Thursday, 09 Jul 2026 | 07:31 PM

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वर्ल्ड अपडेट्स:इबोला वायरस ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित, भारत अलर्ट पर, इससे कांगो में 20 दिनों में 200 की मौत

वर्ल्ड अपडेट्स:इबोला वायरस ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित, भारत अलर्ट पर, इससे कांगो में 20 दिनों में 200 की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। इसके बाद भारत सरकार ने भी सतर्कता बढा दी है। खास तौर पर कांगो, युगांडा और सूडान की यात्रा करने वालों को सावधान रहने को कहा गया है। सरकार ने कहा है कि इन देशों से लौटने वाले लोग अगर बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त, गले में दर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस करें तो तुरंत डॉक्टर को बताएं। एयरपोर्ट पर भी जांच बढा दी गई है। कांगो में पिछले 20 दिनों में करीब 200 लोगों की मौत हो चुकी है। वहां इबोला का डर इतना बढ गया है कि सैनिटाइजर और मास्क की कीमत कई गुना बढ गई है। अस्पतालों पर भी दबाव बढ रहा है। अमेरिका ने कांगो, युगांडा और रवांडा से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर जांच शुरू कर दी है। यात्रियों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है। चीन ने भी इबोला को लेकर चेतावनी जारी की है। अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर नजर रखी जा रही है। जापान ने इबोला को लेकर यात्रा जोखिम चेतावनी जारी की है। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और मेडिकल जांच मजबूत की गई है। फ्रांस ने भी एयरपोर्ट पर निगरानी बढा दी है। यात्रियों की जांच और अस्पतालों की तैयारी को मजबूत किया जा रहा है। पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… आपराधिक रिकॉर्ड के चलते अमेरिका में भारतीय नागरिक गिरफ्तार, डिपोर्ट किया जा सकता है अमेरिका के लॉस एंजिलिस में अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने भारत के 26 साल के परमिंदरपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICI) के मुताबिक अब उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट करने की कार्रवाई हो सकती है। ICI ने बताया कि परमिंदरपाल सिंह पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें गाड़ी चोरी, गैरकानूनी तरीके से घुसपैठ और तोड़फोड़ जैसे आरोप शामिल हैं। फिलहाल वह इमिग्रेशन हिरासत में हैं। अमेरिका में हाल के सालों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां गैर अमेरिकी नागरिकों पर अपराध, वीजा नियम तोड़ने या पुराने इमिग्रेशन मामलों के कारण कार्रवाई की जा रही है। कई भारतीय नागरिक भी इसका सामना कर चुके हैं। ट्रम्प ने मोदी को महान बताया, कहा- PM मेरे दोस्त:मैं उनका बहुत बड़ा फैन, भारत मुझ पर 100% भरोसा कर सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना महान दोस्त बताया और कहा कि वे मोदी के बहुत बड़े फैन हैं। ट्रम्प ने कहा कि भारत अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है। अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में ट्रम्प ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को फोन करके लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुझे भारत से प्यार है। आपको (एम्बेसडर गोर) हमारे देश के प्रतिनिधि के तौर पर अच्छी स्पीच देनी होगी। मैं सबको गुड इवनिंग कहना चाहता हूं। मुझे प्रधानमंत्री से प्यार है। PM मोदी महान हैं, वह मेरे दोस्त हैं। मोदी को हैलो कहो। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं। ट्रम्प ने कहा- हम पहले कभी इंडिया के इतने करीब नहीं रहे। इंडिया मुझ पर और अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़ी, तो उन्हें पता हैकि कहां कॉल करना है। वे यहीं कॉल करते हैं।

रेगिस्तान में बकरियां चराती थीं, आज फुटबॉल खिलाड़ी:लड़कियों के शॉर्ट्स पहनने का विरोध हुआ, कोच ने बेच दी थी अपनी 15 बीघा जमीन

रेगिस्तान में बकरियां चराती थीं, आज फुटबॉल खिलाड़ी:लड़कियों के शॉर्ट्स पहनने का विरोध हुआ, कोच ने बेच दी थी अपनी 15 बीघा जमीन

तपती रेत, दूर-दूर तक फैला सन्नाटा, और रूढ़िवादिता की मजबूत बेड़ियां। ढाई हजार की आबादी का यह छोटा सा गांव ढींगसरी, राजस्थान के नक्शे पर किसी भी आम रेतीले गांव जैसा ही नजर आता है। इन दिनों इस गांव की हवा बदली हुई है। सुबह की पहली किरण फूटने से पहले, जब पूरा रेगिस्तान सो रहा होता है, तब यहां की रेतीली जमीन पर जूतों की थाप और फुटबॉल की ‘टप-टप’ की आवाजें गूंजने लगती हैं। यह कहानी सिर्फ एक खेल की नहीं है। यह कहानी है उस संघर्ष की, जिसने बकरियां चराने वाली और घर-खेत के कामों में सिमटी बच्चियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बना दिया। आज वर्ल्ड फुटबॉल डे के मौके पर बीकानेर शहर से दक्षिण में 58 किलोमीटर दूर ढींगसरी गांव हम आपके ले चलते हैं, जहां की बेटियां फुटबॉल में नाम कमा रही हैं। जो कल तक बकरियां चराती थीं, वो आज देश के लिए गोल दाग रही हैं ढींगसरी गांव की एक बेटी है- मुन्नी भांभू। मुन्नी आज इस गांव की हर उस बच्ची की उम्मीद का चेहरा बन चुकी है, जो कभी पिंजरे में कैद थी। एक बेहद सामान्य परिवार से आने वाली मुन्नी के पास कभी खेलने के लिए ढंग के जूते तक नहीं थे। वो संसाधनों की कमी के बावजूद सबसे पहले मैदान पहुंचती और देर शाम तक अकेले पसीना बहाती। आज मुन्नी भांभू भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की मुख्य गोलकीपर हैं और चीन में हुए ‘एशियन कप क्वालिफायर मैच’ में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 27 साल बाद राजस्थान से भारतीय महिला फुटबॉल टीम में जगह बनाने वाली वे पहली खिलाड़ी हैं। इतना ही नहीं, ‘SAFF U-19 महिला चैंपियनशिप 2026’ में मुन्नी को ‘सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर’ का अवॉर्ड भी मिल चुका है। मुन्नी भावुक हो जाती हैं और कहती हैं- मैं तो गांव में बस सामान्य पढ़ाई कर रही थी। विक्रम सर ने उंगली थामी और मुझे फुटबॉल से जोड़ा। आज मैं जो कुछ भी हूं, उन्हीं की बदौलत हूं। गांव की बेटियां गोलकीपर के दस्ताने पहनकर तूफानी शॉट रोक रहीं ढींगसरी गांव की मुन्नी अकेली नहीं है। इस रेतीले धोरों से फुटबॉल की ऐसी पौध निकली है कि आज गांव की करीब 60 बेटियां मैदान पर पसीना बहा रही हैं। ये वो बच्चियां हैं, जिनके हाथों में कुछ समय पहले तक या तो बकरियां चराने की लाठी थी, या फिर चूल्हा-चौका संभालते हुए घरेलू काम का बोझ। जिन उंगलियों को सिर्फ गोबर के उपले थापना सिखाया जा रहा था, आज वे गोलकीपर के दस्ताने पहनकर तूफानी शॉट रोक रही हैं। लड़कों ने नहीं दिखाया इंटरेस्ट, तो कोच ने थामी लड़कियों की उंगली इस सुनहरे सफर की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और अर्जुन अवॉर्डी मगन सिंह राजवी के बेटे विक्रम सिंह राजवी (जो खुद रेलवे में हैं और फुटबॉल कोच हैं) ने नई पीढ़ी को तराशने का बीड़ा उठाया। उन्होंने शुरुआत गांव के लड़कों से की थी, लेकिन लड़कों ने खेल में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। वे कभी प्रैक्टिस में आते, तो कभी गायब हो जाते। गांव की बेटियों को मैदान में उतारा यह राह इतनी आसान नहीं थी। विक्रम सिंह उन घरों तक पहुंचे जहां बच्चियां सिर्फ स्कूल, चूल्हे-चौके या खेत के कामों तक सीमित थीं। शुरुआत में हर दरवाजे से ‘ना’ सुनने को मिली। लोग बेटियों को बाहर भेजने को तैयार नहीं थे। लेकिन कोच की जिद के आगे कुछ परिवार राजी हुए और साल 2021 में 20 लड़कियों के साथ ढींगसरी की रेतीली जमीन पर ट्रेनिंग शुरू हुई। जब ‘शॉर्ट्स’ पहनने पर हुआ विरोध, तो घर की महिलाओं को मैदान में उतारा गांव में लड़कियों का फुटबॉल खेलना ही बड़ी बात थी, लेकिन असली परीक्षा तब हुई जब बच्चियों को लोअर (शॉर्ट्स) पहनकर खेलने को कहा गया। रूढ़िवादी माहौल में बच्चियों के छोटे कपड़े पहनकर खेलने को लेकर खूब विरोध हुआ। परिवार वाले अड़ गए। तब कोच विक्रम सिंह ने एक तरकीब निकाली। उन्होंने कोटा फुटबॉल एकेडमी की टीम को ढींगसरी में मैच के लिए बुलाया। उस मैच में कोटा की लड़कियां शॉर्ट्स पहनकर उतरीं और ढींगसरी की टीम हार गई। विक्रम सिंह ने बच्चियों और उनके माता-पिता को समझाया कि इस खेल में फुर्ती के लिए शॉर्ट्स पहनना मजबूरी है, शौक नहीं। ग्रामीणों का झिझक और डर दूर करने के लिए कोच की पत्नी और उनके घर की महिलाएं भी हर रोज प्रैक्टिस के दौरान मैदान पर बैठने लगीं। तब जाकर माता-पिता का भरोसा जागा। कोच विक्रम सिंह राजवी कहते हैं- शुरुआत में जो बच्चियां 4-5 किलोमीटर दूर से आती थीं, उन्हें खुद अपनी गाड़ी से मैदान लाता था। उनके पैर न रुकें, बस यही एक जिद थी। एक खिलाड़ी की सगाई हुई, तो पूरी टीम को लेकर कोटा चले गए कोच साल 2022 में इस सफर में एक और बड़ा मोड़ आया। टीम की एक होनहार खिलाड़ी की उसके घर वालों ने कोटा में सगाई तय कर दी। विक्रम सिंह को डर था कि कहीं एक लड़की के जाने से पूरी टीम का हौसला न टूट जाए। उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। वे सभी 20 बच्चियों को लेकर खुद कोटा शिफ्ट हो गए। वहां उनका स्कूल में एडमिशन कराया और एकेडमी जॉइन कराई। दो साल की इस तपस्या का फल तब मिला, जब कर्नाटक के बेलगाम में नेशनल टूर्नामेंट हुआ। राजस्थान की टीम में चुने गए 22 खिलाड़ियों में से 12 लड़कियां अकेले ढींगसरी गांव की थीं। जब इन बेटियों ने कर्नाटक में नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट जीता, तो पूरे ढींगसरी गांव की आंखों में आंसू आ गए। जो गांव कभी विरोध कर रहा था, वो अब अपनी बेटियों के स्वागत में पलकें बिछाए खड़ा था। बेटियों के सपनों के लिए बेच डाली 15 बीघा जमीन साल 2024 में विक्रम सिंह बच्चियों को लेकर वापस गांव लौट आए। अब गांव वालों का विश्वास मजबूत हो चुका था, लेकिन ट्रेनिंग के लिए एक बड़े मैदान की जरूरत थी। विक्रम सिंह ने पहले अपनी जमा पूंजी से गांव में 10 बीघा जमीन खरीदी, लेकिन मैदान छोटा पड़ रहा था। उन्हें 8.50 बीघा जमीन और चाहिए थी। विक्रम सिंह बताते हैं- गांव से दूर मेरी 15 बीघा पुश्तैनी जमीन और थी। लेकिन एकेडमी मुझे इसी गांव में बनानी थी। मैंने

अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने और होर्मुज खोलने पर सहमत:ट्रम्प और खामेनेई की आखिरी मंजूरी मिलनी बाकी, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे

अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने और होर्मुज खोलने पर सहमत:ट्रम्प और खामेनेई की आखिरी मंजूरी मिलनी बाकी, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे

अमेरिका और ईरान युद्ध को धीरे-धीरे खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकाबंदी हटाने को लेकर सिद्धांत रूप में एक समझौते पर सहमत हो गए हैं। यह जानकारी एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने दी है। हालांकि अभी भी कई बेहद संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम फैसला बाकी है। ईरान की तरफ से फिलहाल सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा गया है कि समझौता हो गया है। पिछले 24 घंटों में ईरानी अधिकारियों के बयानों में भी कुछ अंतर दिखाई दिया है। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इसे अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मिलनी बाकी है। इसमें कुछ दिन लग सकते हैं। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार प्रस्तावित समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। इसके बदले ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को खत्म करने पर सहमत होगा। हालांकि यह प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अभी बातचीत जारी है। ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका खुद इस संवर्धित सामग्री को अपने कब्जे में ले। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अपने लोगों को समझौते में ‘जल्दबाजी न करने’ को कहा है। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान में समझौते पर दस्तखत नहीं: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर दस्तखत नहीं हो सका। इससे पहले कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि आज ही दोनों देश सीजफायर बढ़ाने और होर्मुज खोलने को लेकर समझौता कर सकते हैं। 2. ओमान के जरिए अमेरिका को मैसेज: ईरान ने ओमान के जरिए अपना मौखिक संदेश अमेरिका तक पहुंचाया। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक मैसेज ओमान के विदेश मंत्री तक पहुंचाया। 3. सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना कोई फैसला नहीं: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि ईरान में कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। 4. अमेरिका-ईरान समझौते से इजराइल चिंतित: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर इजराइल में चिंता बढ़ गई है। एक इजराइली अधिकारी ने कहा है कि इस समझौते से ईरान को यह मैसेज जाएगा कि वह होर्मुज का इस्तेमाल दबाव बनाने के हथियार की तरह कर सकता है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

फाल्टा चुनाव परिणाम 2026: फाल्टा सीट पर भाजपा उम्मीदवार देबांगशु पांडा की जीत के बाद बोले मोदी- ‘आने वाले समय पश्चिम बंगाल की…’

फाल्टा चुनाव परिणाम 2026: फाल्टा सीट पर भाजपा उम्मीदवार देबांगशु पांडा की जीत के बाद बोले मोदी- 'आने वाले समय पश्चिम बंगाल की...'

पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी की सौगात दी है। उन्होंने फाल्टा सीट से नवनिर्वाचित विधायक देबांशु पांडा को चुनाव में जीत के लिए बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि फाल्टा की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है! लोकतंत्र की जीत हुई है और धमाकियों की जीत हुई है। देबांशु पांडा को फाल्टा में रिकॉर्ड अंतर से जीत के लिए हार्दिक बधाई। यह भाजपा के प्रति पश्चिम बंगाल की जनता के प्रति आस्था को दर्शाता है। जनता पश्चिम बंगाल सरकार के सभी क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को देख रही है और इसलिए वे हमें और फैसले को आशीर्वाद देते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा विचारधारा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मेरी शुभकामनाएं। हम आने वाले समय में भी पश्चिम बंगाल की प्रगति के लिए काम करना चाहेंगे। पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार देबांगशु पांडा ने 1,09,021 वोटों से जीत की घोषणा की, जबकि पार्टी ने अपनी ज़मानत ज़ब्त करा ली। पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले, जबकि सी क्वेश्चन (एम) के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी 40,645 के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के प्रतियोगी अब्दुर रज्जाक 10,084 प्रतियोगियों के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि तेलंगाना कांग्रेस के प्रतियोगी जहांगीर खान 7,783 प्रतियोगियों के साथ चौथे स्थान पर हैं। कांग्रेस और यूक्रेनी कांग्रेस दोनों की ज़मानत ज़ब्त हो गई। फाल्टा में हुए पुनर्मतदान के नतीजे दो महीनों में अनोखे हैं। जनवरी 1988 में कैथोलिक कांग्रेस की स्थापना के बाद से इतिहास में पहली बार किसी पार्टी का चौथा स्थान मिला है। 2011 के बाद, जब 34 साल के वामपंथ के शासन का अंत हुआ और पारंपरिक कांग्रेस शासन की शुरुआत हुई, तो यह पहली बार है कि किसी भी पार्टी के उम्मीदवार की ज़मानत जब्त कर ली गई है। फाल्टा में पुनर्मतदान 21 मई को हुआ था। पांडा की जीत के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों पर भाजपा की कुल बढ़त अब 208 हो गई है। (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)फाल्टा(टी)देबांगशु पांडा(टी)पीएम मोदी(टी)फाल्टा सीट(टी)पीएम मोदी(टी)बीजेपी बंगाल(टी)बंगाल चुनाव(टी)फाल्टा चुनाव

Trump Calls Modi Great Friend, Says India Can Trust US 100%

Trump Calls Modi Great Friend, Says India Can Trust US 100%

वॉशिंगटन/नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक यह फोटो 13 फरवरी 2025 की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मुलाकात की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना महान दोस्त बताया और कहा कि वे मोदी के बहुत बड़े फैन हैं। ट्रम्प ने कहा कि भारत अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है। अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में ट्रम्प ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को फोन करके लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा- मुझे भारत से प्यार है। आपको (एम्बेसडर गोर) हमारे देश के प्रतिनिधि के तौर पर अच्छी स्पीच देनी होगी। मैं सबको गुड इवनिंग कहना चाहता हूं। मुझे प्रधानमंत्री से प्यार है। PM मोदी महान हैं, वह मेरे दोस्त हैं। मोदी को हैलो कहो। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं। ट्रम्प ने कहा- हम पहले कभी इंडिया के इतने करीब नहीं रहे। इंडिया मुझ पर और अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़ी, तो उन्हें पता है कि कहां कॉल करना है। वे यहीं कॉल करते हैं। ट्रम्प की तारीफ के कूटनीतिक मायने ट्रम्प ने मोदी को महान दोस्त और खुद को उनका बड़ा फैन बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील और टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है। QUAD, इंडो-पैसिफिक, रक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे मुद्दों पर भारत-अमेरिका सहयोग दोनों देशों के रिश्तों में अहम बना हुआ है। ट्रेड डील पर भी सकारात्मक संकेत ट्रम्प के इस बयान को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो पहले ही कह चुके हैं कि दोनों देशों के बीच जल्द व्यापार समझौता हो सकता है। ट्रम्प का ये कहना ‘भारत अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है’ निवेश, टेक्नोलॉजी और व्यापार सहयोग को लेकर भरोसे का संदेश माना जा रहा है। अमेरिका हाल के महीनों में कई भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ा चुका है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देश रक्षा, AI, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फरवरी में अमेरिका ने भारत पर लगाए 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया था। ट्रम्प पहले भी मोदी की तारीफ कर चुके सितंबर 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में ट्रम्प ने मोदी को भारत के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक बताया था। फरवरी 2020 में अहमदाबाद के ‘नमस्ते ट्रम्प’ कार्यक्रम में उन्होंने मोदी को टफ नेगोशिएटर और असाधारण नेता कहा था। 2024 के अमेरिकी चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि मोदी उनके बहुत अच्छे दोस्त हैं और भारत-अमेरिका रिश्ते उनके कार्यकाल में मजबूत हुए। अमेरिकी राजदूत बोले- ट्रम्प हमेशा मोदी के बारे में पूछते हैं भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प जब भी उनसे बात करते हैं, तो पीएम मोदी के बारे में जरूर पूछते हैं। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत भरोसे और साझा हितों पर आधारित हैं। गोर ने कहा कि दोनों देश अब ‘साझा सफलता के नए दौर’ में पहुंच चुके हैं। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हो गया है और जल्द इस पर साइन हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस साल अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर के निवेश लाने में मदद की है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द ट्रम्प ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें अमेरिका के इतिहास के सबसे महान विदेश मंत्रियों में याद किया जाएगा। भारत दौरे पर आए रूबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका के रिश्तों की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। दोनों देशों के बीच जल्द ट्रेड डील होगी। रूबियो का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब ट्रम्प की टैरिफ नीति को लेकर दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव बढ़ा है। अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देश ट्रेड डील को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो शनिवार को भारत पहुंचे थे। यह उनका अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद पहला आधिकारिक भारत दौरा है। जयशंकर बोले- भारत-अमेरिका के रिश्ते नई दिशा में बढ़ रहे भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प ने दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दी है। व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी, AI, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी और अहम हो गई है। भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं और इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ होना चाहिए। मार्को रूबियो 26 मई को होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी। ————————————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने PM मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया:विदेश मंत्री रूबियो दिल्ली में PM से मिले; अमेरिकी मीडिया बोली- यह डैमेज कंट्रोल की कोशिश अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेवा तीर्थ में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Petrol Rs 2.61, Diesel Rs 2.71 Costlier Amid Iran War Impact

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Hindi News Business Fuel Price Hike: Petrol Rs 2.61, Diesel Rs 2.71 Costlier Amid Iran War Impact नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 हो गई है। इस महीने चौथी बार बढ़ीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है। 2 दिन पहले 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किा गया था। इससे पहले 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं: 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती 2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया। तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है । पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10-10 घटाई थी इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें… पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही कर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business Fuel Price Hike: Petrol Rs 2.61, Diesel Rs 2.71 Costlier Amid Iran War Impact नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक तेल कंपनियों ने आज 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 हो गई है। इस महीने चौथी बार बढ़ीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है… 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा। 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था। 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। 1. पेट्रोल की नई कीमतें (चारों महानगरों में) शहर नए दाम (रुपए/लीटर) बढ़ोतरी (रुपए) दिल्ली 102.12 +2.61 कोलकाता 113.51 +2.87 मुंबई 111.21 +2.72 चेन्नई 107.77 +2.46 2. डीजल की नई कीमतें (चारों महानगरों में) शहर नए दाम (रुपए/लीटर) बढ़ोतरी (रुपए) दिल्ली 95.20 +2.71 कोलकाता 99.82 +2.80 मुंबई 97.83 +2.81 चेन्नई 99.55 +2.57 अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं: 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर डीलर्स को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती है। 2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया। तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है । पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10-10 घटाई थी इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें… पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही कर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Padma Awards 2026 Winners List Update; Rohit Sharma Alka Yagnik Dharmendra

Padma Awards 2026 Winners List Update; Rohit Sharma Alka Yagnik Dharmendra

Hindi News National Padma Awards 2026 Winners List Update; Rohit Sharma Alka Yagnik Dharmendra | Shibu Soren नई दिल्ली53 मिनट पहले कॉपी लिंक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सोमवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में 2026 के पहले पद्म अवॉर्ड्स देंगी। सरकार ने 25 जनवरी को 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नाम का ऐलान किया था। पहले फेज में 66 हस्तियां सम्मानित होंगी। बाकी विजेताओं को दूसरे चरण में सम्मानित किया जाएगा। सोमवार को हो रही सेरेमनी में राष्ट्रपति 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्म श्री पुरस्कार प्रदान करेंगी। एक्टर धर्मेंद्र और झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। बॉलीवुड सिंगर अलका याग्निक भी पद्म भूषण सम्मानित होंगी। एक्टर आर माधवन, क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और हॉकी प्लेयर सविता पूनिया को पद्मश्री दिया जाएगा। 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं में से 19 महिलाएं हैं। इनमें 6 विदेशी/NRI/PIO/OCI कैटेगरी के लोग भी हैं। 16 हस्तियां ऐसी हैं, जिन्हें मरणोपरांत पुरस्कार दिए जा रहे हैं। 5 हस्तियों को पद्म विभूषण दिवंगत एक्टर धर्मेंद्र, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केटी थॉमस, कम्युनिस्ट नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन समेत 5 हस्तियों को पद्म विभूषण अवॉर्ड की घोषणा की गई है। शिबू सोरेन-अलका याग्निक समेत 13 हस्तियों को पद्म भूषण मशहूर सिंगर अल्का याग्निक, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी समेत 13 हस्तियों को पद्म भूषण सम्मान दिया जाएगा। रोहित शर्मा-हरमनप्रीत समेत 113 हस्तियों को पद्मश्री एक्टर आर माधवन (माधवन रंगनाथन), क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी प्लेयर सविता पूनिया समेत 113 हस्तियों को पद्मश्री के लिए चुना गया है। पद्म अवार्ड्स से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शारदा सिन्हा समेत 7 को पद्म विभूषण; पंकज उधास, सुशील मोदी समेत 19 को पद्म भूषण पिछले साल शारदा सिन्हा, ओसामु सुजुकी समेत 7 हस्तियों को पद्म विभूषण सम्मान दिया गया था। वहीं पूर्व हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश, पंकज उधास और सुशील मोदी समेत 19 हस्तियों को पद्म भूषण के लिए चुना गया था। इनके अलावा, राजस्थान की लोक गायिका बतूल बेगम, दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा भटला समेत 113 हस्तियों को इस बार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘द वार्ड’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने मदरहुड, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, महिलाओं की मानसिक सेहत और परिवार के सपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां बनना सिर्फ खुशियों का सफर नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक बदलावों से भरा दौर भी होता है, जिस पर समाज में कम बात होती है। रुबीना ने यह भी कहा कि नई मांओं को सबसे ज्यादा समझ, सपोर्ट और सही काउंसिलिंग की जरूरत होती है, ताकि वे खुद को फिर से संभाल सकें। सवाल: ‘द वार्ड’ एक इमोशनल एक्सपेरिमेंट जैसा शो है। इस शो ने आपको कैसे प्रभावित किया? जवाब: मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मैंने इस शो को खुद अपनी जिंदगी में महसूस किया था। जब मैं मां बनी, तब मुझे एहसास हुआ कि मदरहुड सिर्फ खुशियां नहीं लाता, बल्कि इसके साथ शरीर, दिमाग और भावनाओं में बहुत बदलाव आते हैं। लेकिन इन बातों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मुझे हमेशा लगता था कि काश किसी ने मुझे पहले यह सब समझाया होता। इसी सोच के साथ मैंने चाहा कि एक ऐसी कम्युनिटी बने, जहां नई मांएं और प्रेग्नेंट महिलाएं खुलकर अपने अनुभव और परेशानियां साझा कर सकें। जब ‘द वार्ड’ शो आया, तो लगा कि यही वो मंच है जिसकी मैं कल्पना कर रही थी। हमने अलग-अलग महिलाओं को एक साथ लाकर उनकी कहानियां, संघर्ष और भावनाएं समझने की कोशिश की। तब महसूस हुआ कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग हो सकती है, लेकिन भावनाएं लगभग एक जैसी होती हैं। सवाल: भारत में मदरहुड और उसके त्याग को तो सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन मां बनने के बाद एक महिला की अपनी पहचान खो जाती है। इस शो में इस मुद्दे पर कैसे बात की गई? जवाब: हमने इस शो के जरिए यही समझाने की कोशिश की है कि बच्चा पैदा होने के बाद परिवार तो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा बदलाव एक नई मां की जिंदगी में आते हैं। उसे खुद को दोबारा पहचानने में समय लगता है। इसलिए हमने अलग-अलग शहरों और गांवों से आई महिलाओं की कहानियां सामने रखीं। किसी को परिवार का साथ मिला, तो किसी को नहीं मिला। अलग-अलग संस्कृतियों और परिवारों की सोच भी देखने को मिली। इन कहानियों के जरिए हमने यह दिखाने की कोशिश की कि महिलाओं को इस समय सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है और परिवार मिलकर उनका सहारा बन सकता है। सवाल: मदरहुड के दौरान महिलाओं को हर तरफ से सलाह मिलती है। आपने खुद इन सलाहों को कैसे संभाला? जवाब: मदरहुड में हर कोई आपको सलाह देता है और खुद को एक्सपर्ट समझता है। लेकिन मैंने यह सीखा कि हर महिला की जर्नी अलग होती है। मैंने सबकी बातें सुनीं, लेकिन वही किया जो मुझे और मेरे बच्चों के लिए सही लगा। मैं शो में आई महिलाओं से भी यही कहती थी कि खुद पर भरोसा करें। अपने मन की आवाज सुनें। आपका दिल आपको बता देगा कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत। हमारा मकसद हर महिला को इतना मजबूत बनाना था कि वह अपनी पहचान के साथ इस सफर को तय कर सके। सवाल: प्रेग्नेंसी में शारीरिक स्वास्थ्य पर तो बात होती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आपने इस पर कितना ध्यान दिया? जवाब: हमने इस बात पर बहुत ध्यान दिया। क्योंकि अगर कोई महिला मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे, तो उसके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर में बहुत बदलाव आते हैं, जिनका असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। अगर सही समय पर काउंसिलिंग और सपोर्ट न मिले, तो महिला पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी स्थिति में जा सकती है। पहले लोग इन बातों पर खुलकर चर्चा नहीं करते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ रही है। हमारा मकसद यही है कि महिलाएं अपने भावनात्मक बदलावों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर मदद लेने से न हिचकें। सवाल: आपने खुद पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना किया। उस दौर से कैसे बाहर निकलीं? जवाब: पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक ऐसा दौर है, जो हर महिला के लिए अलग होता है। यह कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक रह सकता है। इससे पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन अगर आपको इसकी जानकारी हो, तो इसे संभालना आसान हो जाता है। मेरी न्यूट्रिशनिस्ट ने मुझे पहले ही समझा दिया था कि बच्चे के जन्म के बाद अलग-अलग समय पर हार्मोनल बदलाव आएंगे। इसलिए मैंने खुद पर ध्यान देना शुरू किया। अगर मूड खराब हो रहा है, बिना वजह रोना आ रहा है या लोगों से बात करने का मन नहीं है, तो यह संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में मैंने छोटी-छोटी चीजें कीं, जैसे थोड़ी वॉक करना, स्ट्रेचिंग करना और खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करना। जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। सवाल: इस दौर में पति का सपोर्ट कितना जरूरी होता है? जवाब: पति का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। अगर आपका पार्टनर आपको समझने के बजाय लगातार शिकायत करे, तो महिला की परेशानी और बढ़ जाती है। पोस्टपार्टम के दौरान कई बार महिला मानसिक रूप से बहुत थकी हुई होती है। उसे अकेले समय की जरूरत होती है। अगर पति समझदारी दिखाए और महिला पर दबाव न डाले, तो वह इस दौर से बेहतर तरीके से बाहर निकल सकती है। सवाल: छोटे शहरों और गांवों में आज भी मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को लेकर जागरूकता कम है। वहां की महिलाओं और परिवारों से क्या कहना चाहेंगी? जवाब: हम इस शो के जरिए छोटे-छोटे कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे शो में गांवों और छोटे शहरों की महिलाएं भी आईं, जिन्होंने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं। आज भी कई लोग काउंसलर या थेरेपिस्ट के पास जाने को गलत मानते हैं, लेकिन हम यही कहना चाहते हैं कि अगर मदद की जरूरत हो, तो उसे लेने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे खुलकर अपनी बात कह सकें। सवाल: प्रेग्नेंसी में खान-पान को लेकर भी कई गलत धारणाएं होती हैं। इस पर

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘द वार्ड’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने मदरहुड, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, महिलाओं की मानसिक सेहत और परिवार के सपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां बनना सिर्फ खुशियों का सफर नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक बदलावों से भरा दौर भी होता है, जिस पर समाज में कम बात होती है। रुबीना ने यह भी कहा कि नई मांओं को सबसे ज्यादा समझ, सपोर्ट और सही काउंसिलिंग की जरूरत होती है, ताकि वे खुद को फिर से संभाल सकें। सवाल: ‘द वार्ड’ एक इमोशनल एक्सपेरिमेंट जैसा शो है। इस शो ने आपको कैसे प्रभावित किया? जवाब: मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मैंने इस शो को खुद अपनी जिंदगी में महसूस किया था। जब मैं मां बनी, तब मुझे एहसास हुआ कि मदरहुड सिर्फ खुशियां नहीं लाता, बल्कि इसके साथ शरीर, दिमाग और भावनाओं में बहुत बदलाव आते हैं। लेकिन इन बातों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मुझे हमेशा लगता था कि काश किसी ने मुझे पहले यह सब समझाया होता। इसी सोच के साथ मैंने चाहा कि एक ऐसी कम्युनिटी बने, जहां नई मांएं और प्रेग्नेंट महिलाएं खुलकर अपने अनुभव और परेशानियां साझा कर सकें। जब ‘द वार्ड’ शो आया, तो लगा कि यही वो मंच है जिसकी मैं कल्पना कर रही थी। हमने अलग-अलग महिलाओं को एक साथ लाकर उनकी कहानियां, संघर्ष और भावनाएं समझने की कोशिश की। तब महसूस हुआ कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग हो सकती है, लेकिन भावनाएं लगभग एक जैसी होती हैं। सवाल: भारत में मदरहुड और उसके त्याग को तो सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन मां बनने के बाद एक महिला की अपनी पहचान खो जाती है। इस शो में इस मुद्दे पर कैसे बात की गई? जवाब: हमने इस शो के जरिए यही समझाने की कोशिश की है कि बच्चा पैदा होने के बाद परिवार तो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा बदलाव एक नई मां की जिंदगी में आते हैं। उसे खुद को दोबारा पहचानने में समय लगता है। इसलिए हमने अलग-अलग शहरों और गांवों से आई महिलाओं की कहानियां सामने रखीं। किसी को परिवार का साथ मिला, तो किसी को नहीं मिला। अलग-अलग संस्कृतियों और परिवारों की सोच भी देखने को मिली। इन कहानियों के जरिए हमने यह दिखाने की कोशिश की कि महिलाओं को इस समय सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है और परिवार मिलकर उनका सहारा बन सकता है। सवाल: मदरहुड के दौरान महिलाओं को हर तरफ से सलाह मिलती है। आपने खुद इन सलाहों को कैसे संभाला? जवाब: मदरहुड में हर कोई आपको सलाह देता है और खुद को एक्सपर्ट समझता है। लेकिन मैंने यह सीखा कि हर महिला की जर्नी अलग होती है। मैंने सबकी बातें सुनीं, लेकिन वही किया जो मुझे और मेरे बच्चों के लिए सही लगा। मैं शो में आई महिलाओं से भी यही कहती थी कि खुद पर भरोसा करें। अपने मन की आवाज सुनें। आपका दिल आपको बता देगा कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत। हमारा मकसद हर महिला को इतना मजबूत बनाना था कि वह अपनी पहचान के साथ इस सफर को तय कर सके। सवाल: प्रेग्नेंसी में शारीरिक स्वास्थ्य पर तो बात होती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आपने इस पर कितना ध्यान दिया? जवाब: हमने इस बात पर बहुत ध्यान दिया। क्योंकि अगर कोई महिला मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे, तो उसके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर में बहुत बदलाव आते हैं, जिनका असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। अगर सही समय पर काउंसिलिंग और सपोर्ट न मिले, तो महिला पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी स्थिति में जा सकती है। पहले लोग इन बातों पर खुलकर चर्चा नहीं करते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ रही है। हमारा मकसद यही है कि महिलाएं अपने भावनात्मक बदलावों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर मदद लेने से न हिचकें। सवाल: आपने खुद पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना किया। उस दौर से कैसे बाहर निकलीं? जवाब: पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक ऐसा दौर है, जो हर महिला के लिए अलग होता है। यह कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक रह सकता है। इससे पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन अगर आपको इसकी जानकारी हो, तो इसे संभालना आसान हो जाता है। मेरी न्यूट्रिशनिस्ट ने मुझे पहले ही समझा दिया था कि बच्चे के जन्म के बाद अलग-अलग समय पर हार्मोनल बदलाव आएंगे। इसलिए मैंने खुद पर ध्यान देना शुरू किया। अगर मूड खराब हो रहा है, बिना वजह रोना आ रहा है या लोगों से बात करने का मन नहीं है, तो यह संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में मैंने छोटी-छोटी चीजें कीं, जैसे थोड़ी वॉक करना, स्ट्रेचिंग करना और खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करना। जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। सवाल: इस दौर में पति का सपोर्ट कितना जरूरी होता है? जवाब: पति का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। अगर आपका पार्टनर आपको समझने के बजाय लगातार शिकायत करे, तो महिला की परेशानी और बढ़ जाती है। पोस्टपार्टम के दौरान कई बार महिला मानसिक रूप से बहुत थकी हुई होती है। उसे अकेले समय की जरूरत होती है। अगर पति समझदारी दिखाए और महिला पर दबाव न डाले, तो वह इस दौर से बेहतर तरीके से बाहर निकल सकती है। सवाल: छोटे शहरों और गांवों में आज भी मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को लेकर जागरूकता कम है। वहां की महिलाओं और परिवारों से क्या कहना चाहेंगी? जवाब: हम इस शो के जरिए छोटे-छोटे कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे शो में गांवों और छोटे शहरों की महिलाएं भी आईं, जिन्होंने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं। आज भी कई लोग काउंसलर या थेरेपिस्ट के पास जाने को गलत मानते हैं, लेकिन हम यही कहना चाहते हैं कि अगर मदद की जरूरत हो, तो उसे लेने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे खुलकर अपनी बात कह सकें। सवाल: प्रेग्नेंसी में खान-पान को लेकर भी कई गलत धारणाएं होती हैं। इस पर