फल कहलाए, लेकिन बनती है सब्जी, इसके आगे मटन भी फेल, वजन करे कंट्रोल, बीज भी होते हैं बेहद फायदेमंद

कटहल (Jackfruit) ऐसा फल है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है. प्रकृति ने हमें कई ऐसे फल और सब्जियां दी हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. कटहल उनमें से एक है. आयुर्वेद में भी इसे फाइबर, विटामिन सी और औषधीय गुणों से भरपूर फल माना गया है. जानिए यहां कटहल के क्या फायदे होते हैं. कटहल के फायदे (Kathal ke fayde) बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुसार, कटहल केवल पौष्टिक फल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद उपयोगी है. विभाग का कहना है कि इसका सेवन बेहतर पोषण को बढ़ावा देता है और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान निभाता है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, कटहल का पेड़ स्थानीय आजीविका को मजबूत करने में भी मदद करता है. इसकी खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का स्रोत बन सकती है. कटहल के पेड़ के फायदे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करता है.मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है.पर्यावरण संतुलन को मजबूत करता है. क्या है कटहल का वैज्ञानिक नाम? कटहल का वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है. यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ होता है. इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका बड़ा आकार वाला फल है, जिसकी बाहरी सतह छोटी-छोटी नुकीली संरचनाओं से ढकी रहती है. कटहल में पाए जाने वाले पोषक तत्व विटामिन Cफाइबरएंटीऑक्सीडेंटप्राकृतिक ऊर्जा देने वाले तत्वइम्यूनिटी और पाचन के लिए लाभकारी इसके सेवन से होने वाले फायदे कटहल में मौजूद विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है. संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है. वहीं, इसमें मौजूद भरपूर फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. कब्ज की समस्या कम करने में मदद करता है. पेट को स्वस्थ रखने में सहायक होता है. त्वचा और ऊर्जा के लिए भी उपयोगी है. कटहल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इसके सेवन से होने वाले अन्य लाभ शरीर को ऊर्जा मिलती है.थकान कम महसूस हो सकती है.लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है.वजन नियंत्रण में भी मददगार. कटहल में कैलोरी अपेक्षाकृत कम और फाइबर अधिक मात्रा में होता है. यही कारण है कि इसे वजन नियंत्रित रखने वाले आहार में भी शामिल किया जाता है. कटहल के बीज भी हैं पौष्टिक सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि कटहल के बीज भी पोषण से भरपूर होते हैं. इन्हें उबालकर या भूनकर खाया जा सकता है. बीजों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है.
हीट वेव से बचने के लिए क्या करें? एम्स डॉक्टर ने दी अहम सलाह

Last Updated:May 21, 2026, 23:24 IST Heat Waves Tips: गर्मी के मौसम में लू के कारण सिचुएशन सीरियस हो जाती है. कई बार ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. ऐसे एम्स के डॉक्टर ने सुरक्षित रहने के कुछ आसान उपायों को बताया है, जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. ख़बरें फटाफट देश के कई राज्यों में लगातार बढ़ती गर्मी और लू लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है. तेज धूप और ऊंचे तापमान की वजह से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं. एम्स के डॉ. नीरज निश्चल ने आइएनएस लोगों को गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टर ने बताया कि गर्मी में सबसे आम समस्या डिहाइड्रेशन होती है. इसका मतलब है कि शरीर में पानी और जरूरी नमक की कमी हो जाना. ज्यादा पसीना आने से शरीर कमजोर होने लगता है और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है. कई बार यह हीट स्ट्रोक यानी लू में बदल जाता है. हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. हीट वेव से बचने के उपायडॉक्टर का कहना है कि दोपहर के समय धूप सबसे ज्यादा तेज होती है. इसलिए सुबह 11 बजे से शाम 4 या 5 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो शरीर को पूरी तरह ढककर निकलें. ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें, सिर पर टोपी, गमछा या पगड़ी रखें और छाते का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि ज्यादा समय धूप में न बिताएं. गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है. घर से निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. डॉक्टर ने सलाह दी है कि दिनभर में ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले पेय लेते रहें. केवल पानी पीना काफी नहीं होता, क्योंकि पसीने के साथ शरीर से नमक और जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं. ओआरएस शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि बेल का शरबत, शिकंजी और दाल का पानी जैसे घरेलू पेय गर्मी में काफी फायदेमंद होते हैं. ये शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं. अस्पतालों में इन दिनों कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा पसीना और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याओं वाले मरीज बढ़ रहे हैं. गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक के कारण तेज बुखार, भ्रम, बेहोशी और दौरे तक पड़ सकते हैं. बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं. इसलिए गर्मी के मौसम में हल्का भोजन करें, छांव में रहें और शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें. समय पर सावधानी बरतने से गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
लौकी की मिस्सी रोटी रेसिपी: नान-पराठा नहीं, मिनटों में असली लौकी वाली मिस्सी रोटी, खाते ही भूल जाएंगे होटल का स्वाद; विधि नोट करें

सामग्री: 1 कप आटे का आटा, 1/2 कप बेसन, 1 लोकी, 1 प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अजवायन, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी, नमक, हरा धनिया, 1 छोटा चम्मच तेल, घी छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बड़े पैमाने पर बर्तनों का आटा और बेसन पेश किया गया। अब इसमें कद्दू की हुई लौकी, प्याज, हरी मिर्च, अजवायन, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया गुड़िया से मिला लें। छवि: एआई ध्यान दें कि लौकी पानी छोड़ती है, इसलिए आटा गूंथते समय पानी बहुत कम लगता है। जरूरत है बस थोड़ी सी पानी की आपूर्ति। अब थोड़ा सा तरल तेल तैयार कर लें। छवि: एआई इसके बाद एसोसिएट्स के लो अवशेष मित्र हाथ से बेल लें। गैस पर तवा गरम करें और रोटी को दोनों तरफ से घी या तेल में लपेट कर सुनहरा होने तक सेंक लें। गर्मियों में यह ब्रेड पेट के लिए भी काफी आरामदायक मानी जाती है। छवि: एआई रोटी में कसूरी मेथी का स्वाद और सुगंध बढ़ जाती है। इसे दही, लहसुन की चटनी या मिर्च के अचार के साथ बनायें। बच्चों के लिए इसमें छोटे-छोटे पनीर भी मिला सकते हैं। छवि: एआई लौकी खरगोश और पानी की सबसे अच्छी समानता है, जो पेट को प्रभावित करती है। वहीं बेसन प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। ऐसे में यह मिस्सी ब्रेड स्वादिष्ट होने के साथ-साथ वैगन भी बन जाती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट) लोकी मिस्सी रोटी रेसिपी(टी)घर पर मिस्सी रोटी कैसे बनाएं(टी)घर पर बनी लौकी मिस्सी रोटी रेसिपी:(टी)लौकी की मिस्सी रोटी(टी)स्वस्थ रेसिपी(टी)बेसन की रोटी(टी)घीया मिस्सी रोटी(टी)लौकी
मूंग दाल हलवा रेसिपी: घर में बिना चीनी के स्वादिष्ट मूंग दाल का हलवा, अब स्वाद के साथ सेहत भी

मूंग दाल का हलवा ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। अगर आपको भी ये हलवा पसंद है लेकिन चीनी नहीं चाहिए तो आपके लिए एक आसान सी रेसिपी लेकर आए हैं। छवि: फ्रीपिक मूंग दाल का हलवा बनाने की सामग्री- 1 कप मूंग दाल, देसी घी, 2 कप दूध, गुड़ का पाउडर या स्टीविया, हरी इलायची पाउडर, मिठाई छवि: फ्रीपिक मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए मूंग दाल को 3-4 बार पानी से अच्छी तरह से खरीदें और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। अब इस दाल को एक मसाला में मध्यम आंच पर थोड़ी देर के लिए जबतक इसका पानी न सुख जाए। छवि: एआई जब ये भुनी हुई दाल यूनिवर्सल हो जाए तो इसे मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब पकौड़े में घी गरम कीजिये. पिसी दाल का पाउडर इसमें मिलाया जाता है और रासायनिक संरचना पर आधारित जबतक इसका रंग सुनहरा न हो जाए। छवि: एआई थोड़ा-थोड़ा करके इसमें फुल क्रीम दूध पकौड़े और लगातार शौकीन बने रहें ताकि पेट न पड़े। इसे तबतक पराक्रमी जबतक सारा दूध दाल ना सोख ले। छवि: एआई अब इस मिश्रण में गुड़ का पाउडर या स्टीविया पाउडर मिलाएं। ऊपर से कालीमिर्च पाउडर भी डालें। अब इस पूरे मिश्रण को तबतक बहादुर जबतक हलवा से घी न छोड़ना पड़ा। छवि: एआई जब आपका हलवा तैयार हो जाए तो उसमें काजू, बादाम, टेलेज़ल जैसे फ़्लोरिडा विज़नल्स डाल लें। आपका टेस्टी और कार्मिक मूंग दाल का हलवा तैयार है। छवि: एआई
फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से लेकर मोटापे तक कंट्रोल करती है ये घरेलू औषधि

X फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से मोटापा तक करती है कंट्रोल Aam Ki Guthli Ke Fayde: आम का गूदा खाने के बाद फेंक दी जाने वाली गुठली सेहत के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है, जो ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन घटाने जैसी कई समस्याओं में बेहद फायदेमंद साबित होती है. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उपयोग करने के लिए गुठली को धूप में अच्छी तरह सुखाकर उसके अंदर का हिस्सा निकाल लें और फिर उसका पाउडर बनाकर या सीधे खाली पेट ताजे पानी के साथ सीमित मात्रा में सेवन करें. हालांकि, इसके बेहतरीन फायदों के बावजूद इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए किसी गंभीर बीमारी या पहले से दवा चलने की स्थिति में व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी सही खुराक तय करने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Health Tips: गर्मी में अमृत समान हरा पुदीना, पेट, त्वचा और शरीर को देता है ठंडक व ताजगी, जाने इसके फायदे

गर्मी के मौसम में हरा पुदीना शरीर को ठंडक देने, पेट की समस्याओं से राहत पहुंचाने और ताजगी बनाए रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है. चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाला पुदीना त्वचा, सिरदर्द और मुंह की बदबू जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.
प्लेट छोड़िए, पत्ता अपनाइए, जानिए केले के पत्ते पर खाने के फायदे और परंपरा के पीछे का विज्ञान

Last Updated:May 21, 2026, 21:25 IST Benefits of Eating Food on Banana Leaves: दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम माना जाता है. इसमें पत्ते की प्राकृतिक संरचना का उपयोग कर भोजन को अधिक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनाया जाता है. गरम भोजन परोसने से पत्ते के प्राकृतिक यौगिक भोजन में मिलकर पाचन और इम्युनिटी को लाभ पहुंचाते हैं. पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स गरम भोजन के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं. यह परंपरा प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है. मंदिरों और घरों में इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम माना जाता है. गरमा-गरम भोजन परोसने से पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भोजन में मिल जाते हैं जो पाचन और सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. यह परंपरा केमिकल-मुक्त और इको-फ्रेंडली मानी जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है. इसके साथ ही यह मेहमान-नवाजी और समृद्धि का प्रतीक है. पत्ते को बिछाने, धोने और मोड़ने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक शिष्टाचार भी जुड़ा होता है. दक्षिण भारतीय घरों और मंदिरों में इसका विशेष महत्व है और यह परंपरा आज भी प्रचलित है. केले के पत्तों में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो ग्रीन टी में भी मौजूद होते हैं. जब गरम भोजन इन पत्तों पर परोसा जाता है तो इनमें मौजूद जैव सक्रिय यौगिक भोजन में मिल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को सुधारते हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानी जाती है. केले के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली है. यह भोजन को प्राकृतिक सुगंध भी प्रदान करते हैं स्वाद बढ़ाता है. होटलों या शादियों में अक्सर प्लास्टिक या धातु की प्लेटों को साफ करने के लिए डिटर्जेंट और केमिकल वाले डिशवॉशर का उपयोग किया जाता है, जिनके सूक्ष्म अंश सतह पर रह जाने की संभावना रहती है. इसके विपरीत, केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से शुद्ध और केमिकल-मुक्त होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करने से पहले केवल साफ पानी से हल्का धोना पर्याप्त होता है. इनमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम कोटिंग या प्रसंस्करण नहीं होता, जिससे भोजन पूरी तरह प्राकृतिक सतह पर परोसा जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google केले के पत्ते की ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से एक मोम जैसी पतली परत पाई जाती है. जब इस पर गरमा-गरम भोजन जैसे चावल, सांभर या रसम परोसा जाता है तो यह परत हल्की गर्मी से सक्रिय होकर भोजन में एक खास सुगंध और स्वाद जोड़ देती है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है और एक पारंपरिक देसी अनुभव मिलता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया भोजन को हल्की सौंधी खुशबू प्रदान करती है जो इंद्रियों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वाद और संस्कृति दोनों के लिए विशेष माना जाता है. केले के पत्ते पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माने जाते हैं और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों का बेहतरीन विकल्प हैं. इनका उपयोग एक बार भोजन परोसने के बाद किया जाता है, जिसके बाद इन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. ये प्राकृतिक रूप से जल्दी सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और कुछ समय बाद जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे न तो प्लास्टिक कचरा बढ़ता है और न ही पर्यावरण प्रदूषण होता है. यह परंपरा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देती है और प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा के पीछे सांस्कृतिक और व्यावहारिक मान्यताएं हैं. पत्ता हमेशा इस तरह बिछाया जाता है कि उसका चौड़ा हिस्सा दाईं ओर और नुकीला हिस्सा बाईं ओर रहे. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अधिकतर लोग दाएं हाथ से भोजन करते हैं जिससे दाईं ओर अधिक जगह मिलती है और चावल व मुख्य व्यंजन आसानी से परोसे जाते हैं. पत्ते के ऊपरी हिस्से में नमक, अचार, चटनी, सूखी सब्जियां और मिठाई रखी जाती हैं. निचले हिस्से में चावल, सांबर और रसम जैसे मुख्य व्यंजन परोसे जाते हैं. यह परंपरा स्वाद और व्यवस्था दोनों को संतुलित बनाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
किडनी हेल्थ टिप्स: आपकी ये आम आदतें किडनी किडनी को कर रही हैं डैमेज, आज ही छोटा; विश्विद्यालय और फ़िट

किडनी को नुकसान से कैसे बचाएं: किडनी हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर से फालतू पानी और रसायन तत्वों को बाहर निकालना, साफ खून करना और ब्लड वॉल्यूम को नियंत्रित करना जैसे कई जरूरी काम करता है। लेकिन, हम अपनी जिंदगियों में कुछ ऐसी गलतियां कर चुके हैं, जो धीरे-धीरे हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। यदि आप हमेशा कार्मिक और फिट रहना चाहते हैं, तो समय रहते इन प्रयोगों को पहचानना और बदलना बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं उन आम सुझावों के बारे में जो आपकी किडनी को डैमेज डैमेज करा रहे हैं। पानी कम पीने की आदत पानी हमारी किडनी के लिए पानी की तरह काम करता है। जब आप पर्याप्त पानी नहीं रखते हैं, तो किडनी शरीर से गंदगी और विषाक्त पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाला जाता है। इससे किडनी में पथरी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में एक दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास यानी 2-3 लीटर पानी जरूर पियें। बहुत ज्यादा नमक लेना नमक में मौजूद यूक्रेनी रक्त भंडार को पुनः प्राप्त किया जाता है। हाई ब्लड प्रेशर का सीधा असर किडनी पर होता है और इससे किडनी के फिल्टर करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। लंबे समय तक मुख्य नमक खाने से किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। जंक फ़ार्म, फ़ार्म्ड फ़ार्म और किराने का सामान से अव्यवस्थित। खाने में ऊपर से नमक छिड़कने की आदत छोड़ें। पेनकिलर्स खाना सिरदर्द, कमर में दर्द या बदन दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना तुरंत पेनकिलर लेना बहुत आम बात हो गई है। इन दवाइयों की जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले किडनी के तेल को भारी नुकसान पहुंचाता है। जब तक बहुत जरूरी न हो, दर्द निवारक लोशन न लें। हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवा का सेवन करें। लंबे समय तक पेशाब लाभ कई बार काम की वजह से हम पेशाब बंद कर देते हैं। यह एक बहुत ही खतरनाक आदत है। ऐसा करने से यूरिनरी साइलेस्टिक्स में चर्च मैथेने का मिश्रण होता है और किडनी पर भारी दबाव होता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। जब भी जरूरत महसूस हो, तुरंत वॉशरूम चले जाएं। बहुत ज्यादा मीठा खाना शायद आपको यह पसंद होगा कि मीठा खाना किडनी से क्या लेना-देना है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चीनी खाने से मोटापा और डायबिटीज की समस्या होती है। रक्तचाप और उच्च रक्तचाप, किडनी खराब होने के दो सबसे बड़े कारण हैं। अपने घटकों में रिफाइंड शुगर, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाइयों की मात्रा कम करें। नींद पूरी न होना भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नींद से समझौता कर लेते हैं। लेकिन जब हम लिखते हैं, तो हमारे शरीर के साथ-साथ किडनी के टिश्यू भी खुद को रिपेयर करते हैं। नींद पूरी तरह से शरीर का ठीक होना और किडनी पर काम करने की क्षमता को प्रभावित करना है। रोज रात को 7 से 8 घंटे तक अच्छी और गहरी नींद जरूर लें। डॉक्टरी सर्जरी के लिए कुछ आसान टिप्स प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट चलें या चलें। अपने उत्पादों में साबुत फल, हरी जड़ी-बूटियाँ और साबुत अनाज शामिल हैं। ये दोनों ही चीजें ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे किडनी में खून का बहाव कम हो जाता है। साल में अपना कम से कम 2 बार फुल बॉडी चेकअप जरूर करवाएं, ताकि किसी भी बीमारी की शुरुआत में ही पता चल सके। यह अवश्य पढ़ें: घर पर टोफू बनाने की विधि: घर में ऐसे एक मिनट में सोयाबीन की मदद से टोफू, नहीं बाजार से टूटने की जरूरत; विधि नोट करें अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।
ज्वार चीला रेसिपी: ज्वार चीला पकाने की विधि: 10 मिनट में तैयार करें ज्वार चीला; कम कैलोरी में भरेगा पेट

ज्वार चीला बनाने की सामग्री: 1 कप ज्वार का आटा, 1 प्याज, 1 छोटा, 1 हरी मिर्च कटी हुई, 2 बड़े दही, हरा धनियां, 1/2 छोटा मोटा जीरा, स्वादानुसार नमक, आवश्यक पानी, थोड़ा सा तेल छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बड़ा तालाब में ज्वार का आटा लें। इसमें दही और धीरे-धीरे पानी मिलाकर तैयार कर लीजिए. ध्यान रखें कि ग्लूटामेट नमक या मैग्नेटिक क्लोराइड न हो। छवि: एआई अब इसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनियां, जीरा और नमक अच्छी तरह मिक्स कर लें। इसके बाद गैस पर तवा गर्म करें और तेल के बर्तन पर प्रभाव डालें। अब एक करछी बैटर तवे पर मानक गोल आकार में विघटित। छवि: एआई चिली को मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सोनाली और क्रिस्पी होने तक सेंक लें। जब चीला अच्छी तरह पक जाए, तो इसे प्लेट में निकाल लें। गरमा-गरम ज्वार चीला हरी चटनी, दही या टोमैटो सॉस के साथ सर्व करें। छवि: एआई जर्सजन मुक्त होता है और पेट के लिए हानिकारक माना जाता है। इसमें वृद्ध और प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती। छवि: एआई गर्मियों में भी यह शरीर को प्रभावित और सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। यदि आप वजन नियंत्रित करना चाहते हैं या मिश्रण का पालन कर रहे हैं, तो यह नुस्खा आपके लिए बिल्कुल सटीक है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)ज्वार चीला रेसिपी(टी)ज्वार चिल्ला रेसिपी(टी)चिला रेसिपी(टी)चीला रेसिपी(टी)वजन घटाने की रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन नाश्ता रेसिपी
अर्जुन की छाल के फायदे I health benefits of arjun chhaal

Last Updated:May 21, 2026, 20:32 IST Benefits of Arjun Chaal: अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और सीने की जलन से राहत दिलाने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट की सूजन कम करने में मददगार हो सकती है. हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपचार अपनाते हैं. अर्जुन की छाल भी इन्हीं घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा मानी जाती है. पुराने समय से पेट की गर्मी, गैस और सीने की जलन में इसका उपयोग किया जाता रहा है. पहाड़ों में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है. प्राकृतिक चीजों का सही तरीके से उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. हालांकि आधुनिक जीवनशैली और खानपान के कारण कई समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी माना जाता है. अर्जुन की छाल फायदेमंद जरूर मानी जाती है, लेकिन इसका सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और बीमारी अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के किसी भी औषधि का अधिक उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, जो नियमित दवाइयां लेते हैं. उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. आयुर्वेदिक चीजों का सही मात्रा और सही तरीके से सेवन ही लाभ देता है. यदि पेट की जलन, गैस या एसिडिटी लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही उपचार जरूरी होता है. अर्जुन की छाल का सेवन कई तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर पीते हैं, जबकि कई लोग इसका पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेते हैं. सुबह खाली पेट या भोजन के बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है. काढ़ा बनाने के लिए इसकी छाल को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है. यह तरीका पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय है. वहीं पाउडर रूप में इसका उपयोग करना भी आसान माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अर्जुन की छाल सिर्फ पेट की गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मददगार मानी जाती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व भोजन को पचाने की प्रक्रिया को बेहतर करते हैं. जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें इससे लाभ मिल सकता है. अर्जुन की छाल पेट और आंतों को शांत रखने का काम करती है. इससे पाचन धीरे-धीरे बेहतर हो सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक चीज का अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. कई लोगों को भोजन के बाद पेट फूलने और गैस बनने की समस्या रहती है. यह परेशानी गलत खानपान, तली-भुनी चीजों और कमजोर पाचन के कारण बढ़ सकती है. डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि अर्जुन की छाल पेट को संतुलित रखने में मदद करती है. इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. अर्जुन की छाल का सेवन करने से गैस बनने की समस्या में राहत मिल सकती है. खासकर खट्टी डकार और पेट में भारीपन महसूस होने पर लोग इसका उपयोग करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में कई परिवार आज भी घरेलू नुस्खे के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं. सही खानपान के साथ इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है. अर्जुन की छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं. पेट और आंतों में सूजन होने पर कई बार जलन, गैस और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में अर्जुन की छाल राहत देने का काम कर सकती है. आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह पेट को शांत रखने और एसिडिटी कम करने में मददगार साबित हो सकती है. इसके नियमित और संतुलित सेवन से पाचन तंत्र को लाभ मिल सकता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता है. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है. बागेश्वर समेत पहाड़ी इलाकों में आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है. इन्हीं में अर्जुन की छाल को बेहद उपयोगी माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर और पेट की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करती है. गर्मियों में कई लोगों को पेट में जलन, भारीपन और बेचैनी की समस्या रहती है. ऐसे में अर्जुन की छाल का सेवन राहत पहुंचा सकता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करते हैं. इसे पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. नियमित और सही मात्रा में सेवन करने पर पेट को आराम मिल सकता है. आजकल गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण एसिडिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई लोग सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन से परेशान रहते हैं. आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को इन समस्याओं में लाभकारी माना गया है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पेट की अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इससे एसिड बनने की समस्या नियंत्रित हो सकती है. अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और सीने की जलन कम हो सकती है. इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. लंबे समय तक परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।









