सुबह उठते ही एड़ी में होता है तेज दर्द? अपनाए ये घरेलू नुस्खे, सूजन और खिंचाव दोनों से मिलेगी राहत

Last Updated:May 21, 2026, 20:20 IST Heel Pain Treatment: एड़ी का दर्द अब हर उम्र के लोगों में आम समस्या बनता जा रहा है. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार के अनुसार लंबे समय तक कठोर सतह पर चलना, गलत जूते पहनना और वजन बढ़ना इसके प्रमुख कारण हैं. घरेलू उपाय जैसे नमक वाले गुनगुने पानी से सिकाई, हल्की मालिश और पैरों को आराम देने से राहत मिल सकती है. लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी बताया गया है. आजकल एड़ी में दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. खासकर सुबह उठते समय या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद लोगों को एड़ी में तेज चुभन जैसा दर्द महसूस होता है. हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार के अनुसार यह समस्या सामान्य थकान, गलत फुटवियर, मोटापा या प्लांटर फेशियाइटिस जैसी बीमारी का संकेत हो सकती है. प्लांटर फेशियाइटिस में एड़ी के नीचे मौजूद टिश्यू में सूजन आ जाती है, जिससे चलना-फिरना मुश्किल हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि सही जूते पहनना, नियमित स्ट्रेचिंग और समय पर इलाज कराने से इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है. उन्होंने बताया कि प्लांटर फेशियाइटिस तब होता है जब पैर के तलवे में मौजूद लिगामेंट में सूजन या खिंचाव आ जाता है. लंबे समय तक खड़े रहने, लगातार चलने, कठोर सतह पर काम करने और गलत जूते पहनने से यह परेशानी बढ़ सकती है. अधिक वजन और फ्लैट फुट वाले लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा रहता है. डॉक्टर के अनुसार, यदि दर्द कई हफ्तों तक लगातार बना रहे, सूजन बढ़ जाए या चलने में ज्यादा दिक्कत होने लगे तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय पर इलाज और सही देखभाल से एड़ी के दर्द की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि घरेलू नुस्खे से अगर समस्या आसनी से खत्म हो रही है तो कुछ दिन और इन नुस्खे को जारी रखें, इससे दर्द का असर खत्म होने के साथ साथ लंबे समय तक वापस एड़ी में दर्द की समस्या नहीं आएगी. इस समस्या में सुबह के समय एड़ी का दर्द ज्यादा महसूस होना सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. कई लोगों को बिस्तर से उठकर पहला कदम रखते ही तेज चुभन जैसा दर्द होता है. कुछ देर चलने के बाद दर्द में राहत मिल जाती है, लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने या ज्यादा चलने पर परेशानी फिर बढ़ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार समय रहते ध्यान नहीं देने पर सूजन और दर्द बढ़ सकता है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google घरेलू उपायों से भी एड़ी के दर्द में काफी राहत मिल सकती है. डॉक्टरों के अनुसार दिन में 2 से 3 बार 10 से 15 मिनट तक बर्फ से सिंकाई करना फायदेमंद माना जाता है, इससे सूजन और दर्द कम होता है. वहीं गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करने से भी आराम मिलता है. सरसों या नारियल तेल से हल्की मालिश करने पर रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों को राहत मिलती है. हालांकि दर्द लगातार बना रहे तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. एड़ी के दर्द से राहत पाने के लिए पैरों को पर्याप्त आराम देना बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार सुबह उठने के बाद पिंडली और तलवे की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा नरम और आरामदायक जूते पहनना भी जरूरी है, ताकि एड़ी पर दबाव कम पड़े. डॉक्टर हील पैड या कुशन वाले सोल इस्तेमाल करने की भी सलाह देते हैं, जिससे चलने के दौरान झटका कम लगता है और एड़ी को सहारा मिलता है. डॉ. अमित कुमार के अनुसार लंबे समय तक नंगे पैर कठोर फर्श पर चलने से एड़ी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है. ऐसे में आरामदायक फुटवियर का इस्तेमाल जरूरी है. उन्होंने बताया कि रोजाना हल्का व्यायाम और वजन नियंत्रित रखना भी एड़ी के दर्द को कम करने में मददगार साबित होता है. इसके अलावा रात को सोने से पहले पैरों को थोड़ी ऊंचाई पर रखकर आराम करने से सूजन और खिंचाव में राहत मिल सकती है. लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ऐसे में एड़ी के दर्द से राहत पाने के लिए पैरों को पर्याप्त आराम देना बेहद जरूरी माना जाता है. डॉ. अमित के अनुसार, सुबह उठने के बाद पिंडली और तलवे की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है. इसके अलावा नरम और आरामदायक जूते पहनना भी जरूरी है, ताकि एड़ी पर ज्यादा दबाव न पड़े. डॉक्टर एड़ी के नीचे हील पैड या कुशन लगाने की सलाह भी देते हैं, जिससे चलने के दौरान झटका कम लगता है और पैरों को बेहतर सहारा मिलता है. इससे सूजन और दर्द दोनों में राहत मिल सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विजय के नए मंत्रिमंडल में कई पहली बार: 7 दलित, 2 ब्राह्मण, 4 महिला मंत्री और अधिक | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 20:06 IST दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है – जो अब तक किसी भी तमिलनाडु कैबिनेट में समुदाय के लिए सबसे अधिक आनुपातिक प्रतिनिधित्व है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम में, विजय ने कैबिनेट में दो ब्राह्मण मंत्रियों को भी शामिल किया है – एक ऐसे राज्य में एक उल्लेखनीय प्रस्थान जहां द्रविड़ राजनीति ऐतिहासिक रूप से ब्राह्मण विरोधी बयानबाजी से आकार लेती रही है। (फोटो: एक्स/सीएमओतमिलनाडु) मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की नवगठित कैबिनेट के विस्तार ने तमिलनाडु की राजनीति में कई उल्लेखनीय पहलों को चिह्नित किया है, जिसमें जाति प्रतिनिधित्व, युवा नेतृत्व, लिंग विविधता और राजनीतिक संदेश का सावधानीपूर्वक संतुलित मिश्रण प्रदर्शित किया गया है। प्रारंभिक 10-सदस्यीय टीम से 33-सदस्यीय कैबिनेट तक मंत्रिपरिषद का विस्तार करके, तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) सरकार ने एक मजबूत “सामाजिक न्याय” कथा बनाने का प्रयास किया है, साथ ही तमिलनाडु के पारंपरिक द्रविड़-युग के राजनीतिक ढांचे से दूर जाने का संकेत भी दिया है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले भाषण में, विजय ने घोषणा की कि राज्य में “वास्तविक धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय” का एक नया युग शुरू हो गया है, जो उनके प्रशासन की वैचारिक स्थिति को रेखांकित करता है। दलित प्रतिनिधित्व रिकॉर्ड करें कैबिनेट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अनुसूचित जाति समुदायों का प्रतिनिधित्व है। दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है – जो अब तक किसी भी तमिलनाडु कैबिनेट में समुदाय के लिए सबसे अधिक आनुपातिक प्रतिनिधित्व है। शामिल किए गए प्रमुख दलित चेहरों में पार्टी रणनीतिकार आधव अर्जुन और डॉक्टर केजी अरुणराज शामिल हैं, जिन्होंने टीवीके के माध्यम से राजनीति में प्रवेश करने से पहले भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) से इस्तीफा दे दिया था। दुर्लभ ब्राह्मण निरूपण | राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम में, विजय ने कैबिनेट में दो ब्राह्मण मंत्रियों को भी शामिल किया है – एक ऐसे राज्य में एक उल्लेखनीय प्रस्थान जहां द्रविड़ राजनीति ऐतिहासिक रूप से ब्राह्मण विरोधी बयानबाजी से आकार लेती रही है। चेन्नई के मायलापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक पी. वेंकटरमणन नए प्रशासन में प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं। समावेशन को व्यापक “सर्व-समावेशी” राजनीतिक ढांचे को पेश करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कैबिनेट में युवा चेहरों का दबदबा कैबिनेट में युवा नेतृत्व पर विजय के जोर को भी दर्शाया गया है। 33 मंत्रियों में से 11 की उम्र 40 साल से कम है। अनुभवी नेता केए सेनगोट्टैयन के अलावा, कैबिनेट के अधिकांश मंत्रियों के पास कोई पूर्व मंत्री पद का अनुभव नहीं है, जो राज्य की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के लिए सरकार के प्रयास को रेखांकित करता है। महिला प्रतिनिधित्व विस्तारित कैबिनेट में चार महिला मंत्री शामिल हैं, सरकार ने महिला नेताओं के बीच जमीनी स्तर के नेतृत्व और युवा भागीदारी पर प्रकाश डाला है। इनमें शिवकाशी से एस. कीर्तन भी शामिल हैं, जो वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा में सबसे कम उम्र के विधायक हैं। 59 साल बाद तमिलनाडु कैबिनेट में गठबंधन सहयोगी कैबिनेट विस्तार में दो कांग्रेस विधायकों के शामिल होने के साथ एक बड़ा राजनीतिक बदलाव भी हुआ। यह कदम औपचारिक रूप से सरकार को लगभग छह दशकों में तमिलनाडु के पहले गठबंधन प्रशासन में बदल देता है और 59 वर्षों के बाद राज्य मंत्रिमंडल में कांग्रेस पार्टी की वापसी का प्रतीक है। टीवीके की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के भी कैबिनेट में शामिल होने की संभावना है. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : चेन्नई (मद्रास), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया विजय के नए मंत्रिमंडल में कई पहली बार: 7 दलित, 2 ब्राह्मण, 4 महिला मंत्री और अधिक अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)सी जोसेफ विजय(टी)दलित प्रतिनिधित्व(टी)ब्राह्मण मंत्री(टी)युवा नेतृत्व तमिलनाडु(टी)महिला मंत्री तमिलनाडु(टी)गठबंधन सरकार तमिलनाडु
BRO, LIC HFL, MCL Recruitment 2026

Hindi News Career BRO, LIC HFL, MCL Recruitment 2026 | Sarkari Naukri Vacancy India 15 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी यूपी कृषि विभाग में 2759 पदों पर भर्ती, पंजाब एंड सिंध बैंक में 635 वैकेंसी की। साथ ही बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में 899 ओपनिंग्स की। इस भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया आज यानी 21 मई से शुरू हो रही है। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. यूपी कृषि विभाग में 2759 पदों पर भर्ती, 22 मई से शुरू आवेदन यूपी में उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कृषि विभाग में प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी के 2759 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म में करेक्शन और फीस जमा करने की लास्ट डेट 18 जून 2026 तय की गई है। वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या जनरल 1692 ओबीसी 573 ईडब्ल्यूएस 275 एससी 213 एसटी 6 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : कृषि में ग्रेजुएशन या उसके समकक्ष डिग्री इस भर्ती के लिए वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जो पीईटी-2025 में शामिल हो चुके हों और उन्हें आयोग द्वारा पीईटी 2025 का स्कोर कार्ड जारी किया गया हो। लॉगिन के लिए PET 2025 रजिस्ट्रेशन नंबर की जरूरत होगी। एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 40 साल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : PET स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग रिटन एग्जाम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सैलरी : 25,500 – 81,100 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। फीस : सभी उम्मीदवारों के लिए : 25 रुपए एग्जाम पैटर्न : कुल प्रश्न: 100 एग्जाम लैंग्वेज : हिंदी और इंग्लिश ड्यूरेशन: 2 घंटे निगेटिव मार्किंग : 1/4 अंक कुल अंक : 100 कुल प्रश्न : 100 सब्जेक्ट : क्रॉप साइंस, बायोटेक्नोलॉजी एंड फिजियोलॉजी सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन कंप्यूटर एंड आईटी उत्तर प्रदेश का जनरल नॉलेज ऐसे करें आवेदन : यूपीएसएसएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं। यहां ‘Agriculture Technical Assistant (AGTA) Group C Recruitment 2026’ पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस फॉलो करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म जमा करें। इसका प्रिंटआउट निकालकर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट लिंक 2. पंजाब एंड सिंध बैंक में 635 पदों पर भर्ती, फीस 100 रुपए पंजाब एंड सिंध बैंक में अप्रेंटिस के 635 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट punjabandsindbank.co.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। इस अप्रेंटिसशिप की अवधि 12 महीने होगी। वैकेंसी डिटेल्स : स्टेट वाइस वैकेंसी पदों की संख्या उत्तर प्रदेश 100 पंजाब 90 हरियाणा 50 बिहार 40 दिल्ली (NCT) 30 महाराष्ट्र 30 राजस्थान 30 आंध्र प्रदेश 20 तमिलनाडु 20 तेलंगाना 20 पश्चिम बंगाल 20 अन्य 165 कुल पदों की संख्या 635 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री। पोस्ट ग्रेजुएट होल्डर्स इस भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर सकते। 1 साल या उससे अधिक का वर्क एक्सपीरियंस रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन नहीं कर सकते। उम्मीदवारों को ग्रेजुएशन पास करने की तारीख से 5 साल से ज्यादा समय नहीं बीता होना चाहिए। संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की स्थानीय भाषा को पढ़ना, लिखना, बोलना और समझना आना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 28 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट लिस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन लोकल लैंग्वेज टेस्ट फीस : सामान्य, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी : 200 रुपए एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी : 100 रुपए सैलरी : 12,300 रुपए प्रति माह जरूरी डॉक्यूमेंट्स : ग्रेजुएशन की मार्कशीट उम्मीदवार का आधार कार्ड जाति प्रमाण पत्र मूल निवास प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी पासपोर्ट साइज फोटो पर सिग्नेचर ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट punjabandsindbank.co.in पर जाएं। अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें। मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट कर दें। इसका प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक 3. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में 899 पदों पर भर्ती, आवेदन आज से शुरू बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (सीमा सड़क संगठन) ने जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स की भर्ती निकाली है। इस भर्ती के तहत इलेक्ट्रीशियन, ड्राफ्ट्समैन, हिंदी टाइपिस्ट, स्टोर कीपर टेक्निकल, ऑपरेटर कम्युनिकेशन और अन्य पदों पर 899 पद भरे जाएंगे। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट bro.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या ड्राफ्ट्समैन 42 हिंदी टाइपिस्ट 10 स्टोर कीपर टेक्निकल 300 ऑपरेटर कम्युनिकेशन 261 ऑपरेटर एक्सकेवेटिंग मशीनरी 207 इलेक्ट्रीशियन 79 कुल पदों की संख्या 899 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ड्राफ्ट्समैन : साइंस के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। ड्राफ्ट्समैनशिप में 2 वर्षीय सर्टिफिकेट या ड्राफ्ट्समैन (सिविल) ट्रेड में सर्टिफिकेट और 1 साल का अनुभव होना चाहिए। हिंदी टाइपिस्ट: 12वीं पास। कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग की स्पीड 30 शब्द प्रति मिनट होनी चाहिए। टाइपिंग में एक्सपर्ट उम्मीदवारों को मौका मिलेगा। स्टोर कीपर टेक्निकल (SKT) : 12वीं पास। वाहन या इंजीनियरिंग उपकरणों के स्टोरेज की जानकारी होनी चाहिए। संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। ऑपरेटर संचार: 10वीं पास आईटीआई से वायरलेस ऑपरेटर या रेडियो मैकेनिक का सर्टिफिकेट होना चाहिए। सेना से संबंधित ट्रेड सर्टिफिकेट वाले भी आवेदन कर सकते हैं। ओईएम (साधारण श्रेणी) : 10वीं पास उम्मीदवारों के पास भारी वाहन, डोजर या एक्सकेवेटर चलाने का लाइसेंस और कम से कम 6 महीने का अनुभव होना चाहिए। इलेक्ट्रीशियन: 10वीं पास आईटीआई से ऑटो इलेक्ट्रिशियन का सर्टिफिकेट और 1 साल का अनुभव। रक्षा सेवा का संबंधित कोर्स करने वाले भी आवेदन कर सकते हैं। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 27 साल आयु की गणना 1 जून 2026 के आधार पर की जाएगी। सरकारी कर्मचारी : जनरल कैटेगरी के लिए अधिकतम 40 साल, एससी, एसटी को 45 साल तक की छूट दी गई है। वहीं, दिव्यांग उम्मीदवारों को ऊपरी आयु सीमा में 10 साल की अतिरिक्त छूट मिलेगी। सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम स्किल टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल टेस्ट सैलरी : 5200-20200 रुपए प्रतिमाह, पद के अनुसार, ग्रेड पे 1900 – 2800 रुपए तक फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 50 रुपए एससी, एसटी, अन्य : नि:शुल्क एग्जाम पैटर्न : एग्जाम टाइप ऑब्जेक्टिव ड्यूरेशन 1 से 3 घंटे तक एग्जाम मीडियम
Maruti Suzuki India Car Price Hike

Hindi News Tech auto Maruti Suzuki India Car Price Hike | New Rates From June 2026 Due To Rising Input Cost नई दिल्ली34 मिनट पहले कॉपी लिंक देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है। एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। एरिना मॉडल्स: इसके तहत आने वाली ऑल्टो K10, एस-प्रेसो, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, अर्टिगा, ब्रेजा और विक्टोरिस की कीमतों में बदलाव होगा। नेक्सा मॉडल्स: प्रीमियम चैनल नेक्सा के तहत बिकने वाली बलेनो, फ्रॉन्क्स, ग्रैंड विटारा, जिम्नी, XL6, इन्विक्टो और हाल ही में लॉन्च की गई इलेक्ट्रिक कार- ई विटारा के दाम भी बढ़ जाएंगे। कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल ब्रेजा बनाने वाली इस कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लागत के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। कंपनी ने इसके लिए कई कॉस्ट रिडक्शन (लागत कटौती) उपाय भी अपनाए, ताकि ग्राहकों पर इसका बोझ न पड़े। हालांकि, बाजार में महंगाई का दबाव काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है और प्रतिकूल लागत माहौल लगातार बना हुआ है। ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े। 1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं चौथी तिमाही में मुनाफा ₹3,659 करोड़ रहा मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 52,946 करोड़ रुपए की कुल कमाई की। यह पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ी है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 42,431 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तिमाही में कंपनी ने 6.76 लाख कारें बेचीं। कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,659 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही से 6.44% कम रहा है। पिछले साल कंपनी को 3,911 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 28.20% बढ़कर ₹52,462 करोड़ रहा चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 52,462 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 28.20% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2025 में कंपनी ने 40,920 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 11.8% बढ़ी चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,76,209 गाड़ियां बेचीं। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान सालाना आधार पर 3.7% बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट 61.3% ज्यादा रहा। इसके चलते कंपनी की सालाना आधार पर ओवरऑल सेल्स ग्रोथ 11.8% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,38,994 गाड़ियां बेचीं, जबकि 1,37,215 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया। यह कंपनी का ऑल-टाइम-हाई एक्सपोर्ट है। 1982 में बनी थी मारुति सुजुकी इंडिया मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर ‘मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड’ बनाई। भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बेच चुकी है। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है। ये खबर भी पढ़ें… ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू: छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
धुरंधर सिंगर जैस्मीन सैंडलास के कॉन्सर्ट में अफरा-तफरी:दर्शकों के पास लगा बैरिकेड अचानक टूटा, लोग गिरे; सिंगर ने बीच में रोका परफॉर्मेंस

पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस के देहरादून लाइव कॉन्सर्ट में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। 20 मई को हुए इस कॉन्सर्ट के दौरान दर्शकों के एरिया के पास लगा एक बैरिकेड अचानक टूट कर गिर गया। इससे आगे खड़े कई लोग अपना संतुलन खोकर गिर पड़े। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि जैस्मीन सैंडलास स्टेज पर परफॉर्म कर रही थीं। तभी अचानक दर्शकों के बिल्कुल सामने वाले हिस्से का बैरिकेड टूट गया। घटना के बाद सिंगर ने तुरंत अपना परफॉर्मेंस रोक दिया और अपनी पर्सनल टीम को सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने को कहा। सिंगर ने सुरक्षाकर्मियों को बताया आक्रामक जैस्मीन ने स्टेज से माइक पर कहा, “मुझे बहुत दुख है कि ऐसा हो रहा है। क्या मेरी इंटरनल टीम इसे संभाल सकती है? मैं चाहती हूं कि मेरी पूरी टीम तुरंत आकर इस मामले को सुलझाए। यहां के सुरक्षाकर्मी काफी आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं।” इसके बाद सिंगर स्टेज पर ‘वाहेगुरु’ का नाम लेती हुई भी सुनाई दीं। जैस्मीन की टीम ने तुरंत दखल देकर स्थिति को नियंत्रित किया, जिसके बाद हालात सामान्य हुए। ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के गानों से मिली कामयाबी जैस्मीन सैंडलास इन दिनों ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के गानों की सफलता को लेकर चर्चा में हैं। इस फ्रेंचाइजी में उनके गाए गाने ‘शरारत’, ‘मैं और तू’ और ‘जाइए सजना’ को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इन गानों की कामयाबी के बाद वे एक बार फिर बॉलीवुड और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गई हैं। अमेरिका में बेहद तंगहाली में बीता बचपन जैस्मीन ने हाल ही में रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि जब उनका परिवार अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचा, तो उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। उनके पिता ने स्थानीय स्कूल में उनका एडमिशन कराया। वे लोग एक बेडरूम के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे, जो कम आय वाले परिवारों के लिए था। उस घर में कुल 6 लोग रहते थे और उनका गुजारा फूड स्टैम्प पर होता था। भारत में टीचर रहीं उनकी मां वहां फैक्ट्री में काम करती थीं और चेरी तोड़ती थीं, जबकि उनके पिता गैस स्टेशन पर काम करते थे। बाद में कैलिफोर्निया जाने पर उनके पिता को कोर्ट में इंटरप्रेटर का काम मिला, तब जाकर जिंदगी थोड़ी बेहतर हुई। गुरुद्वारे में शबद गाकर सीखी गायकी जैस्मीन ने बताया कि बचपन में उनके पास म्यूजिक सीखने का कोई साधन नहीं था। वे सिर्फ गुरुद्वारे में जाकर शबद गाया करती थीं। उनके माता-पिता को उनके सिंगर बनने के सपने पर भरोसा नहीं था। मां इसे सिर्फ एक हॉबी मानती थीं और पिता का मानना था कि म्यूजिक में कोई करियर नहीं है। जैस्मीन ने अपने पिता से 6 महीने का समय मांगा था और कहा था कि अगर कामयाबी नहीं मिली तो वे गाना छोड़ देंगी। हालांकि 6 महीने में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2014 में सलमान खान की फिल्म ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
धुरंधर सिंगर जैस्मीन सैंडलास के कॉन्सर्ट में अफरा-तफरी:दर्शकों के पास लगा बैरिकेड अचानक टूटा, लोग गिरे; सिंगर ने बीच में रोका परफॉर्मेंस

पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस के देहरादून लाइव कॉन्सर्ट में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। 20 मई को हुए इस कॉन्सर्ट के दौरान दर्शकों के एरिया के पास लगा एक बैरिकेड अचानक टूट कर गिर गया। इससे आगे खड़े कई लोग अपना संतुलन खोकर गिर पड़े। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि जैस्मीन सैंडलास स्टेज पर परफॉर्म कर रही थीं। तभी अचानक दर्शकों के बिल्कुल सामने वाले हिस्से का बैरिकेड टूट गया। घटना के बाद सिंगर ने तुरंत अपना परफॉर्मेंस रोक दिया और अपनी पर्सनल टीम को सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने को कहा। सिंगर ने सुरक्षाकर्मियों को बताया आक्रामक जैस्मीन ने स्टेज से माइक पर कहा, “मुझे बहुत दुख है कि ऐसा हो रहा है। क्या मेरी इंटरनल टीम इसे संभाल सकती है? मैं चाहती हूं कि मेरी पूरी टीम तुरंत आकर इस मामले को सुलझाए। यहां के सुरक्षाकर्मी काफी आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं।” इसके बाद सिंगर स्टेज पर ‘वाहेगुरु’ का नाम लेती हुई भी सुनाई दीं। जैस्मीन की टीम ने तुरंत दखल देकर स्थिति को नियंत्रित किया, जिसके बाद हालात सामान्य हुए। ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के गानों से मिली कामयाबी जैस्मीन सैंडलास इन दिनों ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के गानों की सफलता को लेकर चर्चा में हैं। इस फ्रेंचाइजी में उनके गाए गाने ‘शरारत’, ‘मैं और तू’ और ‘जाइए सजना’ को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इन गानों की कामयाबी के बाद वे एक बार फिर बॉलीवुड और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गई हैं। अमेरिका में बेहद तंगहाली में बीता बचपन जैस्मीन ने हाल ही में रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में अपने शुरुआती दिनों के संघर्षों के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि जब उनका परिवार अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचा, तो उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। उनके पिता ने स्थानीय स्कूल में उनका एडमिशन कराया। वे लोग एक बेडरूम के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे, जो कम आय वाले परिवारों के लिए था। उस घर में कुल 6 लोग रहते थे और उनका गुजारा फूड स्टैम्प पर होता था। भारत में टीचर रहीं उनकी मां वहां फैक्ट्री में काम करती थीं और चेरी तोड़ती थीं, जबकि उनके पिता गैस स्टेशन पर काम करते थे। बाद में कैलिफोर्निया जाने पर उनके पिता को कोर्ट में इंटरप्रेटर का काम मिला, तब जाकर जिंदगी थोड़ी बेहतर हुई। गुरुद्वारे में शबद गाकर सीखी गायकी जैस्मीन ने बताया कि बचपन में उनके पास म्यूजिक सीखने का कोई साधन नहीं था। वे सिर्फ गुरुद्वारे में जाकर शबद गाया करती थीं। उनके माता-पिता को उनके सिंगर बनने के सपने पर भरोसा नहीं था। मां इसे सिर्फ एक हॉबी मानती थीं और पिता का मानना था कि म्यूजिक में कोई करियर नहीं है। जैस्मीन ने अपने पिता से 6 महीने का समय मांगा था और कहा था कि अगर कामयाबी नहीं मिली तो वे गाना छोड़ देंगी। हालांकि 6 महीने में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2014 में सलमान खान की फिल्म ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
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Last Updated:May 21, 2026, 19:31 IST Social Media Mental Health Impact: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध भारतीय युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. मशहूर डॉक्टर संजीव बगई ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत के चलते युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याएं पैर पसार रही हैं. साथ ही आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आ रही है. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा तय करने और सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को इस चक्रव्यूह से निकालने में माता-पिता और स्कूलों को आगे आना होगा. दिल्ली: भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी परेशानियां अब केवल उदासी या मूड स्विंग्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं की सेहत, पढ़ाई, रिश्तों और भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह क्या है. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की डॉ.संजीव बगई से. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बताया. सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्याडॉ. संजीव बगई के मुताबिक, किशोर, युवा और खासकर युवा महिलाएं सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में सामने आया है कि 80% से ज्यादा किशोर सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी इस लत का शिकार बनती जा रही है. डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) का तेज उछाल पैदा करता है. जिसे हैप्पी हार्मोन कहा जाता है. यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने और रील्स देखने की आदत बन जाती है. दिमाग और दिल दोनों पर पड़ रहा असरडॉ. बगई ने बताया कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग और शरीर दोनों प्रभावित होते हैं. खासकर रात में सोने से पहले घंटों तक मोबाइल चलाना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.उनके मुताबिक, इससे एंग्जायटी और पैनिक अटैक बढ़ सकते हैं याददाश्त कमजोर हो सकती है पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है लोगों से बातचीत और रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है लगातार खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है. रील्स की दुनिया में बच्चे खो रहे असली दुनियाडॉ. संजीव बगई का मानना है कि कम उम्र में बच्चे सोशल मीडिया के जरिए एक अवास्तविक दुनिया Unreal World में जीने लगते हैं. लाइक्स, फॉलोअर्स और वायरल होने की दौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव बनाती है. इससे वे अपने असली लक्ष्य, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से भटक सकते हैं.उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि जिंदगी सिर्फ रील्स, पोस्ट और लाइक्स तक सीमित नहीं है. भारत में उम्र सीमा तय करने की वकालतडॉ. बगई ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र सीमा तय की गई है. उनका मानना है कि भारत में भी 15–16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कुछ प्रतिबंध या सख्त नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर कम हो. माता-पिता और स्कूल की अहम भूमिकाडॉ. बगई ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता और स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और सही मूल्य सिखाने चाहिए. वहीं स्कूलों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अलग अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही इसके फायदे और नुकसान समझ सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi
गर्मियों में कूलिंग टिप्स: घर में नहीं है एसी या लैपटॉप? भारी गर्मी में मसाला को ठंडी बनायेगी ये एक चीज, पोछे के पानी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है

अगर आपके घर में भी एसी या लैपटॉप नहीं है तो एक चीज आपकी मदद कर सकती है, वो है फिटकरी। पोछा बनाने वाले पानी में फिटकरी मिलाने से लेकर देर तक ठंडा एहसास होता है। साथ ही घर में ताजगी भी रहती है। छवि: फ्रीपिक एक बाल्टी ठंडा या सामान्य पानी लें। इसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा दाल या छोटा फिटकरी पाउडर मिला लें। फ़्लोरिडा तो कुछ बल्बें नींबू या गुलाब जल की भी डाल सकते हैं। अब इस पानी से पूरे घर में पोछा क्षेत्र। छवि: एआई फिटकरी वाले पानी के सामान को जल्दी ठंडा करने में मदद मिलती है और मछली को भी थोड़ा कम लगता है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सुपरमार्केट की कुछ समय तक बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेष रूप से मिश्रित और टाइल्स वाले एसएएम पर प्रभाव अधिक महसूस होता है। छवि: एआई जब आलमारी ठंडी रहती है तो का तापमान भी असुंदर आरामदायक महसूस होता है। इससे संबंधित कम जानकारी है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी वाला पानी को कम करने में मदद करता है। यह घर का ताज़ा ताज़ा लगता है। फिटकरी में व्हीस विरोधी-सतत् गुण होते हैं, जिससे ई-सफ़ाई की सफाई बेहतर होती है। छवि: एआई बहुत ज्यादा फिटकरी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। संगमरमर या लकड़ी के टुकड़े पर पहले थोड़ा परीक्षण कर लें। बच्चों और सामान की पहुंच से फिटकरी दूर। छवि: मेटा एआई दिन में ऑर्थोडॉक्स पर मोटोरोला स्कर्ट रहता है। शाम के समय खोले गए सामान ताकि हवा सुरक्षित रहे। कमरे में पानी से भरी बाल्टी या औषधियों का उपयोग करें। छवि: एआई अगर आप भी बिना एसी और पावर के घर को थोड़ा ठंडा और आरामदायक रखना चाहते हैं, तो फिटकरी वाला ये आसान घरेलू उपाय जरूर आजमाएं। कम खर्च में यह उपाय गर्मी और मित्र दोनों को राहत से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)समर फ्लोर कूलिंग टिप्स(टी)फ्लोर क्लीनिंग DIY(टी)फिटकरी का उपयोग(टी)फिटकारी का पोचा लगाने के फायदे(टी)फर्श सफाई टिप्स(टी)होम कूलिंग टिप्स(टी)समर होम कूलिंग टिप्स
महिलाओं में क्यों बढ़ रहा मर्दों वाला हार्मोन? कानपुर में ये कैसी आफत, इस मुसीबत की जड़ 6 गलतियां

Last Updated:May 21, 2026, 19:17 IST Women health tips : कानपुर में सामने आया है कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव से उनका हार्मोन बैलेंस बिगड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. लोकल 18 से कानपुर की चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी बताती हैं कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. कानपुर. कानपुर के GSVM Medical College और LLR अस्पताल में सामने आए मामलों ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. अस्पताल की ओपीडी और रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में महिलाओं और युवा लड़कियों में पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. मेडिकल भाषा में इसे ‘हाइपरएंड्रोजेनिज्म’ कहा जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसकी सबसे बड़ी वजह बन रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देर रात तक जागना, घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर समय बिताना, जंक फूड खाना, शारीरिक मेहनत कम होना और लगातार तनाव में रहना महिलाओं के शरीर का हार्मोन बैलेंस बिगाड़ रहा है. इसका असर अब कम उम्र की लड़कियों में भी दिखाई देने लगा है. कई महिलाओं में चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उगना, बाल झड़ना, मुंहासे बढ़ना और पीरियड्स गड़बड़ होना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. आगे चलकर ये दिक्कत कानपुर के एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में जब ऐसे मामले पहुंचे तो डॉक्टर भी एक पल के लिए हैरान रह गए. जांच में महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन सामान्य से ज्यादा मिला. विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि पहले इस बीमारी को पीसीओएस कहा जाता था, लेकिन अब इसे पीएमओएस यानी “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम” के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि हार्मोन असंतुलन के कारण महिलाओं में अंडे बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे माहवारी अनियमित होने लगती है और आगे चलकर गर्भधारण में भी परेशानी आती है. कई मामलों में बांझपन जैसी गंभीर स्थिति भी सामने आ रही है. मोटापा से कैंसर तक की दिक्कत डॉक्टरों के मुताबिक, हार्मोन गड़बड़ी केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं रहती. शरीर में एस्ट्रोजन और इंसुलिन का स्तर बढ़ने से डायबिटीज, मोटापा, बच्चेदानी का कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार तनाव, प्रदूषण और केमिकल्सयुक्त खानपान इस बीमारी की बड़ी वजह बन चुके हैं. महिलाओं को नियमित व्यायाम करने, वजन नियंत्रित रखने, संतुलित भोजन अपनाने और तनाव से दूर रहने की सलाह दी है. दवाओं से ज्यादा जरूरी ये चीज विशेषज्ञों का कहना है कि केवल दवाओं से इस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता. समय पर सोना, रोजाना व्यायाम करना, जंक फूड से दूरी बनाना और मानसिक तनाव कम करना ही सबसे बड़ा बचाव है. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर समय रहते महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल सुधार लें तो इस बढ़ती समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
केरल की ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ राज्य कार नंबर 13 को आखिरकार कब्जा मिल गया; सीके हरेन्द्रन ने फिर से कमरा 13 चुना | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 18:53 IST जैसा कि कई दिनों तक सस्पेंस जारी रहा, स्थानीय स्वशासन मंत्री केएम शाजी ने अंततः “केरल राज्य 13” वाहन लेने के लिए स्वेच्छा से सहमति व्यक्त की। केरल की राजनीति में 13 नंबर को लेकर अंधविश्वास बार-बार सामने आता रहा है। (एआई-जनरेटेड इमेज) बहुचर्चित “केरल राज्य 13” आधिकारिक मंत्रिस्तरीय कार को अंततः एक व्यक्ति मिल गया है क्योंकि कथित तौर पर कई मंत्रियों ने 13 के आसपास लंबे समय से चले आ रहे अंधविश्वासों के कारण इस नंबर का उपयोग करने से इनकार कर दिया था। इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के बाद, आधिकारिक वाहन नंबरों के आवंटन ने केरल के राजनीतिक हलकों में काफी ध्यान आकर्षित किया – विशेष रूप से इस बात पर कि कार नंबर 13 को कौन स्वीकार करेगा। कई दिनों तक सस्पेंस जारी रहने के कारण, स्थानीय स्वशासन मंत्री केएम शाजी ने अंततः “केरल राज्य 13” वाहन लेने के लिए स्वेच्छा से सहमति व्यक्त की। दिलचस्प बात यह है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) नेता को शुरुआत में कार नंबर 9 आवंटित किया गया था। हालांकि, पार्टी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर यह कहते हुए आपत्ति जताई कि “हमारे लिए नंबर 9 की जरूरत नहीं है”। आपत्तियों के बाद, शाजी ने इसके बजाय 13 नंबर के वाहन को चुना – एक नंबर जिसे अंधविश्वास के कारण व्यापक रूप से अशुभ माना जाता है। ‘नंबर 13’ के आसपास का लंबा इतिहास केरल की राजनीति में 13 नंबर को लेकर अंधविश्वास बार-बार सामने आता रहा है। पिछली यूडीएफ सरकार के दौरान, कथित तौर पर “केरल राज्य 13” वाहन आवंटित नहीं किया गया था। जब एलडीएफ बाद में सत्ता में आया, तो पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक द्वारा स्वेच्छा से इसका उपयोग करने से पहले मंत्रियों ने संख्या को स्वीकार करने से परहेज किया। इसी तरह, 2006 में पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान, पूर्व मंत्री एमए बेबी ने कथित तौर पर अंधविश्वासों को चुनौती देने के लिए वाहन संख्या 13 का उपयोग करने पर जोर दिया था। सिर्फ कारें ही नहीं, यहां तक कि कमरा नंबर 13 भी नंबर को लेकर अंधविश्वास आधिकारिक वाहनों से भी आगे तक फैला हुआ है। तिरुवनंतपुरम में एमएलए हॉस्टल का कमरा नंबर 13 भी लंबे समय से राजनीतिक लोककथाओं से जुड़ा हुआ है। एक लोकप्रिय धारणा के अनुसार, नीला ब्लॉक में कमरा 13 पर कब्जा करने वाले किसी भी विधायक को अगला विधानसभा चुनाव हारने का खतरा है। हालांकि, सीपीआई (एम) नेता सीके हरेंद्रन अंधविश्वास को खारिज करते हुए लगभग एक दशक से कमरा 13 में ही रह रहे हैं। हरेंद्रन ने 2026 का विधानसभा चुनाव जीता और एक बार फिर उसी कमरे को चुना है। यहां तक कि केरल उच्च न्यायालय ने एक बार अपने नंबरिंग सिस्टम से कोर्ट रूम नंबर 13 को हटा दिया था, इससे पहले भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर इस प्रथा की आलोचना की थी, यह देखते हुए कि संवैधानिक संस्थानों को अंधविश्वासी मान्यताओं को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया केरल की ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ राज्य कार नंबर 13 को आखिरकार कब्जा मिल गया; सीके हरेंद्रन ने फिर से कमरा 13 चुना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल राज्य 13(टी)केरल मंत्रिस्तरीय कार(टी)नंबर 13 अंधविश्वास(टी)केरल राजनीति अंधविश्वास(टी)आधिकारिक वाहन नंबर(टी)केएम शाजी कार(टी)एमएलए हॉस्टल कक्ष 13(टी)केरल उच्च न्यायालय 13








