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नर्स का काम सिर्फ इंजेक्शन लगाना नहीं, ये 5 काम भी ड्यूटी का हिस्सा, आसान नहीं वर्क लाइफ बैलेंस रखना

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International Nurses Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस हर साल 12 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है. यह दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन के रूप में उनकी याद और स्वास्थ्य सेवा में नर्सों के निस्वार्थ योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है. अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाएं नर्सों की जिम्मेदारी हैं. हालांकि उनके सामने लंबी ड्यूटी, तनाव और स्टाफ की कमी जैसी कई चुनौतियां भी होती हैं.

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इंटरनेशनल नर्सेस डे का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना है.

Nurses Duties and Struggles in India: अस्पताल में जब आप भर्ती होते हैं, तब आपका इलाज डॉक्टर करते हैं, लेकिन आपकी देखभाल की जिम्मेदारी नर्सों की होती है. अच्छे ट्रीटमेंट के बाद जब मरीज घर जाते हैं, तो वे डॉक्टर्स की तारीफ खूब करते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करने वाली नर्स भी इसकी पूरी हकदार होती हैं. अस्पतालों में मरीजों की केयर से लेकर दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाओं में नर्सों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है और इस दिन का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना होता है.

नई दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर में नर्सिंग सुपरवाइजर बिंसी टोनियो ने News18 को बताया कि अस्पताल में नर्स का काम सिर्फ दवा देना या इंजेक्शन लगाना ही नहीं होता है. नर्सें मरीजों की पूरी देखभाल से जुड़ी होती हैं. मरीज का ब्लड प्रेशर, तापमान, ऑक्सीजन लेवल और दूसरी जरूरी कंडीशंस की मॉनिटरिंग करना भी ड्यूटी का हिस्सा होता है. डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट और दवाओं को सही समय पर मरीज तक पहुंचाना भी नर्सों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कई बार मरीज की हालत में छोटे-छोटे बदलाव सबसे पहले नर्सें ही नोटिस करती हैं और तुरंत डॉक्टर को जानकारी देती हैं.

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित फोर्टिस ला फेम हॉस्पिटल के लेबर रूम की नर्सिंग इंचार्ज रेखा जॉन ने बताया कि आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु विभाग जैसे सेंसिटिव डिपार्टमेंट में नर्सों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी, मेडिकल उपकरणों को संभालना और इमरजेंसी कंडीशन में तेजी से प्रतिक्रिया देना उनके काम का अहम हिस्सा होता है. कई बार मरीज और उनके परिवार वाले मानसिक तनाव में होते हैं, ऐसे में नर्सें उन्हें भावनात्मक सहारा देने का काम भी करती हैं. जब मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं, तो वह नर्सों के लिए काफी संतोषजनक होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग लाई है.

नर्सों के सामने चुनौतियां भी कम नहीं

एक्सपर्ट्स की मानें तो नर्सों का काम बेहद सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. लंबे और थकाऊ ड्यूटी घंटे, रात की शिफ्ट, लगातार खड़े रहकर काम करना और एक साथ कई मरीजों की जिम्मेदारी संभालना शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन हो सकता है. कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी होने के कारण नर्सों पर काम का दबाव और बढ़ जाता है. इसके अलावा गंभीर मरीजों और मौत जैसी परिस्थितियों का सामना करना मानसिक तनाव का कारण बन सकता है. कई बार नर्सों को मरीजों या उनके परिजनों के गुस्से और भावनात्मक दबाव का भी सामना करना पड़ता है. लगातार तनाव और थकान की वजह से कई नर्सें बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकावट की समस्या से जूझती हैं. घर की जिम्मेदारियां भी नर्सों के कंधों पर होती हैं. ऐसे में उनके लिए वर्क लाइफ बैलेंस करना भी काफी चैलेंजिंग होता है.

तकनीक और मेडिकल सिस्टम में लगातार हो रहे बदलावों के साथ नर्सों को खुद को लगातार अपडेट भी रखना पड़ता है. नई मशीनों, दवाओं और इलाज के तरीकों की जानकारी रखना जरूरी होता है. इसके लिए ट्रेनिंग और निरंतर सीखना उनकी प्रोफेशनल जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है. स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नर्सों की स्थिति और कार्य परिस्थितियों में सुधार बेहद जरूरी है. बेहतर वेतन, पर्याप्त स्टाफ, सुरक्षित कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सुविधाएं नर्सों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. साथ ही समाज में उनके योगदान को सही सम्मान देना भी जरूरी है. नर्सें किसी भी अस्पताल की बैकबोन मानी जाती हैं, क्योंकि उनकी मदद से ही ट्रीटमेंट कंप्लीट हो पाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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International Nurses Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस हर साल 12 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है. यह दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन के रूप में उनकी याद और स्वास्थ्य सेवा में नर्सों के निस्वार्थ योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है. अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाएं नर्सों की जिम्मेदारी हैं. हालांकि उनके सामने लंबी ड्यूटी, तनाव और स्टाफ की कमी जैसी कई चुनौतियां भी होती हैं.

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इंटरनेशनल नर्सेस डे का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना है.

Nurses Duties and Struggles in India: अस्पताल में जब आप भर्ती होते हैं, तब आपका इलाज डॉक्टर करते हैं, लेकिन आपकी देखभाल की जिम्मेदारी नर्सों की होती है. अच्छे ट्रीटमेंट के बाद जब मरीज घर जाते हैं, तो वे डॉक्टर्स की तारीफ खूब करते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करने वाली नर्स भी इसकी पूरी हकदार होती हैं. अस्पतालों में मरीजों की केयर से लेकर दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाओं में नर्सों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है और इस दिन का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना होता है.

नई दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर में नर्सिंग सुपरवाइजर बिंसी टोनियो ने News18 को बताया कि अस्पताल में नर्स का काम सिर्फ दवा देना या इंजेक्शन लगाना ही नहीं होता है. नर्सें मरीजों की पूरी देखभाल से जुड़ी होती हैं. मरीज का ब्लड प्रेशर, तापमान, ऑक्सीजन लेवल और दूसरी जरूरी कंडीशंस की मॉनिटरिंग करना भी ड्यूटी का हिस्सा होता है. डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट और दवाओं को सही समय पर मरीज तक पहुंचाना भी नर्सों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कई बार मरीज की हालत में छोटे-छोटे बदलाव सबसे पहले नर्सें ही नोटिस करती हैं और तुरंत डॉक्टर को जानकारी देती हैं.

दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित फोर्टिस ला फेम हॉस्पिटल के लेबर रूम की नर्सिंग इंचार्ज रेखा जॉन ने बताया कि आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु विभाग जैसे सेंसिटिव डिपार्टमेंट में नर्सों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी, मेडिकल उपकरणों को संभालना और इमरजेंसी कंडीशन में तेजी से प्रतिक्रिया देना उनके काम का अहम हिस्सा होता है. कई बार मरीज और उनके परिवार वाले मानसिक तनाव में होते हैं, ऐसे में नर्सें उन्हें भावनात्मक सहारा देने का काम भी करती हैं. जब मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं, तो वह नर्सों के लिए काफी संतोषजनक होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग लाई है.

नर्सों के सामने चुनौतियां भी कम नहीं

एक्सपर्ट्स की मानें तो नर्सों का काम बेहद सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. लंबे और थकाऊ ड्यूटी घंटे, रात की शिफ्ट, लगातार खड़े रहकर काम करना और एक साथ कई मरीजों की जिम्मेदारी संभालना शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन हो सकता है. कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी होने के कारण नर्सों पर काम का दबाव और बढ़ जाता है. इसके अलावा गंभीर मरीजों और मौत जैसी परिस्थितियों का सामना करना मानसिक तनाव का कारण बन सकता है. कई बार नर्सों को मरीजों या उनके परिजनों के गुस्से और भावनात्मक दबाव का भी सामना करना पड़ता है. लगातार तनाव और थकान की वजह से कई नर्सें बर्नआउट यानी मानसिक और शारीरिक थकावट की समस्या से जूझती हैं. घर की जिम्मेदारियां भी नर्सों के कंधों पर होती हैं. ऐसे में उनके लिए वर्क लाइफ बैलेंस करना भी काफी चैलेंजिंग होता है.

तकनीक और मेडिकल सिस्टम में लगातार हो रहे बदलावों के साथ नर्सों को खुद को लगातार अपडेट भी रखना पड़ता है. नई मशीनों, दवाओं और इलाज के तरीकों की जानकारी रखना जरूरी होता है. इसके लिए ट्रेनिंग और निरंतर सीखना उनकी प्रोफेशनल जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है. स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नर्सों की स्थिति और कार्य परिस्थितियों में सुधार बेहद जरूरी है. बेहतर वेतन, पर्याप्त स्टाफ, सुरक्षित कार्यस्थल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सुविधाएं नर्सों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. साथ ही समाज में उनके योगदान को सही सम्मान देना भी जरूरी है. नर्सें किसी भी अस्पताल की बैकबोन मानी जाती हैं, क्योंकि उनकी मदद से ही ट्रीटमेंट कंप्लीट हो पाता है.

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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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