ब्राउन और व्हाइट शुगर में क्या अंतर होता है? जानिये सेहत पर इन दोनों का असर

चीनी हमारे रोज़मर्रा के खान‑पान का अहम हिस्सा है. चाय, मिठाई, डेज़र्ट या फिर किसी रेसिपी में मिठास लाने के लिए हम आमतौर पर व्हाइट शुगर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि आजकल सेहत के नाम पर ब्राउन शुगर भी काफ़ी लोकप्रिय हो गई है. कई लोग मानते हैं कि ब्राउन शुगर ज़्यादा हेल्दी होती है, लेकिन क्या सच में ऐसा है? आइए जानते हैं दोनों में अंतर, फायदे और उपयोग. 1. बनाने की प्रक्रियाव्हाइट शुगर गन्ने या चुकंदर के रस को पूरी तरह रिफाइन करके बनाई जाती है. इसमें मौजूद शीरा (molasses) पूरी तरह निकाल दिया जाता है, इसलिए इसका रंग बिल्कुल सफेद और स्वाद साफ़ मीठा होता है. ब्राउन शुगर या तो आंशिक रूप से रिफाइन की गई होती है या फिर व्हाइट शुगर में दोबारा शीरा मिलाकर बनाई जाती है. इसी शीरे के कारण इसका रंग भूरा और स्वाद हल्का‑सा कैरामेल जैसा होता है. 2. रंग, बनावट और स्वादव्हाइट शुगर के दाने सूखे, चमकदार और एक‑जैसे होते हैं. इसका स्वाद तेज़ और सीधा मीठा होता है.ब्राउन शुगर नमी वाली, थोड़ी चिपचिपी और मुलायम होती है. इसका स्वाद हल्का गहरा और खुशबूदार होता है. 3. पोषण मूल्यपोषण के लिहाज़ से दोनों लगभग एक‑सी ही हैं. ब्राउन शुगर में शीरे की वजह से बहुत थोड़ी मात्रा में कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन हो सकता है, लेकिन यह मात्रा इतनी कम होती है कि इससे कोई खास पोषण लाभ नहीं मिलता. कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट दोनों में लगभग समान होते हैं. 4. सेहत पर प्रभावयह धारणा गलत है कि ब्राउन शुगर बहुत ज़्यादा हेल्दी होती है. दोनों ही शुगर्स का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज़ और दांतों की समस्या बढ़ा सकता है. सेहत के लिए मात्रा पर नियंत्रण ज़्यादा ज़रूरी है, न कि रंग पर. 5. उपयोग में अंतरव्हाइट शुगर का इस्तेमाल चाय‑कॉफी, मिठाइयों और सामान्य पकाने में होता है.ब्राउन शुगर का उपयोग खासतौर पर केक, कुकीज़, सॉस और बेकिंग में किया जाता है, जहां इसका फ्लेवर स्वाद बढ़ाता है. निष्कर्षब्राउन शुगर और व्हाइट शुगर में मुख्य अंतर रंग, स्वाद और निर्माण प्रक्रिया का है, न कि सेहत का. दोनों का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अगर मिठास कम और संतुलित रखी जाए, तो यही सबसे अच्छा और समझदारी भरा विकल्प है.
रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; अमेरिका-ईरान तनाव से ये और बढ़ सकती है

अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। आज 12 मई को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। यह तनाव लंब चला तो महंगाई आगे और बढ़ सकती है। महंगाई बढ़ने की वजह- खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था। नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी तीसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है। खाने-पीने की चीजों का वजन (वेटेज) 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वेटेज बढ़ा दिया गया है। क्या हटा: वीसीआर और ऑडियो कैसेट जैसे पुराने सामान हटा दिए गए हैं। क्या जुड़ा: OTT सब्सक्रिप्शन, डिजिटल स्टोरेज जैसे खर्चे शामिल किए हैं। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। 3.48% महंगाई दर का क्या मतलब है? 1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल) जब हम कहते हैं कि अप्रैल 2026 में महंगाई 3.48% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना मार्च 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 3.48% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं: किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे। किसी चीज के दाम घटे भी होंगे। जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 3.48% बढ़ गया। 2. ₹100 की चीज अब ₹103.48 की हो गई इसका गणित बहुत सीधा है। अगर अप्रैल 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान अप्रैल 2026 में ₹103.48 का हो गया है।
कच्चे केले का कोफ्ता रेसिपी: घर पर कच्चे केले के कोफ्ते, स्वाद ऐसा कि चटते रह जाएंगे उगलियां; विधि नोट करें

कॉफ़ी के लिए: 3 कच्चे केले, 2 छोटे आलू, 2 हरी मिर्च, छोटी साबुत गाजर, 2 बड़े बेसन, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, नमक का स्वाद, हरा धनिया बारीक कटा हुआ, तेल छवि: फ्रीपिक ग्रेवी के लिए: 2 प्याज़, 2 टमाटर, 1 छोटा मोगा अदरक-लहसुन पेस्ट, 1/2 छोटा मोगा लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा मोगा धनिया पाउडर, 1/2 छोटा मोगा गरम मसाला, 2 छोटा मोगा अदरक-लहसुन पेस्ट, 1 छोटा मोगा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा मोगा गरम मसाला, 2 छोटा मोगा मसाला, नमक स्वाद छवि: फ्रीपिक कॉफ़ी बनाने की आसान विधि: सबसे पहले कच्चे केले को धोकर कुकर में 2 सिटी आने तक स्टुअर्ट लें। कूल होने पर अगली फिल्म की शुरुआत और अच्छे से मैश कर लें। छवि: एआई अब इसमें आलू, हरी मिर्च, अदरक, बेसन, सोया और हरा धनिया के मसाले अच्छे तरह से मिला लें। अब इस मिश्रण से छोटे-छोटे गोल कोफ्ते तैयार करें। छवि: एआई कढ़ाही में तेल गर्म करें और कोफ्तों को मध्यम आंच पर तेल तक गर्म करें। फ्लाइट तो ऐसे कम तेल में एयर फ्री भी कर सकते हैं। छवि: एआई ग्रेवी के लिए: प्याज और टमाटर को पीस लें। अब पैन में तेल गर्म करें और इसमें शामिल हैं अदरक-लहसुन पेस्टोडोर भून लें। इसके बाद प्याज-टमाटर का पेस्ट और समग्र रूप से अच्छी तरह से डाला जाता है। छवि: एआई तब तक बहादुर जब तक तेल अलग न होने लगे। अब इसमें मलाई डेमोक्रेट अच्छे तरह से मिक्स करें। जरूरत के हिसाब से पानी डालें और 5 मिनट तक मंदिर बनाएं। अंतिम में तैयार कोफ्ते ग्रेवी में डाला गया और 2 मिनट का डेमोंट पर बिगुल बजा दिया गया। छवि: एआई गरमा-गरम कच्चे केले के कोफ्ते को हरे धनिए से गार्निश करें। इसे तंदूरी रोटी, नान या जीरा चावल के साथ सर्व करें। इसका स्वाद इतना लाजवाब है कि घर वाले बार-बार बनाने की फरमाइश करेंगे। छवि: एआई
नर्स का काम सिर्फ इंजेक्शन लगाना नहीं, ये 5 काम भी ड्यूटी का हिस्सा, आसान नहीं वर्क लाइफ बैलेंस रखना

Last Updated:May 12, 2026, 16:09 IST International Nurses Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस हर साल 12 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है. यह दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन के रूप में उनकी याद और स्वास्थ्य सेवा में नर्सों के निस्वार्थ योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है. अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाएं नर्सों की जिम्मेदारी हैं. हालांकि उनके सामने लंबी ड्यूटी, तनाव और स्टाफ की कमी जैसी कई चुनौतियां भी होती हैं. इंटरनेशनल नर्सेस डे का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना है. Nurses Duties and Struggles in India: अस्पताल में जब आप भर्ती होते हैं, तब आपका इलाज डॉक्टर करते हैं, लेकिन आपकी देखभाल की जिम्मेदारी नर्सों की होती है. अच्छे ट्रीटमेंट के बाद जब मरीज घर जाते हैं, तो वे डॉक्टर्स की तारीफ खूब करते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करने वाली नर्स भी इसकी पूरी हकदार होती हैं. अस्पतालों में मरीजों की केयर से लेकर दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाओं में नर्सों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है और इस दिन का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना होता है. नई दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर में नर्सिंग सुपरवाइजर बिंसी टोनियो ने News18 को बताया कि अस्पताल में नर्स का काम सिर्फ दवा देना या इंजेक्शन लगाना ही नहीं होता है. नर्सें मरीजों की पूरी देखभाल से जुड़ी होती हैं. मरीज का ब्लड प्रेशर, तापमान, ऑक्सीजन लेवल और दूसरी जरूरी कंडीशंस की मॉनिटरिंग करना भी ड्यूटी का हिस्सा होता है. डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट और दवाओं को सही समय पर मरीज तक पहुंचाना भी नर्सों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कई बार मरीज की हालत में छोटे-छोटे बदलाव सबसे पहले नर्सें ही नोटिस करती हैं और तुरंत डॉक्टर को जानकारी देती हैं. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित फोर्टिस ला फेम हॉस्पिटल के लेबर रूम की नर्सिंग इंचार्ज रेखा जॉन ने बताया कि आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु विभाग जैसे सेंसिटिव डिपार्टमेंट में नर्सों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी, मेडिकल उपकरणों को संभालना और इमरजेंसी कंडीशन में तेजी से प्रतिक्रिया देना उनके काम का अहम हिस्सा होता है. कई बार मरीज और उनके परिवार वाले मानसिक तनाव में होते हैं, ऐसे में नर्सें उन्हें भावनात्मक सहारा देने का काम भी करती हैं. जब मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं, तो वह नर्सों के लिए काफी संतोषजनक होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग लाई है. नर्सों के सामने चुनौतियां भी कम नहीं एक्सपर्ट्स की मानें तो नर्सों का काम बेहद सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. लंबे और थकाऊ ड्यूटी घंटे, रात की शिफ्ट, लगातार खड़े रहकर काम करना और एक साथ कई मरीजों की जिम्मेदारी संभालना शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन हो सकता है. कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी होने के कारण नर्सों पर काम का दबाव और बढ़ जाता है. इसके अलावा गंभीर मरीजों और मौत जैसी परिस्थितियों का सामना करना मानसिक तनाव का कारण बन सकता है. कई बार नर्सों को मरीजों या उनके परिजनों के गुस्से और भावनात्मक दबाव का भी सामना करना पड़ता है. लगातार तनाव और थकान की वजह से कई नर्सें बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकावट की समस्या से जूझती हैं. घर की जिम्मेदारियां भी नर्सों के कंधों पर होती हैं. ऐसे में उनके लिए वर्क लाइफ बैलेंस करना भी काफी चैलेंजिंग होता है. तकनीक और मेडिकल सिस्टम में लगातार हो रहे बदलावों के साथ नर्सों को खुद को लगातार अपडेट भी रखना पड़ता है. नई मशीनों, दवाओं और इलाज के तरीकों की जानकारी रखना जरूरी होता है. इसके लिए ट्रेनिंग और निरंतर सीखना उनकी प्रोफेशनल जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है. स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नर्सों की स्थिति और कार्य परिस्थितियों में सुधार बेहद जरूरी है. बेहतर वेतन, पर्याप्त स्टाफ, सुरक्षित कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सुविधाएं नर्सों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. साथ ही समाज में उनके योगदान को सही सम्मान देना भी जरूरी है. नर्सें किसी भी अस्पताल की बैकबोन मानी जाती हैं, क्योंकि उनकी मदद से ही ट्रीटमेंट कंप्लीट हो पाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
केरल के मुख्यमंत्री के रूप में केसी वेणुगोपाल की पदोन्नति से दो उपचुनाव क्यों हो सकते हैं | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 16:08 IST हालांकि केसी वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन राज्य में पार्टी के मामलों में उनका काफी प्रभाव है। भले ही वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की राजनीति से दूर हैं, फिर भी वह पार्टी के मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव रखते हैं। (छवि: एएनआई फ़ाइल) केरल के अगले मुख्यमंत्री पर विचार-विमर्श जारी है, केसी वेणुगोपाल इस पद के लिए शीर्ष दावेदार के रूप में उभरे हैं। हालाँकि, उनकी संभावित नियुक्ति एक अनोखी संवैधानिक चुनौती पेश करती है, क्योंकि वेणुगोपाल ने हालिया विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। यदि वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री के रूप में चुना जाता है, तो उन्हें छह महीने के भीतर केरल विधानसभा में एक सीट सुरक्षित करनी होगी। इससे दो अलग-अलग उपचुनाव होंगे। अलाप्पुझा के मौजूदा सांसद के रूप में वेणुगोपाल को अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इसके अलावा, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के एक मौजूदा विधायक को वेणुगोपाल को राज्य विधानसभा के लिए उपचुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए अपनी सीट खाली करनी होगी। केरल की राजनीति में वेणुगोपाल की विरासत वेणुगोपाल राज्य के राजनीतिक परिदृश्य के लिए अजनबी नहीं हैं। उन्होंने पहली बार 1996 में केरल विधानसभा में प्रवेश किया और लगातार तीन बार अलाप्पुझा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ओमन चांडी प्रशासन (2004-2006) के दौरान, उन्होंने पर्यटन और देवास्वोम मंत्री के रूप में भी कार्य किया। पार्टी के भीतर उनका उत्थान जमीनी स्तर पर शुरू हुआ, जहां उन्होंने 1988 से 1993 तक केरल छात्र संघ (केएसयू) का नेतृत्व किया, इसके बाद युवा कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष (1993-2000) के रूप में कार्यकाल रहा। वेणुगोपाल का राष्ट्रीय राजनीति में स्थानांतरण राष्ट्रीय राजनीति में परिवर्तन के बाद से, वेणुगोपाल कांग्रेस पदानुक्रम में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं। 2019 में एआईसीसी महासचिव (संगठन) के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, उन्होंने खुद को पार्टी के भीतर एक प्राथमिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित किया, जो आलाकमान के लिए एक प्रमुख पुल के रूप में कार्यरत था। क्या वेणुगोपाल बनेंगे केरल के सीएम? हालांकि केसी वेणुगोपाल पिछले छह वर्षों से केरल की सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन राज्य में पार्टी के मामलों में उनका काफी प्रभाव है। उन्होंने कथित तौर पर विधानसभा टिकट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पार्टी के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया। कांग्रेस में उनके कद को देखते हुए राज्य के लगभग 43 विधायकों और सभी पार्टी सांसदों ने मुख्यमंत्री के रूप में वेणुगोपाल का समर्थन किया है। वेणुगोपाल स्पष्ट रूप से दौड़ में दो अन्य दावेदारों- वीडी सतीसन और रमेश चेन्निथला से आगे हैं, यह निर्णय राहुल गांधी पर निर्भर करता है कि क्या वह अपने विश्वासपात्र को केरल जाने की अनुमति देंगे, जहां वह पहले पार्टी के सांसद थे और जहां उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा अब वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। कांग्रेस की दुविधा एक केंद्रीय नेता, वेणुगोपाल और केरल के जमीनी समर्थन वाले नेताओं के बीच चयन करने को लेकर भी है – इन दोनों का राज्य में मजबूत प्रभाव है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत समाचार राजनीति केरल के मुख्यमंत्री के रूप में केसी वेणुगोपाल की पदोन्नति से दो उपचुनाव क्यों हो सकते हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)केसी वेणुगोपाल केरल के मुख्यमंत्री(टी)केरल के मुख्यमंत्री की दौड़(टी)केसी वेणुगोपाल सांसद(टी)केरल संवैधानिक चुनौती(टी)केरल उपचुनाव(टी)अलप्पुझा निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति(टी)कांग्रेस यूडीएफ केरल(टी)एआईसीसी महासचिव संगठन
केरलम के सीएम का ऐलान 24 घंटे के भीतर:राहुल से मिलने के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का दावा; वेणुगोपाल पहली पसंद

केरलम के अगले सीएम के नाम की घोषणा अगले 24 घंटे में हो सकती है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के. मुरलीधरन ने राहुल गांधी से मिलने के बाद यह दावा किया। उन्होंने कहा कि मंगलवार रात या बुधवार सुबह तक मुख्यमंत्री के नाम सामने आ जाएगा। मुरलीधरन ने बताया कि सोनिया गांधी के आवास ’10 जनपथ’ पर राहुल ने केरल के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों के साथ अगले CM के नाम पर चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मंगलवार शाम को बेंगलुरु से दिल्ली आ रहे हैं। उनके आने के बाद एक और दौर की बातचीत होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम पर आखिरी फैसला होगा। 2026 केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को ही आ गए थे। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन को 140 में से 102 सीटें मिली थीं। बंगाल, असम, तमिलनाडु के सीएम तय, केरलम में 9 दिन बाद भी स्सपेंस 4 मई को 5 राज्यों के चुनावों के रिजल्ट आने के बाद बंगाल, असम और तमिलनाडु में नए सीएम की शपथ हो चुकी है। पुडुचेरी में सीएम रंगासामी बुधवार को शपथ लेंगे। केरलम को अपने नए CM का इंतजार है। कांग्रेस आलाकमान ने सोमवार को केरलम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया था। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी की केरलम सीएम के लिए पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं। राहुल ने दिल्ली में वेणुगोपाल से अकेले में मुलाकात भी की थी। दावा- वेणुगोपाल को सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 75-80% सदस्यों ने केसी वेणुगोपाल को समर्थन दिया। वीडी सतीशन को 6 विधायकों का समर्थन मिला। बैठक के बाद तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने सतीशन का समर्थन किया। UDF के सहयोगी दल IUML और केरलम कांग्रेस (जोसेफ) ने भी सतीशन को समर्थन दिया है। ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… हिमंता दूसरी बार असम के CM:2 बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से मंत्री बने, सभी ने असमिया में शपथ ली; मोदी-शाह मौजूद रहे हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हैं। असम के गवर्नर लक्ष्मण आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। पूरी खबर पढ़ें…
‘वर्क फ्रॉम होम’ करते हुए आप भी तो नहीं बर्नआउट के शिकार? 10 लक्षण दिखे तो न करें इग्नोर, बन सकते हैं मानसिक बीमार

Work From Home Burnout Signs : लगातार वर्क फ्रॉम होम (WFH) ने हमारे काम करने के तरीके को बिल्कुल बदल दिया है. कोरोना महामारी के बाद घर से काम करने का ये तरीका काफी पॉपुलर हुआ, लेकिन इसके साथ ही ‘बर्नआउट’ जैसी नई चुनौती भी साथ में आ गई. आमतौर पर न्यू मॉम्स ऐसा काम पसंद करती हैं जिससे वे घर और बच्चों को भी संंभाल सकें और ऑफिस के काम से कुछ पैसे भी बना सकें. लेकिन 24 घंटे काम करने और दोनों हालातों को सही तरीके से मैनेज करते-करते मानसिक थकान और तनाव का बढ़ना स्वभाविक है. दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. अगर आप भी दिन भर काम करने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो यह महज थकान नहीं, बल्कि बर्नआउट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और रिकवरी के उपाय अपनाना आपकी मानसिक सेहत के लिए अनिवार्य है. वर्क फ्रॉम होम बर्नआउट के 10 संकेत, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं- मायोक्लीनिक के अनुसार, रिमोट वर्क के दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. यहाँ वे 10 प्रमुख लक्षण हैं जिन पर आपको गौर करना चाहिए: हर समय थकान महसूस करना: नींद पूरी होने के बावजूद आप सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं. एकाग्रता में कमी: छोटे-छोटे काम करने में भी सामान्य से अधिक समय लगना या बार-बार ध्यान भटकना. चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर सहकर्मियों या परिवार के सदस्यों पर गुस्सा आना. काम से अलगाव: अपनी उपलब्धियों में खुशी महसूस न होना और काम को सिर्फ एक बोझ समझना. नींद का पैटर्न बदलना: रात भर काम के बारे में सोचना या नींद न आने की समस्या (Insomnia). शारीरिक समस्याएं: बिना किसी बीमारी के सिरदर्द, पीठ दर्द या आंखों में खिंचाव महसूस होना. सोशल विड्रॉल: दोस्तों या परिवार से बात करने की इच्छा खत्म हो जाना. प्रोत्साहन की कमी: नए आइडियाज पर काम करने की इच्छा या रचनात्मकता का पूरी तरह खत्म हो जाना. डिजिटल एडिक्शन: काम खत्म होने के बाद भी बार-बार ईमेल या मैसेज चेक करते रहना. काम के घंटों का कोई अंत न होना: देर रात तक काम करना क्योंकि आपको लगता है कि काम कभी खत्म ही नहीं होगा. बर्नआउट से रिकवरी के तरीके:सीमाएं निर्धारित करें (Set Boundaries): काम शुरू करने और खत्म करने का एक निश्चित समय तय करें. लैपटॉप बंद होने का मतलब है कि अब आप ऑफिस के लिए उपलब्ध नहीं हैं.डेडिकेटेड वर्कस्पेस:बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करने के बजाय एक अलग डेस्क और कुर्सी का उपयोग करें. इससे दिमाग को ‘वर्क मोड’ और ‘रिलैक्स मोड’ के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है.शेड्यूल ब्रेक:हर एक घंटे के काम के बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन फ्री’ ब्रेक लें. थोड़ा टहलें या पानी पिएं.डिजिटल डिटॉक्स:ऑफिस के बाद फोन को खुद से दूर रखें. अपनी हॉबी या परिवार को समय दें ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) प्रश्न 1: वर्क फ्रॉम होम (WFH) बर्नआउट सामान्य थकान से कैसे अलग है?उत्तर: सामान्य थकान आराम करने या एक अच्छी नींद के बाद ठीक हो जाती है. लेकिन बर्नआउट एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है जहाँ आप लगातार खालीपन, चिड़चिड़ापन और काम के प्रति अरुचि महसूस करते हैं, जो लंबी छुट्टी के बाद भी कम नहीं होती. प्रश्न 2: बर्नआउट के वे कौन से लक्षण हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?उत्तर: लोग अक्सर ‘डिजिटल फटीग’ (हर समय ईमेल चेक करना), अनिद्रा, काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसे लक्षणों को सामान्य तनाव समझकर छोड़ देते हैं, जबकि ये बर्नआउट की शुरुआत हो सकते हैं. प्रश्न 3: क्या घर से काम करने पर मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा ज्यादा होता है?उत्तर: हाँ, क्योंकि घर और ऑफिस के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ (Always-on culture) का दबाव मानसिक तनाव और ‘मेंटल एग्जॉशन’ का मुख्य कारण बनता है. प्रश्न 4: बर्नआउट से बचने के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है?उत्तर: सबसे जरूरी है ‘वर्क-लाइफ बाउंड्री’ तय करना. एक निश्चित वर्कस्पेस बनाना, काम के घंटों के बाद डिजिटल उपकरणों से दूरी (Digital Detox) बनाना और नियमित ब्रेक लेना इसमें बेहद मददगार साबित होता है. प्रश्न 5: क्या बर्नआउट से पूरी तरह रिकवर होना संभव है?उत्तर: बिल्कुल, समय पर लक्षणों की पहचान और अपनी जीवनशैली में बदलाव (जैसे हॉबी के लिए समय निकालना और फिजिकल एक्टिविटी) के जरिए बर्नआउट से रिकवर हुआ जा सकता है. गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना भी फायदेमंद होता है.
रूक जाओ… गर्मियों में रोज आम खाने वाले हो जाएं अलर्ट, सेवन से पहले की ये एक बड़ी गलती बना सकती है आपको बीमार

Last Updated:May 12, 2026, 14:41 IST Mango Eating Tips: गर्मी के मौसम में आम खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे गलत तरीके से खाना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आम खाने से पहले उसे कुछ समय पानी में भिगोकर रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसा नहीं करने पर आम में मौजूद फाइटिक एसिड और केमिकल्स शरीर में गर्मी बढ़ा सकते हैं, जिससे पिंपल्स, पेट की गड़बड़ी और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अधिक मात्रा में आम खाने से ब्लड शुगर भी बढ़ सकता है. खासतौर पर डायबिटीज और मोटापे से परेशान लोगों को सीमित मात्रा में आम का सेवन करना चाहिए. करौली के आयुर्वेदिक चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ उमेश शर्मा बताते हैं कि आम की प्रकृति गर्म होती है और इसे सीधे खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. इससे चेहरे पर पिंपल्स, मुंहासे, पेट की गड़बड़ी और शरीर में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में आम को खाने से पहले पानी में भिगोने से इसमें मौजूद अतिरिक्त गर्मी कम हो जाती है. गर्मी का मौसम आते ही बाजार में फलों के राजा आम की बहार शुरू हो जाती है. बच्चे हों या बड़े, हर कोई आम का स्वाद बड़े चाव से लेता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम खाने से पहले की गई एक छोटी सी गलती आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार से लाए गए आम को बिना पानी में भिगोए सीधे खाना नुकसानदायक साबित हो सकता है. यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी आम को कुछ घंटों तक पानी में भिगोकर खाने की सलाह देती आ रही हैं. अब विज्ञान भी इस घरेलू उपाय को सही मानता है. Add News18 as Preferred Source on Google दरअसल, आम को पकाने और सुरक्षित रखने के लिए कई बार केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ व्यापारी आम को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों का उपयोग करते हैं. इसके अलावा आम के छिलके पर धूल, मिट्टी और कीटनाशकों के अंश भी चिपके रह सकते है. डॉक्टरों का कहना है कि आम में फाइटिक एसिड नामक तत्व भी पाया जाता है, जो शरीर में गर्मी पैदा कर सकता है. लंबे समय तक बिना भिगोए आम खाने से कुछ लोगों को एलर्जी, सिरदर्द और पेट संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. खासतौर पर बच्चों और संवेदनशील लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है. आयुर्वैदिक एक्सपर्ट डॉ उमेश शर्मा गर्मी के मौसम में सलाह देते हैं कि आम खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोएं और कम से कम 1 से 2 घंटे पानी में जरूर रखें. साथ ही सीमित मात्रा में ही आम का सेवन करें. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है. सही तरीके से खाया गया आम स्वाद के साथ शरीर को विटामिन, फाइबर और ऊर्जा भी देता है, लेकिन लापरवाही नुकसान का कारण बन सकती है. ऐसे में यदि आम को बिना धोए या भिगोए खाया जाए तो यह शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार आम को 2 से 3 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखने से उसके ऊपर मौजूद गंदगी और हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं. इससे आम की तासीर भी थोड़ी संतुलित हो जाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Bhopal NEET UG Exam Cancelled

भोपाल5 मिनट पहले कॉपी लिंक भोपाल में NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 रद्द हो गई है। केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामले की जांच CBI को सौंप दी है। वहीं राजस्थान पुलिस ने धांधली के आरोप में महाराष्ट्र के नाशिक निवासी डॉ. शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है। अब सत्यसाई यूनिवर्सिटी से भी कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी शुभम सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी (SSSUTMS) में आयुर्वेद चिकित्सा (BAMS) का छात्र है। मामले में विश्वविद्यालय के कुलगुरु मुकेश तिवारी ने कहा- 2021 में बीएएमएस में प्रवेश लिया था, लेकिन उसके बाद वह कभी विश्वविद्यालय नहीं आया। MP के 1.20 लाख अभ्यर्थियों पर असर, NSUI का प्रदर्शन पेपर रद्द होने का असर मध्य प्रदेश के करीब 1.20 लाख अभ्यर्थियों पर पड़ा है। अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी है। NSUI ने भोपाल में प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और NTA अध्यक्ष प्रदीप जोशी का पुतला भी जलाया गया। एग्जाम रद्द होने से छात्रों में निराशा, मानसिक तनाव नीट अभ्यर्थी सार्थक यादव ने कहा- मैंने पूरे साल मेहनत करके नीट की तैयारी की थी और परीक्षा दी, लेकिन आखिर में एग्जाम रद्द हो गया। यह बेहद निराशाजनक है। मानसिक तनाव है। अब फिर से तैयारी करके परीक्षा देनी पड़ेगी। 2024 में भी यही हुआ था, अब फिर वही स्थिति भोपाल की राखी ने कहा- अगले साल फिर ऐसी स्थिति नहीं बनेगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। 2024 में भी प्रबंधन ने यही किया था, अब 2026 में भी मेहनत पानी में मिल गई। लाखों बच्चों का भविष्य फिर अंधकार में धकेला दिया गया। छात्रों पर मानसिक तनाव की स्थिति नीट छात्रा इशीका साहू ने कहा- मैंने पहली बार नीट परीक्षा दी थी। एग्जाम रद्द होने की खबर बेहद निराश करने वाली है। जिन छात्रों ने लंबे समय से तैयारी की थी या ड्रॉप लेकर मेहनत कर रहे थे, उनके साथ बहुत गलत हुआ है। अब री-नीट की बात हो रही है। मानसिक तनाव है। महिला कांग्रेस बोली- बीजेपी सरकार में 90 बार पेपर लीक मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने कहा-छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इन छात्रों के परिवार किस तरह उन्हें पढ़ाते हैं, यह सभी समझ सकते हैं। गरीब परिवारों के छात्र छोटे शहरों से बड़े शहरों में पढ़ाई करने जाते हैं। ऐसे में उन परिवारों पर क्या बीती होगी? बीजेपी सरकार में 90 बार पेपर लीक हुए हैं। 50 बार दोबारा परीक्षाएं कराई गई हैं। इनमें से कई बच्चे परीक्षा देने से चूक गए। उनका भविष्य आज भी अंधकार में है। इसका जिम्मेदार सिर्फ सरकार है, जो पिछले 12 वर्षों से देश में शासन कर रही है। अब इन 23 लाख छात्रों के भविष्य के बारे में कौन सोचेगा? नीट एग्जाम रद्द होने से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… अपडेट्स 01:11 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक पेपर नहीं, युवाओं का भरोसा लीक हुआ है- डॉ. आकाश सोनी फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. आकाश सोनी ने कहा, नीट का पेपर लीक होना और परीक्षा रद्द होना यह दिखाता है कि देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसी एजेंसियां देश की छवि वैश्विक स्तर पर खराब कर रही हैं। इस मामले में जो भी लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। आज सिर्फ एक पेपर लीक नहीं हुआ है, बल्कि युवाओं का भरोसा भी टूट गया है। हम मेहनत करते रह जाएंगे और आने वाले समय में कोई ऐसा व्यक्ति डॉक्टर बन जाएगा, जिसे कुछ भी नहीं पता, लेकिन उसके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच गया था। 01:10 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक इंदौर से अपडेट दे रहे भास्कर रिपोर्टर संतोष शितोले 01:08 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक 706 नंबर आने की उम्मीद थी, परीक्षा रद्द होने से निराश हूं इंदौर के आराध्य गर्ग ने बताया- पेपर लीक होने की जानकारी मुझे तीन दिन पहले ही मिल गई थी। यह मेरा पहला एग्जाम था। मुझे करीब 706 अंक मिलने की उम्मीद थी, जिसे लेकर मैं बहुत खुश था। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद काफी निराशा है। 01:06 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक इंदौर की डॉक्टर बोलीं- आरोपियों को फांसी की सजा मिले इंदौर की डॉक्टर पिंकी गर्ग ने कहा, इस मामले में जो भी आरोपी पकड़े जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जिन कोचिंग सेंटरों की भूमिका सामने आए, उनके लाइसेंस भी रद्द किए जाएं। आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई दोबारा पेपर लीक करने की हिम्मत न कर सके। 01:02 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक कोचिंग संचालक बोले- ऑनलाइन मोड में एग्जाम होने पर पेपर लीक होने की संभावनाएं कम इंदौर के कोचिंग संचालक विजिट जैन ने कहा- ऑनलाइन मोड में एग्जाम होने पर पेपर लीक होने की संभावनाएं कम होगी। 12:55 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक NEET कैंडिडेट्स बोले- हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया 12:52 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक CBI पर भरोसा नहीं, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराइए जांच- NSUI NSUI के नेताओं ने कहा- छात्रों की मांग है कि सरकार इस मामले की जांच सीबीआई के बजाय सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराइए। छात्रों ने कहा कि उन्हें सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है। साथ ही अभ्यर्थियों की परीक्षा फीस, फॉर्म भरने का खर्च और आने-जाने का किराया जल्द से जल्द वापस किया जाए। 12:46 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक भोपाल की महक बोली- लग रहा है आत्महत्या कर लूं भोपाल की महक राव ने कहा, परीक्षा रद्द होने के बाद ऐसा लग रहा है कि आत्महत्या कर लें। घरवालों ने पैसे खर्च कर हमें पढ़ाया, लेकिन परीक्षा होने के बाद उसे रद्द कर दिया गया। इससे परेशानी और बढ़ गई है। हम मानसिक तनाव झेल रहे हैं। हम गरीब परिवार से हैं, बार-बार कोचिंग के लिए पैसे कहां से लाएंगे? 12:41 PM12 मई 2026 कॉपी लिंक रीना बौरासी सेतिया बोलीं- युवा चढ़ रहे भ्रष्टाचार की बलि मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने
Bihar DGP Action | Police Dowry Cases Action

पटना30 मिनट पहले कॉपी लिंक “प्रदेश की पुलिस गैंगरेप पीड़िता से भी पैसे मांग लेती है। ऐसे पुलिस वालों को डूबकर मर जाना चाहिए।” बिहार के DGP विनय कुमार ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय ऑडिटोरियम में आयोजित जेंडर बेस्ड वॉयलेंस पर एकदिवसीय कार्यशाला में यह बात कही। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर की उस खबर का जिक्र किया, जिसमें मोतिहारी की एक महिला पुलिस अधिकारी पर गैंगरेप पीड़िता से मेडिकल जांच कराने के नाम पर 9 हजार रुपए मांगने का आरोप लगा था। DGP ने कहा कि संबंधित महिला SHO ने पीड़िता के परिजनों से किराये पर गाड़ी भी ली थी और उसी गाड़ी से चार दिनों तक इधर-उधर घूमती रही। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “पुलिस की वर्दी लोगों की मदद करने के लिए होती है, गरीबों को परेशान करने के लिए नहीं। ऐसे पुलिस वालों को वर्दी उतार देनी चाहिए। घर में खाना बनाना चाहिए या फिर डूबकर मर जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कई मामलों में महिला SHO वर्दी और पिस्टल की धौंस जमाते देखी गई हैं। दहेज लेने वाले पुलिस वालों को बर्खास्त कर देना चाहिए बिहार के DGP विनय कुमार ने राज्य के सभी पुलिसकर्मियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है, जो लोग शादी के बाद दारोगा बनने पर पहली पत्नी को छोड़ दूसरी शादी करते हैं, उन्हें नौकरी में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि, बिहार पुलिस के कई जवान और पदाधिकारी भी दहेज मामलों में संलिप्त पाए गए हैं। करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। जो लोग दहेज जैसी सामाजिक बुराई में शामिल हैं, उन्हें पुलिस सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे दोषियों को तत्काल सेवा मुक्त कर देना चाहिए। DGP ने महिला थाना के पुलिस पदाधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा, ‘वे केवल थाना स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि पंचायत स्तर तक जाकर लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाएं।’ DGP ने जोर दिया कि ‘जेंडर बेस्ड वॉयलेंस केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक सोच से जुड़ा गंभीर विषय है।’ DGP ने पुलिस वालों को जनता से बेहतर संवाद करने का निर्देश दिया है। दहेज मांगने वालों को समाज से बाहर करना चाहिए DGP ने कहा कि, जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक महिलाओं के खिलाफ अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और यौन अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। कार्यक्रम में शामिल महिलाएं। पुलिसकर्मियों को जनता के साथ बेहतर संवाद करना चाहिए DGP विनय कुमार ने कहा कि पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। पुलिसकर्मियों को जनता के साथ बेहतर संवाद करना चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा पुलिस पर मजबूत हो सके। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों से खास तौर पर अपील की कि वे पीड़ित महिलाओं और बच्चियों के साथ संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ पेश आएं। कई बार पीड़ित महिलाएं मानसिक रूप से बेहद टूट चुकी होती हैं। ऐसे में पुलिस का व्यवहार उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद होती है। जिम्मेदारियों को संवेदनशीलता के साथ निभाने की अपील DGP ने महिला थाना पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जेंडर बेस्ड वॉयलेंस से जुड़े मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की दिशा में काम हो। बिहार के विभिन्न जिलों और थाना स्तर पर सहयोग शिविर और जागरूकता अभियान से जेंडर बेस्ड वॉयलेंस के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। इसका मकसद महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना है। अब वो पूरी खबर पढ़िए जिसका DGP ने जिक्र किया रेप केस में मेडिकल के लिए पुलिस की डिमांड-बोलेरो लाओ:महिला SI बोली- पैसे नहीं हैं तो केस क्यों करते हो; 48 घंटे बाद सस्पेंड मोतिहारी पुलिस रेप के मामले की जांच के लिए पीड़िता के परिवार से ही लग्जरी गाड़ी की डिमांड कर रही है। महिला SI कहती है पैसे नहीं हैं तो केस ही नहीं करना चाहिए था। रेप के 48 घंटे बाद मेडिकल कराने को लेकर महिला SI को SP स्वर्ण प्रभात ने सस्पेंड कर दिया है। एसपी ने कहा ‘मामला की जांच अरेराज SDPO से कराई गई।’ पूरी खबर पढ़ें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








