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‘वर्क फ्रॉम होम’ करते हुए आप भी तो नहीं बर्नआउट के शिकार? 10 लक्षण दिखे तो न करें इग्‍नोर, बन सकते हैं मानसिक बीमार

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Work From Home Burnout Signs : लगातार वर्क फ्रॉम होम (WFH) ने हमारे काम करने के तरीके को बिल्‍कुल बदल दिया है. कोरोना महामारी के बाद घर से काम करने का ये तरीका काफी पॉपुलर हुआ, लेकिन इसके साथ ही ‘बर्नआउट’ जैसी नई चुनौती भी साथ में आ गई. आमतौर पर न्‍यू मॉम्‍स ऐसा काम पसंद करती हैं जिससे वे घर और बच्‍चों को भी संंभाल सकें और ऑफिस के काम से कुछ पैसे भी बना सकें. लेकिन 24 घंटे काम करने और दोनों हालातों को सही तरीके से मैनेज करते-करते मानसिक थकान और तनाव का बढ़ना स्‍वभाविक है.

दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है.

अगर आप भी दिन भर काम करने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो यह महज थकान नहीं, बल्कि बर्नआउट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और रिकवरी के उपाय अपनाना आपकी मानसिक सेहत के लिए अनिवार्य है.

वर्क फ्रॉम होम बर्नआउट के 10 संकेत, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं-

मायोक्‍लीनिक के अनुसार, रिमोट वर्क के दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. यहाँ वे 10 प्रमुख लक्षण हैं जिन पर आपको गौर करना चाहिए:
  1. हर समय थकान महसूस करना: नींद पूरी होने के बावजूद आप सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं.
  2. एकाग्रता में कमी: छोटे-छोटे काम करने में भी सामान्य से अधिक समय लगना या बार-बार ध्यान भटकना.
  3. चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर सहकर्मियों या परिवार के सदस्यों पर गुस्सा आना.
  4. काम से अलगाव: अपनी उपलब्धियों में खुशी महसूस न होना और काम को सिर्फ एक बोझ समझना.
  5. नींद का पैटर्न बदलना: रात भर काम के बारे में सोचना या नींद न आने की समस्या (Insomnia).
  6. शारीरिक समस्याएं: बिना किसी बीमारी के सिरदर्द, पीठ दर्द या आंखों में खिंचाव महसूस होना.
  7. सोशल विड्रॉल: दोस्तों या परिवार से बात करने की इच्छा खत्म हो जाना.
  8. प्रोत्साहन की कमी: नए आइडियाज पर काम करने की इच्छा या रचनात्मकता का पूरी तरह खत्म हो जाना.
  9. डिजिटल एडिक्शन: काम खत्म होने के बाद भी बार-बार ईमेल या मैसेज चेक करते रहना.
  10. काम के घंटों का कोई अंत न होना: देर रात तक काम करना क्योंकि आपको लगता है कि काम कभी खत्म ही नहीं होगा.

बर्नआउट से रिकवरी के तरीके:
सीमाएं निर्धारित करें (Set Boundaries):
काम शुरू करने और खत्म करने का एक निश्चित समय तय करें. लैपटॉप बंद होने का मतलब है कि अब आप ऑफिस के लिए उपलब्ध नहीं हैं.
डेडिकेटेड वर्कस्पेस:
बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करने के बजाय एक अलग डेस्क और कुर्सी का उपयोग करें. इससे दिमाग को ‘वर्क मोड’ और ‘रिलैक्स मोड’ के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है.
शेड्यूल ब्रेक:
हर एक घंटे के काम के बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन फ्री’ ब्रेक लें. थोड़ा टहलें या पानी पिएं.
डिजिटल डिटॉक्स:
ऑफिस के बाद फोन को खुद से दूर रखें. अपनी हॉबी या परिवार को समय दें ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: वर्क फ्रॉम होम (WFH) बर्नआउट सामान्य थकान से कैसे अलग है?
उत्तर:
सामान्य थकान आराम करने या एक अच्छी नींद के बाद ठीक हो जाती है. लेकिन बर्नआउट एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है जहाँ आप लगातार खालीपन, चिड़चिड़ापन और काम के प्रति अरुचि महसूस करते हैं, जो लंबी छुट्टी के बाद भी कम नहीं होती.

प्रश्न 2: बर्नआउट के वे कौन से लक्षण हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?
उत्तर:
लोग अक्सर ‘डिजिटल फटीग’ (हर समय ईमेल चेक करना), अनिद्रा, काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसे लक्षणों को सामान्य तनाव समझकर छोड़ देते हैं, जबकि ये बर्नआउट की शुरुआत हो सकते हैं.

प्रश्न 3: क्या घर से काम करने पर मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा ज्यादा होता है?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि घर और ऑफिस के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ (Always-on culture) का दबाव मानसिक तनाव और ‘मेंटल एग्जॉशन’ का मुख्य कारण बनता है.

प्रश्न 4: बर्नआउट से बचने के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
उत्तर:
सबसे जरूरी है ‘वर्क-लाइफ बाउंड्री’ तय करना. एक निश्चित वर्कस्पेस बनाना, काम के घंटों के बाद डिजिटल उपकरणों से दूरी (Digital Detox) बनाना और नियमित ब्रेक लेना इसमें बेहद मददगार साबित होता है.

प्रश्न 5: क्या बर्नआउट से पूरी तरह रिकवर होना संभव है?
उत्तर:
बिल्कुल, समय पर लक्षणों की पहचान और अपनी जीवनशैली में बदलाव (जैसे हॉबी के लिए समय निकालना और फिजिकल एक्टिविटी) के जरिए बर्नआउट से रिकवर हुआ जा सकता है. गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना भी फायदेमंद होता है.

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Work From Home Burnout Signs : लगातार वर्क फ्रॉम होम (WFH) ने हमारे काम करने के तरीके को बिल्‍कुल बदल दिया है. कोरोना महामारी के बाद घर से काम करने का ये तरीका काफी पॉपुलर हुआ, लेकिन इसके साथ ही ‘बर्नआउट’ जैसी नई चुनौती भी साथ में आ गई. आमतौर पर न्‍यू मॉम्‍स ऐसा काम पसंद करती हैं जिससे वे घर और बच्‍चों को भी संंभाल सकें और ऑफिस के काम से कुछ पैसे भी बना सकें. लेकिन 24 घंटे काम करने और दोनों हालातों को सही तरीके से मैनेज करते-करते मानसिक थकान और तनाव का बढ़ना स्‍वभाविक है.

दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है.

अगर आप भी दिन भर काम करने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो यह महज थकान नहीं, बल्कि बर्नआउट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और रिकवरी के उपाय अपनाना आपकी मानसिक सेहत के लिए अनिवार्य है.

वर्क फ्रॉम होम बर्नआउट के 10 संकेत, जिन्हें अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं-

मायोक्‍लीनिक के अनुसार, रिमोट वर्क के दौरान बर्नआउट तब होता है जब काम का तनाव आपकी सहनशक्ति से बाहर हो जाता है. यहाँ वे 10 प्रमुख लक्षण हैं जिन पर आपको गौर करना चाहिए:
  1. हर समय थकान महसूस करना: नींद पूरी होने के बावजूद आप सुबह उठते ही थका हुआ महसूस करते हैं.
  2. एकाग्रता में कमी: छोटे-छोटे काम करने में भी सामान्य से अधिक समय लगना या बार-बार ध्यान भटकना.
  3. चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर सहकर्मियों या परिवार के सदस्यों पर गुस्सा आना.
  4. काम से अलगाव: अपनी उपलब्धियों में खुशी महसूस न होना और काम को सिर्फ एक बोझ समझना.
  5. नींद का पैटर्न बदलना: रात भर काम के बारे में सोचना या नींद न आने की समस्या (Insomnia).
  6. शारीरिक समस्याएं: बिना किसी बीमारी के सिरदर्द, पीठ दर्द या आंखों में खिंचाव महसूस होना.
  7. सोशल विड्रॉल: दोस्तों या परिवार से बात करने की इच्छा खत्म हो जाना.
  8. प्रोत्साहन की कमी: नए आइडियाज पर काम करने की इच्छा या रचनात्मकता का पूरी तरह खत्म हो जाना.
  9. डिजिटल एडिक्शन: काम खत्म होने के बाद भी बार-बार ईमेल या मैसेज चेक करते रहना.
  10. काम के घंटों का कोई अंत न होना: देर रात तक काम करना क्योंकि आपको लगता है कि काम कभी खत्म ही नहीं होगा.

बर्नआउट से रिकवरी के तरीके:
सीमाएं निर्धारित करें (Set Boundaries):
काम शुरू करने और खत्म करने का एक निश्चित समय तय करें. लैपटॉप बंद होने का मतलब है कि अब आप ऑफिस के लिए उपलब्ध नहीं हैं.
डेडिकेटेड वर्कस्पेस:
बिस्तर या सोफे पर बैठकर काम करने के बजाय एक अलग डेस्क और कुर्सी का उपयोग करें. इससे दिमाग को ‘वर्क मोड’ और ‘रिलैक्स मोड’ के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है.
शेड्यूल ब्रेक:
हर एक घंटे के काम के बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन फ्री’ ब्रेक लें. थोड़ा टहलें या पानी पिएं.
डिजिटल डिटॉक्स:
ऑफिस के बाद फोन को खुद से दूर रखें. अपनी हॉबी या परिवार को समय दें ताकि आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सके.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: वर्क फ्रॉम होम (WFH) बर्नआउट सामान्य थकान से कैसे अलग है?
उत्तर:
सामान्य थकान आराम करने या एक अच्छी नींद के बाद ठीक हो जाती है. लेकिन बर्नआउट एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है जहाँ आप लगातार खालीपन, चिड़चिड़ापन और काम के प्रति अरुचि महसूस करते हैं, जो लंबी छुट्टी के बाद भी कम नहीं होती.

प्रश्न 2: बर्नआउट के वे कौन से लक्षण हैं जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?
उत्तर:
लोग अक्सर ‘डिजिटल फटीग’ (हर समय ईमेल चेक करना), अनिद्रा, काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने जैसे लक्षणों को सामान्य तनाव समझकर छोड़ देते हैं, जबकि ये बर्नआउट की शुरुआत हो सकते हैं.

प्रश्न 3: क्या घर से काम करने पर मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा ज्यादा होता है?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि घर और ऑफिस के बीच की सीमाएं खत्म हो जाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ (Always-on culture) का दबाव मानसिक तनाव और ‘मेंटल एग्जॉशन’ का मुख्य कारण बनता है.

प्रश्न 4: बर्नआउट से बचने के लिए सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
उत्तर:
सबसे जरूरी है ‘वर्क-लाइफ बाउंड्री’ तय करना. एक निश्चित वर्कस्पेस बनाना, काम के घंटों के बाद डिजिटल उपकरणों से दूरी (Digital Detox) बनाना और नियमित ब्रेक लेना इसमें बेहद मददगार साबित होता है.

प्रश्न 5: क्या बर्नआउट से पूरी तरह रिकवर होना संभव है?
उत्तर:
बिल्कुल, समय पर लक्षणों की पहचान और अपनी जीवनशैली में बदलाव (जैसे हॉबी के लिए समय निकालना और फिजिकल एक्टिविटी) के जरिए बर्नआउट से रिकवर हुआ जा सकता है. गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना भी फायदेमंद होता है.

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