Friday, 30 Oct 2026 | 10:28 PM

Trending :

EXCLUSIVE

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कटनी पीजी कॉलेज में छात्राओं को फेल करने की धमकी:अतिरिक्त फीस वसूली का विरोध किया, स्टूडेंट्स ने थाने में की शिकायत

March 30, 2026/
4:38 pm

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ में स्थित श्री द्वारका प्रसाद आर्ट्स एंड साइंस पीजी कॉलेज (DPCT) की छात्राओं ने कॉलेज मैनेजमेंट...

किसान महाचौपाल के लिए आज भोपाल पहुंचेंगे राहुल गांधी:जवाहर चौक पर सुबह 10 बजे से कार्यक्रम, कई मार्गों पर डायवर्जन

February 24, 2026/
12:20 am

शहर में मंगलवार, 24 फरवरी को “बेहतर ट्रैफिक, बेहतर भोपाल” अभियान के बीच कांग्रेस कमेटी द्वारा जवाहर चौक पर सुबह...

साहन की फिफ्टी से श्रीलंका-A मजबूत:दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट के पहले दिन स्कोर-288/5; यश ठाकुर और सारांश जैन ने झटके 2-2 विकेट

July 2, 2026/
5:58 pm

भारत-A और श्रीलंका-A के बीच गॉल में खेले जा रहे दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट के पहले दिन मेजबान टीम का पलड़ा...

फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की कहानी लीक:शाहिद कपूर बने लव ट्रायंगल का तीसरा एंगल, रश्मिका-कृति का लेस्बियन रोमांस चर्चा में

February 20, 2026/
2:01 pm

बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ को लेकर एक नई बड़ी खबर सामने आई है जिसमें फिल्म की स्टोरी रिलीज...

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी विशेष: "पश्चिम बंगाल में वंशवाद की राजनीति का कोई स्थान नहीं है"

June 6, 2026/
4:25 pm

चुनाव में हार के बाद टीएमसी की आंतरिक कलह बढ़ गई है, ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 61...

एनसीईआरटी ने मोहनजो-दारो "डांसिंग गर्ल" पाठ्यपुस्तक चित्रण पंक्ति को समीक्षा के लिए विशेषज्ञों के पास भेजा | न्यूज18

June 15, 2026/
5:02 pm

कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में 4,500 साल पुरानी मोहनजो-दारो “डांसिंग गर्ल” के बदले हुए चित्रण पर बहस के बीच, एनसीईआरटी...

CBSE 12th results 2026 expected to be out anytime soon on cbse.gov.in. (Representative/File)

April 27, 2026/
3:39 pm

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 15:39 IST इस पुनर्गणना का तात्कालिक कारण इस महीने की शुरुआत में ग़ाज़ीपुर में हुई एक...

राजनीति

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.