स्वस्थ बालों के लिए छाछ: बालों के झड़ने से लेकर डैंड्रफ तक…हर समस्या का सस्ता घरेलू इलाज है छाछ, जान लें इस्तेमाल का सही तरीका

20 मई 2026 को 21:32 IST पर अपडेट किया गया स्वस्थ बालों के लिए छाछ: आजकल बाल झड़ना, डैंड्रफ, रुखापन और मुलायम बालों जैसे दिखने वाले बाल बेहद आम हो गए हैं। इन घरेलू प्रोटोटाइप से प्राप्त करने के लिए लोग महंगे हेयर प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं, लेकिन कई उपाय भी बेहद प्रभावशाली साबित हो सकते हैं। जवानी में से एक है छाछ। दही से बनी छाछ न केवल स्वास्थ्य के लिए जादुई मंत्र है, बल्कि यह बालों को मजबूत, मुलायम और मजबूत बनाने में भी मदद कर सकती है। आइये जानते हैं बालों पर छाछ के फायदे और इसे इस्तेमाल करने के सही तरीकों के बारे में अनुसरण करना : छाछ में लैक्टिक एसिड, प्रोटीन पाया जाता है, जो बालों को पोषण देने में मदद करते हैं। यह मृत रेशम कैनवास स्कैल्प को परत-दर-परत बनाए रखा जाता है। इससे बाल बालों से मजबूत होते हैं और उनकी चमक भी चमकती है। छवि: एआई वाइट हाथों से सादी छाछ दूरी और करीब 15 से 20 मिनट तक छोड़ें। इसके बाद गुनगुने या ठंडे पानी से बाल धो लें। बाद में माइल्ड शैंपू भी कर सकते हैं। यह हेयरस्टाइल बालों को मुलायम और फ़्रेशिएचर बनाती है। छवि: एआई डैंड्रफ या ऑयली स्कैल्प की समस्या है तो डैंड्रफ में छोटे नींबू का रस मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। कटोरी छाछ में नींबू का रस और स्कैल्प की रेसिपी बनाएं। 20 मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। छवि: फ्रीपिक छाछ का इस्तेमाल हेयर वॉश के तौर पर भी किया जाता है। कॉटन की मदद से छाछ को बालों की जड़ों में लगाएं। 30 से 45 मिनट बाद पानी से बाल धो लें। बेहतर परिणाम के लिए इसे सप्ताह में 2 से 3 बार उपयोग करें। छवि: फ्रीपिक बालों को पोषण देने के लिए बालों का हेयर मास्क भी काफी खतरनाक होता है। इसके लिए एक कटोरी छाछ में 3 मिंट ऑलिव ऑयल, एक अंडा और एक केला पेस्ट तैयार करें। छवि: अनप्लैश अब इस मास्क को बालों में लगाएं और करीब 20 मिनट बाद धो लें। इसका उपयोग सप्ताह में एक बार किया जाता है। आपको आपकी ही नज़र आएगी। छवि: फ्रीपिक आपकी त्वचा बहुत सेंसिटिव है या किसी तरह की एलर्जी की समस्या है तो बाल पर छाछ से पहले पैच टेस्ट जरूर करा लें। साथ ही छाछ का उपयोग एक या दो बार ही करें और दैनिक उपयोग करने से रोकें। छवि: अनप्लैश द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 20 मई 2026 को 21:32 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)बालों के लिए छाछ(टी)बालों के लिए छाछ(टी)स्वस्थ बाल युक्तियाँ(टी)बाल विकास उपाय(टी)रूसी घरेलू उपचार(टी)प्राकृतिक बालों की देखभाल(टी)बालों के झड़ने का समाधान(टी)घर का बना हेयर मास्क(टी)छाछ के फायदे(टी)रेशमी बाल टिप्स
40 की उम्र के बाद फिटनेस टिप्स: 40 की उम्र में क्या चाहिए 20 साल वाली फिटनेस? आज ही करें एलेक्जेंड्रा में ये 5 बदलाव, अव्यवस्थित कोसोन दूर

40 के बाद फिट कैसे रहें: 40 की उम्र पार करते ही शरीर में होते हैं कई बदलाव। मेटाबॉलिज्म धीमा लगता है, मॉस मसल कम हो रहा है और ऊर्जा स्तर में थोड़ी गिरावट महसूस हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप फिट नहीं रह सकते। अगर आप 40 साल की उम्र के साथ-साथ 20 साल की उम्र में भी फिटनेस और फिटनेस चाहते हैं, तो आपको किसी चीज की जरूरत नहीं है। बस अपनी लाइफस्टाइल में ये 5 बदलाव करने से आपको कोसोन दूर जाना पड़ेगा: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल करें 20 साल की उम्र में आप सिर्फ दौड़कर या वॉक करके फिट रह सकते थे, लेकिन 40 के बाद शरीर की मांस पेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इसे रोकने के लिए सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस की मांग अवश्य करें। क्या करें: आप फिजिकल डंबल्स उठा सकते हैं, रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल कर सकते हैं, या खुद के शरीर के वजन से जुड़ी चीजें जैसे स्क्वाट्स और पुश-अप्स कर सकते हैं। यह आपके जोड़ों को भी मजबूत बनाए रखता है। साबुत अनाज में प्रोटीन मसाले और रिहाइड्रा कार्ब्स कम करें उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर को मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए भरपूर मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है। साथ ही, अब बॉडी एक्स्ट्रा कैलोरी को इतना जल्दी बर्न नहीं कर पाता, इसलिए चीनी और मैदे जैसे फाइबर से दूरी बनाना जरूरी है। क्या वास्तव में: अपने हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें जैसे दालें, पनीर, दही, अंडा, लीन मीट, या स्प्राउट्स। स्ट्रेंथ फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और मैस्टिक मीट मीट बिल्कुल कम कर दीजिए। मेटाबोलिज्म के लिए तीव्रता और गहरी नींद लें अक्सर लोग फिटनेस के चक्कर में नींद को परेशान कर देते हैं। 40 की उम्र के बाद रात में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना किसी भी वरदान से कम नहीं है। नींद की कमी से तनाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे पेट की चर्बी तेजी से बढ़ जाती है और वजन कम होना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन करना जरूरी है उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई बार हमें प्यास की परत का निशान कम होने लगता है, जिससे शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) हो जाती है। पानी कम पीने से जोड़ों में दर्द, थकान और सुस्ती जैसे खतरे सामने आते हैं। रिजर्व में कम से कम 3 किलोलीटर पानी जरूर पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाजार में बने रहें। सक्रिय सिटिंग अपनाएं और स्थिर बैठे से असबाब अगर आप जिम में एक घंटे रुकते हैं लेकिन बाकी के 9 घंटे ऑफिस की कुर्सी पर लगातार बैठे रहते हैं, तो जिम का फायदा आधा हो जाता है। 40 के बाद “सिडेंटरी लाइफस्टाइल” चैलेंज का सबसे बड़ा कारण बना है। हर एक घंटे में अपनी सीट से उठें, 5 मिनट के लिए सैर करें या हल्की-फुल्की सैर करें। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपना फुल बॉडी चेकअप जैसे ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और विटामिन डी और बी12 जरूर करवाएं। इससे शरीर के अंदर चल रही किसी भी समस्या का समय पर पता चल जाता है। बदलाव हमेशा छोटे-छोटे कदमों से शुरू होते हैं। इनमें से कोई भी दो बदलाव आपके जीवन में करने से आप खुद महसूस करेंगे कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। यह अवश्य पढ़ें: अनुपूरक कैसे चुनें: आप स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन क्या लेते हैं? इन बातों के खास नुस्खे, सेहत को हो सकता है भारी नुकसान! अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)फिटनेस टिप्स(टी)स्वास्थ्य टिप्स(टी)फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ आहार(टी)40 के बाद फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली के लिए फिटनेस टिप्स(टी)स्वस्थ जीवनशैली
बॉडी को फ्रिज बना देगा पहाड़ों का ये नन्हा फल, गर्मी का दुश्मन, डिहाइड्रेशन चुटकियों में छूमंतर

Last Updated:May 20, 2026, 20:57 IST Hisalu benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों में मिलने वाला हिसालू सेहत के लिए वरदान से कम नहीं. मई-जून में झाड़ियों पर लगने वाला ये छोटा पीले रंग का फल स्वाद में खट्टा-मीठा और बेहद रसदार होता है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल होता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन को बेहद जरूरी मानते हैं. हिसालू जैसे जंगली फल शरीर को पोषण देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. पहाड़ों में लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में खाते आ रहे हैं. प्राकृतिक फलों का सेवन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है. हिसालू स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को ताजगी और ऊर्जा भी देता है. गर्मियों में इसे सेहत का खजाना माना जाता है. उत्तराखंड की लोक संस्कृति में हिसालू का विशेष महत्व है. पहाड़ों के कई लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में इस फल का जिक्र मिलता है. ग्रामीण इलाकों में हिसालू को बचपन और प्रकृति से जुड़ी यादों का प्रतीक माना जाता है. गर्मियों के मौसम में बच्चे जंगलों में जाकर हिसालू तोड़ते हैं, परिवार के साथ इसका आनंद लेते हैं. पहले समय में लोग जंगल से लौटते वक्त हिसालू जरूर लेकर आते थे. यह फल पहाड़ की जीवनशैली और प्राकृतिक खानपान का हिस्सा रहा है. आज भी गांवों में हिसालू का इंतजार गर्मियों के खास मौसम की तरह किया जाता है. लोगों का मानना है कि यह फल केवल स्वाद नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल है. कई स्थानीय लोग इसे छोटे स्तर पर बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाते हैं. गर्मियों में सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में हिसालू बेचते ग्रामीण आसानी से दिखाई देते हैं. पर्यटक भी इस पारंपरिक पहाड़ी फल का स्वाद लेना पसंद करते हैं. यदि इसके संरक्षण और पैकेजिंग पर काम किया जाए तो यह पहाड़ के किसानों और ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकता है. पहाड़ की पहचान बन चुका हिसालू अब धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google हिसालू को पहाड़ों में प्राकृतिक ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. जंगलों और खेतों में काम करने वाले लोग थकान मिटाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं. गर्मियों में अधिक पसीना आने से शरीर कमजोर महसूस करता है, ऐसे में हिसालू राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं. यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे खाते हैं, जिससे इसके प्राकृतिक गुण बरकरार रहते हैं. हिसालू बेहद नाजुक होता है. जंगल से तोड़ने के कुछ घंटों बाद ही यह खराब होने लगता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान नहीं होता है. यही वजह है कि यह फल बाजारों में कम दिखाई देता है, ज्यादातर स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है. ग्रामीण लोग सुबह के समय ताजा हिसालू तोड़कर सीधे सेवन करते हैं. इसका स्वाद ताजा रहने पर सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है. कई जगहों पर लोग इसका जूस और चटनी भी बनाते हैं. पहाड़ों में बच्चों के लिए हिसालू केवल फल नहीं, बल्कि गर्मियों की खास याद माना जाता है. इस पारंपरिक फल को पहचान मिले और इसके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए. भीषण गर्मी के दौरान हिसालू शरीर को ठंडा रखने में काफी मददगार है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे प्राकृतिक कूलिंग फल के रूप में जानते हैं. यह फल रसदार होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में सहायक है. जंगल में काम करने वाले लोग गर्मी से राहत पाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता है. डॉक्टर भी गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन की सलाह देते हैं. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल लोकल 18 से बताते हैं कि हिसालू पोषक तत्वों से भरपूर फल है. इसमें विटामिन-सी, आयरन, फाइबर और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में हिसालू खाने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने लगती है, ऐसे में हिसालू शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला हिसालू इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. स्थानीय लोग इसे बचपन की यादों और पहाड़ की पारंपरिक पहचान से जोड़कर देखते हैं. हिसालू को वैज्ञानिक भाषा में रुबस एलिप्टिकस कहा जाता है, जो गुलाब परिवार का पौधा माना जाता है. यह फल प्राकृतिक रूप से पहाड़ों में उगता है, बिना किसी रासायनिक खाद के तैयार होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और महिलाएं जंगलों से हिसालू तोड़कर घर लाते हैं. गर्मियों में यह फल शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने में काफी मददगार माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ईंधन बचाने के लिए पीएम के WFH आह्वान का समर्थन करते हुए रवि किशन ने भाषण में कहा ‘काम से घर’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 20:09 IST यह टिप्पणी तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, क्लिप को उन उपयोगकर्ताओं द्वारा व्यापक रूप से साझा किया गया जिन्होंने वाक्यांश संबंधी त्रुटि की ओर इशारा किया। बीजेपी सांसद रवि किशन. भाजपा सांसद रवि किशन ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा चिंताओं के बीच ईंधन संरक्षण के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए “घर से काम” वाक्यांश को मिश्रित करने के बाद ऑनलाइन ध्यान आकर्षित किया है। के साथ एक साक्षात्कार में बोलते हुए पीटीआईअभिनेता से नेता बने अभिनेता ईंधन की खपत को कम करने के लिए लचीली कार्य व्यवस्था पर सरकार के जोर का जिक्र कर रहे थे। हालाँकि, उन्होंने कहा, “घर से काम करने के बजाय काम से घर जाना बहुत महत्वपूर्ण है,” जो कि उनकी जुबान फिसलने जैसा प्रतीत हुआ। यह टिप्पणी तेजी से सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, क्लिप को उन उपयोगकर्ताओं द्वारा व्यापक रूप से साझा किया गया जिन्होंने वाक्यांश संबंधी त्रुटि की ओर इशारा किया। “घर से काम” वाक्यांश का प्रयोग आमतौर पर दूरस्थ कार्य व्यवस्था के संदर्भ में किया जाता है। यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई, उपयोगकर्ताओं की जुबान फिसलने से मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई। टिप्पणी अनुभाग जल्द ही एक कॉमेडी थ्रेड में बदल गया, जिसमें एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “2×3=3×2, उसी तरह उनके अनुसार घर से काम = घर से काम।” एक अन्य ने मजाक में कहा, “हां, हम हर दिन काम से घर आते हैं… घर पहुंचेंगे और रात का खाना खाएंगे।” एक वायरल चुटकी में सरल शब्दों में लिखा था: “फिसलन भरी जीभ।” अन्य लोगों ने अधिक व्यंग्यात्मक लहजे में टिप्पणी की, जैसे “मीडिया – टीआरपी नहीं आ रही। रवि किशन – मैं हूं ना,” और “उनका मतलब परिवार को कार्यस्थल पर स्थानांतरित करना है।” “जो लोग अपने बाथटब में दूध और गुलाब की पंखुड़ियाँ माँगते थे, वे अब जनता को यह सलाह दे रहे हैं!” एक यूजर ने लिखा. पीएम मोदी की अपील यह टिप्पणी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के संदर्भ में की गई थी जिसमें नागरिकों और संस्थानों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और जहां संभव हो घर से काम करने सहित विभिन्न उपायों के माध्यम से ईंधन के उपयोग को कम करने का आग्रह किया गया था। प्रधान मंत्री के सुझाव पश्चिम एशिया में तनाव से जुड़े ऊर्जा बाजारों में वैश्विक व्यवधानों के बीच आए हैं, जिसने दुनिया भर में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईंधन बचाने के लिए पीएम के WFH आह्वान का समर्थन करते हुए, रवि किशन ने भाषण में ‘काम से घर’ कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)रवि किशन घर से काम करने की पर्ची(टी)रवि किशन गलती(टी)घर से काम(टी)घर से काम टिप्पणी(टी)नरेंद्र मोदी ईंधन अपील(टी)ईंधन संरक्षण भारत(टी)लचीली कार्य व्यवस्था(टी)वायरल साक्षात्कार क्लिप
JNU Faculty Recruitment 2026 | Delhi Professor Jobs

17 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी JNU में फैकल्टी के 100 पदों पर निकली भर्ती, एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट 2026 के लिए आवेदन शुरू होने की। साथ में बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के 22 पदों पर निकाली भर्ती की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. JNU में फैकल्टी के 100 पदों पर निकली भर्ती, सैलरी 2 लाख से ज्यादा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी के पदों पर भर्ती निकाली है। यूनिवर्सिटी की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती की जाएगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.jnu.ac.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : प्रोफेसर : संबंधित विषय में पीएचडी की डिग्री। कम से कम 10 रिसर्च पेपर प्रकाशित होना चाहिए। कुल रिसर्च स्कोर 120 होना चाहिए। विश्वविद्यालय या कॉलेज में कम से कम 10 साल टीचिंग या रिसर्च का अनुभव। पीएचडी छात्रों को गाइड करने का अनुभव भी जरूरी है। एसोसिएट प्रोफेसर : कम से कम 55% अंकों के साथ पीएचडी और मास्टर डिग्री। 8 साल का टीचिंग या रिसर्च एक्सपीरियंस। कम से कम 7 रिसर्च पेपर पब्लिश होना चाहिए। कुल रिसर्च स्कोर 75 होना जरूरी। असिस्टेंट प्रोफेसर : संबंधित विषय में 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री। इसके साथ NET, SLET/SET परीक्षा पास होना जरूरी है या पीएचडी डिग्री होनी चाहिए (कुछ मामलों में छूट भी मिलती है)। सिलेक्शन प्रोसेस : योग्यता इंटरव्यू के बेसिस पर सैलरी : प्रोफेसर : .1,44,200/-2,18,200 रुपए प्रतिमाह एसोसिएट प्रोफेसर : 1,31,400/-2,17,100 रुपए प्रतिमाह असिस्टेंट प्रोफेसर : 57,700/-1,82,400 रुपए प्रतिमाह फीस : जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 2000 रुपए एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी, महिला : नि:शुल्क ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट jnu.ac.in/career पर जाएं। होमपेज पर जेएनयू जॉब्स 2023 लिंक पर क्लिक करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस का भुगतान करके फॉर्म सब्मिट कर दें। आगे की जरूरत के लिए फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट के लिए आवेदन शुरू, 379 वैकेंसी भारतीय वायुसेना ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत आज यानी 20 मई 2026 से कर दी है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट afcat.cdac.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्राउंड ड्यूटी टेक्निकल ब्रांच : 60% अंकों के साथ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रॉनिक्स) की डिग्री। फ्लाइंग ब्रांच : 50% अंकों के साथ 12वीं पास (मैथमेटिक्स और फिजिक्स) या 60% अंकों के साथ तीन वर्षीय ग्रेजुएशन की डिग्री या 60% अंकों के साथ बीई, बीटेक की डिग्री एज लिमिट : आयु की गणना 01 जुलाई, 2027 के आधार पर की जाएगी। ग्राउंड ड्यूटी टेक्निकल, नॉन-टेक्निकल ब्रांच : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 26 साल फीस : जो उम्मीदवार एनसीसी स्पेशल एंट्री और गेट परीक्षा के जरिये आवेदन कर रहे हैं, उनसे फीस नहीं ली जाएगी। अन्य : 550 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम एसएसबी इंटरव्यू डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम सैलरी : रैंक पे स्केल फ्लाइंग ऑफिसर 56,100 – 1,77,500 रुपए प्रतिमाह फ्लाइट लेफ्टिनेंट 6,13,00-1,93,900 रुपए प्रतिमाह विंग कमांडर 1,21,200 – 2,12400 रुपए प्रतिमाह ग्रुप कैप्टन 1,30,600-2, 15,900 रुपए प्रतिमाह एयर कमोडोर 1,39,600-2,17,600 रुपए प्रतिमाह एयर वाइस मार्शल . 1,44,200-2,18,200 रुपए प्रतिमाह एयर मार्शल HAG स्केल 1, 82, 200-2,24,100 रुपए प्रतिमाह HAG + स्केल 2,05,400 – 2,24,400 रुपए प्रतिमाह VACS/एयरफोर्स कैडर/ एयर मार्शल (NFSG) 2,25,000 रुपए प्रतिमाह CAS 2,50,000 रुपए प्रतिमाह स्क्वाड्रन लीडर 6,94,00 – 2,07,200 रुपए प्रतिमाह एग्जाम पैटर्न : एग्जाम का नाम निगेटिव मार्किंग सब्जेक्ट मार्क्स टाइम लिमिट AFCAT 2 Exam 2026 1 अंक काटा जाएगा। जनरल अवेयरनेस वर्बल एबिलिटी इन इंग्लिश न्यूमेरिकल एबिलिटी रीजनिंग एवं मिलिट्री एप्टीट्यूड टेस्ट अधिकतम अंक : 300 ड्यूरेशन : 2 घंटे सिलेबस : इंग्लिश : comprehension cloze test synonyms and antonyms idioms and phrases Error spotting जनरल नॉलेज : इंडियन हिस्ट्री पॉलिटी इकोनॉमिक्स जियोग्राफी फिजिक्स केमेस्ट्री बायोलॉजी करेंट अफेयर्स रीजनिंग : सीरिज वेन डायग्राम सिलॉजिस्म ब्लड रिलेशन नॉन वर्बल क्वेश्चन वर्बल रीजनिंग मिलिट्री एप्टीट्यूड क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड : नंबर सिस्टम एचसीएफ एलसीएम टाइम डिस्टेंस एंड स्पीड टाइम एंड वर्क रेशो एंड प्रपॉर्शन पर्सेंटेज एवरेज सिंपल इनटरेस्ट एंड कंपाउंड इनटरेस्ट पाइप्स एंड सिस्टर्न ऐसे करें आवेदन : AFCAT की वेबसाइट afcat.cdac.in पर जाएं। होम पेज पर दिख रहे IAF AFCAT 2 2024 लिंक पर क्लिक करें। फॉर्म में मांगी गई जानकारियां भरें। सभी डॉक्यूमेंट्स स्कैन करके अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. बिहार में ASI की निकली भर्ती, फीस 100 रुपए बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के 22 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट bpssc.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या जनरल 8 आर्थिक रूप से कमजोर 2 एससी 3 एसटी 1 अत्यंत पिछड़ा वर्ग 4 पिछड़ा वर्ग 3 पिछड़ वर्ग की महिलाएं 1 कुल पदों की संख्या 22 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थान से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में तीन वर्षीय डिप्लोमा होना जरूरी है। शारीरिक योग्यता : हाइट : सामान्य, पिछड़ा वर्ग (पुरुष) : न्यूनतम : 165 सेमी अत्यंत पिछड़ा वर्ग, एससी, एसटी (पुरुष) : 160 सेमी सभी वर्गों की महिलाएं : 155 सेमी सीना (केवल पुरुष): सामान्य, बीसी, ईबीसी : 81-86 सेमी एससी, एसटी : 79-84 सेमी वजन: सभी वर्ग की महिलाओं के लिए न्यूनतम वजन 48 किलोग्राम एज लिमिट : सामान्य (पुरुष) : 21 – 37 साल सामान्य (महिला) : 21 – 40 साल पिछड़ा/अत्यंत पिछड़ा वर्ग (पुरुष व महिला) : 21 – 40 साल अनुसूचित जाति/जनजाति (पुरुष व महिला) : 21 – 42 साल सिलेक्शन प्रोसेस : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट सैलरी : लेवल – 5 के अनुसार फीस : सभी के लिए 100 रुपए क्वालिफाइंग मार्क्स : सामान्य : न्यूनतम 50% अंक एससी, एसटी : 45% अंक एग्जाम पैटर्न : प्रीलिम्स एग्जाम : मार्क्स : 100 अंक ड्यूरेशन : 2 घंटे क्वेश्चन टाइप : ऑब्जेक्टिव सब्जेक्ट : जनरल नॉलेज, टेक्निकल सब्जेक्ट क्वेश्चन नंबर : जनरल नॉलेज : 40 टेक्निकल सब्जेक्ट : 60 मेन्स एग्जाम : पेपर नंबर : 2 पहला
लू, डिहाइड्रेशन और कमजोरी से बचना है? गर्मियों में जरूर खाएं ये खट्टा फल, शरीर का ‘नेचुरल बॉडीगार्ड’

Last Updated:May 20, 2026, 19:48 IST गर्मियों में मिलने वाला कच्चा आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार कच्चा आम लू, डिहाइड्रेशन, पेट की समस्याओं और कमजोरी से बचाने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि आम पना, चटनी और अचार गर्मियों की थाली का अहम हिस्सा बन जाते हैं. ख़बरें फटाफट रामपुर. गर्मी बढ़ते ही बाजारों में कच्चे आम की आमद शुरू हो जाती है. स्वाद में खट्टा लगने वाला यही कच्चा आम गर्मियों में शरीर के लिए किसी प्राकृतिक सुरक्षा कवच से कम नहीं माना जाता. उत्तर भारत में लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि लू, पाचन संबंधी समस्याओं और मौसमी परेशानियों से बचाव के लिए भी अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं. गांव से लेकर शहर तक कच्चे आम से बनने वाला पना, चटनी और अचार गर्मियों की थाली का अहम हिस्सा बन चुका है. पोषक तत्वों से भरपूर है कच्चा आमकच्चे आम में फाइबर, विटामिन C, विटामिन A, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और जिंक जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह शरीर को ऊर्जा देने, पाचन सुधारने, इम्यूनिटी मजबूत करने और त्वचा व बालों की सेहत बनाए रखने में मददगार माना जाता है. तेज गर्मी में जब शरीर जल्दी थकान महसूस करता है, तब कच्चा आम राहत देने का काम करता है. लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगारगर्मी के मौसम में अक्सर लू लगना, डिहाइड्रेशन, गैस, खट्टी डकार और पेट खराब होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में कच्चा आम घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कई घरों में आज भी इसे पारंपरिक तरीके से भोजन का हिस्सा बनाया जाता है ताकि गर्मी के असर से बचाव हो सके. डॉक्टरों का मानना है कि सीमित मात्रा में नियमित सेवन करने से शरीर की सहनशक्ति बनी रहती है. आम पना देता है ठंडककच्चा आम खाने का सबसे लोकप्रिय तरीका ‘आम पना’ माना जाता है. उबले हुए कच्चे आम के गूदे में भुना जीरा, काला नमक, पुदीना और थोड़ी चीनी मिलाकर बनाया गया पना शरीर को ठंडक देता है. ग्रामीण इलाकों में इसे लू से बचाने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है. गर्मी से लौटने के बाद एक गिलास आम पना शरीर को तरोताजा करने और पानी की कमी पूरी करने में मदद करता है. चटनी और अचार भी हैं फायदेमंदकच्चे आम की चटनी भी गर्मियों में खूब पसंद की जाती है. इसे हरी मिर्च, धनिया और नमक के साथ पीसकर तैयार किया जाता है. यह भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन में भी मदद करती है. वहीं कई जगह कच्चे आम का अचार गन्ने के सिरके में तैयार किया जाता है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हालांकि डॉक्टर अधिक मात्रा में सेवन से बचने की सलाह देते हैं. डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाहरामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के अनुसार, कच्चा आम गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद फाइबर और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. उन्होंने बताया कि कच्चे आम का पना लू और हल्के पेट खराब होने की समस्या में राहत दे सकता है. साथ ही यह वजन नियंत्रित करने, त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने और इम्यूनिटी मजबूत करने में भी सहायक माना जाता है. हालांकि मधुमेह के मरीजों को सीमित मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए. खासकर इंसुलिन लेने वाले मरीजों को 50 ग्राम से अधिक कच्चा आम न खाने की सलाह दी गई है. About the Author Madhuri Chaudhary पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh
लौकी बेसन के गट्टे की सब्जी रेसिपी: पनीर भी हो जाएगा फेल, जब घर में बनेगी लौकी-बेसन के गट्टे की सब्जी, बनाना भी है आसान

गट्टे बनाने के लिए: 1 कप बेसन, 1 कप कद्दू की हुई लौकी, 1/2 बड़ी लाल मिर्च पाउडर, 1/2 हल्दी हल्दी, 1/2 चम्मच हल्दी, नमक का स्वाद, 1 मसाला तेल छवि: एआई ग्रेवी के लिए: 2 टमाटर का पेस्ट, 1 टमाटर का पेस्ट, 1 हरी मिर्च, 1/2 धनिया पाउडर, 1/2 धनिया पाउडर, 1/2 हरा धनिया पाउडर, 1/2 टमाटर का पेस्ट, 1/2 लाल मिर्च पाउडर, 2 धनिया पाउडर, 2 धनिया पाउडर, 2 धनिया पाउडर छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बाउल बेसन, कद्दू की हुई लौकी, नमक, अजमोद, हल्दी और थोड़ा सा तेल के टुकड़े अच्छे तरह से मिक्स कर लें। जरूरत लगे तो थोड़ा पानी नमक सख्त आटा गूंथ लें। छवि: एआई अब इस मिक्स की लॉन्ग-लंबी रोल जैसी लो बिक्री बना लें। एक पॉश्चर में पानी गर्म करें और इन रोल्स को 10 मिनट तक लें। जब ये पकें तो बाहर स्वादिष्ट ठंडा करें और छोटे-छोटे खाने में काट लें। छवि: एआई ग्रेवी बनाने की विधि: ग्रेवी में तेल गर्म करें और इसमें जीरा डालें. इसके बाद प्याज़ और हरी मिर्च के टुकड़े को भून लें। अब टमाटर का पेस्ट डाला और एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट से महानतम पात्र। छवि: एआई जब मूल तेल बाहर लाएँ, तब उसमें दही डेस्टिनेटिव क्रिसमस रहें ताकि दही फटे नहीं। अब जरूरत है पानी और ग्रेवी को 5 मिनट तक के बर्तन बनाने की. छवि: फ्रीपिक इसके बाद गट्टे ग्रेवी में तैयार कर लीजिए और 5-7 मिनिट तक मिनिमम डांस परदे पर रख दीजिए, ताकि गट्टे में ग्रेवी का स्वाद अच्छे से आ जाए. फाइनल में ऊपर से गर्म मसाला और हरा धनिया दाल दे। छवि: फ्रीपिक तैयार है आपकी सब्जी और टेस्टी लोकी-बेसन गट्टे की सब्जी। इसे गर्म रोटी, तंदूरी पराठे या जीरा चावल के साथ सर्व करें। घर वाले स्वाद चखते ही आपकी तारीफ नहीं थकेंगे। छवि: एआई लोकी-बेसन के गट्टे की सब्जी छवि: एआई/फ़्रीपिक
तमिलनाडु में कांग्रेस का 59 साल का इंतजार खत्म हुआ, दो विधायक विजय कैबिनेट में शामिल होने के लिए तैयार | भारत समाचार

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 19:12 IST विधायक राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस घटनाक्रम को तमिलनाडु में एक प्रमुख राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां कांग्रेस ने पारंपरिक रूप से राज्य मंत्रिमंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना दशकों तक द्रविड़ पार्टियों के कनिष्ठ गठबंधन भागीदार की भूमिका निभाई है। कांग्रेस का 59 साल का इंतजार आखिरकार गुरुवार को खत्म हो जाएगा क्योंकि पार्टी के दो विधायक तमिलनाडु सरकार में शामिल हो जाएंगे। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने घोषणा की कि विधायक राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले तमिलनाडु मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वेणुगोपाल ने इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि कांग्रेस 59 वर्षों में पहली बार तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनेगी। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि 59 साल के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल हुई है। वेणुगोपाल ने कहा, “मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं। हमें विश्वास है कि वे तमिलनाडु के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करेंगे, और विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी द्वारा निर्धारित कल्याण और जन-समर्थक शासन के साहसिक दृष्टिकोण को साकार करने के लिए काम करेंगे।” इस घटनाक्रम को तमिलनाडु में एक प्रमुख राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां कांग्रेस ने पारंपरिक रूप से राज्य मंत्रिमंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना दशकों तक द्रविड़ पार्टियों के कनिष्ठ गठबंधन भागीदार की भूमिका निभाई है। हालाँकि, इस बार, कांग्रेस ने द्रविड़ प्रमुखों के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को तोड़ दिया और राज्य में सरकार बनाने में मदद करने के लिए सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) से हाथ मिला लिया। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में, टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीटें कम रह गई। कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने बाद में विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया, जिससे गठबंधन प्रशासन के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु में कांग्रेस का 59 साल का इंतजार खत्म हुआ क्योंकि दो विधायक विजय के मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए तैयार हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस तमिलनाडु सरकार में शामिल हुई(टी)तमिलनाडु कैबिनेट(टी)कांग्रेस के मंत्री तमिलनाडु(टी)राजेश कुमार विधायक(टी)पी. विश्वनाथन मंत्री (टी)सी. जोसेफ विजय टीवीके(टी)गठबंधन सरकार तमिलनाडु(टी)ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव
बार-बार पिंपल को छूने से नहीं रोक पाते? दिमाग खेल रहा खेल, जानें साइकोलॉजिकल वजह

Last Updated:May 20, 2026, 19:03 IST Popping Pimple Feels Good Reason: क्या आपका चेहरा भी मुहांसों के दाग से भर गया है? क्या आप भी खुद को पिंपल फोड़ने से नहीं रोक पाते तो ये लेख आपके लिए है. यहां आप इसके पीछे का कारण जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट स्किन एक्सपर्ट अक्सर सलाह देते हैं कि पिंपल्स को फोड़ना नहीं चाहिए और उन्हें बार-बार हाथ भी नहीं लगाना चाहिए. इससे स्किन के डैमेज होने का खतरा होता है. लेकिन कई लोग चाहकर भी खुद को पिंपल फोड़ने से रोक नहीं पाते. कुछ लोगों को ऐसा करने से राहत और सेटिस्फेक्शन महसूस होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी वजह आपका ही दिमाग है. पिंपल या मुहांसे होने का सबसे बड़ा कारण हमारी स्किन टाइप होता है. जिन लोगों की त्वचा ज्यादा ऑयली होती है, उनमें कई बार पिंपल कम दिखाई देते हैं, जबकि ड्राई या मिक्स स्किन वाले लोगों को मुहांसों की समस्या ज्यादा परेशान करती है. जब त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स बंद हो जाती हैं या उनमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, तब पिंपल बनने लगते हैं. आमतौर पर ये ज्यादा खतरनाक नहीं होते, लेकिन इन्हें फोड़ने से त्वचा में इंफेक्शन, दर्द और दाग-धब्बों का खतरा बढ़ जाता है. पिंपल फोड़ने में मजा क्यों आता है? कई लोग बार-बार पिंपल्स को छूते हैं या उन्हें फोड़ देते हैं. कुछ लोगों को यह देखकर घिन महसूस होती है, जबकि कुछ लोगों को इससे अजीब तरह का सुकून मिलता है. इसे समझने के लिए ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की थी. यह स्टडी साल 2021 में बिहेवियरल ब्रेन रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुई थी. रिसर्च में करीब 80 लोगों को शामिल किया गया और उनके दिमाग की गतिविधियों को fMRI मशीन की मदद से रिकॉर्ड किया गया. अध्ययन में पता चला कि जिन लोगों को पिंपल फोड़ने वाले वीडियो पसंद आते हैं, वे घिन जैसी भावनाओं को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर लेते हैं. ऐसे लोगों का दिमाग इनाम और खुशी से जुड़ी गतिविधियों पर ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया देता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, दिमाग के दो हिस्से इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. पहला हिस्सा “न्यूक्लियस अक्यूम्बेंस” कहलाता है, जो खुशी और इनाम की भावना से जुड़ा होता है. दूसरा हिस्सा “इंसुला” है, जो घिन और असहजता को कंट्रोल करता है. जिन लोगों को पिंपल फोड़ना पसंद होता है, उनमें इन दोनों हिस्सों के बीच अच्छा तालमेल पाया गया. जब कोई व्यक्ति पिंपल फोड़ता है, तो उसके दिमाग में डोपामाइन नाम का “हैप्पी हार्मोन” रिलीज होता है. यही हार्मोन खुशी और राहत का एहसास कराता है. इसी वजह से कुछ लोगों को पिंपल फोड़ने में मजा आता है और वे बार-बार ऐसा करने की इच्छा महसूस करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
शाही गुलाब लस्सी रेसिपी: लू वाली गर्माहट को माता देवी घर में बनाएं शाही गुलाब लस्सी, भूल जाएंगे बाजार का स्वाद; चखते ही आदर्श!

सामग्री: 2 कप ठंडा दही, 4 बड़े मोयनी गुलाब, 2 बड़े मोयनी चीनी, 1/2 कप ठंडा दूध, 6 बर्फ के टुकड़े, 1 छोटा मावा, 1 छोटा मोयन, 1 छोटा सा कटा हुआ पिस्ता और बादाम, सूखे गुलाब के पंखुड़ी, 1 छोटा मलाई छवि: फ्रीपिक सबसे पहले प्लास्टिक जार में ठंडा दही, दूध, चीनी और गुलाब का मसाला डाला जाता था। अब बर्फ के टुकड़े और गुलाब जल भंडार में। सभी निःसंतान को 1-2 मिनट तक अच्छी तरह से ब्लेंड करें ताकि लस्सी मित्र और झगड़ादार बन जाएं। छवि: एआई अब सर्विंग ग्लास लेन और उसके साथी लिटिल गुलाब की पत्रिका पर काम कर रहे हैं। इससे लस्सी देखने में और भी खूबसूरत लिपस्टिक। तैयार लस्सी को ग्लास में डालकर ऊपर से मलाई या ताजा क्रीम डाल दें। छवि: एआई अंत में कटे हुए पिस्ता, बादाम और सूखे गुलाब की सजावट से सजाएं। पिड्रम तो ऊपर से थोड़ा और गुलाब सिरप डाल सकते हैं। छवि: फ्रीपिक लस्सी को बड़े पैमाने पर आकाशगंगा और मलाईदार बनाना चाहते हैं तो दही को पहले कुछ देर से फ़िरोज़ में रख दें। गुलाब सिरप की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक रॉयल रोज़ लस्सी सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि गर्मी से राहत देने में भी शानदार मंज़िल मिलती है। दही के शरीर को ठंडक मिलती है, जबकि गुलाब के शरीर को ठंडक महसूस होती है। छवि: एआई चीनी जगह शहद का उपयोग भी किया जा सकता है। अन्वेषक-ठंडी लस्सी का असली मजा तुरंत सर्व करने में ही आता है। गर्मियों में यह ड्रिंक बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बहुत पसंद आती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)शाही गुलाब लस्सी रेसिपी(टी)गुलाबी लस्सी(टी)गुलाबी लस्सी रेसिपी(टी)गुलाब लस्सी(टी)शाही लस्सी रेसिपी(टी)शाही गुलाब लस्सी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)गर्मियों के लिए लस्सी रेसिपी









