8 days away; how much has the game changed since 2022?

Hindi News Sports FIFA 2022: 8 Days Away; How Much Has The Game Changed Since 2022? न्यूयॉर्क14 मिनट पहले कॉपी लिंक 2022 वर्ल्ड कप के बाद मेसी यूरोप छोड़कर अमेरिका चले गए। अब अर्जेंटीना की कप्तानी करेंगे।- फाइल फोटो साल 2022 में कतर की धरती पर लियोनेल मेसी का चमचमाती वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाना हर फुटबॉल प्रेमी के जहन में अब भी ताजा है। लेकिन उस ऐतिहासिक पल के बाद से अब तक फुटबॉल की दुनिया में बहुत कुछ बदल चुका है। कई बड़े खिलाड़ियों के क्लब बदले, नए सूरमाओं का उदय हुआ और दिग्गजों ने नए कीर्तिमान रचे। अब जब 11 जून 2026 से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है, तो कई फैंस 4 साल बाद फिर से इस रोमांच में गोता लगाने लौटेंगे। आइए जानते हैं इन चार सालों में फुटबॉल की दुनिया में क्या कुछ बदला मेसी की तरह ही यमाल भी डेब्यू वर्ल्ड कप में स्पेन के लिए 19 नंबर जर्सी पहनेंगे।- फाइल फोटो मेसी – अमेरिका पहुंचे, जीते कई खिताब 2022 वर्ल्ड कप के बाद मेसी यूरोप छोड़कर अमेरिका चले गए। लगा था कि शायद वे धीमे पड़ रहे हैं। लेकिन तब से वे इंटर मियामी के लिए 104 मैचों में 90 गोल कर चुके हैं। उन्होंने क्लब को तीन बड़े खिताब; लीग कप (2023), सपोर्टर शील्ड (2024) और एमएलस कप (2025) जिताए हैं। अब अर्जेंटीना की कप्तानी करेंगे। यमाल – मेसी के उत्तराधिकारी माने जा रहे मेसी यूरोप छोड़कर गए तो बार्सिलोना में एक नए सितारे का उदय हुआ। अप्रैल 2023 में 15 साल के लामिने यमाल ने डेब्यू किया। अब 18 साल की उम्र तक वे तीन ला लीगा और यूरो कप जीत चुके हैं। उन्हें वर्ल्ड फुटबॉल मेसी का उत्तराधिकारी मान रहा है। मेसी की तरह ही यमाल भी डेब्यू वर्ल्ड कप में स्पेन के लिए 19 नंबर जर्सी पहनेंगे। रोनाल्डो – 1000 गोल के आंकड़े के करीब दिसंबर 2022 में वर्ल्ड कप खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही रोनाल्डो सऊदी के क्लब अल-नासर में शामिल हो गए। अब 41 की उम्र में वे पुर्तगाल के लिए छठा वर्ल्ड कप खेलेंगे। बीते चार साल में वे अपने क्लब को सिर्फ इसी सीजन सऊदी लीग खिताब जिता पाए। हालांकि, 973 गोल के साथ हजार के जादुई आंकड़े के करीब हैं। नेमार – क्लब, इंटरनेशनल में सिर्फ 63 मैच एक ओर जहां मेसी-रोनाल्डो गोल की बारिश कर रहे थे, वहीं ब्राजील के सुपर स्टार नेमार चोटों से जूझते दिखे। वर्ल्ड कप 2022 के बाद उन्होंने क्लब और इंटरनेशनल मिलाकर सिर्फ 63 मैच खेले हैं। अब भी वे पिंडली की चोट से उबर रहे हैं, लेकिन उन्हें ब्राजील की 26-सदस्यीय टीम में चुना गया है। हैरी केन – बेस्ट फॉर्म से खिताब पर नजर बीते चार सालों में इंग्लैंड के हैरी केन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर बनकर उभरे हैं। 2023 के बाद से वे 140 गोल दाग चुके हैं। हैरी केन 2023 की गर्मियों में बायर्न म्यूनिख चले गए। वहां उन्होंने 146 गोल दागे हैं, जिनमें से 58 सिर्फ 2025-26 में आए हैं। 60 साल से कोई बड़ा इंटरनेशनल खिताब नहीं जीती इंग्लिश टीम उन पर काफी निर्भर करेगी। इंटरनेशनल टीमों का क्लब कोचों पर भरोसा 2026 के वर्ल्ड कप से पहले कई बड़ी इंटरनेशनल टीमों ने सफल क्लबों के कोचों को टीम से जोड़ा है। ब्राजील की टीम 2002 के बाद पहला वर्ल्ड कप जीतने के लिए कार्लो एंसेलोटी के नेतृत्व में उतरेगी, जबकि इंग्लैंड के पास थॉमस टुचेल और जर्मनी के पास जूलियन नागेल्समान जैसे नाम हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया:सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा

मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। एटीएफ की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने के लिए यह फैसले लिए गए हैं। बुधवार (3 जून) को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में इस फंड को मंजूरी दी गई है। यह फंड ATF की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करेगा। इस फंड का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के हवाई ऑपरेशन्स के लिए किया जाएगा। मार्च से मई के बीच 2.5 गुना बढ़े दाम, ₹75.6 पर कैपिंग सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ATF की कीमत जो 60.5 रुपए प्रति लीटर थी, वह मई 2026 में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 142 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत को 75.6 रुपए प्रति लीटर पर कैप (अधिकतम सीमा तय) कर दिया है। एयरलाइंस कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग खर्च में अकेले ATF की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है। ऐसे में कीमतों में आए इस तेज उछाल ने एयरलाइंस और तेल कंपनियों दोनों पर बड़ा आर्थिक दबाव बना दिया था। नए फंड से होने वाले 6 बड़े फायदे सरकार ने बताया है कि ₹10,000 करोड़ के इस नए फंड की मदद से एविएशन सेक्टर को यह 6 बड़े फायदे मिलेंगे… ओएमसी को ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में मिलेगी बजटीय सहायता केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने शेड्यूल्ड इंडियन एयरलाइंस को उनके घरेलू और इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट देने का फैसला किया है। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अधिकतम ₹10,000 करोड़ तक की वन-टाइम बजटीय सहायता मंजूर की गई है। यह बजटीय सहायता ओएमसी को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर सरकार वापस लेगी पैसा सरकार की यह सहायता पूरी तरह अस्थायी है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें कम (मॉडरेट) हो जाएंगी, तब ओएमसी से अंतर की राशि (डिफरेंशियल अमाउंट) वापस वसूल ली जाएगी। इस वसूली गई रकम को भारत के कंसोलिडेटेड फंड में वापस जमा किया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि पूरी सहायता राशि को पूरी तरह से रिकवर और सेटल नहीं कर लिया जाता। ओएमसी और एयरलाइंस के बीच MoU होगा यह स्कीम उन सभी शेड्यूल्ड इंडियन कैरियर्स (एयरलाइंस) के लिए उपलब्ध होगी जो इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं। यह लाभ घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के ऑपरेशंस पर मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए भाग लेने वाली भारतीय एयरलाइंस और ओएमसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस MoU में हस्ताक्षरकर्ता होंगे। 3 साल तक सिर्फ ओएमसी से ही एटीएफ खरीद सकेंगी एयरलाइंस इस वन-टाइम अरेंजमेंट के तहत, योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस अधिकतम तीन साल की अवधि तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ की खरीद करेंगी। हालांकि, यह व्यवस्था वार्षिक समीक्षा (एनुअल रिव्यू) के अधीन होगी। यदि सरकार द्वारा दिया गया एडवांस अमाउंट तीन साल से पहले ही पूरी तरह रिकवर हो जाता है, तो यह व्यवस्था उसी समय समाप्त हो जाएगी। क्या होता है प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF)? प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड यानी मूल्य स्थिरता कोष सरकार द्वारा बनाया गया एक विशेष फंड होता है, जिसका उद्देश्य किसी जरूरी वस्तु (जैसे इस मामले में हवाई ईंधन) की कीमतों में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो इस फंड के पैसों का इस्तेमाल कंपनियों और आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है। चूंकि यह एक ‘रिवॉल्विंग फंड’ है, इसलिए यह स्थिति सामान्य होने पर वापस खुद को री-फंड या री-जेनरेट कर लेता है। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है: अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ें यह QA रिपोर्ट… पूरी खबर पढ़ें…
Kangana Ranaut Recalls 2611 Attack Night

10 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस कंगना रनोट ने अपनी अपकमिंग फिल्म भारत भाग्य विधाता के ट्रेलर लॉन्च के दौरान 26/11 मुंबई आतंकी हमले की रात का अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि उस रात वह मुंबई में एक हाउस पार्टी में थीं और वहीं उन्हें हमले की जानकारी मिली। शहाना गोस्वामी के घर मौजूद थीं कंगना फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर कंगना ने बताया था कि 26/11 हमले के समय वह एक्ट्रेस शहाना गोस्वामी के घर एक पार्टी में मौजूद थीं। उस दौरान उनके साथ कई अन्य लोग भी थे। कंगना ने कहा कि वह महेश भट्ट के साथ काम कर रही थीं और विशेष फिल्म्स में स्ट्रगलर थीं। शहाना गोस्वामी ने यारी रोड स्थित अपने घर पर पार्टी रखी थी। कंगना की पहली फिल्म ‘गैंगस्टर’ का निर्माण महेश भट्ट की कंपनी ‘विशेष फिल्म्स’ ने किया था। महेश भट्ट ने बाहर जाने से रोका कंगना के मुताबिक, पार्टी के दौरान महेश भट्ट अंदर आए और टीवी चलाने को कहा। उस दौरान कंगना और अन्य लोग डांस कर रहे थे। फिर भट्ट ने बताया कि आतंकी हमला हुआ है। उसी दौरान वहां मौजूद लोगों को हमले की जानकारी मिली। कंगना ने बताया कि बाद में उन्होंने चर्चा की कि सभी को घर जाना चाहिए या नहीं। महेश भट्ट ने सभी को वहीं रुकने और बाहर न निकलने की सलाह दी। इसके बाद करीब 20-25 लोग शहाना गोस्वामी के घर पर ही रुके रहे। 26/11 मुंबई आतंकी हमला मुंबई में 26 नवंबर 2008 को आतंकी हमला हुआ था, जिसे 26/11 के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई के कई स्थानों को निशाना बनाया था, जिनमें रेलवे स्टेशन और होटल शामिल थे। करीब 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। यह हमला भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में गिना जाता है। गौरतलब है कि कंगना की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान बहादुरी दिखाने वाले कामा अस्पताल के नर्सों और वॉर्ड बॉयज की कहानी पर आधारित है। फिल्म में कंगना ने एक नर्स का किरदार निभाया है। फिल्म भारत भाग्य विधाता का डायरेक्शन मनोज तापड़िया ने किया है। इस फिल्म में कंगना रनोट के अलावा गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, अमृता नामदेव, ईशा डे, प्रिया बेर्डे और आशा शेलार भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कंगना से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कंगना रनोट की पहली फिल्म देख पैरेंट्स हुए नाराज:गैंगस्टर को लेकर कहा था- समाज क्या सोचेगा, उनकी बेटी कैसी फिल्में कर रही है बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनोट ने अपनी डेब्यू फिल्म गैंगस्टर को लेकर बताया कि यह फिल्म देखने के बाद उनके माता-पिता खुश नहीं थे और फिल्म के कुछ सीन्स को लेकर चिंतित थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
आरएएस-2026 में 607 पदों पर भर्ती, आवेदन कल से:3 जुलाई लास्ट डेट; जानिए-एपीपी के 371 पद व अन्य भर्ती में कब से कर सकेंगे अप्लाई

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से निकाली गई राजस्थान राज्य और अधीनस्थ सेवाएं (RAS) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2026 के 607 पदों के लिए आवेदन कल (4 जून) से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा 29 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इस भर्ती में राज्य सेवा के 192 पद और अधीनस्थ सेवा के 415 पद शामिल हैं। 1 जनवरी 2027 को अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए। अभ्यर्थियों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि मुख्य परीक्षा में वर्णनात्मक प्रश्न होंगे। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। राज्य सेवाएं (192 पद) अधीनस्थ सेवाएं (415 पद) सहायक अभियोजन-अधिकारी, पद 371, आवेदन 8 जून से शुरू होंगे राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) सहायक अभियोजन अधिकारी (गृह विभाग-अभियोजन) के 371 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 8 जून से आमंत्रित कर रहा है। आवेदन 7 जुलाई तक किए जा सकेंगे। इस भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 2 सितंबर को आयोजित की जाएगी। 1 जनवरी 2027 को न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। आयोग ने इन पदों को 2024 में विज्ञापित किया था, जिसके बाद आयु की गणना 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर की गई थी। चूंकि इन पदों के लिए कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया गया है, इसलिए अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में एक वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। अभ्यर्थियों का चयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होगा, जो दो चरणों में आयोजित की जाएगी: प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा। 11 जून से कर सकेंगे आवेदन, 3 डिवीजन में भर्ती राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के कुल 3 पदों पर भर्ती होगी। इसमें टॉक्सिकोलॉजी, फिजिक्स और बैलिस्टिक्स डिवीजन में 1-1 पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन 11 जून से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 रात 12 बजे तक कर सकेंगे। खास बात ये है कि अगर कोई अभ्यर्थी एक से ज्यादा डिवीजन के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे हर पद के लिए अलग-अलग फॉर्म भरना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। परीक्षा तिथि बाद में घोषित होगी। शैक्षणिक योग्यता व वर्गवार जानकारी आयोग की वेबसाइट http://rpsc.rajasthan.gov.in पर देखी जा सकती है। लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती प्रोसेस जारी राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन सोमवार से शुरू कर दिए हैं। कैंडिडेट्स 30 जून 2026 की रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कैंडिडेट की उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे। कैंडिडेट का सिलेक्शन एग्जाम के माध्यम से होगा। परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में अलग से जारी की जाएगी। (अधिक जानकारी के लिए करें क्लिक) पढें ये खबर भी….
फीफा में दम दिखाएंगे भारतवंशी तहसीन:कतर की ओर से खेलेंगे मलयाली तहसीन मोहम्मद; फीफा के इतिहास में दूसरे भारतीय प्लेयर

इस फीफा विश्व कप में भारत के लिए गर्व का क्षण आने वाला है। इतिहास में दूसरी बार ऐसा होने जा रहा है, जब भारतीय मूल का कोई खिलाड़ी विश्व कप के मैदान पर फुटबॉल खेलता नजर आएगा। यह इतिहास दोहराने जा रहे हैं 19 वर्षीय भारतवंशी तहसीन मोहम्मद जमशेद, जो कतर की ओर से मैदान पर उतरेंगे। इससे पहले 2006 के वर्ल्ड कप में आंध्र प्रदेश मूल के विकास धोरासू ने फ्रांस की टीम से खेलकर यह उपलब्धि हासिल की थी। तहसीन को फुटबॉल से लगाव कैसे हुआ और वे संघर्ष करते हुए शीर्ष तक कैसे पहुंचे, पढ़िए… तहसीन की फुटबॉल के प्रति दीवानगी कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि यह उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता जमशेद केरल की कालीकट यूनिवर्सिटी के बेहतरीन फुटबॉलर थे, वे बड़े स्तर पर देश के लिए खेलना चाहते थे। लेकिन आर्थिक परिस्थितियों और भविष्य की चिंताओं के कारण उन्हें कतर में साधारण अकाउंटेंट की नौकरी करनी पड़ी। 2006 में कतर में तहसीन का जन्म हुआ तो पिता ने अपने अधूरे सपने को बेटे की आंखों में देखा। पढ़ाई के सख्त माहौल के बीच खेल के लिए समय निकालना बेहद मुश्किल था। पर, तहसीन ने ठान लिया था। जब बाकी बच्चे स्कूल की छुट्टियों में आराम करते थे, तब तहसीन अल सुबह ही ग्राउंड पर पहुंच जाते थे। वे चिलचिलाती धूप में भी दिनभर प्रैक्टिस करते थे। रात को पढ़ने बैठते थे। पिता द्वारा सिखाई गई फुटबॉल की बारीकियां और कड़े अनुशासन की बदौलत वे सबसे अलग बन पाए। दुनिया की सबसे आधुनिक व कठिन अकादमियों में शामिल कतर की एस्पायर फुटबॉल अकादमी में चुनिंदा खिलाड़ियों को ही एंट्री मिलती है। भारतीय मूल के लड़के के लिए स्थानीयव अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के बीच जगह बनाना संघर्ष था। शुरुआती दिनों में भाषा, संस्कृति और कठोर फिजिकल टेस्ट तहसीन के लिए चुनौती बने। कई साथी खिलाड़ियों का मनोबल टूट गया, पर तहसीन ने अपनी रफ्तार व ड्रिबलिंग को इतना निखारा कि स्पेनिश कोच जुलेन लोपेटेगुई भी प्रतिभा के कायल हो गए। उन्होंने कतर के दिग्गज खिलाड़ी सेबेस्टियन सोरिया को ड्रॉप कर तहसीन पर भरोसा जताया। यही तहसीन के संघर्ष की सबसे बड़ी जीत थी। तहसीन ने सीनियर कॅरियर की शुरुआत कतर स्टार्स लीग में अल दुहैल क्लब से की। वे कतर की अंडर-16 व अंडर-17 टीमों का हिस्सा भी रहे। अल दुहैल के लिए उनके प्रदर्शन ने कॅरियर को ऊंचाई दी और 19 साल में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पेशेवर खिलाड़ी बन गए। स्पेनिश फुटबॉल विश्लेषक और पूर्व प्लेयर अल्फोंसो पेरेज कहते हैं, तहसीन को मैदान पर देखना विजुअल ट्रीट है। लेफ्ट-विंगर के तौर पर उनके पास जो ‘रॉ-पेस’ (अंधाधुंध रफ्तार) है, वह उन्हें खतरनाक बनाती है। वे इसी तरह सीखते रहे, तो जल्द हम उन्हें बड़े यूरोपीय क्लब की जर्सी में देखेंगे।’ इन तीन फुटबॉलर्स का भी इंडिया कनेक्शन सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड), निशान वेलुपिल्ले (ऑस्ट्रेलिया) और सैमुअल मुतुसामी (डीआर कांगो) भी वर्ल्ड कप में खेल सकते हैं। सरप्रीत पंजाब मूल के और बाकी दोनों का जुड़ाव तमिलनाडु से है।
शॉर्ट्स और बनियान में मंदिर पहुंचे वरुण धवन:पहनावे पर उठे सवाल; फैंस बोले- भगवान के घर तो ढंग के कपड़े पहनते

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन मुंबई के एक मंदिर में शॉर्ट्स और सैंडो बनियान पहने नजर आए। वरुण अपनी आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ की रिलीज से पहले मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। लेकिन अब वे अपने इस पहनावे की वजह से शल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उनके माथे पर तिलक लगा था और उन्होंने पैपराजी को देखकर मुस्कुराते हुए पोज भी दिए। हालांकि, उनका यह पहनावा कई लोगों को पसंद नहीं आया और लोगों ने मंदिर की मर्यादा का ध्यान रखने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने वरुण के लुक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा, “कम से कम मंदिर के लिए तो ढंग के कपड़े पहन लेते।” दूसरे यूजर ने कमेंट किया, “प्रभु शर्ट तो पहन लेते, कुछ तो ढंग का पहन लेते, तुम मंदिर आए हो। सिर्फ बताने के लिए जबरदस्ती क्यों आते हो यार।” वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि इस तरह कपड़े पहनकर मंदिर कौन जाता है। 5 जून को रिलीज हो रही है नई फिल्म वरुण धवन इन दिनों अपनी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के प्रमोशन में बिजी हैं। यह फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसका निर्देशन उनके पिता डेविड धवन ने किया है। फिल्म में वरुण के साथ पूजा हेगड़े, मृणाल ठाकुर और मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म को एक फैमिली एंटरटेनर के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें डेविड धवन का पुराना कॉमेडी स्टाइल देखने को मिलेगा। फिल्म रिलीज से पहले कानूनी विवाद में फंसी रिलीज से ठीक पहले यह फिल्म एक कानूनी विवाद में भी घिर गई है। प्रोड्यूसर वाशु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रमेश तौरानी, कुमार एस तौरानी और डायरेक्टर डेविड धवन के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। विवाद 1999 की फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के मशहूर गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल को लेकर है। आरोप है कि इस गाने को बिना इजाजत नई फिल्म में इस्तेमाल किया गया है।
पीएम मोदी के दबाव के बाद गडकरी से लेकर नड्डा और रिजिजू तक, मंत्री कैबिनेट मीटिंग के लिए कार में बैठे | भारत समाचार

आखरी अपडेट:03 जून, 2026, 14:44 IST इस प्रयास का उद्देश्य “आप जो उपदेश देते हैं उसका अभ्यास करें” के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है, सार्वजनिक पद पर बैठे लोग नागरिकों के लिए एक उदाहरण स्थापित कर रहे हैं। (बाएं से) केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और प्रह्लाद जोशी एक साथ यात्रा करते हैं; और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सीआर पाटिल और जी किशन रेड्डी ने कारपूल की। कारपूलिंग बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक की परिभाषित विशेषता के रूप में उभरी, क्योंकि कई वरिष्ठ मंत्री सेवा तीर्थ में बैठक के लिए एक साथ पहुंचे, जो स्थायी और जिम्मेदार सार्वजनिक आचरण के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया प्रयास को दर्शाता है। राष्ट्रीय राजधानी में एक असामान्य दृश्य में, कई केंद्रीय मंत्रियों ने अलग-अलग वाहनों के काफिले को छोड़कर अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर तक यात्रा करने का फैसला किया। सवारी साझा करने वालों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जेपी नड्डा भी शामिल थे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एनडीए सहयोगियों राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ यात्रा की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और गजेंद्र सिंह शेखावत, जो एक-दूसरे के करीब रहते हैं, भी कैबिनेट बैठक में एक साथ गए। इसी तरह, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साथी कैबिनेट सहयोगी मनसुख मंडाविया के साथ एक सवारी साझा की। यह कदम पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान पीएम मोदी द्वारा दिए गए सुझाव के बाद उठाया गया है, जहां समझा जाता है कि उन्होंने मंत्रियों को एक ही गंतव्य की यात्रा करते समय कारपूलिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। “आपमें से कितने लोग इस समय कारपूलिंग कर रहे हैं?” बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने ईंधन की खपत कम करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अपने कैबिनेट सहयोगियों से कहा है। इस पहल को स्थिरता और उदाहरण के तौर पर आगे बढ़ने पर सरकार के व्यापक जोर के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद, कई केंद्रीय मंत्रियों ने कथित तौर पर आधिकारिक आंदोलनों के दौरान अपने साथ जाने वाले वाहनों की संख्या कम कर दी है। यह संदेश केंद्र के बाहर भी गूंजा है। बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसी तरह अपने आधिकारिक सहयोगियों को कम करने की मांग की है। कुछ मामलों में, मंत्रियों और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने नियमित यात्रा के लिए दिल्ली मेट्रो सहित सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुना है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस प्रयास का उद्देश्य “आप जो उपदेश देते हैं उसका अभ्यास करें” के सिद्धांत को मजबूत करना है, सार्वजनिक पद पर बैठे लोग यात्रा के अधिक कुशल और पर्यावरण के प्रति जागरूक तरीकों के माध्यम से नागरिकों के लिए एक उदाहरण स्थापित कर रहे हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया पीएम मोदी के दबाव के बाद गडकरी से लेकर नड्डा और रिजिजू तक, मंत्री कारपूल से कैबिनेट मीटिंग तक पहुंचे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भारतीय मंत्रियों द्वारा कारपूलिंग(टी)मोदी स्थिरता धक्का(टी)केंद्रीय मंत्रिमंडल कारपूलिंग(टी)भारतीय मंत्रियों ने साझा सवारी(टी)ईंधन की खपत कम करें(टी)सरकारी स्थिरता पहल(टी)आप जो उपदेश देते हैं उसका अभ्यास करें(टी)आधिकारिक काफिलों में कमी
जैकलीन ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट पहुंचीं:खुद को बेकसूर बताया; सुकेश के ठगी के पैसों से महंगे गिफ्ट लेने के आरोप

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया और उन्हें खारिज कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही खत्म होते ही जैकलीन सीधे परिसर से बाहर निकलकर रवाना हो गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर के साथ जैकलीन की भूमिका और पैसों के लेन-देन की जांच कर रहा है। कोर्ट में आरोपों को किया खारिज जैकलीन फर्नांडिस बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट पहुंची थीं। कोर्ट में उनके खिलाफ तय किए जा रहे आरोपों को लेकर बहस हुई। जैकलीन ने जज के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन पर लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने किसी भी तरह के गलत लेन-देन में शामिल होने से साफ इनकार किया है। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए जैकलीन के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जहां वे मीडिया से बिना बात किए अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गईं। क्या है 200 करोड़ का यह मामला यह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल के अंदर से ही फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। जांच एजेंसी ED का दावा है कि सुकेश ने इसी वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया था। सुकेश ने जैकलीन को लुभाने के लिए करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए थे। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी हैं जैकलीन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के बाद दाखिल की गई अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। ED का कहना है कि जैकलीन को सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड और जबरन वसूली के पैसों के बारे में पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने उससे महंगे तोहफे लेना जारी रखा। इन गिफ्ट्स में लग्जरी गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, ज्वेलरी और कई कीमती पेट्स (पालतू जानवर) शामिल थे। लीगल टीम की दलील- जैकलीन खुद पीड़ित हैं दूसरी तरफ, जैकलीन फर्नांडिस की लीगल टीम लगातार कोर्ट में यह दलील दे रही है कि एक्ट्रेस इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके वकीलों का कहना है कि जैकलीन खुद सुकेश चंद्रशेखर की साजिश का शिकार हुई हैं और उन्होंने सुकेश को एक बिजनेसमैन समझकर उससे दोस्ती की थी। जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। फिलहाल इस मामले में कोर्ट यह तय कर रहा है कि आरोपों के आधार पर केस को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
जैकलीन ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट पहुंचीं:खुद को बेकसूर बताया; सुकेश के ठगी के पैसों से महंगे गिफ्ट लेने के आरोप

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया और उन्हें खारिज कर दिया। कोर्ट की कार्यवाही खत्म होते ही जैकलीन सीधे परिसर से बाहर निकलकर रवाना हो गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर के साथ जैकलीन की भूमिका और पैसों के लेन-देन की जांच कर रहा है। कोर्ट में आरोपों को किया खारिज जैकलीन फर्नांडिस बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट पहुंची थीं। कोर्ट में उनके खिलाफ तय किए जा रहे आरोपों को लेकर बहस हुई। जैकलीन ने जज के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन पर लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने किसी भी तरह के गलत लेन-देन में शामिल होने से साफ इनकार किया है। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए जैकलीन के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जहां वे मीडिया से बिना बात किए अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गईं। क्या है 200 करोड़ का यह मामला यह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल के अंदर से ही फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। जांच एजेंसी ED का दावा है कि सुकेश ने इसी वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया था। सुकेश ने जैकलीन को लुभाने के लिए करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए थे। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी हैं जैकलीन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के बाद दाखिल की गई अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। ED का कहना है कि जैकलीन को सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड और जबरन वसूली के पैसों के बारे में पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने उससे महंगे तोहफे लेना जारी रखा। इन गिफ्ट्स में लग्जरी गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, ज्वेलरी और कई कीमती पेट्स (पालतू जानवर) शामिल थे। लीगल टीम की दलील- जैकलीन खुद पीड़ित हैं दूसरी तरफ, जैकलीन फर्नांडिस की लीगल टीम लगातार कोर्ट में यह दलील दे रही है कि एक्ट्रेस इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके वकीलों का कहना है कि जैकलीन खुद सुकेश चंद्रशेखर की साजिश का शिकार हुई हैं और उन्होंने सुकेश को एक बिजनेसमैन समझकर उससे दोस्ती की थी। जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। फिलहाल इस मामले में कोर्ट यह तय कर रहा है कि आरोपों के आधार पर केस को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
Irans Khamenei Funeral Mashhad | 20 Million Expected

तेहरान8 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के लगभग चार महीने बाद उन्हें दफनाया जाएगा। खामेनेई को उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक मशहद शहर में शिया इस्लाम के चर्चित इमाम रजा के पवित्र दरगाह परिसर के पास दफनाया जाएगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक खामेनेई को 21 जून के आसपास आखिरी विदाई दी जा सकती है। 28 फरवरी को तेहरान में उनके आवास पर हुए अमेरिका-इजराइल के हमले में उनकी मौत हो गई थी। उनका राजकीय अंतिम संस्कार पहले 4 मार्च को होने वाला था, लेकिन युद्ध की वजह से इसे टाल दिया गया था। अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। लोगों को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे तीन दिन निर्धारित किए गए हैं। ईरान के तेहरान में, पूर्व सुप्रीम लीड अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास उनकी कुर्सी और एक तस्वीर प्रदर्शित की गई है। मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा के दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। तेहरान नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि दफन से पहले खामेनेई के पार्थिव शरीर को कुम और मशहद की सड़कों पर अंतिम यात्रा के रूप में ले जाया जाएगा। यह जानकारी IRGC के एक बयान में दी गई। खोमैनी के जनाजे में 1 करोड़ लोग जुटे थे अगर खामेनेई के जनाजे में वास्तव में 2 करोड़ लोग पहुंचते हैं, तो यह इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के 1989 वाले रिकॉर्ड से कहीं बड़ा आयोजन होगा। 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ (10 मिलियन) लोग शामिल हुए थे। यह उस समय ईरान की कुल आबादी का लगभग छठा हिस्सा था। इस कार्यक्रम को आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है। इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी कि भगदड़ मच गई थी, जिसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इस बार अधिकारी इससे भी बड़ी भीड़ को संभालने और किसी हादसे से बचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतना बड़ा आयोजन कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









