करोड़ों की संपत्ति, पावर पैक परिवार, फिटनेस फ्रीक और लग्जरी लाइफस्टाइल, सब होने के बाद भी अवसाद में क्यों गए प्रतीक यादव

Last Updated:May 13, 2026, 15:56 IST Prateek Yadav Depressed despite being healthy and wealthy : पैसे की कोई कमी नहीं, परिवार इतना पावरफुल कि एक इशारे पर बड़ा से बड़ा काम भी छोटा पड़ जाए, फिटनेस का ऐसा चस्का कि देश भर में अपना जिम का चेन खोल ले. फिर भी प्रतीक यादव इन सबसे बेजार हो गए थे. कहा जा रहा है कि वे गहरे अवसाद में चले गए थे. इतना सब कुछ होने के बावजूद आखिर कोई कैसे अवसाद में चला जाता है. क्या डिप्रेशन का अमीरी-गरीबी से संबंध है. Prateek Yadav Death : साल 2005 के आसपास की बात है. तब प्रतीक यादव महज 16-17 साल के थे. लेकिन उनके वजूद पर सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया था. वे देश के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव के पुत्र तो थे लेकिन सार्वजनिक रूप से इसकी मान्यता नहीं थी. दुनिया को तब पता चला जब अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की. इस याचिका में कहा गया कि मुलायम सिंह यादव की दो पत्नियां हैं और दोनों के नाम से कई संपत्तियां हैं लेकिन मुलायम सिंह यादव सिर्फ एक पत्नी की का व्यौरा अपने हलफनामे में बताते हैं. इस सनसनीखेज रहस्योदघाटन के बाद मुलायम सिंह यादव ने पहली बार यह स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी और प्रतीक यादव उनका बेटा है. यह भूमिका देना इसलिए जरूरी था ताकि आपको पता चले कि प्रतीक यादव किस तरह की जटिलताओं, अस्तित्व के संकटों और गुमनामी की कोख से बाहर आए थे. इन सबके बावजूद प्रतीक यादव की रसूख और उनकी विलासिता में कोई कमी नहीं थी. वे राज्य के सीएम और दिग्गज नेता के बेटे थे. डिप्रेशन का अमीरी-गरीबी से नाता नहींरिपोर्टों के मुताबिक उनके पास रियल स्टेट का बड़ा कारोबार था और जिम का चेन था. साथ ही वे सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर से भी कमाई कर लेते थे. ऐसे में पैसे की कमी की तो कोई बात ही नहीं थी. दूसरी ओर वे बेहद फिटनेस फ्रीक थी, लग्जरी लाइफस्टाइल और भारी शानो-शौकत उनकी पहचान थी. इन सबके बावजूद वे कहीं न कहीं गोल्डन केज में बंद थे. इनती भीड़ में तन्हा. शायद यही वह कारण रहा होगा जब वे अवसाद में गए होंगे. अक्सर समाज में यह भ्रम रहता है कि डिप्रेशन केवल गरीबी, असफलता या अभाव से उपजता है. लेकिन मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखे तो खाली पेट और खाली मन के डिप्रेशन में बड़ा अंतर होता है. जब किसी व्यक्ति के पास सत्ता, पैसा और फिटनेस जैसी सभी बाहरी चीजें मौजूद हों, तब भी वह अवसाद का शिकार हो सकता है. दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर और क्लिनिकल सायकोलॉजिस्ट डॉ अरुणा ब्रूटा कहती हैं अवसाद का अमीरी-गरीबी से कोई संबंध नहीं है. यह एक बीमारी है और बीमारी किसी को भी हो सकती है. प्रतीक यादव को किस कारण अवसाद हुई यह तो उनके डॉक्टर ही बताएंगे लेकिन कई स्थितियों में लोग अवसाद में चले जाते हैं चाहे उसके पास कितना भी पैसा या पावर ही क्यों न हो. डिप्रेशन का भावनात्मक कारण हेदोनिक एडेप्टेशन –मनोविज्ञान में एक शब्द है हेदोनिक ट्रेडमिल. इसका अर्थ है कि इंसान कितनी भी बड़ी उपलब्धि या सुख प्राप्त कर ले. एक समय के बाद यह सब नीरस लगने लगता है. जब किसी व्यक्ति के पास दुनिया की हर सुख-सुविधा पहले से मौजूद हो, तो उसके मस्तिष्क को डोपामाइन का किक मिलना बंद हो जाता है. इसलए जीवन में कुछ नया पाने की उत्तेजना खत्म होने लगती है और गहरा खालीपन आने लगता है. इसे बौद्धिक ऊब कहते हैं. अस्तित्वगत संकट- जब जीवन में सब सुख-सुविधा उपलब्ध हो तब इंसान आत्म-बोध या जीवन के अर्थ को तलाशने लगता है. जो व्यक्ति ताकतवर परिवार से होता है उसके उपर अपनी विरासत को बचाने या बड़ा करने का भारी दबाव होता है. यदि उसे अपने काम में कोई वास्तविक उद्देश्य या अर्थ नजर नहीं आता, तो वह सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है वाली भावना में फंस जाता है. फिटनेस और इमेज का दबाव- जिम और फिटनेस का जुनून कभी-कभी व्यक्ति को ज्यादा चिंता में डाल देता है. जो व्यक्ति पावरफुल परिवार से होता है उसमें हमेशा परफेक्ट दिखने की दबाव रहता है. परफेक्शन का बोझ ज्यादा होने से मानसिक थकान होती है. ऐसे लोग कई बार जिम और सप्लीमेंट का सहारा लेते हैं जिससे हार्मोनल असंतुलन पैदा होने लगता है. इससे न्यूरोट्रांसमीटर में उतार-चढ़ाव होने लगता है और व्यक्ति गहरे अवसाद में चला जाता है. वास्तविक संबंधों का अभाव –कहा जाता है कि टॉप पर पहुंचकर व्यक्ति अकेला हो जाता है. जब व्यक्ति बहुत बड़ा हो जाता है तो उसके आगे-पीछे चाटुकारों की एक फौज लग जाती है लेकिन वह व्यक्ति अपनी कमजोरी या अपनी मनोभावों को उन सबसे व्यक्त नहीं कर पाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी स्थिति कमजोर होगी. यह भावनात्मक अलगाव डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है. बायोकेमिकल डिजीज के कई कारण डॉ. अरुणा ब्रुटा के मुताबिक अवसाद कई तरह के होते हैं. प्रतीक यादव को चाहे जो भी अवसाद रहा हो लेकिन यह बहुत खतरनाक होता है. एक बायपोलर डिप्रेसिव डिसोर्डर होता है. इसमें मरीज में आत्महत्या की प्रवृति होती है. वास्तव में सुसाइडोलॉजी बहुत बड़ा साइंस है. इसे लेकर कई रिसर्च हो चुकी है लेकिन अब तक पूरी तरह से यह स्पष्ट नहीं हो पाई है. इसलिए अभी और रिसर्च की जरूरत होती है. एक साइकोसोमेटिक होता है. इसमें ब्रेन का न्यूरोट्रांसमिटर असंतुलित हो जाता है. न्यूरोट्रांसमीटर में खुशी और भावनाओं को नियंत्रित करने वाले डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन होते हैं. इनकी मात्रा कम-ज्यादा हो जाती है. इसलिए यह एक मानसिक बीमारी है जिसका इलाज कराना जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति में न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन हो जाए तो इसका सडेन रिएक्शन होता है. इसलिए इसे बायोकेमिकल डिजीज कहा जाता है. कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी होता है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके
Temple Visit Not Essential to be Hindu, SC Says; Live Life Way

Hindi News National Subramanya Case: Temple Visit Not Essential To Be Hindu, SC Says; Live Life Way नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका है। हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या खास पूजा-पाठ जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि घर में दीया जलाना भी आस्था दिखाने के लिए पर्याप्त है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने की। बेंच धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव, सबरीमाला मंदिर और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े धार्मिक स्वतंत्रता मामलों पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को सुनवाई का यह 15वां दिन है। बेंच में जस्टिस बी वी नागरत्ना, एम एम सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… व्यक्ति अपनी आस्था को लेकर स्वतंत्र सुनवाई के दौरान इंटरविनर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डॉ. जी मोहन गोपाल ने कहा कि धार्मिक समुदायों के भीतर से ही सामाजिक न्याय की मांग उठ रही है। उन्होंने 1966 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि तब हिंदू उसे माना गया था, जो वेदों को सर्वोच्च मानता है। उन्होंने कहा, हममें से किसी ने भी यह नहीं कहा कि हर हिंदू वेदों को सर्वोच्च मानता है। मैं वेदों का सम्मान करता हूं, लेकिन क्या आज हर हिंदू ऐसा मानता है? इस पर जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा, “इसी वजह से हिंदू धर्म को जीवन जीने का तरीका कहा जाता है। हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना जरूरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी आस्था को लेकर स्वतंत्र है और किसी को इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है। इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 14 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते 7 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला-हर धार्मिक प्रथा को चुनौती गलत 12 मई- सुधार के नाम पर धर्म की आजादी नहीं छीन सकते ————————————————- ये खबर भी पढ़ें: सुधार के नाम पर धर्म की आजादी नहीं छीन सकते:सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट बोला- जनता की मांग पर सुधार होंगे, जबरन थोपा तो दखल देंगे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समाज की जरूरतों के अनुसार प्रावधान बनाए हैं, जिन्हें नौ जजों की बेंच बदला नहीं सकती। पढ़े पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Temple Visit Not Essential to be Hindu, SC Says; Live Life Way

Hindi News National Subramanya Case: Temple Visit Not Essential To Be Hindu, SC Says; Live Life Way नई दिल्ली33 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका है। हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या खास पूजा-पाठ जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि घर में दीया जलाना भी आस्था दिखाने के लिए पर्याप्त है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने की। बेंच धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव, सबरीमाला मंदिर और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े धार्मिक स्वतंत्रता मामलों पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को सुनवाई का यह 15वां दिन है। बेंच में जस्टिस बी वी नागरत्ना, एम एम सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… व्यक्ति अपनी आस्था को लेकर स्वतंत्र सुनवाई के दौरान इंटरविनर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डॉ. जी मोहन गोपाल ने कहा कि धार्मिक समुदायों के भीतर से ही सामाजिक न्याय की मांग उठ रही है। उन्होंने 1966 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि तब हिंदू उसे माना गया था, जो वेदों को सर्वोच्च मानता है। उन्होंने कहा, हममें से किसी ने भी यह नहीं कहा कि हर हिंदू वेदों को सर्वोच्च मानता है। मैं वेदों का सम्मान करता हूं, लेकिन क्या आज हर हिंदू ऐसा मानता है? इस पर जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा, “इसी वजह से हिंदू धर्म को जीवन जीने का तरीका कहा जाता है। हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना जरूरी नहीं है।” उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी आस्था को लेकर स्वतंत्र है और किसी को इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है। इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 14 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते 7 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला-हर धार्मिक प्रथा को चुनौती गलत 12 मई- सुधार के नाम पर धर्म की आजादी नहीं छीन सकते ————————————————- ये खबर भी पढ़ें: सुधार के नाम पर धर्म की आजादी नहीं छीन सकते:सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट बोला- जनता की मांग पर सुधार होंगे, जबरन थोपा तो दखल देंगे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समाज की जरूरतों के अनुसार प्रावधान बनाए हैं, जिन्हें नौ जजों की बेंच बदला नहीं सकती। पढ़े पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मोहाली नगर निगम चुनाव 2026: तारीखें, वार्ड और मतदान | वह सब जो आपको जानना आवश्यक है | चंडीगढ़ समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 15:38 IST नामांकन दाखिल करने से लेकर मतदान और गिनती की तारीखों तक, पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने मोहाली जिले में नगर निगम चुनावों के लिए पूरे कार्यक्रम की घोषणा कर दी है चुनाव प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू होने के साथ, आने वाले दिनों में मोहाली जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने मोहाली जिले में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है, जिसमें नगर निगम मोहाली के वार्डों के साथ-साथ जिले भर की कई नगर परिषदें शामिल हैं। मोहाली नगर निगम और खरड़, कुराली, नया गांव, जीरकपुर, डेराबस्सी, लालरू और बनूर नगर परिषदों में चुनाव कराए जाएंगे। आयोग द्वारा जारी चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक उम्मीदवार 13 मई से 16 मई तक सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं. नामांकन पत्रों की जांच 18 मई को की जाएगी, जबकि उम्मीदवारों को 19 मई तक अपना नामांकन वापस लेने की अनुमति होगी। चुनाव के लिए मतदान 26 मई को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतपत्रों के माध्यम से होगा. जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा 29 मई को होनी है द ट्रिब्यून. मोहाली वार्डों के लिए अलग-अलग रिटर्निंग अधिकारी नियुक्त नगर निगम मोहाली के वार्ड नंबर 1 से 25 के लिए नामांकन पत्र गमाडा के अतिरिक्त मुख्य प्रशासक, रिटर्निंग ऑफिसर अमरेंद्र सिंह मल्ही के कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। वार्ड नंबर 26 से 50 तक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर दमनदीप कौर, एसडीएम मोहाली के कार्यालय में जमा कर सकते हैं। नगर पालिका परिषदों के लिए नामांकन केंद्र 27 वार्डों वाली नगर कौंसिल खरड़ के लिए नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी गुरमीत सिंह, एसडीएम खरड़ की अदालत में स्वीकार किए जाएंगे। 19 वार्डों वाली नगर काउंसिल डेराबस्सी में उम्मीदवार रिटर्निंग ऑफिसर अमित गुप्ता, एसडीएम डेराबस्सी की कोर्ट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नगर परिषद बनूर के लिए, जिसमें 13 वार्ड हैं, नामांकन बनूर तहसील कार्यालय में रिटर्निंग ऑफिसर-सह-एसडीएम डॉ. अंकिता कंसल के समक्ष दाखिल किए जा सकते हैं। 17 वार्डों वाली नगर परिषद कुराली में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार कुराली में नगर परिषद कार्यालय में रिटर्निंग अधिकारी सुखविंदर सिंह, कार्यकारी अभियंता, मंडी बोर्ड के समक्ष नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं। नगर परिषद नया गांव, जिसमें 21 वार्ड शामिल हैं, के लिए नामांकन पत्र नगर परिषद कार्यालय नया गांव में रिटर्निंग अधिकारी महकमीत सिंह, बीडीपीओ खरड़ द्वारा स्वीकार किए जाएंगे। 31 वार्डों को कवर करने वाली नगर परिषद जीरकपुर में नामांकन रिटर्निंग अधिकारी बलजीत सिंह सोही, बीडीपीओ डेराबस्सी के समक्ष नगर परिषद कार्यालय जीरकपुर में जमा किए जा सकते हैं। नगर परिषद लालरू के लिए, जिसमें 17 वार्ड हैं, उम्मीदवार लालरू में नगर परिषद कार्यालय में रिटर्निंग अधिकारी बीरकरन सिंह, तहसीलदार डेराबस्सी के समक्ष अपना पर्चा दाखिल कर सकते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को जारी किए निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी ने नगर निगम अधिकारियों और कार्यकारी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा अनुरोधित अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) बिना किसी देरी के निर्धारित समय सीमा के भीतर जारी किए जाएं। अधिकारियों से कहा गया कि यदि कोई अभ्यर्थी एनओसी के स्थान पर शपथ पत्र देता है तो उसे भी स्वीकार किया जाए। डीईओ ने रिटर्निंग अधिकारियों को जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैध नामांकन की सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया। चुनावी तैयारियों पर ध्यान दें चुनाव अधिकारियों को चुनाव के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अद्यतन मतदाता सूची बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने चुनाव कर्मियों के लिए उचित प्रशिक्षण, मतदान दलों की समय पर रवानगी और वापसी, मतपेटियों के सुरक्षित भंडारण और मतदान के दिन से पहले मतगणना केंद्रों की पहचान के महत्व पर जोर दिया। चुनाव प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू होने के साथ, आने वाले दिनों में मोहाली जिले में प्रशासनिक तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : चंडीगढ़, भारत, भारत समाचार शहर चंडीगढ़ मोहाली नगर निगम चुनाव 2026: तारीखें, वार्ड और मतदान | तुम्हें सिर्फ ज्ञान की आवश्यकता है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
पुलिस–प्रशासन ने घर पर जेसीबी चलाई, परिवार दबा:छतरपुर में मलबे में लहूलुहान मिले; केन-बेतवा परियोजना के लिए अतिक्रमण हटाने गए थे

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के दौधन गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम ने आदिवासी परिवार के मकान पर बुलडोजर चला दिया। आरोप है कि परिवार घर के अंदर मौजूद था, इसके बावजूद जेसीबी चलाई गई। मलबे में दबने से पति-पत्नी और दो बच्चे घायल हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक, कार्रवाई के लिए जेसीबी मशीनें और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसी दौरान आदिवासी ग्रामीण आजाद के मकान पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई। “साहब बचा लीजिए…”, मलबे में दबा मिला परिवार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान गिरते ही चीख-पुकार मच गई। परिवार के सदस्य मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि एक बच्चा बेहोश हो गया था। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें घायल परिवार मदद की गुहार लगाता दिखाई दे रहा है। वीडियो में परिवार कह रहा था कि वे आदिवासी हैं और उन्हें बचाया जाए, लेकिन कार्रवाई नहीं रोकी गई। बुलजोडर कार्रवाई से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए… कार्रवाई के दौरान भड़के ग्रामीण, पथराव और तोड़फोड़ परिवार के घायल होने की खबर फैलते ही गांव में तनाव बढ़ गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। पथराव में एडिशनल एसपी की गाड़ी, तहसीलदार का वाहन और एक जेसीबी मशीन समेत करीब आधा दर्जन वाहनों में तोड़फोड़ हुई। कई गाड़ियों के शीशे टूट गए। प्रशासनिक अमले को भी मौके से पीछे हटना पड़ा। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रखी जा सके। प्रशासन उपद्रव और पथराव में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई जल्दबाजी और दबाव में की गई। उनका कहना है कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि मकान पूरी तरह खाली है या नहीं। केन-बेतवा परियोजना के लिए हटाया जा रहा था अतिक्रमण प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गांव में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। टीम राजस्व और पुलिस अमले के साथ मौके पर पहुंची थी। पहले से नोटिस और समझाइश की प्रक्रिया की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीण कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई सवालों के घेरे में प्रशासनिक कार्रवाई घटना के बाद प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मकान तोड़ने से पहले यह जांच की गई थी कि घर के अंदर कोई मौजूद तो नहीं है। क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। और अगर परिवार अंदर था, तो कार्रवाई क्यों नहीं रोकी गई?
नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

ब्रिटेन की सबसे सफल और दिग्गज साइकिलिस्ट में से एक, तीन बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट केटी आर्चीबाल्ड ने अचानक संन्यास ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि उन्हें इसी साल होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्कॉटलैंड की टीम में चुना गया था। लेकिन 32 वर्षीय केटी ने ट्रैक को हमेशा के लिए अलविदा कहकर अपना नया करियर चुन लिया है। अब वह एक नर्स के रूप में मरीजों की सेवा करती नजर आएंगी। केटी ने बताया कि काफी समय से ‘असली दुनिया’ का आकर्षण उन्हें अपनी ओर खींच रहा था। वह उस दुनिया को छोड़ने से डर रही थीं जिसे वह जानती हैं और उसमें माहिर हैं। लेकिन उनका मानना है कि अब उनके अंदर कोई डर नहीं बचा है। केटी ने कहा कि मैं उस स्टार्ट लाइन तक पहुंचने के लिए बेताब थी लेकिन अब मेरा दिमाग और शरीर साथ नहीं दे रहा है। समय आ गया है कि नई पीढ़ी अपना जलवा बिखेरे। अपने नए सफर के बारे में बात करते हुए केटी ने बताया कि वह फिलहाल एक नर्स बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं और उन्हें इस नए पेशे से प्यार हो गया है। उनका कहना है कि जब लोगों को मदद की सख्त जरूरत हो और वे आप पर भरोसा कर सकें, तो उनके लिए वह भरोसेमंद इंसान बनना बहुत ही खास एहसास देता है। इस भावुक मौके पर केटी ने अपने शानदार सफर के लिए कोच, टीम के साथियों और परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी मां और अपने दिवंगत पार्टनर रैब वार्डेल को याद किया। गौरतलब है कि रैब का 2022 में 37 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से अचानक निधन हो गया था। केटी ने कहा कि रैब ने ही उन्हें सिखाया था कि जीवन में रिलैक्स रहने और मजे करने से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है और वह हर दिन इन दोनों चीजों में बेहतर हो रही हैं। 13 साल लंबा रहा करियर, 7 वर्ल्ड टाइटल जीते – केटी ने 19 साल की उम्र में ब्रिटेन की एंड्योरेंस स्क्वाड में जगह बनाई थी। अपने शानदार करियर में उन्होंने कुल 51 प्रमुख मेडल जीते। उनके नाम ओलिंपिक में दो स्वर्ण और एक रजत पदक, सात वर्ल्ड टाइटल, रिकॉर्ड 21 यूरोपियन टाइटल और एक कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक दर्ज है। – वह महिला ‘टीम परस्यूट’ में विश्व रिकॉर्ड धारक टीम का हिस्सा भी हैं। उनके पदकों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी, यदि उन्हें 2022 के बर्मिंघम गेम्स और बाद में ओलिंपिक से ठीक पहले चोट व अन्य कारणों से अपना नाम वापस नहीं लेना पड़ता।
HPCL Revenue Up 4.4% | ₹19.25 Dividend Announced

मुंबई9 मिनट पहले कॉपी लिंक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में ₹6,065 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार की वजह से कंपनी के मुनाफे में पिछले साल की तुलना में 77% की बढ़ोतरी हुई है। ₹19.25 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹10 की फेस वैल्यू वाले शेयरों पर ₹19.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। यह डिविडेंड साल के दौरान दिए गए ₹5 के अंतरिम डिविडेंड के अलावा होगा। इस पर अभी मेंबर्स की मंजूरी मिलना बाकी है। रिफाइनिंग मार्जिन में बड़ा उछाल HPCL के मुनाफे में बड़ी बढ़त का मुख्य कारण बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन रहा। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़कर 14.27 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 8.44 डॉलर प्रति बैरल था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए औसत GRM 8.79 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि पिछले साल यह 5.74 डॉलर था। रेवेन्यू और सालाना मुनाफे के आंकड़े चौथी तिमाही में उत्पादों की बिक्री से होने वाला रेवेन्यू 4.4% बढ़कर ₹1.23 लाख करोड़ रहा। कंपनी की कुल इनकम भी 4.4% की बढ़त के साथ ₹1.24 लाख करोड़ पर पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 168% उछलकर ₹18,046.89 करोड़ रहा। LPG अंडर-रिकवरी के लिए सरकारी मुआवजा पेट्रोलियम मंत्रालय ने HPCL को घरेलू LPG की बिक्री पर हुए नुकसान (अंडर-रिकवरी) की भरपाई के लिए ₹7,920 करोड़ का मुआवजा देने की बात कही है। यह राशि नवंबर 2025 से 12 समान मासिक किश्तों में दी जाएगी। वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी ने इसकी पांच किश्तों के रूप में ₹3,300 करोड़ को मान्यता दी है। क्रूड प्रोसेसिंग और डोमेस्टिक सेल्स इस तिमाही के दौरान रिफाइनरियों में कच्चे तेल के चार नए ग्रेड्स की प्रोसेसिंग की गई, जिससे पूरे साल में कुल ग्रेड्स की संख्या 52 हो गई। हालांकि, चौथी तिमाही में क्रूड थ्रूपुट घटकर 6.43 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 6.74 मिलियन टन था। घरेलू बिक्री में सुधार हुआ और यह 12.11 मिलियन टन से बढ़कर 12.43 मिलियन टन रही। इन्फ्रास्ट्रक्चर और एक्सपेंशन पर खर्च HPCL ने चौथी तिमाही में ₹4,611 करोड़ का पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स किया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए यह खर्च ₹15,705 करोड़ रहा। यह निवेश रिफाइनिंग और मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, नई बिजनेस लाइन्स शुरू करने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी सुधारने पर खर्च किया गया। कंपनी ने आखिरी तिमाही में 526 नए रिटेल आउटलेट और 75 नए CNG स्टेशन भी शुरू किए हैं। क्या होता है GRM? ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) वह फायदा है जो एक रिफाइनिंग कंपनी कच्चे तेल के एक बैरल को पेट्रोल, डीजल जैसे उत्पादों में प्रोसेस करके कमाती है। अगर रिफाइनिंग की लागत निकालने के बाद मार्जिन बढ़ता है, तो कंपनी का मुनाफा भी बढ़ता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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मुंबई25 मिनट पहले कॉपी लिंक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में ₹6,065 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार की वजह से कंपनी के मुनाफे में पिछले साल की तुलना में 77% की बढ़ोतरी हुई है। ₹19.25 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ₹10 की फेस वैल्यू वाले शेयरों पर ₹19.25 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। यह डिविडेंड साल के दौरान दिए गए ₹5 के अंतरिम डिविडेंड के अलावा होगा। इस पर अभी मेंबर्स की मंजूरी मिलना बाकी है। रिफाइनिंग मार्जिन में बड़ा उछाल HPCL के मुनाफे में बड़ी बढ़त का मुख्य कारण बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन रहा। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़कर 14.27 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 8.44 डॉलर प्रति बैरल था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए औसत GRM 8.79 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि पिछले साल यह 5.74 डॉलर था। रेवेन्यू और सालाना मुनाफे के आंकड़े चौथी तिमाही में उत्पादों की बिक्री से होने वाला रेवेन्यू 4.4% बढ़कर ₹1.23 लाख करोड़ रहा। कंपनी की कुल इनकम भी 4.4% की बढ़त के साथ ₹1.24 लाख करोड़ पर पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 168% उछलकर ₹18,046.89 करोड़ रहा। LPG अंडर-रिकवरी के लिए सरकारी मुआवजा पेट्रोलियम मंत्रालय ने HPCL को घरेलू LPG की बिक्री पर हुए नुकसान (अंडर-रिकवरी) की भरपाई के लिए ₹7,920 करोड़ का मुआवजा देने की बात कही है। यह राशि नवंबर 2025 से 12 समान मासिक किश्तों में दी जाएगी। वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी ने इसकी पांच किश्तों के रूप में ₹3,300 करोड़ को मान्यता दी है। क्रूड प्रोसेसिंग और डोमेस्टिक सेल्स इस तिमाही के दौरान रिफाइनरियों में कच्चे तेल के चार नए ग्रेड्स की प्रोसेसिंग की गई, जिससे पूरे साल में कुल ग्रेड्स की संख्या 52 हो गई। हालांकि, चौथी तिमाही में क्रूड थ्रूपुट घटकर 6.43 मिलियन टन रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 6.74 मिलियन टन था। घरेलू बिक्री में सुधार हुआ और यह 12.11 मिलियन टन से बढ़कर 12.43 मिलियन टन रही। इन्फ्रास्ट्रक्चर और एक्सपेंशन पर खर्च HPCL ने चौथी तिमाही में ₹4,611 करोड़ का पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स किया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए यह खर्च ₹15,705 करोड़ रहा। यह निवेश रिफाइनिंग और मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, नई बिजनेस लाइन्स शुरू करने और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी सुधारने पर खर्च किया गया। कंपनी ने आखिरी तिमाही में 526 नए रिटेल आउटलेट और 75 नए CNG स्टेशन भी शुरू किए हैं। क्या होता है GRM? ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) वह फायदा है जो एक रिफाइनिंग कंपनी कच्चे तेल के एक बैरल को पेट्रोल, डीजल जैसे उत्पादों में प्रोसेस करके कमाती है। अगर रिफाइनिंग की लागत निकालने के बाद मार्जिन बढ़ता है, तो कंपनी का मुनाफा भी बढ़ता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
हिमाचल के गर्वनर ने अपना काफिला किया आधा:हेलीकॉप्टर इस्तेमाल नहीं करने की भी घोषणा; PM मोदी की अपील पर लिया फैसला

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करने और अपना काफिला आधा करने की घोषणा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की अपील पर यह कदम उठाया है। राज्यपाल के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर टिकी है। उन्होंने अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की। वहीं पश्चिम एशिया में जारी संकट और बढ़ती वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच राज्यपाल ने हिमाचल को ईंधन बचत की दिशा में मॉडल राज्य बनाने का संकल्प जताया। राज्यपाल ने घोषणा की कि अब लोक भवन को ‘फ्यूल कंजर्वेशन जोन’ के रूप में संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर रविवार को “पेट्रोल-फ्री संडे” मनाया जाएगा। रविवार को किसी भी सरकारी वाहन में एक लीटर भी आयातित ईंधन का उपयोग नहीं होगा। रविवार के सभी सरकारी कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या संयुक्त यात्रा व्यवस्था के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। गैर-जरूरी बैठक अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी राज्यपाल ने अपने आधिकारिक काफिले (कन्वॉय) का आकार तत्काल प्रभाव से आधा करने के निर्देश दिए। साथ ही गैर-जरूरी बैठकों को अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया जाएगा, ताकि अनावश्यक सड़क यात्रा और ईंधन खर्च को कम किया जा सके। सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों को भी समेकित (कंसोलिडेट) किया जाएगा, जिससे वाहनों की आवाजाही कम हो। सरकारी कार्यक्रम के लिए हेलीकॉप्टर नहीं लेंगे राज्यपाल ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम एशिया संकट खत्म होने और वैश्विक ईंधन कीमतों में स्थिरता आने तक वह किसी भी सरकारी कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर का उपयोग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जब देश को ईंधन की हर बूंद बचाने का आह्वान किया जा रहा है, तब ईंधन की सबसे अधिक खपत वाले साधन का इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा। कुलपतियों से भी ईंधन बचाने की अपील प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) होने के नाते राज्यपाल ने कुलपतियों से भी कैंपस में ईंधन और ऊर्जा संरक्षण को संस्थागत रूप से लागू करने की अपील की। उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए कारपूलिंग, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश देने को कहा। राज्यपाल ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे कॉलेज, हॉस्टल और अपने समुदायों में ईंधन संरक्षण अभियान के “ब्रांड एंबेसडर” बनें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल संरक्षण पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उसे अपनी संस्कृति का हिस्सा भी बनाना चाहिए। साइकिल का उपयोग करें: राज्यपाल राज्यपाल ने कहा कि यह केवल ईंधन बचाने का कदम नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं सहित सभी नागरिकों से कारपूलिंग अपनाने, छोटी दूरी के लिए पैदल चलने, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।
तलाक की चर्चा पर मौनी रॉय ने तोड़ी चुप्पी:बोलीं- हमें प्राइवेसी दें, गलत खबरें न फैलाएं; सोशल मीडिया पर पति को अनफॉलो किया

एक्ट्रेस मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार के तलाक की खबरों के बीच अब मोनी ने चुप्पी तोड़ी है। मोनी ने सोशल मीडिया पर लोगों से उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने की अपील की है। मौनी रॉय ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक नोट शेयर करते हुए लिखा “सभी मीडिया हाउस से विनम्र निवेदन है कि वे गलत खबरें न फैलाएं। हमें स्पेस और प्राइवेसी दें, प्लीज।” अनफॉलो करने और फोटो डिलीट करने से शुरू हुआ विवाद तलाक की ये खबरें तब शुरू हुईं जब फैंस ने गौर किया कि मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया है। बात सिर्फ अनफॉलो करने तक ही सीमित नहीं रही, सूरज ने अपनी प्रोफाइल से शादी की कई पुरानी तस्वीरें भी डिलीट कर दी हैं। हालांकि, मौनी की प्रोफाइल पर अब भी कुछ तस्वीरें मौजूद हैं। 2022 में गोवा में हुई थी शादी मौनी रॉय और सूरज नांबियार ने 27 जनवरी 2022 को गोवा में एक ग्रैंड सेरेमनी में शादी की थी। उनकी शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। इस शादी में मलयाली और बंगाली दोनों परंपराओं का पालन किया गया था। सूरज दुबई बेस्ड बिजनेसमैन हैं और दोनों लंबे समय तक डेट करने के बाद शादी के बंधन में बंधे थे। मौनी रॉय के पास हैं कई फिल्में साल 2025 में मौनी रॉय फिल्म भूतनी में नजर आई थीं। जल्द ही वो तमिल फिल्म विश्वंभरा में कैमियो करती दिखेंगी। इसके अलावा वो है जवानी तो इश्क होना है और द वाइव्स जैसी फिल्मों में नजर आने वाली हैं।








