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वर्ल्ड अपडेट्स:हांगकांग में 5 बुकसेलर्स गिरफ्तार: सरकार विरोधी 'देशद्रोही' किताबें बेचने का आरोप

वर्ल्ड अपडेट्स:हांगकांग में 5 बुकसेलर्स गिरफ्तार: सरकार विरोधी 'देशद्रोही' किताबें बेचने का आरोप

हांगकांग में सरकार विरोधी ‘देशद्रोही’ सामग्री वाली किताबें बेचने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा पुलिस ने पांच बुकसेलर्स को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पुलिस ने दो बुकस्टोर्स पर छापेमारी कर बड़ी संख्या में किताबें जब्त की हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन पुस्तकों में हांगकांग सरकार, न्यायपालिका और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के खिलाफ नफरत भड़काने वाली सामग्री थी। सरकार के मुताबिक, कस्टम विभाग ने विदेश से आई कथित देशद्रोही किताबों की एक खेप पकड़ी थी। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा पुलिस ने जांच शुरू की और दो बुकस्टोर्स में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 37 और 57 साल के दो पुरुष तथा 30 से 59 साल की तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि दुकानों में ऐसी किताबें प्रदर्शित और बेची जा रही थीं, जिनका उद्देश्य सरकार और सरकारी संस्थानों के खिलाफ लोगों को उकसाना था। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में कथित देशद्रोही सामग्री वाली किताबें भी जब्त की गईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कार्रवाई ‘हैव अ नाइस स्टे’ और ‘ग्रीनफील्ड बुकस्टोर’ में हुई। इनमें से ‘हैव अ नाइस स्टे’ ने हाल ही में 30 अगस्त से दुकान बंद करने की घोषणा की थी। संचालकों ने वित्तीय नुकसान और यह स्पष्ट न होने को भी वजह बताया था कि किन किताबों को अधिकारियों की नजर में आपत्तिजनक माना जा सकता है। इससे पहले जून में भी पुलिस ने एक अलग मामले में दो बुकस्टोर मालिकों को कथित देशद्रोही सामग्री वाली किताबें बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कांगो के जंगल में मिली नई बंदर प्रजाति: 75 साल में अफ्रीका की पांचवीं खोज
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के लोमामी नेशनल पार्क में रहने वाले काले फर और गुलाबी-नारंगी होंठ वाले दुर्लभ बंदर को वैज्ञानिकों ने नई प्रजाति के रूप में मान्यता दी है। आनुवंशिक अध्ययन, ऑडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी के आधार पर इसकी पुष्टि की गई। नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम कोलोबस कांगोएन्सिस (Colobus congoensis) रखा गया है। इस बंदर को पहली बार 2008 में संरक्षणकर्मियों ने देखा था, लेकिन उस समय केवल धुंधली तस्वीर ही मिल सकी। 2018 में दोबारा दिखने के बाद DRC, अमेरिका और जर्मनी के वैज्ञानिकों की टीम ने इसका विस्तृत अध्ययन शुरू किया। डीएनए विश्लेषण और अन्य वैज्ञानिक जांच में यह पहले से ज्ञात सभी प्रजातियों से अलग पाया गया। स्थानीय लोग इसे ‘लिक्वेली’ नाम से जानते हैं। 52 गांवों में किए गए सर्वे के दौरान केवल आठ गांवों के लोगों ने इसे देखने की पुष्टि की। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले 75 वर्षों में अफ्रीका में खोजी गई यह पांचवीं नई बंदर प्रजाति है। यह कोलोबस समूह का सदस्य है, जिनमें अंगूठा नहीं होता और जो जंगलों में बीजों के प्रसार तथा वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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