Thursday, 09 Jul 2026 | 06:55 PM

Trending :

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ एक्टर राजेश शर्मा बीमार, तेलंगाना CM से जांच की मांग:एक्टर गंभीर हालत में भर्ती; वर्कर्स एसोसिएशन ने पूछा- तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया एक्टर राजेश शर्मा बीमार, तेलंगाना CM से जांच की मांग:एक्टर गंभीर हालत में भर्ती; वर्कर्स एसोसिएशन ने पूछा- तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया MP Girls Rise in Higher Education जाह्नवी कपूर की मेहंदी में दिखा बॉयफ्रेंड का नाम:निकनेम 'शिखु' ने खींचा ध्यान, अंशुला के वेडिंग रिसेप्शन में ढोल भी बजाया जाह्नवी कपूर की मेहंदी में दिखा बॉयफ्रेंड का नाम:निकनेम 'शिखु' ने खींचा ध्यान, अंशुला के वेडिंग रिसेप्शन में ढोल भी बजाया
EXCLUSIVE

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

आयुर्वेद की प्रसिद्ध अवधारणा ‘दिनचर्या’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी आधुनिक जीवनशैली से पहले थी। तय समय पर जागना, सही वक्त पर खाना, कसरत, पूरी नींद और खान-पान में संयम इसका मूल मंत्र है। विज्ञान भी अब इन आदतों को सही मानता है, बस भाषा अलग है। मसलन सर्केडियन साइकल, मेटाबॉलिज्म और बिहेवियरल साइंस। इसी वैज्ञानिक सोच पर टिके आधुनिक आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा के संस्थापक और सीईओ अमीव शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए मुख्य अंश: आपके नजरिए से विज्ञान आधारित आयुर्वेद क्या है? आज लोग लंबा जी तो रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे स्वस्थ भी हों। यहीं आयुर्वेद की सबसे बड़ी भूमिका है। लेकिन आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प मानना गलत होगा। गंभीर संक्रमण, हार्ट अटैक, कैंसर, ट्रॉमा जैसे हालात में एविडेंस-बेस्ड इलाज ही जरूरी है। इसका सही रास्ता है इंटीग्रेशन। आधुनिक चिकित्सा डायग्नोसिस (जांच) और इमरजेंसी केयर में आगे है, जबकि आयुर्वेद लाइफस्टाइल गाइडेंस और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है। यही वजह है कि लाइफ क्वालिटी सुधारने के लिए अब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ अपना रही है। आयुर्वेदिक ब्रांड्स को मिले-जुले रिस्पॉन्स के बीच कपिवा अपनी जगह कैसे बना रहा है? कपिवा नाम तीन आयुर्वेदिक दोष- कफ, पित्त और वात से बना है। पिछले पांच दशकों में कोई बड़ा आयुर्वेदिक ब्रांड नहीं उभरा। 2016 में शुरू हुई कपिवा आज सालाना ~500 करोड़ का टर्नओवर पार कर चुका है। इसमें से 70% कारोबार रिपीट ग्राहकों से आता है। अब कंपनी के प्रोडक्ट्स देश के 400 से ज्यादा शहरों में एक लाख से अधिक स्टोर्स में उपलब्ध हैं। ये डायबिटीज के मरीजों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। कंपनी अपनी एप ‘कपिवा डॉट इन’ के अलावा अमेजन जैसी साइट्स पर भी सप्लीमेंट सेगमेंट में अग्रणी है। कपिवा एम्स जैसे संस्थानों में डॉक्टरों के साथ भी काम करता है। यही नहीं, चीन में भी हर तीन में से एक प्रिस्क्रिप्शन में आयुर्वेदिक दवा शामिल होती है। ऐसा यूं ही नहीं है। कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन एम फार्म और पीएचडी हैं। आयुर्वेद को लेकर आप जागरूकता कैसे बढ़ा रहे हैं? अब तक ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत रही है। पिछले 10 वर्षों में कंपनी हर महीने करीब पांच लाख लोगों तक पहुंच रही है। अब हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी गंभीरता से फोकस कर रहे हैं। विज्ञान की आधुनिक दुनिया में आयुर्वेद एलोपैथी से कैसे मुकाबला करेगा? इस मामले में इंटीग्रेशन की जरूरत है। आयुर्वेद के लिए वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है। सिर्फ पुराना होने से कोई भी नुस्खा कारगर नहीं हो जाता। कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मुलेशन की सुरक्षा, सही खुराक और असर साबित करने के लिए सख्त क्लीनिकल ट्रायल जरूरी है। इस दिशा में रिसर्च बढ़ रही है। सबसे असरदार तरीकों को व्यापक स्वीकृति मिल रही है। हेल्दी एजिंग, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, स्ट्रेस रिडक्शन और सस्टेनेबल लिविंग आज दुनियाभर की प्राथमिकताएं बन चुकी हैं। यही वे क्षेत्र हैं, जहां आयुर्वेद का योगदान मायने रखता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
उमरिया में मौसम बदला, फसलों पर संकट:चना, सरसों और आम की बौर प्रभावित, किसानों की चिंता बढ़ी

February 21, 2026/
9:42 am

उमरिया जिले में मौसम ने अचानक करवट ली है। लगातार बादल छाए रहने से रबी फसलों पर प्रतिकूल असर पड़...

छवि अपलोड की गई

June 8, 2026/
7:05 pm

केरल में शिगेला संक्रमण: केरल में एक बार फिर स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कोज़ोकोड में शिगेला संक्रमण...

बसी रोटी चीला रेसिपी: रात की बिकती है बासी रोटी से खास टेस्टी चीला, मिनटों में तैयार होगा क्रिस्पी ब्रेकफास्ट, नोट करें रेसिपी

April 10, 2026/
12:42 pm

10 अप्रैल 2026 को 12:42 IST पर अपडेट किया गया बस्सी रोटी चीला रेसिपी: आपके घर में रात के खाने...

Gold & Silver Prices Surge in India

April 15, 2026/
12:40 pm

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 15 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स...

टीईटी के विरोध में जौरा में शिक्षकों का प्रदर्शन:शिक्षकों ने रैली निकाली, बोले– अयोग्य ठहराना अनुचित; आंदोलन तेज करने की चेतावनी

April 11, 2026/
9:31 pm

मुरैना के जौरा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में शनिवार को शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला।...

शिवपुरी पुलिस ने 10.50 लाख का ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद किया:चोरी के आरोप में एक आरोपी गिरफ्तार, खेत में छुपा हुआ था तभी पहुंची पुलिस

April 7, 2026/
8:27 pm

शिवपुरी जिले की सिरसौद थाना पुलिस ने ट्रॉली चोरी के एक मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी:लाइफ क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए भारत ही नहीं, अब दुनियाभर में अपनाया जा रहा ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’

आयुर्वेद की प्रसिद्ध अवधारणा ‘दिनचर्या’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी आधुनिक जीवनशैली से पहले थी। तय समय पर जागना, सही वक्त पर खाना, कसरत, पूरी नींद और खान-पान में संयम इसका मूल मंत्र है। विज्ञान भी अब इन आदतों को सही मानता है, बस भाषा अलग है। मसलन सर्केडियन साइकल, मेटाबॉलिज्म और बिहेवियरल साइंस। इसी वैज्ञानिक सोच पर टिके आधुनिक आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा के संस्थापक और सीईओ अमीव शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए मुख्य अंश: आपके नजरिए से विज्ञान आधारित आयुर्वेद क्या है? आज लोग लंबा जी तो रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वे स्वस्थ भी हों। यहीं आयुर्वेद की सबसे बड़ी भूमिका है। लेकिन आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प मानना गलत होगा। गंभीर संक्रमण, हार्ट अटैक, कैंसर, ट्रॉमा जैसे हालात में एविडेंस-बेस्ड इलाज ही जरूरी है। इसका सही रास्ता है इंटीग्रेशन। आधुनिक चिकित्सा डायग्नोसिस (जांच) और इमरजेंसी केयर में आगे है, जबकि आयुर्वेद लाइफस्टाइल गाइडेंस और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है। यही वजह है कि लाइफ क्वालिटी सुधारने के लिए अब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया ‘साइंटिफिक-आयुर्वेद’ अपना रही है। आयुर्वेदिक ब्रांड्स को मिले-जुले रिस्पॉन्स के बीच कपिवा अपनी जगह कैसे बना रहा है? कपिवा नाम तीन आयुर्वेदिक दोष- कफ, पित्त और वात से बना है। पिछले पांच दशकों में कोई बड़ा आयुर्वेदिक ब्रांड नहीं उभरा। 2016 में शुरू हुई कपिवा आज सालाना ~500 करोड़ का टर्नओवर पार कर चुका है। इसमें से 70% कारोबार रिपीट ग्राहकों से आता है। अब कंपनी के प्रोडक्ट्स देश के 400 से ज्यादा शहरों में एक लाख से अधिक स्टोर्स में उपलब्ध हैं। ये डायबिटीज के मरीजों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। कंपनी अपनी एप ‘कपिवा डॉट इन’ के अलावा अमेजन जैसी साइट्स पर भी सप्लीमेंट सेगमेंट में अग्रणी है। कपिवा एम्स जैसे संस्थानों में डॉक्टरों के साथ भी काम करता है। यही नहीं, चीन में भी हर तीन में से एक प्रिस्क्रिप्शन में आयुर्वेदिक दवा शामिल होती है। ऐसा यूं ही नहीं है। कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन एम फार्म और पीएचडी हैं। आयुर्वेद को लेकर आप जागरूकता कैसे बढ़ा रहे हैं? अब तक ‘वर्ड ऑफ माउथ’ ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत रही है। पिछले 10 वर्षों में कंपनी हर महीने करीब पांच लाख लोगों तक पहुंच रही है। अब हम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी गंभीरता से फोकस कर रहे हैं। विज्ञान की आधुनिक दुनिया में आयुर्वेद एलोपैथी से कैसे मुकाबला करेगा? इस मामले में इंटीग्रेशन की जरूरत है। आयुर्वेद के लिए वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है। सिर्फ पुराना होने से कोई भी नुस्खा कारगर नहीं हो जाता। कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और फॉर्मुलेशन की सुरक्षा, सही खुराक और असर साबित करने के लिए सख्त क्लीनिकल ट्रायल जरूरी है। इस दिशा में रिसर्च बढ़ रही है। सबसे असरदार तरीकों को व्यापक स्वीकृति मिल रही है। हेल्दी एजिंग, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, स्ट्रेस रिडक्शन और सस्टेनेबल लिविंग आज दुनियाभर की प्राथमिकताएं बन चुकी हैं। यही वे क्षेत्र हैं, जहां आयुर्वेद का योगदान मायने रखता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.