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नई दिल्ली12 मिनट पहले
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ग्लोबल मार्केट में सुधरे सेंटिमेंट के चलते पिछले हफ्ते देश की टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 9 का मार्केट कैप कुल 2.15 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इस तेजी के बीच भारती एयरटेल टॉप गेनर रही। कंपनी की वैल्युएशन 52,432 करोड़ रुपए बढ़कर 11.63 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई।
LIC दूसरे नंबर पर रही। इसके मार्केट कैप में 51,675 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्युएशन 5.56 लाख करोड़ रुपए हो गई है। बजाज फाइनेंस, रिलायंस, लार्सन एंड टुब्रो, SBI, HDFC बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और ICICI बैंक की वैल्यू बढ़ी है। सिर्फ TCS की वैल्यू कम हुई है।
देश की टॉप-10 कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹2.15 लाख करोड़ बढ़ी
| कंपनी | हफ्ते भर में चेंज (₹ करोड़ में) | मौजूदा मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) |
| भारती एयरटेल | +52,432 | 11.62 |
| LIC | +51,675 | 5.56 |
| बजाज फाइनेंस | +26,553 | 5.98 |
| रिलायंस इंडस्ट्रीज | +22,464 | 17.71 |
| लार्सन एंड टुब्रो | +21,929 | 5.79 |
| SBI | +16,753 | 9.55 |
| HDFC बैंक | +11,948 | 12.01 |
| हिंदुस्तान यूनिलीवर | +6,661 | 5.15 |
| ICICI बैंक | +4,724 | 9.66 |
| TCS | -12,699 | 7.69 |
सोर्स: BSE (15 जून – 19 जून, 2026)
मार्केट सेंटिमेंट सुधरने के 3 मुख्य कारण
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म ‘एनरिच मनी’ के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाया है। इसके पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण रहे हैं…
- जियोपॉलिटिकल तनाव और चिंताओं का कम होना।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का नरम पड़ना।
- वैश्विक स्तर पर निवेशकों के सेंटिमेंट में सुधार होना।
पोनमुडी आर ने बताया कि हालांकि बातचीत अभी जारी है और समझौता पूरी तरह से लागू होना बाकी है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता में कमी आने से बाजार की धारणा में काफी सुधार हुआ है।
रिलायंस देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी
मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज अभी भी देश की सबसे वैल्यूएबल घरेलू कंपनी बनी हुई है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का नंबर आता है।
बीते हफ्ते सेंसेक्स 1.68% चढ़ा था
बीते हफ्ते सेंसेक्स 1,274.95 अंक यानी 1.68% चढ़ा था। वहीं शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 607 अंक गिरकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 154 अंकों की गिरावट रही, ये 24,013 के स्तर पर बंद हुआ था।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?
मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।
इसे एक उदाहरण से समझें…
मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।
कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…
| बढ़ने का क्या मतलब | घटने का क्या मतलब |
| शेयर की कीमत में बढ़ोतरी | शेयर प्राइस में गिरावट |
| मजबूत वित्तीय प्रदर्शन | खराब नतीजे |
| पॉजिटीव न्यूज या इवेंट | नेगेटिव न्यूज या इवेंट |
| पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट | इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट |
| हाई प्राइस पर शेयर जारी करना | शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग |
मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।
- निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।
- उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।













































