Thursday, 21 May 2026 | 06:19 AM

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बच्चे दिन-ब-दिन क्यों हो रहे हैं कमजोर? कहीं शरीर में छिपी ये कमी तो नहीं बना रही वजह

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बच्चों का स्वस्थ, एक्टिव और खुश रहना हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है. लेकिन कई बार शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी, खासकर आयरन की कमी, बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकती है. नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, 2 साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया की समस्या मस्तिष्क के विकास, सीखने की क्षमता और सामान्य ग्रोथ पर असर डाल सकती है. इसलिए बचपन से ही सही और संतुलित आहार देना बेहद जरूरी माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर बच्चे को शुरुआती उम्र से ही पूरा पोषण मिले, तो उसका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है. इसके विपरीत, जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो बच्चा अक्सर थका हुआ, कमजोर और कम एक्टिव दिखाई देता है. लंबे समय तक यह कमी बनी रहने पर इसका असर बच्चे की याददाश्त, समझने की क्षमता और पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता पर भी पड़ सकता है. नेशनल हेल्थ मिशन ने बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए रोजमर्रा के भोजन में आयरन से भरपूर चीजें शामिल करने की सलाह दी है. इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, गुड़, अनार और खजूर जैसे फूड शामिल हैं, जो शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. इसके साथ ही विटामिन-सी युक्त फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू भी काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि ये शरीर को आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को छह महीने की उम्र के बाद धीरे-धीरे ठोस और पौष्टिक आहार देना शुरू कर देना चाहिए. इस दौरान मां के दूध के साथ-साथ सही पूरक भोजन देना बच्चे की ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी होता है. सही डाइट से न केवल बच्चे की ताकत बढ़ती है, बल्कि उसकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है, जिससे वह बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है. इसके अलावा, NHM यह भी सुझाव देता है कि 6 से 59 महीने तक के बच्चों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप भी दिया जाना चाहिए. यह सप्लीमेंट शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है और एनीमिया जैसी समस्या से बचाव करता है. हालांकि, इसे हमेशा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही देना चाहिए. कुल मिलाकर, बच्चों की सेहत का आधार उनका रोजाना का खानपान होता है. अगर शुरुआत से ही सही पोषण, संतुलित डाइट और नियमित देखभाल पर ध्यान दिया जाए, तो बच्चों को एनीमिया जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है और उनका विकास बेहतर तरीके से हो सकता है.

गर्मियों के लिए पुदीना शिकंजी ड्रिंक: लू वाली गर्मी में शरीर को तुरंत ऊर्जावान ऊर्जा-ठंडी पुदीना शिकंजी, 5 मिनट से कम में तैयार करें

गर्मियों में ठंडक देने वाले पेय के लिए पुदीना शिकंजी ड्रिंक, 5 मिनट में पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी

20 मई 2026 को 23:17 IST पर अपडेट किया गया गर्मियों के लिए पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को बार-बार ठंडक और एनर्जी की जरूरत महसूस होती है। तेज धूप और लू से बचने के लिए तरह-तरह के कोल्ड ड्रिंक्स लोग छोड़ देते हैं, लेकिन सेहत के लिए बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स ज्यादा स्वादिष्ट नहीं होते। ऐसे में घर पर बनी पुदीना शिकंजी स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का बेहतरीन विकल्प है। नींबू और पुदीने से बनी यह शिकांजी शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाती है और गर्मी में ठंडक महसूस कराती है। इसे बनाने में सिर्फ 5 मिनट का समय लगता है। अनुसरण करना : पुदीना शिकंजी बनाने की सामग्री: 2 नींबू, 1 छोटा चम्मच ताजा पुदीना, 3-4 बड़े टुकड़े चीनी या शहद, 1/2 छोटा टुकड़ा काला नमक, 1/2 छोटा टुकड़ा जीरा पाउडर, 2 चम्मच ठंडा पानी, बर्फ के टुकड़े छवि: फ्रीपिक कैसे बनाएं नुस्खा-ठंडी पुदीना शिंजी: सबसे पहले पुदीने की नाव को अच्छे से धो लें। अब वैक्सिन पिलेशियन में लिटिल वॉटर मैकेनिक पीस लें। एक बड़े पोचेल में नींबू का रस निकाल लें। छवि: एआई इसमें चीनी या सुपरमार्केट अच्छी तरह से नासा लें। अब इसमें काला नमक और साथ ही जीरा पाउडर डालें। इससे शिकंजी का स्वाद और भी बढ़ेगा। छवि: एआई अब तैयार करें पुना पेस्ट और ठंडा पानी स्टॉक अच्छी तरह से मिक्स करें। बर्फ के गोले में और ऊपर से शिकन भर दें। नामांकन तो पुदीने की और नामांकन के लिए गार्निश करें। छवि: एआई पुदीना शिक्जी शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है। लू और डिलाईशन से बचती है। पाचन क्रिया बेहतर होती है। शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है। पेट को फर्क और ताजा महसूस करवाती है। छवि: एआई अगर आप भी समरस्लैम में कुछ स्ट्रेंथ और टेस्टी स्ट्राइक चाहते हैं, तो घर पर बनी पुदीना शिकंजी स्ट्रेंथ जरूर बनाएं। इसका ताज़ा स्वाद आपको पूरे दिन ताज़ा महसूस कराएगा। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 20 मई 2026 को 23:17 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)पुदीना शिकांजी रेसिपी(टी)शिकंजी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन पेय(टी)पुदीना शिकंजी(टी)नींबू ड्रिंक(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)पुदीना नींबू(टी)पुदीना नींबू शिकंजी रेसिपी गर्मियों के लिए(टी)पुदीना नींबू शिकंजी

सुबह उठते से ही करें मलासन, रीढ़ की हड्डी से लेकर पाचन तक के लिए फायदेमंद

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Last Updated:May 20, 2026, 23:13 IST Malasana Health Benefits: मलासन सेहतमंद रहने का बहुत सिंपल और आसान तरीका है. इसके अभ्यास से सांसों और शरीर के बीच बेहतर तालमेल बनता है, जिससे मन शांत और स्थिर महसूस करता है. साथ ही इससे नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों भी मजबूत होती है. ख़बरें फटाफट भारतीय योग परंपरा में कई ऐसे योगासन बताए गए हैं, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण योगासन है मलासन इसे स्क्वाट पोज भी कहा जाता है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और संतुलन बेहतर होता है. साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और शरीर के निचले हिस्से को स्वस्थ रखने में मदद करता है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और शरीर की सही मुद्रा बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है. इसके अभ्यास से सांसों और शरीर के बीच बेहतर तालमेल बनता है, जिससे मन शांत और स्थिर महसूस करता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, मलासन एक ऐसी मुद्रा है जिसमें व्यक्ति घुटनों को मोड़कर और कूल्हों को नीचे लाकर बैठता है. इसे करने के लिए सबसे पहले पैरों को कंधों जितनी दूरी पर फैलाना चाहिए. इसके बाद धीरे-धीरे स्क्वाट की स्थिति में नीचे बैठना होता है. इस दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है. सुबह खानी पेट योगाभ्यास के फायदेविशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट इस आसन का अभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है. ऐसा करने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और शरीर पूरे दिन अधिक ऊर्जावान महसूस करता है. मलासन केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह आसन मूलाधार चक्र को सक्रिय करने में मदद करता है. इससे मन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ती है. साथ ही यह ध्यान और एकाग्रता को बेहतर बनाने में भी सहायक हो सकता है. शारीरिक रूप से यह आसन शरीर के कई हिस्सों पर काम करता है. यह नितंब, जांघ, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इसके अलावा कमर, पीठ के निचले हिस्से और टखनों में खिंचाव लाकर जकड़न को कम करता है. लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन काफी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर की अकड़न दूर होती है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह आसन उपयोगी माना जाता है. यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान किसी भी योगासन को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. इस बात का ध्यान रखेंअगर किसी व्यक्ति को घुटनों, टखनों या कमर के निचले हिस्से में गंभीर दर्द की समस्या है, तो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, जिन लोगों की हाल ही में पेट या कूल्हे की सर्जरी हुई हो, उन्हें भी मलासन से बचने की सलाह दी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

मूंग दाल पकौड़ा रेसिपी: कम तेल में बनेंगी एक्स्ट्रा क्रंची मूंग दाल पकौड़ा, जानिए परफेक्ट बैटर से लेकर फ्राई करने तक का राज

मूंग दाल पकौड़ा

20 मई 2026 को 22:59 IST पर अपडेट किया गया मूंग दाल पकौड़ा रेसिपी: बारिश हो या गर्मी, चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़ी का स्वाद हर मौसम में लोगों को पसंद आता है. आलू और पनीर की पकौड़ी के अलावा मूंग दाल की पकौड़ी के स्वाद भी काफी पसंद किये जाते हैं. हालांकि घर पर बेकार समय अक्सर लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि पकौड़ी बाजार में क्रिस्पी और कम तेली क्यों नहीं दिखते। ये आसान टिप्स आपके बेहद काम आ सकते हैं। इन ट्रिक्स की मदद से मूंग दाल के पकौड़े के पत्ते बाहर से करारी और अंदर से बिल्कुल आकर्षक दिखते हैं। अनुसरण करना : भीगी हुई मूंग दाल को बिना पानी के पीस लें। इससे बैटर अच्छा बनता है और पकौड़ी लकड़ी कम तेल सोखती हैं। बैटर को अच्छी तरह से फेंटना भी जरूरी है, ताकि वह फ्लफी बन सके। छवि: फ्रीपिक एक कटोरी पानी में बैटर की एक बूंद। अगर बैटर ऊपर तैरने लगे तो समझ लीजिए कि बैटर पूरी तरह से तैयार है और पकाउ लुक बनाने के लिए प्रभावित है। छवि: फ्रीपिक बैटर में छोटे चावल का आटा मिलाने से पकौड़े के स्वाद ज्यादा कुरकुरे होते हैं। इसके अलावा एक इंस्टिट्यूट बिटकॉइन चिप्स और करारा बनाने में भी मदद करता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप चाहते हैं कि पकाऊ लकड़ी ज्यादा तेल न सोखें तो बैटर में थोड़ा सा गर्म तेल मिला लें। इससे शिक्षक भी बेहतर बना है। छवि: Pexels पकौड़ियों को पहले तेज गरम तेल में डालें और फिर धीमी आंच पर पकाएं। इसके पकौड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से अच्छे तरह के पकते हैं। छवि: फ्रीपिक इन आसान युक्तियों की मदद से घर पर भी स्वादिष्ट, स्वादिष्ट, करारी और कम तेली मूंग दाल पकौड़ी बनाई जा सकती है। चाय के साथ इनका स्वाद हर मौसम में शानदार लगता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 20 मई 2026 को 22:59 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंग दाल पकोड़ा(टी)क्रिस्पी पकोड़ा रेसिपी(टी)टी टाइम स्नैक्स(टी)पकोड़ा कुकिंग टिप्स(टी)क्रंची पकोड़ा रेसिपी(टी)घर का बना पकोड़ा(टी)भारतीय स्नैक्स(टी)क्रिस्पी पकौड़ा(टी)कुकिंग हैक्स(टी)मानसून स्नैक्स

वजन कंट्रोल से लेकर मजबूत हड्डियों तक, गर्मी में मिलेट्स खाने के कई फायदे, सेवन का तरीका जान लें

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Last Updated:May 20, 2026, 22:57 IST Best Millets For Summer: अगर रोजाना के भोजन में श्री अन्न को शामिल किया जाए, तो शरीर को संपूर्ण पोषण मिलता है. इससे गर्मी में होने वाली थकान, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याओं से बचने में मदद मिल सकती है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ और एक्टिव बना रहता है. ख़बरें फटाफट गर्मियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में मिलेट्स यानी श्री अन्न को रोजाना के भोजन में शामिल करना काफी फायदेमंद हो सकता है. बाजरा, रागी, ज्वार और दूसरे मिलेट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को ताकत देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, श्री अन्न को पोषण का पावरहाउस माना जाता है. इनमें फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाने और शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देने में मदद करते हैं. मिलेट्स के फायदेहेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि वजन नियंत्रित करने में भी श्री अन्न काफी उपयोगी होता है. इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. इससे ज्यादा खाने की आदत कम होती है और वजन बढ़ने की समस्या पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है. इसके अलावा, बाजरा और रागी जैसे मिलेट्स कैल्शियम और फॉस्फोरस के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए श्री अन्न का सेवन खासतौर पर लाभकारी माना जाता है. कई लोगों के मन में यह धारणा होती है कि गर्मियों में श्री अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए, लेकिन विशेषज्ञ इस बात को गलत मानते हैं. उनका कहना है कि गर्मी में शरीर जल्दी थक जाता है और पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. ऐसे में मिलेट्स शरीर को जरूरी ऊर्जा देने और डिहाइड्रेशन से बचाने में सहायक हो सकते हैं. मिलेट्स खाने का सेवनविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि श्री अन्न को पकाने से पहले कुछ घंटों तक पानी में भिगो देना चाहिए. ऐसा करने से इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और इसे पचाना आसान हो जाता है. आप इसे अलग-अलग तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. जैसे दलिया, खिचड़ी, रोटी, इडली, डोसा या ठंडाई के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है. गर्मियों में बाजरे की खीर और रागी का सत्तू भी अच्छा विकल्प माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

घर पर टोफू बनाने की विधि: घर में ऐसे एक मिनट में सोयाबीन की मदद से टोफू, नहीं बाजार से टूटने की जरूरत; विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

टोफू बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: 2 कप सोयाबीन, 8-10 कप पानी, 2 बड़े नींबू का रस या सिरका, मलमल का कपड़ा छवि: फ्रीपिक घर पर टोफू बनाने की आसान विधि: सबसे पहले सोयाबीन को अच्छी तरह धो लें। अब रातभर या कम से कम 8 घंटे के लिए पानी में सोलाकर रख दें। सोयाबीन फूलेगा और आसानी से पीसी जाएगा। छवि: एआई भीगी हुई सोयाबीन का पानी निकाल लें और प्लास्टिक में सीधे-थोड़े पानी के साथ पीस लें। अब इस पेस्ट को बड़े पैमाने पर रखा जाए और पानी को बड़े पैमाने पर रखा जाए। छवि: फ्रीपिक ज्वालामुखी में आने के बाद गैस का मिश्रण और करीब 10 मिनट तक का समय लें। फिर मलमल के कपड़ों की मदद से इसे अच्छा लें। जो सफ़ेद उत्पाद निकलागा वही सोया दूध है। छवि: फ्रीपिक अब सोया दूध को फिर से प्रभावित करें। इसमें धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे लेबल का रस या सिरका मिलाया जाता है और पसंद किया जाता है। कुछ ही मिनटों में दूध फटना शुरू हो जाएगा और पानी अलग दिखने लगेगा। छवि: एआई अब फटे हुए मिक्स को मल केमल कपड़े में कोरियोग्राफी पानी अलग कर लें। ऊपर से प्रभाव वजन की मांग करता है ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। इसे 20-30 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। छवि: एआई/फ़्रीपिक अब हटाएं और टोफू को कार्टून आकार में काट लें। आपका ताजा और मुलायम टोफू तैयार है। छवि: फ्रीपिक टोफू खाने के फायदे: प्रोटीन से भरपूरता होती है। वजन कम करने में मदद मिलती है। दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। पनीर का दस्तावेज़ विकल्प है। शाकाहारी लोगों के लिए होता है बेहतरीन खाना। छवि: एआई टोफू को अधिक मुलायम होना चाहिए तो वजन कम होना चाहिए। भारी वजन वाले बर्तनों के ऊपर टोफू को अधिक सख्त करना। इसे फ़र्ज़ी में 2-3 दिन तक स्टोर किया जा सकता है। छवि: एआई (टैग अनुवाद करने के लिए)सोयाबीन टोफू रेसिपी(टी)सोयाबीन टोफू रेसिपी(टी)घर पर टोफू बनाना(टी)घर पर टोफू कैसे बनाएं(टी)घर का बना टोफू(टी)सोयाबीन का उपयोग करके टोफू कैसे बनाएं(टी)सोयाबीन टोफू आसान रेसिपी

गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से क्या होता है? O+ की जगह अगर B+ ब्लड चढ़ा दें तो क्या नुकसान हो सकते हैं, डॉ. से जानें

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Last Updated:May 20, 2026, 22:23 IST Danger Of Wrong Blood Transfusion: अगर किसी मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान गलत ब्लड टाइप मिल जाए, तो इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं. कई बार इससे ऑर्गन फेलियर से लेकर जान जाने तक का भी खतरा होता है. यहां आप हेल्थ एक्सपर्ट से इसके साइड इफेक्ट्स को समझ सकते हैं. ख़बरें फटाफट राजस्थान के पाली स्थित बांगड़ अस्पताल से एक गंभीर मामला सामने आया है. यहां एक बच्ची को गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया गया. परिजनों का आरोप है कि O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ा दिया गया, जिससे बच्ची की हालत बिगड़ गई और अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ. बच्ची को अभी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. लेकिन गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से क्या होता है? इसके खतरे को समझने के लिए हमने फरीदाबाद सेक्टर 88स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इंटर्नल मेडिसिन एंड रुमेटोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ.जयंता ठाकुरिया से बात की. एक्सपर्ट ने बताया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी होता है कि मरीज को सही ब्लड ग्रुप का खून ही चढ़ाया जाए. अगर गलती से गलत ब्लड ग्रुप का खून दे दिया जाए, तो शरीर में गंभीर और कभी-कभी जानलेवा रिएक्शन हो सकते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का इम्यून सिस्टम गलत ब्लड को बाहरी और नुकसान पहुंचाने वाला मानकर उस पर हमला करने लगता है. O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ाने के नुकसानअगर किसी मरीज को O+ ब्लड की जरूरत है लेकिन उसे गलती से B+ ब्लड चढ़ा दिया जाए, तो शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है. O+ ब्लड वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज B+ ब्लड की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करती हैं और उन्हें तेजी से नष्ट करने लगती हैं. इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में “एक्यूट हेमोलिटिक रिएक्शन” कहा जाता है. यह प्रतिक्रिया अक्सर ब्लड चढ़ाने के कुछ ही मिनटों के अंदर शुरू हो सकती है. मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी, सीने या फेफड़ों में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, जी मिचलाना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. कुछ मामलों में पेशाब का रंग गहरा हो सकता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने का संकेत होता है. अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो किडनी फेल होने या शरीर को शॉक लगने का खतरा भी हो सकता है. आमतौर पर O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग दूसरे पॉजिटिव ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं, लेकिन सही मिलान होना बेहद जरूरी है. यदि O+ मरीज को B+ ब्लड दिया जाता है, तो शरीर में मौजूद Anti-B एंटीबॉडीज तुरंत B+ डोनर ब्लड के खिलाफ प्रतिक्रिया शुरू कर देती हैं. इससे शरीर में गंभीर इम्यून रिएक्शन हो सकता है. नुकसान से बचाव के उपायऐसी गलती होने पर तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोकना जरूरी होता है. इसके बाद मरीज की हालत पर लगातार नजर रखी जाती है. मरीज को ऑक्सीजन, नसों के जरिए फ्लूड और जरूरत पड़ने पर दूसरी दवाएं दी जाती हैं ताकि शरीर को स्थिर रखा जा सके. डॉक्टर खासतौर पर किडनी को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि गलत ब्लड का असर सबसे पहले किडनी पर पड़ सकता है. इन नियमों का पालन करना जरूरीहर बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने से पहले, अस्पतालों में सुरक्षा से जुड़े कुछ सख्त नियम अपनाए जाते हैं, जैसे- ब्लड टाइप की जांच करना, मरीज और डोनर के ब्लड टाइप का मिलान करना, और किसी भी तरह की गलती से बचने के लिए डोनर की पहचान की दोबारा जांच करनाय. कोई भी छोटी सी गलती बहुत खतरनाक हो सकती है, और इसी वजह से, खून चढ़ाते समय डॉक्टर और नर्स दोनों ही बहुत ज्यादा सावधानी बरतते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी महंगी हो सकती है:पेट्रोल-डीजल महंगा होने से डिलीवरी चार्ज बढ़ाएंगी कंपनियां, मार्जिन 10-12% तक घटा

ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी महंगी हो सकती है:पेट्रोल-डीजल महंगा होने से डिलीवरी चार्ज बढ़ाएंगी कंपनियां, मार्जिन 10-12% तक घटा

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) से सामान मंगाना महंगा हो सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹4 प्रति लीटर यानी 4% तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्विगी और इटर्नल (जोमैटो की पैरेंट कंपनी) जैसी कंपनियों पर डिलीवरी कॉस्ट का दबाव बढ़ गया है। इलायरा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। इस अतिरिक्त खर्च का बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसके चलते आपके हर ऑर्डर के लिए लगने वाला डिलीवरी चार्ज या अन्य फीस बढ़ाई जा सकती है। जोमैटो-स्विगी ने मार्च में ही बढ़ाई थी प्लेटफॉर्म फीस 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। वहीं, स्विगी ने 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की थी। यूजर्स हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस दे रहे हैं। कंपनियों का खर्च हर ऑर्डर पर ₹1.20 तक बढ़ सकता है रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में क्विक कॉमर्स (10 मिनिट में डिलीवरी) के लिए कंपनियों का औसत डिलीवरी खर्च ₹35 से ₹50 प्रति ऑर्डर आता है। वहीं, फूड डिलीवरी के लिए यह खर्च ₹55 से ₹60 प्रति ऑर्डर के बीच आता है। कुल मिलाकर कंपनियों का मिला-जुला औसत खर्च (ब्लैंडेड कॉस्ट) इटर्नल के लिए ₹45 और स्विगी के लिए ₹55 प्रति ऑर्डर है। आमतौर पर कुल डिलीवरी कॉस्ट में फ्यूल का हिस्सा लगभग 20% होता है। इस हिसाब से प्रति ऑर्डर ईंधन की लागत ₹9 से ₹10 बैठती है। हाल ही में हुई 4% की बढ़ोतरी से कंपनियों को प्रति ऑर्डर करीब 44 पैसे का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹4 से बढ़कर ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचते हैं, तो प्रति ऑर्डर यह दबाव ₹1 से ₹1.20 तक बढ़ जाएगा। स्विगी के मुनाफे पर पड़ सकता है 12% तक का असर अगर कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं और इसे खुद झेलती हैं, तो उनके मुनाफे पर तगड़ा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल के एडजस्टेड एबिटडा (EBITDA) पर 4% से 5% और स्विगी के मुनाफे पर 10% से 12% तक का निगेटिव असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रभाव स्विगी पर ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि स्विगी अभी भी अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को ब्रेक-ईवन (मुनाफे की स्थिति) में लाने के लिए संघर्ष कर रही है। दूसरी तरफ, इटर्नल (जोमैटो) का स्केल काफी बड़ा है और उसके पास विज्ञापनों से होने वाली कमाई का एक मजबूत बेस है। साथ ही उसके ग्राहक थोड़े कम प्राइस-सेंसिटिव (कीमतों को लेकर संवेदनशील) हैं, जिससे वह लागत वसूलने में बेहतर स्थिति में है। गिग वर्कर्स बढ़ा सकते हैं भुगतान की मांग ईंधन की कीमतें बढ़ने का सीधा असर उन डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) पर पड़ता है जो अपनी बाइक से खाना या राशन डिलीवर करते हैं। पेट्रोल महंगा होने से उनकी दैनिक बचत कम हो जाती है। ऐसे में डिलीवरी पार्टनर्स कंपनियों से प्रति ऑर्डर मिलने वाले पेआउट (भुगतान) को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। अगर कंपनियां पेआउट नहीं बढ़ाती हैं, तो डिलीवरी पार्टनर्स के बीच असंतोष बढ़ सकता है और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। तीन तरीकों से बांटा जाएगा बढ़ी हुई कीमतों का बोझ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल 2.7 अरब (270 करोड़) और स्विगी 1.4 अरब (140 करोड़) ऑर्डर्स को हैंडल कर सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर आने वाले खर्च के बोझ को कंपनियां तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट सकती हैं।

ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी महंगी हो सकती है:पेट्रोल-डीजल महंगा होने से डिलीवरी चार्ज बढ़ाएंगी कंपनियां, मार्जिन 10-12% तक घटा

ऑनलाइन फूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी महंगी हो सकती है:पेट्रोल-डीजल महंगा होने से डिलीवरी चार्ज बढ़ाएंगी कंपनियां, मार्जिन 10-12% तक घटा

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) से सामान मंगाना महंगा हो सकता है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब ₹4 प्रति लीटर यानी 4% तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्विगी और इटर्नल (जोमैटो की पैरेंट कंपनी) जैसी कंपनियों पर डिलीवरी कॉस्ट का दबाव बढ़ गया है। इलायरा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। इस अतिरिक्त खर्च का बोझ कंपनियां ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसके चलते आपके हर ऑर्डर के लिए लगने वाला डिलीवरी चार्ज या अन्य फीस बढ़ाई जा सकती है। जोमैटो-स्विगी ने मार्च में ही बढ़ाई थी प्लेटफॉर्म फीस 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। जोमैटो ने 20 मार्च को ही अपनी प्लेटफॉर्म फीस 19% यानी ₹2.40 बढ़ाकर ₹14.90 (बिना GST) कर दी थी। वहीं, स्विगी ने 24 मार्च से हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 17% की बढ़ोतरी की थी। यूजर्स हर ऑर्डर पर 14 रुपए के बजाय अब 17.58 (GST सहित) यानी ₹3.58 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस दे रहे हैं। कंपनियों का खर्च हर ऑर्डर पर ₹1.20 तक बढ़ सकता है रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में क्विक कॉमर्स (10 मिनिट में डिलीवरी) के लिए कंपनियों का औसत डिलीवरी खर्च ₹35 से ₹50 प्रति ऑर्डर आता है। वहीं, फूड डिलीवरी के लिए यह खर्च ₹55 से ₹60 प्रति ऑर्डर के बीच आता है। कुल मिलाकर कंपनियों का मिला-जुला औसत खर्च (ब्लैंडेड कॉस्ट) इटर्नल के लिए ₹45 और स्विगी के लिए ₹55 प्रति ऑर्डर है। आमतौर पर कुल डिलीवरी कॉस्ट में फ्यूल का हिस्सा लगभग 20% होता है। इस हिसाब से प्रति ऑर्डर ईंधन की लागत ₹9 से ₹10 बैठती है। हाल ही में हुई 4% की बढ़ोतरी से कंपनियों को प्रति ऑर्डर करीब 44 पैसे का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹4 से बढ़कर ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचते हैं, तो प्रति ऑर्डर यह दबाव ₹1 से ₹1.20 तक बढ़ जाएगा। स्विगी के मुनाफे पर पड़ सकता है 12% तक का असर अगर कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं और इसे खुद झेलती हैं, तो उनके मुनाफे पर तगड़ा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खराब स्थिति में वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल के एडजस्टेड एबिटडा (EBITDA) पर 4% से 5% और स्विगी के मुनाफे पर 10% से 12% तक का निगेटिव असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रभाव स्विगी पर ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि स्विगी अभी भी अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को ब्रेक-ईवन (मुनाफे की स्थिति) में लाने के लिए संघर्ष कर रही है। दूसरी तरफ, इटर्नल (जोमैटो) का स्केल काफी बड़ा है और उसके पास विज्ञापनों से होने वाली कमाई का एक मजबूत बेस है। साथ ही उसके ग्राहक थोड़े कम प्राइस-सेंसिटिव (कीमतों को लेकर संवेदनशील) हैं, जिससे वह लागत वसूलने में बेहतर स्थिति में है। गिग वर्कर्स बढ़ा सकते हैं भुगतान की मांग ईंधन की कीमतें बढ़ने का सीधा असर उन डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) पर पड़ता है जो अपनी बाइक से खाना या राशन डिलीवर करते हैं। पेट्रोल महंगा होने से उनकी दैनिक बचत कम हो जाती है। ऐसे में डिलीवरी पार्टनर्स कंपनियों से प्रति ऑर्डर मिलने वाले पेआउट (भुगतान) को बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। अगर कंपनियां पेआउट नहीं बढ़ाती हैं, तो डिलीवरी पार्टनर्स के बीच असंतोष बढ़ सकता है और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। तीन तरीकों से बांटा जाएगा बढ़ी हुई कीमतों का बोझ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में इटर्नल 2.7 अरब (270 करोड़) और स्विगी 1.4 अरब (140 करोड़) ऑर्डर्स को हैंडल कर सकती हैं। इतने बड़े स्तर पर आने वाले खर्च के बोझ को कंपनियां तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट सकती हैं।

WHO के अलर्ट के बाद इबोला को लेकर सरकार अलर्ट, एयरपोर्ट से अस्पताल तक कड़ी निगरानी

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Last Updated:May 20, 2026, 21:48 IST Ebola Cases In India: हालांकि अभी तक भारत में एक भी इबोला का मरीज नहीं मिला है. लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेश द्वारा इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी है. ख़बरें फटाफट कोविड की महामारी के बाद अब इबोला विश्वभर के लिए चिंता का विषय बन गया है. लेकिन भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया है कि देश में अभी तक इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेश द्वारा इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने सावधानी बढ़ा दी है. सरकार ने पूरे देश में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके. इसी विषय को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिव शामिल हुए. बैठक के दौरान इबोला वायरस से बचाव, निगरानी और इलाज की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि अगर भविष्य में कोई मामला सामने आता है, तो उससे तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटा जा सके. सर्तक रहने के निर्देशस्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे हर स्तर पर सतर्क रहें. इसके तहत एयरपोर्ट्स पर आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है. जरूरत पड़ने पर क्वारंटीन की व्यवस्था, मरीजों के इलाज, रेफरल सिस्टम और लैब जांच की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी तैयार रहने के लिए कहा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि इस समय मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि राज्यों को समय पर जानकारी साझा करने और तय अस्पतालों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, अन्य मंत्रालयों और विभागों को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर सभी मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकें. सरकार ने यह भी कहा कि भारत को ऐसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने का पहले से अनुभव है. साल 2014 में जब अफ्रीका में इबोला का बड़ा प्रकोप फैला था, तब भी भारत ने कई एहतियाती कदम उठाए थे. उस दौरान एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करके स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला गया था. अफवाह से बचने की सलाहकेंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या डर पर ध्यान न दें. फिलहाल देश में इबोला का कोई मामला नहीं है और सरकार पूरी तरह सतर्क है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल स्वास्थ्य विभाग और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी और दिशा-निर्देशों का ही पालन करें. सरकार का कहना है कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi