IPL का समीकरण- राजस्थान टॉप-4 में पहुंची:मुंबई से जीत टीम को प्लेऑफ में पहुंचा देगी; कोलकाता के लिए करो या मरो का मुकाबला

IPL 2026 के लीग स्टेज में सिर्फ 6 मैच बाकी हैं। मंगलवार को राजस्थान रॉयल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को हराकर पॉइंट्स टेबल के टॉप-4 में जगह बना ली। टीम के 13 मैचों में अब 14 पॉइंट्स हो गए हैं। राजस्थान का आखिरी लीग मुकाबला 24 मई को मुंबई इंडियंस से है। उस मैच में जीत टीम को प्लेऑफ का टिकट दिला सकती है। दूसरी ओर, लखनऊ को सीजन की 9वीं हार मिली। टीम पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी थी। लखनऊ 13 मैचों में 8 पॉइंट्स के साथ आखिरी स्थान पर है। पॉइंट्स टेबल की मौजूदा स्थिति… सभी टीमों का समीकरण राजस्थान की टॉप-4 में एंट्री लखनऊ पर जीत के बाद राजस्थान रॉयल्स ने पंजाब किंग्स को पीछे छोड़ दिया। टीम के अब 14 पॉइंट्स हो गए हैं। राजस्थान को अपना आखिरी मैच मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलना है। जीत मिलने पर टीम 16 पॉइंट्स तक पहुंच जाएगी और प्लेऑफ में जगह पक्की कर लेगी। कोलकाता के लिए आज जीत जरूरी कोलकाता नाइट राइडर्स 11 पॉइंट्स के साथ आठवें स्थान पर है। टीम का मुकाबला आज मुंबई इंडियंस से है। प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कोलकाता को यह मैच हर हाल में जीतना होगा। हार के साथ टीम की उम्मीदें लगभग खत्म हो जाएंगी। पंजाब पांचवें स्थान पर खिसकी पंजाब किंग्स अब 13 पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गई है। टीम लगातार 6 मुकाबले हार चुकी है। पंजाब को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए लखनऊ के खिलाफ आखिरी मैच हर हाल में जीतना होगा। साथ ही राजस्थान और मुंबई के मैच में राजस्थान के हारने की दुआ भी करनी होगी। बेंगलुरु टॉप पर कायम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 18 पॉइंट्स और +1.065 नेट रनरेट के साथ पहले स्थान पर बनी हुई है। टीम पहले ही प्लेऑफ में पहुंच चुकी है और उसका क्वालिफायर-1 खेलना लगभग तय माना जा रहा है। RCB का आखिरी लीग मैच सनराइजर्स हैदराबाद से है। गुजरात और हैदराबाद में टॉप-2 की जंग सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर अपने साथ गुजरात टाइटंस की भी प्लेऑफ में जगह पक्की करा दी। दोनों टीमों के 16-16 पॉइंट्स हैं और वे दूसरे और तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। गुजरात का आखिरी लीग मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स से होगा, जबकि हैदराबाद को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का सामना करना है। दोनों टीमों की नजर अब टॉप-2 में जगह बनाकर क्वालिफायर-1 खेलने पर होगी। चेन्नई और दिल्ली की राह मुश्किल चेन्नई सुपर किंग्स 12 पॉइंट्स के साथ छठे स्थान पर है। टीम का आखिरी मुकाबला गुजरात से है। CSK को प्लेऑफ की उम्मीदें जिंदा रखने के लिए यह मैच बड़े अंतर से जीतना होगा। दिल्ली कैपिटल्स भी 12 पॉइंट्स के साथ सातवें स्थान पर है। टीम का नेट रनरेट (-0.871) काफी खराब है। दिल्ली को कोलकाता के खिलाफ जीत के साथ दूसरी टीमों के नतीजों का भी इंतजार करना पड़ेगा। मुंबई और लखनऊ पहले ही बाहर मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी हैं। मुंबई के 8 पॉइंट्स हैं, जबकि लखनऊ भी 8 अंक के साथ आखिरी स्थान पर है। टूर्नामेंट के टॉप प्लेयर्स… सूर्यवंशी ऑरेंज कैप होल्डर बने राजस्थान रॉयल्स के युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी IPL 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उनके 13 मैचों में 579 रन हो गए हैं और उन्होंने हेनरिक क्लासन को पीछे छोड़कर ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली। सूर्यवंशी इस सीजन 236.32 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 1 शतक, 3 अर्धशतक और 53 छक्के लगाए हैं, जो इस सीजन सबसे ज्यादा हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के मिचेल मार्श 563 रन के साथ दूसरे, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासन 555 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं। भुवनेश्वर के पास पर्पल कैप बरकरार बेंगलुरु के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार 24 विकेट के साथ पर्पल कैप होल्डर बने हुए हैं। गुजरात के कगिसो रबाडा 21 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। चेन्नई के अंशुल कम्बोज 20 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर बने हुए हैं।
IPL 2026 KKR vs MI Today

कोलकाता2 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL 2026 का 65वां मैच आज कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेला जाएगा। मुकाबला ईडन गार्डन्स में शाम 7.30 बजे से शुरू होगा। प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कोलकाता को हर हाल में जीतना होगा। टीम 12 मैच में 11 पॉइंट्स के साथ आठवें स्थान पर हैं। वहीं टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी मुंबई 12 मैच में 8 पॉइंट्स के साथ नौवें स्थान पर हैं। दोनों टीमें 37वीं बार आमने-सामने होंगी दोनों टीमों के बीच अब तक 36 मैच हुए हैं। कोलकाता ने 11 और मुंबई ने 25 मैच जीते हैं। इस सीजन के पहले मुकाबले में मुंबई ने जीत दर्ज की थी। कोलकाता को दूसरी टीमों के पर निर्भर रहना पड़ेगा कोलकाता बुधवार का मैच जीत भी जाती है, तो भी उसकी किस्मत पंजाब किंग्स के हाथों में रहेगी। बेंगलुरु, गुजरात और हैदराबाद प्लेऑफ में जगह पक्की कर चुके हैं। अब एक जगह बची है, जिसके लिए 5 टीमें रेस में हैं। पंजाब किंग्स के 13 अंक हैं। राजस्थान रॉयल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के 12-12 अंक हैं। कोलकाता के 11 अंक हैं। एलन शानदार फॉर्म में फिन एलन ने ओपनिंग में शानदार वापसी की है। उन्होंने पिछले कुछ मैचों में एक शतक और 35 गेंदों में 93 रन बनाए हैं। अंगकृष रघुवंशी और उप-कप्तान रिंकू सिंह मिडिल ऑर्डर को मजबूती दे रहे हैं। रघुवंशी टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। कार्तिक त्यागी ने सबसे ज्यादा विकेट लिए हैं। कप्तान हार्दिक की वापसी हो सकती है मुंबई प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है, लेकिन वह कोलकाता का गणित बिगाड़ने उतरेगी। चोट के कारण पिछले तीन मैच मिस करने वाले कप्तान हार्दिक पंड्या वापसी के लिए तैयार हैं। उन्होंने सोमवार को नेट्स पर अभ्यास किया। हार्दिक के लिए यह सीजन खराब रहा है। उन्होंने 8 पारियों में 20.85 की औसत से 146 रन बनाए हैं, जबकि गेंदबाजी में 11.90 की इकोनॉमी से 4 विकेट लिए हैं। रायन रिकेल्टन टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। अल्लाह गजनफर टीम के टॉप विकेट टेकर हैं। डी कॉक और राज बावा IPL 2026 से बाहर मुंबई के विकेटकीपर बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक और ऑलराउंडर राज अंगद बावा चोट के कारण IPL 2026 से बाहर हो गए हैं। प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी मुंबई के अब दो लीग मैच बाकी हैं। डी कॉक को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच से पहले बाएं हाथ की कलाई में इंजरी हुई थी। उन्होंने इस सीजन 3 पारियों में 132 रन बनाए, जिसमें पंजाब किंग्स के खिलाफ नाबाद 112 रन की पारी शामिल रही। वहीं 23 साल के ऑलराउंडर राज अंगद बावा को पंजाब किंग्स के खिलाफ पिछले मैच में दाएं अंगूठे में चोट लगी थी। बावा ने इस सीजन मुंबई के लिए 3 मुकाबले खेले। पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार ईडन गार्डन्स की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। पिच सपाट होने से गेंद बल्ले पर अच्छे बाउंस के साथ आती है। तेज आउटफील्ड और छोटी बाउंड्री के कारण यहां हाई स्कोरिंग मुकाबले देखने को मिलते हैं। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को स्विंग मिलती है। मैच आगे बढ़ने पर स्पिनर्स असर डाल सकते हैं। हालांकि, बल्लेबाज सेट होने के बाद बड़े शॉट्स खेल सकते हैं। ईडन गार्डन्स में अब तक 105 मैच खेले गए हैं। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम 44 बार जीती है, जबकि बाद में बल्लेबाजी करने वाली टीम ने 59 मैच जीते हैं। वेदर रिपोर्ट 20 मई को कोलकाता में दिन का अधिकतम तापमान 37 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री के आसपास रह सकता है। शाम में हल्की बारिश की 25% संभावना है, लेकिन मैच के दौरान आसमान साफ रहने की उम्मीद है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 कोलकाता- अजिंक्य रहाणे (कप्तान), फिन एलन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, सौरभ दुबे, वरुण चक्रवर्ती, मथीश पथिराना। मुंबई- हार्दिक पंड्या (कप्तान), रोहित शर्मा, रायन रिकेल्टन (विकेटकीपर), नमन धीर, तिलक वर्मा, शेरफन रदरफोर्ड, विल जैक्स, राज बावा, कॉर्बिन बॉश, शार्दूल ठाकुर, दीपक चाहर, जसप्रीत बुमराह। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड बचपन के दोस्त से इनसिक्योर है:कहता है, दोस्ती तोड़ लो, मुझे दोस्ती और प्यार दोनों चाहिए, क्या करूं

सवाल- मेरी उम्र 23 साल है। मैं एक रिलेशनशिप में हूं। हमने साथ में अच्छा समय बिताया है, लेकिन पिछले कुछ समय से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रॉब्लम ये है कि मेरा पार्टनर मेरे एक बचपन के दोस्त को लेकर बहुत इनसिक्योर फील करता है। वह मुझसे बार-बार कहता है कि मुझे उसमें और अपने दोस्त में से किसी एक को चुनना होगा। मेरे लिए यह स्थिति बहुत मुश्किल है। मैं न तो अपने पार्टनर को खोना चाहती हूं और न ही अपने बचपन के दोस्त को छोड़ना चाहती हूं। मैं उसे कैसे समझाऊं और इस सिचुएशन को कैसे संभालूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। यह एक कॉमन सिचुएशन है। आपके सवाल से कई लोगों को अपनी सिचुएशन समझने और हैंडल करने में मदद मिलेगी। चलिए अब इसे समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं। ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल यह सिर्फ दोस्त और पार्टनर के बीच चुनाव का सवाल नहीं है, बल्कि ट्रस्ट और इनसिक्योरिटी का सवाल है। अगर पार्टनर कहता है कि ‘मुझे या दोस्त’ में से किसी एक को चुनो तो यह अल्टीमेटम जैसा है। इससे मन में ‘द्वंद’ (दोहरे विचार) पैदा हो सकते हैं। इसलिए इसे हैंडल करने में आपको मुश्किल हो रही है। इस स्थिति में मन में क्या सवाल आते हैं, ग्राफिक में देखिए- यह इनसिक्योरिटी है या कंट्रोल? पार्टनर का यह कहना कि ‘किसी एक को चुनो’ तो एक तरह का इमोशनल कंट्रोल या गहरे डर का संकेत है। ऐसा व्यवहार अक्सर उन लोगों में दिखता है, जिन्हें ‘छोड़ दिए जाने का डर’ होता है। पार्टनर ऐसा क्यों बिहेव कर रहा है, इसके सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- हेल्दी रिश्ते की क्या पहचान है? एक मेच्योर रिलेशनशिप में ‘मैं’ से ज्यादा ‘हम’ मायने रखता है। इसमें दोनों एक-दूसरे की अलग पहचान (व्यक्तित्व) को स्वीकार करते हैं। वे एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि समझते हैं। साथ रहते हुए भी अपनी सोच और पसंद को महत्व देते हैं। ऐसा रिश्ता भरोसा, बराबरी और समझ पर टिका होता है। हेल्दी रिश्ते के स्ट्रॉन्ग पिलर्स ग्राफिक में देखिए- कब समझें कि सीमा पार हो रही है? प्यार के नाम पर पार्टनर का कंट्रोलिंग बिहेवियर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ संकेत स्पष्ट तौर पर ‘रेड फ्लैग’ होते हैं। अगर पार्टनर का बिहेवियर नीचे दिए ग्राफिक से मैच कर रहा है, तो संभलने की जरूरत है- आपको क्या करना चाहिए? इस स्थिति में सबसे जरूरी संतुलन और क्लैरिटी रखना है। पार्टनर की इनसिक्योरिटी को समझना जरूरी है, लेकिन किसी भी रिश्ते में ‘दोस्ती और प्यार में एक चुनने’ का दबाव हेल्दी नहीं माना जाता। बेहतर होगा कि आप शांति से खुलकर बात करें। उन्हें भरोसा दिलाएं, साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि आपकी दोस्ती आपकी जिंदगी का हिस्सा है। अगर बॉयफ्रेंड इनसिक्योर हो तो ये करें- इसके कुछ पॉइंट्स डिटेल में समझें- रिश्ते में न करें ये कॉम्प्रोमाइज रिलेशनशिप में कुछ कॉम्प्रोमाइज होते हैं। आप अपने-सोने जागने का समय बदल सकते हैं। अपनी हॉबीज बदल सकते हैं, लेकिन ये तीन चीजें कॉम्प्रोमाइज नहीं करनी चाहिए- कोई फैसला लेने से खुद से पूछें सवाल ऐसी स्थिति में भावनाओं में बहकर तुरंत निर्णय लेना सही नहीं होता। थोड़ा ठहरकर अपनी जरूरतों, सीमाओं और रिश्ते की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है। खुद से सही सवाल पूछने पर यह स्पष्ट होगा कि आपके लिए क्या सही है। अंतिम सलाह हर रिश्ते में कुछ समझौते होते हैं, लेकिन समझौते और ‘आत्मसमर्पण’ में फर्क होता है। अगर कोई आपसे बरसों पुरानी दोस्ती खत्म करने को कह रहा है तो वह आपके व्यक्तित्व को कंट्रोल करना चाहता है। निष्कर्ष रिश्ते में आपसी समझ और ‘स्पेस’ बहुत जरूरी है। अपने पार्टनर को विश्वास दिलाएं, लेकिन अपनी डिग्निटी (गरिमा) की कीमत पर नहीं। याद रखें, जो व्यक्ति आपको सच में प्यार करता है, वह आपको कभी भी ऐसी स्थिति में नहीं डालेगा, जहां आपको प्यार और दोस्ती के बीच चुनाव करना पड़े। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड कभी प्यार जताए, कभी गायब हो जाए: कभी बहुत बातें तो कभी मैसेज का जवाब भी नहीं, क्या ये नॉर्मल है सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रिलेशनशिप की शुरुआत में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार लगातार ऐसा ही बना हुआ है तो इसे मनोविज्ञान में ‘हॉट-एंड-कोल्ड बिहेवियर’ कहा जाता है। आगे पढ़िए…
Amitabh Bachchan Admitted To Nanawati hospital in mumbai, report, source said- its a routine checkup

5 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं। पत्रकार विक्की ललवानी ने यूट्यूब अकाउंट से दावा किया है कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। वो अस्पताल के ए-विंग में हैं। यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो में विक्की ललवानी ने बताया है कि वो खबर कन्फर्म करने खुद नानावटी अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्हें खबर की कन्फर्मेशन मिली। बिग बी को ए-विंग, तीसरी मंजिल में रखा गया है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने मंगलवार शाम साढ़े 4 बजे अस्पताल पहुंचे थे। विक्की ललवानी के अनुसार, अमिताभ बच्चन लंबे समय से पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी तबीयत बहुत खराब है- डायरेक्टर विवेक शर्मा दैनिक भास्कर ने खबर की पुष्टि करने के लिए डायरेक्टर विवेक शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा, ‘उनकी तबीयत बहुत खराब है। मैंने दो हफ्ते पहले उनसे समय मांगा था मिलने का, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी इजाजत नहीं है। तो कन्फर्म हो गया था कि या तो वो हॉस्पिटल में हैं या डॉक्टर्स की निगरानी में हैं। मुझे लगता है कि उनकी तबीयत काफी खराब है।’ इसके अलावा दैनिक भास्कर से बातचीत में परिवार के करीबी सूत्र का कहना है कि अमिताभ बच्चन को रूटीन चेकअप के चलते भर्ती करवाया गया है। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके हैं। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब एक्स-रे हुआ लेकिन अब भी सही कारण नहीं पता चल सका। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुई तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर इसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फंट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने माने सर्जन एच.एस.भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फंट चुकी हैं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वो 4 दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। 24 सितंबर 1982 को बिग बी को ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया था। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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3 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक जूनियर एनटीआर के लुक्स और वजन को लेकर मजाक उड़ाया गया, आज ग्लोबल आइकन हैं। जूनियर एनटीआर आज टॉलीवुड ही नहीं, पूरे भारतीय सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाते हैं। दादा एन. टी. रामा राव की फिल्मी विरासत संभालने वाले जूनियर एनटीआर ने 13 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता था। कभी लुक्स और वजन को लेकर ट्रोल हुए, तो कभी उनकी एक झलक पाने के लिए लाखों फैंस उमड़ पड़े। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में कथित तौर पर 10 लाख लोग पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी उस दौर की सबसे महंगी सेलिब्रिटी शादियों में गिनी गई, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने की रिपोर्ट्स थीं। 2009 में चुनाव प्रचार से लौटते वक्त वह भयानक सड़क हादसे का शिकार हुए और मौत को करीब से देखा। भाई और पिता की सड़क हादसों में मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया और वह फिल्मों से दूर हो गए। लेकिन चार साल बाद RRR से ऐसा कमबैक किया कि ग्लोबल स्टार बन गए। जूनियर एनटीआर के 43वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से। दादा की विरासत, राजनीति का दबदबा जूनियर एनटीआर आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह तेलुगु सिनेमा और आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली परिवार से आते हैं। उनके दादा एनटीआर (एन. टी. रामा राव) सुपरस्टार अभिनेता होने के साथ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। एनटीआर ने 1943 में बसवतारकम से शादी की थी। दोनों के 12 बच्चे हुए, जिनमें 8 बेटे और 4 बेटियां थीं। बाद में यही परिवार तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति में बेहद ताकतवर माना जाने लगा। परिवार के कई सदस्य बड़े राजनीतिक और फिल्मी नाम बने। एनटीआर के बेटे: फिल्मों, राजनीति और बिजनेस में दबदबा एनटीआर के बेटों में सबसे चर्चित नाम नंदमूरी हरिकृष्ण और नंदमूरी बालकृष्ण रहे। हरिकृष्ण अभिनेता होने के साथ TDP के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद रहे। वहीं नंदामूरी बालकृष्ण तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार हैं और राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार के अन्य बेटे भी अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े रहे। नंदमूरी रामकृष्ण सीनियर फिल्म निर्माण और प्रोडक्शन गतिविधियों से जुड़े रहे। नंदामूरी जयकृष्ण फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और बिजनेस संभालते रहे। नंदामूरी साईकृष्ण व्यावसायिक कामकाज से जुड़े रहे। नंदमूरी मोहनकृष्ण फिल्म और बिजनेस नेटवर्क का हिस्सा रहे। नंदामूरी हरिनाथ सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहे। नंदमूरी रामकृष्ण जूनियर पारिवारिक फिल्म और बिजनेस गतिविधियों में सक्रिय रहे। अगली पीढ़ी में जूनियर एनटीआर, कल्याण राम और दूसरे कलाकारों ने फिल्मों में नाम कमाया। बेटियां भी बड़े राजनीतिक परिवारों से जुड़ीं एनटीआर की बेटियां भी राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। दग्गुबाती पुरंदेश्वरी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं। भुवनेश्वरी नारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पत्नी हैं। लोकेश्वरी सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उमा महेश्वरी परिवार का हिस्सा रहीं और समय-समय पर चर्चाओं में रहीं। इसी वजह से एन. टी. रामा राव परिवार को आंध्र प्रदेश का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक-फिल्मी परिवार माना जाता है। दूसरी शादी और परिवार में बढ़ा राजनीतिक विवाद बसवतारकम के निधन के बाद एनटीआर ने 1993 में लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी की थी। लक्ष्मी पार्वती लेखिका थीं और एनटीआर की जीवनी लिखने के दौरान दोनों करीब आए थे। इस शादी से उनकी कोई संतान नहीं हुई। यह रिश्ता काफी विवादों में रहा और परिवार के कई सदस्य इसके खिलाफ थे। बाद में परिवार और पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संघर्ष हुआ। एनटीआर के निधन के बाद लक्ष्मी पार्वती ने अलग पार्टी बनाई, लेकिन उन्हें ज्यादा राजनीतिक सफलता नहीं मिली। बचपन में एक फिल्म के सेट पर जूनियर एनटीआर (बीच में) अपने दादा एन. टी. रामा राव (बाएं ओर) और पिता नंदमूरी हरिकृष्ण (दाएं ओर) के साथ। जूनियर एनटीआर किसके बेटे हैं? जूनियर एनटीआर, एनटीआर (एन. टी. रामा राव) के बेटे नंदामूरी हरिकृष्ण और शालिनी भास्कर राव के बेटे हैं। वह एनटीआर और उनकी पहली पत्नी बसवतारकम की फैमिली लाइन से पोते हैं। जूनियर एनटीआर के पिता नंदामूरी हरिकृष्ण ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी लक्ष्मी कुमारी थीं, जिनसे कल्याण राम, जनकी राम और सुहासिनी हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिकृष्ण की दूसरी शादी से परिवार में नाराजगी थी और दादा एन. टी. रामा राव शुरुआत में इस रिश्ते से खुश नहीं थे। हालांकि, जूनियर एनटीआर के जन्म के बाद उन्होंने शालिनी को परिवार में स्वीकार किया और अपने पोते को अपना नाम दिया। परिवार में जूनियर एनटीआर को प्यार से ‘तारक’ कहा जाता है। बाद में दादा एनटीआर ने अपने नाम से जोड़कर उनका पूरा नाम ‘नंदामूरी तारक रामा राव’ रखा। यहीं से वह ‘जूनियर एनटीआर’ के नाम से मशहूर हुए। जूनियर एनटीआर के पिता हरिकृष्ण फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय रहे। वह TDP के बड़े प्रचारक माने जाते थे और चुनावी रैलियों में भारी भीड़ जुटाते थे। यही लोकप्रियता बाद में जूनियर एनटीआर में भी दिखाई दी। फिल्म ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ के एक सीन में जूनियर एनटीआर। 8 साल की उम्र में दादा की फिल्म से किया डेब्यू जूनियर एनटीआर का जन्म 20 मई 1983 को हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में फिल्मों में काम शुरू कर दिया था। महज 8 साल की उम्र में ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया। यह फिल्म उनके दादा एनटीआर ने निर्देशित की थी। फिल्म में उन्होंने राजा भरत का किरदार निभाया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ उन्होंने कुचिपुड़ी डांस की ट्रेनिंग ली, जिसने उनकी डांसिंग स्टाइल को अलग पहचान दिलाई। 13 साल की उम्र में मिला नेशनल अवॉर्ड जूनियर एनटीआर की दूसरी बड़ी फिल्म ‘रामायणम्’ थी। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम का किरदार निभाया था। उस समय उनकी उम्र करीब 14 साल थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि माना गया। उसी दौर में इंडस्ट्री को एहसास हो गया था कि वह आगे चलकर बड़े स्टार बनेंगे। 18 साल की उम्र में बने लीड हीरो साल 2001 में जूनियर एनटीआर ने ‘निन्नु चूडालानी’ से बतौर लीड
Pradeep Sharma: Dawoods Bracelets Worn in 90s Mumbai

5 घंटे पहले कॉपी लिंक मुंबई पुलिस के सबसे चर्चित और तेजतर्रार पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा इन दिनों अपनी जिंदगी पर बनने वाली आगामी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। 90 के दशक में मुंबई को अंडरवर्ल्ड के खौफ से आजाद कराने में उनकी अहम भूमिका रही है। दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रदीप शर्मा ने पुलिस महकमे के कड़वे सच, अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और राजनीति को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने दाऊद इब्राहिम के बॉलीवुड में खौफ और उसकी वर्तमान स्थिति पर भी की खुलासे किए। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म ‘अब तक 112’ पर भी बात की। पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा। सवाल: एक प्रोफेसर के बेटे के मन में पुलिस बनने का ख्याल कैसे आया? जवाब: मेरे पिता धूलिया के कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर और वाइस प्रिंसिपल थे। वो चाहते थे कि मैं प्रोफेसर या साइंटिस्ट बनूं। मैंने एमएससी (MSc) तक पढ़ाई भी की। लेकिन हमारे घर के पास एक पुलिस इंस्पेक्टर रहने आए थे। जब मैं छोटा था, उन्हें बुलेट पर यूनिफॉर्म और गॉगल पहनकर जाते देखता था। बस, वहीं से वर्दी के प्रति एक आकर्षण और लगाव पैदा हो गया। मुझे रूटीन वाली जिंदगी पसंद नहीं थी, इसलिए मैंने यह रास्ता चुना। सवाल: 90 के दशक की मुंबई कैसी थी, जिसके खौफ की कहानियां आज भी सुनी जाती हैं? जवाब: उस समय मुंबई पर दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अरुण गवली और अमर नाइक जैसे गैंगस्टर्स की मजबूत पकड़ थी। दिन में तीन-चार शूटआउट आम बात थी। बड़े बिजनेसमैन, पॉलिटिशियंस और फिल्म स्टार्स को जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के कॉल्स आते थे। आम आदमी का हाल यह था कि अगर कोई मारुति 800 या ओमनी वैन भी खरीदता, तो भाई का फोन आ जाता था। यहां तक कि शादियों और घरों के इंटीरियर डेकोरेशन पर भी गैंगस्टर्स फोन नंबर छोड़ जाते थे कि ‘भाई को फोन करो’। दाऊद के नाम के ब्रेसलेट और ‘D’ लिखे लॉकेट्स पहने जाते थे। ऐसा डर का माहौल था। गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम। सवाल: उस खतरनाक दौर में जब आप ऑपरेशन्स पर जाते थे, तो क्या घर में डर का माहौल नहीं होता था? जवाब: वर्दी पहनने के बाद खौफ नहीं लगता। मेरी पत्नी स्वीकृति के पिता एक्स-एयरफोर्स ऑफिसर हैं, जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध देखे हैं। इसलिए हमारे घर में डर जैसा माहौल कभी नहीं रहा। मेरी पत्नी को पूरा विश्वास था कि मुझे कुछ नहीं होने वाला। सवाल: ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों या सीरीज में दाऊद इब्राहिम को (बड़े साहब) को काफी बीमार दिखाया जाता है। क्या असलियत भी वही है? जवाब: हां बिल्कुल। ‘धुरंधर’ में जिस तरीके से ‘बड़े साहब’ (दाऊद इब्राहिम) को बीमार और उनके हालात को दिखाया गया है, हकीकत में भी वो 80% वैसा ही है। फिल्मों में थोड़ा-बहुत ड्रामेटाइज तो करना ही पड़ता है, नहीं तो दुनिया उसे देखेगी नहीं; फिर तो डायरेक्टर और प्रोड्यूसर खुद ही अपनी फिल्म थिएटर में बैठकर देखेंगे। लेकिन जहां तक इंसिडेंट्स की बात है, वे सभी रियल इंसिडेंट्स से ही संबंधित हैं, इसलिए जो दिखाया गया है वो पूरी तरह फैक्ट (सच) है। धुरंधर में ‘बड़े साहब’ (दाऊद इब्राहिम)। सवाल: उस दौर में बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के तालमेल को आपने बहुत करीब से देखा, वो क्या था? जवाब: उस समय फिल्म इंडस्ट्री में बहुत डर था। एक्टर्स का चेहरा ही सब कुछ होता है, और गैंगस्टर्स सीधे धमकी देते थे कि ‘मुंह पर तेजाब फेंक दूंगा’। बेचारे डर के मारे वही करते थे जो अंडरवर्ल्ड कहता था। कुछ लोग उनसे मदद भी लेते थे। मैं एंटी-एक्सटॉर्शन सेल में था, तो मेरे पास फिल्म इंडस्ट्री के बहुत से लोग थ्रेट्स (धमकी) की शिकायतें लेकर आते थे और हम उन्हें सॉल्व करते थे। सवाल: आपने अपने करियर में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। क्या आपको लगता है कि सिस्टम ईमानदार अफसरों की कद्र नहीं करता? जवाब: यह मैंने हमेशा महसूस किया है, और मेरे जैसे कई पुलिस ऑफिसर्स इसे झेलते हैं। इस सिस्टम में इंस्पेक्टरों को ‘पेपर नैपकिन’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है; जब तक जरूरत है इस्तेमाल करो, और रोल खत्म होते ही साइड में फेंक दो। सवाल: ऐसा क्यों कह रहे हैं आप, कोई खास वाकया? जवाब: जब जेजे हॉस्पिटल में गैंगस्टर फिरोज कोकनी ने एक हवलदार की छाती में गोली मारकर उसे मार दिया और भाग गया, तो रात के तीन बजे कमिश्नर का फोन आया कि ‘प्रदीप, वी हैव टू न्यूट्रलाइज ऑल दिस थिंग्स’। हम जान पर खेलकर पीछे लगे और 8-10 दिन में आरोपियों को ढेर कर दिया। लेकिन जब वक्त बदलता है और कोई टेक्निकल गलती हो जाती है, तो यही सिस्टम आपको अकेला छोड़ देता है, कोई सपोर्ट नहीं करता। सवाल: क्या सीनियर्स को भी आपकी कामयाबी से इनसिक्योरिटी (असुरक्षा) होती थी? जवाब: बिल्कुल होती है। कमिश्नर दो-दो साल के लिए आते हैं, जबकि हम 35-40 साल से उसी शहर की सेवा कर रहे होते हैं। हमारे पब्लिक कॉन्टैक्ट्स ज्यादा होते थे। जब बड़े लोग कमिश्नर के पास जाकर कहते थे कि ‘मेरा केस प्रदीप शर्मा, विजय सालस्कर या दया नायक को दो’, तो कमिश्नर ऑफेंड हो जाते थे। उन्हें लगता था कि कमिश्नर मैं हूं और नाम इंस्पेक्टर का हो रहा है। इसी वजह से हमें सफर करना पड़ता था। सवाल: आपके करियर का सबसे दिलचस्प या यादगार केस कौन सा रहा? जवाब: मेरे लिए हर फोन कॉल एक कहानी होती थी। लेकिन एक बड़ा गैंगस्टर था, जिसे मैंने पूरे 10 साल ढूंढने के बाद न्यूट्रलाइज किया था। एक बार मैं अपने दोस्त के साथ खाना खा रहा था, तब उस गैंगस्टर का फोन जबरन वसूली के लिए आया। मैंने फोन लेकर कानूनी बात की, तो उसने मुझे और पूरी पुलिस फोर्स को गंदी गालियां दीं। मैंने उसी दिन ठान लिया था कि इसे आज नहीं तो कल खत्म करूंगा। पूरे 10 साल बाद मुझे वो मौका मिला। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी आतंकवादियों को मारना और आईसी 814 हाईजैक की बैकअप टीम को पकड़ना भी बड़े ऑपरेशन्स थे। सवाल: आपकी जिंदगी से प्रेरित होकर ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्में बनीं और अब ‘अब तक 112’ बनने जा रही है। क्या प्रदीप शर्मा की असली और अनसुनी कहानी देखने को मिलेगी? जवाब: फिल्में थोड़ी-बहुत सिनेमेटिक लिबर्टी
Summer Body Workout Routine; Healthy Diet Plan

4 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में फिटनेस रूटीन बनाए रखना चैलेंजिंग होता है। इस दौरान पसीना ज्यादा आता है, जल्दी थकान होती है और डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे वर्कआउट मुश्किल होता है। कुछ लोग इस वजह से एक्सरसाइज अवॉइड करते हैं, जबकि कुछ बिना सावधानी के वर्कआउट करते हैं। इससे सेहत को नुकसान हो सकता है। ऐसे में वर्कआउट का समय, तरीका और डाइट को मौसम के हिसाब से एडजस्ट करना जरूरी है। सही जानकारी और छोटी-छोटी सावधानियों से हम गर्मियों में भी फिट और एनर्जेटिक रह सकते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बात गर्मियों में सुरक्षित वर्कआउट टिप्स की। साथ ही जानेंगे कि- गर्मी में वर्कआउट करने का सही समय क्या है? गर्मी में वर्कआउट के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- गर्मी में वर्कआउट करने का सही समय क्या है? जवाब- गर्मियों में वर्कआउट का सही समय सुबह 5 से 8 बजे या शाम 6 बजे के बाद होता है। इस समय तापमान कम होता है, जिससे शरीर पर ज्यादा स्ट्रेस नहीं पड़ता। सुबह का वर्कआउट फ्रेशनेस देता है, जबकि शाम का वर्कआउट दिनभर की थकान कम करता है। दोपहर में वर्कआउट करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है, जिससे हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। सवाल- दोपहर के समय वर्कआउट करना रिस्की क्यों हो सकता है? जवाब- गर्मियाें में दोपहर के समय तापमान ज्यादा होता है, जिससे शरीर जल्दी ओवरहीट हो जाता है। इससे हीट स्ट्रोक, चक्कर, उल्टी और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पसीना ज्यादा निकलने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी हो सकती है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए गर्मियों में दोपहर के समय वर्कआउट अवॉइड करना चाहिए। सवाल- गर्मी के मौसम में वर्कआउट शेड्यूल क्या होना चाहिए? जवाब- गर्मी में वर्कआउट शेड्यूल फ्लेक्सिबल होना चाहिए। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- सुबह या शाम के समय ही वर्कआउट करें। हफ्ते में 4-5 दिन वर्कआउट करें। 30-45 मिनट का सेशन रखें। हल्का कार्डियो (वॉक, जॉगिंग) शामिल करें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (मसल्स स्ट्रेंथ) और स्ट्रेचिंग (फ्लेक्सिबिलिटी) का संतुलन रखें। बीच-बीच में ब्रेक लें। 1–2 दिन रेस्ट/रिकवरी के लिए रखें। सवाल- क्या गर्मी में वर्कआउट का ड्यूरेशन कम होना चाहिए? जवाब- हां, गर्मियों में वर्कआउट का समय थोड़ा कम रखना बेहतर है। 30-45 मिनट का सेशन पर्याप्त है। ज्यादा देर तक वर्कआउट करने से शरीर में पानी की कमी (डिहाड्रेशन) और थकान हो सकती है। इसलिए ड्यूरेशन से ज्यादा क्वालिटी पर ध्यान दें। सवाल- गर्मी में वर्कआउट के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- गर्मियों में वर्कआउट करते समय शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। धीरे-धीरे शुरुआत करें और हाई इंटेंसिटी वर्कआउट से बचें। सेफ्टी टिप्स ग्राफिक से समझिए- सवाल- गर्मियों में वर्कआउट से पहले और बाद में क्या खाना-पीना चाहिए? जवाब- वर्कआउट के दौरान शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है, इसलिए सही खानपान बहुत जरूरी है। वर्कआउट से पहले हल्का, आसानी से पचने वाला और एनर्जी फूड लें, ताकि शरीर एक्टिव रहे। वहीं वर्कआउट के बाद शरीर को रिकवर करने के लिए प्रोटीन और हाइड्रेशन पर फोकस करें। वर्कआउट से आधे घंटे पहले 1 मीडियम साइज केला और 4-5 भीगे बादाम खाना फायदेमंद है। पूरा डाइट प्लान ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मी में कौन-से वर्कआउट करने चाहिए और कौन-से नहीं? जवाब- गर्मियों में लो-इंटेंसिटी वर्कआउट चुनने चाहिए और हाई इंटेंसिटी वर्कआउट से बचना चाहिए। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- गर्मियों में हाई इंटेंसिटी वर्कआउट क्यों नहीं करना चाहिए? जवाब- हाई इंटेंसिटी वर्कआउट से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे ओवरहीटिंग का रिस्क हो सकता है। इस दौरान पसीना ज्यादा होता है, जिससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, हीट एग्जॉशन, हीट स्ट्रोक और मसल्स में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज से हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जल्दी थकान हो जाती है। इसलिए गर्मी में लो इंटेंसिटी वर्कआउट करना चाहिए। सवाल- गर्मी में किस तरह के कपड़े पहनकर वर्कआउट करना चाहिए? जवाब- वर्कआउट के लिए हल्के, ढीले और ब्रीदेबल कपड़े पहनें। डार्क कलर की बजाय हल्के रंग के कपड़े पहनें, ताकि पसीना आसानी से सूख सके और शरीर ओवरहीट न हो। सवाल- गर्मी में वर्कआउट के दौरान शरीर के किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जवाब- वर्कआउट के दौरान चक्कर आए, ज्यादा पसीना हो तो इन संकेतों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- गर्मियों में वर्कआउट से जुड़े कुछ सवाल और जवाब सवाल- क्या खाली पेट वर्कआउट करना सही है? जवाब- नहीं, गर्मी में खाली पेट वर्कआउट करने से कमजोरी, चक्कर और एनर्जी ड्रेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बेहतर है कि वर्कआउट से आधे घंटे पहले हल्के स्नैक्स लें। सवाल- वर्कआउट से पहले, उस दौरान और बाद में कितना पानी पीना चाहिए? जवाब- वर्कआउट से पहले 1-2 गिलास पानी पिएं। वर्कआउट के दौरान हर 15-20 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। वर्कआउट के कुछ देर बाद 1-2 गिलास पानी जरूर पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। सवाल- क्या सिर्फ पानी काफी है या इलेक्ट्रोलाट्स भी जरूरी हैं? जवाब- हां, गर्मियों में वर्कआउट के दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स लेना जरूरी है, ताकि नमक और मिनरल्स की पूर्ति हो सके। सवाल- क्या गर्मियों में रोज वर्कआउट करना सुरक्षित है? जवाब- रोज हल्का या मीडियम वर्कआउट किया जा सकता है, लेकिन शरीर को ओवरलोड न करें। हफ्ते में 1-2 दिन आराम देना जरूरी है, ताकि रिकवरी हो सके। सवाल- क्या गर्मी के मौसम में जिम की बजाय घर पर वर्कआउट करना बेहतर है? जवाब- अगर जिम में कूलिंग और वेंटिलेशन सही नहीं है, तो घर पर वर्कआउट करना बेहतर और सुरक्षित विकल्प हो सकता है। सवाल- क्या AC या ठंडी जगह पर वर्कआउट करना ज्यादा सुरक्षित है? जवाब- हां, ठंडी और हवादार जगह पर वर्कआउट करने से शरीर ओवरहीट नहीं होता है। सवाल- क्या गर्मी में वर्कआउट के दौरान पानी पीना सही है? जवाब- बिल्कुल, वर्कआउट के दौरान पानी पीना जरूरी
Amitabh Bachchan Admitted To Nanawati hospital in mumbai, report, source said- its a routine checkup

7 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं। पत्रकार विक्की ललवानी ने यूट्यूब अकाउंट से दावा किया है कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। वो अस्पताल के ए-विंग में हैं। यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो में विक्की ललवानी ने बताया है कि वो खबर कन्फर्म करने खुद नानावटी अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्हें खबर की कन्फर्मेशन मिली। बिग बी को ए-विंग, तीसरी मंजिल में रखा गया है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने मंगलवार शाम साढ़े 4 बजे अस्पताल पहुंचे थे। विक्की ललवानी के अनुसार, अमिताभ बच्चन लंबे समय से पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी तबीयत बहुत खराब है- डायरेक्टर विवेक शर्मा दैनिक भास्कर ने खबर की पुष्टि करने के लिए डायरेक्टर विवेक शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा, ‘उनकी तबीयत बहुत खराब है। मैंने दो हफ्ते पहले उनसे समय मांगा था मिलने का, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी इजाजत नहीं है। तो कन्फर्म हो गया था कि या तो वो हॉस्पिटल में हैं या डॉक्टर्स की निगरानी में हैं। मुझे लगता है कि उनकी तबीयत काफी खराब है।’ इसके अलावा दैनिक भास्कर से बातचीत में परिवार के करीबी सूत्र का कहना है कि अमिताभ बच्चन को रूटीन चेकअप के चलते भर्ती करवाया गया है। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके हैं। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब एक्स-रे हुआ लेकिन अब भी सही कारण नहीं पता चल सका। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुई तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर इसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फंट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने माने सर्जन एच.एस.भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फंट चुकी हैं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वो 4 दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। 24 सितंबर 1982 को बिग बी को ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया था। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
NTR Jr Birthday Interesting Facts; Looks Trolling

8 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक जूनियर एनटीआर के लुक्स और वजन को लेकर मजाक उड़ाया गया, आज ग्लोबल आइकन हैं। जूनियर एनटीआर आज टॉलीवुड ही नहीं, पूरे भारतीय सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाते हैं। दादा एन. टी. रामा राव की फिल्मी विरासत संभालने वाले जूनियर एनटीआर ने 13 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता था। कभी लुक्स और वजन को लेकर ट्रोल हुए, तो कभी उनकी एक झलक पाने के लिए लाखों फैंस उमड़ पड़े। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में कथित तौर पर 10 लाख लोग पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी उस दौर की सबसे महंगी सेलिब्रिटी शादियों में गिनी गई, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने की रिपोर्ट्स थीं। 2009 में चुनाव प्रचार से लौटते वक्त वह भयानक सड़क हादसे का शिकार हुए और मौत को करीब से देखा। भाई और पिता की सड़क हादसों में मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया और वह फिल्मों से दूर हो गए। लेकिन चार साल बाद RRR से ऐसा कमबैक किया कि ग्लोबल स्टार बन गए। जूनियर एनटीआर के 43वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से। दादा की विरासत, राजनीति का दबदबा जूनियर एनटीआर आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह तेलुगु सिनेमा और आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली परिवार से आते हैं। उनके दादा एनटीआर (एन. टी. रामा राव) सुपरस्टार अभिनेता होने के साथ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। एनटीआर ने 1943 में बसवतारकम से शादी की थी। दोनों के 12 बच्चे हुए, जिनमें 8 बेटे और 4 बेटियां थीं। बाद में यही परिवार तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति में बेहद ताकतवर माना जाने लगा। परिवार के कई सदस्य बड़े राजनीतिक और फिल्मी नाम बने। एनटीआर के बेटे: फिल्मों, राजनीति और बिजनेस में दबदबा एनटीआर के बेटों में सबसे चर्चित नाम नंदामूरी हरिकृष्ण और नंदामूरी बालकृष्ण रहे। हरिकृष्ण अभिनेता होने के साथ TDP के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद रहे। वहीं नंदामूरी बालकृष्ण तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार हैं और राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार के अन्य बेटे भी अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े रहे। नंदामूरी रामकृष्ण सीनियर फिल्म निर्माण और प्रोडक्शन गतिविधियों से जुड़े रहे। नंदामूरी जयकृष्ण फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और बिजनेस संभालते रहे। नंदामूरी साईकृष्ण व्यावसायिक कामकाज से जुड़े रहे। नंदामूरी मोहनकृष्ण फिल्म और बिजनेस नेटवर्क का हिस्सा रहे। नंदामूरी हरिनाथ सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहे। नंदामूरी रामकृष्ण जूनियर पारिवारिक फिल्म और बिजनेस गतिविधियों में सक्रिय रहे। अगली पीढ़ी में जूनियर एनटीआर, कल्याण राम और दूसरे कलाकारों ने फिल्मों में नाम कमाया। बेटियां भी बड़े राजनीतिक परिवारों से जुड़ीं एनटीआर की बेटियां भी राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। दग्गुबाती पुरंदेश्वरी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं। भुवनेश्वरी नारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पत्नी हैं। लोकेश्वरी सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उमा महेश्वरी परिवार का हिस्सा रहीं और समय-समय पर चर्चाओं में रहीं। इसी वजह से एन. टी. रामा राव परिवार को आंध्र प्रदेश का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक-फिल्मी परिवार माना जाता है। दूसरी शादी और परिवार में बढ़ा राजनीतिक विवाद बसवतारकम के निधन के बाद एनटीआर ने 1993 में लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी की थी। लक्ष्मी पार्वती लेखिका थीं और एनटीआर की जीवनी लिखने के दौरान दोनों करीब आए थे। इस शादी से उनकी कोई संतान नहीं हुई। यह रिश्ता काफी विवादों में रहा और परिवार के कई सदस्य इसके खिलाफ थे। बाद में परिवार और पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संघर्ष हुआ। एनटीआर के निधन के बाद लक्ष्मी पार्वती ने अलग पार्टी बनाई, लेकिन उन्हें ज्यादा राजनीतिक सफलता नहीं मिली। बचपन में एक फिल्म के सेट पर जूनियर एनटीआर (बीच में) अपने दादा एन. टी. रामा राव (बाएं ओर) और पिता नंदमूरी हरिकृष्ण (दाएं ओर) के साथ। जूनियर एनटीआर किसके बेटे हैं? जूनियर एनटीआर, एनटीआर (एन. टी. रामा राव) के बेटे नंदामूरी हरिकृष्ण और शालिनी भास्कर राव के बेटे हैं। वह एनटीआर और उनकी पहली पत्नी बसवतारकम की फैमिली लाइन से पोते हैं। जूनियर एनटीआर के पिता नंदामूरी हरिकृष्ण ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी लक्ष्मी कुमारी थीं, जिनसे कल्याण राम, जनकी राम और सुहासिनी हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिकृष्ण की दूसरी शादी से परिवार में नाराजगी थी और दादा एन. टी. रामा राव शुरुआत में इस रिश्ते से खुश नहीं थे। हालांकि, जूनियर एनटीआर के जन्म के बाद उन्होंने शालिनी को परिवार में स्वीकार किया और अपने पोते को अपना नाम दिया। परिवार में जूनियर एनटीआर को प्यार से ‘तारक’ कहा जाता है। बाद में दादा एनटीआर ने अपने नाम से जोड़कर उनका पूरा नाम ‘नंदामूरी तारक रामा राव’ रखा। यहीं से वह ‘जूनियर एनटीआर’ के नाम से मशहूर हुए। जूनियर एनटीआर के पिता हरिकृष्ण फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय रहे। वह TDP के बड़े प्रचारक माने जाते थे और चुनावी रैलियों में भारी भीड़ जुटाते थे। यही लोकप्रियता बाद में जूनियर एनटीआर में भी दिखाई दी। फिल्म ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ के एक सीन में जूनियर एनटीआर। 8 साल की उम्र में दादा की फिल्म से किया डेब्यू जूनियर एनटीआर का जन्म 20 मई 1983 को हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में फिल्मों में काम शुरू कर दिया था। महज 8 साल की उम्र में ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया। यह फिल्म उनके दादा एनटीआर ने निर्देशित की थी। फिल्म में उन्होंने राजा भरत का किरदार निभाया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ उन्होंने कुचिपुड़ी डांस की ट्रेनिंग ली, जिसने उनकी डांसिंग स्टाइल को अलग पहचान दिलाई। 13 साल की उम्र में मिला नेशनल अवॉर्ड जूनियर एनटीआर की दूसरी बड़ी फिल्म ‘रामायणम्’ थी। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम का किरदार निभाया था। उस समय उनकी उम्र करीब 14 साल थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि माना गया। उसी दौर में इंडस्ट्री को एहसास हो गया था कि वह आगे चलकर बड़े स्टार बनेंगे। 18 साल की उम्र में बने लीड हीरो साल 2001 में जूनियर एनटीआर ने ‘निन्नु चूडालानी’ से बतौर लीड
IPL का समीकरण- राजस्थान टॉप-4 में पहुंची:मुंबई से जीत टीम को प्लेऑफ में पहुंचा देगी; कोलकाता के लिए करो या मरो का मुकाबला

IPL 2026 के लीग स्टेज में सिर्फ 6 मैच बाकी हैं। मंगलवार को राजस्थान रॉयल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को हराकर पॉइंट्स टेबल के टॉप-4 में जगह बना ली। टीम के 13 मैचों में अब 14 पॉइंट्स हो गए हैं। राजस्थान का आखिरी लीग मुकाबला 24 मई को मुंबई इंडियंस से है। उस मैच में जीत टीम को प्लेऑफ का टिकट दिला सकती है। दूसरी ओर, लखनऊ को सीजन की 9वीं हार मिली। टीम पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी थी। लखनऊ 13 मैचों में 8 पॉइंट्स के साथ आखिरी स्थान पर है। पॉइंट्स टेबल की मौजूदा स्थिति… सभी टीमों का समीकरण राजस्थान की टॉप-4 में एंट्री लखनऊ पर जीत के बाद राजस्थान रॉयल्स ने पंजाब किंग्स को पीछे छोड़ दिया। टीम के अब 14 पॉइंट्स हो गए हैं। राजस्थान को अपना आखिरी मैच मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलना है। जीत मिलने पर टीम 16 पॉइंट्स तक पहुंच जाएगी और प्लेऑफ में जगह पक्की कर लेगी। कोलकाता के लिए आज जीत जरूरी कोलकाता नाइट राइडर्स 11 पॉइंट्स के साथ आठवें स्थान पर है। टीम का मुकाबला आज मुंबई इंडियंस से है। प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कोलकाता को यह मैच हर हाल में जीतना होगा। हार के साथ टीम की उम्मीदें लगभग खत्म हो जाएंगी। पंजाब पांचवें स्थान पर खिसकी पंजाब किंग्स अब 13 पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गई है। टीम लगातार 6 मुकाबले हार चुकी है। पंजाब को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए लखनऊ के खिलाफ आखिरी मैच हर हाल में जीतना होगा। साथ ही राजस्थान और मुंबई के मैच में राजस्थान के हारने की दुआ भी करनी होगी। बेंगलुरु टॉप पर कायम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 18 पॉइंट्स और +1.065 नेट रनरेट के साथ पहले स्थान पर बनी हुई है। टीम पहले ही प्लेऑफ में पहुंच चुकी है और उसका क्वालिफायर-1 खेलना लगभग तय माना जा रहा है। RCB का आखिरी लीग मैच सनराइजर्स हैदराबाद से है। गुजरात और हैदराबाद में टॉप-2 की जंग सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर अपने साथ गुजरात टाइटंस की भी प्लेऑफ में जगह पक्की करा दी। दोनों टीमों के 16-16 पॉइंट्स हैं और वे दूसरे और तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। गुजरात का आखिरी लीग मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स से होगा, जबकि हैदराबाद को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का सामना करना है। दोनों टीमों की नजर अब टॉप-2 में जगह बनाकर क्वालिफायर-1 खेलने पर होगी। चेन्नई और दिल्ली की राह मुश्किल चेन्नई सुपर किंग्स 12 पॉइंट्स के साथ छठे स्थान पर है। टीम का आखिरी मुकाबला गुजरात से है। CSK को प्लेऑफ की उम्मीदें जिंदा रखने के लिए यह मैच बड़े अंतर से जीतना होगा। दिल्ली कैपिटल्स भी 12 पॉइंट्स के साथ सातवें स्थान पर है। टीम का नेट रनरेट (-0.871) काफी खराब है। दिल्ली को कोलकाता के खिलाफ जीत के साथ दूसरी टीमों के नतीजों का भी इंतजार करना पड़ेगा। मुंबई और लखनऊ पहले ही बाहर मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी हैं। मुंबई के 8 पॉइंट्स हैं, जबकि लखनऊ भी 8 अंक के साथ आखिरी स्थान पर है। टूर्नामेंट के टॉप प्लेयर्स… सूर्यवंशी ऑरेंज कैप होल्डर बने राजस्थान रॉयल्स के युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी IPL 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उनके 13 मैचों में 579 रन हो गए हैं और उन्होंने हेनरिक क्लासन को पीछे छोड़कर ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली। सूर्यवंशी इस सीजन 236.32 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 1 शतक, 3 अर्धशतक और 53 छक्के लगाए हैं, जो इस सीजन सबसे ज्यादा हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के मिचेल मार्श 563 रन के साथ दूसरे, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासन 555 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं। भुवनेश्वर के पास पर्पल कैप बरकरार बेंगलुरु के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार 24 विकेट के साथ पर्पल कैप होल्डर बने हुए हैं। गुजरात के कगिसो रबाडा 21 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। चेन्नई के अंशुल कम्बोज 20 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर बने हुए हैं।









