Trump Wants World Kneel; Dictatorship Pushing World Back: Israeli Historian

11 मिनट पहले कॉपी लिंक चर्चित इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू से बड़ा इजराइली राष्ट्रवाद का दुश्मन कोई नहीं रहा। उन्होंने देश को अंदर से बांट दिया और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर हमेशा ताकतवर के सामने घुटने टेक दे, तभी शांति बनी रहेगी। यह अनैतिक और मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इससे हर देश अपनी ऊर्जा सिर्फ हथियारों पर खर्च करेगा। हरारी ने कहा कि दुनिया ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राजनीति कि ओर तेजी से बढ़ रही है। इसकी राजनीति करने वालों का मानना है कि दुनिया एक दूसरी की मदद करने से नहीं बल्कि ताकत और दबदबे से चलती है। लेकिन यह सोच इंसानी सभ्यता और दुनिया को पीछे धकेल रही है। युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं। हरारी बोले- सहयोग से ही दुनिया की तरक्की हुई युवाल नोआ हरारी ने कहा कि उनकी सबसे चर्चित किताबें, जैसे सेपियंस और होमोडेयस को ध्यान से देखें तो एक बड़े विचार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। सहयोग यानी कोऑपरेशन। हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत यही है कि वे बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक मिलकर काम कर सकते हैं। यही वह चीज है जिसने इंसानों को कमजोर जीव से दुनिया की सबसे प्रभावशाली प्रजाति बना दिया। अकेला इंसान न तो शेर से लड़ सकता है और न भालू से, लेकिन करोड़ों लोग मिलकर समाज, देश, कानून, बाजार और तकनीक बना सकते हैं। युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस। हरारी बोले- ताकत ही सबकुछ होता तो हम आज भी शिकारी होते हरारी का मानना है कि अगर केवल ताकत ही सब कुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जी रहे होते। मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि इंसान लड़ सकता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़ी संख्या में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकता है। हरारी के मुताबिक सिर्फ डर या हिंसा के दम पर बड़ी सभ्यताएं नहीं चल सकतीं। किसी भी बड़े समाज को चलाने के लिए साझा विश्वास और सहयोग जरूरी होता है। लेकिन ट्रम्पवाद और राष्ट्रवादी सोच इस मामले में अलग राय रखती है। उनका मानना है कि देशों के बीच सहयोग तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों के पास अपनी मजबूत राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हो। उनके मुताबिक किसी देश को मजबूत बनाने के लिए लोगों का एक जैसी सोच और पहचान से जुड़ा होना जरूरी है। कई बार इसके लिए सख्त सत्ता और मजबूत नेतृत्व की भी जरूरत पड़ती है। हरारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प सहयोग में विश्वास नहीं रखते, वे सिर्फ सैन्य ताकत से कमजोर देशों पर दबादबा बनाना चाहते है। हरारी बोले- राष्ट्रवाद को नफरत से बचाना जरूरी है हरारी का कहना है कि राष्ट्रवाद मानव इतिहास की सबसे सफल और सकारात्मक कहानियों में से एक रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद का असली मतलब दूसरे लोगों से नफरत करना नहीं, बल्कि उन लाखों अनजान लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्र कोई परिवार नहीं होता और न ही छोटा कबीला। छोटे कबीलों में लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। लेकिन राष्ट्र अलग चीज है। भारत, चीन या इजराइल जैसे देशों में करोड़ों लोग रहते हैं और कोई भी व्यक्ति उनमें से ज्यादातर लोगों को नहीं जानता। फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को इस हद तक जोड़ देता है कि वे टैक्स देते हैं ताकि दूसरे नागरिकों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जरूरत पड़ने पर लोग देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। हरारी मानते हैं कि कई बार राष्ट्रवाद नफरत की तरफ भी मुड़ जाता है, लेकिन यह उसकी मूल पहचान नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रवाद बिना बाहरी लोगों से नफरत किए भी मौजूद रह सकता है, लेकिन अपने लोगों के लिए अपनापन और प्रेम के बिना नहीं। हरारी कहते हैं कि आज जो लोग खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, उनमें से कई राष्ट्र के भीतर ही नफरत फैला रहे हैं। वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही समाज को बांट रहे हैं। इजराइल का उदाहरण देते हुए हरारी कहते हैं कि देश के इतिहास में शायद ही किसी नेता ने समाज को उतना बांटा हो जितना बेंजामिन नेतन्याहू ने। युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है। दुनिया ताकत के नियम पर चले तो बर्बाद हो जाएगी हरारी ने ट्रम्पवादी सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह दुनिया को ताकत और दबदबे के नजरिए से देखती है। इस सोच के मुताबिक दुनिया में शांति तभी हो सकती है जब कमजोर देश मजबूत देशों की मांग मान लें। वे उदाहरण देते हैं कि अगर अमेरिका, ग्रीनलैंड मांगता है, तो डेनमार्क को अमेरिकी ताकत से डरकर उसे सौंप देना चाहिए। अगर डेनमार्क इनकार करे और संघर्ष हो जाए, तो इस सोच के मुताबिक गलती डेनमार्क की मानी जाएगी, क्योंकि उसने ताकतवर देश की बात नहीं मानी। हरारी कहते हैं कि यह सोच गंभीर समस्या पैदा करती है। अगर दुनिया केवल ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दौड़ में लग जाएगा। फिर सभी देशों को अपनी अर्थव्यवस्था और संसाधनों का बड़ा हिस्सा सेना और हथियारों पर खर्च करना पड़ेगा। हरारी ने AI को सबसे बड़ा खतरा बताया इसी बीच हरारी ने AI को आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बम सिर्फ एक हथियार है, लेकिन AI खुद फैसले लेने की क्षमता रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की तरह प्यार और भावनाएं दिखाना सीख रहा है, जबकि वह असली भावनाओं को समझता नहीं। आने
खालिस्तान समर्थक ने भारतीय उच्चायुक्त का काफिला रोका:गाड़ी के सामने तिरंगा फाड़ा, पैरों से रौंदने की कोशिश; कनाडा पुलिस ने खदेड़ा

कनाडा में एक बार फिर खालिस्तान समर्थकों ने भारत विरोधी हरकत की है। प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े खालिस्तानी कार्यकर्ता इंदरजीत सिंह गोसल ने कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक का काफिला रोक दिया। इतना ही नहीं, खालिस्तानी समर्थक ने पुलिस घेरा तोड़कर उनके सामने भारतीय तिरंगे को फाड़ दिया और उसे पैरों तले रौंदने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए। साथ ही उसने आरोप लगाया कि पटनायक ने उसकी हत्या की सुपारी दी है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें खालिस्तानी समर्थक की पूरी हरकत दिख रही है। इस घटना के बाद कनाडा सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वैंकूवर में घटना, कार्यक्रम में जा रहे थे उच्चायुक्त यह घटना 26 मई को तब हुई जब वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक काफिला के साथ एक कार्यक्रम में जा रहे थे। उनके कार्यक्रम की जानकारी खालिस्तानियों को पहले से थी, इसलिए वे प्रदर्शन करने के लिए पहले ही जमा हो गए थे। जैसे ही उन्होंने उच्चायुक्त के काफिले को देखा तो इनमें से एक इंदरजीत सिंह गोसल सुरक्षा घेरा तोड़कर गाड़ियों के सामने आ गया। भारत विरोधी नारेबाजी की गई उच्चायुक्त पटनायक की गाड़ी के सामने खड़े होकर गोसल ने भारतीय ध्वज को फाड़ दिया और उसे पैरों तले रौंदने की कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद भीड़ ने भारतीय आतंकवादी वापस जाओ के भड़काऊ नारे लगाए। प्रदर्शनकारी लगातार हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मुद्दा उठा रहे थे और चिल्ला रहे थे कि निज्जर को किसने मारा? भारतीय सरकार ने। गोसल ने उच्चायुक्त पर सुपारी देने का आरोप लगाया इंदरजीत सिंह गोसल वही शख्स है जिसे कनाडाई पुलिस ने हाल ही में थ्रेट टू लाइफ के तहत गवाह सुरक्षा की पेशकश की थी। तिरंगा फाड़ने के बाद अपने कृत्य को सही ठहराते हुए गोसल ने एक गंभीर आरोप लगाया। उसने कहा कि उसने भारतीय झंडा इसलिए फाड़ा क्योंकि पटनायक ने उसे जान से मारने के लिए किसी को 50,000 डॉलर की सुपारी दी थी। कनाडाई सरकार का कोई रिएक्शन नहीं इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारतीय समुदाय और राजनयिक हलकों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक देश के शीर्ष राजनयिक को कनाडाई धरती पर न्यूनतम सुरक्षा भी क्यों नहीं मिल पा रही है? कनाडाई पुलिस की मौजूदगी में एक चरमपंथी सुरक्षा घेरा तोड़कर उच्चायुक्त की गाड़ी तक कैसे पहुंच गया? उच्चायुक्त के इंटरव्यू पर मचा बवाल मंगलवार को ही कनाडा के एक मीडिया प्लेटफॉर्म द ग्लोब एंड मेल ने एक कथित इंटरव्यू पब्लिश किया, जिसमें दावा किया गया कि भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडा सरकार को चैलेंज किया है। इसमें कहा गया कि पटनायक ने कनाडाई धरती पर अपराधों में भारत सरकार की संलिप्तता के दावों को खारिज किया। साथ ही उन्होंने निज्जर केस से जुड़े आरोपों को कोरी कल्पना करार देते हुए कहा कि कनाडा की खुफिया एजेंसी खालिस्तानी अलगाववादियों के प्रभाव में आ चुकी है। पटनायक ने आरोप लगाया कि कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) के कुछ हिस्से कनाडा से काम कर रहे खालिस्तानी अलगाववादी समूहों के प्रभाव में हैं। हालांकि, बाद में उच्चायुक्त ने आर्टिकल के ये दावे खारिज कर दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- आज ‘ग्लोब एंड मेल’ के लेख में लगाए गए आरोपों से मैं निराश हूं। भारत ने कनाडा की कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ, खासकर पिछले एक साल में, बहुत अच्छा सहयोग बनाया है। हमें कनाडा की संस्थाओं पर पूरा भरोसा है और हम इन भ्रामक आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। कनाडा सरकार ने पलटवार किया कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगारी ने भारतीय दूत के दावों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि CSIS के कॉम्प्रोमाइज्ड होने का दावा झूठा है और यह कनाडाई सुरक्षाकर्मियों के काम को कमतर आंकता है। सिख फॉर जस्टिस और इसके समर्थक गोसल के बारे में जानिए… गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बनाया संगठन सिख फॉर जस्टिस अमेरिका आधारित एक चरमपंथी और अलगाववादी संगठन है, जो भारत के पंजाब राज्य को अलग कर खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र देश बनाने की वकालत करता है। भारत सरकार ने इसे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा मानते हुए एक गैरकानूनी और आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। इस संगठन की शुरुआत वर्ष 2009 में अमेरिका में हुई थी। इसका मुख्य संचालक गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जो पेशे से वकील है और अमेरिका-कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है। भारत सरकार ने पन्नू को व्यक्तिगत रूप से भी आतंकवादी घोषित किया हुआ है। यह संगठन कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में बसे सिख प्रवासियों के बीच कथित खालिस्तान के समर्थन के लिए गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह कराता रहता है। हालांकि, इन आयोजनों की कोई कानूनी या कूटनीतिक मान्यता नहीं होती। SFJ सोशल मीडिया से पंजाब के युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने का प्रयास करता है। खालिस्तान समर्थक है इंदरजीत सिंह गोसल इंदरजीत सिंह गोसल कनाडा में सक्रिय एक प्रमुख खालिस्तान समर्थक और चरमपंथी है। वह भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन SFJ का मुख्य कनाडाई समन्वयक और आयोजक है। उसे घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का बेहद करीबी और राइट हैंड माना जाता है। जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, गोसल ने कनाडा में SFJ के संचालन और कमान की मुख्य जिम्मेदारी संभाली। वह कनाडा में कथित खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित कराने का मुख्य चेहरा बन गया। वह पन्नू के निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) के रूप में भी काम कर चुका है। नवंबर 2024 में कनाडा के ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं पर हुए हिंसक हमले और विरोध प्रदर्शनों में गोसल मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था। कनाडाई पुलिस (पील रीजनल पुलिस) ने हिंदू-कनाडाई नागरिकों को डराने-धमकाने और हिंसा फैलाने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में वह शर्तों पर रिहा हो गया। सितंबर 2025 में ओंटारियो पुलिस ने गोसल को उसके साथियों के साथ बिना लाइसेंस के अवैध हथियार रखने के आरोप में दोबारा गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के ठीक बाद
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बीच सिद्धारमैया की पहली प्रतिक्रिया: नेहरू की सराहना, इस्तीफे पर चुप | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 12:09 IST सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक में जल्द ही एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिसमें सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बाहर निकलते ही सिद्धारमैया ने कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के आसार के रूप में नेहरू की प्रशंसा की कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के मजबूत संकेतों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को अपने इस्तीफे की खबरों पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि वह इस मुद्दे पर “कल” बोलेंगे। संभावित सत्ता परिवर्तन पर अटकलें तेज होने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए, सिद्धारमैया ने इसके बजाय भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा की, उन्होंने कहा कि नेहरू ने ऐसी योजनाएं पेश कीं जिन्होंने देश को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने में मदद की। सूत्रों ने संकेत दिया कि कर्नाटक में जल्द ही एक बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखा जा सकता है, जिसमें सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया के 28 मई को पद छोड़ने की उम्मीद है और बाद में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर व्यापक संतुलन अभ्यास के हिस्से के रूप में राज्यसभा में भेजा जा सकता है। कथित तौर पर कांग्रेस नेतृत्व राज्य में जाति और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने के लिए कई उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर भी विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में दलित, अल्पसंख्यक, लिंगायत और ओबीसी समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं, हालांकि चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। कथित तौर पर सिद्धारमैया को प्रमुख मंत्रियों के चयन और कर्नाटक के भविष्य के राजनीतिक ढांचे को आकार देने में भूमिका का आश्वासन दिया गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बीच सिद्धारमैया की पहली प्रतिक्रिया: नेहरू की सराहना, इस्तीफे पर चुप अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री(टी)कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक(टी)कर्नाटक राजनीतिक परिवर्तन(टी)उपमुख्यमंत्री कर्नाटक(टी)जाति संतुलन कांग्रेस(टी)राज्यसभा कदम
Gukesh Loses Norway Chess; Wesley So Claims Victory

स्पोर्ट्स डेस्क5 मिनट पहले कॉपी लिंक नॉर्वे चेस टूर्नामेंट मंगलवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए मिलाजुला रहा। वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश और आर प्रज्ञानानंदा को राउंड-2 में मजबूत स्थिति में आने के बाद हार झेलनी पड़ी। जबकि, महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने शानदार जीत दर्ज की। राउंड-2 के बाद अलीरेजा फिरोजा 6 अंक के साथ ओपन कैटेगरी के टॉप पर हैं, जबकि गुकेश और वेस्ली सो 2.5 अंक के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर हैं। महिला वर्ग में बिबिसारा असाउबायेवा 4.5 अंक के साथ पहले स्थान पर हैं। गुकेश बढ़त के बावजूद हारे डी गुकेश ने अमेरिका के वेस्ली सो के खिलाफ क्लासिकल मुकाबले में लंबे समय तक दबाव बनाए रखा। 116 चालों तक चले मुकाबले में वे जीत के करीब दिखे, लेकिन मुकाबला ड्रॉ हो गया। इसके बाद निर्णायक गेम में वेस्ली सो ने उन्हें हरा दिया। मैच के बाद वेस्ली सो ने कहा कि गुकेश का गेम उनकी रैंकिंग जैसा नहीं दिखा। गुकेश और वेस्ली सो 2.5 अंक के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। प्रज्ञानानंदा को फिरोजा ने हराया दूसरी ओर आर प्रज्ञानानंदा को फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने हराया। शुरुआत में प्रज्ञानानंदा बेहतर स्थिति में थे, लेकिन फिरोजा ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। लगातार दूसरी जीत के साथ फिरोजा अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। प्रज्ञानानंदा को फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने मात दी। फिरोजा टॉप पर हैं। कीमर ने कार्लसन को कड़ी टक्कर दी डिफेंडिंग चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी जर्मनी के विंसेंट कीमर ने कड़ी टक्कर दी। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद कार्लसन ने आर्मगेडन में जीत हासिल की। विंसेंट कीमर ने कार्लसन को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, कार्लसन ने आर्मगेडन मैच में जीत हासिल की। दिव्या देशमुख ने हम्पी को मात दी महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने अनुभवी कोनेरू हम्पी को आर्मगेडन में हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वह संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या ने कहा कि उन्हें नॉर्वे चेस के आर्मगेडन मुकाबले और कन्फेशन रूम का अनुभव काफी पसंद आ रहा है। कन्फेशन रूम में खिलाड़ी मैच के दौरान अपने विचार दर्शकों के साथ साझा करते हैं। ——————————————— स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फ्रेंच ओपन- कार एक्सीडेंट के बावजूद जीतीं कोको गॉफ फ्रेंच ओपन में खिताब बचाने उतरीं अमेरिकी टेनिस स्टार कोको गॉफ मंगलवार को एक छोटे कार हादसे का शिकार हो गईं। हालांकि, उन्हें चोट नहीं आई और वे मैच जीतकर दूसरे दौर में पहुंच गईं। 22 साल की गॉफ ने बताया कि रोलां गैरों पहुंचने के दौरान उनकी कार पोल से टकरा गई और क्षतिग्रस्त हो गई। उन्हें टैक्सी से स्टेडियम पहुंचना पड़ा। गाफ ने अपने ही देश की टेलर टाउनसेंड को 6-4, 6-0 से हराया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gukesh Loses Norway Chess; Wesley So Claims Victory

स्पोर्ट्स डेस्क22 मिनट पहले कॉपी लिंक नॉर्वे चेस टूर्नामेंट मंगलवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए मिलाजुला रहा। वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश और आर प्रज्ञानानंदा को राउंड-2 में मजबूत स्थिति में आने के बाद हार झेलनी पड़ी। जबकि, महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने शानदार जीत दर्ज की। राउंड-2 के बाद अलीरेजा फिरोजा 6 अंक के साथ ओपन कैटेगरी के टॉप पर हैं, जबकि गुकेश और वेस्ली सो 2.5 अंक के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर हैं। महिला वर्ग में बिबिसारा असाउबायेवा 4.5 अंक के साथ पहले स्थान पर हैं। गुकेश बढ़त के बावजूद हारे डी गुकेश ने अमेरिका के वेस्ली सो के खिलाफ क्लासिकल मुकाबले में लंबे समय तक दबाव बनाए रखा। 116 चालों तक चले मुकाबले में वे जीत के करीब दिखे, लेकिन मुकाबला ड्रॉ हो गया। इसके बाद निर्णायक गेम में वेस्ली सो ने उन्हें हरा दिया। मैच के बाद वेस्ली सो ने कहा कि गुकेश का गेम उनकी रैंकिंग जैसा नहीं दिखा। गुकेश और वेस्ली सो 2.5 अंक के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं। प्रज्ञानानंदा को फिरोजा ने हराया दूसरी ओर आर प्रज्ञानानंदा को फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने हराया। शुरुआत में प्रज्ञानानंदा बेहतर स्थिति में थे, लेकिन फिरोजा ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। लगातार दूसरी जीत के साथ फिरोजा अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। प्रज्ञानानंदा को फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने मात दी। फिरोजा टॉप पर हैं। कीमर ने कार्लसन को कड़ी टक्कर दी डिफेंडिंग चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी जर्मनी के विंसेंट कीमर ने कड़ी टक्कर दी। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद कार्लसन ने आर्मगेडन में जीत हासिल की। विंसेंट कीमर ने कार्लसन को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, कार्लसन ने आर्मगेडन मैच में जीत हासिल की। दिव्या देशमुख ने हम्पी को मात दी महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने अनुभवी कोनेरू हम्पी को आर्मगेडन में हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वह संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या ने कहा कि उन्हें नॉर्वे चेस के आर्मगेडन मुकाबले और कन्फेशन रूम का अनुभव काफी पसंद आ रहा है। कन्फेशन रूम में खिलाड़ी मैच के दौरान अपने विचार दर्शकों के साथ साझा करते हैं। ——————————————— स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… फ्रेंच ओपन- कार एक्सीडेंट के बावजूद जीतीं कोको गॉफ फ्रेंच ओपन में खिताब बचाने उतरीं अमेरिकी टेनिस स्टार कोको गॉफ मंगलवार को एक छोटे कार हादसे का शिकार हो गईं। हालांकि, उन्हें चोट नहीं आई और वे मैच जीतकर दूसरे दौर में पहुंच गईं। 22 साल की गॉफ ने बताया कि रोलां गैरों पहुंचने के दौरान उनकी कार पोल से टकरा गई और क्षतिग्रस्त हो गई। उन्हें टैक्सी से स्टेडियम पहुंचना पड़ा। गाफ ने अपने ही देश की टेलर टाउनसेंड को 6-4, 6-0 से हराया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
करिश्मा के बच्चों के पास फीस भरने के पैसे नहीं:सौतेली मां ने कोर्ट से संजय कपूर के EPF से पैसे निकालने की मांगी की, नोटिस जारी

करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर के निधन के बाद से ही उनके बच्चों और उनकी पत्नी प्रिया सचदेव के बीच प्रॉपर्टी और वसीयत पर कानूनी जंग जारी है। फैसला आने तक कोर्ट ने संजय कपूर की प्रॉपर्टी फ्रीज कर दी है। मामले की सुनवाई के समय करिश्मा कपूर के बच्चों ने दावा किया था कि उनके पास स्कूल-कॉलेज की फीस भरने तक के लिए पैसे नहीं हैं। इस पर अब संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने एक याचिका दायर कर पति के EPF अकाउंट से पैसे निकालने की इजाजत मांगी है। मामले में अब कोर्ट ने अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। प्रिया कपूर की याचिका की सुनवाई 26 मई को हुई, जिसमें 30 अप्रैल को कोऑर्डिनेट बेंच द्वारा संजय कपूर के सभी खातों को फ्रीज करने के आदेश पर आंशिक संशोधन की मांग हुई है। कोर्ट में सबमिट किए गए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, प्रिया कपूर ने अंतरिम आदेश के अनुच्छेद 79 के खंड B और D में बदलाव करने का अनुरोध किया है। लाइव एंड लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रिया कपूर के वकील ने कोर्ट में साफ किया है कि EPF से निकाले गए पैसों का इस्तेमाल, सिर्फ करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए किया जाएगा। करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा ने कोर्ट में याचिका दायर कर पिता संजय कपूर की वसीयत और प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी मांगी थी। तब प्रिया कपूर ने कोर्ट में एक वसीयत दिखाई, जिसमें कियान और समायरा के नाम कुछ भी खास नहीं लिखा गया था। तब बच्चों ने पिता की राइटिंग, बार-बार बच्चों के नाम गलत लिखे जाने पर वसीयत को फर्जी बताया। मामले की सुनवाई करते हुए 30 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संजय कपूर की प्रॉपर्टी और अकाउंट फ्रीज कर दिए थे। कोर्ट ने प्रिया कपूर पर लगाई इन चीजों की अस्थाई रोक- हालांकि तब सुनवाई में बच्चों की पढ़ाई और तलाक की शर्तों के लिए छूट दी गई थी। अब नई याचिका में प्रिया कपूर, कोर्ट के ऑर्डर में संशोधन की मांग कर रही हैं, इसलिए कोर्ट द्वारा केस से जुड़े सभी लोगों को नोटिस जारी कर उनकी सहमति मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई में होगी। क्यों करिश्मा के बच्चों की फीस भरना चाहती हैं प्रिया दरअसल, जब करिश्मा कपूर ने संजय कपूर से तलाक लिया था, तो बच्चों की पढ़ाई के खर्चे की जिम्मेदारी संजय कपूर ने लिखित ली थी। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी प्रिया ने उनके सारे अकाउंट्स पर हक जताया, जिसके बाद करिश्मा के बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर आई। वसीयत के लिए करिश्मा के बच्चों ने प्रिया के खिलाफ याचिका दायर की है, इसके बावजूद उनके खर्च की जिम्मेदारी प्रिया पर ही है। एक सुनवाई के दौरान करिश्मा की बेटी समायरा ने कोर्ट में कहा कि पिछले 2 महीनों से उनके कॉलेज की फीस नहीं भरी गई है। वो अमेरिका में पढ़ाई करती हैं। तब कोर्ट ने इस मामले पर दोनों पक्षों को फटकारा था। तब प्रिया के वकील ने कहा था कि वो बच्चों की फीस समय पर देंगे। लेकिन अकाउंट फ्रीज होने से अब उन्हें फीस चुकाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जून 2015 में हुआ संजय कपूर का निधन संजय कपूर की मौत 12 जून 2025 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। करिश्मा कपूर ने 2003 में संजय से शादी की थी। इससे उन्हें दो बच्चे कियान-समायरा हुए। शादी के 13 साल बाद करिश्मा-संजय ने आपसी सहमति से तलाक लिया था। इसके बाद संजय ने प्रिया सचदेव से तीसरी शादी की थी। करिश्मा से पहले उन्होंने नंदिता महतानी से पहली शादी की थी, लेकिन वो भी टूट गई।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री समाचार लाइव अपडेट: सिद्धारमैया के इस्तीफा देने की संभावना, बेटे यतींद्र को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना

कर्नाटक के मुख्यमंत्री परिवर्तन समाचार लाइव अपडेट: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना है क्योंकि सूत्रों से संकेत मिलता है कि डीके शिवकुमार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया की जगह लेने के लिए चुना गया है। सिद्धारमैया के 28 मई को पद छोड़ने की संभावना है और बाद में पार्टी के भीतर व्यापक राजनीतिक संतुलन अभ्यास के हिस्से के रूप में उन्हें राज्यसभा में भेजा जा सकता है। इस फैसले को कांग्रेस आलाकमान के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पार्टी की 2023 विधानसभा चुनाव की जीत के बाद कर्नाटक इकाई के भीतर प्रतिस्पर्धी शक्ति केंद्रों का प्रबंधन करने के लिए महीनों तक संघर्ष करना पड़ा था। विभिन्न जाति और क्षेत्रीय समीकरणों को समायोजित करने के लिए, कांग्रेस नए मंत्रिमंडल में कई उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की संभावना भी तलाश रही है। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में दलित, अल्पसंख्यक, लिंगायत और ओबीसी समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं, हालांकि फॉर्मूले पर चर्चा प्रारंभिक चरण में है। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया को आश्वासन दिया गया कि प्रमुख मंत्रियों के चयन और कर्नाटक में भविष्य के राजनीतिक ढांचे को आकार देने में उनकी भूमिका बनी रहेगी। इसके अतिरिक्त, कई रिपोर्टों के अनुसार, सिद्धारमैया के बेटे, यतींद्र, जो राज्य विधान परिषद के सदस्य हैं, के लिए संभावित कैबिनेट पद का आश्वासन दिया गया है। लाइव अपडेट का पालन करें
‘हमारे बीच कोई विभाजन नहीं’: 4 विधायकों के विजय के टीवीके में शामिल होने के बाद अन्नाद्रमुक ने एकता का संकेत दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 मई, 2026, 10:29 IST इस्तीफों के साथ, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक की ताकत घटकर 43 हो गई है। दलबदल 2026 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके के खराब प्रदर्शन के बाद हुआ, जहां पार्टी ने केवल 47 सीटें जीतीं। अन्नाद्रमुक संकट: सत्तारूढ़ तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) में शामिल हुए चार विधायकों के इस्तीफे के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएम) के भीतर बढ़ती उथल-पुथल के बीच, पार्टी ने बुधवार को अपने युद्धरत गुटों के संभावित पुनर्मिलन का संकेत दिया और एकता का आह्वान किया। एक्स पर एक पोस्ट में, एआईएडीएमके की आईटी विंग ने घोषणा की कि “हमारे बीच कोई विभाजन नहीं होगा” और कहा कि कोई भी पार्टी को कमजोर नहीं कर सकता है, जिसे अक्सर समर्थकों द्वारा “ईएफ किला” कहा जाता है। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता और एआईएडीएमके के लिए उनके दृष्टिकोण का हवाला देते हुए, पार्टी ने कहा, “अब से, हमारे बीच कोई विभाजन नहीं होगा… अब कोई भी इस ईएफ किले को नष्ट करने का रास्ता नहीं ढूंढ सकता है। हमारा लक्ष्य केवल एक ही है… वह केवल हमारे दो पत्तों वाले झंडे को एक बार फिर से किले पर फहराना है।” ” எனக்கு பின்னாலும் இன்னும் எத்தனை நூற்றாண்டுகள் ஆனாலும் அனைத்திந்திய அண்ணா मोबाइल फोन नंबर उत्तर தியாகத்தால் வளர்ந்த இந்த எஃகு கோட்டையை இனி यह एक अच्छा विचार है! एक और विकल्प देखें… कृपया… pic.twitter.com/irmekC9pu6 – एआईएडीएमके आईटी विंग – SayyesToWomenSafety&AIADMK (@AIADMKITWINGOFL) 27 मई 2026 नवीनतम एक्स पोस्ट में अनुमान लगाया गया है कि एआईएडीएमके के भीतर प्रतिद्वंद्वी गुट विधानसभा में पार्टी की स्थिति को कमजोर करने की एक श्रृंखला के बाद समर्थन में और कमी को रोकने के लिए फिर से एकजुट हो सकते हैं। ताजा झटका अंबासमुद्रम विधायक एसाक्की सुबया के पार्टी से इस्तीफा देने और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले टीवीके में शामिल होने के बाद आया। वह दो दिनों में खेमा बदलने वाले चौथे एआईएडीएमके विधायक बन गए। इससे पहले, एआईएडीएमके विधायक के मारागथम, डी जयकुमार और वी सत्यबामा ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए, जिससे एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। इस्तीफों के साथ, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक की ताकत घटकर 43 हो गई है। खाली सीटों पर छह महीने के भीतर उपचुनाव होने की उम्मीद है। 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद दलबदल को अन्नाद्रमुक महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। अन्नाद्रमुक तमिलनाडु की 234 में से केवल 47 सीटें हासिल करने में सफल रही, जबकि विजय की टीवीके ने 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरकर राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया। हालाँकि, पार्टी बहुमत के निशान से 10 सीटें पीछे रह गई, जिससे चुनाव के बाद गहन बातचीत और गठबंधन बनाने के प्रयास शुरू हो गए। नतीजों ने तमिलनाडु की राजनीति में द्रमुक-विरोधी क्षेत्र के निर्विवाद चेहरे के रूप में ईपीएस के दावे को कमजोर कर दिया और पार्टी के अंदर एक अभूतपूर्व विद्रोह हुआ, जिसमें सी वी षणमुगम ने अन्नाद्रमुक सुप्रीमो पर सरकार बनाने के लिए कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया। कम से कम 25 विधायकों ने पार्टी तोड़ दी, पार्टी व्हिप की अनदेखी की और टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया, जिससे विजय के विधायकों की संख्या 144 हो गई। विद्रोह के बाद से अन्नाद्रमुक के भीतर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू हो गई है, जिसमें दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई भी शामिल है। कई वरिष्ठ नेताओं ने ईपीएस की “तानाशाहीपूर्ण” कार्यप्रणाली की आलोचना की है और उन पर गठबंधन और उम्मीदवार चयन पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया है। विद्रोही गुट ने कहा कि एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के दृष्टिकोण के अनुसार पार्टी को बहाल करने के लिए ईपीएस को हटाया जाना चाहिए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘हमारे बीच कोई विभाजन नहीं’: 4 विधायकों के विजय के टीवीके में शामिल होने के बाद एआईएडीएमके ने एकता का संकेत दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एआईएडीएमके(टी)पलानीस्वामी(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)जयललिता(टी)तमिल नाडु
Film Industry came in support of ranveer singh after FWICE Impose ban on him, manoj bajpayee, chunky pandey reacts, ashoke pandit clarify

Hindi News Entertainment Bollywood Film Industry Came In Support Of Ranveer Singh After FWICE Impose Ban On Him, Manoj Bajpayee, Chunky Pandey Reacts, Ashoke Pandit Clarify 3 मिनट पहले कॉपी लिंक फरहान अख्तर की डॉन 3 अचानक छोड़ देने से FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉय्ज) ने रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। जब तक मामला नहीं सुलझता, तब तक रणवीर के साथ फेडरेशन से जुड़े लोग काम नहीं कर सकेंगे। इस घोषणा के बाद इंडस्ट्री के कई लोग उनके सपोर्ट में उतरे हैं। चंकी पांडे ने बताया है कि एक समय वो भी इस बैन का शिकार हो चुके हैं। माफी मांगने के बाद उन पर लगा बैन हटाया गया था। वहीं दूसरी तरफ FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने बैन पर सफाई दी है। मैंने भी ये झेला है- चंकी पांडे चंकी पांडे ने रणवीर सिंह के विवाद पर हाल ही में ई-टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया है कि 1987 में फिल्म इंडस्ट्री की हड़ताल थी और शूटिंग करने की इजाजत नहीं थी। लेकिन ठीक उसी समय उनकी फिल्म आग ही आग की शूटिंग ऊटी में हुई। इस बात से नाराज फेरडरेशन ने फिल्म में काम करने वाले हर शख्स को बैन कर दिया था। हालांकि तब धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा इतने बड़े स्टार थे, जिनके पास एक साथ 30-40 फिल्में थीं, ऐसे में उन्हें बैन करना मुश्किल था। चंकी पांडे जो नए आए थे और उनकी पहली फिल्म भी रिलीज नहीं हुई थी, उन्हें एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया था। विवाद पर चंकी पांडे ने माफी मांगी, जिसके बाद उन्हें दोबारा काम करने की इजाजत मिली। बातचीत में चंकी पांडे ने कहा है, हमारी इंडस्ट्री बहुत छोटी और नाजुक है। मैंने ये सब खुद झेला है। उम्मीद है ये मामला जल्द सुलझेगा- मनोज तिवारी अपकमिंग फिल्म गवर्नर के प्रमोशनल इवेंट के दौरान एक्टर मनोज तिवारी ने भी इस पर रिएक्शन दिया है। उन्होंने रणवीर के बैन से जुड़े सवाल पर कहा, ‘यह जगह इस बात के लिए बिल्कुल सही नहीं है। मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि इस इंडस्ट्री में जितने भी लोग हैं, वे सब इसके बारे में सिर्फ सोशल मीडिया पर ही पढ़ रहे हैं और हमारे पास इसके बारे में कोई डीटेल जानकारी नहीं है’। आगे मनोज बाजपेयी ने कहा है, ‘एक को-वर्कर होने और इस बिरादरी के सदस्य होने के तौर पर हम बस यही कह सकते हैं कि हमें उम्मीद है कि ये मामला जल्द सुलझ जाएगा। बिना किसी और बढ़ावे के यह मामला सुलझेगा।’ फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी रणवीर को बैन करने पर फेडरेशन की आलोचना की है। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘जब एक ए-लिस्टर हीरो शूट करता है, तो उसके साथ 300 से ज्यादा वर्कर्स सेट पर काम करते हैं। किसी को बैन करने से उसका नुकसान नहीं होता, बल्कि उन मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाती है, जो उस काम पर ही निर्भर हैं। आखिर में इसका मतलब क्या है।’ FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने दी सफाई बैन की आलोचना होने के बाद अशोक पंडित ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि लोगों ने उनके आदेश का गलत अर्थ निकाला है। ई-टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अशोक पंडित ने कहा- पहली बात तो पूरा कन्वर्सेशन ही गलत हो गया। ये बैन नहीं है। हम कोई कोर्ट नहीं हैं। हम लोगों को बैन नहीं कर सकते। हमने नॉन कॉर्पोरेशन इशू किया है। इसका मतलब है कि जो हमारे 30 क्राफ्ट के सदस्य हैं, वो रणवीर के साथ काम नहीं करेंगे। हमारी इच्छा है कि हम उनके साथ काम करते हैं या नहीं। हम एक ट्रेड यूनियन जैसे हैं। मामला अभी हल नहीं हुआ है, क्योंकि हमने बहुत देखा कि ये बहुत ही गलत ट्रेंड शुरू हो गया। जानिए क्या है पूरा मामला? फरहान अख्तर ने साल 2023 में फिल्म डॉन-3 की घोषणा एक्टर रणवीर सिंह के साथ की थी। 2006 में आई शाहरुख स्टारर डॉन और 2011 में आई डॉन-2 के बाद ये इस फ्रेंचाइजी की यह तीसरी फिल्म होने वाली थी। अनाउंसमेंट के समय कियारा आडवाणी को फिल्म में कास्ट किया गया था। लेकिन प्रेग्नेंसी और मेटरनिटी ब्रेक के चलते कियारा ने फिल्म छोड़ दी, जिसके बाद कृति सेनन को कास्ट करने की खबरें रहीं। ये फिल्म फरहान अख्तर, होम प्रोडक्शन एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बना रहे थे। डॉन-3 को जारी रखने लिए फरहान ने अपनी दूसरी फिल्म जी ले जरा पोस्टपोन कर दी। फिल्म डिले होने पर रणवीर सिंह धुरंधर में व्यस्त हो गए। रिपोर्ट्स थीं कि 2025 में डॉन 3 की शूटिंग शुरू होगी, लेकिन फिर अचानक रणवीर सिंह ने फिल्म छोड़ दी। मेकर्स का आरोप है कि रणवीर स्क्रिप्ट में हस्तक्षेप कर रहे थे। वो गाली-गलौज और हिंसक सीन की मांग कर रहे थे, लेकिन मेकर्स इस पर राजी नहीं हुए। मिडडे की रिपोर्ट में दावा किया गया कि रणवीर ने फिल्म छोड़ दी है और वो जल्द ही फिल्म का साइनिंग अमाउंट भी लौटा देंगे, जबकि मेकर्स पहले ही प्री-प्रोडक्शन, डिले और री-वर्क के चलते फिल्म पर खर्च कर चुके थे। इस पर फरहान अख्तर ने प्रोड्यूसर्स गिल्ड में शिकायत कर 45 करोड़ हर्जाने की मांग की। उनका कहना था कि प्री-प्रोडक्शन, शूटिंग शेड्यूल में बदलाव के चलते उनका भारी नुकसान हुआ है। तब आमिर खान ने भी बीचबचाव की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। प्रोड्यूसर गिल्ड ने दोनों पक्षों को सुलह का समय भी दिया, लेकिन हल तब भी नहीं निकला। बाद में ये मामला FWICE के पास पहुंचा। मामले को गंभीरता से लेते हुए फेडरेशन ने रणवीर सिंह को अलग-अलग मौकों पर 3 नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ये लीगल मामला है, जो फेडरेशन द्वारा नहीं बल्कि कोर्ट के जरिए सुलझाना चाहिए। आखिरकार 25 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखने के बाद फेडरेशन ने रणवीर को बैन करने का ऐलान कर दिया। रणवीर सिंह की टीम बोली- वे सोच-समझकर चुप रणवीर सिंह के स्पोक पर्सन ने कहा- रणवीर सिंह फिल्म इंडस्ट्री और ‘डॉन’ फ्रैंचाइजी से जुड़े हर इंसान का दिल से सम्मान करते हैं। ‘डॉन 3’ को लेकर हाल ही में जो कुछ भी हुआ है, उस पर उन्होंने सोच-समझकर
Film Industry came in support of ranveer singh after FWICE Impose ban on him, manoj bajpayee, chunky pandey reacts, ashoke pandit clarify

Hindi News Entertainment Bollywood Film Industry Came In Support Of Ranveer Singh After FWICE Impose Ban On Him, Manoj Bajpayee, Chunky Pandey Reacts, Ashoke Pandit Clarify 17 मिनट पहले कॉपी लिंक फरहान अख्तर की डॉन 3 अचानक छोड़ देने से FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एप्लॉय्ज) ने रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। जब तक मामला नहीं सुलझता, तब तक रणवीर के साथ फेडरेशन से जुड़े लोग काम नहीं कर सकेंगे। इस घोषणा के बाद इंडस्ट्री के कई लोग उनके सपोर्ट में उतरे हैं। चंकी पांडे ने बताया है कि एक समय वो भी इस बैन का शिकार हो चुके हैं। माफी मांगने के बाद उन पर लगा बैन हटाया गया था। वहीं दूसरी तरफ FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने बैन पर सफाई दी है। मैंने भी ये झेला है- चंकी पांडे चंकी पांडे ने रणवीर सिंह के विवाद पर हाल ही में ई-टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया है कि 1987 में फिल्म इंडस्ट्री की हड़ताल थी और शूटिंग करने की इजाजत नहीं थी। लेकिन ठीक उसी समय उनकी फिल्म आग ही आग की शूटिंग ऊटी में हुई। इस बात से नाराज फेरडरेशन ने फिल्म में काम करने वाले हर शख्स को बैन कर दिया था। हालांकि तब धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा इतने बड़े स्टार थे, जिनके पास एक साथ 30-40 फिल्में थीं, ऐसे में उन्हें बैन करना मुश्किल था। चंकी पांडे जो नए आए थे और उनकी पहली फिल्म भी रिलीज नहीं हुई थी, उन्हें एक हफ्ते के लिए बैन कर दिया था। विवाद पर चंकी पांडे ने माफी मांगी, जिसके बाद उन्हें दोबारा काम करने की इजाजत मिली। बातचीत में चंकी पांडे ने कहा है, हमारी इंडस्ट्री बहुत छोटी और नाजुक है। मैंने ये सब खुद झेला है। उम्मीद है ये मामला जल्द सुलझेगा- मनोज बाजपेयी अपकमिंग फिल्म गवर्नर के प्रमोशनल इवेंट के दौरान एक्टर मनोज बाजपेयी ने भी इस पर रिएक्शन दिया है। उन्होंने रणवीर के बैन से जुड़े सवाल पर कहा, ‘यह जगह इस बात के लिए बिल्कुल सही नहीं है। मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि इस इंडस्ट्री में जितने भी लोग हैं, वे सब इसके बारे में सिर्फ सोशल मीडिया पर ही पढ़ रहे हैं और हमारे पास इसके बारे में कोई डीटेल जानकारी नहीं है’। आगे मनोज बाजपेयी ने कहा है, ‘एक को-वर्कर होने और इस बिरादरी के सदस्य होने के तौर पर हम बस यही कह सकते हैं कि हमें उम्मीद है कि ये मामला जल्द सुलझ जाएगा। बिना किसी और बढ़ावे के यह मामला सुलझेगा।’ फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी रणवीर को बैन करने पर फेडरेशन की आलोचना की है। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘जब एक ए-लिस्टर हीरो शूट करता है, तो उसके साथ 300 से ज्यादा वर्कर्स सेट पर काम करते हैं। किसी को बैन करने से उसका नुकसान नहीं होता, बल्कि उन मजदूरों की रोजी-रोटी छिन जाती है, जो उस काम पर ही निर्भर हैं। आखिर में इसका मतलब क्या है।’ FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने दी सफाई बैन की आलोचना होने के बाद अशोक पंडित ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहना है कि लोगों ने उनके आदेश का गलत अर्थ निकाला है। ई-टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अशोक पंडित ने कहा- पहली बात तो पूरा कन्वर्सेशन ही गलत हो गया। ये बैन नहीं है। हम कोई कोर्ट नहीं हैं। हम लोगों को बैन नहीं कर सकते। हमने नॉन कॉर्पोरेशन इशू किया है। इसका मतलब है कि जो हमारे 30 क्राफ्ट के सदस्य हैं, वो रणवीर के साथ काम नहीं करेंगे। हमारी इच्छा है कि हम उनके साथ काम करते हैं या नहीं।हम एक ट्रेड यूनियन जैसे हैं। मामला अभी हल नहीं हुआ है, क्योंकि हमने बहुत देखा कि ये बहुत ही गलत ट्रेंड शुरू हो गया। जानिए क्या है पूरा मामला? फरहान अख्तर ने साल 2023 में फिल्म डॉन-3 की घोषणा एक्टर रणवीर सिंह के साथ की थी। 2006 में आई शाहरुख स्टारर डॉन और 2011 में आई डॉन-2 के बाद ये इस फ्रेंचाइजी की यह तीसरी फिल्म होने वाली थी। अनाउंसमेंट के समय कियारा आडवाणी को फिल्म में कास्ट किया गया था। लेकिन प्रेग्नेंसी और मेटरनिटी ब्रेक के चलते कियारा ने फिल्म छोड़ दी, जिसके बाद कृति सेनन को कास्ट करने की खबरें रहीं। ये फिल्म फरहान अख्तर, होम प्रोडक्शन एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बना रहे थे। डॉन-3 को जारी रखने लिए फरहान ने अपनी दूसरी फिल्म जी ले जरा पोस्टपोन कर दी। फिल्म डिले होने पर रणवीर सिंह धुरंधर में व्यस्त हो गए। रिपोर्ट्स थीं कि 2025 में डॉन 3 की शूटिंग शुरू होगी, लेकिन फिर अचानक रणवीर सिंह ने फिल्म छोड़ दी। मेकर्स का आरोप है कि रणवीर स्क्रिप्ट में हस्तक्षेप कर रहे थे। वो गाली-गलौज और हिंसक सीन की मांग कर रहे थे, लेकिन मेकर्स इस पर राजी नहीं हुए। मिडडे की रिपोर्ट में दावा किया गया कि रणवीर ने फिल्म छोड़ दी है और वो जल्द ही फिल्म का साइनिंग अमाउंट भी लौटा देंगे, जबकि मेकर्स पहले ही प्री-प्रोडक्शन, डिले और री-वर्क के चलते फिल्म पर खर्च कर चुके थे। इस पर फरहान अख्तर ने प्रोड्यूसर्स गिल्ड में शिकायत कर 45 करोड़ हर्जाने की मांग की। उनका कहना था कि प्री-प्रोडक्शन, शूटिंग शेड्यूल में बदलाव के चलते उनका भारी नुकसान हुआ है। तब आमिर खान ने भी बीचबचाव की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। प्रोड्यूसर गिल्ड ने दोनों पक्षों को सुलह का समय भी दिया, लेकिन हल तब भी नहीं निकला। बाद में ये मामला FWICE के पास पहुंचा। मामले को गंभीरता से लेते हुए फेडरेशन ने रणवीर सिंह को अलग-अलग मौकों पर 3 नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ये लीगल मामला है, जो फेडरेशन द्वारा नहीं बल्कि कोर्ट के जरिए सुलझाना चाहिए। आखिरकार 25 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखने के बाद फेडरेशन ने रणवीर को बैन करने का ऐलान कर दिया। रणवीर सिंह की टीम बोली- वे सोच-समझकर चुप रणवीर सिंह के स्पोक पर्सन ने कहा- रणवीर सिंह फिल्म इंडस्ट्री और ‘डॉन’ फ्रैंचाइजी से जुड़े हर इंसान का दिल से सम्मान करते हैं। ‘डॉन 3’ को लेकर हाल ही में जो कुछ भी हुआ है, उस पर उन्होंने सोच-समझकर चुप








