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Fuel Purchase Limit Lifted for Commercial Buyers from July 1

Fuel Purchase Limit Lifted for Commercial Buyers from July 1

नई दिल्ली11 मिनट पहले

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सरकार ने पेट्रोल-डीजल की खरीद पर लगाई गईं सभी इमरजेंसी पाबंदियों को 1 जुलाई से हटाने का फैसला किया है। नए आदेश के बाद अब पेट्रोल पंपों पर एक गाड़ी में एक दिन में सिर्फ 200 लीटर डीजल भरने की सीमा खत्म हो जाएगी, यानी अब आप अपनी गाड़ी में जितना चाहें उतना डीजल भरवा सकेंगे।

इसके साथ ही फैक्ट्रियों और कमर्शियल खरीदारों पर लगी रोक भी हटा दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 11 जून को पेट्रोल-डीजल की किल्लत की वजह से ये पाबंदियां लगाई थीं, जिन्हें सप्लाई सुधरने के बाद 29 जून के नए आदेश के जरिए वापस ले लिया गया है। पिछले 18 दिन से बड़े उपभोक्ता सिर्फ बल्क सेल पॉइंट्स से ही ईंधन खरीद रहे थे।

इस पूरे फैसले को आसान सवाल-जवाब में समझिए…

सवाल 1: पेट्रोल-डीजल को लेकर नया फैसला क्या है?

जवाब: सरकार ने 1 जुलाई से कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) ग्राहकों पर पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए लगी पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली हैं। अब ये ग्राहक रीटेल पेट्रोल पंपों से सामान्य रूप से फ्यूल खरीद सकेंगे। इसके अलावा आम गाड़ियों या ट्रकों के लिए एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की लिमिट को भी खत्म कर दिया गया है।

सवाल 2: पाबंदियां हटाने का फैसला क्यों लिया गया?

जवाब: मंत्रालय ने देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मौजूदा सप्लाई स्थिति की समीक्षा की है। सरकार का कहना है कि अब देश में ईंधन की सप्लाई व्यवस्था में सुधार हो गया है। ऐसे में जनहित को ध्यान में रखते हुए इन पाबंदियों की जरूरत नहीं है।

सवाल 3: ये प्रतिबंध क्यों लगाए गए थे?

जवाब: अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल लेवल पर एनर्जी मार्केट्स और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इस वजह से देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की भारी किल्लत का खतरा पैदा हो गया था। ब्लैक मार्केटिंग, जमाखोरी और डीजल के गलत डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने 11 जून को यह आपातकालीन कदम उठाया था, जिसे 90 दिन तक लागू रहना था।

सवाल 4: पिछले आदेश में कॉमर्शियल बायर्स के लिए क्या नियम थे?

जवाब: 11 जून के जारी आदेश के मुताबिक, फैक्ट्रियों, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और टेलीकॉम टावरों जैसे बड़े (कॉमर्शियल) खरीदारों के रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी गई थी। उन्हें अपने खुद के कंज्यूमर पंपों से बाजार भाव पर तेल मंगाना अनिवार्य था। इसके साथ ही रिटेल पेट्रोल पंपों पर किसी भी एक ग्राहक या गाड़ी के लिए एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल की सीमा तय कर दी गई थी।

सवाल 5: पेट्रोल पंपों पर कॉमर्शियल खरीदारों की भीड़ क्यों बढ़ने लगी थी?

जवाब: दरअसल, रीटेल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले तेल और थोक में मिलने वाले तेल की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया था। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल ₹95.20 प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों के लिए यह ₹134.50 प्रति लीटर पड़ रहा था। लगभग ₹39 प्रति लीटर के इस बड़े अंतर के कारण टेलीकॉम टावर कंपनियां, फैक्ट्रियां और बस-ट्रक ऑपरेटर थोक के बजाय सीधे पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे, जिससे पेट्रोल पंपों पर मांग अचानक असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

सवाल 6: कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों आया था?

जवाब: फरवरी के आखिर में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ गए थे। सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए रीटेल कीमतों को नहीं बढ़ाया और उन्हें स्थिर रखा। हालांकि, नियमों के मुताबिक टेलीकॉम और भारी उद्योगों जैसे थोक खरीदारों के लिए मार्केट रेट लागू रहे, जो लागत के हिसाब से बहुत ज्यादा थे। इसी वजह से दोनों रेट्स में अंतर आ गया।

सवाल 7: खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में अब क्या सुधार हुआ है?

जवाब: सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बाद खाड़ी देशों के उत्पादकों से कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई बेहतर हुई है। इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही और ऑयल शिपमेंट्स अब फिर से सामान्य हो गए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है।

सवाल 8: सरकार ने आदेश वापस लेने के लिए किस नियम का इस्तेमाल किया है?

जवाब: पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने अपने विशेष नियमों और अधिकारों (ऑर्डर 2026) का इस्तेमाल करते हुए 12 जून वाले पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। सरकार का यह नया फैसला 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

सवाल 9: इस फैसले से किस तरह के बिजनेस को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी?

जवाब: इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। ट्रकिंग कंपनियों और राज्य परिवहन की बसों को अब डीजल के लिए लंबी लाइनों या 200 लीटर की डेली लिमिट से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए भी ईंधन की उपलब्धता आसान हो जाएगी।

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ये खबर भी पढ़ें…

कॉमर्शियल LPG से लिमिट हटी, अब 100% सप्लाई होगी: केंद्र सरकार का फैसला, इंडस्ट्रीज के लिए बल्क सप्लाई पर लगी रोक भी हटी

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आज यानी 25 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई में कटौती की थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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इसके साथ ही फैक्ट्रियों और कमर्शियल खरीदारों पर लगी रोक भी हटा दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 11 जून को पेट्रोल-डीजल की किल्लत की वजह से ये पाबंदियां लगाई थीं, जिन्हें सप्लाई सुधरने के बाद 29 जून के नए आदेश के जरिए वापस ले लिया गया है। पिछले 18 दिन से बड़े उपभोक्ता सिर्फ बल्क सेल पॉइंट्स से ही ईंधन खरीद रहे थे।

इस पूरे फैसले को आसान सवाल-जवाब में समझिए…

सवाल 1: पेट्रोल-डीजल को लेकर नया फैसला क्या है?

जवाब: सरकार ने 1 जुलाई से कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) ग्राहकों पर पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए लगी पाबंदियां पूरी तरह से हटा ली हैं। अब ये ग्राहक रीटेल पेट्रोल पंपों से सामान्य रूप से फ्यूल खरीद सकेंगे। इसके अलावा आम गाड़ियों या ट्रकों के लिए एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की लिमिट को भी खत्म कर दिया गया है।

सवाल 2: पाबंदियां हटाने का फैसला क्यों लिया गया?

जवाब: मंत्रालय ने देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मौजूदा सप्लाई स्थिति की समीक्षा की है। सरकार का कहना है कि अब देश में ईंधन की सप्लाई व्यवस्था में सुधार हो गया है। ऐसे में जनहित को ध्यान में रखते हुए इन पाबंदियों की जरूरत नहीं है।

सवाल 3: ये प्रतिबंध क्यों लगाए गए थे?

जवाब: अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ग्लोबल लेवल पर एनर्जी मार्केट्स और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इस वजह से देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की भारी किल्लत का खतरा पैदा हो गया था। ब्लैक मार्केटिंग, जमाखोरी और डीजल के गलत डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने 11 जून को यह आपातकालीन कदम उठाया था, जिसे 90 दिन तक लागू रहना था।

सवाल 4: पिछले आदेश में कॉमर्शियल बायर्स के लिए क्या नियम थे?

जवाब: 11 जून के जारी आदेश के मुताबिक, फैक्ट्रियों, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और टेलीकॉम टावरों जैसे बड़े (कॉमर्शियल) खरीदारों के रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी गई थी। उन्हें अपने खुद के कंज्यूमर पंपों से बाजार भाव पर तेल मंगाना अनिवार्य था। इसके साथ ही रिटेल पेट्रोल पंपों पर किसी भी एक ग्राहक या गाड़ी के लिए एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल की सीमा तय कर दी गई थी।

सवाल 5: पेट्रोल पंपों पर कॉमर्शियल खरीदारों की भीड़ क्यों बढ़ने लगी थी?

जवाब: दरअसल, रीटेल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले तेल और थोक में मिलने वाले तेल की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया था। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल ₹95.20 प्रति लीटर था, जबकि थोक खरीदारों के लिए यह ₹134.50 प्रति लीटर पड़ रहा था। लगभग ₹39 प्रति लीटर के इस बड़े अंतर के कारण टेलीकॉम टावर कंपनियां, फैक्ट्रियां और बस-ट्रक ऑपरेटर थोक के बजाय सीधे पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने लगे, जिससे पेट्रोल पंपों पर मांग अचानक असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

सवाल 6: कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों आया था?

जवाब: फरवरी के आखिर में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम काफी बढ़ गए थे। सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए रीटेल कीमतों को नहीं बढ़ाया और उन्हें स्थिर रखा। हालांकि, नियमों के मुताबिक टेलीकॉम और भारी उद्योगों जैसे थोक खरीदारों के लिए मार्केट रेट लागू रहे, जो लागत के हिसाब से बहुत ज्यादा थे। इसी वजह से दोनों रेट्स में अंतर आ गया।

सवाल 7: खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई में अब क्या सुधार हुआ है?

जवाब: सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बाद खाड़ी देशों के उत्पादकों से कच्चे तेल और ईंधन की सप्लाई बेहतर हुई है। इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से जहाजों की आवाजाही और ऑयल शिपमेंट्स अब फिर से सामान्य हो गए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है।

सवाल 8: सरकार ने आदेश वापस लेने के लिए किस नियम का इस्तेमाल किया है?

जवाब: पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने अपने विशेष नियमों और अधिकारों (ऑर्डर 2026) का इस्तेमाल करते हुए 12 जून वाले पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। सरकार का यह नया फैसला 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

सवाल 9: इस फैसले से किस तरह के बिजनेस को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी?

जवाब: इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। ट्रकिंग कंपनियों और राज्य परिवहन की बसों को अब डीजल के लिए लंबी लाइनों या 200 लीटर की डेली लिमिट से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए भी ईंधन की उपलब्धता आसान हो जाएगी।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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