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आम की तासीर ठंडी होती है या गर्म, गर्मियों के मौसम में किस तरह करें सेवन, एक्सपर्ट ने बताया

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Last Updated:May 07, 2026, 21:13 IST Mango Benefits and Side Effects: आम गर्मियों का फल है और इसका स्वाद सभी लोगों को खूब भाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार आम की तासीर गर्म होती है. इसे सीमित मात्रा और पानी में भिगोकर खाना बेहतर माना जाता है. सही तरीके से सेवन करने पर आम गर्मियों में भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. आम की तासीर गर्म होती है, लेकिन पानी में भिगोकर रोज 1-2 आम खाना सेफ है. Right Way To Eat Mango in Summer: गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में आम की भरमार हो जाती है. यह गर्मियों में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फल है. आम का रसीला स्वाद हर उम्र के लोगों को पसंद आता है. आम में कई पोषक तत्व होते हैं, जो इसे सेहत के लिए भी फायदेमंद बनाते हैं. आम को लेकर एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि आम की तासीर ठंडी होती है या गर्म? कई लोग मानते हैं कि ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है, जबकि कुछ इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताते हैं. इस बारे में एक्सपर्ट से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया आम में नेचुरल शुगर, फाइबर, विटामिन A, विटामिन C और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को एनर्जी देने के साथ इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं. हालांकि आम की तासीर गर्म होती है और इस वजह से इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. कुछ लोगों को ज्यादा आम खाने पर मुंह में छाले, पिंपल्स, पेट में गर्मी या अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जिन लोगों का शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, उन्हें आम को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है. डाइटिशियन ने बताया कि आम खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे खाने से पहले कुछ देर पानी में भिगो दिया जाए. माना जाता है कि 20 से 30 मिनट तक पानी में रखने से आम की गर्मी कम हो सकती है. इससे आम पर मौजूद धूल या केमिकल भी साफ हो जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से लोग आम को पानी में भिगोकर खाने की सलाह देते आए हैं. गर्मियों में आम का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है. एक दिन में 1-2 आम खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो आम को सही तरीके से खाने पर यह शरीर को कई फायदे भी देता है. यह शरीर को ऊर्जा देता है, पाचन में मदद करता है और त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. आम के साथ पर्याप्त पानी पीना और संतुलित डाइट लेना भी जरूरी है, ताकि शरीर में गर्मी का संतुलन बना रहे. आम मीठा होता है, जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन बेहद कम मात्रा में करना चाहिए. अगर शुगर लेवल अनकंट्रोल है, तब आम अवॉइड करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

क्लासरूम में ग्रिल गिरने से छठी क्लास के छात्र की:डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर ने लापारवाही मानी, प्रिंसिपल को सस्पेंड किया

क्लासरूम में ग्रिल गिरने से छठी क्लास के छात्र की:डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर ने लापारवाही मानी, प्रिंसिपल को सस्पेंड किया

बिहार के बेगूसराय में एक सरकारी स्कूल के भीतर हुई लापरवाही ने 12 साल के छात्र की जान ले ली। ये 6 मई को बिहार के अरवा गांव के जहानपुर सेकेंडरी स्कूल की घटना है। क्लासरूम में लोहे की ग्रिलों का ढेर गिरने से छठी क्लास के छात्र विवान राज उर्फ मुन्ना की मौके पर ही जान चली गई। पेन उठाने झुका तभी ग्रिल ढह गईं जानकारी के मुताबिक, लंच-ब्रेक के दौरान स्कूल के बरामदे में काफी भीड़ थी। भीड़ से बचने के लिए विवान पास के एक क्लासरूम में चला गया, जहां साइंस लैब बनाने के लिए लोहे की भारी ग्रिलें रखी गई थीं। इसी दौरान उसका पेन ग्रिलों के पास गिर गया। जैसे ही वह पेन उठाने के लिए झुका, ग्रिलों का पूरा ढेर अचानक उस पर गिर पड़ा। नुकीली ग्रिलें उसके सिर में धंस गईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद टीचर्स मौके से भागे घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। खबर फैलते ही ग्रामीणों में गुस्सा भड़क उठा। स्कूल पहुंचकर ग्रामीणों ने स्कूल का घेराव किया। हालात बिगड़ता देख कई टीचर्स मौके से भाग गए। आरोप है कि गुस्साए लोगों ने स्कूल के हेडमास्टर अमित कुमार और कंप्यूटर टीचर अवनीश कुमार को घेर लिया और उनके साथ मारपीट भी की। लोगों ने छात्र का शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया मामले की सूचना मिलते ही बछवाड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन भीड़ को काबू करने के लिए तेघड़ा और भगवानपुर थाने से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। गुस्साए लोगों ने छात्र का शव सड़क पर रखकर कई घंटों तक जाम रखा। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिजनों और ग्रामीणों को कार्रवाई और मुआवजे का भरोसा दिया, तब जाकर प्रदर्शन खत्म हुआ। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। लापरवाही के लिए स्कूल प्रिंसिपल को सस्पेंड किया जिला प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में स्कूल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। इसके बाद बेगुसराय के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर मनोज कुमार ने स्कूल प्रिंसिपल अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 स्‍टूडेंट्स का सुसाइड:कॉलेज ने एग्‍जाम तक छुट्टी घोषित की, प्रोफेसर कहते हैं-कैंपस से बाहर जाकर सुसाइड करो NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 कॉलेज स्टूडेंट्स की सुसाइड से मौत हो गई। ये नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT कुरुक्षेत्र में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक में हुई मौतों का आंकड़ा है। इन 4 स्टूडेंट्स ने या तो एकेडमिक या फिर फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी जान दी। पूरी खबर पढ़ें…

shubhendu adhikari pa chandranath murder case

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सूरत5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम में बुधवार की रात को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई। इस हत्या से ठीक दो घंटे पहले सूरत के भाजपा कार्यकर्ता और भवानीपुर के प्रभारी डॉ. प्रकाश चंद्र, चंद्रनाथ के साथ ही थे। प्रकाश चंद्र ने बताया- एक सम्मेलन के बाद हम दोनों ने साथ में चाय पी थी। इसके बाद रात करीब 10:30 बजे चंद्रनाथ ने मुझसे कहा कि मैं घर जा रहा हूं। इसके करीब आधे घंटे बाद ही हमलावरों ने कार रोककर चंद्रनाथ को गोली मार दी। हमने साथ में चाय पी थी सूरत के डॉ. प्रकाश चंद्र पिछले साढ़े चार महीनों से पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में थे। भवानीपुर विधानसभा के प्रभारी के रूप में काम करते हुए, चंद्रनाथ रथ के साथ लगातार संपर्क में थे। डॉ. प्रकाश चंद्र ने बताया कि बुधवार शाम हम सब साथ बैठे और चाय पी। वे चुनाव रणनीति पर हुई बैठक में भी मौजूद थे। बैठक समाप्त होने के बाद वे काफी शांत थे और अंत में बोले- मैं रात के खाने के लिए घर जा रहा हूं। यह कहकर वे घर के लिए रवाना हो गए थे। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है। हमलावरों ने पहले से ही रेकी की होगी और उनका पीछा किया होगा। गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं। चंद्रनाथ ही सुवेंदु की यात्राओं का अरेंजमेंट करते थे: डॉ. प्रकाश चंद्र डॉ. प्रकाश चंद्र पिछले 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं और पूरे समय चंद्रनाथ रथ के सीधे संपर्क में रहे। भवानीपुर विधानसभा के कामकाज के दौरान दोनों ने मिलकर कई जनसभाएं और रणनीतियां तैयार की थीं। प्रकाश चंद्र कहते हैं- चंद्रनाथ बहुत जिम्मेदार व्यक्ति थे। चुनाव में चंद्रनाथ नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों का कामकाज संभाल रहे थे। डॉ. प्रकाश चंद्र बताते हैं कि जब भी सुवेंदु यात्रा पर होते थे, चंद्रनाथ ही उनके सभी अरेंजमेंट करते थे। CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है। किसी भी विवाद में नहीं थे चंद्रनाथ: डॉ. प्रकाश चंद्र सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंद्रनाथ रथ कभी मंच पर नहीं आए और न ही उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में भाषण दिए। वे कार्यालय के कामकाज को संभालते थे और सुवेंदु अधिकारी के साये में रहकर प्रबंधन करते थे। वे नेताओं की तरह सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं निकले और न ही विवादों में फंसे। ऐसे सीधे-सादे और अनुशासित व्यक्ति को निशाना क्यों बनाया गया, यह एक बड़ा सवाल है। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक ईर्ष्या और सुवेंदु अधिकारी की शक्ति को कमजोर करने की साजिश हो सकती है। सूरत के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए सूरत के अन्य कार्यकर्ताओं में भी डर का माहौल है। डॉ. प्रकाश चंद्र, चंद्रनाथ रथ के बेहद करीबी थे और हत्या से कुछ घंटे पहले तक उनके साथ थे, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल डॉ. प्रकाश चंद्र बंगाल में ही हैं और उन्होंने कहा है कि वे हिम्मत न हारते हुए अपना काम जारी रखेंगे, लेकिन चंद्रनाथ जी को छोड़ना उनके लिए गहरा सदमा है। ————– चंद्रनाथ हत्याकांड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… हमलावरों ने 7 किमी तक पीछा किया:फिर गोली मारी; सुवेंदु अधिकारी बोले- मैंने ममता को हराया, इसलिए पीए की हत्या भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनके पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने ममता को हराया है। सुवेंदु ने कहा- इस हत्या को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसकी जितनी भी निंदा करें वह कम है। पूरी खबर पढ़ें… आखिरी 90 मिनट:हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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सूरत34 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम में बुधवार, 6 मई की रात को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्या से ठीक दो घंटे पहले मृतक चंद्रनाथ रथ सूरत के भाजपा कार्यकर्ता डॉ. प्रकाश चंद्र के साथ थे। प्रकाश चंद्र ने बताया कि मुझे भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसलिए सुवेंदुजी से बातचीत करने के लिए चंद्रनाथ के लगातार संपर्क में रहता था। कई रैलियां और सभाओं में भी हम साथ रहे। बुधवार की शाम एक सम्मेलन के बाद हमने साथ ही चाय पी थी। इसके बाद रात को वे यह कहकर विदा हुए कि मैं खाने के लिए घर जा रहा हूं। इसी दौरान हमलावरों ने कार रोककर उनको गोली मार दी। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है। हमलावरों ने पहले से ही रेकी की होगी और उनका पीछा किया होगा। गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं। चंद्रनाथ ही सुवेंदु की यात्राओं का अरेंजमेंट करते थे: डॉ. प्रकाश चंद्र डॉ. प्रकाश चंद्र पिछले 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं और पूरे समय चंद्रनाथ रथ के सीधे संपर्क में रहे। भवानीपुर विधानसभा के कामकाज के दौरान दोनों ने मिलकर कई जनसभाएं और रणनीतियां तैयार की थीं। प्रकाश चंद्र कहते हैं- चंद्रनाथ बहुत जिम्मेदार व्यक्ति थे। चुनाव में चंद्रनाथ नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों का कामकाज संभाल रहे थे। डॉ. प्रकाश चंद्र बताते हैं कि जब भी सुवेंदु यात्रा पर होते थे, चंद्रनाथ ही उनके सभी अरेंजमेंट करते थे। CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है। किसी भी विवाद में नहीं थे चंद्रनाथ: डॉ. प्रकाश चंद्र सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंद्रनाथ रथ कभी मंच पर नहीं आए और न ही उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में भाषण दिए। वे कार्यालय के कामकाज को संभालते थे और सुवेंदु अधिकारी के साये में रहकर प्रबंधन करते थे। वे नेताओं की तरह सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं निकले और न ही विवादों में फंसे। ऐसे सीधे-सादे और अनुशासित व्यक्ति को निशाना क्यों बनाया गया, यह एक बड़ा सवाल है। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक ईर्ष्या और सुवेंदु अधिकारी की शक्ति को कमजोर करने की साजिश हो सकती है। सूरत के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए सूरत के अन्य कार्यकर्ताओं में भी डर का माहौल है। डॉ. प्रकाश चंद्र, चंद्रनाथ रथ के बेहद करीबी थे और हत्या से कुछ घंटे पहले तक उनके साथ थे, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल डॉ. प्रकाश चंद्र बंगाल में ही हैं और उन्होंने कहा है कि वे हिम्मत न हारते हुए अपना काम जारी रखेंगे, लेकिन चंद्रनाथ जी को छोड़ना उनके लिए गहरा सदमा है। ————– चंद्रनाथ हत्याकांड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… हमलावरों ने 7 किमी तक पीछा किया:फिर गोली मारी; सुवेंदु अधिकारी बोले- मैंने ममता को हराया, इसलिए पीए की हत्या भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनके पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने ममता को हराया है। सुवेंदु ने कहा- इस हत्या को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसकी जितनी भी निंदा करें वह कम है। पूरी खबर पढ़ें… आखिरी 90 मिनट:हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

आडू की चटनी रेसिपी: चिलचिलाती गर्मी में शरीर को पकाई जाती है चटपटी आडू की चटनी, मसाले बनाएं ये अनोखी रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 2 छोटे चम्मच आतू, 2 हरी मिर्च, 5-6 पुदीने की फलियां, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, 1 छोटा सा मोटा जीरा, 1 छोटा मसाला का रस, स्वाद में काला नमक, स्वाद में साधारण नमक, थोड़ा सा गुड़ छवि: फ्रीपिक मखमली बनाने की आसान विधि: सबसे पहले आटू को अच्छी तरह धो लें और उसके छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। अब मिक्सर जार में आस्टू के टुकड़े, हरी मिर्च, पुदीना, अदरक और अन्य जीरा शामिल हैं। छवि: एआई इसके बाद इसमें नमक, काला और नींबू का रस निकाला जाता है। अगर आपको स्वाद पसंद है तो थोड़ा सा गुड़ या यहां तक ​​कि दाल भी खा सकते हैं. अब सभी बच्चों को अच्छे से पीस लें। छवि: एआई तैयार है आपका स्वादिष्ट और ठंडा देने वाली दुकान की दुकान। इसे कुछ देर से फर्म में ठंडा-ठंडा सर्व करें। यह निर्मित शरीर को वर्गीकृत रखने में मदद करता है। गर्मी में पेट को झटका और ठंडी कहानी है। छवि: एआई पाचन को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा हुआ है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है। आप इस चटनी को परांठे, समोसे, कटलेट, टिक्की या दाल-चावल के साथ खा सकते हैं. छवि: फ्रीपिक इसका खट्टा-मीठा स्वाद हर खाने वाले को बनता है। समर में कुछ नए और अजीबोगरीब रॉकेट बनाना चाहते हैं, तो स्टैटू की ये यूनिक जरूर बनाएं। इसका स्वाद एक बार चखने के बाद हर कोई आपका गौरव चाहता है। छवि: एआई

विजय के सीएम बने ज्वालामुखी प्लांट? 108 विधायक का समर्थन, राज्यपाल बोले 118 लेके विद्यार्थी, क्या कहते हैं संविधान

विजय के सीएम बने ज्वालामुखी प्लांट? 108 विधायक का समर्थन, राज्यपाल बोले 118 लेके विद्यार्थी, क्या कहते हैं संविधान

तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिलनाडु में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध गहराता जा रहा है। रेजिडेंट विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) के पास अभी सरकार बनाने के लिए बहुमत की आवश्यकता नहीं है। विजय के पास क्या विकल्प है? 234 लेकिन रथयात्रा विधानसभा में टीवीके 108 के साथ सबसे बड़ी पार्टी उभरकर सामने आ रही है, बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़ों से वह पीछे है। कांग्रेस के 5 समर्थकों की बैठक के बावजूद पार्टी को अभी और सहयोगियों की जरूरत है। इसी कारण टीवीके ने वाम आश्रम, वीसीके और आईयू प्रोटोटाइप से समर्थन मांगा है और ये दल अगले दो दिनों में अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं। वहीं वीसीके नेता थोल थिरुमावलवन ने कहा कि उनकी पार्टी वाम विचारधारा के बाद ही यह निर्णय लिया गया। टीवीके नेता सी एरियल कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एम. वीरपांडियन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पी. मुशनगम से मुलाकात कर समर्थन माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विजय से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि सत्ता में भागीदारी जरूरी है, ताकि सहयोगी दल-अपने सहयोगियों और सहयोगियों को अपने-अपने काम में लागू कर सकें। नमूना पात्र कैसे? कुमार के अनुसार, टीवीके ने वाम आश्रम, विदुथलाई चिरुथिगल काची (सीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयू प्रोटोटाइप) को ईमेल और प्रस्ताव पत्र के माध्यम से समर्थन का प्रस्ताव भेजा जाता है। वे भरोसेमंद समर्थकों की पार्टी तमिलनाडु में सरकार बनाने में सफल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके ने किसी से संपर्क नहीं किया और ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं है। वहीं कांग्रेस ने, जो 5 शेयर बाजार हैं, सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है. कुमार ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. उनका दावा है कि प्रतिष्ठा टीवी के पक्ष में है और इसी आधार पर विजय को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए। किसको पहले अवसर मिलना चाहिए? दूसरी ओर, कांग्रेस, वामपंथियों और वीसीके ने गवर्नर पर जोरदार दावा किया है कि सबसे बड़ी पार्टी की पार्टियों को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। एम के स्टालिन बने रहने की सलाह वाली टीचर्स ने भी अपने सहयोगियों से गठबंधन की अपील की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि सरकार का गठन पूरी तरह प्रक्रियात्मक तरीके से संवैधानिक तरीकों से होगा और राज्यपाल पद का फैसला उसी के आधार पर होगा। यानी, तमिल में स्थिति स्थिर बनी हुई है। अब बिजनेसमैन इस बात पर विचार कर रहे हैं कि किस विक्ट्री के लिए समर्थन प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है या राज्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण बना है। ये भी पढ़ें: गवर्नर ने TVK को बुलाया, थलपति ने किया दावा, लेफ्ट का साथ मिला, तमिलनाडु में क्या चल रहा था? मंदी की 5 बड़ी बातें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु के राज्यपाल(टी)विजय(टी)टीवीके सरकार गठन(टी)टीवीके समाचार(टी)टीवीके तमिलनाडु विवाद(टी)टीवीके सरकार गठन विवाद(टी)टीवीके तमिलनाडु सरकार गठन समाचार(टी)राजेंद्र आर्लेकर राज्यपाल विवेक(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वेक्षण(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026

द्रमुक के ‘संकल्प 3’ पर छिड़ी चर्चा: क्या वह तमिलनाडु में पुनर्मतदान से बचने के लिए विजय की टीवीके या अन्नाद्रमुक को बाहर से समर्थन देगी? | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 20:33 IST यह ‘निष्क्रिय’ समर्थन राजभवन में शक्ति परीक्षण पास करने का प्रयास करने वाले किसी भी दावेदार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में काम करेगा। इस बात पर जोर देकर कि राज्य ‘एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है’, डीएमके ने प्रभावी रूप से बाहरी व्यवस्थाओं के लिए दरवाजा खुला छोड़ दिया है जो चेन्नई में संवैधानिक शून्य को रोक देगा। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पैंतरेबाज़ी में, जो तमिलनाडु के प्रशासनिक भविष्य को नया आकार दे सकता है, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने 7 मई को अपनी विधायक दल की बैठक के बाद एक रणनीतिक मोड़ का संकेत दिया है। खंडित जनादेश का सामना करते हुए, जहां किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, डीएमके ने उच्च-स्तरीय प्रस्तावों की एक श्रृंखला पारित की जो पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन को संवैधानिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए “तत्काल निर्णय” लेने के लिए सशक्त बनाती है। जबकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई, द्रमुक की बयानबाजी एक सक्रिय दावेदार से एक रणनीतिक सुविधाकर्ता में बदलाव का सुझाव देती है। इस बात पर जोर देकर कि राज्य “एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है”, डीएमके ने प्रभावी रूप से बाहरी व्यवस्थाओं के लिए दरवाजा खुला छोड़ दिया है जो चेन्नई में संवैधानिक शून्य को रोक देगा। क्या ‘संकल्प 3’ का तात्पर्य नई सरकार के लिए बाहरी समर्थन से है? संकल्प 3 की भाषा विशेष रूप से बता रही है, क्योंकि यह एमके स्टालिन को “गंभीर और जटिल” राजनीतिक माहौल से निपटने के लिए एकतरफा अधिकार प्रदान करती है। यह कहकर कि पार्टी का प्राथमिक उद्देश्य द्रविड़ कल्याण योजनाओं की “निरंतर” निरंतरता सुनिश्चित करते हुए “एक स्थिर सरकार स्थापित करना” है, डीएमके ने संकेत दिया है कि जरूरी नहीं कि वह अगली सरकार का नेतृत्व करे। தி.மு.க. मोबाइल फोन नंबर (07-05-2026) ऋण: 1 தமிழ்நாட்டு மக்களுக்கும் தோழமை கங்களுக்கும் நன்றி நடந்து முடிந்த தமிழ்நாடு சட்டமன்றப் பொதுத் தேர்தலில் திராவிட முன்னேற்றக் கழகம் தலைமையிலான மதச்சார்பற்ற முற்போக்குக் கூட்டணிக் கட்சிகளின்… pic.twitter.com/jN5r8HuX1a – डीएमके (@arivalayam) 7 मई 2026 संसदीय व्यवहार में, ऐसा रुख अक्सर बाहरी समर्थन की औपचारिक पेशकश से पहले होता है। इससे एक अल्पमत सरकार को कैबिनेट में शामिल हुए बिना द्रमुक के साथ काम करने की अनुमति मिलेगी, जिससे द्रमुक के वैचारिक ब्रांड की रक्षा होगी और साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि इसकी ऐतिहासिक योजनाएं – जैसे मुफ्त स्कूल नाश्ता और महिलाओं की मासिक सहायता – अछूती रहेंगी। यह “निष्क्रिय” समर्थन राजभवन में शक्ति परीक्षण पास करने का प्रयास करने वाले किसी भी दावेदार के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में काम करेगा। क्या डीएमके विजय की टीवीके को समर्थन दे सकती है? इस तरह की रणनीतिक वापसी का सबसे संभावित लाभार्थी विजय और उनका तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) प्रतीत होता है। टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद, वर्तमान में कांग्रेस के नए समर्थन के बावजूद, उसके पास बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटें नहीं हैं। “सांप्रदायिक ताकतों को जगह न देने” का संकल्प लेकर द्रमुक ने संभावित साझेदारों का दायरा सीमित कर दिया है। टीवीके को बाहरी समर्थन प्रदान करने से डीएमके खुद को एक “जिम्मेदार विपक्ष” के रूप में स्थापित कर सकेगी जो सत्ता की भूखी राजनीति पर राज्य की स्थिरता को प्राथमिकता देती है। स्टालिन के लिए, यह कदम भाजपा को त्रिशंकु विधानसभा में पिछले दरवाजे से प्रभाव हासिल करने से रोकेगा, जबकि टीवीके को द्रमुक की विधायी उदारता पर निर्भर रखेगा। यह व्यवस्था नई टीवीके सरकार को प्रदर्शन करने का मौका देगी, जबकि डीएमके के पास “द्रविड़ मॉडल” से समझौता किए जाने पर प्लग खींचने की शक्ति बरकरार रहेगी। क्या एआईएडीएमके के साथ गठबंधन की संभावना है? ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, एआईएडीएमके के साथ “भव्य द्रविड़ मोर्चे” की अफवाहें टीवीके को किनारे करने के साधन के रूप में प्रसारित की गई हैं। हालाँकि, DMK के नवीनतम संकल्पों से यह अत्यधिक असंभावित हो गया है। कांग्रेस के टीवीके खेमे में चले जाने के बाद पार्टी ने अपना गुस्सा कांग्रेस पार्टी पर केंद्रित किया है और उस पर “पीठ में छुरा घोंपने” और “विश्वासघात” का आरोप लगाया है। कांग्रेस को “ईमानदारी से व्यवहार नहीं करने वाली” पार्टी करार देकर द्रमुक ने प्रभावी रूप से अपने पूर्व सहयोगी के साथ संबंधों को तोड़ दिया है। जबकि अन्नाद्रमुक प्रतिस्पर्धी बनी हुई है, द्रमुक का वर्तमान ध्यान पिछले पांच वर्षों की अपनी विरासत की रक्षा करने पर है। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन जमीनी स्तर पर वैचारिक रूप से परेशान करने वाला होगा; इस प्रकार, द्रमुक अपने पारंपरिक दुश्मन के साथ एक गड़बड़ सत्ता-साझाकरण समझौते में प्रवेश करने के बजाय विपक्ष में बैठने और गैर-सांप्रदायिक अल्पसंख्यक सरकार को सामरिक, मुद्दा-आधारित समर्थन प्रदान करने के लिए अधिक इच्छुक लगती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया द्रमुक के ‘संकल्प 3’ पर छिड़ी चर्चा: क्या वह तमिलनाडु में पुनर्मतदान से बचने के लिए विजय की टीवीके या अन्नाद्रमुक को बाहर से समर्थन देगी? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक

क्या कांग्रेस को कोई सलाह नहीं दी गई है? प्रश्न पर भड़के स्पाइ प्रमुख ने दिया ये जवाब, भारत गठबंधन को मिर्ची

क्या कांग्रेस को कोई सलाह नहीं दी गई है? प्रश्न पर भड़के स्पाइ प्रमुख ने दिया ये जवाब, भारत गठबंधन को मिर्ची

पश्चिम बंगाल क्षेत्र में प्रशांत महासागर में कांग्रेस की हार के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने 7 मई को कोलकाता में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मुलाकात कर अपनी प्रति एकजुटता से बातचीत की। इस दौरान कांग्रेस कांग्रेस को लेकर सवाल उठाया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में अखिलेश यादव के हवाले से कहा गया, ‘विपक्ष एक साथ नहीं हो सका। कांग्रेस के साथ नहीं आ पाई. कांग्रेस को कोई सलाह देनी होगी?’ इस पर अखिलेश यादव ने कहा, ‘मुझे यहां कोई सलाह नहीं दी गई है. आदर्श मित्र को अपमान. उनके सिद्धांत को वोट नहीं दिया गया.’ भारत गठबंधन को मजबूत गठबंधन ममता बनर्जी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव महासभा ने ममता के काली घाट स्थित आवास पर नेपोलियन का स्वागत किया। इस मीटिंग में शामिल लोगों को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद पार्टी दल अपनी-अपनी सीटों पर फिर से विचार कर रहे हैं। ममता ने पश्चिम बंगाल में इलेक्ट्रोनिक कांग्रेस की हार के बाद संकल्प इंडिया एलायंस को मजबूत करने का निर्णय लिया है। #घड़ी | कोलकाता, पश्चिम बंगाल: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है, “…जिस तरह से उन्होंने लोकतंत्र और दीदी (ममता बनर्जी) का अपमान किया, जिसके कारण उनके मतदाताओं को वोट नहीं देने दिया गया। यह जिम्मेदारी केंद्रीय बलों की है। क्या आप ऐसे में चुनाव कराएंगे… pic.twitter.com/2Zb7qBwtQj – एएनआई (@ANI) 7 मई 2026 बंगाल में बीजेपी ने दो तिहाई बहुमत हासिल किया पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की गई और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना समर्थन जताया। बीजेपी ने 294 पश्चिम बंगाल विधानसभा की 207 सीटों पर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में 15 साल के लिए कैथोलिक कांग्रेस का शासन समाप्त हो गया। पारंपरिक कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मोहम 80 सीट से संतोष करना पेज। हार के बाद ममता को इन नेताओं ने किया फोन बंगाल में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि अब वह नेशनल लेवल पर एसोसिएशन एलायंस को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘इंडिया अलायंस के नेताओं ने मुझे एकजुटता संवाद की तरह फोन किया।’ सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मेरी बात कही है।’ उन्हें बताया गया कि उन्हें अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के नेता, समाजवादी यादव और स्टालिन सोरेन ने भी फोन किया था। ममता बनर्जी की कांग्रेस और प्रमुख भूमिका थोड़ी विरोधाभासी है, क्योंकि उनकी पार्टी पहले कांग्रेस और उनके नेता, विशेष रूप से राहुल गांधी, की आलोचना पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों में दोनों के बीच प्रमुखता भी रही है। उन्होंने कहा, ‘जब तक मैं कुर्सी पर था, मैंने बहुत कुछ सहा। अब मैं एक आजाद पंछी हूं, एक आम इंसान हूं। मैं संघर्ष करने वाली हूं। ‘मैं पोर्टफोलियों पर रहम की मिसालें और सभी विद्रोहियों के खिलाफ़ गोलियाँ।’ ये भी पढ़ें: बंगाल और असम में ऐतिहासिक जीत में अनोखा ट्रेंड, एससी-एसटी आरक्षण पार्टी का शानदार प्रदर्शन (टैग्सटूट्रांसलेट)अखिलेश यादव(टी)पश्चिम बंगाल(टी)कांग्रेस(टी)अखिलेश यादव बीजेपी पर(टी)अखिलेश यादव की ममता बनर्जी से मुलाकात(टी)खिलेश यादव की मुलाकात ममता बनर्जी से कोलकाता(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत(टी)बंगाल विधानसभा में टीएमसी की हार(टी)अभिषेक बनर्जी अखिलेश यादव मीटिंग(टी)बीजेपी(टी)इंडिया ब्लॉक फ्यूचर के खिलाफ विपक्ष की एकता,ममता बनर्जी(टी)समाजवादी पार्टी टीएमसी गठबंधन समाचार(टी)ममता बनर्जी आवास बैठक विवरण(टी)ममता की हार पर अखिलेश यादव का बयान(टी)इंडिया न्यूज हिंदी में(टी)नवीनतम भारत समाचार अपडेट(टी)अखिलेश यादव मैटा की हार(टी)बंगाल चुनाव परिणाम जीत(टी)अखिलेश यादव कोलकाता टूर(टी)विपक्षी एकता इंडिया अलायंस(टी)अभिषेक बनर्जी अलोकतांत्रिक यादव(टी)ममता बनर्जी हार के बाद बयान(टी)समाजवादी पार्टी लोकतांत्रिक गठबंधन

Indian Railways 40-Year Old Reservation System Upgrade From August; AI to Confirm Waiting Tickets

Indian Railways 40-Year Old Reservation System Upgrade From August; AI to Confirm Waiting Tickets

Hindi News Business Indian Railways 40 Year Old Reservation System Upgrade From August; AI To Confirm Waiting Tickets नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय रेलवे अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को पूरी तरह बदलने जा रहा है। नया सिस्टम AI की मदद से बताएगा कि वेटिंग टिकट कंफर्म होगा या नहीं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को रेल भवन में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और अगस्त से ट्रेनों को नए अपग्रेड सिस्टम पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए। रेलवे का वर्तमान रिजर्वेशन सिस्टम साल 1986 में शुरू हुआ था। पिछले 40 सालों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब इसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से पूरी तरह ओवरहॉल (नया) किया गया है, ताकि इसकी क्षमता बढ़ाई जा सके। रेल भवन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की रेलवे के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। सवाल-जवाब में जानिए नए सिस्टम और रेलवन एप से क्या फायदे होंगे: सवाल 1: रेलवे अपने रिजर्वेशन सिस्टम में क्या बदलने जा रहा है? जवाब: रेलवे अपने लगभग 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है। अगस्त से ट्रेनों को पुराने सिस्टम से नए और एडवांस सिस्टम पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका मकसद बुकिंग क्षमता को बढ़ाना और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है। सवाल 2: रेल मंत्री ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए हैं? जवाब: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा है कि सिस्टम को पुराने से नए पर शिफ्ट करते समय यात्रियों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। इस रिव्यू मीटिंग में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू भी मौजूद थे। मंत्री ने इस शिफ्टिंग को स्मूथ और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। सवाल 3: वर्तमान रिजर्वेशन सिस्टम कितना पुराना है, इसमें अब तक क्या बदला? जवाब: मौजूदा सिस्टम की शुरुआत 1986 में हुई थी। 40 साल में इसमें समय-समय पर छोटे बदलाव किए गए, लेकिन इस बार इसे पूरी तरह से बदला गया है, ताकि बढ़ती मांग को संभाला जा सके। सवाल 4: देश में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का चलन कितना बढ़ा है? जवाब: रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, आज देश में कुल टिकटिंग डिमांड का लगभग 88% हिस्सा ऑनलाइन चैनलों के जरिए पूरा होता है। साल 2002 में इंटरनेट टिकटिंग की शुरुआत एक बड़ा माइलस्टोन थी, जिसके बाद अब ज्यादातर लोग काउंटर के बजाय मोबाइल से टिकट बुक करना पसंद करते हैं। सवाल 5: रेलवन (RailOne) एप क्या है और यह कितना लोकप्रिय हो रहा है? जवाब: यह रेलवे का नया मोबाइल एप है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। एक साल से भी कम समय में इसे 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। अकेले गूगल प्ले स्टोर से इसे 3.16 करोड़ और एप्पल के iOS से 33.17 लाख बार डाउनलोड किया गया है। सवाल 6: नए एप में वेटिंग लिस्ट प्रेडिक्शन की सटीकता कितनी है? जवाब: यह इस एप का सबसे खास फीचर है। पहले वेटिंग टिकट कंफर्म होने की संभावना बताने की सटीकता केवल 53% थी, जो अब AI-आधारित प्रेडिक्शन की मदद से बढ़कर 94% हो गई है। यानी अब यात्री को टिकट बुक करते समय ही लगभग सटीक पता चल जाएगा कि उसकी सीट कंफर्म होगी या नहीं। सवाल 7: रेलवन एप पर रोजाना कितने टिकट बुक किए जा रहे हैं? जवाब: इस एप के जरिए रोजाना देश भर में 9.29 लाख टिकट बुक होते हैं। इनमें 7.2 लाख अनरिजर्व्ड (जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट) और 2.09 लाख रिजर्व्ड टिकट शामिल हैं। सवाल 8: क्या इस एप से यात्रा के दौरान अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं? जवाब: हां, रेलवन एप एक ‘ऑल-इन-वन’ प्लेटफॉर्म है। इसमें टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन और रिफंड के साथ-साथ लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजीशन और ‘रेल मदद’ जैसी सेवाएं शामिल हैं। यात्री यात्रा के दौरान इसी एप से खाना भी ऑर्डर कर सकते हैं, जो सीधे उनकी सीट पर पहुंचता है। सवाल 9: रेल टिकट पर सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? जवाब: भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए बड़ा वित्तीय बोझ उठा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने पैसेंजर टिकटों पर कुल 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी है। सवाल 10: आम आदमी के लिए इस सब्सिडी का क्या मतलब है? जवाब: इसे आसान भाषा में समझें तो हर यात्री को किराए पर औसतन 43% का डिस्काउंट मिल रहा है। अगर रेलवे को एक यात्री को सेवा देने में 100 रुपए का खर्च आता है, तो वह बदले में यात्री से केवल 57 रुपए ही वसूलता है। ————- ये खबर भी पढ़ें… रेलवन एप से जनरल टिकट पर आज से 3% डिस्काउंट: नई स्कीम 6 महीने के लिए लागू; R-वॉलेट से पेमेंट करने पर 6% की छूट रेलवन (RailOne) एप के जरिए अनरिजर्व्ड (जनरल) टिकट बुक करके UPI, क्रेडिट, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करने पर आज से 3% डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा रेलवन एप से टिकट बुक करके अगर पमेंट R-वॉलेट से किया तो दुगना फायदा मिलेगा। क्योंकि इससे जनरल टिकट बुक करने पर 3% छूट पहले से दी जा रही थी। इसे आज से बढ़ाकर 6% कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Indian Railways 40-Year Old Reservation System Upgrade From August; AI to Confirm Waiting Tickets

Indian Railways 40-Year Old Reservation System Upgrade From August; AI to Confirm Waiting Tickets

Hindi News Business Indian Railways 40 Year Old Reservation System Upgrade From August; AI To Confirm Waiting Tickets नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय रेलवे अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को पूरी तरह बदलने जा रहा है। नया सिस्टम AI की मदद से बताएगा कि वेटिंग टिकट कंफर्म होगा या नहीं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक की और अगस्त से ट्रेनों को नए अपग्रेड सिस्टम पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए। वर्तमान रिजर्वेशन सिस्टम साल 1986 में शुरू हुआ था। पिछले 40 सालों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब इसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से पूरी तरह नया किया गया है, ताकि इसकी क्षमता बढ़ाई जा सके। रेल भवन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की रेलवे के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। सवाल-जवाब में जानिए नए सिस्टम और रेलवन एप से क्या फायदे होंगे: सवाल 1: रेलवे अपने रिजर्वेशन सिस्टम में क्या बदलने जा रहा है? जवाब: रेलवे 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। अगस्त से ट्रेनों को पुराने सिस्टम से नए और एडवांस सिस्टम पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका मकसद बुकिंग क्षमता को बढ़ाना और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है। सवाल 2: रेल मंत्री ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए हैं? जवाब: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सिस्टम अपग्रेड करते समय यात्रियों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। वैष्णव ने शिफ्टिंग को स्मूथ और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सवाल 3: देश में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का चलन कितना बढ़ा है? जवाब: रेलवे के मुताबिक, आज देश में कुल टिकटिंग डिमांड का लगभग 88% हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पूरा होता है। 2002 में इंटरनेट टिकटिंग की शुरुआत एक बड़ा माइलस्टोन थी, जिसके बाद अब ज्यादातर लोग काउंटर के बजाय मोबाइल से टिकट बुक करना पसंद करते हैं। सवाल 4: रेल वन (RailOne) एप क्या है और यह कितना लोकप्रिय हो रहा है? जवाब: रेलवे का नया मोबाइल एप है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। एक साल से भी कम समय में इसे 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। गूगल प्ले स्टोर से इसे 3.16 करोड़ और एप्पल के iOS से 33.17 लाख बार डाउनलोड किया गया है। सवाल 5: नए एप में वेटिंग लिस्ट प्रिडिक्शन की सटीकता कितनी है? जवाब: पहले वेटिंग टिकट कंफर्म होने की संभावना बताने की सटीकता केवल 53% थी, जो अब AI-आधारित प्रिडिक्शन की मदद से बढ़कर 94% हो गई है। अब यात्री को टिकट बुक करते समय ही पता चल जाएगा कि उसकी सीट कंफर्म होगी या नहीं। सवाल 6: रेल वन एप पर रोजाना कितने टिकट बुक किए जा रहे हैं? जवाब: इस एप के जरिए रोजाना देश भर में 9.29 लाख टिकट बुक होते हैं। इनमें 7.2 लाख अनरिजर्व्ड (जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट) और 2.09 लाख रिजर्व्ड टिकट शामिल हैं। सवाल 7: क्या इस एप से यात्रा के दौरान अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं? जवाब: हां, रेलवन एप एक ‘ऑल-इन-वन’ प्लेटफॉर्म है। इसमें टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन और रिफंड के साथ-साथ लाइव ट्रेन स्टेटस, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजीशन और ‘रेल मदद’ जैसी सेवाएं शामिल हैं। यात्री इसी एप से खाना भी ऑर्डर कर सकते हैं, जो सीधे उनकी सीट पर पहुंचता है। सवाल 8: रेल टिकट पर सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? जवाब: भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2024-25 में पैसेंजर टिकटों पर कुल 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी है। सवाल 9: आम आदमी के लिए इस सब्सिडी का क्या मतलब है? जवाब: इसे आसान भाषा में समझें तो हर यात्री को किराए पर औसतन 43% का डिस्काउंट मिल रहा है। अगर रेलवे को एक यात्री को सेवा देने में 100 रुपए का खर्च आता है, तो वह बदले में यात्री से केवल 57 रुपए ही वसूलता है। ————- ये खबर भी पढ़ें… रेलवन एप से जनरल टिकट पर आज से 3% डिस्काउंट: नई स्कीम 6 महीने के लिए लागू; R-वॉलेट से पेमेंट करने पर 6% की छूट रेलवन (RailOne) एप के जरिए अनरिजर्व्ड (जनरल) टिकट बुक करके UPI, क्रेडिट, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करने पर आज से 3% डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा रेलवन एप से टिकट बुक करके अगर पमेंट R-वॉलेट से किया तो दुगना फायदा मिलेगा। क्योंकि इससे जनरल टिकट बुक करने पर 3% छूट पहले से दी जा रही थी। इसे आज से बढ़ाकर 6% कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…