रणवीर सिंह विवाद के बीच फिल्म एसोसिएशन के खिलाफ याचिका:प्रोड्यूसर टीपी अग्रवाल ने बैन लगाने के अधिकार को दी चुनौती, कहा- यह गैरकानूनी है

फिल्म प्रोड्यूसर और फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के पूर्व अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने फिल्म एसोसिएशनों की ओर से कलाकारों पर लगाए जाने वाले बैन के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है। अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के खिलाफ याचिका दायर की है। उनका कहना है कि किसी भी संस्था के पास किसी कलाकार पर काम करने से रोकने या नॉन-कोऑपरेशन का निर्देश जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दोनों संगठनों को नोटिस जारी कर दिया है। रणवीर सिंह विवाद के बीच उठाया कदम यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में FWICE ने बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन यानी असहयोग का निर्देश जारी किया था। रणवीर सिंह का प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के साथ फिल्म ‘डॉन 3’ फिल्म छोड़ने के बाद से विवाद चल रहा है। इसके बाद फेडरेशन ने अपने सदस्यों को रणवीर के साथ काम न करने के लिए कहा था। इसी तरह के बॉयकॉट के फैसलों को टीपी अग्रवाल ने कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले कलाकारों की आजीविका को नुकसान पहुंचाते हैं। संगठन को बैन लगाने का अधिकार नहीं अग्रवाल ने अपनी याचिका में दलील दी है कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कोई भी ट्रेड बॉडी या एसोसिएशन कानूनन किसी व्यक्ति को काम करने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री आपसी सहयोग से चलती है। इस तरह के मामलों को सही कानूनी और प्रोफेशनल तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए। किसी को काम करने से रोकने की कोशिश को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इससे लोगों के काम करने की आजादी और क्रिएटिविटी पर सीधा असर पड़ता है। फिल्म फेडरेशन के अध्यक्ष रह चुके टीपी अग्रवाल टीपी अग्रवाल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सीनियर और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। वे 17 साल तक इम्पा (IMPPA) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे चार बार फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के अध्यक्ष भी चुने गए। वर्तमान में वे FFI और IMPPA दोनों संगठनों में संरक्षक (पेट्रन) के पद पर हैं। डॉन 3 छोड़ने के बाद शुरू हुआ विवाद रणवीर सिंह और फेडरेशन के बीच यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक्टर ने अचानक फरहान अख्तर की फिल्म ‘डॉन 3’ से अलग होने का फैसला किया। फेडरेशन का आरोप है कि रणवीर के इस फैसले से फिल्म का शेड्यूल बिगड़ गया और प्रोड्यूसर्स को 45 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी शिकायत के बाद FWICE ने 25 मई को रणवीर के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया था। हालांकि यह कोई कानूनी बैन नहीं है, लेकिन इसके कारण फिल्म की शूटिंग के दौरान लॉजिस्टिक्स और वर्कर्स को जुटाने में दिक्कतें आ सकती हैं।
छाछ पीने के टिप्स: गर्मी में ठंडा-ठंडा छाछ बन सकता है खतरनाक! जानें किन लोगों को नहीं पीनी चाहिए?

गर्मी का मौसम आते ही लोग खुद को ठंडा रखने के लिए तरह-तरह के पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। ये छाछ सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। छवि: मेटा एआई न केवल शरीर को ठंडक मिलती है बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाया जाता है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। कुछ लोगों के लिए छाछ का सेवन नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। छवि: एआई छाछ पीने के फायदे: शरीर को ठंडक मिलती है। पाचन क्रिया बेहतर होती है। पेट की जलन और एसिडिटी से राहत मिलती है। शरीर को भर्ती रखने में मदद मिलती है। वजन नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। छवि: एआई डेट-जुकाम की समस्या: अगर आपको बार-बार सर्दी, खांसी या गले में खराश रहती है, तो सबसे ज्यादा अनचाहे छाछ पीने से बचना चाहिए। इससे परेशानी बढ़ सकती है। छवि: एआई लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोग: कुछ लोगों के शरीर का दूध और उनसे बनी गुड़िया को सही तरह से पचा नहीं पाता। ऐसे लोगों को चाय पीने से गैस, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छवि: एआई दोस्त के दोस्त: ईसाई या धार्मिक एसोसिएट्स से जुड़े लोगों को बहुत से लोगों को इसके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इससे कुछ मामलों में तकलीफ बढ़ सकती है। छवि: एआई जोड़ों के दर्द वाले लोग: कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को जोड़ों में दर्द या गठिया की समस्या रहती है, उन्हें रात के समय चाय पीने से बचना चाहिए। छवि: फ्रीपिक पाचन तंत्र वाले लोग: यदि आपका पेट बार-बार खराब रहता है या आपको दस्त की समस्या है, तो बहुत अधिक मात्रा में पाचन क्षति हो सकती है। छवि: एआई हमेशा ताजी छाछ का सेवन करें। बहुत अधिक अनमोल छाछ पीने से शिक्षा। छाछ में जीरा, काला नमक और पुदीना की कुल संरचना सबसे अच्छी मानी जाती है। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।
Uttarakhand Cricket Talent Hunt | Dehradun Haridwar Trials Free
उत्तराखंड के युवा तेज गेंदबाजों को तराशने के लिए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) की बड़ी मुहिम अब गढ़वाल मंडल में कदम रखने जा रही है। कुमाऊं जोन में मिली शानदार प्रतिक्रिया और सफल आयोजन के बाद, कल यानी 2 जून से गढ़वाल मंडल के सभी जिलों में ‘मीड . गढ़वाल जोन का शेड्यूल, कहां और कब होंगे ट्रायल चयनकर्ताओं की सुविधा और पारदर्शिता के लिए CAU ने गढ़वाल मंडल के विभिन्न स्थानों पर तारीखें तय की हैं। देहरादून और हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी केंद्रों पर ट्रायल सिर्फ कल 2 जून को ही आयोजित किए जाएंगे। क्र.सं. जिला / स्थान (District Name) ट्रायल की तारीख (Talent Hunt Dates) 1. देहरादून (SGRR बिंदाल ब्रांच, ब्लॉक-बी) 02 जून से 03 जून 2. हरिद्वार 02 जून से 03 जून 3. श्रीनगर (पौड़ी) 02 जून 4. कोटद्वार (पौड़ी) 02 जून 5. पुरोला (उत्तरकाशी) 02 जून 6. मनेरा (उत्तरकाशी) 02 जून 7. रुद्रप्रयाग 02 जून 8. चमोली 02 जून 9. टिहरी 02 जून CAU सचिव बोलीं- उत्तराखंड को देंगे नया स्पीड स्टार इस बड़े आयोजन और गढ़वाल जोन की शुरुआत पर बात करते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की सचिव किरण रौतेला वर्मा ने कहा कि कुमाऊं जोन में दो दिनों के भीतर हमने जो प्रतिभा और रफ्तार देखी है, वह वाकई अद्भुत थी। हमारे पास राज्य के कोने-कोने में अविश्वसनीय टैलेंट छिपा हुआ है, बस जरूरत उन्हें एक सही मंच देने की है। सीएयू इस टैलेंट हंट के जरिए उसी कमी को पूरा कर रहा है। अब गढ़वाल डिवीजन की बारी है। हमारी चयन समिति और कोचों की नजरें हर एक गेंद पर होंगी। हम अंडर-19 से लेकर सीनियर स्तर तक के उन गेंदबाजों को तलाश रहे हैं जो आने वाले समय में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश-दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें। मेरी सभी प्रतिभावान तेज गेंदबाजों से अपील है कि वे खुलकर अपनी गति का प्रदर्शन करें।” रफ्तार की जंग, सपनों की उड़ान कुमाऊं जोन के ट्रायल्स के दौरान मैदान पर युवाओं का गजब का जज्बा देखने को मिला था। हर एक रन-अप में उत्तराखंड की जर्सी पहनने का सपना और हर एक डिलीवरी में बल्लेबाजों को छकाने की भूख साफ नजर आ रही थी। सीएयू के इस प्रयास से राज्य के उन दूर-दराज के खिलाड़ियों को भी सीधा मौका मिल रहा है, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं या सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।
Canada Cricket Suspended by ICC; Players to Play Tournaments with Council Funding

Hindi News Sports Canada Cricket Suspended By ICC; Players To Play Tournaments With Council Funding स्पोर्ट्स डेस्क12 मिनट पहले कॉपी लिंक कनाडा की क्रिकेट टीम के खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने क्रिकेट कनाडा की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह फैसला कनाडा बोर्ड द्वारा सदस्यता के नियमों और जिम्मेदारियों के उल्लंघन के कारण लिया गया है। हालांकि, ICC ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड की कमियों का खामियाजा वहां के खिलाड़ियों को नहीं भुगतना पड़ेगा। काउंसिल ने यह फैसला 1 जून को हुई एनुअल मीटिंग में लिया। ICC टूर्नामेंटों में खेल सकेंगे खिलाड़ी ICC ने पुष्टि की है कि सस्पेंशन की अवधि के दौरान भी कनाडा की नेशनल टीमें ICC टूर्नामेंटों में खेलने के लिए योग्य रहेंगी। काउंसिल का मानना है कि जिन मुद्दों पर खिलाड़ियों का कोई नियंत्रण नहीं है, उनके लिए उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए। ICC मैनेजमेंट की निगरानी में मिलेगी फंडिंग खिलाड़ियों के खेल में कोई रुकावट न आए, इसके लिए क्रिकेट कनाडा को ICC की तरफ से फंडिंग मिलती रहेगी। हालांकि, इस बार फंडिंग का तरीका पूरी तरह से ICC मैनेजमेंट के नियंत्रण में होगा। यह फंड केवल मंजूर किए गए नेशनल टीम प्रोग्राम्स के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा, ताकि इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम की तैयारी और भागीदारी बिना किसी रुकावट के जारी रहे। खिलाड़ियों के लिए फंडिंग ICC करेगा। विवादों में घिरा है कनाडा क्रिकेट बोर्ड क्रिकेट कनाडा पिछले कुछ समय से गवर्नेंस और ईमानदारी से जुड़े कई विवादों का सामना कर रहा है। पिछले दो सालों में बोर्ड खेल से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में रहा है। इनमें से एक बड़ा मामला टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में कनाडा और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैच से जुड़ा है, जिसकी जांच अभी भी ICC की एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) कर रही है। एंटी-करप्शन यूनिट टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में कनाडा और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैच की जांच कर रही है। पूर्व हेड कोच के ऑडियो लीक से बढ़े विवाद बोर्ड के सामने एक और बड़ी मुसीबत पूर्व हेड कोच खुर्रम चौहान से जुड़ी है। पिछले साल एक फोन बातचीत का ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आया था, जिसने क्रिकेट जगत में चिंताएं बढ़ा दीं। इस रिकॉर्डिंग में चौहान ने आरोप लगाया था कि क्रिकेट कनाडा के सीनियर अधिकारियों ने नेशनल स्क्वॉड में कुछ पसंदीदा खिलाड़ियों को शामिल कराने की कोशिश की थी। इसके साथ ही बातचीत में मैचों को मैनिपुलेट (फिक्स) करने के प्रयास के आरोप भी थे, जिसके बाद ICC के इंटीग्रिटी अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी। सस्पेंशन हमेशा के लिए नहीं यह सस्पेंशन परमानेंट यानी हमेशा के लिए नहीं है। ICC क्रिकेट कनाडा को कुछ शर्तें सौंपेगी, जिन्हें सदस्यता वापस पाने के लिए पूरा करना होगा। बोर्ड में सुधारों और बदलावों के लिए ICC की नॉर्मलाइजेशन कमेटी और ICC मैनेजमेंट मिलकर नजर रखेंगे। इन शर्तों और आवश्यक गवर्नेंस रिफॉर्म्स से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही ICC सदस्यता बहाल करेगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
हेयर मास्क: रेशमी-रेशमी बालों के लिए दही में पूरी क्रीम, ये 4 चीजें, रूखे बाल होंगे मुलायम और शाइनी

1 जून 2026 को 18:51 IST पर अपडेट किया गया गर्मी में आपके बाल भी रूखे और बेजान हो गए हैं? दही, शहद, केला, एलोवेरा जैसे घरेलू नुस्खों से बालों को फिर से मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाया जा सकता है। जानें आसान तरीके, पढ़ें पूरी खबर। (टैग्सटूट्रांसलेट)गर्मियों में मुलायम बाल(टी)सूखे घुंघराले बालों के उपाय(टी)घर पर बने हेयर मास्क(टी)चमकदार बालों के टिप्स(टी)गर्मियों में प्राकृतिक बालों की देखभाल
दिल्ली के पास की सबसे अच्छी जगहें: बच्चों की सूची में कम बजट में दिल्ली के पास की इन जगहों का पता लगाएं, जून की गर्मी में होगा ठंड का एहसास

गर्मी की छुट्टियों के लिए बजट अनुकूल पारिवारिक यात्रा के विचार: जून का महीना शुरू हो चुका है और दिल्ली-महाराष्ट्र की गर्मी अपने चरम पर है। इसी के साथ बच्चों की समर की छुट्टियां भी चल रही हैं। हर माता-पिता चाहते हैं कि वे अपने बच्चों को इस चिलचिलाती धूप से दूर किसी जगह पर ले जाएं, लेकिन अक्सर बजट तय करना पड़ता है। अगर आप भी कम बजट में एक शानदार फैमिली ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो दिल्ली के आसपास ऐसे कई खूबसूरत और ठंडे हिल स्टेशन हैं, जहां आप अपनी जेब में बिना एक यादगार छुट्टियां बिता सकते हैं। तो जानिए इन अद्भुत जगहों के बारे में- उत्तराखंड के पर्यटक बसा लैंसडाउन दिल्ली से सबसे करीब और शांत हिल हिंदुस्तान में से एक है। यह एक बायोडाटा क्षेत्र है, इसलिए यहां साफ-सफाई और सुरक्षा बहुत अच्छी है, बच्चों के साथ यात्रा करने के लिए यह बिल्कुल सही काम करता है। यह लगभग 250 किमी यानी 5-6 घंटे का सफर है। यहां आप भुल्ला ताल में बोटिंग, टिप-इन-टॉप पॉइंट से हिमालय का दर्शन, और देवदार के जंगल में सार्वभौम भरपूर सैर का आनंद ले सकते हैं। यहां कई बड़े होटल और गेस्ट हाउस मौजूद हैं। आप अपनी गाड़ी से या कोटद्वार तक ट्रेन और फिर वहां से बस/टैक्सी लेकर वापस पहुंच सकते हैं। अगर आप कसाई की भारी भीड़ और साधु से बचना चाहते हैं, तो कसौली एक बेहतरीन विकल्प है। प्रदेश का यह छोटा सा हिल स्टेशन अपने हरियाली, शांत जंगलों और हिमाचल के पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। दिल्ली से लगभग 290 किमी यानी 6-7 घंटे का सफर है। बच्चों के लिए मंकी प्वाइंट, हेरिटेज मॉल रोड की सैर, और पास ही धर्मपुर से चलने वाली टॉय ट्रेन का सफर। यह टॉय ट्रेन बच्चों के लिए यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा बन सकती है। दिल्ली से चंडीगढ़ या कालका तक बस या ट्रेन से और वहां से लोकल बस लेकर कसौली तक पहुंचेंगे। यह यात्रा काफी सस्ती है। नाहन हिमाचल प्रदेश का एक छिपा हुआ खजाना है। यहां आम पिज्जा की भीड़ कम होती है, इसलिए यहां होटल और दोनों खाना काफी मिल जाते हैं। यहां का मौसम जून में भी काफी सुहावना रहता है। यह दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर यानी 5 घंटे का सफर होगा। यहां से कुछ ही दूरी पर खूबसूरत रेणुका झील है, जहां आप बच्चों के साथ बेहतरीन पिकनिक मना सकते हैं। इसके अलावा सुकेती फॉसिल पार्क के अलावा बच्चों के लिए एक मनोरंजक और शैक्षणिक यात्रा साबित हो सकती है। यहां के स्थानीय ढाबों का खाना बहुत ही स्वादिष्ट और महंगा होता है। रिज़ॉर्ट्स की जगह राज्य पर्यटन के गेस्ट हाउस या छोटे-छोटे बेडरूम में रुकें। समरसेल्स में सुपरमार्केट जाना काफी महंगा और भीड़-भाड़ वाला होता है। यह भीमताल का एक शानदार और पॉकेट-फ्रेंडली विकल्प है। यह उपन्यास से छोटा सा दृश्य है और इसकी प्राकृतिक प्रकृति का किसी भी प्रकार से उल्लेख नहीं किया गया है। यह जगह दिल्ली से लगभग 300 किमी यानी 6-7 घंटे का सफर करेगी। यहां आप भीमताल की विशाल झील में बोटिंग कर सकते हैं। इसके अलावा झील के बीचों-बीच एक्वेरियम द्वीप है, जो तरह-तरह की मछलियों का घर है। इसे देखकर बच्चे बहुत खुश होते हैं। इसके अलावा यहां का बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर भी बच्चों को काफी पसंद आता है। भीमताल की तुलना में झील के किनारे वाले होटल में भी काफी लोग मिल जाते हैं। काठगोदाम तक ट्रेन यात्रा यहां से बहुत आसान और सस्ती है। (टैग्सटूट्रांसलेट)फैमिली ट्रिप ऑर्थोडॉक्स(टी)पारिवारिक यात्रा के विचार(टी)बजट अनुकूल यात्रा(टी)गर्मी की छुट्टियों के लिए बजट अनुकूल पारिवारिक यात्रा के विचार(टी)ग्रीष्म ऋतु के लिए बजट अनुकूल यात्रा
Vashu Bhagnani Slams Ramesh Torani & David Dhawan Over Kuli No.1 Car Gift

11 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म प्रोड्यूसर वाशू भगनानी ने म्यूजिक कंपनी टिप्स के रमेश तौरानी और डायरेक्टर डेविड धवन के साथ अपने पुराने रिश्तों पर 31 साल बाद चुप्पी तोड़ी है। वाशू भगनानी ने कहा है कि रमेश तौरानी कैंप की कुछ हरकतों से उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके भरोसे को तोड़ा गया है। उन्होंने साल 1995 की सुपरहिट फिल्म ‘कुली नंबर 1’ का एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने डायरेक्टर डेविड धवन और एक्टर गोविंदा को अपने पैसों से कार गिफ्ट की थी, क्योंकि रमेश तौरानी इसका हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। दरअसल यह पूरा विवाद डेविड धवन के डायरेक्शन और रमेश तौरानी के प्रोडक्शन में बन रही फिल्म के चुनरी चुनरी गाने के बाद शुरू हुआ है। वासू ने रमेश रमेश तौरानी और डेविड धवन पर चुनरी चुनरी गाना चुराने का आरोप लगाया है। फिल्म प्रोड्यूसर वाशू भगनानी। रमेश ने कार गिफ्ट करने से मना किया वाशू भगनानी ने अपने बयान में कहा कि वे हमेशा से यह मानते आए हैं कि फिल्म की कामयाबी का फायदा उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने इसे बनाया है। 1995 में जब ‘कुली नंबर 1’ रिलीज होने वाली थी, तब टिप्स कंपनी इस फिल्म में 50 परसेंट की पार्टनर थी। वाशू भगनानी ने रमेश तौरानी को सुझाव दिया था कि वे दोनों मिलकर फिल्म की सफलता के लिए डेविड धवन और गोविंदा को कार गिफ्ट करें। लेकिन रमेश तौरानी ने इससे साफ मना कर दिया था। इसके बाद वाशू भगनानी ने अपने स्तर पर दोनों को कार गिफ्ट की थी। म्यूजिक कंपनी टिप्स के को फाउंडर रमेश तौरानी। गानों के रीमेक को लेकर चल रहा है विवाद यह पूरा विवाद डेविड धवन के डायरेक्शन और रमेश तौरानी के प्रोडक्शन में बन रही फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के गानों को लेकर शुरू हुआ है। इस फिल्म में वाशू भगनानी की पुरानी फिल्मों के सुपरहिट गानों ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ को रीक्रिएट किया जा रहा है। वाशू भगनानी का कहना है कि उनकी फिल्म ‘कुली नंबर 1’ (2020) के फ्लॉप होने से उन्हें करीब 27 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली। अब उनकी ही फिल्मों के गानों को बिना उनकी सहमति के इस्तेमाल करने को उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की नैतिकता के खिलाफ बताया है। चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए प्रोड्यूसर ने कहा कि एक समय ऐसा आता है जब आपकी चुप्पी को आपकी सहमति मान लिया जाता है। वे किसी विवाद के लिए नहीं बल्कि केवल अपने अनुभव और सच को रिकॉर्ड पर रखने के लिए यह बातें कह रहे हैं। पिछले कुछ सालों में उनके साथ जो चीजें हुईं, उससे उन्हें बहुत निराशा हुई है और ऐसा लगा जैसे उनके भरोसे का गलत फायदा उठाया गया है। उन्होंने साफ किया कि की उनकी इन बातों का किसी कानूनी विवाद या मालिकाना हक की लड़ाई से कोई संबंध नहीं है। डायरेक्टर डेविड धवन के साथ वाशू भगनानी। एक्टर्स और राइटर्स को मिले म्यूजिक रॉयल्टी का हिस्सा वाशू भगनानी ने कहा कि पूजा एंटरटेनमेंट हमेशा से एक परिवार की तरह रहा है। अगर उनके बनाए और प्रोड्यूस किए गए गानों से भविष्य में कोई रॉयल्टी या कमाई होती है, तो उसका एक हिस्सा उन एक्टर्स, डायरेक्टर्स और राइटर्स को मिलना चाहिए जिन्होंने उन गानों को खास बनाया। उन्होंने अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर, करीना कपूर, तब्बू, अनिल कपूर, सैफ अली खान, सुष्मिता सेन और दिवंगत सतीश कौशिक के परिवार का नाम लेते हुए कहा कि कामयाबी सिर्फ बातों में नहीं बल्कि काम में दिखनी चाहिए। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें वासु भगनानी ने डेविड धवन पर किया केस:फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के चुनरी चुनरी गाने पर विवाद; रिलीज रोकने की मांग फिल्म प्रोड्यूसर वासु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने टिप्स इंडस्ट्रीज और फिल्म मेकर डेविड धवन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 400 करोड़ रुपए का केस किया है। यह विवाद वरुण धवन की आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में 1999 की हिट फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के दो गानों के इस्तेमाल को लेकर है। पूरी खबर पढ़ें डेविड धवन पर भड़के वाशु भगनानी:बोले- कुली नंबर 1 से ₹27 करोड़ का घाटा हुआ; नुकसान के बाद वरुण ने हालचाल नहीं पूछा प्रोड्यूसर वाशु भगनानी ने शुक्रवार को फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। फिल्म को डेविड धवन ने डायरेक्ट किया है और रमेश तौरानी के टिप्स बैनर ने इसे प्रोड्यूस किया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
के. अन्नामलाई का राजनीतिक भविष्य: बढ़ती अटकलों के बीच बीजेपी से संभावित अलगाव | साफ़ बोलो

के. अन्नामलाई का राजनीतिक भविष्य: बढ़ती अटकलों के बीच बीजेपी से संभावित अलगाव | सादा बोलो | वरिष्ठ भाजपा नेता के. अन्नामलाई के भविष्य को लेकर अटकलें उन रिपोर्टों, राजनीतिक चर्चाओं और पोस्टरों के बाद तेज हो गई हैं, जिनमें उनसे तमिलनाडु में एक नए आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया गया है। घटनाक्रम ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या अन्नामलाई भाजपा के राज्य अध्यक्ष के रूप में पद छोड़ने के बाद एक स्वतंत्र पाठ्यक्रम शुरू करने या एक गैर-राजनीतिक पहल शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। अनिश्चितता ने पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच गहन चर्चा शुरू कर दी है। अन्नामलाई के अगले कदम, तमिलनाडु में भाजपा की भविष्य की दिशा और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव के बारे में सवाल उठाए जा रहे हैं। हालाँकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन एक महत्वपूर्ण विकास क्या हो सकता है, इसकी प्रत्याशा जारी है। n18oc_politicsn18oc_breaking-newsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 01 जून, 2026, 18:43 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)राष्ट्रीय राजनीति(टी)राजनीतिक विश्लेषण(टी)राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
‘पार्टी में कोई नैतिकता नहीं है’: निष्कासन के बाद ममता की आलोचना करने वाले टीएमसी नेताओं के समूह में शामिल हुए संदीपन साहा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:01 जून, 2026, 18:06 IST विपक्ष के नेता के नाम का प्रस्ताव करने वाले पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के बाद टीएमसी ने रीताब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया। ‘फर्जी हस्ताक्षर’ विवाद के बीच टीएमसी विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। (फोटो: एक्स) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक उथल-पुथल सोमवार को खुलकर सामने आ गई जब पार्टी ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अपने दो विधायकों को निष्कासित कर दिया। विपक्ष के नेता के लिए नाम प्रस्तावित करने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के बाद संकटग्रस्त टीएमसी ने रीताब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया। पार्टी ने विधायकों पर बार-बार बैठकों में शामिल नहीं होने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया. अलग-अलग नोटिस में कहा गया, “यह भी देखा गया है कि आप ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और ऐसे बयान दिए हैं जो एआईटीसी के हितों के लिए हानिकारक हैं।” पार्टी ने कहा कि नोटिस जारी होने की तारीख से दोनों विधायक तृणमूल कांग्रेस से जुड़े किसी भी पद, जिम्मेदारी या विशेषाधिकार को संभालना बंद कर देंगे। इस कदम से टीएमसी के विधायकों की संख्या 80 से घटकर 78 रह जाएगी। ‘पार्टी में कोई नैतिक आचरण नहीं’ टीएमसी के नवीनतम कदम पर हमला करते हुए, एंटली के पूर्व टीएमसी विधायक संदीपन साहा ने कहा कि पार्टी ने कोई नैतिक आचरण नहीं किया, हालांकि उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने से इनकार किया। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “इस पार्टी में, जो कोई भी नैतिकता की बात करता है, उसे पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल माना जाएगा, सिर्फ इसलिए कि पार्टी खुद किसी नैतिक आचरण में शामिल नहीं है।” #देखें | अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) से निकाले जाने पर संदीपन साहा कहते हैं, “इस पार्टी में, जो कोई भी नैतिकता की बात करता है, उसे पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल माना जाएगा, सिर्फ इसलिए कि पार्टी खुद किसी भी नैतिक आचरण में संलग्न नहीं है… अगर, आज, हमारे पास… https://t.co/J0DjaPV00i pic.twitter.com/lf4HWBnZ8w– एएनआई (@ANI) 1 जून, 2026 “अगर, आज, हमें नैतिकता बनाए रखने के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया है, तो हम वास्तव में काफी खुश हैं। नैतिक कार्य करना वास्तव में प्रत्येक विधायक का कर्तव्य है, जो हमने बिल्कुल किया है।” टीएमसी नेता ममता के खिलाफ बोले संदीपन साहा 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व की आलोचना करने वाले नवीनतम नेता हैं। उन्होंने पहले टीएमसी की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि इसे उचित प्रोटोकॉल का पालन किए बिना बुलाया गया था। पार्टी पश्चिम बंगाल में अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है क्योंकि कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ममता और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। काकोली घोष दस्तीदार: टीएमसी सांसद ने कुछ मुद्दों का हवाला देते हुए पार्टी के भीतर सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया, जो लोकतांत्रिक ढांचे के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने महिला श्रमिकों के प्रति “अशोभनीय व्यवहार” का भी आरोप लगाया और I-PAC के बढ़ते प्रभाव की आलोचना की। सुखेंदु शेखर रॉय: वरिष्ठ टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने खुले तौर पर आंतरिक लोकतंत्र के पतन और संस्थागत भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावी असफलताओं का आत्मनिरीक्षण करने में विफलता के कारण टीएमसी विघटन की ओर बढ़ रही है। पार्थ चटर्जी: टीएमसी के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक, चटर्जी ने ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और उन्हें टीएमसी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी “जनता से अलग हो गई है।” रिजु दत्ता: चुनाव के बाद हिंसा को रोकने के लिए भाजपा के प्रयासों की प्रशंसा करने के बाद दत्ता पर कार्रवाई हुई और बाद में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के खिलाफ उनकी पिछली टिप्पणी टीएमसी के दबाव में की गई थी और इससे पार्टी नेतृत्व पर चिंता बढ़ गई थी। अरुणव सेन: हावड़ा से चार बार विधायक रहे सेन ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि अगर वह सीएम होते तो ऐसी हार के तुरंत बाद इस्तीफा दे देते। देव: टीएमसी सांसद और अभिनेता देव ने पार्टी नेतृत्व पर झूठे वादे करने का भी आरोप लगाया, जो पार्टी के भीतर संचार में खराबी का संकेत है। उन्होंने पार्टी पर बाढ़ को कम करने के लिए लंबे समय से विलंबित परियोजना के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया। मनोज तिवारी: बीजेपी की जीत के कुछ दिनों बाद, पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने टीएमसी सरकार को “भ्रष्ट” और “बेदखल किए जाने लायक” कहा। तिवारी ने सरकार बनाने पर भाजपा को बधाई दी और कहा कि टीएमसी के बाहर जाने से उन्हें राहत मिली है। नियामोत शेख: मुर्शिदाबाद से टीएमसी के विधायक ने बताया इंडियन एक्सप्रेस कि नेतृत्व ने पार्टी में गुटबाजी की इजाजत दी, जो अंततः हार का कारण बनी। पस्त टीएमसी के भीतर दरारें तब दिखाई देने लगीं जब उसके तीन-चौथाई से अधिक विधायकों ने ममता बनर्जी के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, डायमंड हार्बर नगरपालिका बोर्ड को रविवार को भंग कर दिया गया क्योंकि नौ विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे पार्टी को एक और झटका लगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘पार्टी में कोई नैतिकता नहीं है’: निष्कासन के बाद ममता की आलोचना करने वाले टीएमसी नेताओं के समूह में शामिल हुए संदीपन साहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ
ICC Approves Pink Ball Tests; Head Coaches Allowed During Drinks Break

Hindi News Sports ICC Approves Pink Ball Tests; Head Coaches Allowed During Drinks Break स्पोर्ट्स डेस्क7 मिनट पहले कॉपी लिंक इंटरनेशनल टेस्ट मैचों में पहली बार 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच डे-नाइट टेस्ट में गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया गया था। टेस्ट क्रिकेट में अब खराब रोशनी की वजह से खेल नहीं रुकेगा। ICC ने पिंक बॉल के इस्तेमाल के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। खराब रोशनी के दौरान, जब लाल गेंद फ्लडलाइट्स में ठीक से दिखाई नहीं देती, तब खेल को जारी रखने के लिए गुलाबी गेंद का उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए दोनों टीमों के कप्तानों की सहमति जरूरी होगी। यह नियम केवल दिन में खेले जाने वाले टेस्ट मैचों और फ्लडलाइट्स वाले मैदानों पर लागू होगा। इसके अलावा, नए नियम के तहत अब हेड कोच वनडे मैचों में ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से बातचीत कर सकेगा। ये फैसले 1 जून को अहमदाबाद में हुई ICC बोर्ड बैठक में लिए गए। टेस्ट मैचों में बैड लाइट की वजह से कई बार दिन में 90 ओवर का खेल नहीं हो पाता है हॉक-आई का इस्तेमाल भी किया जाएगा बोर्ड ने अंपायर को अवैध गेंदबाजी एक्शन की रिपोर्ट पर विचार करते समय हॉक-आई डेटा देखने की अनुमति भी दी है। साथ ही, खराब रोशनी के कारण खेल रुकने की समस्या कम करने के लिए ICC और मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब (MCC) मिलकर नई लाइटिंग तकनीक पर रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को फंड करेंगे। क्या होता है हॉक-आई हॉक-आई एक कैमरा-आधारित ट्रैकिंग तकनीक है, जो कई हाई-स्पीड कैमरों की मदद से गेंद की गति और उसके रास्ते का 3D मॉडल तैयार करती है। क्रिकेट में इसका सबसे ज्यादा उपयोग DRS के तहत LBW फैसलों में होता है, जहां यह अनुमान लगाया जाता है कि बल्लेबाज के पैड से टकराने के बाद गेंद स्टंप्स को लगती या नहीं। इससे अंपायरों को अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान के स्पिनर उस्मान तारिक के बॉलिंग एक्शन पर काफी चर्चा हुई थी। सभी नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे ICC ने खेल की शर्तों में कई बदलाव भी मंजूर किए हैं। अब हेड कोच ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान टीम से बात कर सकेंगे। टी-20 इंटरनेशनल में मैचों में 15 मिनट का इंटरवेल अनिवार्य होगा और खेल दोबारा शुरू होने पर बल्लेबाजों को तैयार रहना होगा। लेगसाइड वाइड्स ट्रायल को भी अपनाया गया है। MCC के बाकी सभी लॉ बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। वनडे में अभी सिर्फ सब्सिट्यूट खिलाड़ी ही ड्रिंक्स ब्रेक्स के दौरान मैदान पर जा पाते हैं। महिला क्रिकेट के लिए नए टूर्नामेंट और क्वालिफिकेशन सिस्टम ICC महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की विंडो बदल दी गई है। यह टूर्नामेंट अब जून-जुलाई की जगह 14 से 28 फरवरी 2027 के बीच खेला जाएगा। ICC ने महिला इमर्जिंग नेशंस ट्रॉफी 2026 को शुरू करने की मंजूरी दी है। इसमें 10 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें पांच फुल मेंबर और पांच एसोसिएट मेंबर देश होंगे। टीमों का चयन रैंकिंग और पिछले टी-20 वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन के आधार पर होगा। विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप 2028 के क्वालिफिकेशन सिस्टम को भी मंजूरी मिल गई है। यह टूर्नामेंट पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में होगा, जबकि भारत के मैच न्यूट्रल वेन्यू पर खेले जाएंगे। 12 टीमों के इस टूर्नामेंट में 10 टीमों को सीधे एंट्री मिलेगी। इनमें महिला टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की टॉप-8 टीमें, मेजबान और 6 जुलाई 2026 की रैंकिंग के आधार पर अगली टीमें शामिल होंगी। बाकी दो स्थान 10 टीमों वाले ग्लोबल क्वालिफायर से तय होंगे। बांग्लादेश, श्रीलंका और फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर चर्चा बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के चुनावी प्रक्रिया समेत वहां की स्थिति पर चर्चा के लिए क्रिकेट साउथ अफ्रीका के डॉ. मोहम्मद मूसाजे और जिम्बाब्वे क्रिकेट के तावेंगा मुकुहलानी बांग्लादेश जाएंगे और विभिन्न पक्षों से बात करेंगे। वहीं, बोर्ड ने दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीगों पर चिंता जताई है। ICC ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर और फ्रेंचाइजी टूर्नामेंटों के बीच संतुलन बनाने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। यह समिति मौजूदा ढांचे के भीतर तालमेल की संभावनाओं का आकलन करेगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…






