Sanjju Samson 2028 T20 World Cup Captaincy Option: Ravi Shastri Bats

नई दिल्ली20 मिनट पहले कॉपी लिंक टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने संजू सैमसन को भविष्य में भारत की टी-20 टीम का कप्तान बनाने की पैरवी की है। उनका मानना है कि सैमसन कप्तानी के मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। शास्त्री के अनुसार हाल के दिनों में सैमसन ने जिस तरह की मैच्योरिटी दिखाई है, वह उन्हें लीडरशिप रोल के लिए परफेक्ट बनाती है। शास्त्री ने ICC रिव्यू में कहा कि सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में अपनी कप्तानी में भारत को वर्ल्ड कप जिताया था, लेकिन 2028 के टी-20 वर्ल्ड कप को देखते हुए संजू बड़ा विकल्प हो सकते हैं। फिलहाल, सूर्यकुमार यादव भारतीय टी-20 टीम के कप्तान हैं। उन्होंने 8 मार्च 2026 को अहमदाबाद में भारत को टी-20 वर्ल्ड कप जिताया था। भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। क्यों संजू हैं शास्त्री की पहली पसंद? कप्तानी का अनुभव: संजू पिछले पांच सीजन से IPL में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी कर रहे हैं। वह 2022 में टीम को फाइनल तक ले जा चुके हैं। वर्ल्ड कप में प्रदर्शन: सैमसन को टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। उन्होंने क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में भारत को जीत के करीब पहुँचाया। कंसिस्टेंट परफॉर्मेंस: शास्त्री ने कहा- ‘संजू की काबिलियत पर कभी शक नहीं था, लेकिन अब उन्होंने अपनी कंसिस्टेंसी से सभी सवालों पर विराम लगा दिया है। अब वे टॉप ऑर्डर में स्थायी जगह बना चुके हैं।’ दबाव में निखर रहे हैं संजू 31 साल के सैमसन ने इस वर्ल्ड कप अभियान में लगातार तीन अर्धशतक जड़े थे। Shastri ने कहा- ‘अगले दो-तीन सालों में आप संजू का एक अलग ही रूप देखेंगे। जिस तरह की मैच्योरिटी उन्होंने IPL और इंटरनेशनल लेवल पर दिखाई है, उससे वह कप्तानी के लिए मेरी नजर में स्पष्ट उम्मीदवार हैं।’ उन्होंने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के 5 मैचों में 321 रन बनाए थे। IPL में दो शतक लगा चुके हैं संजू सैमसन IPL के मौजूदा सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए दो शतक लगा चुके हैं। उन्होंने 11 मैचों में 169.29 की स्ट्राइक रेट से 430 रन बनाए हैं। सैमसन चेन्नई के टॉप स्कोरर हैं और ऑरेंज कैप की रेस में 11वें स्थान पर हैं। ————————————————– क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL में आज CSK vs LSG, चेन्नई ने पिछले तीनों मैच जीते IPL 2026 का 59वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के बीच खेला जाएगा। मुकाबला लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में शाम 7.30 बजे खेला जाएगा। प्ले-ऑफ की रेस में बने रहने के लिए चेन्नई के लिए यह मुकाबला काफी अहम है। टीम पिछले तीनों मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में पांचवें स्थान पर है। ऋषभ पंत की कप्तानी वाली लखनऊ टीम टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
केसी बोकाड़िया बोले- ‘तीसरी बेगम’ में कड़वी सच्चाई दिखाई है:जय सियाराम विवाद, लव जिहाद मुद्दे और सेंसर बोर्ड पर खुलकर बोले फिल्ममेकर

अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुके दिग्गज फिल्ममेकर केसी बोकड़िया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ को लेकर चर्चा में हैं। लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। बोकाड़िया ने बताया कि फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है और इसका मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखना है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से विवाद, कोर्ट तक पहुंची लड़ाई और अपनी कन्विक्शन पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: ‘तीसरी बेगम’ बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: एक असली घटना से। मैं एक परिचित के घर गया था, जहां उसने गर्व से बताया कि उसकी तीन पत्नियां हैं- मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण। वहीं से मेरे मन में सवाल आया कि अलग संस्कार और खान-पान वाली लड़कियां ऐसे माहौल में कैसे एडजस्ट करती होंगी। उसी सोच से फिल्म की कहानी बनी। सवाल: फिल्म में लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और हलाला जैसे मुद्दे दिख रहे हैं। इतने विवादित विषय पर फिल्म बनाने में डर नहीं लगा? जवाब: नहीं। मैंने जो देखा और महसूस किया, वही फिल्म में दिखाया। मेरा मकसद किसी धर्म को गलत बताना नहीं, बल्कि उन लड़कियों की मानसिक स्थिति दिखाना है जो अलग माहौल में जाकर संघर्ष करती हैं। मैंने इसे संतुलित तरीके से पेश किया है। सवाल: फिल्म में क्या दिखाया गया है? जवाब: फिल्म में एक ब्राह्मण लड़की शादी के बाद मुस्लिम परिवार में जाती है। वहां उसे नाम बदलने, तौर-तरीके अपनाने और नई जिंदगी में ढलने का दबाव झेलना पड़ता है। कहानी में उसकी परेशानी, संघर्ष और बाहर निकलने की कोशिश दिखाई गई है। सवाल: क्या फिल्म में धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती जैसे मुद्दे भी हैं? जवाब: हमने दिखाया है कि कई बार लड़कियों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर शादी की जाती है। बाद में उन्हें सच्चाई पता चलती है। फिल्म सिर्फ समस्या नहीं दिखाती, यह भी बताती है कि फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। सवाल: क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि ऐसे मामलों के पीछे कोई नेटवर्क या पैसों का खेल होता है? जवाब: मैंने ऐसी बातें सुनी हैं, लेकिन फिल्म में उसे नहीं दिखाया। मैंने सिर्फ वही रखा जो कहानी और भावनाओं के हिसाब से जरूरी था। सवाल: सेंसर बोर्ड के साथ आपकी लंबी लड़ाई क्यों हुई? जवाब: सेंसर बोर्ड को कुछ डायलॉग्स और खासकर ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर आपत्ति थी। मैंने साफ कहा कि इसे हटाऊंगा नहीं। बाद में मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने फिल्म देखी और सिर्फ 24 सेकंड काटने के बाद रिलीज की अनुमति मिली। सवाल: क्या यह आपकी कन्विक्शन की जीत भी है? जवाब: बिल्कुल। अगर फिल्ममेकर को अपने विषय और कहानी पर भरोसा नहीं होगा तो वह फिल्म कैसे बनाएगा? मैंने वही दिखाया जो मुझे सही लगा। ‘जय सियाराम’ वाला सीन हटाने के लिए कहा गया, लेकिन मैं अपने स्टैंड पर कायम रहा। आखिरकार कोर्ट ने भी हमारी बात समझी। सवाल: ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर इतनी बहस क्यों हुई? जवाब: फिल्म में एक लड़की से पूछा जाता है कि उसका भगवान कौन है, तो वह ‘जय सियाराम’ बोलती है। सेंसर को इस पर आपत्ति थी, लेकिन मैंने कहा कि यह किरदार की सच्चाई है। बाद में कोर्ट ने ज्यादातर सीन रहने दिए। सवाल: आपने फिल्म को खुद रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? जवाब: आज सिस्टम काफी बदल गया है। कई लोग पहले ओटीटी के बारे में सोचते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो फिल्म थिएटर में जरूर चलती है। इसलिए मैंने खुद थिएटर मालिकों से बात की और अपनी तरह से फिल्म रिलीज करने का फैसला लिया। सवाल: क्या आज फिल्म रिलीज करना मुश्किल हो गया है? जवाब: बहुत मुश्किल है। टिकट, थिएटर और पूरा सिस्टम बदल गया है। अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी मौका कम मिलता है। लेकिन मुझे आज भी विश्वास है कि अच्छी फिल्म चलेगी। सवाल: इतने लंबे करियर और अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपको आज संघर्ष करना पड़ रहा है? जवाब: संघर्ष हर दौर में होता है। मैंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उस दौर में रिश्तों और भरोसे पर काम होता था। आज सिस्टम बदल गया है, लेकिन मेरा काम करने का तरीका नहीं बदला। सवाल: क्या आज के स्टार्स और पुराने दौर के स्टार्स में फर्क महसूस होता है? जवाब: पहले कलाकारों में बहुत भरोसा था। अमिताभ बच्चन ने ‘आज का अर्जुन’ की कहानी तक नहीं सुनी थी। राजकुमार जैसे कलाकार फोन पर हां कह देते थे। आज चीजें ज्यादा कॉरपोरेट और सिस्टम बेस्ड हो गई हैं। सवाल: इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपने ‘तीसरी बेगम’ में नए चेहरों को क्यों चुना? जवाब: इस कहानी में मासूमियत और वास्तविकता जरूरी थी। अगर बड़े स्टार्स होते तो दर्शकों का ध्यान किरदार से ज्यादा स्टार इमेज पर जाता। मुझे कहानी का असर ज्यादा जरूरी लगा। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगेंगे? जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है। मैंने हमेशा सामाजिक और पारिवारिक फिल्में बनाई हैं। यह भी उसी तरह की फिल्म है। सवाल: मुस्लिम समुदाय के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: हम सब एक हैं। अगर किसी समुदाय में गलत चीजें हो रही हैं, तो उन्हें रोकना चाहिए। किसी भी चीज को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इंसानियत सबसे ऊपर है। सवाल: 78 साल की उम्र में भी इतनी ऊर्जा कहां से आती है? जवाब: भगवान की कृपा और लोगों का प्यार। मैंने हमेशा फिल्म इंडस्ट्री को पूजा की तरह माना है। अनुशासन में रहता हूं और काम को ईमानदारी से करता हूं। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री जैसी प्रतिस्पर्धी जगह में इतना सरल और ईमानदार रहना कितना मुश्किल है? जवाब: अगर इंसान साफ नीयत से काम करे तो मजा आता है। मैंने हमेशा रिश्तों और सम्मान को महत्व दिया है। यही वजह है कि इतने साल बाद भी लोग प्यार देते हैं। सवाल: दर्शकों से
केसी बोकाड़िया बोले- ‘तीसरी बेगम’ में कड़वी सच्चाई दिखाई है:जय सियाराम विवाद, लव जिहाद मुद्दे और सेंसर बोर्ड पर खुलकर बोले फिल्ममेकर

अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम कर चुके दिग्गज फिल्ममेकर केसी बोकड़िया इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘तीसरी बेगम’ को लेकर चर्चा में हैं। लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनी इस फिल्म को लेकर उन्होंने दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की। बोकाड़िया ने बताया कि फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है और इसका मकसद किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखना है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से विवाद, कोर्ट तक पहुंची लड़ाई और अपनी कन्विक्शन पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: ‘तीसरी बेगम’ बनाने की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब: एक असली घटना से। मैं एक परिचित के घर गया था, जहां उसने गर्व से बताया कि उसकी तीन पत्नियां हैं- मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण। वहीं से मेरे मन में सवाल आया कि अलग संस्कार और खान-पान वाली लड़कियां ऐसे माहौल में कैसे एडजस्ट करती होंगी। उसी सोच से फिल्म की कहानी बनी। सवाल: फिल्म में लव जिहाद, ट्रिपल तलाक और हलाला जैसे मुद्दे दिख रहे हैं। इतने विवादित विषय पर फिल्म बनाने में डर नहीं लगा? जवाब: नहीं। मैंने जो देखा और महसूस किया, वही फिल्म में दिखाया। मेरा मकसद किसी धर्म को गलत बताना नहीं, बल्कि उन लड़कियों की मानसिक स्थिति दिखाना है जो अलग माहौल में जाकर संघर्ष करती हैं। मैंने इसे संतुलित तरीके से पेश किया है। सवाल: फिल्म में क्या दिखाया गया है? जवाब: फिल्म में एक ब्राह्मण लड़की शादी के बाद मुस्लिम परिवार में जाती है। वहां उसे नाम बदलने, तौर-तरीके अपनाने और नई जिंदगी में ढलने का दबाव झेलना पड़ता है। कहानी में उसकी परेशानी, संघर्ष और बाहर निकलने की कोशिश दिखाई गई है। सवाल: क्या फिल्म में धर्म परिवर्तन और जबरदस्ती जैसे मुद्दे भी हैं? जवाब: हमने दिखाया है कि कई बार लड़कियों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर शादी की जाती है। बाद में उन्हें सच्चाई पता चलती है। फिल्म सिर्फ समस्या नहीं दिखाती, यह भी बताती है कि फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। सवाल: क्या फिल्म में यह दिखाया गया है कि ऐसे मामलों के पीछे कोई नेटवर्क या पैसों का खेल होता है? जवाब: मैंने ऐसी बातें सुनी हैं, लेकिन फिल्म में उसे नहीं दिखाया। मैंने सिर्फ वही रखा जो कहानी और भावनाओं के हिसाब से जरूरी था। सवाल: सेंसर बोर्ड के साथ आपकी लंबी लड़ाई क्यों हुई? जवाब: सेंसर बोर्ड को कुछ डायलॉग्स और खासकर ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर आपत्ति थी। मैंने साफ कहा कि इसे हटाऊंगा नहीं। बाद में मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट ने फिल्म देखी और सिर्फ 24 सेकंड काटने के बाद रिलीज की अनुमति मिली। सवाल: क्या यह आपकी कन्विक्शन की जीत भी है? जवाब: बिल्कुल। अगर फिल्ममेकर को अपने विषय और कहानी पर भरोसा नहीं होगा तो वह फिल्म कैसे बनाएगा? मैंने वही दिखाया जो मुझे सही लगा। ‘जय सियाराम’ वाला सीन हटाने के लिए कहा गया, लेकिन मैं अपने स्टैंड पर कायम रहा। आखिरकार कोर्ट ने भी हमारी बात समझी। सवाल: ‘जय सियाराम’ वाले सीन पर इतनी बहस क्यों हुई? जवाब: फिल्म में एक लड़की से पूछा जाता है कि उसका भगवान कौन है, तो वह ‘जय सियाराम’ बोलती है। सेंसर को इस पर आपत्ति थी, लेकिन मैंने कहा कि यह किरदार की सच्चाई है। बाद में कोर्ट ने ज्यादातर सीन रहने दिए। सवाल: आपने फिल्म को खुद रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? जवाब: आज सिस्टम काफी बदल गया है। कई लोग पहले ओटीटी के बारे में सोचते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा हो तो फिल्म थिएटर में जरूर चलती है। इसलिए मैंने खुद थिएटर मालिकों से बात की और अपनी तरह से फिल्म रिलीज करने का फैसला लिया। सवाल: क्या आज फिल्म रिलीज करना मुश्किल हो गया है? जवाब: बहुत मुश्किल है। टिकट, थिएटर और पूरा सिस्टम बदल गया है। अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी मौका कम मिलता है। लेकिन मुझे आज भी विश्वास है कि अच्छी फिल्म चलेगी। सवाल: इतने लंबे करियर और अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपको आज संघर्ष करना पड़ रहा है? जवाब: संघर्ष हर दौर में होता है। मैंने अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रेखा, माधुरी दीक्षित जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया है। उस दौर में रिश्तों और भरोसे पर काम होता था। आज सिस्टम बदल गया है, लेकिन मेरा काम करने का तरीका नहीं बदला। सवाल: क्या आज के स्टार्स और पुराने दौर के स्टार्स में फर्क महसूस होता है? जवाब: पहले कलाकारों में बहुत भरोसा था। अमिताभ बच्चन ने ‘आज का अर्जुन’ की कहानी तक नहीं सुनी थी। राजकुमार जैसे कलाकार फोन पर हां कह देते थे। आज चीजें ज्यादा कॉरपोरेट और सिस्टम बेस्ड हो गई हैं। सवाल: इतने बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी आपने ‘तीसरी बेगम’ में नए चेहरों को क्यों चुना? जवाब: इस कहानी में मासूमियत और वास्तविकता जरूरी थी। अगर बड़े स्टार्स होते तो दर्शकों का ध्यान किरदार से ज्यादा स्टार इमेज पर जाता। मुझे कहानी का असर ज्यादा जरूरी लगा। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म पर प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप लगेंगे? जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है। मैंने हमेशा सामाजिक और पारिवारिक फिल्में बनाई हैं। यह भी उसी तरह की फिल्म है। सवाल: मुस्लिम समुदाय के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: हम सब एक हैं। अगर किसी समुदाय में गलत चीजें हो रही हैं, तो उन्हें रोकना चाहिए। किसी भी चीज को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। इंसानियत सबसे ऊपर है। सवाल: 78 साल की उम्र में भी इतनी ऊर्जा कहां से आती है? जवाब: भगवान की कृपा और लोगों का प्यार। मैंने हमेशा फिल्म इंडस्ट्री को पूजा की तरह माना है। अनुशासन में रहता हूं और काम को ईमानदारी से करता हूं। सवाल: फिल्म इंडस्ट्री जैसी प्रतिस्पर्धी जगह में इतना सरल और ईमानदार रहना कितना मुश्किल है? जवाब: अगर इंसान साफ नीयत से काम करे तो मजा आता है। मैंने हमेशा रिश्तों और सम्मान को महत्व दिया है। यही वजह है कि इतने साल बाद भी लोग प्यार देते हैं। सवाल: दर्शकों से
हरिद्वार में सायना नेहवाल ने की गंगा आरती; VIDEO:6 दिनों से उत्तराखंड घूम रहीं, मसूरी में नदी किनारे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट

ओलिंपिक मेडलिस्ट और इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल इन दिनों परिवार के साथ उत्तराखंड घूमने आई हैं। सायना देर शाम हरिद्वार में गंगा आरती में परिवार के 6 सदस्यों के साथ शामिल हुईं। इस दौरान उनके पिता डॉ. हरवीर सिंह नेहवाल और बहन अबू चंद्रांशु नेहवाल भी साथ दिखे। हरिद्वार पहुंचने के बाद सायना नेहवाल सबसे पहले नील पर्वत स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ चण्डी देवी मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और मां चंडी देवी का आशीर्वाद लिया। इसकी खबर फैलते ही मंदिर परिसर में प्रशंसकों की भीड़ लग गई। सायना रविवार को मसूरी घूमने आईं थीं और वो नदी किनारे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट करती दिखी। इसके बाद वे मंगलवार को अपने परिवार के साथ टिहरी की प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर के दर्शन करने पहुंचीं। सायना की PHOTOS… रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचीं सायना गुरुवार को हरिद्वार पहुंची। सायना नेहवाल ने सबसे पहले नील पर्वत स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने परिवार के साथ रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचकर मां चंडी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर के मुख्य पुजारी भवानी नंदन गिरी ने सायना और उनके परिवार को पूजा संपन्न कराई। उन्होंने सायना की खेल जगत की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। चंडी देवी मंदिर में दर्शन के बाद शाम के समय सायना नेहवाल अचानक हरकी पौड़ी पहुंचीं, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लिया। गंगा तट पर पहुंचते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बन गया। इस दौरान श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ समेत कई तीर्थ पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। उन्हें मां गंगा की चुनरी और गंगाजली भेंट कर सम्मानित किया गया। तन्मय वशिष्ठ ने सायना नेहवाल को गंगा आरती की परंपरा, हरकी पैड़ी की पौराणिक मान्यता और मां गंगा की महिमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि सायना नेहवाल का हरकी पैड़ी पहुंचना पूरी तरह अचानक था। उनके साथ उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ गंगा आरती में सहभागिता की और कुछ समय हरकी पैड़ी पर बिताने के बाद परिवार सहित हरिद्वार से रवाना हो गईं। देश की पहली महिला बैडमिंटन ओलिंपिक पदक विजेता हैं सायना सायना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह देश की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलिंपिक में पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। खेल जगत में उनके योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपना आखिरी कंपीटिटर मैच जून 2023 में सिंगापुर ओपन के दौरान खेला था।
सेंसेक्स 107 अंक चढ़कर 75,506 पर पहुंचा:निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, यह 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा

शेयर बाजार में आज यानी 15 मई को तेजी है। सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर 75,506 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, ये 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा। एशियाई बाजारों में भी गिरावट कल अमेरिकी बाजारों में तेजी रही कल विदेशी निवेशकों ने ₹188 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 790 अंक चढ़कर बंद हुआ था इससे पहले शेयर बाजार में गुरुवार, 14 मई को बढ़त रही। सेंसेक्स 790 अंक (1.06%) की तेजी के साथ 75,399 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 277 अंक (1.18%) की बढ़त रही, ये 23,690 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स 107 अंक चढ़कर 75,506 पर पहुंचा:निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, यह 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा

शेयर बाजार में आज यानी 15 मई को तेजी है। सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर 75,506 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंक की तेजी, ये 23,743 के स्तर पर कारोबार कर रहा। एशियाई बाजारों में भी गिरावट कल अमेरिकी बाजारों में तेजी रही कल विदेशी निवेशकों ने ₹188 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स 790 अंक चढ़कर बंद हुआ था इससे पहले शेयर बाजार में गुरुवार, 14 मई को बढ़त रही। सेंसेक्स 790 अंक (1.06%) की तेजी के साथ 75,399 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 277 अंक (1.18%) की बढ़त रही, ये 23,690 पर बंद हुआ था।
विजय पार्टी TVK के नेता का बयान वायरल, कहा- ‘हम विद्रोह के…’

तमिल में तमिल नागा वेत्री कशगम (टीवीके) के विधायक मदार बदरुद्दीन (वी एम एस मुस्तफा) ने विधानसभा में नामांकन के नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर अपने दावे का समर्थन कर विवाद खड़ा कर दिया। हालाँकि, चौतरफा की आलोचना के बाद उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए तमिलनाडु के मंत्री माधव अर्जुन ने कहा कि टीवी किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि विरोध करता है। अर्जुन ने कहा, “उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म का ज्ञान नहीं है। तमिलगा वेत्री कशगम जाति व्यवस्था और धार्मिक अनुयायियों के खिलाफ है। हम सभी धर्मों को समान मानते हैं। एक मंत्री के रूप में और उनके नेता (मुख्यमंत्री विजय) के नेतृत्व में, हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।” यह भी पढ़ें: तमिलनाडु के सीएम ने ही लिखी थी पीएम मोदी की अपील, जानिए क्या है अपील उन्होंने कहा कि टीवीके जाति व्यवस्था का विरोध करना, हिंदू धर्म का नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम विद्रोह के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि हिंदुत्व के हैं। उत्तर में सनातन धर्म को अक्सर हिंदू धर्म के रूप में समझा जाता है, जबकि दक्षिण में इसे अलग से जोड़ा जाता है। हमारा मानना है कि सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि उदयनयोनि भी जाति व्यवस्था के विरुद्ध थे। मदुरै के मध्य विधायक बदरुद्दीन ने टिप्पणी की, ”हम भी सनातन धर्म को खत्म करने के लिए मैदान में हैं।” टीवी के समर्थकों ने हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की ओर से अपने और जोसेफ सी के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना के बाद बयान जारी किया। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन ने आरोप लगाया कि किसी मुस्लिम व्यक्ति ने, बाक़ी विधायक ने हिंदू धर्म के बारे में विचारधारा वाली बातें कही हैं और इसे समाप्त करने की उद्घोषणा से धार्मिक संबंध को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। ‘एक्स’ ने एक पोस्ट में सवाल किया, ”सनातन धर्म की आलोचना करने वाले मुस्तफा क्या इस्लामी आस्था की आलोचना करने का साहस करेंगे?” ”वे ईसाई धर्म की आलोचना कैसे करते हैं?” भाजपा नेताओं ने कहा कि सत्य में होने वाले कुछ भी अधिकार को बरकरार रखने के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री विजय ने अब तक विधानसभा क्षेत्र में उदयन स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए भाषण या टीवीके नेता मुस्तफा की विचारधारा की निंदा नहीं की है। एक मुख्यमंत्री सभी लोगों के प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं, उनके लिए बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा की आलोचना की निंदा करना उनके उच्च पद के लिए उपयुक्त नहीं है”। आग्नेय ने कहा कि सनातन धर्म ”जीवित और शाश्वत” है। उन्होंने कहा, ”इस अतीत में किसी ने भी इसे नष्ट या नष्ट नहीं किया है, न ही आज कोई जीवित व्यक्ति ऐसा करने में सक्षम है, और न ही भविष्य में जन्म लेने वाला कोई व्यक्ति इसे नष्ट कर सकता है।” मुस्तफा ने 12 मई को मदुरै में विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा था कि टीवीके की ताकत के बारे में पूछे जाने पर कहा गया था कि पार्टी विजयी होगी। मुस्तफा ने कहा, ”हम टीवीके में पेरियार ई.वी.” हैं। रामासामी और बी.आर. ”असहमति के सिद्धांत का विरोध करते हैं, और हम सनातन धर्म का विरोध करते हैं।” मुस्तफा ने साइंटिस्ट को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि ”हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं।” द्रविड़ मुनेत्र कशगम (द्रमुक) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को विधानसभा में अपनी विधानसभा के दौरान अपने पहले विवादास्पद बयान में इस बात पर जोर दिया कि सनातन धर्म को स्वीकार किया जाना चाहिए। भाजपा नेता विनोद पील सेल्वम ने मांग की है कि मुस्तफा को पद से हटाया जाना चाहिए ताकि यह साबित हो सके कि वह निकोलस के पद पर बने हुए हैं। ये भी पढ़ें- ‘मेरे परिवार और मुझ पर लगे आरोप मनगढ़ंत’, रूपाली चाणकर का अशोक खरत के साथ बयान
न्यूबॉर्न और छोटे बच्चों के लिए एसी का कितना तापमान सही? चाइल्ड स्पेशलिस्ट ने बताया सेफ एसी यूज का तरीका

Last Updated:May 15, 2026, 09:11 IST Is AC Safe For Newborns: न्यूबॉर्न बेबीज और छोटे बच्चों के माता-पिता अक्सर इस सवाल पर कंफ्यूज रहते हैं कि बच्चों को एसी कमरे में रखें या नहीं. अगर हां तो टेम्पेरचर कितना रखें और किन बातों का ध्यान रखें. इन्हीं सवालों के जवाब दिए डॉ. तरुण ने और बताया कि कितना तापमान बच्चे के लिए सही है. ख़बरें फटाफट दिल्ली: इन दिनों तेजी से गर्मी का असर पूरे देश में बढ़ रहा है और खासकर उत्तर भारत में जिस तरह से मौसम लगातार करवट बदल रहा है, उससे आए दिन बारिश भी हो रही है. वहीं दिन के समय तापमान काफी ज्यादा बढ़ने से लू भी चल रही है और गर्मी भी पड़ रही है. इसी के चलते लोग इस गर्म मौसम के कारण बीमार भी हो रहे हैं. वहीं ऐसे में लोग अपने छोटे बच्चों के लिए भी काफी चिंतित दिख रहे हैं. छोटे बच्चों को लेकर कंफ्यूजनआमतौर पर लोगों का यह मानना है कि जो छोटे बच्चे अभी कुछ महीने या कुछ साल के हैं, उन्हें गर्मी से बचाने के लिए अगर एसी की ठंडी हवा में रखा जाए, तो वे बीमार पड़ सकते हैं. ऐसे में जब हमने दिल्ली-एनसीआर के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह से पूछा कि इस वक्त बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए एसी में रखना सही है या नहीं और किस तरह से एसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा. इतना रखें एसी का तापमान, अगर कमरे में है छोटा बच्चाडॉ. तरुण ने सबसे पहले बताया कि अगर आप बच्चे को गर्मी से बचाने के लिए एसी वाले कमरे में रखते हैं, तो उससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि अगर आप बहुत कम तापमान पर एसी चलाते हैं, तो कमरे में काफी सूखापन हो जाता है. ऐसे में छोटे बच्चे को ड्राइनेस की समस्या हो सकती है. इसकी वजह से उसकी नाक और गला सूख सकता है. कभी-कभी बच्चों को इसी ड्राइनेस के कारण नाक से खून भी आ सकता है. इसकी और भी वजहें हैं पर सूखापन भी एक कारण है. इसलिए अगर आप बच्चों को एसी वाले कमरे में रख रहे हैं, तो कमरे का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए. जरूरत पड़ने पर ही तापमान इससे कम करें. कोशिश करें कि कमरे का तापमान प्लीजेंट हो बस, ठंडा रखने या चिल्ड रखने की जरूरत नहीं है. इन चीजों से पता चल सकता है कि एसी से बच्चे को हो रही है परेशानीडॉ. तरुण ने बताया कि अगर एसी की वजह से बच्चे को परेशानी हो रही है, तो इसके कुछ संकेत साफ दिखने लगते हैं. अगर बच्चा बार-बार अपनी नाक खुजला रहा है, तो यह नाक में ड्राइनेस का संकेत हो सकता है. वहीं अगर बच्चे के सोते समय गले से आवाज आने लगे, तो यह गला सूखने का संकेत हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि अगर एसी की सफाई समय-समय पर नहीं कराई जाए, तो उसमें बैक्टीरिया और धूल जमा हो सकती है, जिससे बच्चों को एलर्जी की समस्या हो सकती है. इसलिए एसी की नियमित सफाई भी जरूरी है. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
Nikhat Zareen & Neetu Ghanghas Lose Selection Trials; Out of 2026 Games

Hindi News Sports Nikhat Zareen & Neetu Ghanghas Lose Selection Trials; Out Of 2026 Games पटियाला10 मिनट पहले कॉपी लिंक 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन मुक्केबाज निखत जरीन और नीतू घंघास का 2026 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में खेलने का सपना टूट गया है। ये दोनों पटियाला में चल ने सिलेक्शन ट्रायल्स के सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गईं। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट निकहत जरीन को 51 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में साक्षी चौधरी ने 4-1 से हराया। वहीं, 48 किग्रा की मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी ने नीतू घंघास को से हराकर फाइनल में जगह बनाई। 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स जुलाई-अगस्त में ग्लासगो में होने हैं, जिसके बाद सितंबर-अक्टूबर में जापान में एशियाई खेलों का आयोजन होगा। निखत जरीन ने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। ट्रेडिशनल ट्रायल सिस्टम लौटा, प्लेयर्स की दो राय BFI ने एशियन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले बॉक्सर्स को कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सीधे क्वालिफाई माना था। जिन वेट कैटेगरी के बॉक्सर फाइनल में नहीं पहुंचे थे, उनके प्रदर्शन का अंकों के आधार पर मूल्यांकन कर चयन किया जाना था। हालांकि, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने इन वेट कैटेगरी के लिए ओपन ट्रायल्स से CWG और वर्ल्ड कप के खिलाड़ियों के चयन के निर्देश दिए। साथ ही असेसमेंट सिस्टम को पारदर्शी न होने के कारण सस्पेंड कर दिया था। अधिकांश मुक्केबाजों ने SAI के इस फैसले को सही ठहराया। यहां इंटरनेशनल बॉक्सर्स का कहना है कि ट्रायल सिस्टम अधिक निष्पक्ष है। एक मुक्केबाज ने कहा- ‘ट्रायल में सब कुछ सामने होता है। अगर मैं हारता हूं, तो मुझे पता है कि कहाँ कमी रह गई, जबकि पुराने सिस्टम में हमें हफ्तों लिस्ट का इंतजार करना पड़ता था।’ हालांकि, कुछ मुक्केबाजों का कहना है कि इससे चुनिंदा राज्यों का दबदबा बढ़ेगा। प्रमुख नतीजे 54 किग्रा से नीचे आईं साक्षी चौधरी अब फाइनल में मीनाक्षी से भिड़ेंगी। 3 बार के वर्ल्ड कप पदक विजेता हितेश गुलिया को 70 किग्रा वर्ग में सुमित के हाथों हार झेलनी पड़ी। एशियाड की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट परवीन हुड्डा ने अंकुशिता बोरो को हराया अपनी दावेदारी मजबूत की। अनुभवी मुक्केबाज पूजा रानी को 80 किग्रा वर्ग में नैना ने मात दी। 65 किग्रा वर्ग में ओलिंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहे ने पूजा को 7-0 से हराया। टोक्यो ओलिंपिक की मेडलिस्ट लवलीना 65 किग्रा वर्ग में उतरी थीं। प्रीति पवार सहित 4 महिला बॉक्सर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई महिला वर्ग में प्रीत पवार (54 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा) और अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) एशियन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई कर चुकी हैं। जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए जगह पक्की कर ली है। बाकी चार वेट कैटेगरी – 55 किग्रा, 65 किग्रा, 70 किग्रा और +90 किग्रा के लिए ट्रायल आयोजित किए जा रहे हैं। जीतने वाले मुक्केबाज चेकिया में कैंप में जाएंगे जीतने वाले मुक्केबाज कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए चेकिया (Czechia) में लगने वाले एक्सपोजर कैंप में जाएंगे। वहीं, दूसरे स्थान पर रहने वाले मुक्केबाज जून में चीन में होने वाले वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में हिस्सा लेंगे। बॉक्सिंग वर्ल्ड कप सीरीज-2 का आयोजन 15 से 20 जून तक चीन में होगा। ——————————————— स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… रिपोर्ट- खिलाड़ियों का पैसा अफसरों की खेल सुविधाओं पर खर्च, स्विमिंग पूल और टेनिस कोर्ट बनाए जिस पैसे से ओलिंपिक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ट्रेनिंग मिलनी थी, उससे दिल्ली के बड़े अधिकारी अपने रिहायशी इलाकों में स्विमिंग पूल और टेनिस कोर्ट चमका रहे हैं। यह खुलासा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) का करोड़ों रुपया ब्यूरोक्रेट्स की सोसायटियों और क्लबों में डाइवर्ट किया गया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Skin Care Tips: तेज धूप में कहीं झुलस न जाए त्वचा, इन देसी नुस्खों को आजमाएं, साफ होगी टैनिंग चेहरे पर आएगा निखार

Last Updated:May 15, 2026, 08:25 IST Skin Care Tips: मई महीने में और भी ज्यादा प्रचंड होने वाली है. ऐसे में जब धूप स्किन पर डायरेक्ट लगे तो बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है. तेज धूप में दिन भर घूमने से स्किन टैन हो जाती है. आप हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से स्किन को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों को जरूर फॉलो करें. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना) गर्मियों की तेज धूप, बढ़ता तापमान और उमस भरा मौसम त्वचा के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. इस मौसम में लापरवाही आपकी स्किन को डैमेज कर सकती है, जिससे टैनिंग, सनबर्न और मुहांसों जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं लेकिन अगर सही समय पर सही देखभाल की जाए, तो यही मौसम आपकी त्वचा को नैचुरल ग्लो भी दे सकता है. लोकल 18 से बातचीत में सतना के विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी, फ्रेश और चमकदार बनाए रख सकते हैं. कामदगिरि आयुर्वेद क्लिनिक के डॉ सूरज कुशवाहा ने बताया कि गर्मियों में सबसे जरूरी है त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना. वहीं शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद अहम है, इसलिए भरपूर पानी पीना और रसदार फलों का सेवन करना चाहिए. धूप में निकलते समय चेहरे को कपड़े या स्कार्फ से ढकना स्किन प्रोटेक्शन के लिए बेहद कारगर उपाय है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में गर्मियों के मौसम में पित्त दोष बढ़ जाता है, जो त्वचा संबंधी समस्याओं की मुख्य वजह बनता है. ज्यादा धूप में रहना, मसालेदार भोजन और कम पानी पीना इस समस्या को और बढ़ा सकता है. इससे बचने के लिए लोगों को छांव में रहना, हल्के और सूती कपड़े पहनना और ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. गर्मियों में पसीने की ग्रंथियां बंद होने से घमौरियां हो जाती हैं, जिसमें लाल दाने, खुजली और जलन की समस्या होती है. इससे राहत पाने के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का लेप बेहद फायदेमंद है. इसके अलावा बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है. वहीं नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से नहाना या पेस्ट बनाकर लगाना भी एंटीबैक्टीरियल असर देता है. गर्मियों में पसीने की ग्रंथियां बंद होने से घमौरियां हो जाती हैं, जिसमें लाल दाने, खुजली और जलन की समस्या होती है. इससे राहत पाने के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का लेप बेहद फायदेमंद है. इसके अलावा बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है. वहीं नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से नहाना या पेस्ट बनाकर लगाना भी एंटीबैक्टीरियल असर देता है. तेज धूप में ज्यादा देर रहने से त्वचा झुलस जाती है और काली पड़ने लगती है, जिसे सनबर्न और टैनिंग कहा जाता है. इससे बचने के लिए ताजा एलोवेरा जेल त्वचा पर लगाने से जलन और लालिमा कम होती है. इसके अलावा दही और बेसन का पेस्ट टैनिंग हटाने में असरदार माना जाता है. वहीं खीरे का रस त्वचा को ठंडक और हाइड्रेशन देता है, जिससे स्किन फ्रेश बनी रहती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।









