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12th Pass Career Confusion Guide; Child Future Clarity

12th Pass Career Confusion Guide; Child Future Clarity

35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- हम लखनऊ में रहते हैं। हमारा बेटा 18 साल का है और उसने अभी 12वीं पास की है। वो पढ़ाई में अच्छा है। टीचर्स भी उसकी तारीफ करते हैं।

लेकिन पिछले कुछ समय से वह अपने करियर को लेकर वह काफी कन्फ्यूज रहता है। कभी कहता है, इंजीनियरिंग करनी है, कभी सिविल सर्विस में जाने की बात करता है। क्लैरिटी न होने के कारण वो स्ट्रेस में भी रहता है। बतौर पेरेंट, हमारी फिक्र ये है कि हम उसे सही रास्ता कैसे दिखाएं, उसकी मदद कैसे करें?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सबसे पहले तो सजग माता-पिता होने के लिए आप बधाई के पात्र हैं। किसी भी बच्चे के लिए 12वीं के बाद का समय बहुत क्रिटिकल होता है। उम्र भी नाजुक होती है। ऐसे में कन्फ्यूजन होना लाजिमी है। आपका बेटा पढ़ाई में अच्छा है। टीचर्स भी उसकी तारीफ करते हैं। जाहिर है कि उसकी क्षमता में कोई कमी नहीं है।

प्राइमरी तौर पर बच्चे को कन्फ्यूजन की वजह से दो समस्याएं होती हैं-

  • तनाव
  • गिल्ट

जब बच्चे को क्लैरिटी नहीं होती तो–

  • बच्चा स्ट्रेस में होता है।
  • दबाव महसूस करता है।
  • डरता है कि “सब आगे बढ़ रहे हैं, मैं पीछे रह जाऊंगा।”
  • ओवरथिंकिंग करता है।
  • दिमाग उलझा रहता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
  • उसे गिल्ट होता है कि मैं पेरेंट्स को निराश कर रहा हूं।
  • इससे सेल्फ-एस्टीम और कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे कम होता है।

इसलिए सबसे पहले बच्चे को नॉर्मल फील कराना जरूरी है। सबसे पहले कन्फ्यूजन को नॉर्मलाइज करें। बच्चे से कहें–

  • “इस उम्र में कन्फ्यूज होना नॉर्मल है।”
  • “हम भी तुम्हारी उम्र में ऐसे ही कन्फ्यूज होते थे।”
  • “कन्फ्यूजन का मतलब है कि अभी तुम एक्सप्लोर कर रहे हो।”
  • “चलो, हम सब साथ मिलकर एक्सप्लोर करते हैं।”

बच्चे से ये न कहें-

  • “जल्दी फैसला करो।”
  • “तुम सोचने के लिए बहुत समय ले रहे हो।”
  • “तुम इतना कन्फ्यूज क्यों हो?”

ये कहें-

  • “तुम अभी जो सोच रहे हो, चाहो तो हमसे शेयर कर सकते हो।”
  • “तो अभी तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है?”
  • “किस चीज से तुम्हें एक्साइटमेंट महसूस होता है?”

12वीं के बाद करियर कन्फ्यूजन क्यों होता है?

12वीं के बाद बच्चों को पहली बार अपने भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला लेना होता है। लेकिन इस समय उन्हें न तो कोई अनुभव होता है और न ही खुद की समझ पूरी तरह विकसित होती है। ऐसे में जब अचानक इतने सारे विकल्प, अपेक्षाएं और तुलना सामने आ जाती हैं, तो बच्चे के लिए सही डायरेक्शन चुनना मुश्किल हो जाता है। कई बार बच्चा यह नहीं समझ पाता कि वह क्या करे। इसके कई कारण हैं-

माता-पिता क्या करें?

करियर कन्फ्यूजन के इस फेज में बच्चे को सपोर्ट की जरूरत होती है। इस समय माता-पिता का रोल समझने और संभालने वाला होना चाहिए। अगर आप इस स्थिति को सही तरीके से हैंडल करते हैं तो बच्चे का आत्मविश्वास मजबूत होगा। लेकिन अगर यहां प्रेशर देंगे तो यही कन्फ्यूजन स्ट्रेस और गिल्ट में बदल सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप खुद को इन तीन रोल्स में ढालें-

  • बच्चे का गाइड बनना है।
  • बच्चे का इमोशनल एंकर (इमोशनल सपोर्ट सिस्टम) बनना है।
  • बच्चे का डॉक्टर बनना है।

आइए इन पॉइंट्स को समझते हैं-

बच्चे के गाइड बनें

  • हर फील्ड के चैलेंज और फायदे समझाएं, लेकिन चुनने की स्वतंत्रता दें।
  • यूट्यूब, मेंटर्स और प्रोफेशनल्स से सही जानकारी दिलाएं।
  • ‘क्या बनना है‘ से पहले ‘किसमें रुचि है‘ समझने में मदद करें।
  • अलग-अलग फील्ड पर रिसर्च/ट्रायल करने दें।

इसके साथ ही नीचे ग्राफिक में दी गई कुछ और बातों का ध्यान रखें-

इमोशनल एंकर बनें

  • घर में ओपन कम्युनिकेशन का माहौल बनाएं।
  • बिना जजमेंट के बच्चे की बात सुनें।
  • उसकी फीलिंग्स को वैलिडेट करें।
  • कहें-“ऐसा महसूस होना स्वाभाविक है।”
  • अनकंडीशनल सपोर्ट दें।
  • हर बच्चे की जर्नी अलग होती है। इसलिए तुलना न करें।
  • उसकी छोटी कोशिश की भी तारीफ करें।

बच्चे के डॉक्टर बनें

  • इस समय बच्चे को स्ट्रेस होता है। इसे मैनेज करना सिखाएं।
  • कम नींद, चिड़चिड़ापन और लो मोटिवेशन जैसे स्ट्रेस सिग्नल पहचानें।
  • डीप ब्रीदिंग की आदत बनवाएं। इससे दिमाग शांत होता है, एंग्जाइटी कम होती है।
  • पॉजिटिव सेल्फ-टॉक सिखाएं, जैसे “मैं सीख रहा हूं, धीरे-धीरे समझ आ जाएगा।”
  • सोशल मीडिया यूज के लिए लिमिट तय करें।
  • फिजिकल एक्टिविटी को रूटीन का हिस्सा बनाएं।
  • बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना सिखाएं।
  • जरूरत पड़े तो एक्सपर्ट की मदद लें।
  • काउंसलर/करियर गाइड से काउंसलिंग दिलवाएं।

क्या गलतियां न करें?

करियर कन्फ्यूजन के समय माता-पिता की छोटी-छोटी गलतियां भी बच्चे के मन पर बड़ा असर डालती हैं। कई बार हम अनजाने में ऐसी बातें या व्यवहार करते हैं, जो बच्चे के स्ट्रेस और गिल्ट को और बढ़ा सकते हैं। याद रखें, इस समय बच्चे को आपके जजमेंट की नहीं, समझ और सपोर्ट की जरूरत है। इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें-

  • दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • जल्दी निर्णय लेने का दबाव न डालें।
  • ‘सेफ’ करियर के लिए मजबूर न करें।
  • बच्चे की बात को नजरअंदाज न करें।
  • अपने अधूरे सपनों को बच्चें पर न थोपें।
  • बच्चे के करियर स्ट्रेस को हल्के में लें।

अंत में यही कहूंगी कि करियर का कन्फ्यूजन किसी भी बच्चे के लिए खुद को समझने की एक प्रक्रिया है। इस दौर में उसे धैर्य, भरोसे और इमोशनल सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। याद रखें, हर बच्चे की अपनी गति और अपनी दिशा होती है। जरूरी यह नहीं कि वह कितनी जल्दी फैसला लेता है, बल्कि यह है कि वह समझदारी और आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमता के अनुसार फैसला ले।

……………… ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- दूध पीकर बच्चा सो जाता है: क्या उसे नींद से उठाकर डकार दिलाना जरूरी, मैं नई मां हूं, थोड़ा कनफ्यूज भी, क्या करूं?

सबसे पहले तो आपको मां बनने की बधाई। एक नई मां के रूप में आपके मन में ऐसे सवाल आना स्वाभाविक हैं। इस समय आसपास के लोग तरह-तरह की सलाह देते हैं। इससे कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है। इसलिए सही जानकारी होना जरूरी है। आगे पढ़िए…

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लेकिन पिछले कुछ समय से वह अपने करियर को लेकर वह काफी कन्फ्यूज रहता है। कभी कहता है, इंजीनियरिंग करनी है, कभी सिविल सर्विस में जाने की बात करता है। क्लैरिटी न होने के कारण वो स्ट्रेस में भी रहता है। बतौर पेरेंट, हमारी फिक्र ये है कि हम उसे सही रास्ता कैसे दिखाएं, उसकी मदद कैसे करें?

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जवाब- सबसे पहले तो सजग माता-पिता होने के लिए आप बधाई के पात्र हैं। किसी भी बच्चे के लिए 12वीं के बाद का समय बहुत क्रिटिकल होता है। उम्र भी नाजुक होती है। ऐसे में कन्फ्यूजन होना लाजिमी है। आपका बेटा पढ़ाई में अच्छा है। टीचर्स भी उसकी तारीफ करते हैं। जाहिर है कि उसकी क्षमता में कोई कमी नहीं है।

प्राइमरी तौर पर बच्चे को कन्फ्यूजन की वजह से दो समस्याएं होती हैं-

  • तनाव
  • गिल्ट

जब बच्चे को क्लैरिटी नहीं होती तो–

  • बच्चा स्ट्रेस में होता है।
  • दबाव महसूस करता है।
  • डरता है कि “सब आगे बढ़ रहे हैं, मैं पीछे रह जाऊंगा।”
  • ओवरथिंकिंग करता है।
  • दिमाग उलझा रहता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
  • उसे गिल्ट होता है कि मैं पेरेंट्स को निराश कर रहा हूं।
  • इससे सेल्फ-एस्टीम और कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे कम होता है।

इसलिए सबसे पहले बच्चे को नॉर्मल फील कराना जरूरी है। सबसे पहले कन्फ्यूजन को नॉर्मलाइज करें। बच्चे से कहें–

  • “इस उम्र में कन्फ्यूज होना नॉर्मल है।”
  • “हम भी तुम्हारी उम्र में ऐसे ही कन्फ्यूज होते थे।”
  • “कन्फ्यूजन का मतलब है कि अभी तुम एक्सप्लोर कर रहे हो।”
  • “चलो, हम सब साथ मिलकर एक्सप्लोर करते हैं।”

बच्चे से ये न कहें-

  • “जल्दी फैसला करो।”
  • “तुम सोचने के लिए बहुत समय ले रहे हो।”
  • “तुम इतना कन्फ्यूज क्यों हो?”

ये कहें-

  • “तुम अभी जो सोच रहे हो, चाहो तो हमसे शेयर कर सकते हो।”
  • “तो अभी तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है?”
  • “किस चीज से तुम्हें एक्साइटमेंट महसूस होता है?”

12वीं के बाद करियर कन्फ्यूजन क्यों होता है?

12वीं के बाद बच्चों को पहली बार अपने भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला लेना होता है। लेकिन इस समय उन्हें न तो कोई अनुभव होता है और न ही खुद की समझ पूरी तरह विकसित होती है। ऐसे में जब अचानक इतने सारे विकल्प, अपेक्षाएं और तुलना सामने आ जाती हैं, तो बच्चे के लिए सही डायरेक्शन चुनना मुश्किल हो जाता है। कई बार बच्चा यह नहीं समझ पाता कि वह क्या करे। इसके कई कारण हैं-

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  • बच्चे का गाइड बनना है।
  • बच्चे का इमोशनल एंकर (इमोशनल सपोर्ट सिस्टम) बनना है।
  • बच्चे का डॉक्टर बनना है।

आइए इन पॉइंट्स को समझते हैं-

बच्चे के गाइड बनें

  • हर फील्ड के चैलेंज और फायदे समझाएं, लेकिन चुनने की स्वतंत्रता दें।
  • यूट्यूब, मेंटर्स और प्रोफेशनल्स से सही जानकारी दिलाएं।
  • ‘क्या बनना है‘ से पहले ‘किसमें रुचि है‘ समझने में मदद करें।
  • अलग-अलग फील्ड पर रिसर्च/ट्रायल करने दें।

इसके साथ ही नीचे ग्राफिक में दी गई कुछ और बातों का ध्यान रखें-

इमोशनल एंकर बनें

  • घर में ओपन कम्युनिकेशन का माहौल बनाएं।
  • बिना जजमेंट के बच्चे की बात सुनें।
  • उसकी फीलिंग्स को वैलिडेट करें।
  • कहें-“ऐसा महसूस होना स्वाभाविक है।”
  • अनकंडीशनल सपोर्ट दें।
  • हर बच्चे की जर्नी अलग होती है। इसलिए तुलना न करें।
  • उसकी छोटी कोशिश की भी तारीफ करें।

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  • कम नींद, चिड़चिड़ापन और लो मोटिवेशन जैसे स्ट्रेस सिग्नल पहचानें।
  • डीप ब्रीदिंग की आदत बनवाएं। इससे दिमाग शांत होता है, एंग्जाइटी कम होती है।
  • पॉजिटिव सेल्फ-टॉक सिखाएं, जैसे “मैं सीख रहा हूं, धीरे-धीरे समझ आ जाएगा।”
  • सोशल मीडिया यूज के लिए लिमिट तय करें।
  • फिजिकल एक्टिविटी को रूटीन का हिस्सा बनाएं।
  • बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना सिखाएं।
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करियर कन्फ्यूजन के समय माता-पिता की छोटी-छोटी गलतियां भी बच्चे के मन पर बड़ा असर डालती हैं। कई बार हम अनजाने में ऐसी बातें या व्यवहार करते हैं, जो बच्चे के स्ट्रेस और गिल्ट को और बढ़ा सकते हैं। याद रखें, इस समय बच्चे को आपके जजमेंट की नहीं, समझ और सपोर्ट की जरूरत है। इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें-

  • दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • जल्दी निर्णय लेने का दबाव न डालें।
  • ‘सेफ’ करियर के लिए मजबूर न करें।
  • बच्चे की बात को नजरअंदाज न करें।
  • अपने अधूरे सपनों को बच्चें पर न थोपें।
  • बच्चे के करियर स्ट्रेस को हल्के में लें।

अंत में यही कहूंगी कि करियर का कन्फ्यूजन किसी भी बच्चे के लिए खुद को समझने की एक प्रक्रिया है। इस दौर में उसे धैर्य, भरोसे और इमोशनल सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। याद रखें, हर बच्चे की अपनी गति और अपनी दिशा होती है। जरूरी यह नहीं कि वह कितनी जल्दी फैसला लेता है, बल्कि यह है कि वह समझदारी और आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमता के अनुसार फैसला ले।

……………… ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- दूध पीकर बच्चा सो जाता है: क्या उसे नींद से उठाकर डकार दिलाना जरूरी, मैं नई मां हूं, थोड़ा कनफ्यूज भी, क्या करूं?

सबसे पहले तो आपको मां बनने की बधाई। एक नई मां के रूप में आपके मन में ऐसे सवाल आना स्वाभाविक हैं। इस समय आसपास के लोग तरह-तरह की सलाह देते हैं। इससे कन्फ्यूजन और बढ़ जाता है। इसलिए सही जानकारी होना जरूरी है। आगे पढ़िए…

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