Saturday, 22 Aug 2026 | 04:38 PM

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रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

बादाम केसर ठंडाई ड्रिंक रेसिपी: गरमा गरम घर पर पहले से तैयार बाजार में जैसी बादाम-केसर वाली ठंडी, बनाएं ही हो जाएं कूल-कूल

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 किलो दूध, 20 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच, 1 छोटा चम्मच खसखस, 4 काली मिर्च, 5 इलायची, 10 केसर के टुकड़े, 5 बड़ा चम्मच चीनी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े, बादाम-पिस्ता छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बादाम को 2-3 घंटे पानी में डुबोएं। इसके बाद बादाम का छिलका हटा दिया गया। पिस्सू में बादाम, खरबुजे के बीज, सौंफ, खसखस, काली मिर्च और इलायची के टुकड़े, पानी के टुकड़े और स्टॉक पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई अब एक पोटैशियम में दूध और सम्मिलित पेस्ट मिलाप तैयार करें। इसके बाद चीनी, केसर और गुलाब जल स्मारक से मिश्रण करें। अगर आप ज्यादा ठंडा स्वाद चाहते हैं तो इसमें बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. छवि: एआई अब ठंडी को 20-30 मिनट के लिए फ़्रिज़ में रखें ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए। बिना सोचे-समझे ठंडा बादाम-केसर ठंडाई के गिलास में और ऊपर से कटे हुए बादाम-केसर ठंडाई सर्व करें। छवि: एआई इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आता है। यह शरीर को गर्मी और लू से बचने में मदद करता है। बादाम से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। छवि: फ्रीपिक सौंफ और इलायची पेट को ठंडा रखने में मदद मिलती है। केसर का स्वाद और शुभकामनाएँ दोनों पुनर्प्राप्त हैं। छवि: फ्रीपिक इस हीट होम पर बनी इस बादाम-केसर कूलाई को जरूर ट्राई करें और इसके साथ ठंडक भरा स्वाद का आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)बादाम-केसर वाली ठंडीई(टी)बादाम-केसर वाली ठंडीई रेसिपी(टी)बादाम ठंडाई(टी)केसर ठंडाई(टी)समर ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ठंडाई रेसिपी

हीटवेव का हो जाएं शिकार तो कैसे बचें? पैरासिटामोल दवा भी नहीं आती काम, डॉक्टर से जानिए आखिर करें तो क्या करें?

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Last Updated:May 21, 2026, 18:29 IST Heatwave Prevention Tips: अक्सर लू लग जाने पर या गर्मी में बुखार आ जाने पर लोग सीधी पैरासिटामोल दवा का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, इससे राहत नहीं मिलती. डॉक्टरों का कहना है कि लू लगने पर बिना सलाह पैरासिटामोल खाने से अंग फेल हो सकता है. जानें लू लगने पर क्या करना चाहिए… Heatwave Prevention Tips: मध्य प्रदेश के उज्जैन में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तेज धूप और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं ने जनजीवन पर गहरा असर डाला है. पिछले एक सप्ताह से शहर का दिन का तापमान लगातार 44 डिग्री के पार बना है, जबकि रात में भी लोगों को राहत नहीं है. रात का पारा करीब 30 डिग्री तक पहुंचने से उमस और गर्मी ने परेशानी बढ़ा दी है. दिनभर सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. लगातार बढ़ती गर्मी अब लोगों के सब्र की कड़ी परीक्षा ले रही है. जीवाजीराव वेधशाला के रिकॉर्डनुसार, गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात यह है कि दिन के साथ रात में भी तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वर्ष 2025 में इस समय दिन का तापमान 43.4 डिग्री ओर रात का 27 डिग्री था. वहीं, शुक्रवार को दिन में 45 डिग्री तक पहुंच गया है. वहीं, मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में पारा और अधिक बढ़ने की संभावना हैं. सड़कें सूनीं, ठंडे पेय का सहारातेज धूप और गर्म हवाओं के चलते सुबह 10 बजे से ही सड़कें लगभग सूनी नजर आईं. लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. निकलना भी पड़ रहा है तो लोग सिर पर कपड़ा बांधकर निकलते दिखाई दिए. वहीं, कई लोग गर्मी से राहत पाने के लिए शीतल पेय, जूस और ठंडी चीजों का सहारा लेते नजर आए. डॉक्टर की सलाह अनुसार भी लोग दोपहर में बाहर निकलने से बचे और बाहर निकलने पर मुंह ढककर निकले ओर पर्याप्त पानी पीते रहे. क्या कहते हैं डॉक्टर?एमबीबीएस, आरसीजीपी चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय, डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि हीट स्ट्रोक या लू लगने की स्थिति सामान्य बुखार से बिल्कुल अलग होती है. सामान्य बुखार में इन्फेक्शन के कारण दिमाग का थर्मोस्टेट (तापमान तय करने वाला हिस्सा) बढ़ जाता है, जिसे पैरासिटामोल कम कर देती है. लेकिन, हीट स्ट्रोक के दौरान, शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना आना आदि) फेल हो जाता है और शरीर बाहर की अत्यधिक गर्मी को झेल नहीं पाता. ऐसी अवस्था में पैरासिटामोल खाने से कोई फायदा नहीं होता और उल्टे अंगों को नुकसान (ऑर्गन फेलियर) पहुंच सकता है. हीट वेव (लू) लगने पर क्या करें?यदि कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन का शिकार हो जाए, तो उन्हें तुरंत कुछ उपचार चालू कर देना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को तेज गर्मी या लू लगने के लक्षण दिखें, तो सबसे पहले उसे तुरंत धूप से हटाकर ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं. शरीर के तंग या भारी कपड़े ढीले कर दें, ताकि गर्मी बाहर निकल सके. इसके बाद ठंडे पानी से शरीर को पोंछें या स्पंज करें और पंखे की हवा दें. गर्दन, बगल और जांघों के जोड़ पर ठंडी पट्टियां या आइस पैक रखें, इससे शरीर का तापमान तेजी से कम होता है. यदि मरीज होश में हो तो उसे धीरे-धीरे पानी या ओआरएस दें. साथ ही बिना देरी किए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।

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गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।

Indian Cricket Domestic Season Starts Aug 23; Ranji Trophy in 2 Phases

Indian Cricket Domestic Season Starts Aug 23; Ranji Trophy in 2 Phases

Hindi News Sports Indian Cricket Domestic Season Starts Aug 23; Ranji Trophy In 2 Phases मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक रणजी ट्रॉफी 2025-26 का सीजन जम्मू-कश्मीर ने जीता था। भारतीय डोमेस्टिक सीजन 2026-27 की शुरुआत 23 अगस्त से होगी। BCCI ने इसके शेड्यूल को लेकर जानकारी दी है। इस सीजन कुल 1788 मैच खेले जाएंगे। दलीप ट्रॉफी के साथ सीजन की शुरुआत होगी। वहीं रणजी ट्रॉफी इस बार भी दो फेज में खेली जाएगी। दलीप ट्रॉफी के बाद 1 अक्टूबर से ईरानी कप खेला जाएगा। इसमें पिछले रणजी ट्रॉफी चैंपियन जम्मू-कश्मीर की टीम रेस्ट ऑफ इंडिया से भिड़ेगी। डिफेंडिंग चैंपियन जम्मू-कश्मीर ईरानी कप खेलेगी। रणजी ट्रॉफी 11 अक्टूबर से शुरु होगी रणजी ट्रॉफी इस बार भी दो चरणों में खेली जाएगी। पहला चरण अक्टूबर-नवंबर 2026 में और दूसरा चरण जनवरी-फरवरी 2027 में होगा। रणजी में 32 टीमों का एलीट ग्रुप और 6 टीमों का प्लेट ग्रुप रहेगा। जम्मू-कश्मीर ने पिछले सीजन अपना पहला रणजी टाइटल जीता था। बीच में सीनियर पुरुष टी-20 (सैयद मुश्ताक अली) और वनडे (विजय हजारे) ट्रॉफी खेली जाएगी। ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड पहला सैयद मुश्ताक ट्रॉफी जीती। टी20 ट्रॉफी से महिला डोमेस्टिक सीजन शुरु होगा महिलाओं का घरेलू सत्र अक्टूबर-नवंबर में सीनियर महिला टी-20 ट्रॉफी से शुरू होगा। इसके बाद इंटर-जोनल ट्रॉफी और वनडे ट्रॉफियां दिसंबर से फरवरी तक खेली जाएंगी। अंडर-एज टूर्नामेंट नवंबर से जनवरी तक चलेंगे। महाराष्ट्र महिला टीम ने पिछली सीनियर टी20 ट्रॉफी का खिताब जीता था। सीके नायडू की विजेता टीम ‘रेस्ट ऑफ इंडिया’ से खेलेगी इस सीजन में एक नया मैच जोड़ा गया है। सीके नायडू ट्रॉफी की विजेता टीम रेस्ट ऑफ इंडिया से खेलेगी। इससे उभरते अंडर-23 खिलाड़ियों को बेहतर मंच मिलेगा। पुरुष अंडर-23 स्टेट ए ट्रॉफी और यूनिवर्सिटी लेवल पर खेली जाने वाली ‘विज्जी ट्रॉफी’ को अब वनडे की बजाय टी-20 फॉर्मेट में खेला जाएगा। मौसम को ध्यान में रखकर शेड्यूल में बदलाव जनवरी में कुछ इलाकों के मौसम को देखते हुए अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी (एलीट ग्रुप) के सभी मैच बेंगलुरु और मैसूर में खेले जाएंगे। अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी को नवंबर-जनवरी में शिफ्ट कर दिया गया है। ———————————— स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान क्रिकेट में बड़ा बदलाव:टी-20 फॉर्मेट में होगा अंडर-23 टूर्नामेंट:रंगीन ड्रेस में व्हाइट बॉल से मुकाबला खेलने उतरेंगे खिलाड़ी, IPL जैसा माहौल मिलेगा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने राष्ट्रीय अंडर-23 प्रतियोगिता टी-20 फॉर्मेट में आयोजित कराने की घोषणा की है। इसके बाद राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी एक्शन मोड में आ गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

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CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन  हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें  इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.

गर्मियों में दादी-नानी के ये देसी नुस्खे हैं रामबाण! डॉक्टर बोले…शरीर रहेगा कूल-कूल, नहीं होगी पानी की कमी

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Last Updated:May 21, 2026, 17:44 IST Summer Health Tips: गर्मियों के मौसम में आसमान से बरसती आग और भयंकर लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए आयुर्वेद के कुछ बेहद आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बताए हैं. आखिर बिना ज्यादा पैसे खर्च किए आप अपने शरीर को अंदर से कैसे ठंडा और तरोताजा रख सकते हैं, आइए जानते हैं. रामपुर: उत्तर प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें काम के सिलसिले में लगातार धूप में बाहर रहना पड़ता है. तेज धूप में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर बहुत जल्दी थक जाता है और बॉडी में पानी की कमी होने लगती है. जिसकी वजह से लू, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं. ऐसे में रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने कुछ ऐसे पुराने घरेलू नुस्खे बताए हैं जो आपको इस गर्मी में एकदम फिट रखेंगे. फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर हैं ये देसी पेय डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, गर्मी के इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी अपने शरीर को अंदर से ठंडा रखना है. आजकल लोग गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाली ज्यादा ठंडी चीजें या कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं. इससे कुछ देर के लिए तो राहत मिलती है, लेकिन यह शरीर को असली फायदा नहीं पहुंचाती. इसके बजाय हमारे घरों में बनने वाले पारंपरिक और देसी पेय सबसे ज्यादा असरदार होते हैं. बेल का शरबत, सत्तू, छाछ और नींबू पानी जैसी चीजें न सिर्फ शरीर को अंदरूनी ठंडक देती हैं, बल्कि दिनभर काम करने के लिए जरूरी एनर्जी भी बनाए रखती हैं. यह भी पढ़ें: पार्क-मैदानों में दिखने वाली इस मामूली हरी घास में छिपा है सेहत का बड़ा राज, इसके फायदे जान चौंक जाएंगे पानी पीने में कभी न करें ये बड़ी गलतीअक्सर लोग इस मौसम में सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे पानी बहुत कम पीते हैं. डॉक्टर इकबाल ने बताया कि कई बार हमें प्यास का अहसास नहीं होता, लेकिन शरीर के अंदर पानी की कमी लगातार होती रहती है. यही कारण है कि लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं, सिर भारी हो जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. इसके अलावा जब भी घर से बाहर निकलें, तो कभी भी खाली पेट न जाएं. धूप में निकलने से पहले अपने सिर को किसी हल्के कपड़े से जरूर ढक लें. मिट्टी के घड़े का पानी है वरदानआयुर्वेद भी मानता है कि गर्मियों के दिनों में हमारा खानपान बेहद हल्का होना चाहिए. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और गर्म तासीर वाला भोजन शरीर की गर्मी को और ज्यादा बढ़ा देता है. इसकी जगह अपने दैनिक आहार में दही, खीरा, तरबूज, ककड़ी और मौसमी फलों को शामिल करना चाहिए. ये चीजें शरीर को ठंडक और तरोताजा बनाए रखती हैं. इसके साथ ही गांवों में आज भी लोग मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं, जिसे आयुर्वेद में सबसे उत्तम माना गया है. घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और इसका शरीर पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ता. दोपहर 12 से 3 बजे की धूप से बचेंडॉक्टर इकबाल ने खास तौर पर सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है. इस दौरान बहुत जरूरी काम होने पर ही घर या ऑफिस से बाहर निकलें. धूप में जाते समय हमेशा हल्के और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें, क्योंकि सूती कपड़ों में हवा का प्रवाह अच्छा रहता है और पसीना आसानी से सूख जाता है. इस मौसम में सूखे और गर्म वातावरण के कारण सेहत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इन छोटे-छोटे घरेलू उपायों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh

PM Modi Gifts Melody To Meloni, Demand Surges

PM Modi Gifts Melody To Meloni, Demand Surges

नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो के सामने आने के बाद देश-विदेश में मेलोडी टॉफी की डिमांड में भारी उछाल आया है, जिसके कारण पार्ले प्रोडक्ट्स कंपनी ने इसका प्रोडक्शन बढ़ा दिया है। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट मयांक शाह ने गुरुवार (21 मई) को इस बात की जानकारी दी। पार्ले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयांक शाह ने पीटीआई (PTI) से बातचीत में इस पल को ब्रांड के इतिहास का सबसे बड़ा कैंपेन बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी अब पीएम मोदी के इस स्वदेशी ब्रांड के समर्थन को आगे बढ़ाएगी। पार्ले प्रोडक्ट्स अब दुनिया भर में मेलोडी की उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए काम करेगी। वर्तमान में मेलोडी टॉफी दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में अवेलेबल है। ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स पर सेल्स बढ़ी मयांक शाह से जब ग्राहकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के रिएक्शन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर्स से शुरुआती फीडबैक मिला है कि बाजार में अचानक डिमांड बहुत बढ़ गई है। क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स जैसे चैनलों पर सेल्स में तुरंत और भारी उछाल देखा गया है। कल सुबह से ही क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर मेलोडी शब्द की सर्च काफी बढ़ गई है। विदेश से भी आ रही डिमांड, प्रोडक्शन बढ़ाया कंपनी ने डिमांड को पूरा करने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। मयांक शाह ने बताया कि कल से ही मेलोडी का प्रोडक्शन बढ़ा दिया गया है। भारत के साथ-साथ अब विदेशों से भी इसकी मांग काफी ज्यादा आ रही है। पीएम मोदी के मेलोनी को मेलोडी का पैकेट गिफ्ट किए जाने पर शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व नेताओं को पार्ले मेलोडी गिफ्ट कर रहे हैं, तो यह पार्ले में हम सभी के लिए बेहद गर्व का पल है। पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है। ग्लोबल स्टेज पर स्वदेशी ब्रांड की ताकत मयांक शाह ने पीएम मोदी के इस कदम को वैश्विक मंच पर स्वदेशी ब्रांड्स की क्षमता का एक शक्तिशाली प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि पार्ले मेलोडी भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला टॉफी ब्रांड है। पीएम ने अपना काम कर दिया है, अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस ब्रांड को वैश्विक स्तर पर ले जाएं और इसे वास्तव में बहुत बड़ा बनाएं। भारतीय ब्रांड्स को यह पहचान देने के लिए PM के प्रति हम आभार व्यक्त करते हैं। डिजिटल और अन्य मीडिया पर प्रमोशन की तैयारी पार्ले प्रोडक्ट्स इस घटनाक्रम का फायदा उठाने और मेलोडी ब्रैंड को आगे प्रमोट करने का प्लान बना रहा है। शाह ने बताया कि कंपनी ने कल से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसका प्रमोशन शुरू कर दिया है। इसे मल्टीपल मीडिया और अन्य मीडिया के जरिए भी प्रमोट किया जाएगा। उन्होंने इसे माननीय प्रधानमंत्री के स्वदेशी ब्रैंड को दिया गया एक शानदार अवसर बताया। सोशल मीडिया पर ‘Melodi’ मीम्स वायरल हो रहे बुधवार को एक बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। इसे लेकर कई ‘Melodi’ मीम्स भी वायरल हो रहे हैं। इसके बाद पार्ले प्रोडक्ट्स ने मौके का फायदा उठाते हुए इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया और कैप्शन में लिखा, ‘1983 से रिश्तों में मिठास घोल रहे हैं।’ ये खबर भी पढ़ें… मोदी की मेलोडी डिप्लोमेसी का फायदा हमनाम कंपनी को मिला: टॉफी बनाने वाली पारले शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं, रियल एस्टेट पारले इंडस्ट्री के शेयर 5% बढ़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को पारले कंपनी की मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया। इसका वीडियो वायरल होते ही निवेशकों ने नाम के कन्फ्यूजन में पारले इंडस्ट्रीज के शेयर खरीद डाले, जिससे मंगलवार को इसमें 5% का अपर सर्किट लग गया। खास बात यह है कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स है, जो शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है। निवेशकों ने गलती से रियल एस्टेट कंपनी पारले इंडस्ट्रीज को मेलोडी बनाने वाली कंपनी समझकर उसमें निवेश कर दिया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…