बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
breaking news live updates headlines 7 May 2026

23 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की फर्जी मुठभेड़ में हुई हत्याओं के मामले में 21 पुलिसकर्मियों सहित सभी 22 आरोपियों की बरी होने को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने बरी करने के फैसले को बरकरार रखा और शेख के भाइयों रुबाबुद्दीन और नायबुद्दीन द्वारा दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। आज की अन्य बड़ी खबरें… केरल के इडुक्की में पन्नियार नदी के किनारे मेगा डिमॉलिशन शुरू केरल के इडुक्की में पन्नियार नदी के किनारे 88 इमारतों को गिराने की कार्रवाई शुरू हो गई है। केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मेगा डिमॉलिशन किया जा रहा है। संथनपारा पुलिस थाना क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और इलाके में तैनात लगभग 200 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में विध्वंस अभियान चलाया जा रहा है। नदी किनारे सरकारी जमीन पर निर्मित इमारतों को हटाने को लेकर दो साल से हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। पिछले महीने कोर्ट के फैसले के बाद अब यह कार्रवाई की जा रही है। 4 साल के सौतेले बेटे की हत्या केस में आरोपी बरी:ठाणे कोर्ट ने कहा- सबूतों की कमी महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने चार साल के सौतेले बेटे की हत्या के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सबूतों की पूरी कड़ी स्थापित नहीं कर पाया और संदेह से परे अपराध साबित नहीं हुआ। सेशन जज एस बी अग्रवाल ने मंगलवार को दिए आदेश में अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में विरोधाभासों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि मामले में पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद इमरान (25) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। वह 30 जुलाई 2024 से जेल में बंद था। अदालत ने कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत छोड़ा जाए। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने 28 जुलाई 2024 को ठाणे के मानपाड़ा इलाके में घोड़बंदर रोड स्थित फ्लैट में पत्नी के पहले रिश्ते से हुए बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी थी। बताया गया था कि बच्चे की पहचान को लेकर विवाद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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38 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की फर्जी मुठभेड़ में हुई हत्याओं के मामले में 21 पुलिसकर्मियों सहित सभी 22 आरोपियों की बरी होने को चुनौती देने वाली अपीलों को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने बरी करने के फैसले को बरकरार रखा और शेख के भाइयों रुबाबुद्दीन और नायबुद्दीन द्वारा दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। आज की अन्य बड़ी खबरें… केरल के इडुक्की में पन्नियार नदी के किनारे मेगा डिमॉलिशन शुरू केरल के इडुक्की में पन्नियार नदी के किनारे 88 इमारतों को गिराने की कार्रवाई शुरू हो गई है। केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मेगा डिमॉलिशन किया जा रहा है। संथनपारा पुलिस थाना क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और इलाके में तैनात लगभग 200 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में विध्वंस अभियान चलाया जा रहा है। नदी किनारे सरकारी जमीन पर निर्मित इमारतों को हटाने को लेकर दो साल से हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। पिछले महीने कोर्ट के फैसले के बाद अब यह कार्रवाई की जा रही है। 4 साल के सौतेले बेटे की हत्या केस में आरोपी बरी:ठाणे कोर्ट ने कहा- सबूतों की कमी महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने चार साल के सौतेले बेटे की हत्या के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सबूतों की पूरी कड़ी स्थापित नहीं कर पाया और संदेह से परे अपराध साबित नहीं हुआ। सेशन जज एस बी अग्रवाल ने मंगलवार को दिए आदेश में अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में विरोधाभासों का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि मामले में पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने आरोपी मोहम्मद दिलशाद मोहम्मद इमरान (25) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। वह 30 जुलाई 2024 से जेल में बंद था। अदालत ने कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत छोड़ा जाए। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने 28 जुलाई 2024 को ठाणे के मानपाड़ा इलाके में घोड़बंदर रोड स्थित फ्लैट में पत्नी के पहले रिश्ते से हुए बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी थी। बताया गया था कि बच्चे की पहचान को लेकर विवाद हुआ था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
33% more expensive, yet advance bookings are available

Hindi News Business Indian Mango Craze: 33% More Expensive, Yet Advance Bookings Are Available न्यूयॉर्क8 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में भारतीय आमों के प्रति दीवानगी देखी जा रही है। लोग आमों की खेप वाली फ्लाइट्स को ट्रैक कर रहे हैं। अप्रैल में पहली खेप आने से पहले ही सारे प्री-ऑर्डर बिक गए। लोग 10-12 आमों के एक बॉक्स के लिए 5,600 रुपए तक खर्च करने को तैयार हैं। यही बॉक्स पिछले साल करीब 3700- 4200 रु. में मिल जा रहे थे। 33% तक आम महंगे हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ईरान युद्ध के बाद तेल के दाम बढ़ना, शिपमेंट महंगा होना है। एक साल में भारतीय आम के दाम 4,200 से 5,600 रु. प्रति बॉक्स हुए फ्लाइट्स कम होने से कुछ शिपमेंट लेट या कैंसिल भी हुए, जिससे खर्च और बढ़ा। अमेरिका के ग्रोसरी स्टोर में सालभर मिलने वाले मेक्सिकन आम जहां करीब 945 में मिल जाते हैं, वहीं भारतीय आमों को लोग स्वाद में अलग और ज्यादा मीठा मानते हैं। महाराष्ट्र का अल्फांसो, गुजरात का केसर, उत्तर भारत का चौसा और लंगड़ा, दक्षिण भारत का बंगनपल्ली वहां सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। दशकों तक लगा रहा बैन, 2007 में हटा प्रतिबंध, तब अमेरिका पहुंचा भारतीय स्वाद दुनिया की आधी मैंगो सप्लाई भारत करता है, फिर भी दशकों तक यह अमेरिका में बैन रहा। इसका कारण ‘हॉट-वॉटर ट्रीटमेंट’ (गर्म पानी से कीड़े मारना) था, जिससे भारतीय आम खराब हो जाते थे। साथ ही दक्षिण अमेरिकी लॉबी का भी दबाव था। बाद में ‘गामा रेडिएशन’ (किरणों के जरिए कीटाणु मुक्त करना) तकनीक समाधान बनी। साल 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पीएम मनमोहन सिंह के बीच समझौते के बाद, 2007 में भारतीय आम आधिकारिक तौर पर अमेरिका पहुंचे। अमेरिकी ग्राहक वफादार, मैंगो पास भी बिक रहा भारतीय आमों के सबसे वफादार ग्राहक अब खुद अमेरिकी नागरिक बन रहे हैं, जबकि भारतीय प्रवासी अक्सर इसकी कीमतों पर नाराजगी जताते हैं। भारी मांग को देखते हुए ‘जीजी मैंगो’ जैसी कंपनियां 1000 डॉलर (करीब 94 हजार रुपए) में पूरे सीजन का ‘मैंगो पास’ ऑफर कर रही हैं। अब वॉलमार्ट और कोस्टको जैसे बड़े रिटेलर्स के जरिए भी इसे बेचने की तैयारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है अल्बर्टा:अक्टूबर में वोटिंग संभव, अलगाववादियों ने 3 लाख हस्ताक्षर जुटाए

कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा को अलग देश बनने की मांग और ज्यादा तेज हो गई है। अलगाववादियों ने बुधवार को दावा किया है कि उन्होंने इतना समर्थन जुटा लिया है कि अब स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराया जा सकता है। अलगाववादी नेताओं के मुताबिक, उन्होंने करीब 3 लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि इसके लिए 1.78 लाख दस्तखत की जरूरत थी। आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि अब यह लड़ाई अगले चरण में पहुंच गई है। हालांकि इतना समर्थन जुटा लेने का मतलब यह नहीं है कि रेफरेंडम पक्का हो गया है। चुनाव आयोग को पहले इन हस्ताक्षरों की जांच करनी होगी। इस प्रक्रिया पर फिलहाल अदालत के आदेश की वजह से रोक भी लगी हुई है। अगर वोटिंग अलबर्टा के पक्ष में गई तो यह प्रांत कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है। अल जजीरा के मुताबिक, अगर सभी कानूनी अड़चनें दूर हो जाती हैं, तो प्रांत में 19 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े जनमत संग्रह के साथ अलगाव पर भी वोटिंग कराई जा सकती है। उसी दिन संविधान और इमिग्रेशन जैसे दूसरे मुद्दों पर भी मतदान की योजना है। सर्वे में 30% लोग ही अलग देश के पक्ष में अगर यह प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचता है, तो लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए। लेकिन सर्वे बताते हैं कि अभी सिर्फ करीब 30 प्रतिशत लोग ही इसके समर्थन में हैं, यानी जनमत संग्रह पास होना भी आसान नहीं है। हालांकि अलगाववादियों का मानना है कि यह आंकड़ा वोटिंग के दौरान बढ़ने वाला है। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि अगर जरूरी हस्ताक्षर पूरे होते हैं तो वह वोटिंग आगे बढ़ाएंगी, लेकिन वह खुद कनाडा से अलग होने के पक्ष में नहीं हैं। इस अलगाववादी आंदोलन की जड़ें काफी पुरानी हैं। अल्बर्टा, जहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, लंबे समय से खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानता है। यहां के लोग मानते हैं कि उनकी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीति अलग है, लेकिन फैसले ओटावा में बैठकर लिए जाते हैं। कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है अल्बर्टा कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग अचानक नहीं उठी है। इसके पीछे कई सालों से चल रही नाराजगी और अलग पहचान की भावना काम कर रही है। सबसे बड़ा कारण आर्थिक है। अल्बर्टा तेल और गैस से भरपूर राज्य है। यहां कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है। यहां के लोगों को लगता है कि वे ज्यादा कमाते हैं, लेकिन फायदा बाकी कनाडा को ज्यादा मिलता है। उन्हें शिकायत है कि टैक्स का पैसा ओटावा जाकर खर्च होता है, जबकि फैसले लेते समय उनकी आवाज कम सुनी जाती है। दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार से टकराव है। ओटावा में बैठी सरकार के फैसलों को लेकर अल्बर्टा में नाराजगी रहती है। खासकर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े नियमों को लेकर। यहां के लोग मानते हैं कि ये नियम उनके तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं और बिना समझे बनाए जाते हैं। तीसरा कारण पहचान और राजनीति है। अल्बर्टा को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग माना जाता है। यहां की राजनीति ज्यादा कंजर्वेटिव (रूढ़िवादी) है, जबकि केंद्र में लंबे समय से लिबरल विचारधारा हावी रही है। इसके अलावा यहां यह भी भावना है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण रखती है। पाइपलाइन, ऊर्जा परियोजनाएं और निर्यात जैसे मुद्दों पर कई बार फैसले अटकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता है। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप इसी बीच ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। इन खबरों से कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी नाराज हो गए थे। उन्होंने इसी साल फरवरी में राष्ट्रपति ट्रम्प को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा था। कार्नी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी सरकार कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी हाल में कहा था कि अल्बर्टा अमेरिका का नेचुरल पार्टनर है और वहां के लोग बहुत स्वतंत्र सोच वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अल्बर्टा के पास प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है और अमेरिका एक स्वतंत्र अल्बर्टा के साथ काम कर सकता है। क्यूबेक ने दो बार कनाडा से अलग होने की कोशिश की कनाडा में क्यूबेक का अलगाववाद अल्बर्टा से ज्यादा पुराना है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा मुद्दा है। क्यूबेक की सबसे बड़ी खासियत उसकी फ्रेंच भाषा और अलग संस्कृति है। यहां के लोग खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानते हैं। उनका मानना रहा है कि उनकी भाषा और पहचान को बचाने के लिए ज्यादा स्वायत्तता या अलग देश बनना जरूरी है। यही वजह है कि क्यूबेक में दो बार जनमत संग्रह भी हो चुका है। पहला 1980 में हुआ, जिसमें लोगों ने अलग होने के खिलाफ वोट दिया। दूसरा 1995 में हुआ और वह बहुत ही करीबी मुकाबला था। उस समय करीब 50.6 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ रहने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 49.4 प्रतिशत लोग अलग होना चाहते थे। यानी क्यूबेक लगभग अलग होने ही वाला था। कनाडा में अलग होना मुश्किल हुआ इस नतीजे के बाद कनाडा सरकार ने साफ कर दिया कि अब अलग होने की राह आसान नहीं रहने वाली। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। कहा गया कि कोई भी प्रांत अपने दम पर देश से अलग नहीं हो सकता। इसके लिए साफ सवाल
सिंगर ने उठाया थलापति विजय की पार्टी पर सवाल:कार्यकर्ता की सेक्शुअल हैरेसमेंट मामले में गिरफ्तारी हुई, चिनमई श्रिपदा बोलीं- सब एक जैसे हैं

थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिल वेट्री कड़गम) ने तमिलनाडु चुनाव में 108 सीट जीती हैं। चुनाव के नतीजे सामने आने के ठीक बाद उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की एक नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। खबर सामने आने के बाद साउथ की पॉपुलर सिंगर चिनमई श्रीपदा ने विजय की पार्टी पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की है। चिनमई श्रीपदा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर रिएक्ट कर लिखा है, ‘जो आदमी यौन अपराध करते हैं, वे अक्सर वहां पहुंचने की कोशिश करते हैं जहां उन्हें ताकत और बच निकलने का मौका दिखाई देता है। TVK (तमिल वेट्री कड़गम) में एक ऐसे व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का आरोप है। पार्टी को पहले उसका सही बैकग्राउंड चेक करना चाहिए था।’ आगे चिनमई श्रीपदा ने लिखा, ‘अगर बदलाव का वादा करने वाले लोग भी ऐसी गलतियां करें, तो फिर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उम्मीद कम हो जाती है। बार-बार यह कहना अच्छा नहीं लगता कि “सब एक जैसे हैं”, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर देती हैं।’ क्यों विवादों में आई विजय की पार्टी एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। उन पर 10 साल की बच्ची का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी की पहचान दिनेश उर्फ पांबू दिनेश के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पीड़िता के परिवार ने इसी हफ्ते शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। चुनाव में एकतरफा जीते, बहुमत मिली तो सीएम बनेंगे विजय विजय ने 2 साल पहले तमिल वेट्री कड़गम पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु चुनाव में सभी 234 सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें से पार्टी 108 सीटों पर विजयी रही। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरुरत है। विजय ने खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर विजय की पार्टी को बहुमत मिलती है, तो वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बता दें कि विजय इन दिनों चुनाव जीतने के अलावा तृषा कृष्णन से नाम जुड़ने से भी चर्चा में हैं। तमिलनाडु चुनाव के नतीजे तृषा कृष्णन के जन्मदिन यानी 4 मई को आए थे। इसी दिन तृषा ने पहले तिरुपति मंदिर में दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंची थीं।
सिंगर ने उठाया थलापति विजय की पार्टी पर सवाल:कार्यकर्ता की सेक्शुअल हैरेसमेंट मामले में गिरफ्तारी हुई, चिनमई श्रिपदा बोलीं- सब एक जैसे हैं

थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिल वेट्री कड़गम) ने तमिलनाडु चुनाव में 108 सीट जीती हैं। चुनाव के नतीजे सामने आने के ठीक बाद उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की एक नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। खबर सामने आने के बाद साउथ की पॉपुलर सिंगर चिनमई श्रीपदा ने विजय की पार्टी पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की है। चिनमई श्रीपदा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर रिएक्ट कर लिखा है, ‘जो आदमी यौन अपराध करते हैं, वे अक्सर वहां पहुंचने की कोशिश करते हैं जहां उन्हें ताकत और बच निकलने का मौका दिखाई देता है। TVK (तमिल वेट्री कड़गम) में एक ऐसे व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का आरोप है। पार्टी को पहले उसका सही बैकग्राउंड चेक करना चाहिए था।’ आगे चिनमई श्रीपदा ने लिखा, ‘अगर बदलाव का वादा करने वाले लोग भी ऐसी गलतियां करें, तो फिर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उम्मीद कम हो जाती है। बार-बार यह कहना अच्छा नहीं लगता कि “सब एक जैसे हैं”, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर देती हैं।’ क्यों विवादों में आई विजय की पार्टी एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। उन पर 10 साल की बच्ची का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी की पहचान दिनेश उर्फ पांबू दिनेश के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पीड़िता के परिवार ने इसी हफ्ते शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। चुनाव में एकतरफा जीते, बहुमत मिली तो सीएम बनेंगे विजय विजय ने 2 साल पहले तमिल वेट्री कड़गम पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु चुनाव में सभी 234 सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें से पार्टी 108 सीटों पर विजयी रही। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरुरत है। विजय ने खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर विजय की पार्टी को बहुमत मिलती है, तो वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बता दें कि विजय इन दिनों चुनाव जीतने के अलावा तृषा कृष्णन से नाम जुड़ने से भी चर्चा में हैं। तमिलनाडु चुनाव के नतीजे तृषा कृष्णन के जन्मदिन यानी 4 मई को आए थे। इसी दिन तृषा ने पहले तिरुपति मंदिर में दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंची थीं।
टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले आधिकारिक काफिले को लेने से इनकार कर दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 11:04 IST टीवीके द्वारा विधानसभा चुनाव में 108 सीटें हासिल करने के बाद 4 मई को विजय को सौंपे गए चार काफिले वाहनों को उनके अनुरोध के बाद उनके आवास से वापस भेज दिया गया था। टीवीके प्रमुख विजय. तमिलनाडु चुनाव: पार्टी ने गुरुवार को कहा कि तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय ने प्रोटोकॉल के अनुसार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को उनके शपथ ग्रहण तक प्रदान किए गए पुलिस काफिले के वाहनों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। टीवीके के अनुसार, विजय ने व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि उन्हें सौंपे गए काफिले के वाहनों को वापस कर दिया जाए, उन्होंने कहा कि वह औपचारिक रूप से “निर्णायक जनादेश” के साथ सरकार बनाने के बाद ही आधिकारिक मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा स्वीकार करेंगे। लाइव अपडेट्स का पालन करें टीवीके द्वारा विधानसभा चुनाव में 108 सीटें हासिल करने के बाद 4 मई को विजय को सौंपे गए चार काफिले वाहनों को उनके अनुरोध के बाद उनके आवास से वापस भेज दिया गया था। इसके अतिरिक्त, एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद “प्रोटोकॉल के अनुसार” सीएम काफिले के वाहन उन्हें वापस कर दिए गए थे और वापस नहीं लिए गए हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 6 मई को भी, जब विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की थी, तब पुलिस ने उनके पनियूर आवास के पास और यहां लोक भवन के सामने सुरक्षा तैनात की थी। विजय ने राज्यपाल से मिलने के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया. तमिलनाडु में क्या हो रहा है? इस बीच, टीवीके प्रमुख ने सरकार बनाने के पार्टी के अनुरोध पर पुनर्विचार करने के लिए गुरुवार को फिर से राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की। राज्यपाल से सरकार बनाने के उनके अनुरोध पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए टीवीके ने कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी द्वारा बहुमत के बिना सरकार बनाने का दावा पेश करने की एक मिसाल रही है। इससे पहले बुधवार को उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालाँकि, अर्लेकर अभी भी आश्वस्त नहीं हैं कि टीवीके के पास आवश्यक संख्याएँ हैं। लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने अभिनेता से नेता बने अभिनेता की पार्टी की ताकत पर स्पष्टता मांगी थी, जिसने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने का दावा किया है। टीवीके के पास वर्तमान में 108 विधायक हैं, साथ ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन भी है। इसके साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, संख्या बढ़कर 112 हो गई। हालाँकि, यह अभी भी 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 118 से कम है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले टीवीके प्रमुख विजय ने आधिकारिक काफिले को मना कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके विजय(टी)तमिलनाडु के मुख्यमंत्री(टी)सरकार गठन तमिलनाडु(टी)एकल सबसे बड़ी पार्टी(टी)गवर्नर राजेंद्र आर्लेकर(टी)विधानसभा चुनाव परिणाम
Skyroot Aerospace Funding Boosts Valuation; Vikram-1 Rocket Launch Gears Up

Hindi News Business Skyroot Aerospace Funding Boosts Valuation; Vikram 1 Rocket Launch Gears Up हैदराबाद11 मिनट पहले कॉपी लिंक हैदराबाद बेस्ड स्काईरूट एयरोस्पेस ने 60 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹500 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। इस निवेश के बाद कंपनी की वैल्यूएशन 1.1 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹10 हजार करोड़ पहुंच गई है। यह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने वाला देश का पहला स्पेस स्टार्टअप है। मैन्युफैक्चरिंग और विक्रम-2 रॉकेट का डेवलपमेंट तेज होगा CEO पवन कुमार चंदाना ने बताया कि फंडिंग का इस्तेमाल तीन कामों के लिए होगा। पहला, विक्रम-1 के नियमित लॉन्च की व्यवस्था करना। यानी हर कुछ महीनों में एक रॉकेट लॉन्च हो सके, ग्राहकों के सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़कर कंपनी का रेवेन्यू फ्लो शुरू हो। दूसरा, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना ताकि एक साथ कई रॉकेट बना सके। बड़े पैमाने पर उत्पादन से रॉकेट की लागत कम होगी और स्काईरूट दूसरी कंपनियों को टक्कर दे पाएगी। तीसरा, विक्रम-2 रॉकेट विकसित करना। ये यह रॉकेट अंतरिक्ष में 1,000 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम होगा। इसमें एडवांस क्रायोजेनिक स्टेज का इस्तेमाल किया जाएगा। श्रीहरिकोटा भेजे गए विक्रम-1 के जरूरी हिस्से, जल्द होगी लॉन्चिंग यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब कंपनी अपने पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ की पहली उड़ान की तैयारी कर रही है। स्काईरूट ने हाल ही में हैदराबाद स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी से रॉकेट के महत्वपूर्ण हिस्सों को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा भेज दिया है। कंपनी अगले कुछ हफ्तों में इसकी लॉन्चिंग की योजना बना रही है। स्टार्टअप का दावा है कि सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा में भेजने के लिए उनकी सेवाएं दुनिया में सबसे सस्ती होंगी। गूगल के शुरुआती निवेशक राम श्रीराम बोर्ड में शामिल होंगे इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर शेरपालो वेंचर्स और GIC ने किया है। इसमें ग्रीनको ग्रुप के फाउंडर्स और अर्काम वेंचर्स जैसे मौजूदा निवेशकों ने भी हिस्सा लिया। गूगल के शुरुआती निवेशक राम श्रीराम अब स्काईरूट के बोर्ड में शामिल होंगे। इनके अलावा ब्लैकरॉक, प्लेबुक पार्टनर्स और सांघवी फैमिली ऑफिस ने भी निवेश किया है। 2022 में विक्रम-S से की थी शुरुआत स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-S लॉन्च करके इतिहास रचा था। यह भारत का पहला निजी तौर पर बनाया गया रॉकेट था। विक्रम-1 इसी यात्रा का अगला पड़ाव है, जो पूरी तरह ऑर्बिट तक जा सकेगा। नॉलेज पार्ट : यूनिकॉर्न का मतलब: जब किसी स्टार्टअप की मार्केट वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर यानी करीब 9,400 करोड़ रुपए को पार कर जाती है, तो उसे ‘यूनिकॉर्न’ कहा जाता है। स्काईरूट की शुरुआत: पवन कुमार चंदना ने IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद ISRO में 6 साल काम किया। यहां चंदना की मुलाकात एक अन्य IITian नागा भरत डका से हुई। दोनों ने नौकरी छोड़कर 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत की। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







