीधे ऊपर जाएगा.” संजीव कपूर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई पोहा अनहेल्दी है? यूपी के गाजियाबाद स्थित रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया पोहा चावल से बनाया जाता है. सबसे पहले चावल को भिगोया जाता है, फिर उसे भाप देकर दबाया और सुखाया जाता है. इसके बाद चपटे फ्लेक्स के रूप में पोहा तैयार होता है. पोहा एक तरह का प्रोसेस्ड राइस है. इसमें चावल का उपयोग होता है, इसलिए इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. पोहा में थोड़ी मात्रा में फाइबर, आयरन और कुछ बी-विटामिन्स भी पाए जाते हैं. अगर इसे मूंगफली, मटर, प्याज, करी पत्ता और सब्जियों के साथ बनाया जाए, तो इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ जाती है. मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं, जबकि सब्जियां फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बढ़ाती हैं. क्या शुगर के मरीज पोहा खा सकते हैं? डाइटिशियन ने बताया कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि कोई खाना ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है. पोहा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 65 से 75 के बीच हो सकता है. इसका मतलब है कि पोहा को ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है. हालांकि यह असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि पोहा के साथ क्या खाया जा रहा है और व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि कैसी है. डायबिटीज के मरीज भी कम मात्रा में पोहा खा सकते हैं. हालांकि वे पोहा बनाते समय उसमें ज्यादा से ज्यादा सब्जियां, मूंगफली या स्प्राउट्स डालें, ताकि प्रोटीन और फाइबर बढ़े. इसके अलावा पोहा के साथ दही या उबला अंडा जैसे प्रोटीन भी लें. ऐसा करने से ब्लड शुगर का असर धीमा हो सकता है. अगर डायबिटीज के किसी मरीज का शुगर लेवल अनकंट्रोल है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही पोहा खाना चाहिए. क्या पोहा वाकई अनहेल्दी है? एक्सपर्ट के मुताबिक पोहा को अनहेल्दी कहना ठीक नहीं है. पोहा एक हल्का और आसानी से पचने वाला फूड है. इसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं. अगर इसे कम तेल में सब्जियों और मूंगफली के साथ बनाया जाए, तो यह हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शन है. पोहा को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर खाना चाहिए. सिर्फ किसी एक बयान के आधार पर उसे पूरी तरह खराब या बेकार मान लेना सही नहीं होगा. सही मात्रा, सही कॉम्बिनेशन और एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ पोहा खाया जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

घर पर इन 3 चीजों से बनाएं ORS, डिहाइड्रेशन से मिलेगी राहत, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस भी रहेगा ठीक

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 22:20 IST Homemade ORS Recipe: डिहाइड्रेशन को दूर करने के लिए डॉक्टर्स हमेशा WHO रिकमेंडेड फॉर्मूला वाला ORS पीने की सलाह देते हैं. अगर आपके पास बाजार का ओआरएस नहीं है, तो पानी, चीनी और नमक की मदद से घर पर आसानी से ORS बनाया जा सकता है. यह शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करके डिहाइड्रेशन से राहत दिला सकता है. चीनी, नमक और पानी के सही मिश्रण से घर पर ORS बना सकते हैं. Homemade ORS for Dehydration: गर्मियों में तेज धूप, ज्यादा पसीना और शरीर में पानी की कमी के कारण डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ जाती है. डायरिया और फूड पॉइजनिंग के कारण भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ जाता है. ऐसे में शरीर को सिर्फ पानी नहीं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की भी जरूरत होती है. डॉक्टर्स के अनुसार ORS यानी ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है. आमतौर पर एक्सपर्ट WHO रिकमेंडेड फॉर्मूला वाले ORS को पीने की सलाह देते हैं. आपके पास बाजार वाला ORS नहीं है, तो घर पर होममेड ओआरएस बना सकते हैं. घर पर कैसे बनाएं ORS | How To Make ORS at Home घर पर ORS बनाने के लिए आपको सिर्फ 3 चीजों की जरूरत होती है. साफ पानी, चीनी और नमक. सबसे पहले एक लीटर साफ और उबला हुआ ठंडा पानी लें. अब इसमें लगभग 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाएं. इसे अच्छी तरह घोल लें, ताकि सभी चीजें पूरी तरह पानी में मिल जाएं. यही आसान घरेलू ORS शरीर को तुरंत एनर्जी और हाइड्रेशन देने में मदद करता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि चीनी शरीर को एनर्जी देने का काम करती है, जबकि नमक में मौजूद सोडियम शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है. जब शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है या दस्त और उल्टी जैसी समस्या होती है, तब इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होने लगते हैं. ऐसे में ORS काफी फायदेमंद माना जाता है. हालांकि ORS बनाते समय सही मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. ज्यादा नमक या ज्यादा चीनी शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकती है. इसलिए WHO द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार ही इसे तैयार करना चाहिए. अगर ORS का स्वाद बहुत ज्यादा नमकीन या मीठा लगे, तो उसकी मात्रा दोबारा जांच लें. एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों, बुजुर्गों और गर्मियों में ज्यादा बाहर काम करने वाले लोगों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. ऐसे लोगों को समय-समय पर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहना चाहिए. अगर कमजोरी, चक्कर, सूखा मुंह या पेशाब कम आने जैसी समस्याएं दिखें, तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है. घर पर बना ORS एक आसान, सस्ता और असरदार उपाय है, जो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि अगर डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर हो या लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. इसमें लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

तमिल: विजय की पार्टी टीवीके के सभी 108 विधायक छोड़ देंगे, अगर डीएमके या एआईएडीएमके ने उठाया ये कदम

तमिल: विजय की पार्टी टीवीके के सभी 108 विधायक छोड़ देंगे, अगर डीएमके या एआईएडीएमके ने उठाया ये कदम

तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिल में त्रिशंकु विधानसभा के बाद सरकार गठन को लेकर सस्पेंस और गहराई जा रही है। विजय की नागालैंड वाली तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) ने गवर्नर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, लेकिन उन्हें बहुमत का जरूरी पात्र (118) साबित करने के लिए कहा गया है। अभिनेता से नेता बने विजय की अवाज वाली तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) हाल ही में हुई 108 पवित्र कैलाश में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई है, लेकिन 238 फैजाबाद विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 के आंकड़े अभी भी पीछे हैं। ऐसे में पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 10 और बहुमत के समर्थन की जरूरत है। टीवीके उठाना बड़ा कदम हो सकता है इसी बीच, द्रविड़ मुनेत्र कशगम (एमएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कशगम (एमएमके) के बीच बातचीत की खबरें ने हलचल तेज कर दी है। टीवीके ऑफिसियल के, अगर टीचर्स या आईए डियाके सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पार्टी के सभी 108 नेता पद छोड़ सकते हैं। यह एक बड़ा और आक्रामक राजनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में बदलाव और बढ़ोतरी हो सकती है। असल में, टीवीके को शक है कि एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली टीचर्स और एआईए एमआईके के सामूहिक विजय को सत्य से दूर रखने की रणनीति बनाई जा रही है। इसी के नाम पर स्टालिन ने राजनीतिक निर्णय लेने का विरोध किया और इसके लिए उन्हें अधिकार भी दे दिया। तमिलनाडु में अभी स्थिति बेहद अनिश्चित है, एक तरफ टीवीके बहुसंख्यक कम्युनिस्ट पार्टी की कोशिश है, तो दूसरी तरफ नए गठबंधन की राज्य की राजनीति का अनुपात पूरी तरह से बदल सकता है। टीवीके ने लेफ्ट से मांगा समर्थन टीवीके नेता सी. ए.टी. कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एम. वीरपांडियन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पी. मुशनगम से मुलाकात कर समर्थन माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विजय से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि सत्ता में भागीदारी जरूरी है, ताकि सहयोगी दल-अपने सहयोगियों और सहयोगियों को अपने-अपने काम में लागू कर सकें। कुमार के अनुसार, टीवीके ने वाम आश्रम, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसी) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयू लेवल) को ईमेल और समर्थन पत्र के माध्यम से समर्थन का प्रस्ताव भेजा है। वे भरोसेमंद समर्थकों की पार्टी तमिलनाडु में सरकार बनाने में सफल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके ने जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से कोई संपर्क नहीं किया है और ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। वहीं कांग्रेस ने, जो 5 शेयर बाजार हैं, सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है. कुमार ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. उनका दावा है कि प्रतिष्ठा टीवी के पक्ष में है और इसी आधार पर विजय को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए। (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय(टी)टीवीके प्रमुख(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)जोसेफ विजय(टी)एमके स्टालिन(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन डीएमके सहयोगियों की बैठक(टी)एमके स्टालिन पार्टी का नाम(टी)तमिलनाडु सरकार गठन

Bathing Tips: नहाते समय पेशाब आने से क्या होता है

Bathing Tips: नहाते समय पेशाब आने से क्या होता है

Last Updated:May 07, 2026, 22:16 IST नहाते या शॉवर लेते समय पेशाब आना बहुत ही कॉमन है. कई लोगों में ये एक आदत के रूप में भी देखा जाता है. ऐसा अक्सर तब होता है जब बॉडी पानी के संपर्क में आकर रिलेक्स महसूस करती है. कुछ लोग इसे समय और पानी बचाने का आसान तरीका भी मानते हैं, जबकि कुछ लोगों को यह अनहाइजीन भी लगता है. लेकिन यदि आप यूरिन पास करते समय ये एक छोटी सी गलती कर रहे हैं, आपके निचले अंग के हिस्से में प्रॉब्लम हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, शॉवर में पेशाब करना पूरी तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन इसके कुछ नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं, जिनके बारे में जानकारी होना जरूरी है. कई लोगों का मानना है कि पेशाब पूरी तरह साफ और कीटाणुरहित होता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. हालांकि सामान्य स्थिति में पेशाब में बहुत कम बैक्टीरिया होते हैं, फिर भी यह पूरी तरह स्टरल यानी जीवाणु रहित नहीं होता. खासकर अगर किसी व्यक्ति को यूरिन इंफेक्शन या दूसरी स्वास्थ्य समस्या हो, तो पेशाब में हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं. हमारे शरीर में किडनी खून को फिल्टर करके शरीर के बेकार पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है. यही तरल पदार्थ पेशाब के रूप में शरीर से बाहर आता है. पेशाब में ज्यादातर पानी होता है, लेकिन इसमें यूरिया, अमोनिया, क्रिएटिनिन और दूसरे अपशिष्ट पदार्थ भी शामिल होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google हालांकि अगर कोई व्यक्ति शॉवर में पेशाब करता है, तो अपने निजी बाथरूम में करना सार्वजनिक शॉवर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. सार्वजनिक बाथरूम या जिम के शॉवर में ऐसा करना संक्रमण फैलाने का कारण बन सकता है. यदि किसी व्यक्ति को यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन है, तो उसके पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया दूसरे लोगों तक पहुंच सकते हैं. यूटीआई होने पर पेशाब में जलन, दर्द, बदबू, बार-बार पेशाब आना या धुंधला पेशाब जैसी समस्याएं हो सकती हैं. समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण किडनी तक भी पहुंच सकता है. इसके अलावा, कुछ बैक्टीरिया जैसे एमआरएसए भी गीली सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. ऐसे बैक्टीरिया शॉवर फ्लोर पर फैलकर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं. इसलिए साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. निचले हिस्से में कमजोरी का कारण- खड़े होकर या आधी बैठी स्थिति में पेशाब करने से पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है. पेल्विक फ्लोर शरीर का वह हिस्सा है जो ब्लैडर, आंत, यूरिन पाइप और महिलाओं में गर्भाशय व योनि को सहारा देता है. जब व्यक्ति आरामदायक स्थिति में बैठकर पेशाब नहीं करता, तो ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता. इससे धीरे-धीरे पेल्विक फ्लोर कमजोर हो सकता है. पेल्विक फ्लोर कमजोर होने पर भविष्य में यूरिन कंट्रोल करने में परेशानी हो सकती है. इस स्थिति को यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहा जाता है, जिसमें अचानक पेशाब आने की इच्छा होती है या पेशाब लीक होने लगता है. ये समस्या पुरुषों में भी होती है लेकिन महिलाओं में यह समस्या उम्र बढ़ने, गर्भावस्था या मांसपेशियों की कमजोरी के कारण और ज्यादा बढ़ सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

Last Updated:May 07, 2026, 21:36 IST Real Watermelon Check Tips: राजधानी पटना में इन दिनों फलों में मिलावट को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. मुंबई में सामने आए ‘तरबूज कांड’ ने इस डर को और गहरा कर दिया है. बता दें कि, मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी के बाद तरबूज खाने से हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे देश में कैमिकल वाले तरबूज को लेकर डर का माहौल बन गया है. भीषण गर्मी में जिस तरबूज को सबसे सुरक्षित और ताजगी देने वाला फल माना जाता है, अब उसी को खरीदने से पहले लोग कई बार सोचने लगे हैं. पहले केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए केमिकल इस्तेमाल की खबरें आती थीं, लेकिन अब तरबूज में भी मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं. पटना फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, थोक बाजार में तो स्थिति सामान्य है, लेकिन खुदरा स्तर पर कुछ विक्रेता तरबूज को अधिक लाल और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी को लेकर मेदांता अस्पताल, पटना की डाइटीशियन प्रिया दुबे और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शाची ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. शाची के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल यदि निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदने की सलाह दी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी फल की सतह पर सफेद या मोटी परत दिखे, तो उसे सीधे खाने के बजाय अच्छी तरह धोना चाहिए. खासकर अंगूर और संतरे जैसे फलों में कीटनाशक अधिक इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से पहले पानी में थोड़ा खाने वाला सोडा मिलाकर साफ करना सुरक्षित रहता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार में बहुत ज्यादा फल खाने से बचना चाहिए और कटे हुए फलों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए. खासतौर पर कई घंटों पहले कटे फल नुकसानदायक हो सकते हैं. यहां तक कि फ्रिज में रखे कटे फल भी चार घंटे के बाद सुरक्षित नहीं माने जाते, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google डाइटीशियन प्रिया दुबे के अनुसार, अगर आप कटा हुआ तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसकी जांच के लिए एक आसान तरीका है. तरबूज के गूदे पर टिश्यू पेपर रखकर हल्का दबाएं. यदि टिश्यू पर हल्का गुलाबी रंग आता है, तो यह सामान्य है. वहीं, अगर गहरा लाल रंग निकलता है, तो इसमें रोडामाइन बी जैसे केमिकल के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है. घर पर जांच के लिए तरबूज का एक टुकड़ा पानी में डालें. यदि पानी हल्का गुलाबी हो, तो फल सामान्य है. लेकिन, अगर पानी तेजी से गहरा लाल हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बिरयानी में भी मिलावट का खतरा है. रंग और स्वाद के लिए इस्तेमाल होने वाले केसर और हल्दी की जगह कुछ लोग सस्ते और हानिकारक केमिकल जैसे मेटानिल येलो का इस्तेमाल करते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और कैंसर तक का कारण बन सकता है. ऐसी मिलावटी बिरयानी की पहचान करने के लिए एक आसान तरीका है. थोड़े से चावल को हाथों में लेकर हल्के से रगड़ें. अगर रंग हल्का पीला दिखे और हाथ धोने पर आसानी से साफ हो जाए, तो यह प्राकृतिक रंग का संकेत है. लेकिन अगर रंग हाथों से चिपका रह जाए और पानी से न उतरे, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है. एक और तरीका यह है कि चावल के कुछ दाने पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. केसर और हल्दी के टुकड़े पानी के नीचे जमे हुए दिखाई देंगे यानी यह सेफ है. अगर चावल से कोई भी रंग नहीं निकलता है तो समझ जाएं कि यह नुकसानदायक है. गर्मी के मौसम में खासतौर पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि सेहत सुरक्षित रह सके. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

एयर कूलर की गलतियाँ: गर्मी में न बन जाए काल, करंट से बचने के लिए आज ही चेक करें ये 3 चीजें; अन्यथा लग सकता है जोर का झटका

तस्वीर का विवरण

डेमोक्रेसी की वायरिंग और वर्कशॉप अवश्य जांचें: कई लोग प्राचीन काल के तार और वस्तुओं का उपयोग करते रहते हैं। गर्मी में लगातार अस्थिरता से तार गर्म हो रहे हैं और करंट लीकेज का खतरा बढ़ रहा है। छवि: एआई अगर तार कटी जली हुई तो तुरंत बदल दें। प्रोसेसर का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जा सकता। उत्पाद बोर्ड की जगह सीधे एंटरप्राइज़ में इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट। बार-बार स्पार्किंग हो रही हो तो तुरंत बिजली मिस्त्री को कॉल करें। छवि: एआई पानी का लाइकेज बिल्कुल निश्चित नहीं है: ग्लूकोज में पानी और बिजली दोनों एक साथ होते हैं, इसलिए छोटे सी लाइकेज भी खतरनाक हो सकते हैं। कई बार मोटर या पंप के पास पानी जमा होने से बॉडी में करंट आने लगता है। छवि: एआई अर्थशास्त्र के नीचे पानी जमा हो रहा हो तो तुरंत ठीक करवाएं। मोटर के पास प्रमुख पत्रिकाएँ तो स्टॉक एक्सचेंज बंद कर दें। हाथों से लचीले हाथों से उधार लेना। बच्चों को लेबल के पास न चुनौती। छवि: फ्रीपिक अर्थ सही है या नहीं: कई निगमों में अर्थशास्त्र तो चल रहा है लेकिन उसका अर्थ सही नहीं है। यही सबसे बड़ा कारण है करंट लीक्स का। अगर लिनक्स छूते समय शॉक शॉक महसूस हो तो तुरंत सावधान हो जाएं। छवि: एआई सही अर्थ के लिए इलेक्ट्रीशियन से जांच करवाएं। थ्री-पिन प्लांट का प्रयोग करें। बिजली का बिलबोर्ड अपग्रेड हो तो तुरंत छूट। छवि: फ्रीपिक चॉकलेट को हमेशा जगह-जगह पर सुखाया जाता है। सफाई समय सारिणी न निकालें। लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया तो स्टॉक एक्सचेंज बंद कर दिया गया। स्थानीय और ख़राब गुणवत्ता वाले घटकों से सुसज्जित। छवि: एआई गर्मी में राहत देने वाला लैपटॉप अगर सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो बड़ा खतरा हो सकता है। इसलिए समय-समय पर उसकी वायरिंग, मोटर और अर्थिंग की जांच जरूर करवाएं। छवि: एआई थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े हादसे से बचा सकती है। इसलिए नामांकित सभी युक्तियों को ध्यान में रखते हुए ही ग्लूकोज का प्रयोग करें। छवि: एआई

हर वक्त पानी पीना समझते हैं फायदेमंद? डॉक्टर ने बताया कब यही आदत पहुंचा सकती है बड़ा नुकसान

arw img

X हर वक्त पानी पीना समझते हैं फायदेमंद? जानें कब यही आदत पहुंचा सकती है नुकसान   Health Tips: गर्मियों के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है, लेकिन देहरादून के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार जरूरत से ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए उतना ही नुकसानदेह हो सकता है जितना कि कम पीना. पानी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र और वजन पर निर्भर करती है. जैसे 9 से 13 साल के बच्चों को लगभग 2 लीटर और वयस्कों को अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर 30 से 35 मिलीलीटर पानी पीना चाहिए (उदाहरण के तौर पर 40 किलो वजन पर 2 लीटर और 80 किलो पर 3 लीटर). यदि हम अपनी शारीरिक जरूरत से अधिक पानी पीते हैं, तो इससे किडनी पर काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे वह शरीर से टॉक्सिन्स को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाती. इसका सबसे गंभीर परिणाम हाइपोनेट्रेमिया के रूप में सामने आ सकता है, जिसमें खून में पानी अधिक होने से सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है और शरीर की कोशिकाओं में सूजन आने लगती है, जो मस्तिष्क और अन्य अंगों के लिए जानलेवा हो सकती है. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमेशा सही नियम और सही मात्रा में ही पानी का सेवन करना चाहिए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।